Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 25 November 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Major crops cropping patterns in various parts of the country, different types of irrigation and irrigation systems storage, transport and marketing of agricultural produce and issues and related constraints; e-technology in the aid of farmers

Topic : Honey FPO Programme

संदर्भ

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (Agriculture Cooperative Marketing Federation of India- NAFED)  के शहद किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organization) कार्यक्रम का उद्घाटन किया.

शहद के एफपीओ (Honey FPOs) के बारे में

  • केन्द्रीय किसान कल्याण मंत्री ने 10 हजार एफपीओ बनाने की केन्द्र सरकार की योजना के अंतर्गत पाँच राज्यों में मधुमक्खी पात्रकों/शहद संग्राहकों के पाँच एफपीओं का शुभारम्भ किया.
  • ये एफपीओ मध्य प्रदेश मुरैना, पश्चिम बंगाल सुंदरवन, बिहार में पूर्वी चंपारण, राजस्थान में भरतपुर और उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले में नेफेड के सहयोग से बनाये गये हैं.
  • इसके लिए 500 करोड़ रूपये का फंड आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत राहत पैकेज के रूप में दिया गया है. वहीं अनेक अन्य योजनाओं के माध्यम से भी मधुमक्खी पालकों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है.
  • भारत सरकार की योजना के अंतर्गत इन पांचों नए एफपीओ से जुड़े लगभग पांच सौ गांवों के 4 से 5 हज़ार शहद उत्पादकों को इस परियोजना से सीधा लाभ पहुंचेगा. शहद उत्पादकों द्वारा निकाला जाने वाला 60 हजार क्विंटल शहद अब उनके स्वयं के द्वारा ही प्रोसेस करके नाफेड की मदद से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा, जिससे इनकी आय बढ़ेगी.

किसान उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation- FPO)

  • ‘किसान उत्पादक संगठनों’ का अभिप्राय किसानों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के समूह से होता है.
  • इस प्रकार के संगठनों का प्रमुख उद्देश्य कृषि से संबंधित चुनौतियों का प्रभावी समाधान करना होता है.
  • FPOs प्राथमिक उत्पादकों जैसे- किसानों, दूध उत्पादकों, मछुआरों, बुनकरों और कारीगरों आदि द्वारा गठित क़ानूनी इकाई होती हैं.
  • FPOs को भारत सरकार तथा नाबार्ड जैसे संस्थानों से भी सहायता प्राप्त होती है.

NAFED क्या है?

  • NAFED का पूरा नाम है – National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India Ltd.
  • इसकी स्थापना 1958 में बहु-राज्यीय सहकारी संस्था अधिनियम के अंतर्गत हुई थी.
  • NAFED का लक्ष्य है कृषि उत्पादों के सहकारी विपणन को बढ़ावा देना जिससे किसानों को लाभ पहुँच सके.

उद्देश्य

  1. कृषि, बागबानी और वन के उत्पादों के विपणन, प्रसंस्करण और भंडारण की व्यवस्था करना.
  2. कृषि मशीनों, औजारों और अन्य निवेशों का वितरण करना.
  3. एक से अधिक राज्यों के बीच आयात-निर्यात से सम्बंधित व्यापार हाथ में लेना.

सरंचना

NAFED में एक सामान्य निकाय होता है जिसके सदस्य मुख्य रूप से खेतिहर किसान ही होते हैं और वे ही आवश्यक निर्णय लेते हैं.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : TX2 Tiger Conservation Awards: TTCA

संदर्भ

हाल ही में Tx2 बाघ सरक्षण पुरस्कार (TX2 Tiger Conservation Awards: TTCA) वितरित किए गए.

विदित हो की यह एक वैश्विक पुरस्कार है, जिसे वर्ष 2010 में विश्व वन्यजीव कोष (WWF), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP), अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN), ग्लोबल टाइगर फंड, CATS और द लायंस शेयर जैसे बाघ संरक्षण में कार्यरत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा सेंट पीटर्सबर्ग बाघ सम्मेलन के दौरान स्थापित किया गया था.

Tx2 से अभिप्राय “बाघों की दोगुनी संख्या” है, जो 13 टाइगर रेंज वाले देशों द्वारा निर्धारित वन्य बाघों की वर्ष 2022 तक दुगनी आबादी के लक्ष्य को दर्शाता है. Tx2 पुरस्कार को दो श्रेणियों में प्रदान किया गया है.

बाघ संरक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार: ट्रांसबाउंडरी मानस कंजर्वेशन एरिया (TraMCA) ने यह पुरस्कार प्राप्त किया है. इसमें असम का मानस नेशनल पार्क और भूटान का रॉयल मानस नेशनल पार्क सम्मिलित हैं.

यह पुरस्कार ऐसे स्थलों को मान्यता देता है, जिसने दो या पांच से अधिक विषयों में उत्कृष्टता प्राप्त की है:

  • बाघ और उसके शिकार की आबादी की निगरानी और अनुसंधान;
  • प्रभावी स्थल प्रबंधन;
  • कानून प्रवर्तन और संरक्षण को बढ़ावा;
  • समुदाय–आधारित संरक्षण तथा
  • आवास और शिकार प्रबंधन.

Tx2 पुरस्कार

  • यह पुरस्कार बाघों की आबादी बढ़ाने के प्रयासों के लिए दिया जाता है तथा इस मौजूदा संरक्षण में सहायता के लिए वित्तीय अनुदान भी शामिल है.
  • उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) ने बाघों की आबादी को दोगुना करने के लक्ष्य को पूर्ण करने पर यह पुरस्कार प्राप्त किया है.
  • PTR भारत और नेपाल के विशाल तराई वृत्त-चाप भू-खंड में संबद्धता के लिए महत्त्वपूर्ण है.
  • इसकी दक्षिणी सीमा शारदा और खकरा नदी से चिह्नित है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Negative Yield Bonds

संदर्भ

हाल ही में,चीन द्वारा पहली बार निगेटिव-यील्ड ऋण (Negative Yield Debt) की बिक्री की गयी.

5-वर्षीय बॉण्ड  की कीमत -0.152%, और 10-वर्षीय और 15-वर्षीय प्रतिभूतियों की सकारात्मक लाभ सहित कीमत 0.318% और 0.664% निर्धारित की गयी.

नेगेटिव यील्ड बॉण्डक्या है?

नेगेटिव यील्ड बॉण्ड ऐसे ऋण प्रपत्र (Debt Instruments) होते हैं, जिनके द्वारा निवेशक को बॉण्ड की परिपक्वता अवधि पर बॉण्ड के क्रय मूल्य से कम राशि प्राप्त होती है.

  1. ये केंद्रीय बैंकों अथवा सरकारों द्वारा जारी किए जा सकते है.
  2. इसमेंनिवेशकों द्वारा ऋण-कर्ताओं को, अपनी राशि उनके पास रखने के लिए, ब्याज का भुगतान किया जाता है

निवेशकों द्वारा नेगेटिव यील्ड बॉण्डखरीदने का कारण

  1. इस प्रकार के प्रलेखों की प्रायः तनाव और अनिश्चितता की स्थिति में अधिक मांग होती है. ये निवेशकों की पूंजी में होने वाली गिरावट से सुरक्षा प्रदान करते हैं.
  2. मुद्रा के उतार-चढ़ाव से लेकर मुद्रा अपस्फीति जैसी स्थितियों से ‘नेगेटिव यील्ड बॉण्ड’ में निवेश करने वाले सुरक्षित निकल सकते है.

बॉण्ड कीमत और प्राप्ति (यील्ड) के मध्य संबंध

इसमें, बॉण्ड की कीमत और बॉण्ड यील्ड अथवा ब्याज के मध्य नकारात्मक संबंध होता है; अर्थात जब बॉण्ड की कीमत बढ़ती है तो बॉण्ड यील्ड घटता है.

चूंकि, नेगेटिव यील्ड बॉण्ड एक ‘फिक्स्ड रेट इन्वेस्टमेंट’ होते हैं, और यही आंशिक रूप से बॉण्ड मूल्य और बॉण्ड यील्ड के बीच व्युत्क्रम संबंधों का कारण होता है.

  1. भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना होने पर निवेशक अपने बॉण्ड को बेच सकते हैं और बाद में ऊँची दर वाले बॉण्ड को पुनः खरीद सकते है.
  2. इसके विपरीत, बॉण्ड निवेशक भविष्य में ब्याज दरों में कमी होने की संभावना होने पर बॉण्ड खरीद सकते है.

वर्तमान में नेगेटिव यील्ड बॉण्ड की मांग के प्रमुख कारक

  1. महामारी फैलने के बाद सेवैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में नकदी प्रवाहित की गयी है, जिससे, इक्विटी, ऋण और वस्तुओं सहित विभिन्न परिसंपत्तियों की कीमतों में वृद्धि हुई है.
  2. कई निवेशक, इक्विटी में अपने जोखिम पोर्टफोलियो का बचाव करने हेतुनकारात्मक प्राप्ति देने वाले सरकारी ऋण में अस्थायी रूप से अपनी पूंजी लगा सकते हैं.
  3. यदि कोविड-19 महामारी की ताजा लहर से अर्थव्यवस्थाओं में और अधिक मंदी आती है, तो ब्याज दरों पर नकारात्मक दबाव पड़ सकता है, जिससे यील्ड में और भी कमी आ सकती है और इससे वर्तमान में जिन निवेशकों ने नेगेटिव यील्ड बॉण्ड में निवेश किया है, उन्हें लाभ हो सकता है.

Prelims Vishesh

Desalination plants:-

  • हाल ही में, महाराष्ट्र ने मुंबई में एक विलवणीकरण संयंत्र स्थापित करने की घोषणा की है.
  • एक विलवणीकरण संयंत्र लवणीय जल को स्वच्छ जल में परिवर्तित करता है, जो पीने के लिए उपयुक्त होता है. इनकी स्थापना अधिकतर उन क्षेत्रों में की जाती है, जिनकी समुद्र के जल तक पहुंच होती है.
  • इसमें अतिरिक्त नमक को हटाने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (Reserve Osmosis) प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है.
  • विश्व भर में, विलवणीकरण को जल के संकट को रोकने के लिए एक संभावित समाधान के रूप में देखा जाता है.

Lachit Borphukan :-

  • प्रधानमंत्री ने लछित दिवस (24 नवंबर) पर लछित बोरफुकन को श्रद्धांजलि अर्पित की.
  • वह तत्कालीन अहोम साम्राज्य (असम) में एक सेनापति था.
  • उसे असम में सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में माना जाता है, क्योंकि उसने वर्ष 1671 में गुवाहाटी की रक्षा के लिए सरायघाट के युद्ध में ब्रह्मपुत्र के तट पर एक बड़ी मुगल सेना को हराया था.
  • राजा चक्रध्वज सिंह द्वारा लछित को “बोरफूकन’ के रूप में नियुक्त किया गया था. बोरफुकन एक पद-स्थिति थी, जिसमें कार्यकारी और न्यायिक शक्तियां दोनों एक साथ अंतर्निहित होती थीं.

Shahtoot Dam :-

  • भारत ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह अफगानिस्तान में एक शहतूत बांध का निर्माण करेगा.
  • यह बांध अफगानिस्तान में काबुल नदी की एक बड़ी सट्टायक नदी, मैदान नदी (Maidan river) पर निर्मित किया जाएगा.
  • उल्लेखनीय है कि भारत ने वर्ष 2016 में अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में हरि नदी (Hari River) पर सलमा बांध (अफगान-भारत मैत्री बांध) हेतु भी वित्त उपलब्ध करवाया था.

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