Sansar डेली करंट अफेयर्स, 24 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 24 November 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Lok Sabha Speaker

संदर्भ

हाल ही में, विजय कुमार सिन्हा को बिहार विधानसभा अध्यक्ष चुना गया है.

विधानसभा अध्यक्ष

  • विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा एवं विधानसभा सचिवालय का प्रमुख, पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष) होता है, जिसे संविधान, प्रक्रिया, नियमों एवं स्थापित संसदीय परंपराओं के अन्तर्गत व्यापक अधिकार होते हैं. सभा के परिसर में उनका प्राधिकार सर्वोच्च है.
  • सभा की व्यवस्था बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होती है और वे सभा में सदस्यों से नियमों का पालन सुनिश्चित कराते हैं. सभा के सभी सदस्य अध्यक्ष की बात बड़े सम्मान से सुनते हैं.
  • अध्यक्ष सभा के वाद-विवाद में भाग नहीं लेते, अपितु वे विधान सभा की कार्यवाही के दौरान अपनी व्यवस्थाएँ/निर्णय देते हैं.
  • सभा में अध्यक्ष और उनकी अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष सभा का सभापतित्व करते हैं और दोनों की अनुपस्थिति में सभापति तालिका का कोई एक सदस्य. सभापति तालिका की घोषणा प्रत्येक सत्र में माननीय अध्यक्ष सदन में करते हैं.

चयन प्रक्रिया

प्रत्येक राज्य की विधान सभा, यथाशक्य शीघ्र अपने दो सदस्यों को अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनती है और जब-जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद रिक्त होता है, तब-तब विधान सभा किसी अन्य सदस्य को, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष चुनती है.

पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाने की प्रक्रिया

विधान सभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के रूंप में पद धारण करने वाला सदस्य-

  1. यदि विधान सभा का सदस्य नहीं रहता है तो अपना पद रिक्त कर देगा.
  2. किसी भी समय, यदि वह सदस्य अध्यक्ष है तो उपाध्यक्ष को संबोधित और यदि वह सदस्य उपाध्यक्ष है तो अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा.
  3. विधान सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा, परंतु खंड (ग) के प्रयोजन के लिए कोई संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जाएगा, जब तक कि उस संकल्प को प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो, परंतु यह और कि जब कभी विधान सभा का विघटन किया जाता है तो विघटन के पश्चात होने वाले विधान सभा के प्रथम अधिवेशन के ठीक पहले तक अध्यक्ष अपने पद को रिक्त नहीं करेगा.

पद में निहित शक्तियां

अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूंप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति-

  • जब अध्यक्ष का पद रिक्त है तो उपाध्यक्ष या यदि उपाध्यक्ष का पद भी रिक्त है तो विधान सभा का ऐसा सदस्य, जिसको राज्यपाल इस प्रयोजन के लिए नियुक्त करे, उस पद के कर्तव्यों का पालन करेगा.
  • विधान सभा की किसी बैठक से अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष या यदि वह भी अनुपस्थित है तो ऐसा व्यक्ति, जो विधान सभा की प्रक्रिया के नियमों द्वारा अवधारित किया जाए या यदि ऐसा कोई व्यक्ति उपस्थित नहीं है तो ऐसा अन्य व्यक्ति, जो विधान सभा द्वारा अवधारित किया जाए, अध्यक्ष के रूंप में कार्य करेगा.

विवाद की स्थिति में

जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तब उसका पीठासीन न होना-

  • विधान सभा की किसी बैठक में, जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तब अध्यक्ष या जब उपाध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विचाराधीन है, तब उपाध्यक्ष, उपस्थित रहने पर भी, पीठासीन नहीं होगा और संविधान के अनुच्छेद 180 के खंड (2) के उपबंध ऐसी प्रत्येक बैठक के संबंध में वैसे ही लागू होंगे, जैसे वह उस बैठक के संबंध में लागू होते हैं, जिससे, यथास्थिति, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष अनुपस्थित है.
  • जब अध्यक्ष को उसके पद से हटाने का कोई संकल्प विधान सभा में विचाराधीन है, तब उसको विधान सभा में बोलने और उसकी कार्यवाहियों में अन्यथा भाग लेने का अधिकार होगा और वह अनुच्छेद 189 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे संकल्प पर या ऐसी कार्यवाहियों के दौरान किसी अन्य विषय पर प्रथमत: ही मत देने का हकदार होगा, किंतु मत बराबर होने की दशा में मत देने का हकदार नहीं होगा.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : POSHAN

संदर्भ

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार पोषण-प्लस रणनीति (POSHAN-plus strategy) के लक्ष्यों को पूर्ण करने के लिए शीघतापूर्वक सक्षम होने की आवश्यकता है. राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) की समीक्षा रिपोर्ट में वर्णित किया गया है कि विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) द्वारा परिभाषित वैश्विक लक्ष्य की तुलना में भारत के लक्ष्य रूढ़िवादी हैं.

गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता (anaemia) के प्रसार के स्तर को वर्ष 2016 के 50.3 प्रतिशत से वर्ष 2022 में 34.4 प्रतिशत तक कम करने और किशोरी लड़कियों में प्रसार के स्तर को वर्ष 2016 के 52.9 प्रतिशत से वर्ष 2022 में 99.66 प्रतिशत तक कम करने के लक्ष्य को रूढ़िवादी माना गया है.

राष्ट्रीय पोषण मिशन

POSHAN अभियान (National Nutrition Mission) का आरम्भ प्रधानमन्त्री द्वारा राजस्थान के झुंझुनू में 8 मार्च, 2018 में किया गया था. इस अभियान का लक्ष्य है छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के बीच कुंठित विकास, कुपोषण, रक्ताल्पता और साथ ही जन्म के समय शिशु के भार की अल्पता की दर को क्रमशः 2%, 2%, 3 % और 2% प्रतिवर्ष घटाना. मिशन का एक लक्ष्य यह भी है कि 0 से 6 साल के बच्चों में शारीरिक विकास में कमी की दर को वर्तमान के 38.4% से घटाकर 2022 तक 25% कर दिया जाए. सरकार पोषण अभियान को 2020 तक विभिन्न चरणों में देश के सभी 36 राज्यों/केंद्र शाषित क्षेत्रों तथा 718 जिलों तक ले जाना चाहती है.

अनुशंसाएँ

  • व्यवहारजन्य परिवर्तन हस्तक्षेपों और समेकित बाल विकास सेवाओं के माध्यम से पूरक खाद्य अनुपूरकों दोनों का उपयोग करके पूरक आहार में सुधार करना.
  • व्यवहारजन्य परिवर्तन: “जल, स्वच्छता, साबुन से हाथ धोना और बच्चों के मल के स्वच्छ निपटान” तरीकों में सुधार करना है.
  • पोषण प्लस रणनीति: विभिन्‍न मोर्चों पर त्वरित कार्रवाई करना.
  • अभियान के चार स्तंभों को निरंतर मजबूत करना.
  • अन्य सामाजिक निर्धारकों (स्वास्थ्य, शिक्षा, शीघ्र विवाह आदि) पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना.
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन/ICDS वितरण तंत्र की प्रशासन संबंधी चुनौतियों का समाधान करना.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन तथा दीन दयाल अनुसंधान संस्थान मिल कर पोषण अभियान के अंतर्गत एक पोषण मानचित्र तैयार कर रहे हैं.

पोषण मानचित्र का उद्देश्य

पोषण मानचित्र का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में उपजाए जाने वाली अनाजों का मानचित्र तैयार करना है जिससे कि स्थानीय क्षेत्रों में पोषणयुक्त प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों को प्रोत्साहन दिया जा सके.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत में कुपोषण में वृद्धि हेतु उत्तरदायी कारक

उत्पादन और पहुंच संबंधित विरोधाभास: भारत में, विगत दो दशकों में खाद्यानों की पैदावार में लगभग 33% की वृद्धि हुई है. हालांकि, जनसंख्या वृद्धि, असमानता, भोजन के अपव्यय एवं ह्रास और निर्यात के कारण चावल, गेहूं तथा अन्य खाद्यानों तक उपभोक्ता की पहुंच में समान दर से वृद्धि नहीं हुई है.

उपभोग में बढ़ती विविधता: ग्रामीण और शहरी भारत दोनों में अनाज के माध्यम से प्राप्त की जाने वाली ऊर्जा व पोषण की मात्रा में कमी हुई है. वर्तमान में, बड़े पैमाने पर अन्य खाद्य पदार्थों, जैसे- दूध एवं डेयरी उत्पादों, तेल एवं बसा और अपेक्षाकृत अस्वास्थ्यकर भोजन (यथा- फास्ट फूड, प्रसंस्कृत भोजन और शर्करा) के उपभोग की प्रवृत्ति में वृद्धि हुई है. इसने भारत में मोटापे की उभरती समस्‍या में प्रमुखता से योगदान दिया है.

लक्षित सार्वजतिक वितरण प्रणाली (PDS) की असफलता और पोषक तत्वों से भरपूर खाद पदार्थों के सेवन में कमी: उल्लेखनीय है कि PDS द्वारा भारत में सभी राज्यों में लोगों को महत्त्वपूर्ण पोषण संबंधी पूरकता प्रदान की गई है. हालांकि, इसके निम्नस्तरीय लक्ष्यीकरण के कारण, निर्धनतम 30 प्रतिशत परिवारों की भोजन तक पहुँच संबंधी क्षमता अपेक्षाकृत कम रही है.

देश में पोषण की स्थिति में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम

पोषण अभियान (राष्ट्रीय पोषण मिशन)

उद्देश्य : 2022 तक ठिगनेपन, अल्प पोषण, एनीमिया (छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोर लड़कियों में) एवं जन्म के समय अल्प वजन के स्तर को क्रमश: 2%, 2%, 3% और 2% प्रति वर्ष कम करना तथा वर्ष 2022 तक ठिगनेपन के स्तर को 38.4% (NFHS-4) से कम कर 25% (Mission 25 by 2022) तक करना.

राष्ट्रीय पोषण रणनीति

यह एक 10-सूत्रीय पोषण कार्य योजना है. इसमें गवर्नेंस (अभिशासन) के स्तर पर किए जाने वाले सुधार शामिल हैं. इसके अतिरिक्त भारत में अल्प पोषण की समस्या में तीव्रता से कमी लाने हेतु यह एक ऐसी रुपरेखा की परिकल्पना करती है, जिनमें पोषण के चार प्रमुख निर्धारकों, यथा- स्वास्थ्य सेवाएँ, भोजन, पेयजल एवं स्वच्छता और आय एवं आजीविका का समन्वित योगदान शामिल हो.

राष्ट्रीय पोषण रणनीति की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • यह सर्वाधिक सुभेद्य और संवेदनशील आयु समूहों पर ध्यान केन्द्रित करते हुए 2030 तक कुपोषण के सभी प्रकारों को कम करने का प्रयास करता है.
  • राज्य, जिला और स्थानीय स्तरों पर अधिक लचीलापन तथा निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करते हुए विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • रणनीति में बच्चों में स्वास्थ्य देखभाल और पोषण स्तर तथा मातृ देखभाल में सुधार पर केंद्रित पहलों के प्रारंभ का प्रस्ताव किया गया है.
  • रणनीति में परिकल्पित शासन संबंधी सुधारों में शामिल हैं: ICDS, NHM और स्वच्छ भारत के लिए राज्य एवं जिला कार्यान्वयन योजनाओं का अभिसरण.
  • बाल कुपोषण के उच्चतम स्तर वाले जिलों में सबसे सुभेद्य समुदायों पर ध्यान केन्द्रित करना; तथा
  • प्रभाव के साक्ष्य के आधार पर सेवा वितरण मॉडल.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Energy

Topic : Global Centre for Nuclear Energy Partnership

संदर्भ

भारत एवं अमेरिका ने एक आर दशक तक परमाणु ऊर्जा साझेदारी का विस्तार किया है. वर्ष 2010 में, भारत और अमेरिका ने वैश्विक आणविक ऊर्जा भागीदारी केंद्र (Global Centre for Nuclear Energy Partnership : GCNEP)  पर सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे. इस समझौता ज्ञापन को अब 10 और वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया है.

विस्तारित समझौता ज्ञापन (MoU) निम्नलिखित हेतु प्रतिबद्ध है जैसे:-

  • परमाणु संरक्षा और सुरक्षा को गति देने के लिए सहयोग को बढ़ावा देना.
  • परमाणु और अन्य रेडियोधर्मी सामग्री सुरक्षा पर वार्ता को सुदृढ़ करना.
  • GCNEP की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता का निर्माण करना.

मुख्य बिंदु

  • GCNEP विश्व का प्रथम परमाणु ऊर्जा साझेदारी केंद्र और परमाणु ऊर्जा विभाग के तत्वावधान में छठी अनुसंधान एवं विकास इकाई है.
  • इसे भारत सरकार द्वारा वर्ष 2010 में अमेरिका, फ्रांस और रूस की सहायता से हरियाणा में स्थापित किया गया था.
  • यह इच्छुक देशों और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency) के सहयोग से प्रौद्योगिकी, मानव संसाधन विकास, शिक्षा तथा प्रशिक्षण को शामिल करने एवं सूचीबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास को गति देने हेतु क्षमता निर्माण में सहायता करता है.

वैश्विक आणविक ऊर्जा भागीदारी केंद्र

  • वर्ष 2008 में हस्ताक्षरित भारत–अमेरिका परमाणु सहयोग समझौते का एक हिस्सा है.
  • समझौते का एक प्रमुख पहलू यह था कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) ने भारत को एक विशेष छूट प्रदान की थी, जिसने इसे लगभग एक दर्जन देशों के साथ सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर करने में सक्षम बनाया.
  • इसने भारत को अपने नागरिक और सैन्य कार्यक्रमों को पृथक करने में भी समर्थ बनाया.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : IP related issues.

Topic : Kashmir saffron gets GI tag

संदर्भ

कश्मीर में पैदा होने वाले केसर को ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (जीआई) प्रमाण पत्र मिल गया है. यह कश्मीर के इस उत्पाद को दुनियाभर में पहचान दिलाने के लिहाज से प्रमुख ऐतिहासिक कदम है. जीआई प्रमाण पत्र मिलने से कश्मीरी केसर में मिलावट के रास्ते बंद हो जाएंगे. इसके बाद अच्छी केसर के लिये अच्छे दाम मिल सकेंगे.

केसर के बारे में

  • केसर का इस्तेमाल सेहत और सौंदर्यता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है. केसर सबसे ज्यादा जम्मू-कश्मीर के पुलवामा इलाके में होती है. केसर को रोपने का काम अगस्त- सितंबर के दौरान होता है. इसके अलावा अक्टूबर से दिसंबर तक केसर के फूल निकल आते हैं.
  • कश्मीर को गोल्डन स्पाइस कहा जाता है और भारत में केसर की खेती सिर्फ जम्मू-कश्मीर में होती है. दुनिया में जम्मू-कश्मीर का केसर क्वालिटी के मामले में सर्वोत्तम माना जाता है और उत्पादन के लिहाज से भी भारत ईरान के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर है.

GI Tag किसे दिया जाता है?

जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में पैदा होते हैं. इन उत्पादों की खासियत और प्रतिष्ठा उस क्षेत्र विशेष में पैदा होने की वजह से स्थापित होती है. यह टैग मिलने के बाद संबंधित उत्पाद का नाम लेकर बाजार में किसी और चीज को बेचने पर पाबंदी लग जाती है.

  • GI का full-form है – Geographical Indicator
  • भौगोलिक संकेतक के रूप में GI टैग किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है.
  • नाम से स्पष्ट है कि यह टैग केवल उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष भगौलिक क्षेत्र में उत्पादित किये गए हों.
  • इस टैग के कारण उत्पादों कोकानूनी संरक्षण मिल जाता है.
  • यह टैग ग्राहकों को उस उत्पाद की प्रामाणिकता के विषय में आश्वस्त करता है.
  • डब्ल्यूटीओसमझौते के अनुच्छेद 22 (1) के तहत GI को परिभाषित किया गया है.
  • औद्योगिकसम्पत्ति की सुरक्षा से सम्बंधित पहली संधि के अनुसार GI tag को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का एक अवयव माना गया है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर GI WTO के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के व्यापार से सम्बंधित पहलुओं पर हुए समझौते से शाषित होता है. भारत में वह भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षाअधिनयम, 1999 से शाषित होता है.

भौगोलिक संकेतक पंजीयक

  • भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षा) अधिनयम, 1999 के अनुभाग 3 के उप-अनुभाग (1) के अंतर्गत पेटेंट, रूपांकन एवं व्यापार चिन्ह महानिदेशक की नियुक्ति GI पंजीयक के रूप में की जाती है.
  • पंजीयक को उसके काम में सहयोग करने के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर अधिकारियों को उपयुक्त पदनाम के साथ नियुक्त करती है.

Prelims Vishesh

AUSINDEX :-

  • फ्रांस, भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास AUSINDEX में सम्मिलित होने के लिए उत्सुक हैं. AUSINDEX (ऑस्ट्रेलिया-भारत नौसैनिक अभ्यास), भारतीय नौसेना और रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना के मध्य किया जाने वाला एक द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास है.
  • इस द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास का आयोजन भारतीय नौसेना तथा रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नौसेना (Royal Australian Navy-RAN) के बीच आपसी सहयोग एवं पारस्परिकता को बढ़ाने के लिये तथा कर्मचारियों को आपस में अपने पेशेवर विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करने के लिये किया जायेगा.

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