Sansar डेली करंट अफेयर्स, 14 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 14 November 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : e-Lok Adalat

संदर्भ

हाल ही में सरकार द्वारा प्रस्तुत आकड़ों के अनुसार जून 2020 से अक्‍टूबर 2020 तक 15 राज्‍यों में 27 ई-लोक अदालतें आयोजित की गई, जिनमें 4.83 लाख मामलों की सुनवाई हुई और 1409 करोड़ रुपये के 2.51 लाख मामलों का निष्‍पादन किया गया.

उल्लेखनीय है कि नीति आयोग 6 जून, 2020 को आगामी और ओमिदयार नेटवर्क इंडिया के सहयोग से पहली बार एक आभासी बैठक जरिये भारत में ऑनलाइन विवाद समाधान को आगे बढ़ाने के लिए प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया था. इस बैठक का सामान्‍य विषय भारत में ऑनलाइन विवाद समाधान को आगे बढ़ाने के प्रयास सुनिश्चित करने लिए सहयोगपूर्ण रूप से कार्य करने की दिशा में बहु-हितधारक सह‍मति कायम करना था. इसके बाद भारत में ऑनलाइन विवाद समाधान प्रणाली पर कार्य किया गया.

ई-लोक अदालत क्या हैं?

ऑनलाइन लोक अदालत, यानी ई-लोक अदालत न्‍यायिक सेवा संस्‍थानों का एक नवाचार है, जिसमें अधिकतम लाभ के लिए टैक्‍नोलॉजी का उपयोग किया गया है. यह घर बैठे लोगों को न्‍याय देने का प्‍लेटफार्म बन गया है. ई-लोक अदालतों के आयोजनों में खर्च कम होते है, क्‍योंकि संगठन संबंधी खर्चों की जरूरत समाप्‍त हो जाती है.

लोक अदालत क्या हैं?

लोक अदालतें ऐसे मंच या फोरम हैं जहाँ न्यायालय में लंबित या मुकदमे के रूप में दाखिल नहीं किये गए मामलों का सौहार्द्रपूर्ण तरीके से निपटारा किया जाता है. यह सामान्य न्यायालयों से अलग होता है, क्योंकि यहाँ विवादित पक्षों के बीच परस्पर समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान किया जाता है. 

लोक अदालत की स्थापना का विचार सर्वप्रथम भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी.एन.भगवती द्वारा दिया गया था. सबसे पहली लोक अदालत का आयोजन 1982 में गुजरात में किया गया था. 2002 से लोक अदालतों को स्थायी बना दिया गया. 

लोक अदालतों में सभी दीवानी मामले, वैवाहिक विवाद, नागरिक मामले, भूमि विवाद, मज़दूर विवाद, संपत्ति बँटवारे संबंधी विवाद, बीमा और बिजली संबंधी आदि विवादों का निपटारा किया जाता है. विधि के तहत ऐसे अपराध जिनमें राजीनामा नहीं हो सकता तथा ऐसे मामले जहाँ संपत्ति का मूल्य एक करोड़ रुपए से अधिक है, का निपटारा लोक अदालतों में नहीं हो सकता. 

लाभ

  • न्‍यायिक सेवा अधिकारियों द्वारा आयोजित लोक अदालतें (राज्‍य स्‍तरीय और राष्‍ट्रीय) वैकल्पिक विवाद समाधान का तरीका है, जिसमें मुकदमाबाजी से पहले के और अदालतों में लंबित मामलों को मैत्रीपूर्ण आधार पर सुलझाया जाता है. इसमें मुकदमे का खर्च नहीं होता. यह नि:शुल्‍क है. मुकदमे से संबंधित पक्षों को तेजी से एक राय पर लाया जाता है.
  • इससे दोनों पक्ष कठिन न्‍यायिक प्रणाली के बोझ से छुटकारा मिलता है. इस प्रणाली में समय की खपत होती है. यह जटिल और खर्चीली है. लोक अदालतें न्‍यायालय के बकाये मामलों के बोझ को कम करती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : CONTEMPT OF COURT

संदर्भ

हाल ही में, महान्यायवादी (Attorney General) वेणुगोपाल द्वारा स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा के विरुद्ध आपराधिक अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति दे दी गयी है.

कुणाल कामरा ने टेलीविजन एंकर अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्वीट के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी.

न्यायालय की अवमानना क्या है?

कानूनी रूप से देखा जाए तो अदालत की अवमानना दो तरह की होती है –

  • दीवानी अवमानना, जो अदालत की अवमानना अधिनियम 1971 के सेक्शन 2(बी) में आती है. ‘इसमें वे मामले आते हैं, जिसमें यदि कोई व्यक्ति जान-बूझकर अदालत के किसी निर्णय को न माने. भले ही वह डिक्री हो, निर्देश हो या आदेश तो सजा दी जाती है.
  • आपराधिक अवमाननासेक्शन 2 (सी) के तहत आता है, जिसमें लिखे हुए शब्दों से, मौखिक या कुछ दिखाकर किसी अदालत के आदेश को नीचा दिखाने की कोशिश की गई हो या पूर्वग्रह से ग्रसित हो, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश की गई हो या, न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना या करने की मंशा से इसमें रुकावट डाले.

सरल शब्द में यह फैसले या अदालत की प्रतिष्ठा के खिलाफ जानबूझकर की गई अवज्ञा है. एक है प्रत्यक्ष अवमानना और दूसरी है अप्रत्यक्ष अवमानना. अदालत में ही खड़े होकर यदि कोई आदेशों को नहीं माने तो प्रत्यक्ष अवमानना होती है.

माहात्म्य

अदालत की अवमानना एक गंभीर अपराध है. किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी है कि वे अदालत का सम्मान करें. अदालतों के प्राधिकार के खिलाफ न हो न ही स्वेच्छाचार करते हुए आदेशों का पालन न करें. अदालतें कानूनी अधिकारों का स्तंभ है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. अदालत की अवमानना को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर और न्यायमूर्ति के एस. राधाकृष्णन की खंडपीठ ने भी सुब्रत राय सहारा के मामले में समझाया था. यदि अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया जाता है तो यह न्यायिक प्रणाली की नींव हिला देता है, जो कानून के शासन को दुर्बल करता है. अदालत इसी की संरक्षा और सम्मान करती है. देश के लोगों का न्यायिक प्रणाली में आस्था और विश्वास कायम रखने के लिए यह आवश्यक है. इसलिए अदालत की अवमानना एक गंभीर अपराध माना जाता है. साथ ही यह याचिकाकर्ता को भी सुनिश्चित करता है कि अदालत द्वारा पारित होने वाले आदेश का अनुपालन होगा. यह उनके द्वारा पालन किया जाएगा, जो भी इससे संबंधित होंगे. अदालत की अवमानना न्याय के एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में प्रयुक्त होती है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Related to Health.

Topic : Pneumonia and Diarrhoea Progress Report

संदर्भ

निमोनिया और डायरिया प्रगति रिपोर्ट, प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन एक्सेस सेंटर (International Vaccine Access Centre– IVAC) द्वारा जारी की जाती है.

इस वर्ष की रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  1. निमोनिया और डायरिया के कारण होने वाली बच्चों की मौतों को रोकने के लिए भारत ने अपने टीकाकरण कवरेज में महत्वपूर्ण प्रगति की है.
  2. हालाँकि, कुल मिलाकर विश्व की स्वास्थ्य प्रणालियां बच्चों के लिए बीमारी की रोकथाम और उपचार सेवाओं तक पहुँच उपलब्ध कराने में पूर्णतयः सफल नहीं हो पा रही हैं, फिर भी भारत ने रिपोर्ट में कवरेज संबंधी निगरानी किये जाने वाले पाँच टीकों में से तीन टीकों के लिए 90% कवरेज का वैश्विक लक्ष्य हासिल कर लिया है.
  3. रिपोर्ट में कवरेज निगरानी किये जाने वाले टीके है: डिप्थीरिया, पर्टुसिस (काली खांसी) और टेटनस (DPT) वैक्सीन, खसरा-रोधी वैक्सीन की पहली खुराक, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Pneumococcal Conjugate Vaccine- PCV) और रोटावायरस वैक्सीन.
  4. भारत ने अभूतपूर्व तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर रोटावायरस वैक्सीन का ‘100-दिवसीय एजेंडा’भी पूरा कर लिया है. यह महत्वपूर्ण वैक्सीन विस्तार, रोटावायरस डायरिया के जानलेवा मामलों में प्रतिवर्ष 26 मिलियन बच्चों को बचाने में मदद करेगा.
  5. हालांकि, भारत उपचार के लिए निर्धारित सभी चार लक्ष्यों– स्तनपान एवं टीकाकरण, देखभाल की मांग और एंटीबायोटिक दवाओं, ओरल रिहाइड्रेशन सोल्यूशन (ORS) (ओआरएस), और जिंक अनुपूरण, को पूरा करने में विफल रहा है.

निमोनिया और डायरिया

निमोनिया और डायरिया (Pneumonia and Diarrhoea) विश्व में नवजात शिशुओं की मौतों का सबसे बड़ा कारण है. 5 साल से कम उम्र के बच्चों की प्रतिवर्ष होने वाली कुल मौतों में से 29 प्रतिशत अथवा 2 मिलियन से अधिक मौतें इन रोगों के कारण होती हैं. फिर भी, इन रोगों की रोकथाम और उपचार का स्तर विश्व में, विशेषकर गरीब आबादी के मध्य, काफी कम है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Food processing

Topic : PM-FME Scheme

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण योजना (PM-FME Scheme) का क्षमता निर्माण घटक जारी किया गया है.

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारीकरण योजना (PM-FME Scheme)

  • PM-FME योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत वर्तमान सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों (Micro Food Processing Enterprises) के उन्‍नयन के लिए उन्हें वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने हेतु आरंभ की गई है.
  • इस परियोजना का कुल परिव्यय वर्ष 2020-25 तक पाँच वर्षों की अवधि हेतु 10,000 करोड़ रूपए है.
  • क्षमता निर्माण घटक में राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा मास्टर ट्रेनर्स (राज्यों द्वारा सूचीबद्ध) को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. मास्टर ट्रेनर्स, जिला स्तरीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे| इसके उपरांत जिला स्तरीय प्रशिक्षक हितधारकों को प्रशिक्षण देंगे.
  • व्यक्तिगत व्यक्तियों और सूक्ष्म-खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के श्रमिकों के साथ-साथ स्व सहायता समूहों (SHGs) / कृषक उत्पादक संगठनों (FPOs)/सहकारी समितियों के सदस्यों, सरकारी अधिकारियों आदि को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा.
  • क्षमता निर्माण के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन (Assessment) और प्रमाणन (certification) खाद्य उद्योग क्षमता एवं कौशल पहल (FICSI) द्वारा किया जाएगा.
  • इस अवसर पर राष्ट्रीय स्‍तर पर एक जिला-एक उत्पाद योजना (ODOP) के भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) सक्षम डिजिटल मानचित्र को जारी किया गया.
  • PM-FME योजना के तहत, राज्यों ने मौजूदा क्लस्टरों और क्षेत्र में कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए जिलों के लिए खाद्य उत्पादों की पहचान की है.
  • भारत का GIS ODOP डिजिटल मानचित्र सभी राज्यों के ODOP उत्पादों का विवरण प्रदान करेगा और मूल्य श्रृंखला विकास में हितधारकों को सुविधा उपलब्ध कराएगा.
  • डिजिटल मानचित्र में आदिवासी, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और आकांक्षी जिलों के लिए संकेतक भी विद्यमान हैं.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Safeguarding the Planet

संदर्भ

G-20 शिखर सम्मेलन के साथ ही आयोजित चर्चा सेफगार्डिंग द प्लैनेट को संबोधित करते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत न केवल अपने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा कर रहा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन की दिशा में सराहनीय कदम उठा रहा है.

सम्मेलन से जुड़े तथ्य

  • रियाद में हो रहे 12वें G-20 शिखर सम्मेलन के दूसरे और अंतिम दिन सऊदी राष्ट्रपति ने धरती की सुरक्षा हेतु “सेफगार्डिंग द प्लैनेट” विषय पर एक उच्च-स्तरीय साइड ईवेंट की मेजबानी की.
  • इसके दौरान G-20 नेताओं ने दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रबंधन के लिए चक्रीय कार्बन अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला.
  • चर्चा के बाद जारी बयान में कहा गया कि G-20 समूह प्रवाल भित्तियों, महासागरीय पारिस्थितिक तंत्रों और भूमि के क्षरण और निवास स्थान के नुकसान से निपटने के लिए ठोस कार्रवाई करने इस गृह के संरक्षण के लिए अपने प्रयासों के लिए प्रतिबद्ध है.
  • बयान में कहा गया है कि, पर्यावरण पर एक समन्वित दृष्टिकोण के साथ, G0-20 देश अधिक समावेशी, टिकाऊ और लचीला भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता को सुनिश्चित करते हैं.

सेफगार्डिंग द प्लैनेट (Safeguarding the Planet) के बारे में

सेफगार्डिंग द प्लैनेट (Safeguarding the Planet) के तहत G-20 के सदस्य देश समन्वित प्रयास के द्वारा जलवायु परिवर्तन की दिशा में ठोस कदम के लिए कार्य करते हैं. जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में सेफगार्डिंग द प्लैनेट (Safeguarding the Planet) के अंतर्गत प्राथमिकता के क्षेत्र निम्न है –

  1. सतत विकास के दिशा में आगे बढ़ने के लिए उत्सर्जन का कुशल प्रबंधन
  2. भूमि क्षरण और आवास की क्षति को रोकना
  3. समुद्रों का संरक्षण
  4. पूरे विश्व में सतत एवं लचीली जल प्रणाली का प्रवर्तन
  5. खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देना
  6. नए युग के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना

पेरिस समझौता क्या है?

  • पेरिस समझौता एक महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय समझौता है जिसे जलवायु परिवर्तन और उसके नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिये वर्ष 2015 में दुनिया के लगभग प्रत्येक देश द्वारा अपनाया गया था.
  • इस समझौते का उद्देश्य वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को काफी हद तक कम करना है, ताकि इस सदी में वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व-औद्योगिक स्तर (Pre-Industrial level) से 2 डिग्री सेल्सियस कम रखा जा सके.
  • इसके साथ ही आगे चलकर तापमान वृद्धि को और 1.5 डिग्री सेल्सियस रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. ज्ञातव्य है कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये प्रत्येक देश को ग्रीनहाउस गैसों के अपने उत्सर्जन को कम करना होगा, जिसके संबंध में कई देशों द्वारा सराहनीय प्रयास भी किये गए हैं.
  • यह समझौता विकसित राष्ट्रों को उनके जलवायु से निपटने के प्रयासों में विकासशील राष्ट्रों की सहायता हेतु एक मार्ग प्रदान करता है.

Prelims Vishesh

Param Siddhi :-

  • यह एक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग-कृत्रिम बुद्धिमत्ता से युक्त (high-performance computing artificial intelligence: HPC-AI) सुपर कंप्यूटर है, जो राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक / C-DAC) में स्थापित किया गया है.
  • इस मिशन का उद्देश्य तीन चरणों में देश में 70 सुपर कंप्यूटर स्थापित करना है.
  • इसने विश्व के शीर्ष 500 सबसे शक्तिशाली गैर-वितरित कप्यूटर प्रणाली की सूची में 63वां स्थान प्राप्त किया है.
  • गैर-वितरित सुपर कंप्यूटर प्रणाली से आशय सभी घटकों के एक ही स्थान पर होने से है.
  • HPC-AI सुपरकंप्यूटर प्रणाली उन्‍नत सामग्री, अभिकलनात्मक (कम्प्यूटेशनल) रसायन विज्ञान और खगोल भौतिकी आदि जैसे क्षेत्रों में अनुप्रयोग विकास को सुदृढ़ करेगी.

G20 Global Smart Cities Alliance :-

  • चार भारतीय शहर (इंदौर, बेंगलुरु, हैदराबाद और फरीदाबाद) जी 20 ग्लोबल स्मार्ट सिटीज एलायंस के भाग के रूप में स्मार्ट शहरों के लिए एक नए रोडमैप को आगे बढ़ाने हेतु 22 देशों के 36 शहरों की सूची में शामिल हुए हैं.
  • जून 2019 में स्थापित, G20 ग्लोबल स्मार्ट सिटीज एलायंस, सर्वोत्तम प्रथाओं को त्वरित करने, संभावित जोखिमों को कम करने, किया लाया अधिक खुलेपन और सार्वजनिक विश्वास को बढ़ावा देने में सहायता करने के लिए वैश्विक नीति मानदंडों को स्थापित एवं उन्‍नत करता है.
  • विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum), जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है इस एलायंस के लिए सचिवालय के रूप में कार्य करता है.

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