Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 January 2022

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Sansar Daily Current Affairs, 19 January 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे.

Topic : Thiruvalluvar

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जनवरी को तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके आदर्शों ने हर पीढ़ी के लोगों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है.

उन्होंने देश भर के युवाओं से तिरुवल्लुवर द्वारा रचित “कुरल” पढ़ने का आग्रह भी किया.

Thiruvalluvar

Picture Source: Wikipedia

संत तिरुवल्लुवर कौन थे?

  • तिरुवल्लुवर एक प्रसिद्ध तमिल कवि और दार्शनिक थे जिन्होंने नीतिशास्त्र तिरुक्कुरल की रचना ई थी.
  • उनका समय चौथी शताब्दी से पहली शताब्दी ई.पू. के बीच का बताया जाता है.
  • संगम काल के तमिल कवि मामुलानार ने उल्लेख किया था कि तिरुवल्लुवर तमिल साहित्य के सबसे बड़े विद्वान् थे.
  • उनके धर्म को लेकर भी विभिन्‍न मत हैं, उन्हें सामान्यत: जैन धर्म का माना जाता है लेकिन उनके हिंदू अनुयायी उन्हें हिंदू मानते हैं.
  • तिरुक्कुरल तमिल की एक सबसे श्रद्धेय प्राचीन कृति है. यह तीन खंडों में विभाजित है. पहले खंड (अरम) में, विवेक और सम्मान के साथ अच्छे नैतिक व्यवहार (सही आचरण) को बताया गया है. दूसरे खंड (पारुल) में सांसारिक मामलों की सही ढंग से चर्चा की गई है और तीसरे खंड (इनबम) में. पुरूष और महिला के बीच प्रेम संबंधों पर विचार किया गया है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

Thiruvalluvar :-

  • पिछले दिनों तमिलनाडु भाजपा ने एक चित्र ट्विट किया जिसमें तमिल संत “तिरुवल्लुवर” को श्वेत शाल के स्थान पर गेरुआ शाल पहने तथा विभूतिधारण किये हुए दिखाया गया. इससे एक विवाद खड़ा हो गया.

GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान- अति महत्त्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-स्रोत और हिमावरण सहित) और वनस्पति एवं प्राणिजगत में परिवर्तन और इस प्रकार के परिवर्तनों के प्रभाव.

Topic : Volcanic eruption on tiny Tonga shook the world

संदर्भ

हाल ही में, दक्षिणी प्रशांत महासागर में स्थित ‘टोंगा’ (Tonga) के एक द्वीप पर एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ है, जिसकी वजह से प्रशांत महासागर में ‘सुनामी लहरें’ उठी रही हैं.

  • यह, हुंगा-हापाई (Hunga-Ha’apai) और हुंगा-टोंगा (Hunga-Tonga) नामक दो छोटे निर्जन द्वीपों से मिलकर बना एक ‘समुद्र के भीतर होने वाला ज्वालामुखी विस्फोट’ (Undersea Volcanic Eruption) है.
  • टोंगा द्वीप समूह, ‘रिंग ऑफ फायर’ में अवस्थित है. यह ज्वालावृत्त प्रशांत महासागर के बेसिन के चारो ओर विस्तारित उच्च जवालामुखीय एवं भूकंपीय गतिविधियों की परिधि है.

Mount Soputan, Pacific ring of fire map

अग्नि मुद्रिका (RING OF FIRE) क्या है?

अग्नि मुद्रिका प्रशांत महासागर में एक क्षेत्र है जहाँ 450 ज्वालामुखी पर्वत हैं. विश्व के सर्वाधिक सक्रिय ज्वालामुखी पर्वतों में से ये तीन इसी क्षेत्र से हैं –

  1. माउंट सेंट. हेलेंस (अमेरिका)
  2. माउंट फूजी (जापान)
  3. माउंट पिनाटुबो (फिलीपींस)

अग्निमुद्रिका को कभी-कभी प्रशांत-चतुर्दिक पट्टी (circum-Pacific belt) भी कहते हैं. विश्व में होने वाले 90% भूकंप अग्नि मुद्रिका में ही होते हैं. विश्व के सर्वाधिक बड़े भूकम्पों में 80% इसी क्षेत्र में होते हैं. अग्निमुद्रिका की

आकृति घोड़े के नाल के सदृश्य है. यह चार लाख किलोमीटर लम्बी है और यह न्यूज़ीलैण्ड से आरम्भ होकर एशिया, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के तटों को पार करते हुए चीली तक जा पहुँचती है.

अग्नि मुद्रिका कैसे बना?

अग्निमुद्रिका महासागरीय टेक्टोनिक प्लेटों के हल्के महाद्वीपीय प्लेटों के नीचे चले जाने के कारण बना है. जिस क्षेत्र में ये टेक्टोनिक प्लेट मिलते हैं, उसको सबडक्शन क्षेत्र (subduction zone) कहते हैं.

रिंग ऑफ़ फायर भूकम्प क्यों लाती है?

  • विश्व के सबसे गहरे भूकम्प सबडक्शन क्षेत्र में ही होते हैं क्योंकि यहाँ टेक्टोनिकप्लेट एक-दूसरे से टकराते हैं और अग्नि-मुद्रिका वह स्थान है जहाँ विश्व के सबसे सबडक्शन क्षेत्र केन्द्रीय हैं.
  • जब पृथ्वी के पिघले हुए अंदरूनी भाग से ऊर्जा मुक्त होती है तो वह टेक्टोनिक प्लेटों को ऊपरढकेलती है और वे एक-दूसरे से टकराते हुए घर्षण उत्पन्न करते हैं. इस घर्षण के चलते ऊर्जा जमा होती है और जब यह ऊर्जा अंततः मुक्त होती है तो भूकम्प होता है. यह घटना जब समुद्र में होती है तो विनाशकारी सुनामी होते हैं.
  • टेक्टोनिकप्लेट सामान्यतः प्रत्येक वर्ष औसतन कुछ सेंटीमीटर आगे बढ़ते हैं, किन्तु जब भूकम्प आता है तो उनकी गति अत्यंत बढ़ जाती है और फलतः ये प्रति सेकंड कई मीटर बढ़ जाते हैं.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान.

Topic : Inter-State River Water Disputes Act

संदर्भ

हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी करते हुए कहा है, कि ‘अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम’ (Inter-State River Water Disputes Act) पर फिर से विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि यह क़ानून संबंधित मुद्दों को हल करने की तुलना में अधिक विवाद पैदा करता है.

मुख्यमंत्री का बयान ऐसे समय में आया है, जब कर्नाटक का कावेरी, महादयी और कृष्णा नदियों से संबंधित अंतर्राज्यीय जल विवादों को लेकर पड़ोसी राज्यों तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गोवा और आंध्र प्रदेश के साथ संघर्ष लगातार जारी है.

अंतर्राज्यीय नदी जल विवाद

संविधान के अनुच्छेद 262 में अंतर्राज्यीय जल विवादों (Inter-state water dispute) के न्यायनिर्णयन का प्रावधान किया गया है.

  1. इसके तहत, संसद, कानून द्वारा, किसी भी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण या नियंत्रण के संबंध में किसी भी विवाद या शिकायत को स्थगित करने का प्रावधान कर सकती है.
  2. संसद, विधि द्वारा यह प्रावधान भी कर सकती है कि उच्चतम न्यायालय या कोई अन्य न्यायालय ऐसे किसी विवाद या परिवाद के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगा.

जल विवादों का निपटारा करने हेतु संसद द्वारा दो कानून बनाए गए हैं:

नदी बोर्ड अधिनियम, 1956 (River Boards Act, 1956):

  • इसमें अंतर-राज्यीय नदी और नदी घाटियों के नियमन और विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा नदी बोर्डों के गठन का प्रावधान किया गया है.
  • इसके तहत, संबंधित राज्य सरकारों के अनुरोध पर उन्हें सलाह देने के लिए एक नदी बोर्ड का गठन किया जाता है.

अंतर्राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 (Inter-State Water Disputes Act, 1956):

यह अधिनियम, किसी अंतर-राज्यीय नदी या नदी घाटी के जल के संबंध में दो या दो से अधिक राज्यों के मध्य विवाद के निर्णय हेतु केंद्र सरकार को एक ‘तदर्थ न्यायाधिकरण’ (ad hoc tribunal) स्थापित करने का अधिकार देता है.

  • इस न्यायाधिकरण का निर्णय अंतिम होता है और विवाद से संबंधित पक्षकारों पर बाध्यकारी होता है.
  • इस अधिनियम के तहत, जल विवाद के संबंध में कोई मामला ऐसे न्यायाधिकरण में भेजे जाने के बाद, उस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय और किसी अन्य न्यायालय का अधिकार क्षेत्र नहीं रह जाता है.

 अंतरराज्यीय नदी जल विवादों से सम्बंधित संवैधानिक प्रावधान

  1. राज्य सूची मेंक्रमांक 17 (Entry 17) पर जल का वर्णन है अर्थात् जल राज्य सूची में आता है. यहाँ “जल” का तात्पर्य है – जल आपूर्ति, सिंचाई, नहर, जल निकासी, बाँध, जल भंडारण एवं पनबिजली.
  2. संविधान की केन्द्रीय सूची के क्रमांक56 (Entry 56) पर केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह लोकहित में संसद द्वारा घोषित सीमा तक अंतरराज्यीय नदियों और नदी घाटियों का अधिनियमन और विकास के लिए कार्य करेगी.
  3. धारा262 : संविधान की इस धारा के अंतर्गत किसी अंतरराज्यीय नदी अथवा नदी घाटी के जल के उपयोग, वितरण अथवा नियंत्रण के विषय में उसे विवाद अथवा शिकायत के लिए न्यायनिर्णय हेतु संसद कानून बनाकर प्रावधान करेगी. (उपवाक्य 1 – Clause 1)
  4. साथ ही संसद कानून बनाकर यह प्रावधान कर सकती है कि ऐसे विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय अथवा कोई अन्य न्यायालय का क्षेत्राधिकार नहीं होगा.(उपवाक्य 2 – Clause 2)

मेरी राय – मेंस के लिए

अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान हेतु निर्धारित कई स्तरों को हटाकर, एक ही चरण में इनका समाधान किया जाना चाहिए. ये समाधान सभी राजनीतिक हितों को अलग रखते हुए, नदी बेसिन क्षमता की अधिकतम उपयोगिता तथा प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के आधार पर होने चाहिए.

अंतरराज्यीय नदी जल विवादों के न्याय-निर्णय हेतु एक अकेला और स्थायी पंचाट स्थापित करने का केंद्र द्वारा दिया गया प्रस्ताव नदी जल विवादों के निपटारे की प्रणाली में एकरूपता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. परन्तु इस एकमात्र कदम से पूर्ण समाधान नहीं होगा क्योंकि समस्याएँ कई प्रकार की हैं, जैसे – विधिगत, प्रशासनिक, संवैधानिक और राजनीतिक. सहकारी संघवाद के ढाँचे को सशक्त बनाने के लिए यह आवश्यक है कि विवाद संवाद के माध्यम से सुलझाए जाएँ और इसमें राजनीतिक अवसरवादिता से बचा जाए. सहयोग की भावना से कार्य करने वाले एक सशक्त एवं पारदर्शी सांस्थिक ढाँचा होना आज समय की आवश्यकता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Orang National Park

संदर्भ

असम सरकार ने हाल ही में ओरांग राष्ट्रीय उद्यान का आकार बढ़ाने का फैसला किया है. इस पार्क को 200.32 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र में विस्तृत किया जायेगा. इस अतिरिक्त भूमि के जुड़ने से एक सींग वाले गैंडों और गंगा डॉल्फिनों को बहुत लाभ होगा, क्योंकि इसमें ब्रम्हपुत्र नदी भी सम्मिलित है. इससे कछुओं की 16 प्रजातियों को भी फायदा होगा.

ज्ञातव है कि असम सरकार ने सितम्बर 2021 में ओरांग राष्ट्रीय उद्यान का नाम राजीव गाँधी राष्ट्रीय उद्यान से बदलकर ओरांग राष्ट्रीय उद्यान कर दिया था. राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत घोषित किया जाता है.

राष्ट्रीय उद्यान, वन्य जीव अभ्यारण्य और अन्य वन्यजीव संबंधित विषयों को 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्थानांतरित कर दिया गया है.

ओरांग राष्ट्रीय उद्यान के बारे में

  • यह राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में ब्रम्हापुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित है.
  • इसे वर्ष 1985 में अभयारण्य एवं वर्ष 1999 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था.
  • इसे मिनी काजीरंगा के रूप में जाना जाता है.
  • यहाँ एक सींग वाले गैंडे (राइनो) की अच्छी खासी आबादी मिलती है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

Greater One-Horned Rhino :-

  • हाल ही में असम राज्य के वन विभाग ने एक-सींग वाले गैंडे (Greater One-Horned Rhino) के अवैध शिकार पर रिपोर्ट जारी की है.
  • असम राज्य के वन विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, असम राज्य में एक-सींग वाले गैंडे (Greater One-Horned Rhino) के अवैध शिकार में पिछले तीन वर्षों में अवैध शिकार में 86% की कमी आई है.
  • उल्लेखनीय है कि भारत में सबसे अधिक एक सींग वाले गैंडे असम के काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं.

Prelims Vishesh

Har Gobind Khorana :-

  • हाल ही में, प्रख्यात बायोकेमिस्ट और केमिकल बायोलॉजिस्ट ‘हर गोबिंद खुराना’ (Har Gobind Khorana) की 100वीं जयंती मनाई गई.
  • जन्म: 9 जनवरी, 1922, रायपुर, भारत (अब रायपुर, पाकिस्तान).
  • उन्होंने सर अलेक्जेंडर टॉड के तहत कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (1951) में एक फेलोशिप के दौरान न्यूक्लिक एसिड पर शोध शुरू किया.
  • उन्होंने 1970 में अपनी टीम की सहायता से ‘खमीर के जीन’ (yeast gene) की पहली कृत्रिम प्रतिलिपि को संश्लेषित करने में सफलता हासिल कर आनुवंशिकी विज्ञान में एक अन्य योगदान दिया.
  • उनका अध्ययन मुख्य रूप से ‘रोडोप्सिन’ (Rhodopsin) नामक प्रोटीन की संरचना और कार्य से संबंधित था. यह प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन, कशेरुकी जीवों की आंख के रेटिना में पाया जाता है.
  • उन्होंने ‘रोडोप्सिन’ में उत्परिवर्तन की भी जांच की. यह उत्परिवर्तन, रतौंधी के कारक ‘रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा’ से संबंधित होता है.
  • डाक्टर खुराना की महत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें अन्य दो अमरीकी वैज्ञानिकों – मार्शल डब्ल्यू निरेनबर्ग और रॉबर्ट डब्ल्यू होली- के साथ, फिजियोलॉजी अथवा चिकित्सा क्षेत्र में सन् 1968 का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया. यह पुरस्कार उन्हें जेनेटिक कोड और प्रोटीन संश्लेषण में इसकी भूमिका की व्याख्या के लिए दिया गया.
  • नोबेल पुरस्कार के अलावा, डाक्टर खुराना को ‘अल्बर्ट लास्कर बेसिक मेडिकल रिसर्च अवार्ड’ (1968) और ‘नेशनल मेडल ऑफ साइंस’ (1987) भी प्रदान किए गए.
  • भारत सरकार ने 1969 में डाक्टर खुराना को पद्म विभूषण से सम्मानित किया.

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