Sansar डेली करंट अफेयर्स, 21 February 2022

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 21 February 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे.

Topic : What is the quantum tech demo by DRDO?

संदर्भ

होयसल मंदिरों को वर्ष 2022-23 के लिए विश्व विरासत के रूप में भारत की ओर से नामांकन के रूप में शामिल किया गया है. इन मंदिरों में शामिल हैं: 

  • होयसल मूर्तिकला शैली  का विकास कर्नाटक के दक्षिण क्षेत्र में हुआ.
  • होयसलेश्वर मंदिर जो कर्नाटक के हलेबिड में है, इसे 1150 ईस्वी में होयसल राजा द्वारा काले शिष्ट पत्थर से बनवाया गया था.
  • ऐसा कहा जा सकता है कि होयसल कला का आरंभ ऐहोल, बादामी और पट्टदकल के प्रारंभिक चालुक्य कालीन मंदिरों में हुआ, लेकिन मैसूर क्षेत्र में विकसित होने के पश्चात् ही इसका विशिष्ट स्वरूप प्रदर्शित हुआ, जिसे होयसल शैली के नाम से जाना गया.
  • अपनी प्रसिद्धि के चरमकाल में इस शैली की एक प्रमुख विशेषता स्थापत्य की योजना और सामान्य व्यवस्थापन से जुड़ी है.

होयसल मंदिर

होयसल मंदिरों की विशेषताएँ

  • होयसल मंदिर, हाइब्रिड या बेसर शैली के अंतर्गत आते हैं क्योंकि उनकी अनूठी शैली न तो पूरी तरह से द्रविड़ है और न ही नागर. द्रविड़, नागर आदि के विषय में यहाँ विस्तार से पढ़ें – मंदिर की शैलियाँ
  • होयसल मंदिरों में खंभे वाले हॉल के साथ एक साधारण आंतरिक कक्ष की बजाय एक केंद्रीय स्तंभ वाले हॉल के चारों ओर समूह में कई मंदिर शामिल होते हैं.
  • इन मंदिरों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये मंदिर एक वर्गाकार चबतरे (जगती) पर प्रोजेक्शन कोणों के साथ बेहद तारे जैसी जटिल संरचना का निर्माण करते हैं.
  • इस तरह ये अपने तारे जैसी मल आकति एवं सजावटी नक्काशियों के कारण अन्य मध्यकालीन मंदिरों से अलग हैं.
  • चूँकि ये मंदिर शैलखटी (Steatite) चट्टानों से निर्मित हैं जो अपेक्षाकृत एक नरम पत्थर होता है जिससे कलाकार मूर्तियों को जटिल रूप देने में सक्षम होते थे. इसे विशेष रूप से देवताओं के आभृषणों में देखा जा सकता है जो मंदिर की दीवारों को सुशोभित करते हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय.

Topic : World Neglected Tropical Diseases Day

संदर्भ

विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस (World Neglected Tropical Diseases Day) 30 जनवरी को मनाया जाता है. इस दिन को 20 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है.

वर्ष 2022 की थीम: Achieving health equity to end the neglect of poverty related diseases.

पृष्ठभूमि

पहले विश्व उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग दिवस को 2020 में चिह्नित किया गया था. इस दिन को मनाने का प्रस्ताव संयुक्त अरब अमीरात द्वारा किया गया था. यह प्रस्ताव 74वाँ विश्व स्वास्थ्य सभा में किया गया था.

20 उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग इस प्रकार हैं: बुरुली अल्सर, चागास रोग, डेंगू और चिकनगुनिया, ड्रैकुनकुलियासिस, याॅ, फूडबोर्न ट्रेमटेडायसिस, ह्यूमन अफ्रीकन ट्रिपेनोसोमियासिस, लीशमैनियासिस, कुष्ठ रोग, लिम्फेटिक फाइलेरियासिस, ऑन्कोसेरिएसिस, रेबीज, शिस्टोसोमियासिस, मिट्टी-संचरित हेल्मिंथियासिस, टेनिआसिस या सिस्टिसरकोसिस, ट्रेकोमा, क्रोमोब्लास्टोमाइकोसिस, स्केबीज, सर्पदंश.

उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग

  • WHO के अनुसार उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (NTD), वे बीमारियाँ होती हैं, जो उष्ण व उपोष्ण कटिबंध में स्थित ग्रामीण क्षेत्रों तथा शहरी क्षेत्रों की मलिन बस्तियों में निवास करने वाले गरीब लोगों को प्रभावित करती हैं.
  • जापानी इंसेफलाइटिस, डेंगु बुखार, कुष्ठ रोग, क्लेमाइडिया, बुरुलाई अल्सर, चैगास बीमारी आदि NTD के उदाहरण हैं. राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर इन बीमारियों का प्रभाव इतना भयंकर होता है कि इन्हें गरीबी के चिरस्थायीकरण के लिये उत्तरदायी माना जाता है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

indian_express

 

 

UPSC Syllabus: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास.

Topic : What is the quantum tech demo by DRDO?

संदर्भ

हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने देश में पहली बार 100 किलोमीटर से अधिक दूरी के बीच ‘क्वांटम कुंजी वितरण’ (QKD) लिंक का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है.

क्वांटम कुंजी वितरण क्या है?

  • QKD मुख्य रूप से सुरक्षित संचार के लिए एक तंत्र है, जो क्वांटम यांत्रिकी के विभिन्न घटकों से युक्त एक कूटलेखन प्रोटोकॉल (cryptographic protocol) का उपयोग करता है.
  • प्रौद्योगिकी दो संचार पक्षों के द्वारा साझा की गई यादृच्छिक गुप्त कुंजी के साथ संचार को सक्षम करती है.
  • क्वांटम कुंजी वितरण (QKD) प्रौद्योगिकी में डेटा स्थानांतरित करने के लिए फोटॉन– प्रकाश उत्सर्जन करने वाले कण- का उपयोग किया जाता है.
  • यह कुंजी किसी संदेश को कूटलेखन (encrypt) करने और विगूढ़न (decrypt) करने के लिए सुरक्षित साबित हुई है, तथा इस प्रकार के संदेश को सुरक्षित रूप से किसी भी मानक संचार चैनल पर भेजा जा सकता है.
  • यह प्रौद्योगिकी दो डीआरडीओ सुविधाओं, सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR), बेंगलुरु और डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट्स लेबोरेटरी – क्वांटम टेक्नोलॉजी (DYSL-QT), मुंबई द्वारा विकसित की गई है.

QKD की अभेद्यनीयता का कारण

  • ‘क्वांटम कुंजी वितरण’ की सुरक्षा, QKD ट्रांसमिशन के दौरान किसी भी अनधिकार प्रवेश का पता लगाने की क्षमता से उतन्न होती है. फोटॉन के अनूठे और दुर्बल गुणों के कारण, जब कोई भी तीसरा पक्ष (या छिपकर बात करने वाला) किसी भी तरह से फोटोन को पढ़ने या कॉपी करने की कोशिश करता है, तो फोटॉन की स्थिति परिवर्तित हो जाती है.
  • फोटॉन की स्थिति में परिवर्तन का पता, संचार के अंतिम सिरों पर बैठे प्रेषक और प्राप्तकर्ता को लग जाता है, और उन्हें कुंजी के साथ छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी तथा इसे रद्द करने करने के लिए सतर्क कर दिया जाता है.
  • फिर, एक नई कुंजी प्रेषित की जाती है. इसके अलावा, चूंकि नई उत्पन्न कुंजियाँ वास्तव में यादृच्छिक होती हैं, इसलिए वे भविष्य में हैकिंग के प्रयासों से सुरक्षित रहती हैं.
  • QKD वर्तमान संचार नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों द्वारा परिवहन किये जा रहे डेटा की सुरक्षा के लिये क्वांटम कंप्यूटिंग में तेज़ी से प्रगति एवं खतरे को दूर करने हेतु आवश्यक है. क्वांटम प्रौद्योगिकियों को मोटे तौर पर चार वर्टिकल में विभाजित किया जा सकता है- क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसर और क्वांटम सामग्री.
  • यह प्रौद्योगिकी क्वांटम सूचना के क्षेत्र में विभिन्न स्टार्ट-अप और छोटे व मध्यम उद्यमों को सक्षम करने में उपयोगी होगी.
  • यह सुरक्षा एजेंसियों को स्वदेशी प्रौद्योगिकी अवसंरचना के साथ एक उपयुक्त क्वांटम संचार नेटवर्क की योजना बनाने में सक्षम बनाएगा.
  • एन्क्रिप्शन सुरक्षित होता है और इसका मुख्य कारण फोटॉन के माध्यम से डेटा परिवर्तन का तरीका है. एक फोटॉन को पूरी तरह से कॉपी नहीं किया जा सकता है और इसे मापने का कोई भी प्रयास इसमें हस्तक्षेप करता है. इसका मतलब है कि डेटा को इंटरसेप्ट की कोशिश करने वाले व्यक्ति को उसके द्वारा छोड़े गए निशान के आधार पर खोजा जा सकता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास.

Topic : Non-Fungible Tokens- NFTs

संदर्भ

गैर-प्रतिमोच्य टोकन या नॉन-फंजिबल टोकन (Non-Fungible Token – NFT) अब बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं और डिजिटल कलाकृति को प्रदर्शित करने और बेचने का एक तेजी से लोकप्रिय तरीका बनते जा रहे हैं.

2015 से पहले हुई ‘नॉन-फंजिबल टोकन’ (NFTs) की शुरुआत के बाद से अब तक अरबों डॉलर खर्च किए गए हैं.

नॉन-फंजिबल टोकन (NFT)

  • कोई भी चीज़ जिसे डिजिटल रूप में बदला जा सकता है, वह NFT हो सकती है.
  • ड्रॉइंग, फोटो, वीडियो, जीआईएफ, संगीत, इन-गेम आइटम, सेल्फी और यहांँ तक कि एक ट्वीट सभी को NFT में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे बाद में क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करके ऑनलाइन कारोबार किया जा सकता है.

NFT का कार्य

  • यदि कोई अपनी डिजिटल संपत्ति को NFT में परिवर्तित करता है, तो उसे ब्लॉकचेन द्वारा संचालित स्वामित्व का प्रमाण प्राप्त होगा.
  • NFT की खरीद और विक्री हेतु एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट और एक एनएफटी मार्केटप्लेस की आवश्यकता होती है.
  • OpenSea.io, Rarible, Foundation कुछ एनएफटी मार्केटप्लेस हैं.
  • एनएफटी अन्य डिजिटल रूपों से इस मायने में अलग हैं और वे ब्लॉकचेन तकनीक द्वारा समर्थित हैं.
  • NFT में एक समय में केवल एक ही मालिक हो सकता है.
  • अनन्य स्वामित्व के अलावा, एनएफटी मालिक अपनी कलाकृति पर डिजिटल हस्ताक्षर भी कर सकते हैं और अपने एनएफटी मेटाडेटा में विशिष्ट जानकारी संग्रहीत कर सकते हैं.
  • इसे केवल वह व्यक्ति देख सकेगा जिसने NFT खरीदी है.

Prelims Vishesh

Kalpana Chawala :-

  • कल्पना चावला 1 फरवरी, 2022 को भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की पुण्यतिथि थी.
  • इसी दिन वर्ष 2003 में NASA का स्पेस शटल कोलंबिया पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय नष्ट हो गया था, इस दुर्घटना में कल्पना चावला समेत सभी सातों अन्तरिक्ष यात्रियों की मृत्यु हो गयी थी.
  • कल्पना चावला का जन्म 17 मार्च, 1962 को हरियाणा के करनाल में हुआ था.
  • कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ़ इंजीनियर्रिंग की डिग्री प्राप्त की थी. इसके बाद 1982 में वे अमेरिका चली गयी थी. 
  • 1984 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्सास से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ़ साइंस की डिग्री हासिल की तथा वर्ष 1988 में वे NASA से जुड़ी.
  • अप्रैल, 1991 में कल्पना चावला ने अमेरिका की नागरिकता हासिल कर ली.
  • वर्ष 1997 में कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला बनीं.
  • जनवरी 2003 में एक बाद फिर कोलम्बिया अंतरिक्ष यान में सवार होकर अंतरिक्ष में गई, लेकिन वापस लौटते समय फरवरी को उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उनमे सवार सभी अंतरिक्षयात्रियों की मृत्यु हो गई.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Current Affairs Hindi

January, 2022 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Print Friendly, PDF & Email

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.