Sansar डेली करंट अफेयर्स, 21 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 21 July 2020


GS Paper 2 Source : The Mint

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UPSC Syllabus : Related to Health.

Topic : Delhi Sero-Survey

संदर्भ

हाल ही में ‘नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल’ (National Centre for Disease Control-NCDC) ने नई दिल्ली में COVID-19 के लिये एक सीरो निगरानी अध्ययन का आयोजन किया.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दिल्ली में कोविड-19 को लेकर सीरो निगरानी अध्ययन कराया. अध्ययन के परिणाम बताते हैं कि दिल्ली-भर में औसतन आईजीडी एंटीबॉडी का प्रसार 23.8% -40% है.

क्या है सीरो सर्वेक्षण?

सिरो- प्रीवलेंस स्टडी में सीरोलॉजी (ब्लड सिरम) जांच का इस्तेमाल कर किसी आबादी या समुदाय में ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिनमें किसी संक्रामक रोग के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो जाते हैं. इससे संक्रमण के स्तर के साथ लोगों में प्रतिरक्षा तंत्र के विकास की भी जानकारी मिलती है. इसके साथ ही हमें हर्ड इम्युनिटी जैसे नवीन सिद्धांत को भी जानने में मदद मिलती है.

दिल्ली में सीरो सर्वेक्षण से सम्बंधित मुख्य बिंदु

  • यह अध्ययन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की दिल्ली सरकार के सहयोग से राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा किया गया.
  • यह अध्ययन 27 जून 2020 से 10 जुलाई 2020 तक कराया गया था. दिल्ली के सभी 11 जिलों के लिए सर्वेक्षण टीमों का गठन किया गया था. पहले से चयनित लोगों से लिखित सूचित सहमति लेने के बाद उनके रक्त के नमूने एकत्र किए गए और फिर उनके ब्लड सिरम को आईजीजी एंटीबॉडी और संक्रमण के लिए परीक्षण किया गया. यह एलिसा परीक्षण का उपयोग करते हुए देश में कराए गए अब तक के सबसे बड़े सीरो अध्ययन में से एक है.
  • सीरो अध्ययन से भी यह पता चला है कि बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्तियों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं.

चिंता का विषय और आगे की राह

  • शेष 77 प्रतिशत लोगों के लिये कोरोना वायरस का खतरा अभी भी बना हुआ है, इसलिये रोकथाम के उपाय समान कठोरता के साथ जारी रहने चाहियें.
  • इसके अलावा, किसी व्यक्ति के COVID पॉज़िटिव होने के बाद उसके शरीर में मौजूद एंटीबॉडी के स्तर और अवधि में क्या परिवर्तन आया होगा इसके बारे में पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा उपलब्ध नहीं है.
  • अध्ययन के माध्यम से एकत्र किये गए आँकड़ों से रोग नियंत्रण कार्यक्रम में मदद मिलेगी. इस तरह के वैज्ञानिक अध्ययन बेहद महत्त्वपूर्ण होते हैं, भविष्य में संबंधित विषय पर रणनीतियाँ तैयार करते समय इन अध्ययनों को आधार बनाकर संभावित परिणाम प्राप्त किये जा सकते हैं.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : WADA and NDTL

संदर्भ

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (WADA) ने देश की राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) के निलंबन को और छः महीने के लिए बढ़ा दिया है. विदित हो कि राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) का यह निलंबन उसके अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण बढ़ाया गया है.

पृष्ठभूमि

वाडा ने पिछले साल अगस्त में एनडीटीएल को पहली बार छह महीने के लिए निलंबित किया था. वैश्विक संस्था के नवीनतम निरीक्षण में पता चला है कि अब भी कुछ मापदंडों को पूरा नहीं किया गया है.

इस निलंबन के कारण एनडीटीएल कोई डोपिंग रोधी गतिविधि नहीं कर पाएगा, जिसमें मूत्र और रक्त के नमूनों का परीक्षण भी शामिल है. वाडा के निरीक्षण में पता चला कि एनडीटीएल प्रयोगशालाओं के अंतर्राष्ट्रीय स्तर (आईएसएल) के मापदंडों पर खरी नहीं उतरती जिसमें प्रयोगशाला का ‘आइसोटोप रेशियो मास स्पेक्ट्रोमेट्री’ भी शामिल है, जिस तकनीक का इस्तेमाल प्रतिबंधित पदार्थों की पुष्टि के लिए किया जाता है.

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी

  • इसे वर्ष 1999 में एक अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्र एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया था, यह खेल आंदोलन और विश्व की सरकारों द्वारा समान रूप से वित्त पोषित है.
  • इसका मुख्यालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में है.
  • इसकी प्रमुख गतिविधियों में वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा, एंटी-डोपिंग क्षमताओं का विकास करना और विश्व एंटी-डोपिंग संहिता (कोड) की निगरानी करना शामिल है. विश्व एंटी-डोपिंग संहिता (कोड) सभी खेलों एवं देशों में डोपिंग विरोधी नीतियों का सामंजस्य स्थापित करने वाला दस्तावेज़ है.
  • ईमानदारी, जवाबदेही और उत्कृष्टता एजेंसी के मुख्य मूल्य हैं.

NDTL

  • राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (NDTL) भारत सरकार के युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित एक प्रमुख विश्लेषणात्मक परीक्षण और अनुसंधान संगठन है.
  • यह देश में एकमात्र ऐसी प्रयोगशाला है जो मानव खेल डोप परीक्षण के लिए उत्तरदायी है.

GS Paper 3 Source : Times of India

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UPSC Syllabus : Science and Technology. 

Topic : Bharat Drone

संदर्भ

भारत और चीन के बीच जारी सीमा विवाद के बीच रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित ड्रोन “भारत” प्रदान किया है.

ये ड्रोन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों में सटीक निगरानी करने के लिए प्रयोग में लाये जा सकते हैं.

भारत ड्रोन

  • भारत ड्रोन का विकास DRDO की चंडीगढ़ स्थित प्रयोगशाला द्वारा किया गया है.
  • स्वदेशी रूप से विकसित भारत ड्रोन की श्रृंखला को दुनिया के सबसे चुस्त और हल्के निगरानी ड्रोन्स की सूची में शामिल किया जा सकता है.

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ड्रोन की विशेषताएँ

इस ड्रोन की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

  • ये ड्रोन आर्टिफिशिलय इंटेलीजेंस से युक्त हैं जिससे ये दुश्मनों का सही पता लगाने और उसके अनुसार कार्रवाई करने में सक्षम हैं.
  • ये ड्रोन अत्यधिक निम्न तापमान में कार्य करने में सक्षम हैं और इन्हे खराब मौसम के लिए भी विकसित किया जा रहा है.
  • ये ड्रोन किसी भी अभियान के दौरान का वास्तविक समय (रियल टाइम) में वीडियो प्रसारण करने में सक्षम है
  • इसके साथ ही यह अत्याधुनिक नाइट विजन सुविधा से भी युक्त है और यह घने जंगल में छिपे इंसानों का भी पता लगा सकता है.
  • इसकी यूनिबॉडी डिजाइन और एडवांस रिलीज टेक्नोलॉजी इसे निगरानी अभियानों के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि रडार भी इसे नहीं पकड़ सकता है.
  • विदित हो कि DRDO ने रुस्तम, पंछी, निसांत और अभ्यास ड्रोन का भी विकास किया है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defense Research and Development Organization) भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये देश की अग्रणी संस्था है.
  • यह संगठन भारतीय रक्षा मंत्रालय की एक आनुषांगिक ईकाई के रूप में काम करता है.
  • इसकी स्थापना 1958 में भारतीय थल सेना एवं रक्षा विज्ञान संस्थान के तकनीकी विभाग के रूप में की गयी थी.
  • वर्तमान में संस्थान की अपनी इक्यावन प्रयोगशालाएँ हैं जो इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण इत्यादि के क्षेत्र में अनुसंधान में कार्यरत हैं.

GS Paper 3 Source : Down to Earth

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UPSC Syllabus : Environment and Biodiversity.

Topic : Dibru-Saikhowa National Park

संदर्भ

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) सहित दो अन्य संस्थाओं को यह बताने के लिए निर्देशित किया है कि पूर्वी असम के एक राष्ट्रीय उद्यान में सात तेल कुओं की प्रस्तावित ड्रिलिंग की अनुमति कैसे दी गई’?

अन्य दो उत्तरदायी संस्थाएं असम राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और असम राज्य जैव विविधता बोर्ड हैं.

पृष्ठभूमि

एनजीटी यह निर्देश असम के संरक्षणवादियों बिमल गोगोई और मृदु पबन फूकन की याचिका सुनवाई के बाद जारी किए हैं.

यह याचिका डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में ऑयल इंडिया लिमिटेड को ऑयल ड्रिलिंग के लिए दी पर्यावरण मंजूरी में सितंबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन के विरुद्ध दायर की गयी थी.

डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान

  • डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान भारत में असम राज्य के पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट में स्थित जैव विविधता वाले क्षेत्रों में से एक है.
  • डिब्रू-सैखोवा पार्क असम राज्य सरकार द्वारा 1986 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था. इसके बाद वर्ष 1999 में भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दे दिया.
  • मुख्यतः नमीदार मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, नमीदार मिश्रित पतझड़ीय वन तथा घास के मैदानों का यह क्षेत्र असम के तिनसुकिया ज़िले में स्थित है.
  • ब्रह्मपुत्र के गोद में स्थित डिब्रू-सैखोवा दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों और जैविक विषमताओं को समेटे हुए हैं.
  • यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौन्दर्य और विविध वन्य-जीवन के लिए विश्व-भर में प्रसिद्ध है. विश्व के अनेक देशों से पर्यटक और विज्ञानी यहाँ घुमने और अध्ययन के लिए आते हैं.
  • जंगली घोड़ा और वुड डक इस पार्क के मुख्य आकर्षण है. बारहमासी बड़ी नदियाँ और अत्यधिक वर्षा यहाँ के वनस्पति को सदाबहार और चमकीला बनाये रखता है और वन्य जीवन भी लाभान्वित होता है.
  • असम के अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पार्क हैं: काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क, मानस राष्ट्रीय पार्क, ओरंग राष्ट्रीय पार्क, नामेरी राष्ट्रीय पार्क आदि.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure and Energy.

Topic : Kakrapar Atomic Power Project (KAPP-3)

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र-3 के ‘‘सामान्य परिचालन स्थिति में आने’’ (क्रिटिकल होने) पर परमाणु वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा कि यह स्वेदशी परमाणु संयंत्र ‘‘मेक इन इंडिया’’ अभियान का गौरवपूर्ण उदाहरण है.

गुजरात में स्थित 700 मेगावाट की क्षमता वाले इस ऊर्जा संयंत्र के सामान्य परिचालन स्थिति में आना इस बात का संकेत है कि यह संयंत्र ऊर्जा उत्पादन के लिए अब तैयार है.

काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र-3

  • काकरापार एटोमिक पावर स्टेशन (KAPS) गुजरात के शहर सूरत से 80 किलोमीटर दूर ताप्ती नदी के किनारे स्थित है. अब प्लांट में आज KAPP-3 प्लांट को शामिल किया गया है.
  • पूर्णत: भारत में निर्मित 700 मेगवाट वाले इस प्लांट का विकास और ऑपरेशन न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCIL) ने किया है.
  • परमाणु रिएक्टर के चलने योग्य होने के बाद भारत उन देशों की कतार में खड़ा हो गया है, जिनके पास न्यूक्लियर पावर तकनीक है.
  • इस प्लांट में 220 मेगावाट के दो और स्टेशन KAPS-1 और KAPS-2 भी हैं. पहले प्लांट की शुरुआत 1993 और दूसरे की शुरुआत 1995 में हुई थी.
  • केएपीपी-3 रिएक्टर देश का सबसे बड़ा हैवी वाटर रिएक्टर है, जिसे स्वदेशी तरीके से बनाय गया है. इसमें प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के तौर पर डाला जाएगा. अब तक इससे बड़ा हैवी वाटर रिएक्टर महाराष्ट्र के तारापुर में था. वह 540 एमडब्ल्यूई का है.

Prelims Vishesh

India’s first public EV charging plaza inaugurated in Delhi :-

  • 20 जुलाई, 2020 को बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आरके सिंह ने नई दिल्ली में चेल्म्सफोर्ड क्लब में पहले सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्लाजा का उद्घाटन किया.
  • चार्जिंग प्लाजा की स्थापना EESL (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) और NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) द्वारा की गई थी. प्लाजा में विभिन्न विशिष्टताओं के पांच इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर हैं.

RAISE initiative :-

  • RAISE पहल पूरे देश में कार्यक्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता के मुद्दों को दूर करेगी.
  • RAISE को यू.एस. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) मैत्री कार्यक्रम की साझेदारी में लॉन्च किया गया था.
  • RAISE ने हवा की गुणवत्ता के मापदंडों में 80% सुधार दिखाया है.

India Ideas Summit 2020 :-

  • हाल ही में इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा इंडिया आइडियाज समिट 2020 की मेजबानी की गई. 
  • इस शिखर सम्मेलन में सरकारी नेता और व्यापार जगत के लोग व्यापार और निवेश, वैश्वीकरण और भविष्य के काम को आकार देने के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी और प्रवृत्तियों के बारे में चर्चा की गई.
  • इस परिषद का गठन 1975 में किया गया था. यह अमेरिका और भारत दोनों के निजी क्षेत्रों को अपने निवेश प्रवाह को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है. यह सरकारी नेताओं और व्यापारियों के बीच सीधे संपर्क का काम करती है.
  • इस परिषद के अंतर्गत 12 कार्यकारी समितियाँ कार्यरत हैं.

Gulbenkian prize :-

  • क्लाइमेट एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग को मानवाधिकार के लिए गुलबेंकियन पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्हें 1 मिलियन यूरो की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया है.
  • ग्रेटा थनबर्ग ने पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित संगठनों को पुरस्कार राशि दान करने का निर्णय लिया है. उन्हें 43 देशों के 136 प्रत्याशियों में से चुना गया है.
  • ग्रेटा थनबर्ग एक स्वीडिश पर्यावरण कार्यकर्ता हैं. जलवायु परिवर्तन के कारण अस्तित्वगत मानवता संकट को बढ़ावा देने के लिए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली.
  • इस पुरस्कार को कैलूस्टे गुलेनबेकियन फाउंडेशन द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है. यह 1976 में स्थापित किया गया था. इसका पुरस्कार वितरण समारोह पुर्तगाल में आयोजित किया जाता है.

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