Sansar डेली करंट अफेयर्स, 23 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 23 September 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2020

संदर्भ

हाल ही में लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020 पास हो गया. इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम 2010 में संशोधन करना है.

संशोधन के मुख्य प्रावधान

  • संशोधन अधिनियम के द्वारा, कुछ व्यक्तियों को किसी भी विदेशी योगदान को स्वीकार करने के लिए निषेध कर दिया गया है. जिसमे चुनावी उम्मीदवार ,समाचार पत्रों के संपादक या प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी, किसी भी विधायिका के सदस्य, तथा राजनीतिक दल सम्मिलित हैं.
  • विधेयक इस सूची में लोक सेवकों (भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत परिभाषित) को जोड़ता है. लोक सेवक में कोई भी व्यक्ति शामिल होता है जो सरकार की सेवा में होता है, तथा सरकार द्वारा उसे किसी भी सार्वजनिक कर्तव्य के प्रदर्शन के लिए पारिश्रमिक दिया जाता है.
  • अधिनियम के अंतर्गत, विदेशी योगदान को किसी अन्य व्यक्ति को तब तक स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है जब तक कि ऐसे व्यक्ति को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए पंजीकृत नहीं किया जाता है. यदि व्यक्ति प्राप्तकर्ता के रूप में पंजीकृत नहीं है तो उसे केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी. अधिनियम के अंतर्गत ‘व्यक्ति’ शब्द में एक व्यक्ति, एक एसोसिएशन या एक पंजीकृत कंपनी शामिल है.
  • अधिनियम में कहा गया है कि पंजीकृत होने या अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त किसी भी व्यक्ति को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, किसी संस्था को अपने पदाधिकारियों, निदेशकों या प्रमुख अधिकारियों की आधार संख्या प्रदान करनी होगी . विदेशी निकाय होने ही स्थिति में उन्हें पहचान के लिए पासपोर्ट या ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड की एक प्रति प्रदान करनी होगी.
  • अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत व्यक्ति को केवल उनके द्वारा निर्दिष्ट एक निर्धारित बैंक की एक शाखा में विदेशी योगदान को स्वीकार करना होगा. हालांकि, वे योगदान के उपयोग के लिए अन्य बैंकों में अधिक खाते खोल सकते हैं.
  • विधेयक में यह कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित भारतीय स्टेट बैंक, नई दिल्ली की ऐसी शाखा में बैंक द्वारा “एफसीआरए खाता” के रूप में निर्दिष्ट खाते में केवल विदेशी अंशदान प्राप्त किया जाना चाहिए.
  • विदेशी योगदान के अलावा कोई धन इस खाते में प्राप्त या जमा नहीं किया जाना चाहिए. प्राप्त योगदान को रखने या उपयोग करने के लिए व्यक्ति अपनी पसंद के किसी भी अनुसूचित बैंक में एक और एफसीआरए खाता खोल सकता है.
  • यदि किसी व्यक्ति ने (जिसने विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अर्हता प्राप्त की हो ) नियमो का उलंघन किया हो तो केंद्र सरकार उनके पंजीकरण को रद्द करने की क्षमता रखती है.
  • अधिनियम के अंतर्गत, हर व्यक्ति को, जिसे पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया है,पंजीकरण समाप्ति के छह महीने के भीतर प्रमाणपत्र को नवीनीकृत करना होगा.
  • विधेयक उपबंध करता है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रमाण पत्र को नवीनीकृत करने से पहले एक जांच का आयोजन कर सकती है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति धार्मिक रूपांतरण में, धन के विचलन या धन के दुरुपयोग के लिए दोषी नहीं पाया गया हो .
  • अधिनियम के अंतर्गत , विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले व्यक्ति को केवल उसी उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करना चाहिए जिसके लिए योगदान प्राप्त होता है.उस उद्देश्य को प्राप्त करने के निम्मित निकाय उस राशि के 20% (संशोधन पूर्व 50%) का उपयोग ही प्रशासनिक व्यय हेतु कर सकता है.
  • विधेयक केंद्र सरकार को एक व्यक्ति को अपने पंजीकरण प्रमाण पत्र को समर्पण करने की अनुमति देने के लिए एक प्रावधान जोड़ता है.
  • अधिनियम के अंतर्गत, सरकार किसी व्यक्ति के पंजीकरण को 180 दिनों से अधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकती है. इस तरह के निलंबन को अतिरिक्त 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है

इस विधेयक से संबन्धित विवाद

  • प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए विदेशी निधियों के उपयोग को सीमित करने संबंधी प्रावधान. यह प्रावधान अनुसंधान और पक्षसमर्थन संगठनों के प्रशासनिक कार्यों संबंधी लागतों को प्रभावित करेगा.
  • FCRA द्वारा अनुमोदित संस्थाओं के लिए ‘अनप्रयुक्त विदेशी अनुदान राशि को प्रयोग करने अथवा शेष विदेशी अनुदान को प्राप्त करने से रोकने के लिए’ केंद्र सरकार को अविलंबित जांच करने की अनुमति दिए जाने संबंधी प्रावधान.

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के बारे में

  • विदेशी योगदान के इस्तेमाल को नियमित करने के लिए भारत सरकार ने विदेशी योगदान की स्वीकृति और विनियमन के उद्देश्य से वर्ष 1976 में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) लागू किया. वर्ष 2010 में इस अधिनियम संशोधन करते हुए कई नए प्रावधान भी जोड़े गये.
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के अंतर्गत राजनीतिक प्रकृति का कोई भी संगठन, ऑडियो, ऑडियो विजुअल न्यूज या करंट अफेयर्स कार्यक्रम के निर्माण और प्रसारण में लगे किसी भी संगठन को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिये प्रतिबंधित किया गया है.
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 को लोगों या एसोसिएशन या कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान के इस्तेमाल को नियमित करने के लिए लागू किया गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि के लिए विदेशी योगदान को लेने या इसके इस्तेमाल पर पाबंदी है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 में संशोधन का प्राथमिक उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को विदेशों से मिलने वाले अंशदान और उसके उपयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है. हालाँकि संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों से यह उद्देश्य सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं होता है, इसके अतिरिकित आलोचक सरकार पर हितधारकों से परामर्श न लेने का भी आरोप भी लगा रहे हैं. आवश्यक है कि सरकार विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) द्वारा उठाए गए मुद्दों पर पुनर्विचार करे और यदि संभव हो तो विधेयक में संशोधन किया जाए.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : MAJOR PORT AUTHORITIES BILL, 2020

संदर्भ

हाल ही में लोकसभा ने बृहद पत्तन प्राधिकरण विधेयक, 2020 (Major Port Authorities Bill, 2020) पारित किया.

पृष्ठभूमि

देश के बड़े-बड़े बंदरगाहों के प्रशासन के लिए 1963 में बने कानून के स्थान पर भारत सरकार एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है. अभी बड़े-बड़े पत्तनों का प्रशासन 1963 के पत्तन कानूनों के अंतर्गत होता है. अचल संपत्तियों के सृजन की दिशा में इन पत्तनों में अपेक्षित स्तर का काम नहीं हुआ है और बृहद पत्तन टैरिफ प्राधिकरण (Tariff Authority for Major Ports – TAMP) के पुराने विनियमों के कारण ढुलाई की लागत में भी उछाल देखा गया है.

बृहद पत्तन प्राधिकरण विधेयक में दिए गये प्रस्ताव

  1. प्रस्तावित कानून का उद्देश्य पत्तनों की समग्र कार्यकुशलता में बढ़ोतरी करना है.
  2. अब बड़े-बड़े बन्दरगाह पत्तन से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए टैरिफ निर्धारित कर सकेंगे तथा साथ ही उनके साथ काम करने को इच्छुक निजी निर्माताओं के लिए शर्तें रख सकेंगे.
  3. प्रत्येक बंदरगाह का प्रशासन एक पत्तन प्राधिकरण करेगा जिसे विभिन्न पत्तन सेवाओं के लिए टैरिफ निश्चित करने की शक्ति होगी.
  4. विधेयक के अनुसार पत्तन प्राधिकरण के निर्णयों की समीक्षा के लिए सर्वोच्च स्तर पर एक न्याय निर्णय करने वाले बोर्ड का गठन होगा जिसके पास पत्तन प्राधिकरणों तथा PPP ऑपरेटरों के बीच उठने वाले विवादों को सुलझाने की शक्ति होगी.
  5. प्रमुख बंदरगाहों के कर्मचारियों के पेंशन लाभ समेत वेतन और भत्ते और सेवा की शर्तों और प्रमुख बंदरगाहों के तटकर को सुरक्षा देने के लिए प्रावधान किया गया है.

भारत के बड़े बंदरगाह कौन से हैं?

वर्तमान में भारत में ये 12 बड़े बंदरगाह हैं – दीनदयाल (पुराना नाम कांडला), मुंबई, जेएनपीटी, मोरमुगाँव, न्यू मंगलौर, कोचीन, चेन्नई, कामराजार (पहले एन्नोर), वीओ चिदंबरनार, विशाखापट्टनम, पारादीप और कोलकाता (हल्दिया सहित).


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Related to Health.

Topic : Brucellosis Diseases

संदर्भ

डेयरी उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाने वाले ब्रुसेलोसिस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए हाल ही मे भारत सरकार के अनुसंधान निकाय आईसीएआर- आईवीआरआई ने हेस्टर बायोसाइंस लिमिटेड के साथ मिलकर एक नई पीढ़ी का टीका विकसित करने की तकनीक हासिल कर ली है. ज्ञातव्य है कि हेस्टर बायोसाइंस लिमिटेड ने ब्रूकेला एबोर्टस एस 19 डेल्टा वैक्सीन विकसित करने के लिए आईसीएआर-आईवीआरआई से समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.’

ब्रुसेलोसिस बीमारी

  • ब्रुसेल्लोसिस गाय, भैंस, भेड़, बकरी, शुकर एवं कुत्तों में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी हैं. ये एक प्राणीरूजा अथवा जीव जनति (Zoonotic) बीमारी है जो पशुओं से मनुष्यों एवं मनुष्यों से पशुओं में फैलती है.
  • इसे “लहरदार बुखार”, “भूमध्यसागरीय ज्वर (भूमध्य सागर के नज़दीक बसने वाले देशों में होने वाला बुख़ार)”, माल्टा ज्वर” के नाम से भी जाना जाता है.
  • इस बीमारी से ग्रस्त पशु 7-9 महीने के गर्भकाल मैं गर्भपात हो जाता है. ये रोग पशुशाला में बड़े पैमाने पर फैलता है तथा पशुओं में गर्भपात हो जाता है जिससे भारी आर्थिक हानि होती है.
  • ये बीमारी मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्त्वपूर्ण बमारी है. विश्व स्तर पर लगभग 5 लाख मनुष्य हर साल इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं. मनुष्य में संक्रमण का प्रमुख स्रोत कच्चे दूध का सेवन एवं कच्चे दूध से निर्मित चीज है. यह पशुधन (व्यावसायिक) से होने वाला रोग भी है. यह उन लोगों को होता है, जो कि पशुधन के क्षेत्र में कार्य करते है. यह सभी आयु वर्ग के समूहों तथा स्त्री एवं पुरुष दोनों लिंगों को प्रभावित करता है.
  • गाय भैंस में ये रोग ब्रूसेल्ला एबोरटस नामक जीवाणु द्वारा होता है. ये जीवाणू गाभिन पशु के बच्चेदानी में रहता है तथा अंतिम तिमाही में गर्भपात करता है. एक बार संक्रमित हो जाने पर पशु जीवन काल तक इस जीवाणू को अपने दूध तथा गर्भाश्य के स्त्राव में निकालता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure.

Topic : Shinkun La Tunnel: DPR Work On World’s Longest High-Altitude Tunnel Connecting Manali-Kargil Expedited

संदर्भ

राष्ट्रीय राजमार्ग व अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने विश्व की सबसे लंबी ऊँचाई पर स्थित शिंकुन ला सुरंग (13.5 किमी) के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) कार्य और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख व हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में इससे जुड़े उपमार्गों पर निर्माण कार्य तेज़ी से शुरू कर दिया है.

Shinkun La Tunnel

शिंकुन ला सुरंग के बारे में

  • भारत में शिंगो ला एक उच्च पर्वतीय दर्रा है जोकि जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बीच की सीमा पर स्थित है. इस दर्रे को लुगनाक घाटी- ज़ांस्कर में प्रवेश बिंदु के रूप में माना जा सकता है. ज़ांस्कर की तरफ से सबसे नज़दीकी गाँव कुर्गियाख है और लाहौल की तरफ सबसे नज़दीकी गाँव चिक्का है.
  • शिंकुन ला सुरंग बनने के बाद यह विश्व की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड सुरंग होगी.
  • इस सुरंग की लंबाई 13.5 किलोमीटर है और इस सुरंग के निर्माण के बाद हिमाचल प्रदेश के मनाली तथा कारगिल राजमार्ग को वर्षभर खुला रखने में मदद मिलेगी.
  • इसके लिए सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) कार्य और केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में इससे जुड़े उपमार्गों पर शीघ्रता से निर्माण करना प्रारंभ कर दिया है.

राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड

  • राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की एक पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है.
  • कंपनी पड़ोसी देशों के साथ,अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले देश के हिस्सों में अंत: परस्पर संबद्ध (इंटर-कनेक्टिंग) सड़कों सहित राष्ट्रीय राजमार्ग एवं रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़कों को उन्नत बनाने, सर्वेक्षण करने, स्थापना करने, डिजाइन करने, निर्माण करने, प्रचालन करने, अनुरक्षण करने एवं उन्नयन करने का कार्य करती है जिससे क्षेत्रीय संपर्क बढ़ने से सीमापार व्यापार एवं वाणिज्य को प्रोत्साहन मिलेगा तथा भारत की अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को सुरक्षा प्रदान करने में सहायता मिलती है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure: Energy, Ports, Roads, Airports, Railways etc.

Topic : Increase in the share of renewable and non-fossil fuels in energy production

संदर्भ

एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में ऊर्जा उत्पादन में नवीकरणीय एवं गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है.

कुछ महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • भारत के कुल विद्युत उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा वित्त वर्ष 2019-2020 के 24.9% की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 के प्रथम 5 महीनों में 30% तक बढ़ गया है.
  • तीन राज्य यथा कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात संयुक्त रूप से 88,793 मेगावाट की (देश की लगभग 46% ऊर्जा क्षमता) संस्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वाले राज्य हैं.
  • तापविद्युत परियोजनाओं को वित्तीय तनाव और विद्युत खरीद समझौते (power purchase agreements) में कमी के कारण अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ रहा है.
  • प्रधानमंत्री-कुसुम योजना (PM-KUSUM) ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर (RTS) प्रोग्राम, ग्रीन टर्म अहेड मार्केट, राष्ट्रीय पवन-सौर हाइब्रिड नीति आदि नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि को प्रोत्साहन प्रदान करने वाली पहलें हैं.

हिस्सेदारी में वृद्धि क्यों हुई?

  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है.
  • नवीकरणीय ऊर्जा की लागत में विगत कुछ वर्षों में क्रमिक गिरावट दृष्टिगोचर हुई है.
  • स्वच्छ ऊर्जा खंड से ऊर्जा क्रय करने पर “मस्ट रन स्टेटस” (must run status) प्राप्त होना.
  • यह स्टेटस अथवा दर्जा यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी प्रकार के व्यावसायिक कारणों से इन संयंत्रों से विद्युत की कटौती नहीं होगी. इसने लॉकडाउन के दौरान खपत में गिरावट के बावजूद इन विद्युत्‌ स्रोतों द्वारा अधिक उत्पादन को जारी रखने में सहायता की थी.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

किसी भी देश के मानव विकास सूचकांक एवं ऊर्जा उपभोग में पूरक संबंध होता है. वस्तुतः ऊर्जा ही किसी भी देश के आर्थिक सामाजिक विकास की धुरी है. ऊर्जा संसाधनों के आधार पर ही किसी राष्ट्र का आर्थिक विकास संभव है. अतः ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत होना अत्यधिक आवश्यक है. जनांकिकीय लाभांश को प्रतिफल में बदलने तथा वैश्विक महाशक्ति बनने हेतु भारत को ‘ऊर्जा सुरक्षा’ के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है. इसके अलावा बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु ऊर्जा सुरक्षा आवश्यक है. आधारभूत ढांचे की दृढ़ता के लिये भी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ आवश्यक है. कौशल विकास सृजन एवं विनिर्माण क्षमता के विकास के लिये ऊर्जा सुरक्षा महत्त्वपूर्ण है.

नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों से प्राप्त ऊर्जा को नवीकरणीय ऊर्जा कहते है. ज्ञातव्य है कि नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन कभी समाप्त न होने वाले संसाधान होते हैं, जिन्हें फिर से प्राप्त किया जा सकता है. वस्तुतः पृथ्वी इनका प्राकृतिक रूप से पुनर्भरण करती रहती है. इसमें सौर ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोमास ऊर्जा आदि शामिल है. ये पृथ्वी पर असीमित मात्र में उपलब्ध हैं तथा प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण हितैषी हैं. वस्तुतः पारंपरिक जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से अत्यधिक जल, वायु व मृदा प्रदूषण होता है जो भूमंडलीय ऊष्मन का कारण है. नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन पारंपरिक ऊर्जा संसाधनों की अपेक्षा सस्ते एवं अधिक वहनीय हैं. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत ही भविष्य के ऊर्जा संसाधन है जो किसी भी राष्ट्र के धारणीय विकास को सुनिश्चित करेंगे. यह धारणीय विकास लक्ष्य (SDG)-7 ‘स्वच्छ एवं वहनीय ऊर्जा’ के अनुकूल है. चूँकि भारत कर्क रेखा पर अवस्थित है अतः भारत के अधिकांश भागों में वर्षभर सौर प्रकाश उपलब्ध रहता है, जिससे अत्यधिक मात्रा में सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है. इसी प्रकार पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा आदि की उपलब्धता भी भारत में है.

संभावित गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की खोज तथा उन्हें किफायती एवं सुलभ बनाने के लिये अनुसंधान की आवश्यकता है. ऊर्जा अवसंरचना का विकास करने के साथ-साथ स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम भंडारण को और अधिक बढ़ाने की आवश्यकता है. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयान मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2017-18 में प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपलब्धता (भारत में) को 23355 मेगाजूल बढ़ाने की आवश्यकता है.


Prelims Vishesh

Samarth Scheme :-

  1. समर्थ योजना का व्यापक उद्देश्य युवाओं को वस्त्र प्रक्षेत्र (textile sector) में लाभप्रद और सतत रोजगार प्राप्त करने के लिए कुशल बनाना है.
  2. यह कौशल वस्त्र प्रक्षेत्र के सभी अंगों में, धागा तैयार करने (spinning) और बुनाई (weaving) को छोड़कर, प्रदान करने का लक्ष्य है.
  3. इससे युवाओं को कपड़ा उद्योग में रोजगार मिलने की संभावना बनेगी.
  4. इस योजना के अंतर्गत 10 लाख लोगों को तीन वर्षों के अन्दर प्रशिक्षित करने का उद्देश्य है. इनमें से 9 लाख लोगों को असंगठित क्षेत्र में तथा एक लाख को संगठित क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जायेगा. प्रशिक्षण के लिए 1300 करोड़ का प्रावधान है.

Global Smart City Index (SCI) :-

  • यह सूचकांक इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (Institute for Management Development) द्वारा सिंगापुर यूनिवर्सिटी फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन (Singapore University for Technology and Design) के सहयोग से जारी किया गया है.
  • स्मार्ट सिटी को “एक शहरी व्यवस्था, जो लाभों को अधिकतम करने और शहरीकरण की कमियों का निवारण करने हेतु प्रौद्योगिकी का प्रयोग करती हैं” के रूप में परिभाषित किया गया है.
  • SCI, 2020 में सिंगापुर सर्वोच्च स्थान पर है, उसके उपरांत हेलसिंकी और ज्यूरिख क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
  • भारत में हैदराबाद को 85वां और नई दिल्‍ली को 86वां स्थान प्रदान किया गया है.

World Bank’s Human Capital Index 2020 :-

  • यह मानव पूंजी की उस मात्रा का एक माप प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत वर्तमान में जन्म लेने वाले एक बालक के 18 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक मानव संसाधन में रूपांतरित होने की अपेक्षा की जाती है. ज्ञातव्य है कि इस संदर्भ में उस देश में (जहां वह बालक जन्म लेता है) प्रचलित निम्नस्तरीय स्वास्थ्य एवं शिक्षा के जोखिमों को भी संज्ञान में लिया जाता है.
  • सूचकांक में 174 देशों में सिंगापुर सर्वोच्च स्थान पर है तथा भारत को 116वां स्थान प्राप्त हुआ है.
  • भारत का स्कोर वर्ष 2018 में 0.44 से बढ़कर वर्ष 2020 में 0.49 हो गया है.

Union government’s dept past Rs. 100 trillion mark due to COVID-19 :-

  • सरकार अपनी देयताओं को सामान्यतया दो श्रेणियों यथा- सार्वजनिक ऋण (Public debt) और लोक लेखा (public account) में वर्गीकृत करती है.
  • सार्वजनिक ऋण भारत की संचित निधि के विरुद्ध अनुबंधित केंद्र सरकार की कूल देयताएं हैं. इसे आगे आंतरिक और बाह्य ऋण में वर्गीकृत किया गया है.
  • आंतरिक ऋण को विपणन योग्य (marketable) और गैर-विपणन योग्य प्रतिभूतियों (non-marketable securities) में वर्गीकृत किया जाता है.
  • लोक खाते (public account) में आरक्षित निधि और निक्षेप तथा अन्य देयताओं के साथ-साथ विशेष सब्सिडियों के विरुद्ध प्रतिभूतियां शामिल हैं.
  • वर्ष 2017 के राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन नियमों के अंतर्गत यह संस्तुति की गई थी कि सार्वजनिक ऋण मार्च 2023 तक 607 के 40 प्रतिशत से कम होना चाहिए.

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