Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 April 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 15 April 2019


GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : Resilient Cities Asia-Pacific (RCAP) Congress

संदर्भ

हाल ही में समय के साथ ढल जाने वाले शहरों के एशिया-प्रशांत सम्मेलन, 2019 (Resilient Cities Asia-Pacific – RCAP) का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय स्थानीय पर्यावरण पहल परिषद् (International Council for Local Environmental Initiatives – ICLEI) द्वारा किया गया. इस आयोजन में दक्षिण दिल्ली के नगर निगम का भी सहयोग रहा.

RCAP सम्मेलन क्या है?

  • यह एक वार्षिक वैश्विक मंच है जहाँ शहरों को समय के अनुसार ढालने तथा जलवायु परिवर्तन के अनुसार आवश्यक परिवर्तन करने पर विचार किया जाता है.
  • यह सम्मेलन जर्मनी के बॉन शहर में होता है. इस बैठक का आह्वान स्थानीय पर्यावरण पहल अंतर्राष्ट्रीय परिषद् (ICLEI) तथा स्थानीय सरकारों द्वारा किया जाता है और इस आयोजन में विश्व नगरपौर परिषद् सह-मेजबानी करता है.
  • यह सम्मेलन 2010 में शुरू हुआ था.
  • इसका लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के अनुसार शहरों को ढालने के विषय में कार्रवाई हेतु भागीदारियाँ और संवाद प्रणाली का निर्माण करना है.
  • RCAP के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों ने ICLEI से अनुरोध किया था कि सम्मेलन को विस्तारित कर उसमें ऐसा प्रशांत क्षेत्र के शहरों को भी शामिल किया जाए तथा स्थानीय सरकारों को भी भागीदार बनाया जाए.

शहरों को समय के अनुसार ढालने और जलवायु परिवर्तन के अनुसार फेर-बदल की आवश्यकता

आजकल जलवायु में परिवर्तन हो रहा है और साथ ही अनियोजित ढंग से तथा तेजी से शहरीकरण भी हो रहा है. अतः एशिया क्षेत्र एक ऐसा क्षेत्र बन गया है जिस पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अधिक होने वाला है. तापमान बढ़ रहा है, बरसात की रीति भी बदल रही है, विकट मौसमी घटनाएँ घट रही हैं एवं समुद्र-स्तर में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है. इसके अतिरिक्त जनसंख्या बढ़ रही है और निम्न भागों में अवस्थित बाढ़ोन्मुख तटीय क्षेत्रों में मानवीय बस्तियाँ फ़ैल रही हैं. इन कारणों से जलवायु परिवर्तन से सम्बंधित आपदाओं का जोखिम बढ़ गया है. विश्व की 60% जनसंख्या एशिया में ही रहती है और यहीं सबसे अधिक प्राकृतिक आपदाएँ घट रही हैं.

क्या किया जा सकता है?

  • नगर नियोजकों को सौर ऊर्जा के निर्माण, हरियाली के फैलाव तथा जन-संरक्षण जैसे उपायों पर बल देना होगा.
  • नगर प्रशासकों को चाहिए कि वे पेड़ लगाने, ठोस कचरे के निपटान तथा जलाशयों की सुरक्षा और कायाकल्प को सर्वोच्च प्राथमिकता दें.
  • केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि वे मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में शहर-जैसी सुविधाएँ मुहैया करें.
  • जीवाश्म-इंधन पर निभरता घटाई जाए और सौर-ऊर्जा जैसे विकल्पों की ओर बढ़ा जाए.
  • विकास की ऐसी पद्धति अपनाई जाए जिसमें उत्सर्जन कम हो. इसके लिए शहरों में सार्वजनिक यातायात पर बल देकर उन्हें जाम से बचाया जाए तथा वायु प्रदूषण को घटाया जाए.

ICLEI क्या है?

यह सततता से जुड़ी स्थानीय सरकारों का एक वैश्विक संजाल है जिसमें 1,750 स्थानीय और क्षेत्रीय सरकारें सतत शहरी विकास के लिए प्रतिबद्धता रखते हैं.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : India short of 6 lakh doctors, 2 million nurses: U.S. study

संदर्भ

हाल ही में अमेरिका के Center for Disease Dynamics, Economics & Policy (CDDEP)  नामक संस्था ने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति के बारे में एक प्रतिवेदन प्रकाशित किया है.

प्रतिवेदन में भारत विषयक मुख्य तथ्य

  • भारत में 6 लाख डॉक्टरों और 20 लाख परिचारिकाओं की कमी है. यहाँ प्रत्येक 10,189 जनों पर एक सरकारी डॉक्टर है जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह अनुपात एक हजार होना चाहिए था.
  • एंटी-बायटिक प्रतिरोध की तुलना में भारत में एंटी-बायटिक नहीं मिलने के कारण वर्तमान में अधिक लोग मरते हैं.
  • स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का 65% सामान्य मानव की जेब से बाहर की बात है. इसलिए स्वास्थ्य पर होने वाले के खर्च के कारण 57 मिलियन लोग प्रत्येक वर्ष गरीब हो जाते हैं.

वैश्विक संदर्भ में प्रतिवेदन के मुख्य तथ्य

  • एंटी- बायटिक से ठीक होने वाले रोगों से प्रतिवर्ष मरने वालों की संख्या 7 मिलियन होती है जिसमें अधिकांश निम्न एवं मध्य आय वाले देशों में होती है.
  • नित्य नए-नए एंटी-बायटिकों का आविष्कार हो रहा है, परन्तु सम्बंधित नियमों से होने वाली अड़चनों तथा स्वास्थ्य की निम्न-स्तरीय सुविधा होने के कारण नई दवाइयाँ बाजार में या तो आती ही नहीं हैं अथवा देर से आ पाती हैं.
  • एंटी-बायटिक के बिना सोचे-समझे प्रयोग के कारण विश्व-भर में उपचार विफल हो रहे हैं और औषधि प्रतिरोध फ़ैल रहा है. इस कारण प्रभावी एंटी-बायटिकों की उपलब्धता भी घटती जा रही है.

भारत में स्वास्थ्य देखभाल उद्योग की बाधाएँ

जनसंख्या : भारत में विश्व की दूसरी सबसे बड़ी जनसंख्या है जो 2015 में 1.3 बिलियन आँकी गई थी.

अवसंरचना : हमारे यहाँ अस्पताल आदि उतने नहीं हैं जिससे की पूरी जनसंख्या का ध्यान रखा जा सके. केंद्र और राज्य की सरकारें इस विषय में ठीक-ठाक सुविधाएँ देती हैं परन्तु सरकारी अस्पतालों में स्टाफ और पैसे की कमी रहती है.

बीमा : सरकार बीमा के प्रति 32% का योगदान देती है जो इंग्लैंड (83.5%) की तुलना में बहुत कम है. भारत में परिवारों को स्वास्थ्य के लिए अपनी क्षमता से अधिक खर्च करना पड़ता है जिसका प्रधान कारण है कि 76% भारतीयों के पास कोई स्वास्थ्य बीमा नहीं होती.

अन्य कारण :  कमजोर प्रशासन और जवाबदेही, दवाओं का अनाप-शनाप प्रयोग और उनके बढ़ते हुए दाम, स्वास्थ्य से सम्बंधित सूचना प्रणाली का टूटा-फूटा होना, सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर कम खर्च, विशाल निजी प्रक्षेत्र के अस्पतालों पर कोई नियंत्रण नहीं होना, कुशल मानव संसाधनों का असमान वितरण,  कमजोर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रक्षेत्र.


GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Unified Payments Interface (UPI)

संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India – NPCI) तथा कुछ उद्योगों से प्राप्त आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि अप्रैल, 2018 से लेकर मार्च, 2019 तक UPI लेन-देन के मूल्य के हिसाब से सभी ई-बटुओं से आगे रहा. व्यक्ति से व्यवसाई लेन-देन/person-to-merchant (P2M) transactions जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में इसका प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा. UPI से हुए भुगतान में इस अवधि में 400% की वृद्धि हुई. विदित हो कि अप्रैल, 2018 में इसके द्वारा 27,000 करोड़ रु. की लेन-देन हुई थी जो मार्च, 2019 तक बढ़कर 35 लाख करोड़ हो गई.

UPI क्या है?

समेकित भुगतान इंटरफ़ेस (UPI) NPCI और RBI द्वारा निर्मित एक प्रणाली है जो एक नकद रहित प्रणाली का उपयोग करते हुए धन का तत्काल स्थानान्तरण करने में सहायक होती है. UPI का उपयोग करने के लिए एक स्मार्टफ़ोन और एक बैंकिंग एप की आवश्यकता होती है जिसके माध्यम से धन को तत्काल भेजा या पाया जा सकता है अथवा व्यापारी खुदरा खरीद के लिए भुगतान कर सकता है. आगे चलकर, UPI संभवतः आज के NEFT, RTGS और IMPS का स्थान ग्रहण कर लेगी.

यह कैसे काम करता है?

IMPS पर आधारित UPI के माध्यम से बैंक खाते से तुरंत और प्रत्यक्ष रूप से भुगतान हो जाता है. इसके लिए वॉलेट में पहले से पैसा भरना आवश्यक नहीं होता है. इसके माध्यम से एक से अधिक व्यवसाइयों को कार्ड का ब्यौरा टाइप किये बिना अथवा नेट बैंकिंग का पासवर्ड लिखे बिना भुगतान किया जाता है. UPI 2.0 हाल ही में भारत के राष्ट्रीय भुगतान निगम ने (National Payments Corporation of India – NPCI) UPI 2.0 को आरम्भ किया है जो UPI अर्थात् समेकित भुगतान इंटरफ़ेस का एक उत्क्रमित एवं नवीकृत संस्करण है. UPI के इस नवीनतम संस्करण में 4 नई विशेषताएँ हैं जिनसे यह उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक एवं सुरक्षित बन गया है. अब उपभोक्ता अपने ओवरड्राफ्ट खाते को UPI से जोड़ सकेंगे. साथ ही इसमें एककालिक मेनडेट की सुविधा होगी तथा बाद की तिथि में भुगतान करने के लिए पहले ही प्राधिकृत करने की सुविधा भी होगी. इस UPI की चौथी विशेषता यह है कि उपभोक्ता व्यवसायी के द्वारा भेजे गये invoice को भुगतान करने के पहले जाँच सकेंगे.

UPI अनूठा कैसे है?

  • इसमें 365 दिन 24×7 अवधि में मोबाइल से धन तुरंत हस्तांतरित हो जाता है.
  • यह ऐसा एकल मोबाइल ऐप है जिसकी पहुँच अलग-अलग बैंक खातों तक होती है.
  • इसमें एक क्लिक से भुगतान हो जाता है.
  • ग्राहक को कार्ड नंबर, खाता नंबर, IFSC जैसे विवरण नहीं देने होते हैं.
  • इसके माध्यम से दोस्तों के साथ बिल साझा हो जाता है.
  • UPI ATM जाने से बचाता है और घर बैठे काम हो जाता है.
  • इससे मर्चेंट और इन-ऐप भुगतान भी हो जाता है.

UPI के प्रतिभागी

  • भुगतान करने वाला PSP
  • भुगतान पाने वाला PSP
  • पैसा भेजने वाला बैंक
  • पैसा पाने वाला बैंक
  • NPCI
  • बैंक खाता धारक
  • व्यापारी

भारत का राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)

  • भारत का राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI)भारत में सभी खुदरा भुगतान प्रणाली के लिए एकछत्र संगठन है.
  • दस बैंक इसके प्रोमोटर हैं.
  • निगम का प्रमुख उद्देश्य नकद रहित लेन-देन को बढ़ावा देना है.
  • इसे सफलतापूर्वक RuPay नामक का घरलू कार्ड भुगतान नेटवर्क विकसित किया है जिसके कारण विदेशी कार्डों पर निर्भरता घटी है.
  • NPCI को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय बैंक संघ (IBA) के मार्गदर्शन और समर्थन के साथ स्थापित किया गया था.

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Double Asteroid Redirection Test (DART)

संदर्भ

NASA की योजना है कि वह जून, 2021 में एक ऐसा अन्तरिक्ष मिशन भेजेगा जो अक्टूबर, 2022 तक डीडीमोस नामक युगल क्षुद्र ग्रहों में से छोटे वाले क्षुद्रग्रह Didymos B पर विस्फोट द्वारा आघात करके उसकी दिशा बदल देगा जिससे पृथ्वी पर उससे होने वाले संभावित खतरे से बचा जाए.

 DART योजना क्या है?

  • अमेरिका का नासा डीडीमून तक पहुँचने वाले एक अन्तरिक्षयान की योजना बना रहा है.
  • यह योजना अमेरिका की DART (Double Asteroid Redirection Test) योजना के तहत चलायी जायेगी.
  • यहाँ यह ज्ञातव्य है कि DART योजना एक ऐसी योजना है जिसमें एक लघु अन्तरिक्षयान के माध्यम से एक ऐसी मिसाइल छोड़ी जायेगी जो अन्तरिक्ष में जाकर पृथ्वी के निकट आते हुए क्षुद्रग्रह को उसके परिक्रमा पथ से छिटका देगी जिससे कि वह पृथ्वी से टकरा न सके और उसे क्षति न पहुँचा सके.
  • अमेरिका की इस योजना के अंतर्गत 2022 में एक DART डीडीमून तक जाएगा और इसके परिक्रमा पथ को बदल डालेगा. इसके लिए DART जान-बूझकर डीडीमून पर 6 किमी/सेकंड की गति से जा टकराएगा. उस समय डार्ट पर एक कैमरा और स्वायत्त-चालन सॉफ्टवेर लगा होगा.
  • इस टकराव के बाद हेरा 2026 में उस क्षुद्रग्रह की खोज करने पहुंचेगा और देखेगा कि अमेरिका के डार्ट के टकराव का वहाँ क्या प्रभाव पड़ा है और वह क्षुद्रग्रह अपने परिक्रमा पथ से कितना दूर जा छिटका है.

डीडीमून ही क्यों चुना गया?

डीडीमून को इसलिए चुना गया क्योंकि वह अत्यंत छोटा है और पृथ्वी से अत्यंत निकट भी है. वह डीडीमोस के चारों ओर 12 घंटे में परिक्रमा कर लेता है, इसलिए इसको पथभ्रष्ट करना सरल और नापने योग्य होगा.

डीडीमोस क्या है?

डीडीमोस क्षुद्रग्रहों का एक जोड़ा है जिसमें बड़े छुद्रग्रह का व्यास 780 मीटर है और परिक्रमा का समय 2.26 घंटा है. विदित हो कि डिडीमोस के चारों ओर डीडीमून (Didymoon) नामक चाँद परिक्रमा लगाता है जिसे डीडीमोस B भी कहा जाता है. इसका आकार मिस्र के गीज़ा पिरामिड के लगभग बराबर है और जिसका व्यास मात्र 160 मीटर है


Prelims Vishesh

World’s largest plane makes first test flight : –

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  • हाल ही में कैलिफ़ोर्निया के मोजावे मरुस्थल से विश्व का सबसे बड़ा हवाई जहाज उड़ा.
  • इस हवाई जहाज का नाम Roc है.
  • यह एक कार्बन कम्पोजिट जहाज है.
  • इसका निर्माण Stratolaunch Systems Corp. ने किया है.
  • इसके दिनों की लम्बाई अमेरिका के किसी फुटबॉल मैदान के बराबर है और इसमें छह इंजन लगे हुए हैं.
  • यह जहाज 35,000 फुट ऊपर जाकर पाँच लाख पाउंड के अन्तरिक्षयानों को पहुँचा सकता है और वहाँ से रॉकेट गिरा सकता है. इसको बनाने वाली कम्पनी का दावा है कि इस जहाज से अन्तरिक्षयान भेजना हवाई जहाज के लिए बुकिंग करने के जैसा सरल हो जाएगा.

Yangtze giant softshell turtles :

  • हाल ही में दक्षिणी चीन के सुझोऊ चिड़िया घर में रह रही विश्व की सबसे विरल कछुए की प्रजाति की एक मात्र ज्ञात मादा का देहांत हो गया.
  • कहा जाता है कि यह मादा चार यांग्ज़े दैत्याकार कोमल कवच वाले कछुओं में से एक थी. सुझोऊ चिड़ियाघर में अभी एक इसी प्रजाति का नर कछुआ रहता है जबकि दो ऐसे कछुए वियेतनाम में हैं.
  • IUCN की लाल सूची में इसे विकट रूप से संकटग्रस्त प्रजाति (critically endangered) के अन्दर रखा गया है.
  • यह विश्व का सर्वाधिक आयु वाला असमुद्रीय कछुआ हो सकता है.

India becomes net steel importer, a first in 3 years :

  • 2018-19 वित्तीय वर्ष में भारत को पिछले तीन वर्ष में पहली बार इस्पात का आयात करना पड़ा.
  • ऐसा मुख्यतः इसलिए हुआ है कि अमेरिका की शुल्क नीतियों चीन, जापान, द. कोरिया और इंडोनेशिया जैसे इस्पात-निर्माताओं ने अपनी आपूर्ति को भारत की मोड़ दिया है. इसके अतिरिक्त परिवहन क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता वाले इस्पात और उच्च कोटि के इलेक्ट्रिकल इस्पात में बढ़ती हुई माँग के कारण भारत को आयात बढ़ाना पड़ा.

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