Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 19 September 2019


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Kartarpur Sahib pilgrim corridor

संदर्भ

करतारपुर गलियारा परियोजना से जुड़ी हुई कुछ समस्याओं का अभी समाधान नहीं हो पाया है क्योंकि पाकिस्तान पर्याप्त लचीलापन नहीं दिखा रहा है.

भारत ने उससे अनुरोध किया है कि वह अपनी नीति में लचीलापन लाकर इन समस्याओं के समाधान में मदद करे.Kartarpur-Sahib-pilgrim-corridor

समस्याएँ

  • पाकिस्तान करतारपुर की तीर्थयात्रा करने वाले व्यक्तियों से प्रति व्यक्ति 20 डॉलर का शुल्क लेने की योजना बना रहा है.
  • भारत ने प्रस्ताव किया था कि दस हजार तीर्थयात्रियों को वहाँ जाने दिया जाए, पर पाकिस्तान इसके लिए तैयार नहीं है.
  • भारत चाहता है कि तीर्थयात्रियों के साथ विदेश विभाग का एक कौन्स्युलर अधिकारी भी जाए, किन्तु इस विषय में पाकिस्तान की ओर से कोई सकरात्मक प्रतिक्रिया नहीं आई है.

करतारपुर गुरुद्वारा दरबार साहिब से सम्बंधित तथ्य

करतारपुर का गुरुद्वारा रावी नदी के तट पर लाहौर से 120 किमी. उत्तर-पूर्व में स्थित है. यह वह स्थान है जहाँ गुरु नानक ने सिख समुदाय को जमा किया था और 1539 में अपनी मृत्यु तक 18 वर्ष तक रहे थे. यह गुरुद्वारा भारतीय भूभाग से दिखाई पड़ता है. यहीं से लोग गुरुद्वारे का दर्शन करते हैं. कभी-कभी घास बड़े हो जाने के कारण भारतीय सिख गुरूद्वारे को ठीक से देख नहीं पाते हैं तो पाकिस्तानी अधिकारी उन घासों को छाँट देते हैं. गुरूद्वारे को ठीक से देखने के लिए भारत के लोग दूरबीन का सहारा लेते हैं. ये दूरबीन गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक में लगाये गये हैं.

गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए जत्थे कब निकलते हैं?

करतारपुर (पाकिस्तान) में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए भारत से तीर्थयात्रियों के जत्थे हर वर्ष चार बार निकलते हैं. जिन अवसरों पर ऐसे जत्थे पाकिस्तान जाते हैं, वे हैं – वैशाखी, गुरु अर्जन देव शहीदी दिवस, महाराजा रंजित सिंह की पुण्यतिथि तथा गुरु नानक देव की जयंती.

गलियारा निर्माण से सम्बंधित समस्याएँ

कुछ दिनों से पाकिस्तान में खलिस्तान समर्थक लोग गुरुद्वारों का प्रयोग कर रहे हैं. हाल ही में, एक गुरुद्वारे में “सिख जनमत संग्रह 2020” के लिए पोस्टर लगाये गये थे और पैम्फलेट बाँटे गये थे. जब भारत के राजदूत और राजनयिक वहाँ जा रहे थे तो पाकिस्तान ने उन्हें रोक दिया था. इस प्रकार इस बात की प्रबल सम्भावना है कि यदि करतारपुर साहिब गलियारा बनता है तो पाकिस्तान उसका दुरूपयोग भारत के विरुद्ध करेगा.


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes.

Topic : National Pension Scheme for Traders and Self Employed Persons

संदर्भ

भारत सरकार ने यह निर्णय लिया है कि प्रधानमंत्री लघु व्यापारी मान-धन योजना  के अंतर्गत चालू वित्त वर्ष में 25 लाख लघु व्यापारियों के पंजीकरण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा तथा 2023-24 तक इसमें 2 करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों को जोड़ दिया जाएगा.

इस प्रकार अनुमान है कि इस पेंशन योजना का लाभ तीन करोड़ व्यापरियों तक पहुँच जाएगा.

योजना के मुख्य तत्त्व

  • इस योजना के अंतर्गत सभी छोटे दुकानदारों, खुदरा विक्रेताओं और स्व-नियोजित व्यक्तियों को 60 वर्ष होने पर न्यूनतम 3,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जायेगी.
  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए वे ही व्यक्ति योग्य माने जाएँगे जिनकी आयु 18 से 40 के बीच है और जिनका GST टर्न ओवर डेढ़ करोड़ रु. से कम है.
  • इस योजना में उन लोगों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा जिनको सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जैसे – राष्ट्रीय पेंशन योजना, कर्मचारी राज्य बीमा योजना और कर्मचारी भविष्य निधि. इसके अतिरिक्त जो आयकर के दायरे में आते हैं, उनको इसका लाभ नहीं मिलेगा.
  • इस योजना के लिए लाभार्थी को प्रत्येक महीने एक विशेष राशि जमा करनी होगी और केंद्र सरकार उतनी ही राशि अपनी ओर से जमा करेगी.
  • यह योजना स्वघोषणा पर आधारित योजना है क्योंकि इसमें बैंक खाते और आधार कार्ड के अतिरिक्त कोई भी अभिलेख जमा करने की आवश्यकता नहीं है.

योजना के अंतर्गत लाभार्थी और केंद्र सरकार द्वारा दिए गये अंशदान से सम्बंधित तालिका नीचे द्रष्टव्य है –

Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana or DDU-GKY


GS Paper 2 Source: Down to Earth

down to earth

UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies/ Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : District mineral foundations

संदर्भ

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ जिला खनिज फाउंडेशन (District Mineral Foundation –DMF) नियमों में संशोधन करने वाला पहला राज्य बन गया है.

संशोधन के प्रावधान

  • किये गये संशोधन के अनुसार DMF की प्रशासी परिषद् (Governing Council – GC) में दस ग्राम सभा सदस्य सीधे उन क्षेत्रों से शामिल किये जाएँगे जो खनन कार्य से प्रभावित हुए हों.
  • अब अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा के कम से कम आधे सदस्य आदिवासी होंगे.
  • सार्वजनिक उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए एक द्विचरणीय सामाजिक अंकेक्षण प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई है.
  • नए संशोधन में पंचवर्षीय योजना के लिए भी कुछ प्रावधान लाये गये हैं. यदि खनन सचिव आवश्यक समझें तो इस प्रक्रिया का किसी तृतीय पक्ष के द्वारा समीक्षा करवा सकते हैं.
  • ऐसे नियम लाये गये हैं जो वन अधिकार रखने वाले समुदायों के लिए सतत आजीविका को प्राथमिकता देते हैं.

जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) क्या हैं?

ये लाभरहित न्यास हैं  जो 2015 के खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम के द्वारा गठित हुए हैं. इनका उद्देश्य खनन से दुष्प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हितों की रक्षा करना और उन्हें लाभ पहुँचाना है. DMF सम्बंधित राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के अधीन आता है.

DMFT क्या है?

DMFT की स्थापना छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में की गई है. इसमें एक प्रशासी परिषद् और एक प्रबंधन समिति होती है जिनको अलग-अलग उत्तरदायित्व सौंपा गया है. इस परिसर और समिति के गठन के पीछे यह भावना थी कि निर्णय लेते समय संतुलन हो सके. परिषद् और समिति दोनों का प्रमुख जिला कलेक्टर होता है. इसमें कुछ अन्य सदस्य भी होते हैं जो या तो अधिकारी होते हैं या चुने हुए प्रतिनिधि. इसमें खनन से दुष्प्रभावित लोगों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Eurasian Economic Forum

संदर्भ

पिछले दिनों चीन के जियान नगर में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के द्वारा आयोजित यूरेशियाई आर्थिक संघ (Eurasian Economic Union – EAEU) की बैठक में भारत शामिल नहीं हुआ क्योंकि यह बैठक मात्र चीन की पट्टी एवं सड़क पहल (Belt and Road initiative – BRI) पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी. इस बैठक में यह तय किया गया कि यूरेशिया के प्राचीन महारेशम मार्ग (Ancient Great Silk Road) को फिर से एक नए प्रारूप में जीवित किया जाए.

पट्टी एवं सड़क पहल क्या है?

बेल्ट एंड रोड परियोजना की घोषणा चीन द्वारा 2013 में हुई थी. BRI पहल एक ऐसी पहल है जिसमें स्थल और समुद्र दोनों में सिल्क रोड की पट्टियाँ होंगी. इसका उद्देश्य पूर्वी एशिया के आर्थिक क्षेत्र को यूरोप के आर्थिक क्षेत्र से जोड़ना बताया जाता है. इस प्रकार इस परियोजना के अन्दर एशिया, यूरोप और अफ्रीका तीन महाद्वीप आते हैं. यदि यह परियोजना लागू होती है तो इसके अन्दर सकल वैश्विक जनसंख्या का 65% और विश्व की GDP का 60% आ जायेगा. साथ ही इसमें अभिकल्पित 6 आर्थिक गलियारों में 70 देश समाहित हो जाएँगे.

चीन देश यूरोप, पश्चिम एशिया, पूर्व अफ्रीका एवं स्वयं चीन को स्थलीय और सामुद्रिक व्यापार सम्पर्कों को फिर से जीवित करने और नये ढंग से रचने के लिए लगभग 1 ट्रिलियन डॉलर खर्च कर रहा है. इसके अंदर ऐसे आधुनिक बंदरगाह बनाए जा रहे हैं जो तीव्र गति वाली सड़कों और रेल गलियारों से जुड़ जाएँगे.

भारत की चिंता

  • गलियारा का हिस्सा PoK से होकर गुजरेगा जिसे भारत अपना अभिन्न अंग मानता है. भारत का कहना है कि यह गलियारा उसकी क्षेत्रीय अखंडता को आहत करता है.
  • इस परियोजना के कारण हिन्द महासागर में चीन का दबदबा बढ़ सकता है जिससे भारतीय हितों को क्षति पहुँच सकती है.
  • BRI परियोजनाओं के चलते कई देश गहरे कर्ज में डूब रहे हैं जिनको नहीं चुका पाने के कारण इन देशों की सम्प्रभुता पर आँच आ रही है.
  • इस परियोजना में चीन अपने कौशल अथवा तकनीक को हस्तांतरित नहीं कर रहा है. अतः अंततोगत्वा उन देशों को कोई लाभ नहीं होगा जहाँ उसका काम चल रहा है.
  • चीन की परियोजनाएँ पर्यावरण की दृष्टि से भी अनुकूल नहीं हैं.
  • इसके माध्यम से चीन भारत पर रणनीतिक बढ़त बनाना चाहता है. वह पूर्वोत्तर भारत के आस-पास अपनी उपस्थिति सुदृढ़ करना चाहता है. विदित हो कि यहाँ के कुछ भागों पर चीन अपना दावा करता रहा है. इस प्रकार इस परियोजना से भारत की सुरक्षा पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा.
  • चीन और भारत के आपसी रिश्ते ठीक नहीं हैं और दक्षिण-एशिया और हिन्द प्रशांत क्षेत्र में चीन के इरादे ऐसे हैं कि भारत कभी भी इस परियोजना के लिए हामी नहीं भरेगा.
  • इस परियोजना के अंदर बन रही अवसंरचनाओं की सुरक्षा के लिए चीन 30,000 सैनिकों की तैनाती शुरू कर चुका है. भारत का कहना है कि यह तैनाती अंततोगत्वा भारत को घेरने के निमित्त की गई है.

यूरेशियाई आर्थिक संघ क्या है?

  • यह संघ क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण से सम्बंधित एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है.
  • इसकी स्थापना यूरेशियाई आर्थिक संघ संधि के आधार पर हुई है, अतः इसकी अंतर्राष्ट्रीय वैधानिक मान्यता है.
  • इस संघ में शामिल देश हैं – रूस, बेलारूस, आर्मेनिया, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान.
  • इस संघ के देशों के अन्दर वस्तुओं, सेवाओं और श्रम का मुक्त रूप से आना-जाना होता है.
  • इस संघ के पास अपना एक नौकरशाही ढाँचा भी है.

संघ के अन्दर के निकाय

  • संघ की सर्वोच्च सत्ता सुप्रीम कौंसिल के पास होती है जिसमें सदस्य देशों के प्रमुख होते हैं.
  • इस संघ में एक अंतरसरकारी परिषद् भी होती है जिसमें सदस्य देशों की सरकारों के प्रमुख होते हैं.
  • संघ में एक स्थायी नियामक निकाय भी होता है जिसे यूरेशियाई आर्थिक आयोग कहते हैं. इस आयोग का मुख्य कार्य संघ के कारोबार और विकास की व्यवस्था करना तथा संघ के अंतर्गत आर्थिक एकीकरण के लिए प्रस्तावों का प्रारूप बनाना है.
  • यूरेशियाई आर्थिक संघ के पास एक न्यायालय भी होता है जिसका काम यूरेशियाई आर्थिक संघ संधि (EAEU Treaty) एवं अन्य संधियों को सदस्य देशों और निकायों पर समान रूप से लागू करवाना है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Concerns raised by IPCC about Carbon Emission

संदर्भ

पिछले दिनों जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित अंतर्राष्ट्रीय पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change – IPCC) ने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसमें कार्बन उत्सर्जन के विषय में कई चिन्ताएँ व्यक्त की गईं.

प्रतिवेदन में व्यक्त चिंताएँ

  • 2030 तक पूरे विश्व में कार्बन उत्सर्जन को 2010 वर्ष के स्तर से 45% नीचे लाना अनिवार्य होगा जिससे कि 2050 तक उत्सर्जन को समाप्त करने का लक्ष्य पाया जा सके.
  • यदि ऐसा करने में हम सफल नहीं होते हैं तो दक्षिणी गोलार्द्ध में अवस्थित विश्व के अधिकतम जनघनत्व वाले उष्णकटिबंधीय भूभागों पर बड़ा दुष्प्रभाव पड़ेगा क्योंकि वे निचले अक्षांशों पर स्थित हैं और वहाँ पहले से ही तापमान ऊँचा है.
  • उल्लेखनीय है कि प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के हिसाब से वर्तमान में दक्षिणी गोलार्द्ध में उत्तरी गोलार्द्ध की तुलना में उत्सर्जन कम ही होता है. परन्तु उत्तरी गोलार्द्ध के द्वारा वायुमंडल में मुक्त किये गये कार्बन के कारण संभावित जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक बड़ा प्रभाव दक्षिणी गोलार्द्ध पर ही पड़ेगा जिसका कारण ऊपर अभी बताया जा चुका है.
  • ऐसे दुष्प्रभाव का एक नमूना इसी वर्ष तमिलनाडु में देखा गया जब वहाँ भीषण जलसंकट उपस्थित हो गया था.

आगे की राह

वैश्विक तापवृद्धि में कोई ठहराव नहीं आया है. समुद्रों में जमा ताप भविष्य में वैश्विक तापवृद्धि को आगे बढ़ाएगा इसमें कोई संदेह नहीं है. अतः सभी देश इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि 2016 में 197 देशों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त राज्य पेरिस समझौते के अनुसार समुचित कदम उठाये जाएँ.

ज्ञातव्य है कि इस समझौते में यह लक्ष्य रखा गया था कि औद्योगिक युग (19वीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध) के समय जो वैश्विक तापमान था उसकी तुलना में वर्तमान वैश्विक तापमान को 2100 ई. तक 2˚C अधिक तक सीमित रखा जाए. यद्यपि अच्छा तो यह होता कि यह अंतर 1.5˚C ही रहता.

जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित अंतरसरकारी पैनल के एक प्रतिवेदन के अनुसार यदि यह लक्ष्य पाना है तो 2030 तक वार्षिक वैश्विक कार्बन उत्सर्जन को आधा करना आवश्यक होगा. तभी 2050 तक शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है.

ऐसा पाया जाता है कि जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव यह देखते हुए नहीं पड़ता है कि कौन-सा देश कितने कार्बन का उत्सर्जन कर रहा है. कहने का अभिप्राय यह है कि जो देश अधिक कार्बन छोड़ रहे हैं उनपर इसका दुष्प्रभाव कम होता है और जो कम कार्बन छोड़ रहे हैं उन्हीं के ऊपर संकट आ जाता है. इस स्थिति को देखते हुए एक Just Energy Transition (JET) model की परिकल्पना की गई है. इसके अनुसार जो समृद्ध देश ऊर्जा के स्रोतों में बदलाव पर पैसा खर्च कर रहे हैं, उन्हें चाहिए कि इस बदलाव के लिए अल्प-विकसित देशों की ओर से किये जा रहे प्रयासों के लिए भी वे अपना आर्थिक योगदान करें.

विदित हो कि इन देशों को अपनी GDP का 1.5% खर्च करना पड़ता है. यदि समृद्ध देश इसमें अपना हाथ बंटाएंगे तो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना सब के लिए सरल हो जाएगा.


Prelims Vishesh

MAITREE-2019 :-

  • 2006 से चालू एक वर्ष थाईलैंड में और तो दूसरे वर्ष भारत में आयोजित होने वाला भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास, 2019 इस बार मेघालय में सम्पन्न हो रहा है.
  • इस अभ्यास का उद्देश्य अपने-अपने देश में आतंकवाद विरोधी गतिविधियों से प्राप्त अनुभवों को साझा करना है.

‘Rudrashila’ :-

  • कालीधर बटालियन के 75वें सूत्रपात दिवस की याद में बैटल एक्स डिवीज़न के तत्त्वावधान में कालीधर बटालियन एक श्वेत जल राफ्टिंग अभियान आयोजित कर रहा है.
  • ज्ञातव्य है कि इस अभियान को रूद्रशिला नाम उत्तराखंड में बहने वाली गंगा नदी की सहायक नदी रूद्रप्रयाग पर रखा गया है.

Pangong Tso lake :-

  • पिछले दिनों भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख की पांगोंग झील के पास टकराव हो गया.
  • विदित हो कि पांगोंग झील हिमालय में स्थित एक 135 किलोमीटर लम्बा जलाशय है जो 4,350 किलोमीटर की ऊँचाई पर है.
  • इस झील का 45 किलोमीटर भाग भारत के नियंत्रण में और शेष 90 किलोमीटर भाग चीन के नियंत्रण में है.
  • यह एक नमकीन पानी वाली झील है जिसका बड़ा सामरिक महत्त्व है.

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