Sansar डेली करंट अफेयर्स, 14 August 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 14 August 2021


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : The caste census debate

संदर्भ

देश-भर में विपक्ष, एनडीए के सहयोगी व क्षेत्रीय दलों द्वारा जातिआधारित जनगणना की माँग की जा रही है. उनके अनुसार इस प्रकार के आँकड़े, उनकी सरकार को “अन्य पिछड़ा वर्ग” (OBC) समुदायों के बीच वास्तविक जरूरतमंदों के लिए नीतियाँ तैयार करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं.

पृष्ठभूमि

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार ने नीतिगत तौर पर, जनगणना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अतिरिक्त अन्य समुदायों की जाति आधारित गणना नहीं करने का निर्णय लिया था.

जातिगत जनगणना को लेकर समस्याएँ

  • जातिगत जनगणना को लेकर यह समस्या रहती है कि इसके आँकड़े प्रदर्शित करने के पश्चात् कुछ समुदाय अपने लिए अधिक या अलग कोटा की माँग रख सकते हैं जिससे अन्य वर्गों में नाराजगी हो सकती है.
  • राजनीतिक दल मतदाताओं की जातिगत पहचान को प्रोत्साहन देंगे, जिससे जाति व्यवस्था को महत्त्व मिलेगा तथा समाज के अलग-अलग वर्गों में खाई और भी गहरी हो सकती है.

लाभ

  • इससे जनसंख्या में विभिन्‍न जातियों के अनुपात एवं जनसंख्या के अनुसार उनके सामाजिक, आर्थिक स्तर एवं सरकारी नौकरियों में उनके अनुपात के विषय में पता चलता है.
  • ये आँकड़े ऐसे वर्गों के लिए लक्षित योजनाएँ चलाने, नीतियाँ बनाने में सहायक सिद्ध होंगे.

सामाजिक-आर्थिक और जातिगत जनगणना (SECC) 2011 के बारे में

वर्ष 1931 के बाद देश में पहली बार वर्ष 2011 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विभिन्‍न समुदायों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में आंकड़े प्राप्त करने के लिए “सामाजिक- आर्थिक और जातिगत जनगणना” (Socio-Economic and Caste Census – SECC) करवाई थी. हालांकि, सरकार द्वारा मात्र ग्रामीण और शहरी परिवारों में लोगों की आर्थिक स्थिति का विवरण जारी किया गया था. जाति से सम्बंधित आँकड़े अभी तक निर्गत नहीं किए गए हैं.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : Vehicle Scrappage Policy

संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में वाहन स्क्रैपिंग नीति का प्रारम्भ किया है. यह नीति पुराने और अनफिट वाहनों के पुनर्चक्रण पर लक्षित है. इससे पुराने वाहनों को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जायेगा तथा देश की सड़कों पर नई तकनीक वाले, पर्यावरण अनुकूल वाहन प्रयोग में लाये जा सकेंगे. सरकार के अनुसार, इस नीति के अंतर्गत 10,000 निवेश आयेंगे तथा ढेर सारी रोजगार का सृजन होगा. ज्ञातव्य है कि केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नेतिन गडकरी ने मार्च 2021 वाहन स्क्रैपिंग नीति की घोषणा की थी.

वाहन स्क्रैपिंग नीति के प्रमुख प्रावधान

  • वाणिज्यिक वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र न मिल पाने की स्थिति में 15 वर्ष के पश्चात् और निजी वाहनों को 20 वर्षों के बाद अपंजीकृत कर दिए जाने का प्रावधान है.
  • वाहनों के लिए उनके प्रारम्भिक पंजीकरण की तिथि से 15 वर्ष की अवधि सम्पूर्ण हो जाने के बाद फिर से पंजीकरण कराने के लिए बढ़ा हुआ शुल्क देना होगा.
  • इस योजना के अंतर्गत वाहन नष्ट करने के पंजीकृत केन्द्रों के माध्यम से पुराने और अनुपयुक्त वाहनों के स्वामियों को रोड टैक्स में छूट, नए वाहनों के खरीद पर छूट जैसे कई आकर्षक प्रोत्साहन दिए जाएँगे.
  • वाहन नष्ट करने का केंद्र पुराने वाहन के कबाड़ का मूल्य निर्धारित करेगा जो किसी नए वाहन की शोरूम से बाहर निकलते समय देय मूल्य का करीब 4-6% होगा.
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय देशभर में वाहनों को नष्ट करने के लिए पंजीकृत सुविधाएँ (Registered Vehicle Scrapping Facility – RVSF) स्थापित करने को को बढ़ावा देगा और इसके लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को प्रोत्साहित किया जाएगा.

अक्टूबर 2021 तक फिटनेस केन्द्रों और स्क्रैपिंग केन्द्रों के लिए नियम जारी कर दिए जायेंगे. सरकारी एवं लोक उपक्रमों के 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को स्क्रैप (नष्ट) करने की शुरुआत अप्रैल 2022 से हो जाएगी. भारी वाणिज्यिक वाहनों की फिटनेस की अनिवार्य जाँच 01 अप्रैल 2023 से होगी जबकि अन्य श्रेणियों में अनिवार्य जाँच जून 2024 से होगी.

नई नीति से जुडी समस्याएँ

  1. ट्रकों के लिए सीमित प्रोत्साहन और कम कीमत देने वाली अर्थनीति.
  2. चिह्नित करने योग्य अन्य श्रेणियों के वाहनों की कम संख्या.
  3. 15 साल पुरानी एक शुरुआती श्रेणी की छोटी कार को स्क्रैप करने से लगभग 70,000 रुपए प्राप्त होंगे, जबकि इसे बेचने पर लगभग 95,000 रुपए मिल सकते हैं. इस कारण स्क्रैपिंग अनाकर्षक बन जाती है.

समय की माँग

इन सब कारणों को देखते हुए, स्क्रैपिंग नीति को पूरी तरह से लागू करने के लिए, हमें ‘जिन वाहनों का जीवन समाप्त हो चुका है, अर्थात् ‘एंड ऑफ़ लाइफ व्हीकल्स’ (ELV) को सड़क से हटाने के संदर्भ में एक व्यापक योजना तैयार करनी चाहिए. माल-भाड़ा ट्रांसपोर्टरों को एक पर्याप्त एवं उत्साही वित्तीय सहायता दिए जाने की जरूरत है. हालाँकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि जब तक पुराने वाहनों के बेड़े सड़क से नहीं हटाए जाएँगे, तब तक  बीएस-VI (BS-VI) वाहन लागू करने का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पाएगा.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : UNFCCC, Conference of theParties (CoP) 26

संदर्भ

यूनाइटेड किंगडम के सांसद एवं CoP 26 के नामित अध्यक्ष आलोक शर्मा इस महीने भारत का दौरा करेंगे. यूनाइटेड किंगडम, नवंबर 2021 में ग्लासगो में CoP 26 में सफल परिणाम सुनिश्चित करने के लिए भारत में भागीदारों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क (UNFCCC) की सालाना बैठक को कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज (CoP) के नाम से जाना जाता है. हर साल CoP के जरिये सभी देश जलवायु परिवर्तन पर चर्चा एवं रणनीति पर निर्णय करते हैं. क्योटो प्रोटोकोल एवं पेरिस समझौते जैसे महत्त्वपूर्ण निर्णय इन्हीं बैठकों में अपनाये गये. पिछले CoP 25 का आयोजन वर्ष 2019 में सेटियागो (चिली) में किया गया. आने वाला CoP26 ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में 31 अक्टूबर से 12 नवंबर 2021 तक होना प्रस्तावित है.

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क (UNFCCC)

यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है. यह समझौता जून, 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के दौरान किया गया था.

अंतराष्ट्रीय पहलें

गोथेनबर्ग प्रोटोकॉल

इसका लक्ष्य अम्लीकरण, सुपोषण और भू-स्तरीय ओजोन को कम करना है और यह कन्वेंशन ऑन लॉन्ग-रेंज ट्रांस बाउंड्री एयर पॉल्यूशन का भाग है. इसका अन्य उद्देश्य मानव गतिविधियों के चलते होने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), अमोनिया (NH3), वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) और कणिकीय पदार्थों (PM) के उत्सर्जन को नियंत्रित और कम करना.

क्योटो प्रोटोकॉल

इसका उद्देश्य मीथेन (CH4), नाइट्रस ऑक्साइड (N2O), हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFC), परफ्लोरोकार्बन (PFC), सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF6) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) जैसी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करना है.

इंटरनेशनल नाइट्रोजन इनिशिएटिव (INI)

यह खाद्य उत्पादन में नाइट्रोजन की लाभकारी भूमिका को इष्टतम करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम है. इसकी स्थापना 2003 में साइंटिफिक कमिटी ऑफ़ द एनवायरनमेंट (SCOPE) तथा इंटरनेशनल जीओस्फीयर-बायोस्फीयर प्रोग्राम (IGBP) की स्पोंसरशिप के अंतर्गत की गई थी.

जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु भारत के प्रयास

जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC): इसे वर्ष 2008 में शुभारंभ किया गया था. इस कार्य योजना में मुख्यतः 8 मिशन शामिल हैं-

  1. राष्ट्रीय सौर मिशन
  2. विकसित ऊर्जा दक्षता के लिये राष्ट्रीय मिशन
  3. सुस्थिर निवास पर राष्ट्रीय मिशन
  4. राष्ट्रीय जल मिशन
  5. सुस्थिर हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र हेतु राष्ट्रीय मिशन
  6. हरित भारत हेतु राष्ट्रीय मिशन
  7. सुस्थिर कृषि हेतु राष्ट्रीय मिशन
  8. जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC):भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के घोषित लक्ष्य को 2030 तक प्राप्त करना है.
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संधि (आईएसए):आईएसए भारत और फ्रांस द्वारा 30 नवम्बर, 2015 को पेरिस में प्रारम्भ किया गया प्रथम संधि आधारित अंतर्राष्ट्रीय अंतरसरकारी संगठन है जो 6 दिसंबर, 2017 को अस्तित्व में आया.
  • वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड’ परियोजना:आईएसए के साथ ही भारत ने “वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड’ (OSOWOG) परियोजना के अंतर्गत अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की एक पहल शुरू की गयी है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु वैश्विक प्रयास

  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC):यह जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैज्ञानिक आकलन करने हेतु संयुक्त राष्ट्र का एक निकाय है.
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC):यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है. यह समझौता जून, 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के दौरान किया गया था.
  • पेरिस समझौता:वर्ष 2015 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के साथ संपन्न पेरिस समझौते को ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिये एक ऐतिहासिक समझौते के रूप में मान्यता प्राप्त है.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure

Topic : Fame India Scheme

संदर्भ

कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) ने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट संग्रहण, फ्रेट लोडर्स, खाद्य और वैक्सीन परिवहन तथा यात्री ऑटो में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (E3W) का उपयोग करने के लिए E3W के लिए मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं.

रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज और वैक्सीन ड्राइव के लिए E3W को तैनात करने की यह पहल भारत की COVID रिकवरी को हरा-भरा और पर्यावरण के अनुकूल बना देगी.

सीईएसएल इन वाहनों को उन संस्थाओं को पट्टे पर देगा जो ऐसी लीजिंग सेवाओं का लाभ उठाना चाहती हैं. CESL इन E3W को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी भी इकाई को एकमुश्त खरीद में पुनर्विक्रय के लिए उपलब्ध कराएगा.

इसके अतिरिक्त, सभी E3W को भारत में इलेक्ट्रॉनिक (हाइब्रिड) वाहनों का तीव्र अंगीकरण और विनिर्माण (फेम-2/FAME-2) चरण-2 नीति की आवश्यकताओं का अनुपालन करना होगा.

CESL

  • कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की एक सहायक कंपनी है जो भारत सरकार के बिजली मंत्रालय के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का एक संयुक्त उद्यम है.
  • सीईएसएल स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा प्रदान करने पर केंद्रित है.
  • CESL को यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के स्मार्ट पावर फॉर एडवांसिंग रिलायबिलिटी एंड कनेक्टिविटी (स्पार्क / SPARC) कार्यक्रम द्वारा समर्थन प्रदान किया गया है.
  • यह विद्युत्‌ वितरण इकाइयों के प्रदर्शन में सुधार व आधुनिकीकरण हेतु विद्युत मंत्रालय और USAID का एक तीन वर्षीय द्विपक्षीय कार्यक्रम है.

फेम इंडिया योजना

FAME India योजना का पूरा नाम है – Faster Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles in India अर्थात् भारत में बिजली से चलने वाले वाहनों को अपनाने और उन्हें बनाने में तेजी लाने की योजना.

ई-गतिशीलता के लिए FAME योजना :- FAME योजना 1 अप्रैल, 2015 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य था बिजली और संकर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के निर्माण के तकनीक को बढ़ावा देना और उसकी सतत वृद्धि को सुनिश्चित करना. इस योजना के अंदर सार्वजनिक परिवहन में बिजली की गाड़ियों (EVs) के प्रयोग को बढ़ावा देना है और इसके लिए बाजार और माँग का सृजन करना है. इसके तहत वाहन परिक्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी जायेगी.

  • इस योजना का उद्देश्य देश में बिजली से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा देना है.
  • यह योजना 1 अप्रैल, 2019 से आगामी तीन वर्षों तक चलेगी और इसके लिए 10,000 करोड़ रु. की बजटीय व्यवस्था की गई है.
  • यह योजना FAME India I (1 अप्रैल, 2015 में अनावृत) का विस्तारित संस्करण है.

फेम-इंडिया योजना फेज II के उद्देश्य

सार्वजनिक परिवहन में बिजली से चलने वाली गाड़ियों का अधिक से अधिक प्रयोग सुनिश्चित करना.


Prelims Vishesh

Operation Blue Freedom :-

  • हाल ही में, भारत सरकार ने दिव्यांगजनों की एक टीम को सियाचिन ग्लेशियर पर चढ़ने की अनुमति दी है. देश-भर से चुने हुए ये दिव्यांगजन विश्व के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र तक पहुंचने के लिए दिव्यांगजनों की सबसे बड़ी टीम का एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए कुमार चौकी (सियाचिन ग्लेशियर) तक एक अभियान आरंभ करेंगे.
  • इस अग्रगामी अभियान “ऑपरेशन ब्लू फ्रीडम” की सफलता दिव्यांगजनों को सशक्त बनाने में एक अग्रणी देश के रूप में भारत को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित करेगी तथा अन्य देशों के लिए अनुकरण करने के लिए एक मानदंड स्थापित करेगी.

Stagflation :-

  • हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीति दर को 4% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है. यह निर्णय मुद्रास्फीति पूर्वानुमान में वृद्धि के बावजूद मुद्रास्फीतिजनित मंदी की दुविधा को दर्शाते हुए लिया गया है.
  • कीमतों में वृद्धि के साथ आर्थिक संवृद्धि में गिरावट स्टैगफ्लेशन की विशेषता है.
  • इसे अर्थव्यवस्था में ऐसी स्थिति के रूप में वर्णित किया जाता है जहाँ विकास दर धीमी हो जाती है, बेरोज़गारी का स्तर लगातार उच्च बना रहता है और फिर भी मुद्रास्फीति या मूल्य स्तर एक ही समय में उच्च रहता है.
  • सामान्यतः निम्न संवृद्धि दर की स्थिति में, केंद्रीय बैंक और सरकार माँग का सृजन करने के लिये उच्च सार्वजनिक खर्च और कम ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध करवाकर अर्थव्यवस्था को उत्तेजित करने की कोशिश करते हैं.
  • ये उपाय भी कीमतों में बढ़ोतरी करते हैं और मुद्रास्फीति का कारण बनते हैं. इसलिये इन उपायों/साधनों को तब नहीं अपनाया जा सकता है जब मुद्रास्फीति पहले से ही उच्च स्थिति में हो, परिणामस्वरूप निम्न संवृद्धि और उच्च मुद्रास्फीति (स्टैगफ्लेशन) के जाल से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.
  • इसका एकमात्र समाधान उत्पादकता में वृद्धि करना है जो मुद्रास्फीति में वृद्धि किये बिना ही विकास को प्रोत्साहन देगा.

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