Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 June 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 15 June 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Raja Parva of Odisha

संदर्भ

ओडिशा में प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी रज-पर्व मनाया जा रहा है. भूमा देवी और स्त्री मात्र को समर्पित यह पर्व मिथुन संक्राति के दिन पहले शुरू होकर अगले दो दिनों तक चलता है.

इस दिन लोग साल की पहली बारिश का जश्न मनाकर स्वागत करते हैं. इन चार दिनों में अच्छी बारिश और खेती के लिए धरती मां की पूजा की जाती है. इस पर्व में औरत, बड़े और बच्चे सभी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं.

राजा पर्व चार दिन के नाम

  • पहले दिन को पहिली राजा कहते हैं
  • दूसरे दिन को मिथुना संक्रांति कहा जाता है
  • तीसरे दिन को दाहा कहा जाता है
  • जबकि चौथे दिन को वसुमती स्नान कहते हैं

त्यौहार की मान्यता

इस पर्व को मनाने के पीछे की मान्यता है, कि भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी (पृथ्वी) को ‘रजस्वला’ प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. उनका मासिक धर्म तीन से चार दिनों तक का होता है.

इस पर्व के लिए घर की साफ-सफाई की जाती है. बाग-बगीचों में झूले लगाए जाते हैं. पहले तीन दिनों तक महिलाएं व्रत रखती हैं. इन दिनों में काट-छांट और जमीन की खुदाई नहीं की जाती है. इस मौके पर गीत-संगीत कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. राजा पर्व के पहले दिन महिलाएं हल्दी लगाकर नहाती हैं. जबकि अगले दो दिन नहीं नहाती है. चौथे दिन फिर से हल्दी लगाकर नहाती हैं.

कृषि-संबंध

राज-पर्व को गर्मी के मौसम के अंत तथा मानसून के आगमन का संकेत भी माना जाता है. इस प्रकार, यह त्यौहार कृषि संबंधित समुदायों तथा अन्य कामों से भी जुड़ा हुआ है.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Universal Basic Income

संदर्भ

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission- NHRC) ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (United Nations Human Rights Council- UNHRC) को सूचित किया है, कि सार्वभौम आधारभूत आय को लागू करने की सलाह केंद्र सरकार के “परीक्षाधीन तथा विचाराधीन” है.

सार्वभौम आधारभूत आय क्या है?

सार्वभौम आधारभूत आय (UBI) एक ऐसी योजना है जिसमें देश के सभी नागरिकों को एक निश्चित धनराशि दी जाती है चाहे उनकी आय, संसाधन अथवा आजीविका की स्थिति कैसी भी हो.

इस योजना के पीछे मुख्य अवधारणा निर्धनता की रोकथाम करना अथवा उसे घटाना तथा साथ ही नागरिकों के बीच समानता में वृद्धि करना है. सार्वभौम आधारभूत आय का मूल सिद्धांत यह है कि देश के सभी नागरिकों को अधिकार है कि उनके पास एक जीने योग्य आय हो चाहे उनकी जन्मजात स्थिति कुछ भी हो.

UBI के घटक

  1. सार्वभौमिकता (सभी नागरिक)
  2. बिना शर्त (कोई पूर्व शर्त नहीं)
  3. आवधिक (नियमित अंतराल पर आवधिक भुगतान)
  4. नकद हस्तांतरण (फ़ूड वाउचर अथवा सेवा कूपन नहीं)

सार्वभौम आधारभूत आय (UBI) के लाभ

  1. नागरिकों को सुरक्षित आय प्रदान करता है.
  2. समाज में गरीबी तथा आय असमानता में कमी होती है.
  3. निर्धन व्यक्तियों की क्रय शक्ति में वृद्धि होती है, जिससे अंततः सकल मांग बढ़ती है.
  4. लागू करने में आसान होती है क्योंकि इसमें लाभार्थी की पहचान करना सम्मिलित नहीं होता है.
  5. सरकारी धन के अपव्यय में कमी होती है, इसका कार्यान्वयन बहुत सरल होता है.

भारत में सार्वभौम आधारभूत आय लागू करने में चुनौतियां

  • किसी देश में UBI लागू करने हेतु उच्च लागत की आवश्यकता होती है. विकसित देशों के लिए UBI व्यय का वहन करना, विकासशील देशों की तुलना में आसान होता है.
  • भारत में ‘सार्वभौम आधारभूत आय’ को लागू करने में होने वाले भारी व्यय को देखते हुए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु प्रमुख चुनौती है.
  • सार्वभौम आधारभूत आय के लागू होने से इस बात की प्रबल संभावना है कि लोगों को बिना शर्त दी गई एक निश्चित आय उन्हें आलसी बना सकती है तथा इससे वे काम ना करने के लिये प्रेरित हो सकते हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कोविड-19 महामारी से निपटने के क्रम में विश्व भर में अनेक देशों की सरकारों ने लॉकडाउन (lockdown) तथा सामाजिक दूरी (social distancing) जैसे उपायों को लागू किया है.हालांकि, इन उपायों से अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र को व्यापक क्षति पहुची है. यहाँ तक कि, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा वर्तमान आर्थिक संकट को वर्ष 1929 की आर्थिक मंदी के बाद से सबसे खराब स्थिति बताया गया है.भारत में लगभग 90% श्रमबल, बगैर न्यूनतम मजदूरी अथवा सामजिक सुरक्षा के अनौपचारिक क्षेत्र में काम करता है, जिससे सूक्ष्म-स्तर पर भारत में परिस्थितियां कहीं और की तुलना में अधिक बदतर हुई हैं.अतः, सार्वभौम आधारभूत आय के माध्यम से नियमित भुगतान अनौपचारिक क्षेत्र में लगे श्रमिकों की आजीविका को, कम से कम अर्थव्यवस्था के सामान्य होने तक, सुनिश्चित कर सकता है.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Amoebiasis or amoebic dysentery

संदर्भ

अमीबियेसिस नामक रोग को जन्म देने वाले प्रोटोजोआ को मारने के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के एक शोध दल ने एक नई दवा बनाई है.

ज्ञातव्य है कि इस रोग में आँत में परजीवियों का संक्रमण होता है और फलतः शूल होने लगता है.

अमीबियेसिस (Amoebiasis) / अमीबा रक्तातिसार (Amoebic Dysentery) क्या है?

  • अमीबियेसिस को एंटअमीबियेसिस भी कहते हैं. एंटअमीबा हिस्टोलिटिका एक माइक्रो ऑर्गेनिज्म है, जो अपना जीवन पैरासाइट (परजीवी) के रूप में बिताता है. इसी इंटेस्टाइनल प्रोटोजोआ पैरासाइट के कारण एमीबायसिस रोग होता है. ये माइक्रोस्कोपिक ऑर्गेनिज्म अमीबा की एक प्रजाति है, जो फाइलम प्रोटोजोआ के तहत आता है. चूंकि यह अमीबा की एक प्रजाति है, इसलिए इसके द्वारा जो रोग उत्पन्न किया जाता है, उसे अमीबियेसिस कहते हैं.
  • अमीबियेसिस लोगों की आंतों में कई वर्षों तक रह सकता है. जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, जरूरी नहीं कि उनमें इसके लक्षण नजर आएं.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंटामोइबा हिस्टोलिटिका मनुष्यों में परजीवी बीमारी के कारण रुग्णता (अस्वस्थता) और मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है. वर्तमान में ई. हिस्टोलीटिक के संक्रमण से पूरी दुनिया में 48 करोड़ लोग ग्रस्त हैं. इस बीमारी के कारण हर वर्ष पूरी दुनिया में 40,000 से 1,10,000 लोगों की मौत हो जाती है.
  • यह प्रोटोजोआ प्रकृति में अवायवीय या कम हवा में जीवित रहने वाला है, जो ऑक्सीजन की अधिकता में जीवित नहीं रह सकता है.

रोग का प्रसार

इस बीमारी के होने का प्रमुख कारण साफ-सफाई का अभाव होना है. दूषित भोजन, पानी और गंदी जगह मल-मूत्र त्यागने के कारण सूक्ष्म परजीवी ई. हिस्टोलीटिका के सिस्ट हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और इंटेस्टाइन यानी हमारी आंतों को संक्रमित कर देते हैं.

लक्षण

मीबायसिस के लक्षण के दिखाई देने में कुछ दिनों से लेकर हफ्तों तक का समय लग सकता है. फिर भी आमतौर पर इसके लक्षण दो से चार सप्ताह के भीतर दिखाई देने लगते हैं.

  1. पेट में दर्द
  2. जठरांत्र (Gastrointestinal): मल में रक्त, दस्त अथवा पेट फूलना
  3. थकान, बुखार या भूख न लगना
  4. वजन कम होना

उपचार

अमीबियेसिस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि रोगी को किस तरह का संक्रमण है. सामान्य संक्रमण होने पर डॉक्टर 10 दिन की दवा देते हैं. अगर यह परजीवी लिवर में फोड़ा पैदा कर दे तो 15-20 दिन तक दवा दी जाती है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to women.

Topic : Scrapping of Article 370 and LAC tensions

संदर्भ

चीन के एक जाने-माने थिंक टैंक – CICIR ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चल रहे वर्तमान तनाव को धारा 370 के विलोपन और जम्मू कश्मीर की स्थिति में परिवर्तन से जोड़ दिया है. इस थिंक टैंक का कहना है कि भारत के इन कार्यों से चीन और पाकिस्तान दोनों की संप्रभुता पर एक साथ चोट की गई है.

CICIR का वक्तव्य

CICIR ने भारत के इस कदम को चीन तथा पाकिस्तान के लिए एक संयुक्त चुनौती के रूप में बताया है. इसका कहना है कि भारत सरकार के इस कदम ने “पाकिस्तान तथा चीन की संप्रभुता को चुनौती दी है“.

इसके अनुसार इस कदम ने “भारत-पाकिस्तान संबंधों तथा चीन-भारत संबंधों को और अधिक जटिल बना दिया है.”

पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष, धारा 370 की समाप्ति के पश्चात भारत सरकार द्वारा एक नया मानचित्र जारी किया गया.

चीन ने आरोप लगाया है, कि भारत द्वारा जारी किये गए मानचित्र पर नए क्षेत्रों को सामिलित किया गया है. इसमें झिंजियांग (Xinjiang) तथा तिब्बत के स्थानीय अधिकार क्षेत्रों में आने वाली भूमि को लद्दाख संघ शासित प्रदेश के अंतर्गत  दर्शाया है.

और, इस कारण चीन कश्मीर विवाद में उतरने पर विवश हो गया तथा भारत के इस कदम ने  चीन और पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे पर जवाबी कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया है जिससे चीन और भारत के मध्य सीमा विवाद को हल करने हेतु कठिनाई में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है.

वर्तमान स्थिति

हाल ही में, लद्दाख में विवादित वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पार भारतीय क्षेत्र में चीनी घुसपैठ के कारण भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया है. इस तनाव को कम करने तथा स्थिति नियंत्रण हेतु विभिन्न – pib स्तरों पर बातचीत चल रही है.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus :  Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security.

Topic : Sahakar Mitra scheme launched

सहकार मित्र के बारे में प्रमुख तथ्य

  • ‘सहकार मित्र’ योजना, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (National Cooperative Development Corporation- NCDC) द्वारा शुरू की गयी एक पहल है.
  • यह योजना, अकादमिक संस्थानों के प्रोफेशनलों को किसान उत्पादक संगठनों (Farmers Producers Organizations- FPO) के रूप में सहकारी समितियों के माध्यम से नेतृत्व और उद्यमशीलता की भूमिकाओं को विकसित करने का भी अवसर प्रदान करेगी.
  • इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक प्रशिक्षु को 4 माह की इंटर्नशिप अवधि के दौरान वित्तीय सहायता दी जायेगी.
  • सहकार मित्र, कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की भूमिका निभाकर सहकारिता के माध्यम से व्यवसायिक शैक्षणिक संस्थानों के पेशेवरों को नेतृत्व एवं उद्यमशीलता को विकसित करने के लिए भी अवसर प्रदान करेगा.

 पात्रता

  • इस योजना के अंतर्गत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों एवं आईटी जैसे विषयों के पेशेवर स्नातक ‘इंटर्नशिप’ के लिए पात्र होंगे.
  • कृषि-व्यवसाय, सहयोग, वित्त, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वानिकी, ग्रामीण विकास, परियोजना प्रबंधन, इत्‍यादि में एमबीए की डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे या अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके प्रोफेशनल भी इसके लिए पात्र होंगे.

योजना का माहात्म्य एवं प्रभाव

  • सहकार मित्र योजना, सहकारी संस्थाओं को युवा पेशेवर के नए और अभिनव विचारों तक पहुंचने में सहायता करेगी.
  • जबकि प्रशिक्षुओं को फील्ड में काम करने का अनुभव प्राप्‍त होगा जो उन्‍हें आत्मनिर्भर होने का विश्वास दिलाएगा.

अतिरिक्त जानकारी

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की स्थापना 1963 में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन संसद के एक अधिनियम द्वारा की गई थी. NCDC कई क्षेत्रीय केन्द्रों के माध्यम से सहकारी / समितियों / संघों को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं.

किसान उत्पादक संगठन (FPO), एक प्रकार के उत्पादक संगठन (Producer Organisation- PO) होते हैं जिसमें सदस्य किसान होते हैं. लघु किसान कृषि व्यापार संघ (Small Farmers’ Agribusiness Consortium- SFAC) किसान उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करता है.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security.

Topic : Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana

संदर्भ

वर्ष 2020-21 के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के घटक ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (‘Per Drop More Crop’ component of Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana- PMKSY- PDMC) के तहत राज्य सरकारों को 4000 करोड़ रुपये का वार्षिक आवंटन किया गया.

PMKSY क्या है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) पहले से चली आ रही कई अलग-अलग योजनाओं को मिलाकर तैयार की गई है. ये योजनाएँ हैं –

  • जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्रालय का त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (Accelerated Irrigation Benefit Programme – AIBP)
  • भूमि संसाधन विभाग का समेकित जलछादन प्रबन्धन कार्यक्रम ( Integrated Watershed Management Programme – IWMP)
  • कृषि एवं सहकारिता विभाग का कृषि क्षेत्रोपरि जल प्रबन्धन परियोजना (On Farm Water Management – OFWM)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कार्यान्वयन कृषि, जल संसाधन एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय करेंगे.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के घटक ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (PMKSY- PDMC) के विषय में जानकारी

  • PMKSY- PDMC का कार्यान्वयन कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है.
  • यह सम्पूर्ण भारत में वर्ष 2015-16 से चालू है.
  • इसके अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई प्रौद्योगिकियों यथा ‘ड्रिप और स्प्रिंकलर’ सिंचाई प्रणालियों के जरिये खेत स्तर पर जल उपयोग की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है.
  • ड्रिप सूक्ष्म सिंचाई तकनीक न केवल जल की बचत करती है, यह उर्वरक के उपयोग, श्रम खर्च और अन्य कच्‍चे माल की लागत को कम करने में भी मदद करती है.

वित्तपोषण

इस योजना के लिए, नाबार्ड के साथ मिलकर 5000 करोड़ रुपये का सूक्ष्म सिंचाई कोष (Micro Irrigation fund) बनाया गया है.

सरकार द्वारा सहायता

सरकार, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को लगाने के लिए छोटे और सीमांत कृषकों के लिए कुल लागत के 55% तथा और अन्य किसानों के लिए 45% की वित्तीय मदद प्रदान करती है.


Prelims Vishesh

Indian Gaur:-

  • फ़रवरी 2020 में नीलगिरि वन प्रभाग में कराई गई गणना से पता चला है कि इसके 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के अन्दर 2000 भारतीय गौर रहते हैं.
  • उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में दुर्घटना के कारण प्रत्येक वर्ष 60 गौर प्राणों से हाथ धो बैठते हैं.
  • IUCN की लाल सूची में 1986 से ही यह संकटोन्मुख (vulnerable) सूची में अंकित है.
  • गौर को भारतीय बायसन (Indian bison) भी कहा जाता है.
  • भारत में यह पश्चिमी घाटों और आस-पास की पहाड़ियों में पाया जाता है.

Anti-viral Viroblock textile technology :-

  • अरविन्द लिमिटेड नामक प्रमुख कपड़ा निर्माता ने घोषणा की है कि वह कपड़ों के उत्पादन में विषाणु प्रतिरोधी वस्त्र तकनीक अपनाने जा रहा है.
  • शोध बतलाते हैं कि विषाणु और जीवाणु कपड़ों पर दो दिन दिनों तक सक्रिय रहते हैं.
  • अरविन्द का दावा है कि नई तकनीक से बने कपड़ों के सम्पर्क में आते ही विषाणु और जीवाणु तत्काल मर जाते हैं.
  • कोविड-19 के मामले में ऐसे कपड़े कारगर सिद्ध हुए हैं.

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