Sansar डेली करंट अफेयर्स, 13 January 2022

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Sansar Daily Current Affairs, 13 January 2022


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे.

Topic : National Youth Day

संदर्भ

12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन आता है. इस दिन को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ (National Youth Day) के रूप में मनाया जाता है. इसकी शुरुआत वर्ष 1984 में हुई थी. इसका मुख्य उद्देश्य, देश का भविष्य समझे जाने वाले युवाओं में तर्कसंगत सोच को प्रोत्साहित करना है.

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विवेकानंद कौन थे?

  • विवेकानंद का मूलनाम नरेन्द्रनाथ दत्त था.
  • उनका जन्म कलकत्ता में जनवरी 12, 1863 को हुआ था.
  • वे राम कृष्ण परमहँस के परमभक्त थे.
  • उन्होंने शिकागो में 1893 में सम्पन्न विश्व धर्म परिषद् में प्रवचन दिया था.
  • संन्यास के बाद उनका नाम सच्चिदानंद रखा गया था परन्तु 1893 में खेतड़ी के महाराजा अजित सिंह के कहने पर उन्होंने अपना नाम विवेकानंद रख लिया.
  • उन्हें पश्चिम को योग और वेदान्त से परिचित कराने का श्रेय दिया जाता है.
  • उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन स्थापित किया जिसका उद्देश्य दरिद्रतम और तुच्छतम लोगों तक उदात्त विचार पहुँचाना था.
  • 1899 में बेलूर मठ बनाया और वहीं स्थायी रूप से रहने लगे.
  • उन्होंने राज योगज्ञान योग और कर्म योग आदि पुस्तकें लिखीं.
  • उन्होंने नव वेदान्त की शिक्षा दी जिसमें भारत की आध्यात्मिकता के साथ-साथ पश्चिम के भौतिक प्रगतिवाद का सम्मिश्रण था.
  • नेताजी सुभाष चन्द्र बोस उनको आधुनिक भारत का निर्माता बतलाते थे.

मेरी राय – मेंस के लिए

स्वामी विवेकानंद ने भारतीय समाज में दलितों एवं महिलाओं की दयनीय स्थिति की निन्दा की और समाज कल्याण के लिये इनका उत्थान आवश्यक बताया. उन्होंने इनके उत्थान के लिये शिक्षा को सबसे महत्त्वपूर्ण साधन माना. उनका मत था कि जिस राष्ट्र में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, वह राष्ट्र और समाज कभी महान नहीं बन सकता. शिक्षा के माध्यम से ही स्त्री व दलितों को शक्तिशाली, भयविहीन तथा आत्म-सम्मान के साथ जीने के काबिल बनाया जा सकता है.

स्वामी विवेकानन्द ने दरिद्र (गरीब) में ही नारायण देखा (दरिद्र नारायण) और उसके कल्याण में ही ईश्वर की सेवा माना है. उस ‘दरिद्र नारायण’ की अवधारणा द्वारा उन्होंने मानवतावाद को धार्मिकता से जोड़ दिया. शिकागो में दिये गए अपने ऐतिहासिक भाषण में भी उन्होंने सार्वभौमिक भ्रातृभाव को सभी धर्मों का सार तत्त्व कहा था.

स्वामी विवेकानन्द सदैव मनुष्य को कर्मशील बने रहने के लिये प्रेरित करते थे. उनका मत था कि प्रत्येक मनुष्य को अपना कर्म पूरी शक्ति तथा एकाग्रता के साथ करना चाहिये. उनका एक प्रसिद्ध कथन है- ‘प्रत्येक कार्य में अपनी समस्त शक्ति का प्रयोग करो, सभी मरेंगे साधु या असाधु, धनी या दरिद्र, चिरकाल तक किसी का शरीर नहीं रहेगा. अतएव उठो, जागो और तब तक रूको नहीं जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाए’.

इस प्रकार, यह विश्वासपूर्वक कहा जा सकता है कि यद्यपि स्वामी विवेकानन्द वेदान्त के व्याख्याता एवं एक आध्यात्मिक गुरु थे परंतु उनके चिंतन में दलितों, महिलाओं व गरीबों के उत्थान तथा ‘कर्म की प्रधानता’ का विचार विशेष रूप से उपस्थित था.

उनके द्वारा रचित पुस्तकें:

‘राज योग’, ‘ज्ञान योग’, ‘कर्म योग’ उनके द्वारा लिखी गयी कुछ पुस्तकें हैं.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

International Youth Day :-

  • अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.
  • इसका उद्देश्य युवाओं से सम्बंधित सांस्कृतिक व वैधानिक मुद्दों की ओर ध्यान केन्द्रित करना है.
  • इस वर्ष की थीम है – “Transforming Food Systems: Youth Innovation for Human and Planetary Health.”
  • अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसम्बर, 1999 में की गयी थी.
  • उल्लेखनीय है कि भारत में 25 करोड़ युवा जनसंख्या है, जो विश्व की कुल युवा जनसंख्या का 21% है, और देश की कुल जनसंख्या का 18% है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : Regional Comprehensive Economic Partnership – RCEP

संदर्भ

हाल ही में, दक्षिण कोरिया ने ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (Regional Comprehensive Economic Partnership – RCEP) में भारत की अनुपस्थिति पर खेद जताया है और नई दिल्ली के इस समझौते में फिर से शामिल होने की आशा व्यक्त की है.

RCEP का कार्यान्वयन

‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी’ (RCEP) समझौता 1 जनवरी, 2022 से प्रभावी हो चुका है. इसके साथ ही, यह ‘व्यापार की मात्रा’ के मामले में विश्व का सबसे बड़ा ‘मुक्त व्यापार क्षेत्र’ समझौता बन गया है.

RCEP में भारत क्यों शामिल नहीं हुआ?

भारत, ‘क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी’ (RCEP) से मुख्यतः चीन द्वारा उत्पादित सस्ते सामान के देश में प्रवेश करने संबंधी चिंताओं के कारण अलग हो गया था. चीन के साथ भारत का व्यापार असंतुलन पहले से काफी अधिक है. इसके अलावा, यह समझौता ‘सेवाओं को पर्याप्त रूप से खुला रखने में विफल’ रहा था.

RCEP  में भारत की मौजूदगी की जरूरत

  1. बढ़ती हुई वैश्विक अस्थिरता के दौर में एक समावेशी संरचना का निर्माण करने हेतु क्षेत्र की सहायता करने में भारत को ‘एक महत्त्वपूर्ण भूमिका’ अदा करनी थी.
  2. इस प्रकार के व्यापारिक समझौते, भारतीय कंपनियों को बड़े बाजारों में भी अपनी ताकत दिखाने के लिए एक मंच प्रदान करते हैं.
  3. इसके अतिरिक्त, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ता हुआ तनाव, क्षेत्र के लिए ‘गंभीर चिंता’ का विषय है, जो कि महामारी के कारण और भी सघन हो गया है.

RCEP से सम्बंधित कुछ तथ्य

  • RCEP आसियान केदस सदस्य देशों (ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम) तथा आसियान से सम्बद्ध अन्य छ: देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड) के लिए प्रस्तावित है.
  • RCEP के लिए वार्ताएँ कम्बोडिया मेंनवम्बर 2012 में आयोजित आसियान के शिखर सम्मलेन में औपचारिक रूप आरम्भ की गई थीं.
  • RCEP का लक्ष्य हैअधिकांश शुल्कों और गैर-शुल्क अड़चनों को समाप्त कर वस्तु-व्यापार को बढ़ावा देना. अनुमान है कि ऐसा करने से क्षेत्र के उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर गुणवत्ता युक्त उत्पादनों के अधिक विकल्प प्राप्त हो सकेंगे. इसका एक उद्देश्य निवेश से सम्बंधित मानदंडों को उदार बनाना तथा सेवा व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी है.
  • हस्ताक्षरित हो जाने पर RCEP विश्व का सबसे बड़ा निःशुल्क व्यापार हो जायेगा. विदित हो कि इस सम्बद्ध16 देशों की GDP $50 trillion की है और इन देशों में साढ़े तीन अरब लोग निवास करते हैं.
  • भारत की GDP-PPP $9.5 trillion की है और जनसंख्या एक अरब तीस लाख है. दूसरी ओर चीन की GDP-PPP $23.2 trillion की है और जनसंख्या एक अरब 40 लाख है.

आगे की चुनौतियां

  • संयुक्त राज्य अमेरिका की अनुपस्थिति में, बीजिंग को इस क्षेत्र में ‘आर्थिक विकास’ के चालक के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करने का अवसर मिलेगा.
  • आर्थिक लाभों को मूर्त रूप लेने में लंबा समय लगेगा.
  • जहाँ बड़ी एशियाई अर्थव्यवस्थाएं अधिकांश लाभ उठाएंगी, वहीं RCEP के तहत ASEAN में शामिल छोटे देशों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, क्योंकि इस व्यापार समझौते में इन देशों के प्रमुख उद्योगों को कवर नहीं किया गया है.
  • एशिया में सबसे कम विकसित देश – कंबोडिया, लाओस, म्यांमार – वर्तमान में ‘आसियान समूह’ के भीतर होने वाले व्यापार से लाभान्वित होते हैं. RCEP के मध्य व्यापार से इन देशों के व्यापार को चोट पहुँच सकती है.
  • RCEP समझौते के तहत, छोटे आसियान देशों को अपने ‘व्यापार वरीयता कार्यक्रमों’ से होने वाले कुछ लाभों को गंवाना पड़ सकता है. अभी तक ये देश, दक्षिण कोरिया और जापान सहित आसियान समूह के बाहर टैरिफ-मुक्त उत्पादों का निर्यात किया करते थे.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, विकास से संबंधित मुद्दे, वन संसाधन.

Topic : India State of Forest Report 2021

संदर्भ

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भुपेंद्र यादव ने 13 जनवरी को भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) द्वारा तैयार ‘इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2021’ निर्गत किया.

इसके अनुसार देश का कुल वन और वृक्षों से भरा क्षेत्र 80.9 मिलियन हेक्टेयर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 24.62 प्रतिशत है. वर्ष 2019 के आकलन की तुलना में देश के कुल वन और वृक्षों से भरे क्षेत्र में 2,261 वर्ग किमी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

अन्य प्रमुख बिंदु

  • क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र मध्य प्रदेश राज्य में है. इसके बाद अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र हैं.
  • कुल भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के रूप में वन आवरण के मामले में, शीर्ष पांच राज्य मिजोरम (84.53%), अरुणाचल प्रदेश (79.33%), मेघालय (76.00%), मणिपुर (74.34%) और नगालैंड (73.90%) हैं.
  • वनक्षेत्र में अधिकतम बढ़ोतरी आंध्र प्रदेश (647 वर्ग किमी) में दर्ज की गई, इसके बाद तेलंगाना (632 वर्ग किमी) और ओडिशा (537 वर्ग किमी) का स्थान है.
  • 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का 33 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र वनों से पटा है. इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से पांच राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लक्षद्वीप, मिजोरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में 75 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र हैं, जबकि 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों अर्थात्‌ मणिपुर, नगालैंड, त्रिपुरा, गोवा, केरल, सिक्किम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव,असम,ओडिशा में वन क्षेत्र 33 प्रतिशत से 75 प्रतिशत के बीच है.
  • देश के बनों में कुल कार्बन स्टॉक 4 मिलियन टन की बढ़ोतरी के साथ 7,204 मिलियन टन होने का अनुमान है.
  • देश में कुल मैंग्रोव क्षेत्र 4,992 वर्ग किमी है, इसमें 17 वर्ग किमी क्षेत्र की वृद्धि दर्ज की गई. मैंग्रोव क्षेत्र में वृद्धि दिखाने वाले शीर्ष तीन राज्य ओडिशा (8 वर्ग किमी), इसके बाद महाराष्ट्र (4 वर्ग किमी) और कर्नाटक (3 वर्ग किमी) हैं.

आईएसएफआर 2021 की अन्य महत्त्वपूर्ण विशेषताएं

  • देश के वन आवरण का द्विवार्षिक मूल्यांकन जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वनावरण और वनावरण में बदलावों की निगरानी करने के लिए 23.5 मीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन 1:50,000 की व्याख्या के साथ भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रह डेटा (रिसोर्ससैट-11) से प्राप्त एलआईएसएस-III डेटा की व्याख्या पर आधारित है.
  • आईएसएफआर 2021 में, एफएसआई ने भारत के टाइगर रिजर्व, कॉरिडोर और शेर संरक्षण क्षेत्र में वन आवरण के आकलन से संबंधित एक नया अध्याय शामिल किया है. इसके अलावा इसमें एफएसआई की नई पहल के तहत एक नया अध्याय जोड़ा गया है जिसमें “जमीन से ऊपर बायोमास” का अनुमान लगाया गया है.
  • एफएसआई ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स) पिलानी के गोवा कैंपस के सहयोग से ‘भारतीय वनों में जलवायु परिवर्तन हॉटस्पॉट की मैपिंग’ पर आधारित एक अध्ययन किया है.
  • रिपोर्ट में राज्य/केंद्र शासित क्षेत्र के अनुसार विभिन्‍न मापदंडों पर भी जानकारी शामिल है. रिपोर्ट में पहाड़ी, आदिवासी जिलों और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में वनावरण पर विशेष विषयगत जानकारी भी अलग से दी गई है.

Prelims Vishesh

Indu Malhotra Committee :-

  • सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन की जांच के लिए अपने पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ​​के तहत एक जांच समिति नियुक्त की है.
  • यह समिति इस बात की जांच करेगी कि सुरक्षा उल्लंघन के लिए कौन जिम्मेदार है, तथा प्रधानमंत्री एवं अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर सुझाव देगी.

Broadcast Audience Research Council – BARC :-

  • ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) द्वारा अपनी प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल को संशोधित किए जाने के पश्चात्, समाचार चैनलों के लिए ‘रेटिंग’ दिया जाना फिर से शुरू किया जाएगा. मुंबई पुलिस द्वारा एक निजी चैनल द्वारा रेटिंग से छेड़छाड़ करने के प्रयासों से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ करने के बाद रेटिंग को निलंबित कर दिया गया था.
  • ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council – BARC), विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों और प्रसारण कंपनियों के संयुक्त स्वामित्व वाला एक औद्योगिक निकाय है जिसका प्रतिनिधित्व द इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइज़र्स, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन और एडवरटाइजिंग एजेंसीज़ एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया द्वारा किया जाता है.
  • इसका गठन वर्ष 2010 में किया गया था.
  • सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा 10 जनवरी, 2014 को भारत में टेलीविजन रेटिंग एजेंसियों के लिए नीतिगत दिशानिर्देशों को अधिसूचित किया गया और इन दिशानिर्देशों के तहत जुलाई 2015 में BARC को पंजीकृत किया गया.

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