Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 January 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 25 January 2020


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of Indian Society, Diversity of India.

Topic : Commission to Examine Sub Categorization of other Backward Classes

संदर्भ

केन्द्रीय सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत उप-वर्गीकरण के प्रश्न पर विचार करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 340 के अधीन गठित होने वाले आयोग के कार्यकाल को बढ़ाने का अनुमोदन केन्द्रीय मंत्रीमंडल ने दे दया है.

पृष्ठभूमि

संविधान का अनुच्छेद 14 (Article 14) विधि के समक्ष समानता का अधिकार देता है. इसका तात्पर्य यह है कि जो असमान हैं उनके साथ समान व्यवहार नहीं किया जा सकता. वस्तुत: असमान लोगों के उत्थान के लिए ऐसे उपायों की आवश्यकता है जो उन्हें उन्न्त वर्गों के समक्ष ला सकें.

उप-वर्गीकरण

2015 में अन्य पिछड़ा वर्ग के उपवर्गीकरण के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रस्ताव दिया था.

अक्टूबर 2017 में राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 340 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के उपवर्गीकरण हेतु एक आयोग बनाया था जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश जी.रोहिणी ने की थी. इस आयोग का उद्देश्य पिछड़े वर्ग के अन्दर अति-पिछड़े वर्गों की पहचान करना था जिससे सामाजिक न्याय के लक्ष्य को पूरा किया जा सके.

उप-वर्गीकरण आवश्यक क्यों?

अन्य पिछड़ा वर्ग में उप-वर्गीकरण होने से अन्य पिछड़ा वर्ग के अन्दर तुलनात्मक रूप से अधिक पिछड़े समुदायों को शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलेगा. वर्तमान में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27% आरक्षण है और इसमें कोई उप-वर्गीकरण नहीं है.

इस कदम का महत्त्व

अन्य पिछड़ा वर्ग के उप-वर्गीकरण का निर्णय महात्मा गाँधी की जयंती पर लिया गया था. इस कदम से उनके उपदेशों की भावना को सुदृढ़ता मिलेगी और सरकार बेहतर सामाजिक न्याय को साकार करने में सफल होगी.

विश्लेषण

अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय  में अनेक जातियां आती हैं. देखा जाता है कि इनमें से कई कुछ गिनी-चुनी जातियां ही सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ उठा लेती हैं. इनमें कई समुदाय निर्धन नहीं हैं और उनपर क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू है. यह क्रीमी लेयर भी वास्तविकता से दूर है. इसलिए अपेक्षाकृत साधनवाँ व्यक्ति भी आरक्षण का लाभ उठा लेते हैं. ऐसी स्थिति में बहुत-सी ऐसी जातियां पीछे रह जाती हैं जो पिछड़ी जाति के अन्दर आती तो हैं, पर उनके पास संसाधन कम हैं. ऐसी स्थिति में यदि अन्य पिछड़ा वर्ग में एक उप-वर्ग बना कर के उसमें अन्य पिछड़ी जातियों को सम्मिलित किया जाए तो उनको लाभ मिल सकता है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : India and it’s neighbours.

Topic : India helps Maldives tackle measles outbreak

संदर्भ

मालदीव में पिछले दिनों फैले खसरा के प्रकोप से निबटने में सहायता करने के लिए वहाँ की राजधानी माले में स्थित भारतीय दूतावास ने मालदीव के स्वास्थ्य मंत्रालय को खसरा और रूबेला (measles and rubella MR) के टीके की 30 हजार से अधिक की खुराकें सौंपी हैं. स्मरणीय है कि अभी तीन वर्ष भी नहीं बीते हैं जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मालदीव को खसरा मुक्त घोषित कर दिया था.

पृष्ठभूमि

विगत वर्ष जून महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माले गए थे और वहाँ मालदीव के साथ स्वास्थ्य सहयोग हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे. सचिव स्तर पर भी प्रतिनिधि मंडल माले में मिले थे. इस बैठक का उद्देश्य स्वास्थ्य के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सहयोग की कार्ययोजना बनाना था, जैसे – क्षमता निर्माण, चिकित्सकों और चिकित्सा पेशेवरों का प्रशिक्षण, रोग सर्वेक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों का प्रशिक्षण, मालदीव में डिजिटल स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना आदि.

खसरा और रूबेला को ख़त्म करना आवश्यक क्यों?

इन रोगों से दक्षिण एशिया और पूर्वी एशिया क्षेत्रों में प्रतिवर्ष खसरा से 5 लाख बच्चों की मृत्यु हो जाती है. रूबेला से भी 55 हजार बच्चे प्राण गँवाते हैं. अतः गर्भवती स्त्रियों और शिशुओं के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए इन दोनों रोगों से मुक्ति प्राप्त करना आवश्यक है.

खसरा से सम्बंधित तथ्य

  • यह एक अतिशय संक्रामक वायरल रोग है जो नाक, मुँह या गले के जलकणों से फैलता है. इसमें संक्रमण के 10-12 दिनों के बाद बच्चे को तेज बुखार और नजला हो जाता है तथा उसकी आँखें लाल हो जाती हैं और मुँह के अन्दर उजले छाले पड़ जाते हैं. कुछ दिनों के पश्चात् चेहरे से आरम्भ होकर गर्दन से होते हुए चक्कते नीचे की ओर फैलते चले जाते हैं.
  • भीषण खसरा बहुधा उन बच्चों को होता है जो कुपोषित हैं और जिनमें विटामिन A की कमी है और जिनकी प्रतिरोध क्षमता HIV-Aids जैसे रोगों के कारण दुर्बल हो गयी हो.
  • विकट हो जाने के बाद खसरे से कई जटिलताएँ हो सकती हैं, जैसे – अन्धता, कपाल ज्वर, भीषण अतिसार, शरीर में पानी का अभाव, निमोनिया जैसे भयंकर स्वास संक्रमण आदि.
  • इससे बचाव के लिए बच्चों को समय-समय पर टीका देना आवश्यक हो जाता है.

रूबेला से सम्बंधित तथ्य

  • सामान्यतः यह एक हल्का-फुल्का संक्रमण होता है, परन्तु यदि यह रोग किसी गर्भवती स्त्री को हो जाए तो बच्चे में जन्मजात रूबेला के लक्षण (congenital rubella syndrome – CRS) उत्पन्न हो जाते हैं.
  • इससे भ्रूण में दोष आ जाते हैं और नवजात शिशु को मोतियाबिंद और ग्लूकोमा हो सकता है. वह बहरा और मंदबुद्धि भी हो सकता है. रूबेला से जन्मजात बच्चे के हृदय में भी गड़बड़ी हो सकती है.

वैश्विक टीकारण कार्य योजना (Global Vaccine Action Plan)

इस कार्ययोजना के तहत WHO के पाँच क्षेत्रों में 2020 तक खसरा और रूबेला के उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए अपेक्षित टीकाकरण और सर्वेक्षण कार्यों में सभी देशों सहयोग करने के लिए WHO को अग्रणी तकनीकी एजेंसी बनाया गया है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures. Role of civil services in a democracy.

Topic : Corruption Perception Index 2019

संदर्भ

ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल नामक संस्था ने 2019 के भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक (Corruption Perception Index – CPI) को प्रकाशित कर दिया है.

भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक क्या है?

  • इस सूचकांक में 180 देशों और भूभागों को शामिल किया गया है.
  • इसमें विशेषज्ञों और व्यवसाइयों से पूछा जाता है कि उनके मन में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के स्तर के बारे में क्या अवधारणा है. इसी आधार पर देशों को रैंकिंग दी जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार करने पर पकड़े जाते हैं अथवा वे बच निकलते हैं. विशेषज्ञों से इस बात की भी जानकारी ली जाती है कि घूसखोरी का चलन वे कितना देखते हैं और क्या सार्वजनिक संस्थाएँ नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति सजग हैं?
  • यह सूचकांक एक मिश्रित सूचकांक है जिसमें देशों को रैंक देने के लिए 12 प्रकार के सर्वेक्षण किये जाते हैं.
  • इस सूचकांक को विश्व में बहुत सम्मान दिया जाता है और विश्लेषक और निवेशक भ्रष्टाचार के मामले में इसे विश्वसनीय मानते हुए इसका उपयोग करते हैं.
  • सूचकांक में से लेकर 100 तक का एक मापदंड होता है जिसमें जीरो का अर्थ हुआ “बहुत अधिक भ्रष्ट” और 100 का अर्थ हुआ “सबसे साफ़-सुथरा”.

भारत और पड़ोसी देशों का प्रदर्शन

  • 41 के अंक के साथ भारत को इस सूचकांक में 80वाँ स्थान मिला है.
  • 80वें स्थान पर ही चार और देश हैं जिनके नाम हैं – चीन, बेनिन, घाना और मोरक्को.
  • पाकिस्तान को इस सूचकांक में 120वाँ स्थान मिला है.

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

  • भ्रष्टाचार अवधारणा सूचकांक 2019 में डेनमार्क और न्यूज़ीलैण्ड को क्रमशः पहला और दूसरा स्थान मिला है.
  • इनके बाद फ़िनलैंड, सिंगापुर और स्वीडेन और स्विट्ज़रलैंड को स्थान दिया गया है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : India and neighbours.

Topic : ICJ ruling on Rohingya crisis

संदर्भ

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने रोहिंग्या संकट पर अपना एक अंतरिम निर्णय सुनाया है. यह अंतरिम निर्णय म्यांमार के लिए बाध्यकारी है और इसके विरुद्ध अपील नहीं हो सकती है, परन्तु न्यायालय के पास इसे लागू करवाने के साधन भी नहीं हैं.

अंतरिम निर्णय में क्या कहा गया है?

  • म्यांमार के सरकार को चाहिए कि वह शीघ्र ही अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए रोहिंग्या मुसलमान अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के प्रति अत्याचार को रोके.
  • यह कार्य जनसंहार अपराध रोकथाम एवं दंड संधि के प्रावधानों के अनुरूप किया जाए.
  • म्यांमार यह सुनिश्चित करे कि उसकी सेना या उसके नियंत्रणाधीन कोई अनियमित सैन्य इकाई जनसंहार जैसे अपराध में लिप्त नहीं हो.
  • जनसंहार से सम्बंधित साक्ष्यों को नष्ट करने से रोका जाए और उनका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए.

यह वाद ICJ कैसे पहुँचा?

जिस वाद में ICJ ने ऊपर लिखा निर्णय दिया है वह गाम्बिया द्वारा नवम्बर, 2019 में दायर किया गया था. इसमें म्यांमार पर जनसंहार जैसे गंभीरतम अंतर्राष्ट्रीय अपराध का आरोप लगाया गया था. इस काम में गाम्बिया को 57 देशों वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने समर्थन किया था.

म्यांमार की ओर से इसमें नोबेल पुरस्कार विजेता Aung San Suu Kyi ने प्रतिनिधित्व किया था.

रोहिंग्या कौन हैं?

  • रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रांत में रहने वाला एक समुदाय है जिसमें अधिकांश मुसलमान हैं.
  • उस देश में रोहिंग्याओं को पूर्ण नागरिकता प्राप्त नहीं है और उन्हें निवासी विदेशी अथवा सह-नागरिक के रूप में वर्गीकृत किया गया.
  • नस्ल की दृष्टि से ये म्यांमार में रहने वाले चीनी तिब्बती लोगों से अलग हैं और थोड़ा बहुत भारत के और बांग्लादेश के भारतीय आर्य जनों से मिलते-जुलते हैं.
  • इनकी भाषा और संस्कृति सभी देशों से बिल्कुल अलग है.
  • म्यांमार में 10 लाख से अधिक रोहिंग्या बसते हैं पर म्यांमार उन्हें अपना नागरिक मानने को तैयार नहीं है. न ही इस प्रजाति को कोई सरकारी ID या चुनाव में भाग लेने का अधिकार दिया गया है.

रोहिंग्या संकट का इतिहास

अधिकांश रोहिंग्या मुसलमान हैं लेकिन कुछ रोहिंग्या अन्य धर्मों का भी अनुसरण करते हैं. 2017 में रोहिंग्या समुदाय के लोगों के विरुद्ध म्यांमार में हिंसा हुई थी. इस हिंसा के बाद लाखों रोहिंग्या म्यांमार को छोड़ कर कहीं और चले गए. अब भी कई रोहिंग्या म्यांमार में ही रखाइन के राहत शिविरों में दिन काट रहे हैं.

रोहिंग्या समुदाय को सदियों पहले अराकान (म्यांमार) के मुग़ल शासकों ने यहाँ बसाया था, साल 1785 में, बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्ज़ा कर लिया था. उन्होंने हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों को खदेड़ कर बाहर भगाने की कोशिश की. इसी के बाद से बौद्ध धर्म के लोगों और इन मुसलमानों के बीच हिंसा और कत्लेआम का दौर शुरू हुआ जो अब तक जारी है.

क्या रोहिंग्या मुसलमान भारत के लिए खतरनाक हैं?

एक रिपोर्ट के अनुसार रोहिंग्या बड़ी संख्या में जम्मू के बाहरी भागों में और जम्मू के साम्बा और कठुआ इलाकों में बस गए हैं. ये इलाके हमारे अंतर्राष्ट्रीय सीमा से अधिक दूर नहीं है जो भारत की सुरक्षा के लिए एक खतरा है.

अता उल्लाह जो Arkan Rohingya Salvation Army का सरगना है, उसका जन्म कराँची, पाकिस्तान में हुआ था. इसकी परवरिश मक्का में हुई. ऐसा कहा जाता है कि रोहिंग्या मुसलमान पाकिस्तान के आतंकवाद संगठनों के साथ जुड़े हुए हैं और लगातार उनसे संपर्क में रहते हैं. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन द्वारा रोहिंग्या, जो बांग्लादेश के शरणार्थी कैंपों में रह रहे हैं, को आंतकवादी बनाया जा रहा है और पूरे देश की अशांति फैलाने के लिए इनका इस्तेमाल भी किया जा रहा है. सऊदी अरबिया का वहाबी ग्रुप इन्हें आंतकवाद की ट्रेनिंग दे रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) का मुख्यालय हॉलैंड शहर के  हेग में स्थित है. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में वैधानिक विवादों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना की गई है. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय परामर्श माना जाता है एवं इसके द्वारा दिए गये निर्णय को बाध्यकारी रूप से लागू करने की शक्ति सुरक्षा परिषद् के पास है. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के द्वारा राज्यों के बीच उप्तन्न विवादों को सुलझाया जाता है, जैसे – सीमा विवाद, जल विवाद आदि. इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न एजेंसियाँ अंतर्राष्ट्रीय विवाद के मुद्दों पर इससे परामर्श ले सकती हैं.

न्यायालय की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है. किसी एक राज्य के एक से अधिक नागरिक एक साथ न्यायाधीश नहीं हो सकते. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका कार्यकाल वर्षों का होता है. ये 15 न्यायाधीश निम्नलिखित क्षेत्रों से चुने जाते हैं –

  • अफ्रीका से तीन.
  • लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों से दो.
  • एशिया से तीन.
  • पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों में से पाँच.
  • पूर्वी यूरोप से दो.

न्यायाधीशों को प्राप्त स्वतंत्रता

  • एक बार यदि कोई व्यक्ति अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के लिए सदस्य चुन लिया जाता है तो वह किसी भी देश का प्रतिनिधि नहीं रह जाता है.
  • न्यायालय के सदस्य स्वतंत्र न्यायाधीश होते हैं जिनका पहला काम खुले दरबार में यह शपथ लेना होता है कि वे अपनी शक्तियों का प्रयोग निष्पक्ष रूप से और विवेक के साथ करेंगे.
  • न्यायाधीशों की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाने के लिए यह व्यवस्था है कि उन्हें तब तक नहीं हटाया जा सकता जब तक कि अन्य सदस्य इस बात पर सर्वसहमति से एक हों कि वे आवश्यक सेवा-शर्तों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं. वस्तुतः ऐसी स्थिति आज तक कभी आई नहीं है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : NavIC

संदर्भ

भारतीय क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली –  NavIC – में उपयोग के लिए जिन मोबाइल चिप समूहों का प्रयोग होगा उसका अनावरण पिछले दिनों Qualcomm Technologies द्वारा किया गया.

माहात्म्य

ये चिप समूह स्मार्ट फ़ोन के मूल उपकरण निर्माताओं (Original Equipment Manufacturers – Oems) के द्वारा Navic को अपनाने में तेजी लायेंगे क्योंकि इनके बल पर वे भारतीय बाजार में नए-नए मॉडल ला सकेंगे.

NAVIC क्या है?

  • इसका पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है.
  • यह एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नेविगेशन उपग्रह प्रणाली है जो भारत की मुख्य भूमि के चारों ओर 1,500 किमी. तक के क्षेत्र के विषय में स्थिति से सम्बंधित सूचना देने के लिए तैयार की गई है.
  • NAVIC दो प्रकार की सेवाएँ देता है – 1. मानक स्थिति सेवाएँ (Standard Positioning Services) जो सभी उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध होंगी. सीमित सेवाएँ (Restricted Services) जो केवल प्राधिकृत उपयोगकर्ताओं को मिलेंगी.

NAVIC का प्रयोग किन-किन कार्यों के लिए हो सकता है?

  • धरती, वायु और समुद्र में नेविगेशन
  • आपदा प्रबंधन
  • वाहनों और पानी के जहाज़ों का पता लगाना
  • मोबाइल फोन पर स्थिति की सूचना देना
  • सटीक समय बताना
  • मानचित्र बनाने और भूमि संरक्षण के लिए आँकड़े इकठ्ठा करना.
  • हाइकर और पर्यटकों को धरती से सम्बंधित नेविगेशन में सहायता पहुँचाना.
  • चालकों को दृश्य एवं श्रव्य नेविगेशन की सुविधा देना.

NAVIC में कितने उपग्रह लगे हैं?

NAVIC एक क्षेत्रीय प्रणाली है और इसलिए इसके लिए सात उपग्रह काम करेंगे. इन उपग्रहों में से तीन हिन्द महासागर के ऊपर भूस्थैतिक दशा में रहेंगे और चार ऐसे होंगे जो भूसमकालिक होंगे अर्थात् प्रत्येक दिन आकाश में एक ही समय और एक ही बिंदु पर दिखेंगे. धरती पर इस प्रणाली के लिए 14 स्टेशन काम करेंगे.

स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली आवश्यक क्यों?

स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली होने से देश की सुरक्षा के विषय में सटीक जानकारी मिलती है. इसके प्रयोग से राहत का कार्य भी अच्छे ढंग से किया जा सकता है.


Prelims Vishesh

Vyom Mitra :-

  • इसरो ने व्योम मित्र नामक एक महिला रोबोट अंतरिक्षयात्री का निर्माण किया है जिसका प्रयोग दिसम्बर 2020 में GSLV III रॉकेट की मानवरहित उड़ान तथा जुलाई 2021 की दूसरी मानवरहित उड़ान के लिए किया जाएगा.
  • व्योम मित्र में एक सर, दो बाहें और एक धड़ है.

Reciting preamble is compulsory in Maharashtra :

  • महाराष्ट्र सरकार ने जनवरी 26 से सभी पाठशालाओं में संविधान की प्रस्तावना पढ़ना अनिवार्य कर दिया है.
  • इसका उद्देश्य बच्चों में संविधान के न्याय, स्वतंत्रता एवं समानता के सिद्धांत भरें जाएँ.

Submarine-launched ballistic missile, K-4 :-

  • भारत ने सफलतापूर्वक K-4 नामक मिसाइल का परीक्षण किया है जिसका रेंज 3,500 किलोमीटर है.
  • इसकी चक्रीय त्रुटि संभाव्यता (Circular Error Probability – CEP) कई देशों की ऐसी मिसाइलों से कहीं अधिक है.
  • विदित हो कि CEP से ही किसी मिसाइल की सटीकता निर्धारित होती है. CEP जितनी कम होगी उतनी ही सरलता से मिसाइल अपने लक्ष्य को भेद पायेगा.

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