Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 January 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 18 January 2021


GS Paper 1 Source : Down to Earth

UPSC Syllabus : Important Geophysical phenomena such as earthquakes, Tsunami, Volcanic activity, cyclone etc., geographical features and their location- changes in critical geographical features (including water-bodies and ice-caps) and in flora and fauna and the effects of such changes.

Topic : Wandering polar vortex may cause a wild, snowy winter

संदर्भ

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) दो भागों में विभाजित होकर दक्षिण की ओर चक्कर काटते हुए बढ़ रहा है, इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों में अत्याधिक शीत की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.

इससे पहले, वर्ष 2014 में इस प्रकार के धुर्वीय भंवर विकसित हुए थे.

निहितार्थ

ध्रुवीय भंवर की अस्थिरता और इसके विभाजन से पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका और यूरोप में नाटकीय रूप से चरम मौसम की स्थितियां उत्पन्न हो सकती है. 2021 में विदरित ध्रुवीय भंवर सहित ठंडी हवाओं के आर्कटिक क्षेत्रों से बाहर की ओर प्रसरित होने की संभावना है, इसके परिणामस्वरूप बेहद कड़ी सर्दियों की शुरुआत हो सकती है.

ध्रुवीय भँवर (POLAR VORTEX) क्या है?

  • ध्रुवीय भँवर ध्रुवों के ऊपर बनने वाला निम्न-दबाव का एक चक्करदार शंकु होता है जो शरत काल में सबसे प्रबल रहता है. इसका कारण ध्रुवीय क्षेत्रों और अमेरिका और यूरोप जैसे मध्य-अक्षांशीय क्षेत्रों के बीच बढ़ा हुआ तापान्तर होता है.
  • ध्रुवीयभँवर समताप मंडल में चक्कर मारता है. विदित हो कि समताप मंडल वायुमंडल की वह परत है जो भूमि से 10-48 किमी. ऊपर होता है और जिसके नीचे क्षोभमंडल होता है जहाँ कि जलवायु से सम्बंधित घटनाएँ सर्वाधिक होती हैं.
  • जब यह भँवर सबसे अधिक शक्तिशाली होता है तो साधारणतः यह एक ऐसी दीवार बना देता है जो मध्य- अक्षांशीय क्षेत्रों को ठंडी आर्कटिक हवाओं से बचाती है.
  • परन्तु, कई बार ऐसे होता है कि ध्रुवीय भँवर (पोलर वर्टेक्स) छिन्न-भिन्न होकर कमजोर हो जाता है. ऐसा निचले वायुमंडल से ऊपर की ओर उठती हुई तरंग ऊर्जा के कारण होता है. ऐसा होने पर समताप मंडल तेजी से कुछ ही दिनों में गर्म हो जाता है.
  • इस गर्मी के कारण ध्रुवीय भँवर और भी कमजोर हो जाता है और यह ध्रुवों से तनिक दक्षिण की ओर खिसक जाता है. कभी-कभी तो यह भँवर कई छोटे-छोटे भँवरों में बँट जाता है. इन छोटे भँवरों को बहन भँवर (sister vortex)” कहते हैं.

GS Paper 2 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : World Wildlife Fund: WWF

संदर्भ

विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund: WWF) के अनुसार वन हानि के हॉटस्पॉट का क्षेत्रफल जर्मनी के क्षेत्रफल से अधिक है. एक नये प्रतिवेदन के अनुसार, WWF ने एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में वनोन्मूलन के 24 हॉटस्पॉट का विश्लेषण किया.  

प्रतिवेदन से सम्बंधित मुख्य बिंदु

  • वर्ष 2000 से वर्ष 2018 तक कुल वैश्विक वनाच्छादन के ह्रास का दो तिहाई उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंघीय वनों में हुआ.
  • वर्ष 2004 से वर्ष 2017 के मध्य 43 मिलियन हेक्टेयर से अधिक वन साफ किए गए.
  • जबकि 8,000 वर्ष पूर्व पृथ्वी के लगभग 50% भू-भाग पर वन थे. वर्तमान में केवल 50% भूमि ही वनाच्छादित है.
  • यह रिपोर्ट एक फ्रेमवर्क प्रदान करती है, जो विश्व स्तर पर वनों की कटाई के कारणों और उन्हें संबोधित करने के लिए मौजूदा दृष्टिकोण (इन्फोग्राफिक देखें) के मध्य संबंध को दर्शाता है.
  • वाणिज्यिक कृषि विश्व स्तर पर वनों की कटाई का प्रमुख कारण है. विशेष रूप से वृहद्‌ स्तर पर कृषि, जिसमें पशुधन चराई और कृषि के लिए साफ किए गए वन क्षेत्र भी शामिल हैं.

सुझाव

  • प्रतिक्रियाओं को स्थानीय और क्षेत्रीय विशिष्ट संदर्भों के अनुरूप होना चाहिए तथा समय के साथ समावेशी एवं अनुकूलनीय होना चाहिए.
  • नियमों और मानकों की कठोरता तथा उत्पादकों, विशेष रूप से स्थानीय वन उपयोगकर्ताओं एवं लघु जोत धारकों की क्षमता के मध्य संतुलन का पालन करना आवश्यक है.
  • देशज लोगों और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाना प्राथमिकता होनी चाहिए.

विश्व वन्यजीव कोष क्या है?

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन है.
  • इसकी स्थापना 1961 में हुई थी.
  • इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड नगर में स्थित है.
  • इस संगठन का लक्ष्य वन्यजीवन का संरक्षण करना तथा पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव को घटाना है.
  • यह संरक्षण से सम्बंधित विश्व का सबसे बड़ा संगठन है.

उद्देश्य

  • विश्व की जैव विविधता का संरक्षण करना.
  • नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग को टिकाऊ बनाना.
  • प्रदूषण और निरर्थक खपत में कमी को बढ़ावा देना.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

WWF के प्रतिवेदन एवं कार्यक्रम

  • लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट: यह रिपोर्ट WWF द्वारा 1998 से प्रत्येक दो वर्ष पर प्रकाशित होता है. यह लिविंग प्लेनेट इंडेक्स और पर्यावरणीय फुटप्रिंट कैलकुलेशन पर आधारित होता है.
  • अर्थ आवर
  • डेट-फॉर-नेचर कार्यक्रम(Debt-for-nature swaps) : इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकासशील देश के विदेशी ऋणभार का एक अंश इस शर्त पर माफ़ कर दिया जाता है कि वह देश पर्यावरण के संरक्षण पर स्थानीय स्तर पर निवेश करेगा.
  • मरीन स्टेवार्डशिप कौंसिल(MSC) : यह परिषद् एक स्वायत्त लाभरहित संस्था है जो मछली मारने के टिकाऊ उपायों के लिए मानदंड निर्धारित करती है.
  • हेल्दी ग्रोन पोटेटो: यह एक इको ब्रांड है जो उच्च गुणवत्ता वाले सतत रूप से उपजाए गये, डिब्बाबंद किये गये आलू उपभोक्ताओं को मुहैया करता है. इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े खेतों में समेकित कीटनाशक प्रबंधन का प्रयोग होता है.

GS Paper 2 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : ‘Keep adultery a crime in Armed Forces’: Supreme Court

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय द्वारा सशस्त्र बलों में ‘व्यभिचार या परस्त्रीगमन (Adultery) को अपराध घोषित करने संबंधी केंद्र सरकार के अनुरोध की जांच करने पर सहमति व्यक्त की गई है.

इस मामले को, स्थिति स्पष्ट करने हेतु पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन करने के लिए मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे के पास भेजा गया है.

संबंधित प्रकरण

केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि व्यभिचार या परस्त्रीगमन को भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध के दायरे से बाहर करने संबंधी शीर्ष अदालत का 2018 का निर्णय सशस्त्र बल पर लागू नहीं किया जाये. जिसके अंतर्गत, कर्मियों को सहकर्मी की पत्नी के साथ व्यभिचार करने पर अनुचित आचरण के आधार पर सेवाच्युत किया जा सकता है.

आवश्यकता

सेना, नौसेना और वायु सेना के कार्मिक एक ‘विशिष्ट वर्ग’ से संबंधित होते है. इन कार्मिकों पर विशेष कानूनों जैसे, सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम लागू होते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का सितंबर 2018 निर्णय

सितंबर 2018 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सर्वसम्मति से भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को रद्द कर दिया गया. इस धारा के अंतर्गत, पुरुषों के लिए व्यभिचार एक दंडनीय अपराध निर्धारित किया गया था.

उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ के अनुसार-

  1. 158-वर्ष पुराना यह कानून असंवैधानिक है और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का नियमाल्लंघन करता है.
  2. भारतीय दंड संहिता की धारा 198(1) और 198(2) के अंतर्गत पति को, अपनी पत्नी के साथ व्यभिचार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाने की अनुमति दी गयी है, जो कि असंवैधानिक हैं.
  3. हालांकि, ‘व्यभिचार’ विवाह-विच्छेद सहित अन्य सिविल मामलों के लिए एक आधार हो सकता है, किन्तु यह कोई दंडनीय अपराध नहीं हो सकता है.

धारा 497 क्या है?

  • भारतीय दंड संहिता के धारा 497 में यह प्रावधान है कि यदि कोई पुरुष किसी पर स्त्री के साथ उसके पति के सहमति बिना यौनाचार करता है तो यह व्यभिचार कहलायेगा जिसके लिए 5 वर्ष की साधारण अथवा सश्रम के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
  • इस धारा के अनुसार व्यभिचार करने वाले पुरुष की पत्नी को यह अधिकार नहीं है कि इस विषय में शिकायत दर्ज कर सके.

व्यभिचार के विषय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किये गये पुराने निर्णय

व्यभिचार का कानून सर्वोच्च न्यायालय में पहले तीन बार आ चुका है –

  • 1954 में– उस समय सर्वोच्च न्यायालय ने यह मानने से इनकार कर दिया था कि धारा 497 समानता के अधिकार का हनन करता है.
  • 1985 में– सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि पत्नी को व्यभिचार के बारे में शिकायत करने का अधिकार देना आवश्यक नहीं है.
  • 1988 में– सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि व्यभिचार का कानून एक ढाल है, तलवार नहीं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate

Topic : G-7 Summit

संदर्भ

हाल ही में ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने जी-7 शिखर सम्मेलन (G-7 Summit) के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया है.

प्रमुख बिन्दु

  • इसी साल 11 जून से 13 जून तक जी-7 समूह का 47वां शिखर सम्मेलन यूनाइटेड किंगडम (यूके) में आयोजित होगा. जिसकी अध्यक्षता यूके ही करेगा.
  • जून 2021 में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में अतिथि के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है.
  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यह भी कहा है कि वह जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत का दौरा करेंगे.
  • गौरतलब है कि हाल ही में ऐसी खबर आई थी कि बोरिस जॉनसन इस बार के भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल नहीं हो पाएंगे. क्योंकि कोरोना वायरस के खतरनाक स्ट्रेन की वजह से ब्रिटेन में लॉकडाउन लगाया गया है. इस स्थिति में बोरिस जॉनसन का यूके में रहना महत्वपूर्ण है ताकि वह वायरस को रोकने के लिए ध्यान केंद्रित कर सकेंगे.
  • यूनाइटेड किंगडम जी-7 प्रेसीडेंसी का उपयोग, विश्व के प्रमुख लोकतंत्रों को एकजुट करने के लिए करेंगे; ताकि कोविड-19 महामारी की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से मुक़ाबला कर सकें. इसके अतिरिक्त, अन्य वैश्विक समस्याओं (यथा- जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद आदि ) का मुक़ाबला करने के लिए भी रणनीति बनायी जाएगी.
  • यूनाइटेड किंगडम ने भारत के अलावा, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी इस साल के जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए अतिथि देश के रूप में आमंत्रित किया है.

G7 शिखर सम्मेलन क्या है?

  1. यह 7 प्रमुख राष्ट्रों के प्रमुखों की बैठक है. पहले इसमें 8 देश थे. इसकी स्थापना 1975 में हुई थी.
  2. इसमें विश्व के 7 प्रमुख सशक्त देश शामिल होते हैं – अमेरिका, कनाडा, UK, फ़्रांस, जर्मनी, जापान और इटली. इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ के नेतागण भी इस बैठक में बुलाये जाते हैं. वे आपसी सहमति से नीतियाँ बनाते हैं और फिर सम्बंधित मुद्दों का समाधान ढूँढते हैं.
  3. इस सम्मलेन में विश्व भर के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होती है. जहाँ यह सम्मलेन होता है उसी देश का राष्ट्र प्रमुख बैठक की अध्यक्षता करता है औरउसे यह अधिकार होता है कि वह अपनी इच्छा से किसी एक और देश को बैठक में आमंत्रित करे.

उद्देश्य

समूह खुद को “कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज” यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है. स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि और सतत विकास, इसके प्रमुख सिद्धांत हैं.

  1. अवसरों में असमानता दूर करना, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना, शिक्षा और उच्चकोटि की स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता प्रदान करना.
  2. पर्यवारणगत असमानता घटाना.
  3. वैश्वीकरण के सामाजिक आयाम को सुदृढ़ करना.
  4. सुरक्षागत खतरों और आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई करना.
  5. डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धि से उत्पन्न अवसरों का पता लगाना.

G7 का माहात्म्य

G7 में विश्व की बड़ी-बड़ी आर्थिक शक्तियाँ सम्मिलित होती हैं. अतः G7 जो भी निर्णय लेता है उसका पूरे विश्व पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. यद्यपि G7 के निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, परन्तु इनका राजनैतिक प्रभाव अत्यंत प्रबल होता है.


GS Paper 3 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Inclusive growth and issues arising from it.

Topic : Bad Bank

संदर्भ

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से निपटने के लिए एक बैड बैंक (bad bank) की अवधारणा को अपनाने पर विचार कर सकता है.

बैड बैंक क्या है?

  • बैड बैंक की अवधारणा को बैंकों की वाणिज्यिक अचल संपत्ति पोर्टफोलियो (Commercial Real-Estate Portfolio) की समस्या का निदान करने के उद्देश्य से सर्वप्रथम वर्ष 1988 में मेल्लोन बैंक (Mellon Bank) के पिट्सबर्ग (Pittsburgh) मुख्यालय में प्रस्तुत किया गया था. 
  • बैड बैंक एक आर्थिक अवधारणा है जिसके अंतर्गत आर्थिक संकट के समय घाटे में चल रहे बैंकों द्वारा अपनी देयताओं को एक नए बैंक को स्थानांतरित कर दिया जाता है. ये बैड बैंक कर्ज़ में फँसी बैंकों की राशि को खरीद लेगा और उससे निपटने का काम भी इसी बैंक का होगा.
  • जब किसी बैंक की गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियाँ सीमा से अधिक हो जाती हैं, तब राज्य के आश्वासन पर एक ऐसे बैंक का निर्माण किया जाता है जो मुख्य बैंक की देयताओं को एक निश्चित समय के लिये धारण कर लेता है.

बैड बैंक से संबंधित चुनौतियाँ 

  • बैड बैंक की स्थापना में सबसे बड़ी समस्या बैंक में हिस्सेदारी को लेकर है. यह जानना दिलचस्प है कि समस्या निजी और सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्रों के अधिकतम भागीदारी से है.
  • यदि बैड बैंक में सरकार की हिस्सेदारी अधिक हो तो बैंकों की गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियाँ इतनी अधिक हो गई हैं कि बैड बैंक के माध्यम से इनकी खरीद पर सरकार को उल्लेखनीय व्यय करना पड़ सकता है.
  • यदि बैड बैंक को निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया गया, तो सबसे बड़ी समस्या गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियों के मूल्य को लेकर हो सकती है. निजी क्षेत्र का बैड बैंक अपने लाभ को ध्यान में रखते हुए गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्तियों का मूल्य तय करेगा.
  • यदि यह मूल्य बहुत अधिक हुआ, तो बैड बैंक का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा और यदि यह मूल्य बहुत ही कम हो गया, तो बैंकों को उनकी ऋण देयता के अनुपात में राशि नहीं मिल पाएगी.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के अनुसार, बैड बैंक की अवधारणा एक नैतिक संकट उत्पन्न कर सकती है और बैंकों को अनुत्तरदायित्वपूर्ण उधार प्रथाओं को जारी रखने के लिये प्रोत्साहित करेगी.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत की बैंकिंग प्रणाली ऐसी चुनौती भरी पृष्ठभूमि में अपेक्षाकृत लंबे समय से कार्य कर रही है, जिसके कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की आस्ति गुणवत्ता, पूंजी पर्याप्तता तथा लाभ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. जब तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रबंधन राजनेताओं और नौकरशाहों के प्रति निष्ठावान रहेंगे, तब तक व्यावसायिकता में उनकी कमी बनी रहेगी, इसलिये संपूर्ण बैंकिंग व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है. बैंकिंग व्यवस्था में समग्र सुधारों के उचित कार्यान्वयन के साथ ही बैड बैंक की अवधारणा पर बहस होनी चाहिये, जैसा की इंद्रधनुष योजना (Indra Dhanush plan) में परिकल्पित किया गया है.


Prelims Vishesh

Ministry of Finance introduced Faceless Penalty Scheme :-

  • इस योजना के अंतर्गत आयकर मामलों में फेसलेस अर्थदंड कार्यवाही के संचालन की सुविधा के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाएंगे.
  • राष्ट्रीय केंद्र एक केंद्रीकृत तरीके से फेसलेस अर्थदंड कार्यवाही के संचालन की सुविधा प्रदान करेगा. राष्ट्रीय केंद्र में अर्थदंड आरोपित करने के अधिकार क्षेत्र को निहित किया गया है.
  • कर सुधारों के भाग के रूप में, सरकार ने गत वर्ष फेसलेस टैक्स असेसमेंट स्कीम को शुरू किया था.
  • इसका उद्देश्य कर प्रशासन को किसी भी पूर्वाग्रह से मुक्त करना तथा ऐसी किसी भी व्यक्तिपरकता को दूर करना है जो करदाता और अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत इंटरफेस का प्रावधान करती हो.

Special Marriage Act, 1954 :-

  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि दंपति विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत 30-दिवसीय सूचना (नोटिस) प्रकाशित नहीं करने के विकल्‍प का चयन कर सकते हैं.
  • न्यायालय का कहना है कि सूचना के अनिवार्य प्रकाशन का प्रावधान स्वतंत्रता और गोपनीयता के मूल अधिकारों का अतिक्रमण करता है.
  • विशेष विवाह अधिनियम अंतर-जातीय और अंतर-धार्मिक विवाह से संबंधित है. यह अधिनियम लोगों को अपने धर्म का त्याग किए बिना विवाह करने की अनुमति प्रदान करता है.
  • इस कानून के अंतर्गत विवाह करने के इच्छुक युगल को जिले के एक विवाह अधिकारी को 30 दिन की सूचना अवधि देने की आवश्यकता होती है.
  • इसमें विगत 30 दिनों में कम से कम एक पक्ष (विवाह करने वाला कोई एक) द्वारा निवास किया होना आवश्यक होता है.

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