Sansar डेली करंट अफेयर्स, 19 April 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 19 April 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Ramanuja

संदर्भ

18 अप्रैल, 2021 को श्री रामानुजाचार्य की 1004वीं जयंती मनाई गई.

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रामानुजाचार्य

  1. रामानुजाचार्य एक हिन्दू धर्मशास्त्री, दार्शनिक और वैष्णव शाखा के सबसे बड़े आचार्यों में से एक थे.
  2. मध्यकालीन भारत में हुए भक्ति आन्दोलन में उनके दार्शनिक विचारों का बहुत बड़ा योगदान था.
  3. वे वेदान्त की विशिष्ट द्वैतवाद शाखा के मुख्य प्रणेता थे.
  4. उन्होंने ब्रह्म सूत्र और भगवद्गीता पर भाष्य लिखे (वेदार्थसंग्रहम, श्रीभाष्यम, गीताभाष्यम).
  5. रामानुजाचार्य या इलैया पेरुमल एक दक्षिण भारतीय ब्राह्मण धर्मशास्त्री एवं दार्शनिक थे. ये हिन्दूधर्म की भक्ति परम्परा के सबसे प्रभावशाली विचारक थे.
  6. वे भक्ति संत थे तथा उन्हें समानता के सन्देश का भी प्रसार किया था. उनके दर्शन को विशिष्टाद्वैतवाद (विशिष्ट+अद्वैत) के रूप में जाना जाता है.
  7. भक्तिवाद के उनके दार्शनिक आधार ने भक्ति आन्दोलन को अत्यधिक प्रभावित किया था. उनके शिष्य संभवतया शाट्यायनीय उपनिषद् जैसे ग्रन्थों के लेखक थे. उन्होंने स्वयं भी कई प्रभावशाली ग्रन्थ जैसे – ब्रह्मसूत्र और भगवद्गीता पर भाष्यों की रचना की थी. इन सभी की रचना संस्कृत भाषा में की गई थी.
  8. उन्होंने अपने तीन प्रमुख टीकाओं में भक्ति (भक्तिमय पूजा) मार्ग को अपनाने के लिए बौद्धिक आधार प्रदान किये. ये टीकाएँ हैं –वेदार्थ-संग्रह, श्रीभाष्य और भगवद्गीता-भाष्य.

विशिष्टाद्वैतवाद (विशिष्ट+अद्वैत)

  • इसके अनुसार सभी जीव गुणात्मक रूप से ब्रह्म के साथ एक हैं जबकि मात्रात्मक रूप से उनमें भिन्नताएँ व्याप्त हैं. रामानुज के अनुसार सभी जीवों के मात्रात्मक रूप से भिन्न होने का आशय यह है कि वे ब्रह्म का एक हिस्सा होने के कारण ब्रह्म पर ही निर्भर हैं लेकिन वे स्वयं ब्रह्म नहीं बन सकते.
  • इस दर्शन के अनुसार सभी जीवों की एक विशिष्ट सत्ता है. इस प्रकार ब्रह्म भी है किन्तु यह एक सर्वोच्च सत्ता है.
  • भौतिक जगत परमसत्ता की रचना है और इस भौतिक जगत के निर्माण के क्रम में परमसत्ता में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है.
  • दसवीं शताब्दी के अंत तक दक्षिणी भारत में दर्शन की विशिष्टाद्वैत प्रणाली सुस्थापित हो चुकी थी और इस मत के अनुयायी महत्त्वपूर्ण वैष्णव मंदिरों के प्रभारी बन गये थे.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Goa’s Civil Code

संदर्भ

हाल ही में, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एस ए बोबडे ने गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code- UCC) की प्रशंसा करते हुए, इसे लागू करने वाला एकमात्र राज्य बताया था.

मुख्य न्यायाधीश ने ‘बुद्धिजीवियों’ से गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ का गंभीरता से अध्ययन करने का अनुरोध भी किया था.

गोवा की ‘समान नागरिक संहिता’ के विषय में

  1. गोवा की पुर्तगाली नागरिक संहिता, 1867, मूलतः पुर्तगालियों द्वारा बनाया गया एक विदेशी संहिता / कोड है.
  2. गोवा की ‘नागरिक संहिता’ / सिविल कोड के चार भाग हैं, जो ‘नागरिकों की धारण शक्ति’ (Civil Capacity), ‘अधिकारों का अधिग्रहण’, ‘संपत्ति का अधिकार’ और ‘अधिकारों और उपचारों का उल्लंघन’ से संबंधित हैं.
  3. इसका प्रारम्भ, ‘गॉड और डोम लुइस, पुर्तगाल के राजा और अल्गार्वे’ के नाम से होता है.
  4. यह संहिता, गोवादमन और दीव प्रशासन अधिनियम, 1962 की धारा 5 (1) के कारण अभी भी लागू है, इस अधिनियम के अंतर्गत गोवा की ‘नागरिक संहिता’ को जारी रखने की अनुमति दी गई थी.

संविधान में अनुच्छेद 44 में क्या उल्लिखित है?

राज्य नीति निर्देशक तत्त्व (जो अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक हैं) के अनुच्छेद 44 में लिखा है कि देश को भारत के सपूर्ण क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करना चाहिए.

समान नागरिक संहिता क्या है?

संविधान निर्माण करते वक़्त बुद्धिजीवियों ने सोचा कि हर धर्म के भारतीय नागरिकों के लिए एक ही सिविल कानून रहना चाहिए. इसके अन्दर आते हैं:—
1. Marriage विवाह
2. Succession संपत्ति-विरासत का उत्तराधिकार
3. Adoption दत्तक ग्रहण

यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने का मतलब ये है कि शादी, तलाक और जमीन जायदाद के उत्तराधिकार के विषय में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने-अपने पर्सनल लॉ के तहत करते हैं.

क्या कुछ नागरिक मामलों में भारत में पहले से ही सामान संहिताएँ लागू हैं?

भारत में कई नागरिक मामलों के लिए एक ही प्रकार की संहिता अथवा अधिनियम लागू हैं, जैसे – भारतीय संविधा अधिनियम (Indian Contract Act), व्यवहार प्रक्रिया संहिता  (Civil Procedure Code), वस्तु विक्रय अधिनियम (Sale of Goods Act), सम्पत्ति हस्तांतरण अधिनियम (Transfer of Property Act), भागीदारी अधिनियम (Partnership Act), साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) आदि आदि.

परन्तु इनमें भी राज्यों ने सैकड़ों संशोधन कर डाले हैं. इसलिए इनमें समरूपता है ऐसा नहीं कह सकते हैं. पिछले दिनों कई राज्यों ने 2019 के समान मोटर वाहन अधिनियम को मानने से मन कर दिया.

समान नागरिक संहिता के विषय में चर्चा कब शुरू हुई?

जब ब्रिटिश भारत आये तो उन्होंने पाया कि यहाँ हिन्दू, मुस्लिम, इसाई, यहूदी आदि सभी धर्मों के अलग-अलग धर्म-सबंधित नियम-क़ानून हैं. 

जैसे हिन्दू धर्म में:-

1. पुनर्विवाह वर्जित था (Hindu Widow Remarriage Act of 1856 द्वारा ख़त्म किया गया)
2. बाल-विवाह अनुमान्य था, शादी की कोई उम्र-सीमा नहीं थी.
3. पुरुष के लिए बहुपत्नीत्व हिन्दू समाज में स्वीकार्य था.
4. स्त्री (जिसमें बेटी या पत्नी दोनों शामिल थे) को उत्तराधिकार से वंचित रखा जाता था
5. स्त्री के लिए दत्तक पुत्र रखना वर्जित था
6. विवाहित स्त्री को सम्पत्ति का अधिकार नहीं था (Married Women’s Property Act of 1923 द्वारा उसे ख़त्म किया गया)

मुस्लिम धर्म में:-

1. पुनर्विवाह की अनुमति थी
2. उत्तराधिकार में स्त्री का कुछ हिस्सा था
3. तीन बार तलाक बोलने मात्र से अपने जीवन से पुरुष स्त्री को हमेशा के लिए अलग कर सकता था.

अंग्रेजों ने शुरू में इस पर विचार किया कि सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक ही नागरिक संहिता बनायी जाए. पर धर्मों की विविधता और सब के अपने-अपने कानून होने के कारण उन्होंने यह विचार छोड़ दिया. इस प्रकार अंग्रेजों के काल में विभिन्न धर्म के धार्मिक विवादों का निपटारा कोर्ट सम्बन्धित धर्मानुयायियों के पारम्परिक कानूनों के आधार पर करने लगे.     

संविधान सभा ने भी समान नागरिक संहिता पर विचार किया था और एक समय इसे मौलिक अधिकार में रखा जा रहा था. परन्तु 5:4 के बहुतमत से यह प्रस्ताव निरस्त हो गया. किन्तु राज्य नीति निर्देशक तत्त्व के अन्दर इसे शामिल कर दिया गया.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : World Heritage Sites     

संदर्भ

प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा 18 अप्रैल को ‘अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं पुरातत्व स्थल दिवस’ (International Day for Monuments and Sites) के रूप में घोषित किया गया है.

  1. कई देशों में इस दिन को विश्व विरासत दिवस’ (World Heritage Day) के रूप में भी मनाया जाता है.
  2. इस वर्ष के ‘विश्व विरासत दिवस’ का विषय है: “मिश्रित भूत: विविधतापूर्ण भविष्य” (Complex Pasts: Diverse Futures).
  3. वैश्विक स्तर पर, इस दिवस को अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल परिषद’ (International Council on Monuments and Sites– ICOMOS) द्वारा आयोजित किया जाता है.

विश्व धरोहर स्थल क्या है?

UNESCO विश्व धरोहर स्थल वह स्थान है जो UNESCO विशेष सांस्कृतिक अथवा भौतिक महत्ता के आधार पर सूचीबद्ध करता है. यह सूची UNESCO विश्व धरोहर समिति के द्वारा प्रशासित अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम द्वारा संधारित की जाती है. इस समिति में 21 देश सदस्य होते हैं जिनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा करती है.

प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल जिस देश में होता है उसके वैधानिक भूक्षेत्र का एक भाग बना रहता है, परन्तु UNESCO अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में इसके संरक्षण का जिम्मा लेता है.

विश्व धरोहर स्थल के लिए पात्रता

  • विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुने जाने के लिए उस स्थान पर विचार किया जाता है जो पहले से ही श्रेणीबद्ध लैंडमार्क के रूप में मानी है और जो भौगोलिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अनूठा है. इसका विशेष सांस्कृतिक अथवा महत्त्व होना आवश्यक है, जैसे – कोई प्राचीन भग्नावशेष अथवा ऐतिहासिक स्मारक, भवन, नगर, संकुल, मरुभूमि, वन, द्वीप, झील, स्थापत्य, पर्वत अथवा जंगल.
  • विश्व धरोहर स्थल उस स्थल को कहते हैं जो या तो प्राकृतिक है अथवा मनुष्यकृत है. इसके अतिरिक्त कोई भी ऐसा ढाँचा जिसका अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व है अथवा ऐसी जगह जिसके लिए विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है, वह विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) कहलाता है.
  • ऐसे धरोहर स्थलों को संयुक्त राष्ट्र संघ और UNESCO की ओर से औपचारिक मान्यता दी जाती है. UNESCO का विचार है कि विश्व धरोहर स्थल मानवता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं और इनकी सांस्कृतिक एवं भौतिक सार्थकता ही है.

विश्व धरोहर स्थल का वैधानिक दर्जा

जब UNESCO किसी स्थल को विश्व धरोहर स्थल नामित करता है तो प्रथमदृष्टया यह मान लिया जाता है कि सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील यह स्थल वैधानिक रूप से सुरक्षित होगा. सुरक्षा की यह गारंटी जेनेवा और हेग संधियों में वर्णित प्रावधानों से प्राप्त होती है. विदित हो कि ये संधियाँ युद्ध के समय सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय  कानून की परिधि में लाती हैं.

संकटग्रस्त स्थल (ENDANGERED SITES) क्या होते हैं?

  • यदि विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित किसी स्थल पर सशस्त्र संघर्ष और युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, अवैध शिकार अथवा अनियंत्रित नगरीकरण अथवा मानव विकास से खतरा उत्पन्न होता है तो उस स्थल को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची में डाल दिया जाता है.
  • ऐसा करने का उद्देश्य यह होता है कि पूरे विश्व में इन खतरों के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाए और उनके प्रतिकार के लिए उपाय करने को प्रोत्साहन मिले. खतरों को दो भागों में बाँट सकते हैं – पहले भाग में वे खतरे हैं जो सिद्ध हो चुके हैं और दूसरे भाग में वे खतरे हैं जो संभावित हैं.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Conservation and disaster management related issues.

Topic : National climate vulnerability assessment

संदर्भ

हाल ही में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा ‘राष्ट्रीय जलवायु भेद्यता आकलन (National climate vulnerability assessment) रिपोर्ट निर्गत की गई है.

  • इस रिपोर्ट की थीम है-  ‘उभयनिष्ठ रूपरेखा के माध्यम से भारत में अनुकूलन योजना तैयार करने हेतु जलवायु भेद्यता आकलन’ (Climate Vulnerability Assessment for Adaptation Planning in India Using a Common Framework).
  • इस रिपोर्ट में वर्तमान जलवायु संबंधी जोखिमों और भेद्यता के प्रमुख चालकों के लिहाज से भारत के सबसे संवेदनशील राज्यों और जिलों की पहचान की गई है.

प्रतिवेदन के मुख्य निष्कर्ष

  1. प्रतिवेदन में जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील राज्यों के रूप में, ‘झारखंड, मिजोरम, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, असम, बिहार, अरुणाचल प्रदेश, और पश्चिम बंगाल’ को चिन्हित किया है.
  2. अधिकांशतः, देश के पूर्वी भाग में स्थित इन राज्यों में अनुकूलन संबंधी उपायों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है.

भेद्यता आकलन की जरूरत

  1. परिवर्तनों के प्रतिसंवेदनशील माने जाने वाले भारत के हिस्सों को मानचित्र पर चिन्हित कर लेने से जमीनी स्तर पर जलवायु से संबंधित कार्रवाइयों को प्रारम्भ करने में सहायता मिलेगी.
  2. यह आकलन जलवायु परिवर्तन से संबंधित उपयुक्त कार्रवाइयों को शुरू करने में नीति निर्माताओं की सहायता करेगा.
  3. यह बेहतर तरीके से डिज़ाइन किए गए जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन से संबंधित परियोजनाओं के विकास के माध्यम से पूरे भारत में जलवायु परिवर्तन के लिहाज से कमजोर समुदायों को लाभान्वित करेगा.
  4. इन आकलनों का उपयोग पेरिस समझौते के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों से जुड़ी भारत की रिपोर्टिंग के लिए किया जा सकता है और अंत में, ये आकलन जलवायु परिवर्तन से संबंधित भारत की राष्ट्रीय कार्य योजना को सहायता प्रदान करेंगे.

Prelims Vishesh

World Liver Day 2021 :-

  • 19 अप्रैल को विश्व यकृत दिवस (World Liver Day) को वैश्विक स्तर पर मनाया गया है.
  • भारत में भी केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व यकृत दिवस समारोह का आयोजन किया है.

Startup India Seed Fund :-

  • हाल ही में केन्द्रीय रेल, वाणिज्य और उद्योग, उपभोक्ता मामले और खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री पीयूष गोयल ने ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ (Startup India seed fund-SISFS) का शुभारंभ किया है.
  • ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ (Startup India seed fund) को शुरू करने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2021 को ‘प्रारंभ: स्टार्टअप इंडिया इंटरनेशनल समिट’ (Prarambh: Startup India International Summit) के दौरान की थी.
  • भारत सरकार द्वारा ‘स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड’ को शुरू करने का लक्ष्य यह है कि भारत में स्टार्टअपों को निधि से संबंधित समस्याएँ पैदा न हों.

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