Sansar डेली करंट अफेयर्स, 14 January 2021

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 14 January 2021


GS Paper 2 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : Bird Flu

संदर्भ

हाल ही में, गुजरात राज्य में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा / Avian Influenza) के नए मामलों की पुष्टि हुई है, इससे पहले केरलराजस्थानमध्य प्रदेश और हरियाणा में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है.

कई राज्यों में कौवे और प्रवासी प्रजातियों के पक्षियों की मौत होने की रिपोर्ट सामने आ रही है, जिससे इन राज्यों में  वायरस की पहचान करने हेतु नमूनों की जांच कराने के  अफरा-तफरी मच रही है.

बर्ड फ्लू

  • बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस H5N1 के कारण होती है.
  • यह विषाणु जिसे इन्फ्लूएंजा ए (Influenza- A) या टाइप ए (Type- A) विषाणु कहते हैं, सामान्यतः पक्षियों में पाया जाता है. परन्तु कभी-कभी यह मानव सहित अन्य कई स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है. जब यह मानव को संक्रमित करता है तो इसे इन्फ्लूएंजा (श्लेष्मिक ज्वर) कहा जाता है.
  • बर्ड फ्लू संक्रमण चिकन, टर्की, गीस, मोर और बत्तख जैसे पक्षियों में तीव्रता से फैलता है. इसलिए बर्ड फ्लू के दौरान इन पक्षियों को न खाने की सलाह चिकित्सकों द्वारा दी जाती है.
  • विदित हो कि यह इन्फ्लूएंजा वायरस इतना खतरनाक होता है कि इससे इंसान व पक्षियों की बहुत कम समय में ही मौत हो जाती है.
  • वैसे, अभी तक बर्ड फ्लू का मुख्य कारण पक्षियों को ही माना जाता है, परन्तु कई बार यह इंसान से इंसान में फैलता है.

लक्षण

बर्ड फ्लू के लक्षण भी सामान्य फ्लू जैसे ही होते हैं, परन्तु सांस लेने में समस्या और हर वक्त उल्टी होने का अनुभव इसके खास लक्षण हैं.

बचाव

  • बीमारी के प्रकोप से बचाने के लिये सख्त जैव-सुरक्षा (Biosecurity) उपाय अपनाने और अच्छी स्वच्छता व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता होती है.
  • यदि जानवरों में इसके संक्रमण का पता चलता है, तो वायरस से संक्रमित और संपर्क वाले जानवरों को चुनकर पृथक करने की नीति का अनुपालन किया जाना चाहिये ताकि वायरस के तीव्रता से प्रसार को नियंत्रित किया जा सके और इसे नष्ट करने के प्रभावी उपाय अपनाए जा सकें.

GS Paper 2 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Institutions of Eminence

संदर्भ

हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अपने नियमों में संशोधन करके इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (Institutions of Eminence- IoEs) को विदेशों में कैंपस स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गयी है, किंतु इन संस्थानों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा.

UGC द्वारा किए गए संशोधनों में IOE को नए ऑफ कैंपस सेंटर (Off Campus Centers) शुरू करने की अनुमति भी प्रदान की गयी है, जिसके तहत पांच सालों में अधिकतम तीन और एक शैक्षणिक वर्ष में अधिकतम एक ऑफ कैंपस सेंटर की स्थापना की जा सकती है.

इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स योजना क्या है?

  • यह योजना भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की है. इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को वैश्विक मान्यता दिलवाना है.
  • चुने गये संस्थानों को सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वयत्तता मिलेगी.
  • सरकार इन संस्थानों में से दस को चलाएगी और उन्हें विशेष धनराशि मुहैया कराएगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में संस्थानों को चुनने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
  • उत्कृष्ट संस्थानों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी और वे शुल्क निर्धारण, पाठ्यक्रम की अवधि एवं प्रशासनिक ढाँचे के विषय में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में चयन के लिए वही शैक्षणिक संस्थान योग्य माने जाएँगे जिन्हें वैश्विक-स्तर पर शीर्षस्थ 500 संस्थानों में स्थान मिला हुआ है.
  • इसके लिए वह संस्थान भी आवेदन कर सकता है जिसको राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) के अंदर शीर्षस्थ 50 में स्थान मिला है.
  • ‘उत्कृष्ट संस्थान’ के रूप में चुने गए प्रत्येक ‘सार्वजनिक संस्थान’ को पाँच साल की अवधि में 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी. निजी संस्थानों को यह वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी. निजी संस्थानों को यह दर्जा तभी मिलेगा जब वह आगामी 15 वर्ष के लिए अपनी ऐसी योजना प्रस्तुत करें जो भरोसा देने वाली हो.
  • इन संस्थानों को विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए, विदेशी अध्यापकों को भर्ती करने के सन्दर्भ में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी.
  • उन्हें UGC की अनुमति के बिना शीर्ष 500 विश्व-संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग करने की भी अनुमति प्रदान की जायेगी.

उत्कृष्ट संस्थानों को प्राप्त सुविधाएँ

  1. ये संस्थान अपने कार्यबल के 25% तक शिक्षकों को विदेशी शिक्षकों को नियुक्त कर सकते हैं.
  2. ये देश के अन्दर अन्य शैक्षणिक संस्थानों से सहयोग कर सकेंगे.
  3. विदेशी छात्रों को अपने संस्थान में मेधा के आधार पर ले सकेंगे बशर्ते उनकी संख्या देशी छात्रों के 30% तक हो.
  4. बिना किसी सीमा के ये संस्थान विदेशी छात्रों से शुल्क ले सकेंगे.
  5. उत्कृष्ट संस्थान बन जाने के बाद ये संस्थान UGC के पाठ्यक्रम से हट कर अपना पाठ्यक्रम निर्धारित कर सकते हैं.
  6. ये संस्थान अपने कार्यक्रमों के ऑनलाइन पाठ्यक्रम चला सकते हैं, परन्तु इसके लिए इसकी 20% की अधिकतम सीमा है.
  7. ऐसे संस्थानों में UGC के निरीक्षण की आवश्यकता नहीं होगी.

विश्व-स्तरीय संस्थानों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग के अनुसार, भारत में विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों का अभाव है और यहाँ के शिक्षकों को विदेश की तुलना में कम पैसा दिया जाता है. चीन की तुलना में भारत में विश्वविद्यालय के स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधी है. इस मामले में वह अधिकांश लैटिन अमेरिकी और अन्य मध्यम आय वाले देशों से कहीं पीछे है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : Ease of Doing Business Reforms

संदर्भ

हाल ही में केरल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों’ (Ease of Doing Business reforms) को लागू करने वाला भारत का आठवाँ राज्य बन गया है. इससे केरल को 2,373 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की मंजूरी (Additional borrowing permission) मिल गई है.

मुख्य तथ्य

  • केरल देश का 8वां ऐसा राज्य बन गया है जिसने भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के व्यय विभाग (Department of Expenditure) द्वारा बनाए गए, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों को पूरी तरह से लागू कर दिया है. इस तरह खुले बाजार (ओपेन मार्केट) की उधारी के माध्यम से केरल 2,373 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए पात्र राज्य हो गया है.
  • इस प्रकार केरल ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों’ को लागू करने वाले अन्य 7 राज्यों (यथा- आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और तेलंगाना ) में शामिल हो गया है.
  • व्यावसायिक सुगम्यता सुधार (Ease of Doing Business reforms) लागू करने वाले 8 राज्यों को 23,149 करोड़ रुपये की अतिरिक्त उधारी की अनुमति दी गई है.
  • व्यावसायिक सुगम्यता में सुधार से भविष्य में राज्यों का आर्थिक विकास तेजी से होगा.
  • इस कवायद का उद्देश्य प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से केंद्र सरकार के विभिन्न नियामक कार्यों और सेवाओं की अदायगी में सुधार लाना है.

व्यय विभाग का व्यापार सुगमता सूचकांक

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस योजना को केंद्र सरकार ने मई 2020 में शुरू किया था.  इस योजना का उद्देश्य व्यवसाय करने में आसानी के लिए सुधार करने वाले राज्यों को अतिरिक्त उधार अनुमति प्रदान करना था.

WB के व्यापार सुगमता सूचकांक से तात्पर्य 

  • विश्व बैंक द्वारा जारी व्यापार सुगमता सूचकांक (Ease Of Doing Business) किसी भी देश के व्यापार परिदृश्य की सुगमता को मापता है.
  • व्यापार सुगमता सूचकांक में व्यवसाय शुरू करना, निर्माण परमिट, विद्युत, संपत्ति का पंजीकरण,  ऋण उपलब्धता, अल्पसंख्यक निवेशकों की सुरक्षा, करों का भुगतान करना, सीमा-पार व्यापार, अनुबंध लागू करना, दिवालियापन होने पर समाधान आदि मानक शामिल हैं.

व्यापार सुगमता सूचकांक के मानक

व्यापार सुगमता सूचकांक के निम्नलिखित मानक हैं-

  • व्यवसाय शुरू करना (Starting A Business)
  • निर्माण परमिट (Dealing with Construction Permits)
  • विद्युत (Getting Electricity)
  • संपत्ति का पंजीकरण (Registering Property)
  • ऋण उपलब्धता (Getting Credit)
  • अल्पसंख्यक निवेशकों की सुरक्षा (Protecting Minority Investors)
  • करों का भुगतान करना (Paying Taxes)
  • सीमाओं के पार व्यापार करना (Trading Across Borders)
  • अनुबंध लागू करना (Enforcing Contract)
  • दिवालियापन होने पर समाधान (Resolving Insolvency)

(इसमें 11वाँ मानक श्रमिकों को नियुक्त करना (Employing Workers) है, लेकिन इसको स्कोर के अंतर्गत नहीं मापा जाता है)


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Aurora

संदर्भ

नासा ने सूर्य और पृथ्वी के ऑरोरा (Aurora) के अन्वेषण के लिए दो हेलियोफिजिक्स मिशनों (Heliophysics Missions) को अनुमोदित किया है. ये मिशन सूर्य और पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष के मौसम को निर्धारित करने वाली प्रणाली का अन्वेषण करेंगे. इससे वैज्ञानिकों को सूर्य और पृथ्वी को एक अंतर्सबंधित प्रणाली के रूप में समझने में सहायता प्राप्त होगी.

Aurora

एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट हाई-थ्रूपुट स्पेक्ट्रोस्कोपिक टेलीस्कोप (Extreme Ultraviolet High-Throughput Spectroscopic Telescope: EUVST) मिशन

  • EUVST एक सौर टेलीस्कोप है. इसके अंतर्गत यह अध्ययन किया जाएगा कि किस प्रकार सूर्य के वातावरण द्वारा सौर पवनें निर्मुक्त होती हैं और सौर सामग्री का विस्फोट होता है.
  • इस मिशन को सोलर-सी (Solar-C) के रूप में भी जाना जाता है. इस मिशन का नेतृत्व जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी द्वारा किया जा रहा है.
  • सौर पवनें (Solar wind), प्लाज्मा (आवेशित कणों का एक संग्रह) के सूर्य के कोरोना (सबसे बाह्य वातावरण) से बाहर की ओर विस्तारित होने से निर्मित होती है.
  • सौर पवनें संचार, नेवीगेशन प्रणाली और उपग्रहों को बाधित कर सकती हैं.
  • इलेक्ट्रोजेट जीमैन इमेजिंग एक्सप्लोरर (Electrojet Zeeman Imaging Explorer: EZIE) मिशन
  • EZIE मिशन पृथ्वी के वायुमंडल में ऑरोरा को पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से जोड़ने वाली विद्युत्‌ धाराओं का अध्ययन करेगा.
  • मैग्नेटोस्फीयर (magnetosphere), पृथ्वी के आस-पास के अंत्तरिक्ष का क्षेत्र है, जहाँ अन्तर्ग्रहीय अंतरिक्ष की बजाय पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का वर्चस्व है.
  • मैग्नेटोस्फियर सौर पवनों की पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ अंतक्रिया से निर्मित होता है.
  • कुछ अन्य सौर मिशन: यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का सोलर ऑर्बिटर, नासा का पार्कर सोलर प्रोब, भारत का आदित्य-एल 1 मिशन आदि.

औरोरा क्या है?

  • औरोरा आकाश में चमकने वाला एक प्रकाशपुंज है जो आर्कटिक और अन्टार्कटिक के उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में मुख्यतया देखा जाता है. इसे ध्रुवीय प्रकाशपुंज भी कहा जाता है. यह कभी-कभी मध्य अक्षांशीय क्षेत्र में भी दिख जाता है, परन्तु भूमध्य रेखा पर यह शायद ही कभी दिखता है.
  • यह प्रकाशपुंज 100 से लकर 400 किलोमीटर की ऊँचाई पर जन्म लेता है.

रंग

औरोरा सामान्यतः दुधिया हरे रंग का होता है. पर यह लाल, नीला, बैंगनी, गुलाबी और उजला भी होता है. इस ज्योतिपुंज का आकार भिन्न-भिन्न होता है और लगातार बदलता भी रहता है.

औरोरा क्यों होता है?

  • औरोरा की उत्पत्ति यह बतलाती है कि हमारी पृथ्वी विद्युतीय रूप से सूर्य से जुड़ी हुई है. यह ज्योतिपुंज सूर्य की ऊर्जा से पैदा होता है और पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में फंसे विद्युत-आविष्ट कणों से इसे ईंधन प्राप्त होता है.
  • अन्तरिक्ष के तीव्र गति से चलायमान इलेक्ट्रानों और धरती के ऊपरी वायुमंडल में स्थित ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन के बीच के टक्कर से यह उत्पन्न होते हैं.
  • पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र और इसके द्वारा नियंत्रित अन्तरिक्षीय क्षेत्र से आने वाले इलेक्ट्रान अपनी उर्जा को ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन के अणुओं और परमाणुओं में स्थानांतरित कर देते हैं और उन्हें आविष्ट कर देते हैं.
  • जब गैस अपनी सामान्य स्थिति में लौटते हैं, तो उनसे फोटोन निकलते हैं और प्रकाश के रूप में ऊर्जा के छोटे-छोटे विस्फोट होते हैं.
  • जब चुम्बकीय क्षेत्र से आकर वायुमंडल पर आक्रमण करने इलेक्ट्रानों की संख्या बहुत अधिक होती है, तो ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से इतना सारा प्रकाश उत्पन्न हो जाता है जो आँख से भी देखा जा सकता है. यह दृश्य अत्यंत मनोहारी होता है.

औरोरा का रंग अलग-अलग क्यों होता है?

  • किसी औरोरा का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि ऑक्सीजन अथवा नाइट्रोजन कौन-सा गैस इलेक्ट्रानों से आविष्ट हुआ है अथवा कितना आविष्ट हुआ है. ये रंग इसपर भी निर्भर होते हैं कि इलेक्ट्रान कितनी तेजी से चल रहे हैं अथवा टकराने के समय इनमें कितनी ऊर्जा है.
  • अधिक ऊर्जा वाले इलेक्ट्रानों से ऑक्सीजन हरा रंग छोड़ता है जोकि औरोरा ज्योतिपुन्जों का सबसे परिचित रंग है. कम ऊर्जा वाले इलेक्ट्रानों से लाल प्रकाश उत्पन्न होता है. नाइट्रोजन से सामान्यतः नीला प्रकाश होता है.
  • इन रंगों के सम्मिश्रण से औरोरा का रंग बैंगनी, गुलाबी और श्वेत हो जाता है.
  • ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से पराबैंगनी प्रकाश भी निकलता है जिसका पता उपग्रहों में लगे विशेष कैमरों से चल सकता है.

प्रभाव

  • औरोरा के चलते संचार, रेडियो और बिजली की लाइनें प्रभावित हो जाती हैं.
  • यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इस पूरी प्रक्रिया में सूर्य से निकलने वाले सौर पवन का भी हाथ होता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

सौर कलंक (Sunspots):  ये सूर्य के प्रकाश मंडल की अस्थायी घटनाएं हैं. जब सूर्य के किसी भाग का ताप अन्य भागों की तुलना में कम हो जाता है तो धब्बे के रूप में दिखता है, इसे सौर कलंक कहते हैं. इस धब्बे का जीवनकाल कुछ घंटे से लेकर कुछ सप्ताह तक होता है.

सौर प्रज्वाल (solar flare): यह सूरज की सतह के किसी स्थान पर अचानक बढ़ने वाली चमक को कहते हैं. यह प्रकाश वर्णक्रम के बहुत बड़े भाग के तरंगदैर्घ्यों (वेवलेन्थ) पर उत्पन्न होता है. सौर प्रज्वाल में कभी-कभी कोरोना द्रव्य उत्क्षेपण (coronal mass ejection) भी होता है जिसमें सूरज के कोरोना से प्लाज़्मा और चुम्बकीय क्षेत्र बाहर फेंक दिये जाते हैं. यह सामग्री तेज़ी से सौर मंडल में फैलती है और इसके बादल बाहर फेंके जाने के एक या दो दिन बाद पृथ्वी तक पहुँच जाते हैं. इनसे अंतरिक्ष यानों पर दुष्प्रभाव के साथ-साथ पृथ्वी के आयनमंडल पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जिस से दूरसंचार प्रभावित होने की सम्भावना बनी रहती है.


Prelims Vishesh

राष्ट्रीय शेयर बाजार (National Stock Exchanges)– राष्ट्रीय शेयर बाजार की स्थापना 1992 को हुई. इसकी सिफारिश 1991 में फेर्वानी समिति (M J Pherwani Committee) ने की थी. इसका मुख्यालय दक्षिण मुंबई वर्ली में है.

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE)– यह एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है. इसकी स्थापना 1875 ई. में स्टॉक एक्सचेंज मुंबई के नाम से की गई थी जिसे 2002 में बदलकर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) कर दिया गया.

ओवर दी काउंटर एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (OTCEI)– इसकी स्थापना नवम्बर, 1992 में मुंबई में की गयी. इसकी स्थापना भारत में सर्वप्रथम ऑनलाइन ट्रेडिंग सुविधा सम्पन्न Computerized Exchange के रूप में हुई. इसकी अवधारणा  USA के स्टॉक एक्सचेंज “NASDAQ” के आधार पर की गयी. जिन लघु या मध्यम औद्योगिक इकाइयों  का पूँजी स्तर 30 लाख रु. से 25 करोड़ रु. हो, उन्हीं को OTCEI में सूचीबद्ध किया जाता है.


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