Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 December 2018

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Print Friendly, PDF & Email

Submit Form for Hard Copy of DCA
बता कर हो कर हर्ष हो रहा है कि कई छात्रों ने Sansar DCA के हार्ड-कॉपी के लिए अप्लाई किया है. अब हम 1,000 की सीमा के बहुत ही नजदीक हैं और मात्र 1,000 छात्रों को हार्डकॉपी उनके घर तक भेजा जाएगा. जैसा पहले सूचित किया गया था कि हम लोग जनवरी, 2019 से Sansar DCA की हार्डकॉपी निकालने की सोच रहे हैं. केवल फॉर्म भरने वालों को ही संसार DCA मिलेगा. फॉर्म भरने की अंतिम तारीख को बढ़ाकार 30 जनवरी, 2018 कर दिया गया है. Submit Form Here

Sansar Daily Current Affairs, 27 December 2018


GS Paper 1 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Topic : Tansen Samman

संदर्भ

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रसिद्ध सितारवादक मंजू मेहता को 2018 का तानसेन सम्मान प्रदान किया है. यह सम्मान उन्हें संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया गया है.

तानसेन सम्मान और तानसेन संगीत उत्सव

  • सुप्रतिष्ठित तानसेन सम्मान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए प्रत्येक वर्ष दिया जाता है. इसमें प्रशस्ति पत्र और दो लाख रू. नकद दिया जाता है.
  • तानसेन संगीत उत्सव मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष तानसेन की स्मृति में ग्वालियर में आयोजित किया जाता है. विदित हो कि तानसेन भारत के इतिहास में सबसे महान संगीतज्ञ माने जाते हैं और वे ग्वालियर के ही रहने वाले थे.

तानसेन कौन थे?

  • तानसेन हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में एक बहुत बड़े नाम हैं.
  • उन्होंने अपनी वृत्ति रीवा के महाराजा रामचन्द्र सिंह (1555–1592) के आश्रय में आरम्भ की थी और उनके वयस्क जीवन का अधिकांश भाग उसी दरबार में बीता था. वहाँ रहते हुए तानसेन ने अपनी सांगीतिक योग्यताओं और अध्ययनों के लिए देशभर में ख्याति पाई.
  • तानसेन की प्रसिद्धि मुगल सम्राट अकबर तक पहुँची जिसने महाराजा सिंह से अनुरोध किया कि वे तानसेन को मुग़ल दरबार में रहने के लिए छोड़ दें.
  • तानसेन को अकबर अपने नवरत्नों में से एक माना था और उन्हें मियाँ अर्थात् विद्वान् की उपाधि दी थी.
  • तानसेन अपनी ध्रुपद रचनाओं के लिए याद किये जाते हैं. साथ ही उन्होंने कई नए रागों का सृजन भी किया था. उन्होंने संगीत पर दो शास्त्रीय पुस्तकें भी लिखी थीं, जिनके नाम श्रीगणेश स्तोत्र और संगीत सार थे.

GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Topic : RBI Panel on Economic Capital Framework

संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक ने भूतपूर्व RBI गवर्नर विमल जालान की अध्यक्षता में आर्थिक पूँजी-ढाँचे (economic capital framework) के विषय में एक विशेषज्ञ पैनल का गठन किया है. यह पैनल RBI की संरक्षित धनराशि के विषय में समाधान सुझाएगा. विदित हो कि इस राशि को लेकर भारतीय रिज़र्व बैंक और सरकार में ठनी हुई है.

मामला क्या है?

राजस्व में कमी को देखते हुए केंद्र सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक को यह कहती रही है कि वह अपनी अतिरिक्त धनराशि भण्डार को सरकार को सौंप दे. यदि यह राशि सरकार को मिल जाती है तो उससे वह घाटे के अपने लक्ष्य को पूरा कर सकती है और साथ ही कमजोर बैंकों में पूँजी डालकर ऋण लेने की मात्रा बढ़ा सकती है और जनकल्याण कार्यक्रमों के लिए धन भी मुहैया करा सकती है.

विशेषज्ञ पैनल को सौंपे गये कार्य

  1. यह पैनल निर्धारित करेगा कि क्या भारतीय रिज़र्व बैंक के पास अपेक्षा से अधिक धन-भंडार है?
  2. यह पैनल पूँजी भंडार की स्थिति को देखते हुए उसके लाभ को वितिरित करने के निमित्त एक समुचित नीति का सुझाव देगा.
  3. यह पैनल यह भी बतायेगा कि भारतीय रिज़र्व बैंक को कितनी राशि रखनी होगी जो किसी जोखिम से निपटने के लिए पर्याप्त होगी.

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक की पूँजीगत आवश्यकता का निर्धारण पारम्परिक रूप से जोखिम के आकलन के आधार पर किया जाता है और यदि इसकी नए सिरे से समीक्षा की जाए तो उसके पास आवश्यकता से अतिरिक्त पूँजी मिलेगी. यदि RBI इस अतिरिक्त पूँजी को मुक्त कर दे तो सरकार उसका अपने ढंग से सदुपयोग कर पाएगी. भारत सरकार का कहना है कि RBI 27% आरक्षित पूँजी भंडार अपनी पास रखती है, दूसरी ओर कई ऐसे देश है जहाँ यह प्रतिशत 13 या 14 है, जैसे अमेरिका और इंग्लैंड में.

कुछ अर्थशास्त्री पहले से कहते आ रहे हैं कि RBI को अपनी अतिरिक्त पूँजी सरकार को दे देनी चाहिए जिससे वह उस राशि का फलदायी उपयोग कर सके. विदित हो कि 2013 में मालेगम समिति ने यह अनुमान लगाया था कि भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 1.40 लाख करोड़ रू. की अधिकायी है.

क्या RBI अपनी अथवा लाभ पर कर देता है?

नहीं. इसका कानून यह प्रावधान करता है कि इसे आयकर अथवा सम्पत्ति कर समेत किसी अन्य कर के भुगतान से छूट मिली हुई है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Topic : New High Court for Andhra Pradesh

संदर्भ

भारत के राष्ट्रपति ने आंध्रप्रदेश के लिए एक अलग उच्च न्यायालय गठित कर दिया है. यह न्यायालय आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय कहा जाएगा. यह जनवरी 2019 की पहली तिथि से चालू हो जाएगा और इसका स्थान अमरावती में होगा.

  • इस अलग उच्च न्यायालय के बनने से हैदराबाद उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार तेलंगाना तक सीमित रह जाएगा और उसका नाम तेलंगाना उच्च न्यायालय होगा.
  • आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय देश का 25वाँ उच्च न्यायालय होगा.

उच्च न्यायालय की स्थापना के सांविधानिक प्रावधान

  • संविधान के अनुच्छेद 214 से 237 तक में राज्य की न्यापालिका का उल्लेख है. संविधान का अनुच्छेद 214 यह बतलाता है कि प्रत्येक राज्य में एक न्यायालय होगा और अनुच्छेद 215 के अनुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होगा. उसे अपने अपमान के लिए दंड देने की शक्ति के साथ-साथ अभिलेख न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होंगी.
  • संविधान के 216वें अनुच्छेद के अनुसार राष्ट्रपति आवश्यकतानुसार प्रत्येक उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या निर्धारित करता है, जिनमें एक मुख्य न्यायाधीश होता है. राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा सम्बंधित राज्य के राज्यपाल के परामर्श से उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करता है. अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति करते समय राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, सम्बंधित राज्य के राज्यपाल और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सम्मति लेता है.
  • अनुच्छेद 217 उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से सम्बंधित है.
  • अनुच्छेद 231 कहती है कि दो अथवा दो से अधिक राज्यों के लिए एक समान उच्च न्यायालय का गठन किया जा सकता है और इसमें अनुच्छेद 214 आड़े नहीं आती.

न्यायाधीश की योग्यता

संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय का न्यायाधीश वही व्यक्ति नियुक्त हो सकता है, जो

a) भारत का नागरिक हो

b) भारत के राज्य क्षेत्र में कम-से-कम 10 वर्षों तक किसी न्यायिक पद पर रह चुका, अथवा किसी राज्य के या दो से अधिक राज्यों के उच्च न्यायालयों में कम-से-कम 10 वर्षों तक अधिवक्ता रह चुका है.

वेतन, भत्ते और कार्यकाल

  1. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को 90,000 रु. प्रतिमास वेतन तथा अन्य न्यायाधीशों को 80,000 रु. प्रतिमास वेतन मिलता है.
  2. उन वेतन और भत्ते राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं और राज्य का विधानमंडल उनके भत्ते आदि में कटौती नहीं कर सकता. वित्तीय आपात की घोषणा होने पर उनके वेतन कम किए जा सकते हैं.
  3. सेवा-निवृत्त (retire) होने पर उन्हें पेंशन दिया जाता है. सेवा-निवृत्त होने पर वे किसी भी न्यायालय में वकालत नहीं कर सकते.
  4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपने पद पर 62 वर्ष की आयु तक पदासीन रहते हैं.
  5. संविधान में यह उपबंध है कि उच्च न्यायालय का कोई भी न्यायाधीश तब तक अपने पद से हटाया नहीं जा सकता जब तक संसद के दोनों सदन उसपर सिद्ध कदाचार अथवा अक्षमता का आरोप लागाकर उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 बहुमत से और समस्त संख्या के बहुमत से इस हेतु उसी अधिवेशन में एक प्रस्ताव पास करके राष्ट्रपति के पास न भेज दें. ऐसा प्रस्ताव पारित हो जाने पर राष्ट्रपति के आदेश से न्यायाधीश पदच्युत किये जा सकते हैं.
  6. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश त्यागपत्र द्वारा भी पदत्याग कर सकते हैं.

GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Topic : Niti Aayog releases second Delta Ranking of Aspirational districts

संदर्भ

आकांक्षी जिला कार्यक्रम के लिए नीति आयोग ने दूसरी डेल्टा रैंकिंग जारी कर दी है. इस रैंकिंग में सूचित किया गया है कि इस वर्ष जून से लेकर अक्टूबर तक छह मुख्य विकास प्रक्षेत्रों में जिलों ने क्या प्रगति की है.

जिलों को रैंकिंग कैसे होती है?

डेल्टा रैंकिंग में रैंकिंग देने की प्रक्रिया बहुत ही पारदर्शी होती है. विभिन्न प्रदर्शन संकेतकों, जैसे – स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कौशल-विकास, आधारभूत ढाँचा के प्रक्षेत्र में मानदंड बने हुए हैं जिनके अनुसार जिलों का प्रदर्शन मापा जाता है.

जिलों से सम्बंधित आँकड़े Champions of Change Dashboard के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहते हैं. इन्हीं आँकड़ों पर रैंकिंग आधारित होती है. ये आँकड़े जिला-स्तर पर हो रही प्रतिक्षण की प्रगति को दर्शाते हैं.

विभिन्न जिलों का प्रदर्शन 

सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाले जिले :- सबसे अधिक समग्र प्रगति तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में हुई है. उसके बाद क्रमशः ये जिले आते हैं – ओडिशा का नुआपदा, उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर, बिहार का औरंगाबाद और ओडिशा का कोरापुट. इन जिलों में सामाजिक प्रगति के मूलभूत मानदंड पर अच्छा काम किया गया है.

न्यूनतम प्रदर्शन करने वाले जिले :- नागालैंड का किफिरे, झारखंड का गिरिडीह, झारखंड का चतरा, असम का हैलाकंडी और झारखंड का पाकुड़.

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme)

  1. नव भारत निर्माण के उद्देश्य को पाने के लिए भारत के सबसे पिछड़े जिलों के उन्नयन का कार्यक्रम बनाया गया है. इन जिलों को आकांक्षी जिले अर्थात् Aspirational Districts की संज्ञा दी गई है.
  2. Tansformation of aspirational जिला कार्यक्रम भारत सरकार के द्वारा जनवरी, 2018 में घोषित किया गया.
  3. इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के सबसे अल्प-विकसित जिलों में तेजी से बदलाव लाना है.
  4. इस कार्यक्रम का मुख्य नारा है – Convergence (समागम – केन्द्रीय और राज्य योजनाओं का), Collaboration (सहयोग – केंद्र स्तरीय एवं राज्य स्तरीय अधिकारीयों एवं जिला समहर्ताओं के बीच, Competition (प्रतिस्पर्द्धा -जिलों के बीच).
  5. इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश के 115 जिले चुने गए हैं जिनमें 35 जिले नक्सल-प्रभावित हैं.

ADP की जरुरत

यदि सभी आकांक्षी जिलों में बदलाव आ जायेगा तो देश की आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य में भी सुधार हो जायेगा. साथ ही देश में विकास की गति में तेजी भी हो जाएगी.


GS Paper 3 Source: PIB

pib_logo

Topic : DIPP Swachch Bharat Grand Challenge Awards Presented

संदर्भ

1 नवम्बर से 15 नवम्बर, 2018 तक आयोजित स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम के एक अंग के रूप में औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग ने स्वच्छ भारत महान चुनौती  (Swachch Bharat Grand Challenge) नामक कार्यक्रम चलाया है.

इस चुनौती के लिए ये चार क्षेत्र चुने गये हैं –

  1. स्वच्छता
  2. कचरा प्रबंधन
  3. जल एवं अपशिष्ट जल प्रबन्धन
  4. वायु प्रबन्धन

इस चुनौती के अंतर्गत एक पुरस्कार भी प्रस्तावित है जो देश के औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन विभाग (Department of Industrial Policy and Promotion – DIPP) द्वारा मान्यता-प्राप्त उन स्टार्ट-अपों को दिया जाएगा जो नवाचार समाधान प्रस्तुत करेंगे.

स्वच्छता पखवाड़ा कार्यक्रम क्या है?

  • यह कार्यक्रम अप्रैल 2016 से मनाया जा रहा है.
  • इसका उद्देश्य केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों को शामिल करते हुए स्वच्छता से जुड़े मामलों और प्रथाओं पर विशेष ध्यान खींचा जाना है.
  • प्रत्येक वर्ष इसके लिए एक कैलंडर सभी मंत्रालयों को दिया जाता है जिससे वे पखवाड़े में अपनी-अपनी गतिविधियों से सम्बन्धित योजनाएँ बना सकें. इन गतिविधियों पर स्वच्छता समीक्षा नामक ऑनलाइन निगरानी प्रणाली का माध्यम से नजर रखी जाती है.
  • इस ऑनलाइन प्रणाली में कार्ययोजनाओं के विवरण, छायाचित्र, विडियो आदि उपलब्ध रहते हैं.
  • ऑनलाइन विविरण को देखने के बाद मंत्रालय अथवा विभाग एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर अथवा किसी अन्य संचार माध्यम से अपनी उपलब्धियों का बखान करते हैं.
  • स्वच्छता समीक्षा की प्रणाली के द्वारा स्वच्छता पखवाड़े में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा की गई गतिविधियों पर नज़र रखी जाती है.

Prelims Vishesh

Avangard system :-

  • रूसी सेना में 2019 से Avangard नामक एक अंतरमहाद्वीपीय रणनीतिक प्रणाली का प्रवेश होने जा रहा है.
  • इसे  “Objekt 4202” भी कहते हैं.
  • इस प्रणाली में लगी हुई मिसाइल ध्वनि से अधिक तेज चलने वाली है.

Bahuda rookery :-

Bahuda rookery

  • ओडिशा वन विभाग बहुदा रुकरी के अंतर्गत सूनापुर से लेकर अनंतपुर तक 3 किलोमीटर के तटीय भाग में एक कछुआ संरक्षण स्थल विकसित कर रहा है जिसमें ओलिव रिडली नामक कछुए सामूहिक रूप से अंडे दे सकेंगे.
  • यह कछुए IUCN की लाल सूची में हैं.

Mount Etna :-

  • इटली का ज्वालामुखी पर्वत एटना एक बार फट गया है जिसके परिणामस्वरूप 4.3 तीव्रता की 130 भूकम्प हो चुके हैं.
  • माउंट एटना इटली सिसली द्वीप पर स्थित है.
  • यह सबसे जाग्रत ज्वालामुखी है.
  • इसकी ऊँचाई 10,900 फीट है.
  • इस पर्वत के पूर्वी ढलान में एक घोड़े की नाल के आकार की एक संरचना है जिसे बैल की घाटी (the Valle del Bove – Valley of the Ox) कहते हैं.
  • जून, 2013 में इस पर्वत को UNESCO के वैश्विक धरोहर स्थलों (World Heritage Site) में शामिल किया गया था.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.