Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 April 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 22 April 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Vijay Mallya loses extradition appeal in UK

संदर्भ

भारत प्रत्यर्पण करने के विरुद्ध भगोड़े व्यापारी विजय माल्या की याचिका को ब्रिटेन उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है.

पृष्ठभूमि

शराब कारोबारी विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का 9 हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है. माल्या ने यह कर्ज अपनी किंगफिशर एयरलाइंस के लिए लिया था. मार्च 2016 में माल्या भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग निकले थे. तभी से भारत की एजेंसियाँ माल्या को ब्रिटेन से भारत लाने में जुटी हैं. 2018 में ब्रिटेन के न्यायालय से हरी झंडी मिलने के पश्चात् माल्या के प्रत्यर्पण की आशा जगी थी, परन्तु उनकी ओर से उच्च न्यायालय में अपील दाखिल करने के बाद मामला पुनः अटक गया था.

अब विजय माल्या के पास क्या विकल्प हैं?

उच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध विजय माल्या अब सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं. इसके लिए उनके पास 14 दिनों का समय है. अगर वह 14 दिनों में सर्वोच्च न्यायालय में इसके विरुद्ध अपील दायर नहीं करते हैं तो उन्हें 28 दिनों के अंदर भारत प्रत्यर्पित कर देना होगा.

भगोड़ा अपराधी घोषित होने वाले पहले व्यक्ति

विजय माल्या आर्थिक भगोड़े अपराधी अधिनियम के अंतर्गत भगोड़ा अपराधी घोषित होने वाले पहले व्यक्ति हैं.

आर्थिक भगोड़े अपराधी अधिनियम के मुख्य तथ्य

यह अधिनियम किसी व्यक्ति को एक भगोड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) के रूप में घोषित करने की अनुमति देता है, यदि –

  • किसी भी निर्दिष्ट अपराध के लिए उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया हो जहाँ मामला 100 करोड़ रु. से अधिक का हो, और
  • उसने देश छोड़ दिया हो और अभियोजन का सामना करने के लिए वापस लौटने से इन्कार कर दिया हो.
  • यह न केवल लोन डिफ़ॉल्टर और फ्रॉडस्टर को शामिल करता है, बल्कि उन व्यक्तियों पर भी लागू होता है जो कर, काले धन, बेनामी सम्पत्तियों और वित्तीय भ्रष्टाचार से सम्बंधित कानूनों का उल्लंघन करते हैं.
  • प्रवर्तन निदेशालय (ED)विधि प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च एजेंसी होगी.
  • किसी व्यक्ति को FEO घोषित करने के लिए एक विशेष अदालत में एक आवेदन दायर किया जायेगा जिसमें जब्त की जाने वाली सम्पत्ति का वितरण, और व्यक्ति के अता-पता से सम्बंधित जानकारी शामिल होगी.
  • विशेष अदालत को व्यक्ति को किसी निर्दिष्ट स्थान पर उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी करने से कम से कम छह सप्ताह का समय दिया जाएगा. यदि वह उपस्थित हो जाता है तो कार्यवाही समाप्त कर दी जायेगी.
  • यह अधिनियम विशेष अदालत के समक्ष आवेदन लंबित होने की स्थिति में अधिकारियों को अस्थायी रूप से आरोपी की सम्पत्ति को कुर्क करने की अनुमति प्रदान करता है.
  • FEO के रूप में घोषित हो जाने पर, किसी व्यक्ति की सम्पत्ति को जब्त किया जा सकता है.
  • भगोड़े के रूप में वर्गीकृत व्यक्ति, जबतक भारत वापस नहीं आते हैं और अभियोजन का सामना नहीं करते हैं, वे भारत में कोई भी सिविल केस दायर करने में सक्षम नहीं होंगे.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें > आर्थिक भगोड़े अपराधी अधिनियम


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential.

Topic : World Press Freedom Index 2020

संदर्भ

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने वर्ष 2020 का विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक निर्गत कर दिया है.

वैश्विक प्रदर्शन

  • इस सूची में लगातार चौथी बार नॉर्वे पहले स्थान पर है और नॉर्थ कोरिया सबसे अंतिम स्थान पर है.
  • दूसरे नंबर पर फिनलैंड, तीसरे पर डेनमार्क, 11वें पर जर्मनी, 34वें पर फ्रांस, 35वें पर यूके, 45वें पर अमेरिका, 66वें पर जापान और 107वें पर ब्राजील है.

भारत का प्रदर्शन

  • वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों के समूह में दो स्थान नीचे उतरकर 142वें स्थान पर आ गया है. पिछले वर्ष भारत 140वें स्थान पर था.
  • ‘द वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2020’ के अनुसार भारत में 2019 में किसी भी पत्रकार की हत्या नहीं हुई और इस तरह देश के मीडिया के लिए सुरक्षा स्थिति में सुधार नजर आया. वर्ष 2018 में छह पत्रकारों की हत्या कर दी गयी थी.
  • प्रतिवेदन में कहा गया है, ‘भारत में लगातार स्वतंत्रता का उल्लंघन किया गया जिनमें पत्रकारों के विरुद्ध पुलिसिया हिंसा, राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमला, बदमाशों एवं भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा बदले में हिंसा आदि सम्मिलित हैं.’
  • प्रतिवेदन के अनुसार, कश्मीर में उत्पन्न हुई स्थिति के चलते भारत की रैकिंग पर बहुत प्रभाव पड़ा है. पिछले वर्ष पांच अगस्त को केंद्र सरकार ने अपने एक अप्रत्याशित निर्णय में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म कर जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था.

विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक क्या है?

  • यह सूचकांक 2002 से Reporters Without Borders (RSF) द्वारा जारी किया जाता रहा है.
  • इस सूचकांक में 180 देशों को शामिल किया जाता है.
  • विश्व प्रेस स्वातंत्र्य सूचकांक सम्बंधित देश में पत्रकारों को उपलब्ध स्वतंत्रता के आधार पर तैयार किया जाता है.
  • इस सूचकांक का उद्देश्य है विभिन्न देशों के बीच प्रेस की स्वतंत्रता के लिए प्रतिस्पर्द्धा उत्पन्न करना है.
  • यह सूचकांक जिन आधारों पर मीडिया की स्वतंत्रता का मूल्यांकन करता है, वे हैं – विविधतावाद, मीडिया स्वातंत्र्य, कानूनी ढाँचे की गुणवत्ता तथा पत्रकारों की सुरक्षा.
  • इस सूचकांक में प्रत्येक क्षेत्र में मीडिया की स्वतंत्रता के हनन का स्तर भी देखा जाता है.
  • सूचकांक बनाने के लिए विश्व-भर के विशेषज्ञ 20 भाषाओं में एक प्रश्नावली बनाते हैं. इस प्रश्नावली के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है और पत्रकारों के प्रति हिंसा के मामलों का संख्यात्मक आँकड़ा संगृहीत किया जाता है.
  • रैंकिंग को एक दृष्टि में समझने के लिए सूचकांक के साथ एक रंगीन नक्शा भी दिया जाता है जिसमें प्रेस स्वतंत्रता में कमी-बेशी के हिसाब से रंग दिखाए जाते हैं.
  • इस रंगीन नक़्शे में विभिन्न देशों को अलग-अलग रंग में दिखाया जाता है जिनका तात्पर्य कुछ इस तरह से है — श्वेत (अच्छी स्थिति), पीला (संतोषजनक स्थिति), नारंगी (समस्याग्रस्त स्थिति), लाल (विकट स्थिति), काला (अत्यंत विकट स्थिति).

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Why oil prices fell below zero?

संदर्भ

‘ब्लूमबर्ग’ (Bloomberg) मीडिया के एक प्रतिवेदन के अनुसार, COVID- 19 महामारी के चलते संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल बाज़ार में ‘वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट’ (West Texas Intermediate- WTI) तेल की कीमतें -40.32 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गईं है.

मुख्य तथ्य

  • ब्लूमबर्ग के अनुसार, तेल की कीमत का इतना कम स्तर पूर्व में द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद देखने को मिल था.
  • वर्तमान में तेल की कीमत शून्य अंक से भी नीचे हो गई है तथा इस मूल्य पर कच्चे तेल के विक्रेता को ही प्रत्येक बैरल की खरीद पर खरीदार को 40 डॉलर का भुगतान करना पड़ रहा है.

निहितार्थ

सरल शब्दों में कहा जाए तो इसका अर्थ है कि तेल उत्पादक के पास भंडारण के लिए जगह नहीं बची है, अतः वे तेल ले जाने पर उल्टे खरीदार को पैसे देंगे. सोमवार को अमेरिका में जो स्थिति थी उसके अनुसार अगर कोई खरीदार तेल लेना चाहता है तो तेल उत्पादक उल्टे ऐसे खरीदारों को प्रति बैरल करीब 40 डॉलर चुकाएंगे. वह ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर तेल नहीं बिका तो भंडारण की समस्या भी बढ़ेगी. इसका असर यह होगा कि तेल उत्पादक अब उत्पादन का काम रोक सकते हैं क्योंकि कोई भी तेल कंपनी अपने कच्चे तेल को घाटे में तो बिल्कुल नहीं बेचना चाहेगी. इसलिए यह संभव है कि तेल उत्पादक तब तक अपने कुंओं को बंद कर दें जब तक बाजार पुनः पहले जैसा नहीं हो जाता.

तेल की कीमत क्यों गिरी?

  • कोरोना वायरस महामारी के कारण मांग निचले स्तर पर पहुंचने और इस साल कंपनियों के बदतर नतीजे आने की आशंका से तेल की कीमतों में यह गिरावट दर्ज की गई है. वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 6.3% की गिरावट के साथ 26.32 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंंच गई.
  • कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए दुनियाभर में लॉकडाउन और यात्राओं पर पाबंदी चल रही है. इसके कारण क्रूड की मांग में भारी गिरावट आई है. सऊदी अरब और रूस के मध्य मूल्य युद्ध प्रारम्भ होने से भी तेल की कीमत और गिरी है.
  • हालांकि, इस महीने के शुरू में दोनों देशों और कुछ अन्य देशों ने मिलकर तेल की कीमत बढ़ाने के लिए उत्पादन में करीब 1 करोड़ बैरल रोजाना की कटौती करने का निर्णय किया, लेकिन कीमत में गिरावट जारी है.

भारत पर प्रभाव

तेल के ओवरफ्लो की स्थिति अमेरिका में है. बाकी देशों में मांग अवश्य कम है परन्तु ओवरफ्लो की स्थिति नहीं है. अमेरिका में उत्पादक प्रत्येक दिन 1 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करते हैं. तेल भंडारण करने वाले टैंक भर चुके हैं इसलिए कंपनियां अधिकाई तेल को किसी भी प्रकार बेचना चाहती हैं. शेष देशों में तेल की कीमत कम हुई है लेकिन शून्य नहीं. भारत की बात करें तो WTI (वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट) कीमतों से यहां सीधा कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. भारत की निर्भरता ब्रेंट क्रूड ऑइल पर है जो इंटरनैशनल बेंचमार्क ऑइल प्राइस है. ब्रेंट क्रूड अभी भी 25 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आस-पास है. इस वर्ष जनवरी से लेकर ब्रेंट क्रूड की कीमत में करीब 2 तिहाई से अधिक गिरावट आ चुकी है और यह 18 वर्षों में सबसे कम कीमत है. भारत को भी तेल सस्ते में मिल रहे हैं लेकिन शून्य के आस-पास वाली स्थिति नहीं है.

आगे की राह

इस गिरावट के मायने यह भी हैं कि अब तेल उत्पादक देशों के समक्ष भंडारण की समस्या खड़ी हो जाएगी. इसे देखते हुए कई तेल कम्पनियाँ टैंकर किराए पर ले रही हैं ताकि बढ़ा हुआ स्टॉक रखा जा सके. यही कारण है कि वे समस्त देशों से पैसे देकर खरीदने का आग्रह कर रहे हैं. लॉकडाउन के कारण तेल की खपत में भी कम हुई है. इसका प्रभाव अमेरिका में तेल कीमतों पर हुआ और वे शून्य से भी नीचे चली गईं.      

ब्रेंट क्रूड तथा वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 

  • ब्रेंट क्रूड ऑयल का उत्पादन उत्तरी सागर में शेटलैंड द्वीप (Shetland Islands) और नॉर्वे के बीच तेल क्षेत्रों से होती है, जबकि वेस्ट क्रूड इंटरमीडिएट (WTI) ऑयल के क्षेत्र मुख्यत: अमेरिका में अवस्थित है.
  • ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों ही लाइट और स्वीट (Light and Sweet) होते हैं.

WTIvsBrent


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : NGT raises concern over COVID-19 bio-medical waste disposal

संदर्भ

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (National Green Tribunal – NGT) ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समिति से कोरोना वायरस के इलाज के दौरान निकलने वाले जैव-चिकित्सा कचरे के अवैज्ञानिक निपटान से होने वाले संभावित जोखिम को रोकने के लिए निर्देश जारी किए हैं.

चिंता का विषय

अप्राधिकृत स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों द्वारा अवैज्ञानिक रूप से जैव-चिकित्सा कचरे के निपटान को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है. ज्ञातव्य है की अभी ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या 2.7 लाख है जिसमें मात्र 1.1 लाख ही जैव-चिकित्सा कचरा प्रबन्धन नियमावली, 2016 के अंतर्गत प्राधिकृत हैं.

प्राधिकरण ने यह भी जतलाया है कि पिछले दिनों केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश पर्याप्त नहीं हैं और उनमें संशोधन की आवश्यकता है.

समय की आवश्यकता

  • तरल और ठोस कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक निपटान पर न केवल संस्थागत स्तर पर ध्यान देना चाहिए, अपितु जनसाधारण को भी इसमें भागीदारी करनी होगी क्योंकि वे ही इन वस्तुओं का निपटान करते हैं – व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (Personal Protection Equipment – PPE), उपयोग में आ चुके थैले, दस्ताने, रंगीन चश्मे आदि. व्यक्ति मात्र को चाहिए कि इन वस्तुओं को इस तरह कचरे में डालें जिससे कि ये अन्य ऐसे ठोस कचरे में न मिल जाएँ जिससे संक्रमण हो सकता है.
  • आज आवश्यकता है कि निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाते हुए ऐसे कचरे को सँभालने वाले लोगों से सूचना पाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली का प्रयोग किया जाए और साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसके ऑनलाइन प्रतिवेदन के लिए आवश्यक सॉफ्टवेर बनवाए.
  • लोगों को इस विषय में जागरूक करने की बड़ी आवश्यकता है. इसके लिए विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाएँ और सम्बंधित स्थानीय निकायों और विभागों में प्रशिक्षण आयोजित किये जाएँ, कोविड-19 कचरे को उठाने वाले कर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा वस्त्र दिए जाएँ, मीडिया एवं नियामक प्राधिकरणों के बीच उचित समन्वय स्थापित किया जाए आदि.

जैव-चिकित्सा कचरा प्रबंधन नियमवाली, 2016 (BMW Management Rules, 2016) की मुख्य विशेषताएं

  1. अब इस नियमावली के अंतर्गत इनको भी सम्मिलित कर लिया गया है – टीका शिविर, रक्तदान शिविर, शल्य चिकित्सा शिविर आदि.
  2. इसमें लक्ष्य रखा गया है कि आगामी दो वर्षों के भीतर-भीतर क्लोरिन लगे प्लास्टिक थैलों, दस्तानों और रक्त थैलियों का प्रयोग क्रमशः बंद कर दिया जाएगा.
  3. इसमें यह प्रावधान है कि प्रयोगशालाओं से निकलने वाले कचरे, सूक्ष्म जीवाणु कचरे, रक्त के नमूनों और रक्त की थैलियों को प्रयोगशाला में ही संक्रमण मुक्त कर दिया जाना चाहिए.
  4. स्वास्थ्य कार्य से जुड़े कर्मियों को नियमित रूप से रोग प्रतिरोधक शक्ति के लिए टीका आदि दी जाए और इसके लिए उन सभी को प्रशिक्षित किया जाए.
  5. जैव-चिकित्सा कचरा प्रबंधन नियमवाली के अनुसार, निपटान के लिए जाने वाले जैव-चिकित्सा कचरे के लिए जो थैलियाँ या डिब्बे होंगे उन पर बारकोड अंकित होना चाहिए,
  6. यह नियमावली स्रोत पर जैव चिकित्सा कचरे को अलग करने की पद्धति में सुधार लाने के लिए 10 के स्थान पर 4 श्रेणियों का प्रावधान करती है.
  7. जैव-चिकत्सा कचरे के संस्करण और निपटान के लिए राज्य सरकारों को भूखंड देना होगा.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Sujalam Sufalam Jal Sanchay Abhiyan

संदर्भ

गुजरात सरकार ने सुजलाम सुफलाम जलसंचय अभियान के तीसरे संस्करण के लिए कोरोनवायरस लॉकडाउन के बीच हरी झंडी दे दी है.

यह योजना क्या है?

  • यह गुजरात सरकार द्वारा अनावृत मानसून से पहले राज्य में जल निकायों को गहरा करने के लिए एक संरक्षण योजना है.
  • सुजलाम सुफलाम जल संचय योजना का उद्देश्य वर्षा ऋतु के आने के पहले राज्य के जलाशयों को गहरा करना है जिससे कि उनमें अधिक से अधिक वर्षा जल जमा हो सके और जल के अभाव के समय उनका उपयोग हो सके.
  • इस योजना के अंतर्गत नदी तटों, झीलों, चेक बांधों आदि को साफ़ किया जाता है और गाद हटाया जाता है. साथ ही सिंचाई की नहरों की साफ़-सफाई की जाती है.
  • यह योजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी पद्धति पर चलती है. इसमें होने वाले खर्च का 60% राज्य सरकार और 40% लोगों के अंशदान से पूरा होता है.

पृष्ठभूमि

इस योजना के प्रथम संस्करण में 16,616 तालाबों और झीलों को गहरा करने का लक्ष्य रखा गया था जबकि 18,220 जलाशय गहरे किये गये अर्थात् लक्ष्य से अधिक कार्य हुआ. इन प्रयासों से राज्य के तालाबों, जलभंडारों, चेक बांधों, बोरीबंधों आदि जलाशयों में वर्षा जल जमा होने की क्षमता 11 हजार लाख घन फुट तक बढ़ गई.

योजना के अंतर्गत गाद निकालने के कारण मिट्टी का विशाल भंडार जमा हुआ है जिसका प्रयोग किसान खेती की उपज बढ़ाने में कर सकते हैं.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : New Development Bank

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री ने नई दिल्ली में वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नवीन विकास बैंक (New Development Bank- NBD) के बोर्ड ऑफ गवर्नर की 5वीं वार्षिक बैठक में भाग लिया.

बैठक के मुख्य तथ्य

  • इस बैठक में भारतीय वित्त मंत्री ने एक विश्वसनीय वैश्विक वित्तीय संस्थान के रूप में न्यू डेवलपमेंट बैंक द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना की जो अधिक सतत एवं समावेशी दृष्टिकोण को अपनाकर अपने निर्दिष्‍ट प्रयोजन को सफलतापूर्वक पूरा कर रहा है.
  • वैश्विक महामारी COVID-19 पर चर्चा करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री ने ब्रिक्स देशों को लगभग 5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता उपलब्‍ध कराने के लिये ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ द्वारा किये गए प्रयासों की सराहना की, जिसमें COVID-19 महामारी से निपटने के लिये भारत को 1 अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता देना भी सम्मिलित है.

नवीन विकास बैंक (New Development Bank)

  • इस बैंक की स्थापना 2014 में ब्रिक्स के सदस्य देशों रूस, ब्राजील, भारत, दक्षिण अफ्रीका और चीन द्वारा की गई थी.
  • यह बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाता है.
  • यह वैश्विक विकास को बढ़ाने के लिए, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के प्रयासों को पूरा करने के लिए काम करता है.
  • इसका उद्देश्य ब्रिक्स एवं अन्य उभरती बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं तथा विकासशील देशों में बुनियादी ढाँचे एवं सतत विकास परियोजनाओं के लिये व्यापक संसाधन जुटाना है.
  • नवीन विकास बैंकके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की पहली वार्षिक बैठक वर्ष 2016 में  चीन के शंघाई शहर में आयोजित की गई थी.
  • यह सार्वजनिक और निजी दोनों परियोजनाओं का समर्थन करता है. इस बैंक की प्रारंभिक अधिकृत पूंजी 100 बिलियन अमरीकी डालर थी.
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NBD) ने अब तक भारत की 14 परियोजनाओं को स्वीकृति दी है जिनमें 4,183 मिलियन डॉलर की राशि निहित है. इस बैंक ने विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और एशियाई बुनियादी ढांचा निवेश बैंक के साथ रणनीतिक सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.

Prelims Vishesh

Google Journalism Emergency Relief Fund :-

  • कोरोना वायरस महामारी के फलस्वरूप अपने संचालन में कठिनाइयों को झेलते हुए समाचार से सम्बंधित स्थानीय संस्थाओं को सहायता पहुंचाने के लिए गूगल एक आकस्मिक कोष का अनावरण करने जा रहा है.
  • ज्ञातव्य है कि समाचारपत्र मुख्य रूप से विज्ञापनों से पैसा कमाते हैं जो अभी बंद हैं.

 Thrissur Pooram festival :-

  • 18वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में कोच्चि राज के महाराजा सकदन दम्पूरण के द्वारा आरम्भ किया गया त्रिशूर पूरम उत्सव केरल के सभी उत्सवों की माता कहलाता है.
  • परन्तु COVID-19 के कारण पहली बार इस उत्सव का आयोजन रद्द कर दिया गया है.

MK 54 lightweight torpedo :-

  • अमेरिका ने 16 MK54 हल्के भार वाले टोरपीडो हथियारों को भारत को बेचने का निर्णय लिया है.
  • यह टोरपीडो लगभग 608 पौंड भारी होता है. इसके मुंह पर लगा हुआ 96.8 पौंड का अस्त्र अत्यंत विस्फोटक होता है.
  • अमेरिका में ऐसे हथियारों का प्रयोग वहां के सैन्य जलयान, विमान और हेलीकॉप्टर किया करते हैं.

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