Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 19 September 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Aspirational Districts Programme: ADP

संदर्भ

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (Aspirational Districts Programme: ADP ) की एक आकलन रिपोर्ट जारी की गई. यह अध्ययन अमेरिका स्थित “सोशल प्रोग्रेस इम्पेरेटिव” द्वारा संचालित किया गया था, जिसे हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल और मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रोफेसरों तथा भारत के इंस्टिट्यूट फॉर कॉम्पेटिटिवनेस (Institute for Competitiveness, India) द्वारा स्थापित किया गया था.

मुख्य निष्कर्ष

  • अधिकांश जिलों द्वारा अभी अपने लक्ष्यों का 40%-90% पूर्ण करना है तथा न तो कोई स्पष्ट उपलब्धि प्राप्त जिला है और न ही कोई ऐसा जिला है जिसने कतिपय प्रगति न की हो.
  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम में 5 क्षेत्रक सम्मिलित हैं – स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन व कौशल विकास तथा बुनियादी अवसंरचना.
  • जिलों में अधिकतम प्रगति स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में दृष्टिगोचर हुई है.
  • अधिकांश जिलों के लिए कृषि और वित्तीय समावेशन चिंता के मुख्य क्षेत्र हैं.
  • सर्वोत्तम प्रथाओं के तीन प्रमुख क्षेत्र समक्ष आए हैं यथा- जागरूकता अभियान, विभिन्‍न हितधारकों (सरकार, निजी और नागरिक समाज) के मध्य सहयोग तथा डेटा संचालित शासन.
  • आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ADP) देश के अधिकांश अविकसित जिलों के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार में तेजी लाने के लिए वर्ष 2018 में प्रारंभ किया गया था.
  • वर्तमान में यह कार्यक्रम देश भर के 112 जिलों में लागू किया गया है.
  • कार्यक्रम की व्यापक रूपरेखा में केंद्र एवं राज्य योजनाओं का अभिसरण (Convergence), केंद्र, राज्यों और जिलों के मध्य सहयोग (Collaboration) तथा एक जन आंदोलन द्वारा संचालित जिलों के बीच प्रतिस्पर्धा (Competition among districts) शामिल है.

आकांक्षी जिला कार्यक्रम (ASPIRATIONAL DISTRICTS PROGRAMME – ADP)

  1. नव भारत निर्माण के उद्देश्य को पाने के लिए भारत के सबसे पिछड़े जिलों के उन्नयन का कार्यक्रम बनाया गया है. इन जिलों को आकांक्षी जिले अर्थात् Aspirational Districts की संज्ञा दी गई है.
  2. Transformation of aspirational जिला कार्यक्रम भारत सरकार के द्वाराजनवरी, 2018में घोषित किया गया.
  3. इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के सबसे अल्प-विकसित जिलोंमें तेजी से बदलाव लाना है.
  4. इस कार्यक्रम का मुख्य नारा है –Convergence (समागम – केन्द्रीय और राज्य योजनाओं का), Collaboration (सहयोग – केंद्र स्तरीय एवं राज्य स्तरीय अधिकारीयों एवं जिला समहर्ताओं के बीच, Competition (प्रतिस्पर्द्धा -जिलों के बीच).
  5. इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश के 115 जिले चुने गए हैं जिनमें 35 जिले नक्सल-प्रभावित हैं.

जिलों की रैंकिंग कैसे होती है?

  • जिलों की रैंकिंग इसमें बहुत ही पारदर्शी ढंग से होती है. इसके लिए कई संकेतक निर्धारित हैं, जैसे – स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि, जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल्य विकास एवं मूलभूत अवसंरचना आदि.
  • जिस डाटा के आधार रैंकिंग की जाती है, वे चैंपियंस ऑफ़ चेंज डैशबोर्ड पर सर्वसामान्य के लिए उपलब्ध होते है.

ADP की जरुरत

यदि सभी आकांक्षी जिलों में बदलाव आ जायेगा तो देश की आंतरिक सुरक्षा के परिदृश्य में भी सुधार हो जायेगा. साथ ही देश में विकास की गति में तेजी भी आ जाएगी.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

ADP से जुड़ी चुनौतियाँ

  • ADP अपर्याप्त बजटीय संसाधनों से संबंधित समस्या से प्रभावित है.
  • विदित हो कि यह कार्यक्रम कई मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसके कारण कभी-कभी समन्वय के अभाव की समस्या सामने आती है.
  • स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम के कार्यान्वयन और डिज़ाइन में सुधार हेतु उच्च गुणवत्ता वाला प्रशासनिक डेटा जरूरी होता है.
  • इस संदर्भ में नीति आयोग द्वारा जारी डेल्टा रैंकिंग भी स्वयं गुणवत्ता के बजाय मात्रा का आकलन करने पर केंद्रित है.
  • विद्यालयों में पाठ्यपुस्तकों का समय पर वितरण डेल्टा रैंकिंग का भाग है, हालाँकि पाठ्यपुस्तक वितरण किसी एक ज़िले में समस्या हो सकती है तथा किसी अन्य में नहीं. इसके साथ ही भारत में शिक्षा की गुणवत्ता भी बहुत ही निराशजनक है और वर्ष 2018 में निर्गत शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट में भी यह तथ्य उजागर हुआ था.

सुझाव

  • एक अधिक सरलीकृत सूचकांक की आवश्यकता है, जिसमें विभिन्न परिणाम संकेतकों को सावधानीपूर्वक चुना गया हो जिससे राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को अधिक स्पष्ट रूप से दर्शाया जा सके.
  • स्थानीय प्रशासन को और अधिक वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिये.
  • प्रशासनिक डेटा में सुधार के लिये प्रत्येक ज़िले की आंतरिक क्षमता में बढ़ोतरी की जानी चाहिये.

निष्कर्ष

आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम भारत में क्षेत्रीय विषमता को कम करने तथा आर्थिक विकास में वृद्धि करने की दृष्टि से एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है. साथ ही यह कार्यक्रम विभिन्न राज्यों एवं ज़िलों के बीच एक सकारात्मक प्रतिस्पर्द्धा के जरिये खुद को अधिक विकसित करने पर ज़ोर देकर प्रतिस्पर्द्धात्मक संघवाद को प्रोत्साहित करता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations.

Topic : Pak. told to allow Queen’s Counsel

संदर्भ

पाकिस्तान की नागरिक अदालत में कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने संबंधी मुद्दे के अटक जाने पर, भारत ने अपने वकील की नियुक्ति पर विवाद को समाप्त करने के लिए राष्ट्रमंडल के आधार का उपयोग किया है.

भारत ने पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की सजा पर पुनर्विचार के लिये स्वतंत्र एवं निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने को लेकर एक भारतीय वकील या ‘क्वींस काउंसल’ (Queen’s Counsel) को नियुक्त करने की बृहस्पतिवार को अपील की है.

पृष्ठभूमि

  1. भारत ने स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की पृष्ठभूमि में अपना सुझाव दिया है.
  2. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of justice-ICJ) द्वारा पाकिस्तान को मौत की सजा की निष्पक्ष समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था, किंतु भारत का कहना है कि पाकिस्तान ने उसे अब तक ‘बाधारहित’ पहुंच प्रदान नहीं की है.

क्वींस काउंसल’ कौन होता है?

  1. ‘क्वींस काउंसल’ (Queen’s Counsel) एक ऐसा बैरिस्टर या अधिवक्ता होता हैजिसे लॉर्ड चांसलर की अनुशंसा पर ब्रिटिश महारानी के लिये नियुक्त किया जाता है.
  2. ‘क्वींस काउंसल’ को विश्व के लगभग सभी न्यायालयों में मान्यता दी जाती है.
  3. ‘क्वींस काउंसल’ की नियुक्ति, अनुभव स्तर के बजाय योग्यता के आधार पर कानूनी पेशे में कार्यरत व्यक्तियों में से की जाती है.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : IBSA

संदर्भ

हाल ही में भारत-ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका (IBSA) के विदेश मंत्रियों की आभासी बैठक संपन्न हुई.

महत्त्वपूर्ण मुद्दे, जिन पर चर्चा की गई

  • मंत्रियों ने अधिक समावेशी, प्रतिक्रियाशील और भागीदारीपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय प्रशासनिक संरचना निर्मित करने हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में त्वरित एवं व्यापक सुधारों का आह्वान किया.
  • उन्होंने दोहराया कि वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय अभिशासन संरचना, मौजूदा शांति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के निवारणार्थ अप्रचलित एवं निष्प्रभावी हो गई है.
  • इस बैठक में IBSA-सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीके पर चर्चा की गई तथा सुरक्षा, आतंकवाद का विरोध, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, दक्षिण-दक्षिण सहयोग आदि जैसे वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान भी किया गया.
  • कोविड-19 महामारी का सामना करने के दौरान प्राप्त हुए अनुभव साझा किए गए तथा निर्धनता और भुखमरी के उन्मूलन के लिए IBSA-फंड द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की गई.

IBSA क्या है?

  1. IBSA की स्थापना को औपचारिक रूप 6 जून, 2003 को संपन्न the Brasilia Declaration के द्वारा दिया गया था.
  2. यह संगठन भारत, ब्राज़ील और दक्षिणी अफ्रीका जैसे उभरते हुए देशों के बीच समन्वयन के लिए बनाया गया है.

भारत के लिये दक्षिण अफ्रीका का महत्त्व

  • भारत के साथ निकटता के कारण दक्षिण अफ्रीका भारत की सुरक्षा, विशेषकर हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका क्षेत्र के लिये महत्त्वपूर्ण है. इस क्षेत्र में कट्टरता, पाइरेसी, संगठित अपराध का खतरा हमेशा बना रहता है.
  • अफ्रीका हमारे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में हमारी मदद कर सकता है, जो हमारी एकीकृत ऊर्जा नीति के घोषित उद्देश्यों में से एक है.
  • अफ्रीका में सोने और हीरे सहित मूल्यवान खनिजों, धातुओं का समृद्ध भंडार भी है. अफ्रीका भारतीय निवेश के लिये बेहतर स्थान प्रदान करता है.
  • अफ्रीका भारत की सॉफ्ट और हार्ड पावर दोनों को प्रदर्शित करने हेतु इसे स्थान प्रदान करता है.
  • यूनाइटेड नेशन पीस कीपिंग ऑपरेशन के माध्यम से अफ्रीकी देशों की शांति और स्थिरता में भारत सक्रिय रूप से शामिल रहा है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत और दक्षिण अफ्रीका के पास अफ्रीकी महाद्वीप में अपनी मज़बूत उपस्थिति बढ़ाने के अपार अवसर हैं. इस प्रकार दोनों देश अधिक-से-अधिक लाभ उठा सकते हैं जिससे सभी अफ्रीकी देशों को भी लाभ होगा. यदि दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत अपनी गतिशीलता बनाए रखता है तो उसे ब्रिक्स देशों के बीच एक मज़बूत लीडर के रूप में खुद को स्थापित करने का यह बेहतर अवसर है. दक्षिण अफ्रीका के साथ द्विपक्षीय संबंधों के अलावा, भारत को IBSA (भारत, ब्राज़ील, दक्षिण अफ्रीका) और IORA (इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन) जैसे समूहों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहिये जो भारत को अफ्रीकी महाद्वीप के तटीय देशों में मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेंगे.


GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Global Initiative on Reducing Land Degradation

संदर्भ

हाल ही में सम्पन्न जी-20 देशों के पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में भू-निम्नीकरण को कम करने के लिए वैश्विक पहल एवं प्रवाल भित्ति कार्यक्रम का आरंभ किया गया है.

भू-निम्नीकरण को कम करने के लिए वैश्विक पहल (Global Initiative on Reducing Land Degradation)

  • इसका उद्देश्य जी-20 सदस्य राष्ट्रों में और विश्व स्तर पर भू-निम्नीकरण की रोकथाम करना और मौजूदा ढांचे के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करना है. यह अन्य सतत विकास लक्ष्यों (SDG’s) की उपलब्धि पर संभावित प्रभाव को ध्यान में रखेगा.
  • भारत में लगभग 29% भूमि का निम्नीकरण हो रहा है.
  • भारत “संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण की रोकथाम हेतु अभिसमय” (United Nations Convention to Combat Desertification) का हस्ताक्षरकर्ता देश है.
  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भू-निम्नीकरण तटस्थ स्थिति (land degradation neutral status) प्राप्त करना है, जिससे भूमि के क्षरण में हो रही वृद्धि को भूमि में सुधार से प्राप्त होने वाले लाभों द्वारा कम किया जा सके.

ग्लोबल कोरल रीफ्‌ रिसर्च एंड डेवलपमेंट एक्सेलरेटर प्लेटफॉर्म (Global Coral Reef research and development Accelerator Platform)

इसका उद्देश्य प्रवाल भित्ति संरक्षण, पुनर्स्थापन और अनुकूलन के सभी स्तरों में अनुसंधान, नवाचार एवं क्षमता निर्माण के संवर्धन के लिए एक वैश्विक अनुसंधान व विकास कार्यक्रम सृजित करना है.

प्रवाल भित्तियाँ क्या हैं?

  • प्रवाल भित्तियाँ महासागरों में जैव-विविधता के महत्त्वपूर्ण हॉटस्पॉट हैं. वस्तुतः प्रवाल जेलीफिश और एनिमोन की भाँति Cnidaria श्रेणी के जानवर होते हैं. इनमें व्यक्तिगत पोलिप (polyps) होते हैं जो आपस में मिलकर भित्ति का निर्माण करते हैं. प्रवाल भित्तियों में अनेक प्रकार की प्रजातियों को आश्रय मिलता है.
  • ये भित्तियाँ तटीय जैवमंडल की गुणवत्ता को बनाए रखती हैं.
  • कार्बन डाइऑक्साइड को चूना पत्थर शेल में बदलकर प्रवाल उसके स्तर को नियंत्रित करते हैं. यदि ऐसा नहीं हो तो महासागर के जल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा इतनी बढ़ जायेगी कि उससे पर्यावरण को संकट हो जाएगा.
  • प्रवाल भित्तियाँ सर्वाधिक जैव-विविधतापूर्ण और उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं.
  • प्रवाल भित्तियाँ तटरेखा के लिए प्राकृतिक अवरोघ के रूप में कार्य करती हैं और आंधी-तूफान व चक्रवातों आदि से होने वाली क्षति एवं बाढ़ इत्यादि से उसकी रक्षा भी करती हैं.
  • प्रवाल भित्ति कार्बन डाइऑक्साइड का भी अवशोषण करती हैं.
  • भारत में, प्रवाल भित्तियाँ कच्छ की खाड़ी, मन्‍नार की खाड़ी, अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप द्वीप समूह और मालवन (महाराष्ट्र) में पाई जाती हैं.

प्रवाल श्वेतीकरण किसे कहते हैं?

  • मूलतः श्वेतीकरण तब होता है जब प्रवालों से प्राकृतिक रूप से जुड़ी जूक्सेनथेले (zooxanthellae) नामक काई बाहर आने लगती है. ऐसा जल के तापमान बढ़ने से होता है. वस्तुतः यह काई प्रवाल की ऊर्जा का 90% मुहैया करती है. इस काई में क्लोरोफील और कई अन्य रंजक होते हैं. इन तत्त्वों के कारण प्रवालों का रंग कहीं पीला तो कहीं लाल मिश्रित भूरा होता है.
  • जब प्रवाल सफ़ेद होने लगता है तो उसकी मृत्यु तो नहीं होती, परन्तु लगभग मृत ही हो जाता है. कुछ प्रवाल इस प्रकार की घटना से बच निकते हैं और जैसे ही समुद्र तल का तापमान सामान्य होता है तो यह फिर से पुराने रूप में आ जाते हैं.
  • 2016-17 में विशाल प्रवाल भित्ति के उत्तरी भागों में दोनों वर्ष अभूतवर्ष श्वेतीकरण देखा गया, जिस कारण उन्हें ऐसी क्षति पहुँची कि उसकी भरपाई होना कठिन है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

प्रवाल द्वीप के विनाश को रोकने के लिए उपाय

  • तापमान वृद्धि को पूर्व औद्योगिक काल से 2°C तक सीमित करना.
  • प्रवाल द्वीपों के पारिस्थितिकी तंत्र की वहन क्षमता के अनुकूल ही पर्यटन व मत्स्यन को बढ़ावा देना.
  • प्रवालों पर आजीविका के वैकल्पिक साधनों को विकसित किया जाना चाहिये.
  • प्रवाल द्वीपों के विभिन्न हितधारकों और NGO आदि के संयुक्त प्रबंधन जैसे दृष्टिकोण के माध्यम से प्रवाल द्वीप की रक्षा की जा सकती है.
  • रासायनिक रूप से उन्नत उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों के उपयोग को न्यून करना चाहिये.
  • खतरनाक औद्योगिक अपशिष्टों को जल स्रोतों में प्रवाहित करने से पहले उन्हें उपचारित करना चाहिये.
  • जहाँ तक संभव हो, जल प्रदूषण से बचना चाहिये.
  • रसायनों एवं तेलों को जल में नहीं बहाना चाहिये.
  • अति मत्स्यन पर रोक लगानी चाहिये, क्योंकि इससे प्राणी प्लवक में कमी आती है और परिणामतः कोरल भुखमरी का शिकार होते हैं.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Black Hole

संदर्भ

हाल ही में भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने बहुत बड़े कृष्ण विवर (black hole) की जांच करने का एक नया तरीका खोजा है – जिससे उसके द्रव्यमान और घूमने जैसे गुणों का पता लगाकर तारों को भेदने के बारे में निरीक्षण किया जा सके.

ब्लैक होल के जांच के नए मॉडल के बारे में

  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक मॉडल तैयार किया है जिससे ब्लैक होल के द्रव्यमान और घूमने/घूर्णन के बारे में जानकारी हासिल कर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कुछ ब्लैक होल बड़ी आकाशगंगाओं के केंद्र में पाए जाने वाले उच्च गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में खगोलीय पिंडों के आसपास आने पर तारों को कैसे भेदते हैं.
  • अधिकांश ब्लैक होल अलग-थलग होते हैं और उनका अध्ययन करना असंभव होता है. खगोलविद, इन ब्लैक होल के पास के तारों और गैस पर प्रभावों को देखकर उनका अध्ययन करते हैं.
  • बड़े ब्लैक होल अपनी गुरुत्वाकर्षण क्षमता से सितारों की परिक्रमा को नियंत्रित करते हैं और उसकी ज्वारीय ताकतें अपने आस-पास आने वाले तारों को अलग कर सकती हैं या भेद सकती हैं. भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने पहले तारों के विघटन की दर और उसके आंकड़ों की गणना की थी.

ज्वारीय विघटन घटना (टीडीई)

  • जब ब्लैक होल का ज्वारीय गुरुत्वाकर्षण (tidal gravity), तारों के अपने गुरुत्वाकर्षण से अधिक हो जाता है, तो तारे विघटित (disrupted) हो जाते हैं और इस घटना को ज्वारीय विघटन घटना (tidal disruption events – TDE) कहा जाता है.
  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के वैज्ञानिकों के मॉडल से तारे के ज्वारीय विघटन के बाद उसका अवलोकन किया जा सकता है. इससे ब्लैक होल के द्रव्यमान और नक्षत्रीय द्रव्यमान के बहुमूल्य आंकड़ों के अलावा भौतिकी के बारे में हमारी जानकारी बढ़ाने में मदद मिलेगी.
  • ज्वारीय विघटन की घटनाएं महत्वपूर्ण और उपयोगी घटनाएँ हैं जो अर्ध-आकाशगंगाओं में बड़े ब्लैक होल्स के द्रव्यमान का पता लगाने और भविष्यवाणी करने के लिए महत्वपूर्ण हैं.
  • भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) इस मॉडल से ब्लैक होल के गुरुत्वाकर्षण के बारे में जानकारी प्रपट होगी.

क्या हैं ब्लैक होल?

कृष्ण विवर अत्यधिक घनत्व तथा द्रव्यमान वाले ऐसें पिंड होते हैं, जो  आकार में बहुत छोटे होते हैं. इसके प्रबल गुरुत्वाकर्षण के चंगुल से  प्रकाश की किरणों का भी निकलना असम्भव होता है. चूँकि इससे प्रकाश की किरणें भी बाहर नहीं निकल पाती हैं, अत: यह हमारे लिए अदृश्य बना रहता है.

कैसे बनते हैं ब्लैक होल?

कृष्ण विवरों का निर्माण किस प्रकार से होता है, यह जानने से पहले, तारों के  विकासक्रम को समझना आवश्यक होगा. एक तारे का विकासक्रम आकाशगंगा (Galaxy) में उपस्थित धूल एवं गैसों के एक अत्यंत विशाल मेघ (Dust & Gas Cloud)  से आरंभ होता हैं. इसे ‘नीहारिका’ (Nebula) कहते हैं. नीहारिकाओं के अंदर हाइड्रोजन की मात्रा सर्वाधिक होती है और 23 से 28 प्रतिशत हीलियम तथा अल्प मात्रा में कुछ भारी तत्व होते हैं.

जब गैस और धूलों से भरे हुए मेघ के घनत्व में वृद्धि होती है. उस समय मेघ अपने ही गुरुत्व के कारण संकुचित होने लगता है. मेघ में संकुचन के साथ-साथ उसके केन्द्रभाग के ताप एवं  दाब में भी वृद्धि हो जाती है. अंततः ताप और दाब इतना अधिक हो जाता है कि हाइड्रोजन के नाभिक आपस में टकराने लगते हैं और हीलियम के नाभिक का निर्माण करनें लगतें हैं . तब तापनाभिकीय संलयन (Thermo-Nuclear Fusion) शुरू हो जाता है. तारों के अंदर यह अभिक्रिया एक नियंत्रित हाइड्रोजन बम विस्फोट जैसी होती है. इस प्रक्रम में प्रकाश तथा ऊष्मा  के रूप में ऊर्जा उत्पन्न होती है. इस प्रकार वह मेघ ऊष्मा व प्रकाश से चमकता हुआ तारा बन जाता है. 

आकाशगंगा में ऐसे बहुत से तारे होते हैं जिनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से तीन-चार गुना से भी अधिक होता है. ऐसे तारों पर गुरुत्वीय खिचांव अत्यधिक होने के कारण तारा संकुचित होने लगता है, और दिक्-काल (Space-Time) विकृत होने लगती है, परिणामत: जब तारा किसी निश्चित क्रांतिक सीमा (Critical limit) तक संकुचित हो जाता है, और अपनी ओर के दिक्-काल को इतना अधिक झुका लेता है कि अदृश्य हो जाता है. यही वे अदृश्य पिंड होते हैं जिसे अब हम ‘कृष्ण विवर’ या ‘ब्लैक होल’ कहतें है. अमेरिकी भौतिकविद् जॉन व्हीलर (John Wheeler) ने वर्ष 1967 में पहली बार इन पिंडो के लिए ‘ब्लैक होल’ (Black Hole) शब्द का उपयोग किया.


Prelims Vishesh

BlackRock Malware :-

  • हाल ही में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने संसद में कहा है कि डेटा चोरी करने की क्षमताओं से लैस ‘ब्लैकरॉक’ (BlackRock) नाम के एक मैलवेयर(malware) का पता लगाया गया है.
  • ब्लैकरॉक मैलवेयर , एक एंड्रॉइड मैलवेयर है. यह मैलवेयर इतना शक्तिशाली है कि यह एंटी-वायरस एप्लीकेशन को भी असफल कर सकता है तथा यह तुलनात्मक रूप से अधिक एप्स को लक्षित कर सकता है.

Hurricane Sally :-

  • हाल ही में हरीकेन सैली अमेरिकी मेक्सिको कि खाड़ी तट के करीब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था, जिससे ऐतिहासिक बाढ़ का खतरा पैदा हो गया था.
  • विदित हो कि अटलांटिक महासागर के पश्चिमी तक पर आने वाले उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को हरीकेन के नाम से जाना है.

National Cyclone Risk Mitigation Project :-

  • NCRMP का मुख्य उद्देश्य, भारत के तटीय राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में चक्रवातों के प्रभाव को कम करने हेतु उपयुक्त संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपाय उपलब्ध कराना है.
  • राष्ट्रीय चक्रवात जोखिम शमन (NCRMP) का प्रयोजन बेहतर प्रारंभिक चेतावनी प्रसार प्रणाली तथा स्थानीय समुदायों के क्षमतावर्धन आदि के माध्यम से सुभेद्यताओं को कम करना है.
  • NCRMP द्वारा सुभेद्यता के मिन्‍न-भिन्‍न स्तरों वाले 13 चक्रवात प्रवण राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की पहचान की गई है.
  • इस परियोजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा, राज्य सरकारों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के साथ मिलकर किया जा रहा है.

Kharai camel :-

  • खारे ऊँट केवल कच्छ (गुजरात) में पाए जाने वाले ऊंट की एक विशिष्ट नस्ल है.
  • ये ऊंट शुष्क भूमि और समुद्र जल दोनों परिवेशों पर जीवित रह सकते हैं.
  • खाराई ऊँट समुद्री जल में तीन किलोमीटर तक तैर सकते हैं तथा लवणीय पादप और मैंग्रोव इनके भोजन के प्रमुख स्रोत हैं.
  • कच्छ के शुष्क तटीय क्षेत्र इनके चरवाहों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त स्थलों में से एक है.
  • विदित हो कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा वर्ष 2015 में खाराई ऊंट को एक भिन्न नस्ल वाले ऊंट के रूप में चिन्हित किया गया था.

Sign of life detected on Venus :-

  • वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह के वायुमंडल में फॉस्फीन नामक एक गैस की खोज की है, जो वहाँ सूक्ष्म जीवों की मौजूदगी के संकेत प्रदान करती है. इस गैस की मौजूदगी से यह संभावना व्यक्त की जा रही है कि पृथ्वी से अन्यत्र ग्रह पर भी जीवन विद्यमान हो सकता है.
  • फॉस्फीन, हाइड्रोजन और फॉस्फोरस के मिश्रण से निर्मित एक गैस है, जो मनुष्य के लिए अत्यधिक विषाक्त होती है.
  • शुक्र पृथ्वी का निकटतम ग्रह है. पृथ्वी के समान संरचना वाला, परंतु पृथ्वी के आकार की तुलना में छोटा, यह ग्रह सूर्य से दूरी के क्रम में दूसरे स्थान पर है.

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