Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 December 2018

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Sansar Daily Current Affairs, 12 December 2018


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic :  National Pension Scheme

संदर्भ

भारत सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (National Pension Scheme – NPS) में कई परिवर्तन किये हैं.

ये परिवर्तन कौन से हैं?

  • इस योजना के लिए सरकार का योगदान 10% हुआ करता था. अब इसे बढ़ाकर 14% कर दिया गया है.
  • केंद्र सरकार के कर्मचारी पेंशन कोष और निवेश के स्वरूप को अब स्वतंत्र रूप से चुन सकेंगे.
  • राष्ट्रीय पेंशन योजना के अंतर्गत 2004 से 2012 के बीच योगदान की राशि जमा नहीं होने अथवा देर से जमा होने के लिए क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाएगा.
  • वर्तमान में कुछ योजनाओं में, जैसे – सामान्य भविष्य निधि, अंशदायी भविष्य निधि, कर्मचारी भविष्य निधि एवं सार्वजनिक भविष्य निधि जैसी योजनाओं के अंतर्गत 1.5 लाख रु. की राशि तक जमा करने पर आयकर अधिनियम के अनुभाग 80 C के तहत आयकर छूट का लाभ मिलता है. अब यही लाभ राष्ट्रीय पेंशन योजना के टियर – 2 के अन्दर सरकारी कर्मचारियों द्वारा किये गये योगदान पर भी मिलेगी. परन्तु यह राशि तीन वर्षों तक निकाली नहीं जा सकेगी.
  • इस योजना में जमा राशि की सम्पूर्ण निकासी आयकर से मुक्त होगी. योजना से निकलने के समय एकमुश्त निकासी के लिए कर की छूट की सीमा बढ़ाकर 60% कर दी गई है.

निहितार्थ

राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) में किये गये संशोधनों से 36 लाख ग्राहक लाभान्वित होंगे जिनमें 18 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी होंगे. वर्तमान वित्तीय वर्ष में इनसे सरकार पर 2,840 करोड़ रु. का खर्च बैठेगा.

राष्ट्रीय पेंशन योजना क्या है?

  • राष्ट्रीय पेंशन योजना सरकार द्वारा प्रायोजित एक पेंशन की योजना है जिसका आरम्भ जनवरी, 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए हुआ था. किन्तु बाद में 2009 में यह योजना सभी वर्गों के लिए खोल दी गई थी.
  • इस योजना के तहत ग्राहक अपने कार्यकाल में पेंशन खाते में नियमित रूप से योगदान करते हैं. सेवा निवृत्ति के पश्चात् कोई ग्राहक जमा राशि का एक अंश एकमुश्त निकाल सकता है और बची हुई राशि से सेवानिवृत्ति के उपरान्त नियमित आय के लिए एक एन्यूटी (annuity) खरीद सकता है.
  • इस योजना का प्रबंधन पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (Pension Fund Regulatory and Development Authority – PFRDA) करता है.

योजना के लिए अर्हता

  • कोई भी भारतीय नागरिक जो 18 से 60 वर्ष की आयु का है, वह इस योजना में सम्मिलित हो सकता है. केवल एक शर्त है कि वह व्यक्ति अपने ग्राहक को जाने  (Know Your Customer – KYC) के मानकों को पूरा करे.
  • यहाँ तक की एक अप्रवासी भारतीय (NRI) भी इस योजना का लाभ उठा सकता है, किन्तु यदि उसके अप्रवासी भारतीय नागरिक होने दर्जा बदल जाता है तो खाता बंद कर दिया जाएगा.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Global Compact for Migration

संदर्भ

हाल ही में मोरक्को के माराकेच (Marrakech) में सम्पन्न एक अंतर-सरकारी सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र के 164 सदस्य देशों ने प्रव्रजन (migration) के विषय में एक वैश्विक समझौते को अंगीकृत किया. यह समझौता 2030 के सतत विकास एजेंडे के लक्ष्य 10.7 (SDG 10.7) के अनुरूप तैयार किया गया है.

साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रव्रजन नेटवर्क का अनावरण भी किया जिसके माध्यम से समझौते के देश के स्तर पर कार्यान्वयन में सहायता दी जायेगी. इस वैश्विक समझौते का पूरा नाम “सुरक्षित, व्यवस्थित एवं नियमित प्रव्रजन हेतु वैश्विक समझौता“/Global Compact for Safe, Orderly and Regular Migration (GCM) है. यह एक स्वैच्छिक एवं अबाध्यकारी दस्तावेज है जिसमें अंतर्राष्ट्रीय प्रव्रजन के बारे में सिद्धांत एवं उत्कृष्ट प्रथाओं एवं समान ढाँचे का प्रावधान किया गया है.

इसका उद्देश्य देशों के बीच में अनियमित प्रव्रजन को रोकने  लिए नियमित प्रव्रजन के मार्गों को सुदृढ़ करना तथा प्रव्रजकों के मानवाधिकार को सुरक्षित करना है.

विरोध

अमेरिका ने दिसम्बर 2017 में ही समझौते के ऊपर चर्चा से अपने-आप को अलग कर लिया था. सात महीनों के बाद हंगरी भी अलग हो गया था. कुछ अन्य देशों ने समझौते के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. ये देश हैं – डोमिनिकन गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, इज़राइल, पोलैंड, चेक गणराज्य एवं स्लोवाकिया.

हंगरी जैसे देश प्रव्रजन की छूट पर रोक चाहते हैं और वे समझते हैं कि यदि उन्होंने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए तो यह एक तरह से प्रव्रजन को बढ़ावा देना होगा. उन्हें डर है कि इस समझौते को मान लेने से प्रव्रजन एक सामान्य प्रचलन में बदल जाएगा और हो सकता है कि भविष्य में यह एक क़ानून का रूप धारण कर ले.

जिन देशों ने इसे अंगीकृत नहीं किया है, उनकी विशेष चिंता दस्तावेज में मानवाधिकारों के उल्लेख को लेकर है. उनका विचार है कि यदि मानवाधिकार पर बल दिया जाएगा तो उनकी सीमाओं की सुरक्षा पर खतरा हो सकता है.

वैश्विक संधि की आवश्यकता क्यों?

पूरे विश्व में 250 मिलियन आव्रजक हैं जो विश्व की समूची जनसंख्या का 3% होता है. परन्तु यह आव्रजक वैश्विक GDP में 10% योगदान करते हैं. आव्रजक अपने-अपने देश में विशाल धनराशि भेजते हैं जिससे उन देशों के विकास में सहायता मिलती है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic :  PCS 1x System

संदर्भ

हाल ही में जहाजरानी मंत्रालय के मार्गदर्शन में भारतीय पत्तन संघ (Indian Ports Association – IPA) ने पत्तन समुदाय प्रणाली  “PCS1x” नामक एक तकनीक का अनावरण किया है.

महत्त्व

ऐसी संभावना है कि यह मंच भारत के समुद्री व्यापार में क्रांति ला देगा और इसको विश्व में प्रचलित सर्वोत्कृष्ट प्रथाओं की बराबरी में खड़ा कर देगा. साथ ही यह व्यवसाय की सुगमता सूचकांक तथा माल-ढुलाई प्रदर्शन सूचकांक में भारत की रैंकिंग में सुधार लाएगा.

PCS1x क्या है?

  • PCS1x क्लाउड पर आधारित नई पीढ़ी की तकनीक है जिसमें उपभोक्ता के अनुकूल इंटरफेस होता है.
  • इस प्रणाली से समुद्री व्यापार से जुड़े सभी हितधारक एक मंच पर सरलता से जुड़ जाते हैं.
  • यह मंच बहुत-सी मूल्य-वर्धित सेवाएँ प्रदान करता है, जैसे – अधिसूचना ईंजन, कार्य-प्रवाह, मोबाइल ऐप, जहाजों की स्थिति का पता लगाना, उपभोक्ता के लिए बेहतर इंटरफेस तथा पहले से अच्छी सुरक्षा सुविधाएँ. साथ ही जिनको सूचना प्रौद्योगिकी की क्षमता नहीं है, उनके लिए भी इसमें एक डैशबोर्ड होगा.
  • इस मंच की एक और बड़ी विशेषता यह है कि इसमें एक विश्व-स्तरीय आधुनिकतम भुगतान एग्रीगेटर की प्रणाली है जो बैंक-सापेक्ष भुगतान प्रणाली पर निर्भरता को समाप्त कर देता है.
  • इस तकनीक में कागज़ का प्रयोग कम होता है, इसलिए हम कह सकते हैं कि पर्यावरण की दृष्टि से यह एक अच्छी पहल है.
  • इस तकनीक का विकास देश में ही किया गया है और यह Make in India और Digital India का एक हिस्सा है.

भारतीय पत्तन संघ

  • भारतीय पत्तन संघ (IPA) की स्थापना सोसाइटी निबंधन अधिनियम के तहत 1966 में हुई थी.
  • इसका उद्देश्य उन सभी बड़े बन्दरगाहों की वृद्धि एवं विकास का सम्पोषण करना है जो जहाजरानी मंत्रालय के पर्यवेक्षणात्मक नियंत्रण में होते हैं.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic :  UN Panel of Auditors

संदर्भ

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक राजीव महर्षि संयुक्त राष्ट्र के लेखा-परीक्षक (auditor) पैनल में उपाध्यक्ष नियुक्त हो गये हैं.

संयुक्त राष्ट्र का लेखा-परीक्षक पैनल क्या है?

  • यह लेखा-परीक्षकों का एक दल है जो संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के अंकेक्षण का कार्य देखता है. ये लेखा-परीक्षक बाह्य लेखा-परीक्षक होते हैं. 1959 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बाह्य लेखा-परीक्षकों एक पैनल बनाया था जिसमें संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के ऐसे व्यक्तिगत बाह्य लेखा-परीक्षक थे जो अपने-अपने देश में अंकेक्षण की सबसे बड़ी संस्था के प्रमुख थे.
  • आज की तिथि में इस पैनल में 11 देश हैं – भारत, जर्मनी, चिली, कनाडा, फ्रांस, इटली, फिलीपींस, घाना, इंडोनेशिया, स्विट्ज़रलैंड और यूनाइटेड किंगडम. वर्तमान में, इस पैनल की अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कर रहे हैं.

बाह्य लेखा-परीक्षक पैनल के कार्य

  • इस पैनल के सदस्य अपने अनुभवों एवं कार्य-पद्धतियों को साझा करते हैं जिससे समूची संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के अंदर बाह्य लेखा परीक्षण से जुड़ी प्रथाओं में समरूपता सुनिश्चित हो सके.
  • पैनल के सदस्य संयुक्त राष्ट्र संघ के वित्तीय संसाधनों का समुचित प्रयोग सुनिश्चित करते हैं तथा साथ ही किफायत बरतते हुए इनका कारगर एवं कुशल प्रयोग हेतु स्वतंत्र रूप से सभी सदस्य देशों एवं अन्य हित धारकों को आश्वस्त करते हैं.
  • पैनल के सदस्य संयुक्त राष्ट्र एवं उसकी एजेंसियों के कार्यकलाप और उनकी आंतरिक नियंत्रण गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए सहायता करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
  • पैनल सदस्यों के निष्कर्षों एवं अनुशंसाओं की अवहेलना नहीं होती है तथा यह प्रयास किया जाता है कि उनकी अनुशंसाएँ समय पर और कारगर ढंग से अवश्य क्रियान्वित हों.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication (SWIFT)

संदर्भ

SWIFT India ने भारतीय स्टेट बैंक की भूतपूर्व प्रमुख अरुंधती भट्टाचार्य को अपने बोर्ड का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है.

SWIFT India क्या है?

SWIFT India शीर्षस्थ भारतीय सार्वजनिक एवं निजी बैंकों तथा SWIFT का एक संयुक्त उपक्रम है जिसका उद्देश्य भारतीय वित्तीय समुदाय को उत्तम कोटि की घरेलु वित्त संवाद सेवाएँ उपलब्ध कराना है.

SWIFT क्या है?

  • SWIFT का पूरा नाम “Society for worldwide inter-bank financial telecommunication” है अर्थात् “विश्वव्यापी अंतरबैंक वित्तीय दूरसंचार सोसाइटी” है.
  • यह एक सहकारी संस्था है जिसमें विश्व के कई देश सदस्य हैं.
  • इसका मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में है.
  • इसकी स्थापना 1973 में 15 देशों के 239 बैंकों के एक समूह ने की थी.
  • इसका उद्देश्य  एक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक सन्देश सेवा (Secured Electronic Messaging Service) विकसित करना तथा सीमा-पार भुगातान की सुविधा के लिए सर्व-सामान्य मानक लागू करना है.
  • इसके माध्यम से प्रतिदिन लगभग 26 मिलियन वित्तीय संदेशों का आदान-प्रदान होता है. इसकी सन्देश सेवा का उपयोग करने के लिए ग्राहक को इससे जुड़ना होता है.

कार्य

  • SWIFT भुगतान आदेश भेजता है, जिसके आधार पर सम्बंधित प्रतिष्ठान एक-दूसरे के खातों के माध्यम से आगे की कार्रवाई कर सकते हैं.
  • SWIFT केवल संदेशों का हस्तांतरण करता है न कि धनराशि का.
  • स्विफ्ट एक बैंक से दूसरे बैंक तक सन्देश ले जाता है. इस प्रकार यह एक सुरक्षित वित्तीय सन्देश वाहक है.
  • स्विफ्ट के द्वारा भेजा गया सन्देश सुरक्षित होता है क्योंकि इसके माध्यम से एक बैंक यदि दूसरे बैंक को संदेश देता है तो इस आदान-प्रदान की जानकारी किसी तीसरे बैंक को नहीं हो पाती है.
  • संदेशों की निजिता को सुरक्षित करने के लिए SWIFT द्वारा भेजे गये सन्देश को विशेष सुरक्षा एवं पहचान तकनीक से प्रमाणित किया जाता है. साथ ही जब सन्देश ग्राहक के वातावरण से निकलता है और SWIFT के वातावरण में आता है तो उसमें कूट-चिन्ह (Encryption) जोड़ा जाता है.
  • SWIFT के पास हर सन्देश तब तक इसकी सुरक्षा रहता है जब तक वह प्राप्तिकर्ता के हाथों तक सुरक्षित रूप से पहुँच नहीं जाता है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : ‘Eco-sensitive zones’

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह देश के सभी 21 राष्ट्रीय उद्यानों एवं वन्य जीव अभयारण्यों के आस-पास के 10 किमी. क्षेत्र को पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र (eco-sensitive zones) घोषित करे.

न्यायालय ने यह निर्देश तब दिया जब इसके न्यायमित्र ने सूचित किया कि राज्य सरकारों ने इन उद्यानों एवं अभयारण्यों के आस-पास के क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए कोई प्रयास नहीं किया है.

पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र क्या होता है?

  • यह एक अवधारण है जिसका उल्लेख पर्यावरण सुरक्षा अधिनियम, 1986 में नहीं मिलता है.
  • परन्तु अधिनियम का अनुभाग 3(2)(v) कहता है कि केंद्र सरकार कुछ क्षेत्रों में उद्योग लगाना अथवा चलाना प्रतिबंधित कर सकती है.
  • अधिनियम का अनुभाग 5 (1) कहता है कि केंद्र सरकार किसी क्षेत्र की जैव-विविधता को ध्यान में रखते हुए वहाँ उद्योग लगाने और चलाने पर निषेध लगा सकती है अथवा उसे सीमित कर सकती है जिससे उस क्षेत्र में प्रदूषण न हो और वहाँ की जमीन पर्यावरण की दृष्टि से उपयुक्त रहे.
  • ऊपर वर्णित किये गये दोनों अनुच्छेदों का सरकार ने कारगर ढंग से उपयोग करते हुए पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील जोन (Eco-Sensitive Zones – ESZ) अथवा पर्यावरण की दृष्टि से नाजुक क्षेत्र (Ecologically Fragile Areas – EFA) घोषित किये हैं. इसी प्रकार समान मापदंडों वाले विकास से परे जोन भी घोषित किये गये हैं.

ESZ घोषित करने के मानदंड

वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने ऐसे जोन घोषित करने के लिए कुछ मापदंड तय किये हैं जो मंत्रालय की एक समिति ने तैयार किये हैं. इनके अनुसार ये क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील घोषित हो सकते हैं –

  • जहाँ कोई प्रजाति अधिक हो अथवा अत्यंत कम हो.
  • जहाँ पवित्र कुंज और जंगल (sacred groves, frontier forests etc) हों.
  • जहाँ अनिर्वासित द्वीप हों, नदियों का उद्गम हो आदि-आदि.

Prelims Vishesh

Online portal “ENSURE” :-

  • भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय ने “ENSURE” नामक एक पोर्टल का अनावरण किया है जो नाबार्ड द्वारा बनाया गया है और जिसका सञ्चालन पशुपालन, गव्य एवं मत्स्यपालन विभाग द्वारा किया जाता है.
  • इसे राष्ट्रीय मवेशी अभियान के नाम से भी जाना जाता है.

UAE to double women’s representation in Federal National Council to 50 per cent :-

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने संघीय राष्ट्रीय परिषद् में स्त्रियों के प्रतिनिधित्व को वर्तमान के 22.5% से बढ़ाकर अगले सत्र में 50% करने का निर्णय लिया है.


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