Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 February 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 27 February 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Ravidas

संदर्भ

संत रविदास (रैदास) जयंती हर वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर संत रविदास (रैदास) जयंती मनाई जाती है. अत: इस वर्ष संत रविदास जयंती 27 फरवरी को मनाई जाएगी.

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संत रैदास के बारे में

  • गुरू रविदास (रैदास) का जन्म काशी (बनारस) में माघ पूर्णिमा के दिन संवत 1433 में हुआ था.
  • वे सिकंदर लोदी और हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन कवि कबीर के समकालीन माने जाते हैं.
  • संत रैदास मूर्तिपूजा, तीर्थयात्रा के दिखावे में विश्वास नही करते थे एवं मानव मात्र की सेवा और आपसी भाईचारे में विश्वास रखते थे.
  • भक्तिकालीन कवयित्री मीरा बाई संत रैदास को अपना गुरु मानती थी.
  • रेदास ने अपने काव्यों में ब्रजभाषा का उपयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी एवं खड़ी बोली के शब्दों का भी समावेश देखने को मिलता है.
  • रैदास के 40 पद सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में भी सम्मिलित हैं.
  • दलित परिवार में संत रविदास ने जूते बनाने का व्यवसाय करते हुए संतों की संगति में अध्यात्म और सामाजिक समानता का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने के बाद मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का उद्धोष कर, रूढ़िवादी समाज को जातिगत और धार्मिक श्रेष्ठता की जगह, आंतरिक पवित्रता, निर्मलता, प्रेम और मानवीय करुणा का मंत्र दिया था.
  • यह भी उन्हीं की रचना है – “हिंद तुरक नहीं कछु भेदा सभी मह एक रक्त और मासा. दोऊ एकऊ दजा नाहीं, पेख्यो सोइ रैदासा”.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : ELECTRONICALLY TRANSMITTED POSTAL BALLOT SYSTEM (ETPBS)

संदर्भ

हाल ही में, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल विधानसभाओं में होने वाले आगामी चुनावों के लिए अनिवासी भारतीयों को डाक मतपत्र (Postal Ballots) सुविधा नहीं प्रदान की जाएगी.

पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष 27 नवंबर को, भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission- EC) द्वारा अप्रवासी भारतीयों (NRIs) तक डाक मतपत्र (Postal Ballot)  सुविधा का विस्तार करने संबंध में ‘कानून मंत्रालय’ के लिए एक प्रस्ताव दिया गया था.

निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को आगे विदेश मंत्रालय के पास भेज दिया गया. विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस विषय पर सभी हितधारकों की एक विस्तृत बैठक आयोजित किये जाने की राय दी है.

  • देश के बाहर दूतावासों में तैनात केंद्रीय बलों में काम करने वाले व्यक्तियों को डाक मतदाता के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और उनके लिये ऑनलाइन नामांकन का प्रावधान किया जाता है.
  • वर्ष 2019 के आम चुनाव में भारत के चुनाव आयोग के प्रमुख IT कार्यक्रम ETPBS का उपयोग करते हुए इलेक्ट्रॉनिक रूप से कुल 18,02,646 डाक मतपत्र भेजे गए थे. इससे कुल 10,84,266 ई-पोस्टल मत प्राप्त हुए जिन्होंने अपने नामांकन संख्या से लगभग 60.14% मतदान किया.

ETPBS क्या है?

  • ऑनलाइन प्रणाली का उद्देश्य रक्षा कार्मिकों के लिये डाक मतदाता बनने हेतु सुविधाजनक एवं उपयोग में आसान ऑनलाइन प्रणाली तैयार करना था.
  • यह मतदान के लिए बनाई गई एक प्रणाली है जिसका निर्माण भारतीय निर्वाचन आयोग ने उन्नत कम्पयूटिंग विकास केंद्र (Development of Advanced Computing – C-DAC) की सहायता से उन मतदाताओं के लिए किया है जो रक्षा क्षेत्र में सेवारत हैं.
  • यह सुरक्षा की दो परतों वाली पूर्णतः सुरक्षित प्रणाली है. इसमें एककालिक कूटसंख्या (OTP) और पिन के माध्यम से गोपनीयता का प्रावधान किया जाता है और इसके अनूठे QR कोड के चलते डाले गये मतदान को दुबारा डाला जाना असंभव होता है.
  • इस प्रणाली का प्रयोग जिन सेवारत मतदाताओं के लिए है उनमें परासैन्य बलों, सैन्य बालों और भारत के बाहर कूटनीतिक मिशनों में तैनात सरकारी कर्मी आते हैं.
  • इस प्रणाली के माध्यम से डाक मतदाता अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर कहीं से भी, इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त डाक मतपत्र पर अपना वोट डाल सकते है, जिससे मतदान का अवसर खोने की संभावना कम हो जाती है.

ETPBS के लिए अर्हता प्राप्त निर्वाचकों की श्रेणी

  1. वे सेवा मतदाता जिन्होंने प्रॉक्सी मतदान का विकल्प नहीं चुना है.
  2. सेवा मतदाता की पत्नी जो सामान्यतः उसके साथ रहा करती है.
  3. विदेश में स्थित मतदाता.

माहात्म्य और लाभ

  • इस प्रणाली का प्रयोग कर सेवाकर्मी अपने चुनाव क्षेत्र के बाहर कहीं से भी डाक मतपत्र का प्रयोग करते हुए मतदान कर सकते हैं.
  • जिन मतदाताओं ने इस प्रणाली का विकल्प चुना है वे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसी विशेष चुनाव में प्रतिभागिता कर सकते हैं.
  • इस प्रणाली का कार्यान्वयन वर्तमान डाक मतपत्र प्रणाली के साहचर्य से किया जाता है. डाक मतपत्र मतदाताओं को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सम्प्रेषित किये जाते हैं.
  • पूर्व में डाक मतपत्रों को सेवाकर्मियों को डाक से भेजा जाता था जिसमें बहुत समय लगता था. परन्तु अब इस नई प्रणाली के कारण ये मतपत्र इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से तुरंत मतदाता तक पहुँचा दिए जाते हैं जिससे समय की बचत हो जाती है.

अप्रवासी भारतीय नागरिकों के लिए मतदान की वर्तमान प्रक्रिया

  1. प्रवासी भारतीयों के लिए मतदान अधिकार, वर्ष 2011 में, जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 में संशोधन के माध्यम से लागू किये गए थे.
  2. प्रवासी भारतीय (NRI) अपने पासपोर्ट में उल्लिखित निवास स्थान संबंधी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सकता है.
  3. वे केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकते हैं, और उन्हें अपनी पहचान साबित करने हेतु अपना पासपोर्ट की मूल प्रति पेश करनी होगी.

अप्रवासी मतदाताओं की वर्तमान संख्या

संयुक्त राष्ट्र की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रवासी जनसंख्या 16 मिलियन है और यह विश्व में सर्वाधिक है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : Model Code Of Conduct

संदर्भ

चुनाव आयोग ने 27 फ़रवरी को पश्चिम बंगाल समेत पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा की है. इस घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है.

आदर्श आचार संहिता

आदर्श आचार संहिता (MCC) उन मार्गनिर्देशों को कहते हैं जिन्हें भारतीय चुनाव आयोग द्वारा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों पर लागू किये जाते हैं. ये मार्गनिर्देश मुख्यतः इन विषयों से सम्बन्धित होते हैं – भाषण, निर्वाचन दिवस, निर्वाचन बूथ, चुनाव घोषणापत्र, जुलूस तथा सामान्य-आचरण.

लक्ष्य : इन मार्गनिर्देशों का उद्देश्य स्वतंत्र एवं न्यायपूर्ण चुनाव कराना है.

कब लागू होती हैअभी तक आदर्श आचार संहिता आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के तुरंत पश्चात् लागू हो जाती है और जब तक चुनावी प्रक्रिया चलती रहती है यह प्रभावी रहती है.

संहिता की वैधानिक स्थिति: आदर्श आचार संहिता का कोई वैधानिक आधार नहीं है. यह चुनावों से जुड़ी हुई नैतिकता के नियम हैं जिनपर मात्र पालन करने का दबाव होता है. परन्तु वैधानिक स्वीकृति नहीं होते हुए भी आयोग इस संहिता को लागू करने से नहीं रुकता.

इतिहास: भारतीय चुनाव आयोग ने सबसे पहले 1971 के पाँचवे चुनाव के समय आदर्श आचार संहिता निर्गत की थी और वह उसे समय-समय पर संशोधित करता रहता है. संहिता राजनैतिक दलों की सहमति से बनी थी और उन दलों ने यह वचन दिया था कि वे  इसमें वर्णित सिद्धांतों का पालन करेंगे और इसे अक्षरशः मान्यता देंगे.


GS Paper 4 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Dimensions of ethics; ethics – in private and public relationships. Human Values – lessons from the lives and teachings of great leaders, reformers and administrators; role of Family society and educational institutions in inculcating values.

Topic : Same-sex marriages will cause havoc, Central Govt. tells HC

संदर्भ

केंद्र सरकार सरकार द्वारा समलैंगिक विवाह के विरोध में तर्क हाल ही में केंद्र सरकार ने दिल्‍ली उच्च न्यायालय में समलैंगिक विवाह को स्वीकृति दिए जाने संबंधित याचिकाओं के जवाब में केंद्र सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया.

केंद्र सरकार ने समलैंगिक विवाह का पूरी तरह विरोध किया है. केंद्र का कहना है कि समलैंगिक विवाह भारतीय परिवार के ढांचे के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसे वैधानिक मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए.

केंद्र सरकार के तर्क

  • सरकार ने कहा कि समलैंगिक जोड़ों का पार्टनर की तरह रहना और यौन सबंध बनाने की तुलना भारतीय परिवार से कतई नहीं हो सकती है.
  • केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप “व्यक्तिगत कानूनों के नाजुक संतुलन को बर्बाद कर देगा.”
  • केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि “समान लिंग वाले लोगों का पार्टनर की तरह रहने और यौन सम्बन्ध रखने की तुलना एक भारतीय परिवार की संरचना से नहीं की जा सकती, जिसमें एक पति, पत्नी एवं बच्चे होते हैं.
  • केंद्र सरकार का कहना है कि “धारा 377 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2018 में गैर-आपराधिक सिद्ध किए जाने के बाद भी याचिकाकर्चा अनुच्छेद 21 के आधार पर समलैंगिक विवाह को लेकर मौलिक अधिकार का दावा कतई नहीं कर सकते हैं.”

अन्य देशों में समलैंगिकता की वैधानिक स्थिति

समलैंगिक विवाहों को वैध बनाने वाला पहला देश नीदरलैंड था, जहाँ इसे 2001 में कानूनी मान्यता प्राप्त हुई. इसके बाद से अब तक 28 देशों ने समलैंगिक विवाहों को क़ानूनी मान्यताएँ दी हैं. कनाडा (2005), फ्रांस (2013), न्यूजीलेंड (2013), संयुक्त राज्य अमरीका (2015), ऑस्ट्रेलिया (2017), यूनाइटेड किंगडम (2020) जैसे बड़े देश इसे वैधानिक मान्यता दे चुके हैं.

भारत में स्थिति

उल्लेखनीय है कि भारत में अभी तक समलैंगिकता को वैधानिक मान्यता नहीं मिली है. वर्ष 2018 तक तो, आईपीसी की धारा 377 के अनुसार, जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान रखा गया था. परन्तु 6 सितंबर 2018 को सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ के एक निर्णय में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था. भारत में वर्तमान सरकार के रुख से स्पष्ट है कि समलैंगिक अधिकारों की माँग करने वालों को अभी संघर्ष करना होगा और इस सम्बन्ध में न्यायालय की भूमिका भी महत्त्वपूर्ण होगी.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

सामाजिक दायरों में समलैंगिकता के मुद्दे पर बीतें सालों में पक्ष-विपक्ष में तरह-तरह की चर्चाएँ सामने आई हैं. कुछ लोग इसे अप्राकृतिक और मानसिक बीमारी मानते हैं. उनका तर्क है कि समलैंगिकता की प्रवृत्ति को अगर बढ़ावा दिया गया तो इससे सामाजिक व पारिवारिक व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी. समलैंगिकता का समर्थन करने वाले लोग मानते हैं कि हर व्यक्ति को इस बात का अधिकार मिलना चाहिये कि वह किससे प्रेम करे . इसमें समाज या सरकार का कोई दखल न हो. ऐसे लोग इस तरह के रिश्तों को विज्ञान सम्मत मानते हैं. समलैंगिकता के मुद्दे पर सार्वजनिक जनमत बहुत ही विस्तृत रूप से विभाजित रहता है.


Prelims Vishesh

Caracal :-

Caracal cat

  • राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में कैरकल (स्याहगोश) को सम्मिलित किया है.
  • यह राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली मध्यम आकार की जंगली बिल्ली है.
  • उपमहाद्वीप में इसके प्रारम्भिक प्रमाण सिंघु घाटी सभ्यता से संबद्ध एक जीवाश्म से प्राप्त हुए हैं.
  • कैरकल अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य और दक्षिण एशिया में भी पाया जाता है. एक ओर जहाँ अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इसकी संख्या में वृद्धि हो रही है, वहीं एशिया में इसकी संख्या घट रही है.
  • अबुल फजल की रचना “अकबरनामा” में इसका उल्लेख अकबर के शासनकाल के दौरान शिकार किए जाने वाले पशु के रूप में किया गया है.
  • अफ्रीका में अधिक संख्या होने के कारण IUCN ने कैरकल को लीस्ट कंसर्नड के अंतर्गत सूचीबद्ध किया है.

Carbon Watch :-

  • चंडीगढ़ कार्बन वॉच शुरू करने वाला भारत का प्रथम क्षेत्र बन गया है.
  • कार्बन वॉच वस्तुतः: किसी व्यक्ति के कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करने हेतु एक मोबाइल एप्लिकेशन है.
  • एक कार्बन फुटप्रिंट ग्रीनहाउस गैसों (कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन सहित) की कुल मात्रा है, जो मानवीय कार्यों के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती हैं.
  • इसका उद्देश्य लोगों को जलवायु-स्मार्ट नागरिक (climate-smart citizens) बनाना है.
  • साथ ही, उन्हें अपने कार्बन फुटप्रिंट तक पहुंचने में सक्षम बनाने के साथ-साथ उन्हें इसे कम करने के उपाय भी प्रदान करना है.

Ketoprfen :-

  • हाल ही में, बांग्लादेश ने दर्द-निवारक औषधि कीटोप्रोफेन पर प्रतिबंध लगा दिया है.
  • कीटोप्रोफेन मवेशियों के उपचार के लिए व्यापक रूप से उपयोग की जाती है.
  • डाइक्लोफेनेक और कीटोप्रोफेन नॉन स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स हैं, जो दक्षिण एशिया के गिद्धों के लिए प्राथमिक खतरे के रूप में विद्यमान हैं.
  • साथ ही, इस क्षेत्र में 99.9% श्वेत पुट्ठे वाले गिद्धों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं.
  • भारत में, डाइक्लोफेनेक दवा को वर्ष 2006 में ड्रग कंट्रोलर जनरल द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था.

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