Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 18 September 2020


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Mekong-US partnership aims to curb China’s growing influence in Southeast Asia

संदर्भ

अमेरिका ने दक्षिण-पूर्वी एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को अवरुद्ध करने हेतु मेकांग राष्ट्रों के साथ साझेदारी की है.

मुख्य बिंदु

  • मेकांग भागीदार देशों (कंबोडिया, लाओस, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम) तथा अमेरिका ने परस्पर सहयोग के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में मेकांग-अमेरिका साझेदारी (Mekong-US Partnership) का शुभारंभ किया है.
  • यह इस क्षेत्र में सतत आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूर्ववर्ती वर्ष 2009 की लोअर मेकांग पहल (Lower Mekong Initiative) पर आधारित है.
  • इस साझेदारी का नाम मेकांग नदी पर रखा गया है, जो तिब्बत से उद्गमित होती है और चीन, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया एवं वियतनाम से प्रवाहित होते हुए दक्षिण चीन सागर में विलीन हो जाती है.
  • यह साझेदारी सहयोग के संभावित क्षेत्रों का विस्तार करती है, जिसमें आर्थिक संपर्क, ऊर्जा सुरक्षा, मानव पूंजी विकास, सीमापारीय जल एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन आदि शामिल हैं.
  • इसमें क्षेत्रीय अभिशासन को सुदृढ़ करना, भारत और बांग्लादेश के साथ पूर्व-पश्चिम परिवहन संपर्क को विकसित करना तथा महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना भी शामिल है.
  • यह साझेदारी क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रमाव का सामना करने में योगदान भी देगी.
  • इस सप्ताह की शुरुआत में, अमेरिका ने हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मालदीव के साथ एक रक्षा एवं सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

चीन महामारी के दौर में “बिना पारदर्शिता” के दक्षिण चीन सागर में अपने इलाके का विस्तार करने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए उसने अपना रक्षा बजट भी बढ़ा लिया है. दक्षिण चीन सागर में चीन सैन्यीकरण का काम आगे बढ़ा रहा है, वह समुद्री क्षेत्र में अपनी गतिविधियों का विस्तार कर रहा है और स्टेटस क्वो को बदलने की दिशा में एकतरफा प्रयास जारी रख रहा है. चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपनी दावेदारी बताता है. खनिज पदार्थों के लिहाज से यह क्षेत्र महत्त्वपूर्ण है और व्यापार के लिहाज से भी. चीन के अलावा आसपास के देश फिलीपींस, ब्रुनेई और ताइवान भी इस इलाके के अलग अलग हिस्सों पर अपना हक जताते हैं. चीन की इस विस्तारवादी नीति के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, वियतनाम आदि देश भी वक्त-वक्त पर आवाज उठाते रहे हैं. यह मार्ग व्यापार के नजरिये से बहुत ही महत्त्वपूर्ण है. हर साल इस रूट से 3 ट्रिलियन डॉलर का सामान इधर-उधर जाता है.

अमेरिका यह कहता रहा है कि चीन और उसके पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद को संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता द्वारा सुलझाया जाना चाहिए. अमेरिका ने साउथ चाइना सी में ताइवान और फिलिपींस जैसे छोटे देशों को मदद का वादा किया है.

अमेरिका एक समृद्ध देश है और ताकतवर भी. वह एकमात्र ऐसा देश है जो चीन के प्रभुत्व और मनमाने व्यवहार पर लगाम लगा सकता है. युद्ध, आक्रमण आदि दोनों पक्षों के लिये हानिकारक होता है. अत: शांतिपूर्ण द्विपक्षीय, बहुपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक उपायों द्वारा समाधान खोजा जाना चाहिये.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Urbanization – problems and remedies.

Topic : Global Smart City Index 2020

संदर्भ

ग्लोबल स्मार्ट सिटी (Global Smart Cities) की सूची में भारत के 4 बड़े शहरों- नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु की रैंक में गिरावट आई है. वहीं सिंगापुर (Singapore) इस सूची में सबसे ऊपर है.

ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स के बारे में

  • यह इंडेक्स इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (IMD) द्वारा सिंगापुर यूनिवर्सिटी फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन (SUTD) के साथ मिलकर जारी किया गया है.
  • ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स के तहत शहरीकरण की कमियों को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी के विकास के आधार पर रैंक दी जाती है.
  • इस इंडेक्स को तैयार करते समय कोरोना काल में टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका को भी ध्यान में रखा गया है.
  • ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स 2020 की सूची में हैदराबाद को 85वाँ (2019 में 67वाँ) स्थान और दिल्ली को 86वाँ (2019 में 68वाँ) स्थान मिला है.
  • वहीं मुंबई को 93वीं रैंक और बेंगलुरु को 95वीं रैंक दी गई है, जबकि साल 2019 में मुंबई को 78 और बेंगलुरु को 79वाँ स्थान मिला था.

रैंकिंग में गिरावट का कारण

  • रिपोर्ट के अनुसार भारत के शहरों- नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु की रैंकिंग में उल्लेखनीय गिरावट का मुख्य कारण तकनीकी विकास (Development of Technology) का न होना है
  • भारतीय शहर कोरोनावायरस (Coronavirus) से ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वे इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार नहीं थे.
  • इसी के साथ इन शहरों में एक समस्या वायु प्रदूषण की भी रही है.

रैंकिंग में शीर्ष 10 शहर

  1. सिंगापुर
  2. हेलसिंकी
  3. ज्यूरिख
  4. ऑकलैंड
  5. ओस्लो
  6. कोपेनहेगन
  7. जिनेवा
  8. ताइपे
  9. एम्सटर्डम
  10. न्यूयॉर्क

इस साल की रैंकिंग में यह बताया गया है कि अलग-अलग शहरों में टेक्नोलॉजी के विकास को लेकर अलग-अलग धारणाएं (अप्रोच) हैं, क्योंकि महामारी से निपटना प्राथमिकता बन गई है. हालांकि, IMD के प्रोफेसर का मानना है कि कोरोना के प्रभाव को तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन तकनीकी विकास ऐसे संकट से निपटने में ज्यादा मदद करता है.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : Pendency of Criminal Cases Against Legislators

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय ने विधि निर्माताओं (सांसद और विधायक) के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों के लिए एमिकस क्‍यूरी के सुझावों पर आदेशों को संरक्षित रखा है.

पृष्ठभूमि

उच्चतम न्यायालय (SC) ने देश-भर में विधि निर्माताओं (वर्तमान और पूर्व) के विरुद्ध लंबित आपराधिक मुकदमों के शीघ्र निपटान के लिए एमिकस क्यूरी विजय हंसारिया की रिपोर्ट पर अपने आदेश को बनाए रखा है. सुनवाई के दौरान केंद्र ने भी सांसदों और विधायकों के विरुद्ध मामलों के समय पर निपटान का आह्वान किया था.

मुख्य मुद्दे और एमिकस कयूरी द्वारा दिए गए सुझाव

  • देश-भर के सांसदों और विधायकों के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना के संबंध में कोई एकरूपता विद्यमान नहीं है.
  • इस संबंध में भी कोई स्पष्टता नहीं है कि न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 या धन शोधघन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अपराधों की सुनवाई कर रहा है.
  • केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस द्वारा वारंट पर अमल नहीं किया गया है या समन जारी नहीं किए गए हैं, जिसके कारण सुनवाई अवरुद्ध हुई है.
  • अनन्य रूप से सांसदों और विधायकों के विरुद्ध आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में एक विशेष न्यायालय होना चाहिए. वर्तमान में ऐसे 12 न्यायालय अस्तित्व में हैं. इन न्यायालयों में नियुक्त किए जाने वाले न्यायाधीशों का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष का होना चाहिए.
  • सुनवाई के दौरान अभियुक्तों और गवाहों की प्रस्तुति सुनिश्चित करने के लिए, एक नोडल अभियोजन अधिकारी, जो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद से नीचे का अधिकारी नहीं होना चाहिए, को प्रत्येक जिले में नियुक्त किया जाना चाहिए.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण के लिए उत्तरदायी कारण

बाहुबल

भारतीय राजनीति में बाहुबल का प्रभाव दीर्घकाल से राजनीतिक जीवन का एक महत्त्वपूर्ण तथ्य बना हुआ है. अनेक राजनेताओं द्वारा अपने वोटबैंक में वृद्धि हेतु अपराधियों के बाहुबल का उपयोग किया जाता है.

धनबल

आपराधिक गतिविधियाँ विशाल चुनावी व्यय हेतु धन उपलब्ध कराती हैं.

चुनाव की कार्यप्रणाली में कमियाँ

मतदाता सामान्यतया एक उम्मीदवार के इतिहास, योग्यता तथा उसके विरुद्ध लंबित मामलों के प्रति जागरूक नहीं होते.

दुर्बल न्यायिक प्रणाली तथा न्याय की अस्वीकृति

जिला न्यायालयों, उच्च न्यायालयों तथा उच्चतम न्यायालय में इन अपराधी-सह-राजनेताओं के विरुद्ध हजारों मामले लंबित हैं. इस दुर्बलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं :-

I) राजनीतिक दलों का संस्थानीकरण का अभाव

राजनीतक दलों की गतिविधियों को विनियमित करने, किसी दल के राष्ट्रीय या क्षेत्रीय दल के रूप में पंजीकरण हेतु मानदंड निर्धारित करने तथा दलों की मान्यता रद्द करने जैसे व्यापक विधानों का अभाव है.

II) राजनीति दलों द्वारा नियमित खातों का निर्माण नहीं करना

राजनीतिक दलों के ऑडिटेड खाते मुक्त निरीक्षण हेतु उपलब्ध नहीं हैं.

III) संरचनात्मक एवं संगठनात्मक सुधार का न होना

दलों में आंतरिक लोकतंत्र, नियमित दलीय चुनाव, दलों में कार्यकर्ताओं की भर्ती तथा सामाजीकरण, विकास और प्रशिक्षण, अनुसंधान, चिन्तन एवं नीति नियोजन जैसी गतिविधियों का अभाव है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation

Topic : TRAI recommends industry-led body for Cloud Service Providers

संदर्भ

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India: TRAI) ने क्लाउड सेवा प्रदाताओं (CSP) के लिए स्व-विनियमन निकाय की अनुशंसा की है.

मुख्य बिंदु

क्लाउड सेवा प्रदाता (CSP) ऐसी कंपनियां होती हैं, जो क्लाउड आधारित नेटवर्क सेवाओं, बुनियादी ढांचे या व्यावसायिक अनुप्रयोगों की सुविधा प्रदान करती हैं.

इन क्लाउड सेवाओं को एक डेटा सेंटर के माध्यम से संचालित किया जाता है तथा नेटवर्क कनेक्टिविटी का उपयोग कर कंपनी या व्यक्ति इन सेवाओं तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं.

वर्तमान में, भारत में विविध क्लाउड सेवा प्रदाताओं जैसे अमेजन वेब सर्विसेज (web services), गूगल क्लाउड (google cloud), माइक्रोसॉफ्ट एज्यूर (Microsoft Azure) आदि द्वारा क्लाउड सेवाओं की आपूर्ति की जा रही है.

TRAI ने सुझाव दिया है कि उद्योग में प्रकटीकरण (disclosure) और लेखा परीक्षण दायित्वों के निर्वहन, आचार संहिता की निगरानी तथा पारदर्शिता संबंधी आवश्यकताओं का निर्धारण करने के लिए क्लाउड सेवा प्रदाताओं (CSP) हेतु एक स्व-शासी निकाय का गठन किया जाना चाहिए.

भारत में स्वतंत्र रूप से कार्यशील डेटा सेंटर फर्मों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के उभरने से डेटा में हुए अत्यधिक वर्धन के कारण इसकी आवश्यकता अनुभव की जा रही है

प्रमुख अनुशंसाएं

निम्नलिखित तीन-चरणीय प्रक्रिया के माध्यम से एक उद्योग निकाय के गठन द्वारा एक साधारण नियामक ढांचा निर्मित किया जा सकता है:

  • क्लाउड सेवा प्रदाताओं का नामांकन
  • व्यापक नियमों, संगठनात्मक संरचना और चुनाव प्रक्रिया की रूपरेखा के लिए एक तदर्थ निकाय का गठन
  • कार्यभार ग्रहण करने के लिए पदाधिकारियों का चुनाव
  • दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को उन क्लाउड सेवा प्रदाता (CSP) के साथ टेलीग्राफ से संबंधित अवसंरचना और प्लेटफार्मों को साझा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो उपर्युक्त वर्णित उद्योग निकाय का सदस्य नहीं है.

TRAI क्या है?

  • भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) भारत में दूरसंचार पर नियंत्रण हेतु एक स्वायत्त नियामक प्राधिकरण है. इसका गठन 1997 में भारत सरकार द्वारा किया गया था.
  • इसकी स्थापना भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण अधिनियम 1997, एवं बाद में इसी अधिनियम के 2000 संशोधन के द्वारा यथासंशोधित कर की गई थी[
  • इसका मिशन भारत में दूरसंचार संबंधित व्यापार को नियमित करना था.
  • भारत का दूरसंचार नेटवर्क एशिया की उभरती अर्थ व्‍यवस्‍थाओं में दूसरा सबसे और विश्‍व का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है.
  • प्राधिकरण का लक्ष्य भारत में दूरसंचार के विकास के लिए ऐसी रीति तथा ऐसी गति से परिस्थितियां सृजित करना तथा उन्हें संपोषित करना है, जो भारत को उभरते हुए वैश्विक समाज में एक अग्रणी भूमिका निभाने में समर्थ बना सके.
  • प्राधिकरण का उद्देश्य है एक ऐसा उचित और पारदर्शी परिवेश उपलब्ध कराना, जो समान अवसरों के लिए प्रोत्साहित करें. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : What is Solar Cycle 25?

संदर्भ

हाल ही में, नासा और ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमास्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) के वैज्ञानिकों द्वारा एक नए सौर चक्र के प्रारंभ होने के अनुमानों की घोषणा की गयी है. इसे 25वाँ सौर चक्र (Solar Cycle 25) कहा जा रहा है.

मुख्य निष्कर्ष

  1. सौर चक्र 25 के लिए “सौर न्यूनतम” (Solar Minimum) दिसंबर 2019 में घटित हुआ था.
  2. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum), [सौर चक्र के मध्य की स्थिति], जुलाई 2025 में घटित होगी.
  3. यह सौर चक्र पिछले सौर चक्र की जैसा दृढ़ होगा. पिछला सौर चक्र ‘औसत से कम’ सक्रिय चक्र था.

सौर चक्र क्या होता है?

सूर्य एक विद्युत-आवेशित गर्म गैस की एक विशाल गेंद जैसा है. यह आवेशित गैस गति करती हुई एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है. यह चुंबकीय क्षेत्र एक चक्र से होकर गुजरता है, जिसे सौर-चक्र (Solar Cycle) कहा जाता है.

solar cycle 25

Source: NASA Website

  1. प्रत्येक 11 साल बादसूर्य का चुंबकीय क्षेत्र पूरी तरह से उलट जाता है.इसका अर्थ है कि सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव परस्पर स्थान परिवर्तित कर लेते हैं. इसके बाद सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को फिर से अपनी पूर्व स्थिति में आने के लिए लगभग 11 वर्ष का समय लगता है.
  2. अब तक खगोलविदों ने ऐसे 24 सौर चक्रों के लिखित प्रमाण तैयार किये है. इनमें से आखिरी सौर चक्र 2019 में पूर्ण हुआ था.

वैज्ञानिक सौर गतिविधियों पर किस प्रकार निगाह रखते हैं?

  1. वैज्ञानिक, सौर-कलंकों (Sunspots) के जरिये सौर चक्र का पता लगाते हैं.
  2. किसी सौर चक्र की प्रारम्भ में आमतौर पर मात्र कुछ सौर-कलंक (Sunspots) होते हैं और इसलिए इसे “सौर न्यूनतम” (Solar Minimum) कहा जाता है.

सौर न्यूनतम’ तथा ‘सौर अधिकतम’ क्या होते है?

सौर चक्र पर निगाह रखने की एक विधि सौर-कलंकों (Sunspots) की संख्या की गणना होती है.

  1. सौर चक्र की प्रारम्भ में “सौर न्यूनतम” (Solar Minimum) की स्थिति होती है, अर्थात् सूर्य में सबसे कम सौर-कलंक होते हैं. समय के साथ, सौर गतिविधि – और सौर-कलंकों की संख्या ने वृद्धि होती जाती है.
  2. सौर चक्र की मध्य स्थिति में ‘सौर अधिकतम’ (Solar maximum) होता है, अर्थात् सूर्य में सौर-कलंकों की संख्या सबसे ज्यादा होती है. जैसे ही चक्र समाप्त हो जाता है, यह पुनः सौर न्यूनतम पर आ जाता है और फिर से एक नया चक्र प्रारम्भ होता है.

पृथ्वी पर सौर चक्र के प्रभाव

  1. सौर विस्फोटों से आकाश में बिजली पैदा हो सकती है, जिसे औरोरा (Aurora) कहा जाता है, तथा ये रेडियो संचार को प्रभावित करते है. चरम विस्फोट होने पर ये पृथ्वी पर स्थित बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकते हैं.
  2. सौर गतिविधियां, इलेक्ट्रॉनिक्स उपग्रहों को प्रभावित कर सकती है तथा उनके जीवनकाल को प्रभावित कर सकती है.
  3. अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के बाहर काम करने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सौर विकिरण हानिकारक हो सकता है.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

सौर कलंक (Sunspots):  ये सूर्य के प्रकाश मंडल की अस्थायी घटनाएं हैं. जब सूर्य के किसी भाग का ताप अन्य भागों की तुलना में कम हो जाता है तो धब्बे के रूप में दिखता है, इसे सौर कलंक कहते हैं. इस धब्बे का जीवनकाल कुछ घंटे से लेकर कुछ सप्ताह तक होता है.

सौर प्रज्वाल (solar flare): यह सूरज की सतह के किसी स्थान पर अचानक बढ़ने वाली चमक को कहते हैं. यह प्रकाश वर्णक्रम के बहुत बड़े भाग के तरंगदैर्घ्यों (वेवलेन्थ) पर उत्पन्न होता है. सौर प्रज्वाल में कभी-कभी कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (coronal mass ejection) भी होता है जिसमें सूरज के कोरोना से प्लाज़्मा और चुम्बकीय क्षेत्र बाहर फेंक दिये जाते हैं. यह सामग्री तेज़ी से सौर मंडल में फैलती है और इसके बादल बाहर फेंके जाने के एक या दो दिन बाद पृथ्वी तक पहुँच जाते हैं. इनसे अंतरिक्ष यानों पर दुष्प्रभाव के साथ-साथ पृथ्वी के आयनमंडल पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिस से दूरसंचार प्रभावित होने की सम्भावना बनी रहती है.


Prelims Vishesh

NISHTHA :-

  • NISHTHA का पूरा नाम है – National Initiative for School Heads’ and Teachers’ Holistic Advancement.
  • यह एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए क्षमता निर्माण हेतु एक कार्यक्रम है.
  • इसका उद्देश्य प्रारंभिक स्तर पर सभी शिक्षकों और स्कूल प्रधानाध्यापकों के मध्य दक्षता का निर्माण करना है.
  • वर्ष 2019-20 में, 16,99,931 स्कूल प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है.
  • प्रशिक्षुओं (राज्य, जिला, ब्लॉक व क्लस्टर स्तर पर) को अधिगम परिणामों (learning outcomes), विद्यालय आधारित मूल्यांकन, शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षाशास्त्र आदि में प्रशिक्षित किया जाएगा.
  • वर्ष 2020-21 में सेकंडरी (माध्यमिक) स्तर पर निष्ठा (NISHTA) का द्वितीय चरण आरंभ करने का निर्णय लिया गया है.

TOPS :-

  • TOPS का पूरा नाम है – Target Olympic Podium Scheme.
  • TOPS भारत के शीर्ष एथलीटों (खिलाड़ियों) को सहायता प्रदान करने हेतु युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय की एक प्रमुख योजना है.
  • इस योजना के लिए भारतीय खेलकूद प्राधिकार (SAI) तथा ओलिंपिक कोषांग मिशन (MOC) के सदस्य नाभिक एजेंसियां होंगे. ये ही निधि का वितिरण करेंगे और लाभार्थियों तथा सम्बंधित संस्थानों को एथलीटों के लिए सीधे भुगतान करेंगे.

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