Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 11 July 2020


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Major crops cropping patterns in various parts of the country, different types of irrigation and irrigation systems storage.

Topic : India Is The First Country To Control Locust With Drones

संदर्भ 

ड्रोन के जरिए हवाई छिड़काव करके टिड्डियों का खात्मा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है. देश के टिड्डी नियंत्रण अभियान की तारीफ संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने की है. 

संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन

  • संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र संघ के अंतर्गत की गई थी.
  • इसका मुख्यालय रोम (Rome), इटली में है. 130 देशों में इसके क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं.
  • यह संगठन सरकारों और विकास एजेंसियों को कृषि, वानिकी (forestry), मत्स्यपालन तथा भूमि एवं जल संसाधन से सम्बंधित गतिविधियों के संचालन में सहायता करता है. यह विभिन्न परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहायता देने के अलावा शोध कार्य भी करता है.
  • यह शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण (training) कार्यक्रम भी चलाता है और कृषि उत्पादन और विकास से सम्बंधित आंकड़े भी इकठ्ठा करता है.
  • FAO वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा के लिये कार्य करता है. इस संस्था का लक्ष्य भूक मिटाना और पोषण का स्तर ऊँचा करना है.
  • इसका ध्येय वाक्य (motto) है – Fiat Panis अर्थात् लोगों को रोटी मिले…
  • आपको जानना चाहिए कि कि FAO संयुक्त राष्ट्र की सबसे वृहद् एजेंसी है.
  • वर्तमान में इस संगठन के सदस्यों देशों की संख्या 197 है (according to Wikipedia). इसके अन्दर 194 देश, 1 संगठन और 2 संलग्न सदस्य (associate members) होते हैं.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Issues Related to SCs & STs. Government Policies & Interventions / Issues Relating to Development.

Topic : Gujarat govt constitutes a five-member commission to protect rights of tribal

संदर्भ 

हाल ही में गुजरात सरकार ने कहा कि राबरी (Rabari), भारवाड़ (Bharvad) एवं चारण (Charan) समुदायों के सदस्यों की पहचान करने के लिये एक पाँच सदस्यीय आयोग का गठन किया जाएगा जो गुजरात के गिर, बरदा एवं एलेच (Alech) क्षेत्रों में रहते हैं. 

पृष्ठभूमि

विदित हो कि तीनों समुदाय भारतीय संविधान के दायरे में अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe) के अंतर्गत लाभ पाने के पात्र हैं.

पाँच सदस्यीय आयोग: इस पाँच सदस्यीय आयोग में सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में दो ज़िला न्यायाधीश, एक सेवानिवृत्त वन अधिकारी और एक सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारी सम्मिलित होंगे.

अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe) का दर्जा: केंद्र सरकार ने 29 अक्टूबर, 1956 की एक अधिसूचना के जरिये गुजरात के राबरी (Rabari), भारवाड़ (Bharvad) एवं चारण (Charan) समुदायों के लोगों को अनुसूचित जनजाति (Schedule Tribe) की श्रेणी में रखा गया  जो गुजरात में गिर, बरदा और एलेच के इलाकों में नेस्सेस (Nesses) में रहते थे. विदित हो कि नेस्सेस मिट्टी से बने छोटे, अंडाकार आकार के झोपड़े होते हैं.

राबरी जनजाति

  • राबरी जिन्हें ‘रेवारी’ या ‘देसाई’ भी कहा जाता है, एक घुमंतू चरवाहा जनजाति है.
  • यह जनजाति सम्पूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत (मुख्य रूप से गुजरात, पंजाब और राजस्थान के राज्यों में) में विस्तृत है.
  • यह जनजाति अपने पशुओं के साथ मुख्य रूप से राजस्थान एवं गुजरात के क्षेत्रों में चारे की खोज में भ्रमण के बाद वर्ष में एक बार अपने गाँव वापस आती है और दूध बेचकर अपना जीवन-यापन करती है.
  • ये हिंदू धर्म में विश्वास रखते हैं और ‘शिव’ और ‘शक्ति’ (देवी पार्वती) की पूजा करते हैं.

भारवाड़

  • ‘भारवाड़’ शब्द को ‘बाड़ावाड़’ (Badawad) का संशोधित रूप माना जाता है. गुजराती भाषा में ‘बाड़ा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ है ‘भेड़’ तथा ‘वाड़ा’ का अर्थ ‘अहाता’ (भेड़ पालने की जगह) से है.
  • भारवाड़ समुदाय के लोग मूलरूपेण गुजरात राज्य में निवास करते है और इनका मुख्य पेशा पशुपालन है.
  • पश्चिमी गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वे दो अंतर्विवाही समूहों के रूप में विद्यमान हैं जिन्हें ‘मोटा भाई’ और ‘नाना भाई’ के नाम से जाना जाता है.
  • यह जनजाति भी हिंदू धर्मावलम्बी है.

चारण

  • चारण गुजरात की अल्प जनसंख्या वाली जनजाति है. इन्हें गढ़वी भी कहा जाता है.
  • वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार, गुजरात के बरदा, गिर एवं एलेच क्षेत्रों में चारण की जनसंख्या को अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है.
  • ये गुजराती भाषा बोलते हैं और गुजराती लिपि का प्रयोग करते हैं.
  • ये लोग मांस का सेवन नहीं करते और इनका मुख्य भोजन शाकाहारी ही होता है जैसे – अरहर, मूंग एवं मोठ और कभी-कभार मौसमी सब्जियों के साथ ज्वार या बाज़रे की रोटी का सेवन आदि.
  • ये भी हिंदू धर्म पर विश्वास रखते हैं.

अनुसूचित जनजाति

अनुच्छेद 366(25) में अनुसूचित जनजातियों को ऐसी जनजातियों या जनजातीय समुदाय अथवा ऐसी जनजातीय समुदायों के भाग अथवा उनके अन्दर के समूहों के रूप में परिभाषित किया गया है, जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियाँ समझा जाता है.

अनुच्छेद 342 – राष्ट्रपति किसी राज्य अथवा संघ राज्य क्षेत्र के राज्यपाल से परामर्श करने के बाद, जनजातियों या जनजातीय समुदायों या उसके समूहों को अनुसूचित जनजातियों के रूप में अधिसूचित कर सकता है था उन्हें इस संविधान के प्रयोजनों हेतु, उस राज्य अथवा संघ राज्य क्षेत्र के सम्बन्ध में अनुसूचित जनजाति माना जाएगा.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

जनजातियों से सम्बंधित अन्य कार्यक्रम/योजनाएँ

  1. जनजातीय क्षेत्रों में व्यवसायिक प्रशिक्षण.
  2. निम्न साक्षरता वाले जिलों में अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं के मध्य शिक्षा का सुदृढ़ीकरण.
  3. जनजातीय उत्पादों के लिए बाजार का विकास.
  4. भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (TRIFED – जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन).
  5. लघु वन उत्पाद के लिए राज्य जनजातीय विकास सहकारी निगम.
  6. विशेष रूप से सुभेद्य जनजातीय समूहों (PVTGs) का विकास.
  7. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government Policies & Interventions. 

Topic : Do we need a fiscal council?

संदर्भ 

राजकोषीय परिषदें वे स्वतंत्र लोक संस्थाएँ होती हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य विभिन्न कार्यों, जैसे, वित्तीय योजनाओं और उनके प्रदर्शन का सार्वजनिक आकलन, बजटीय पूर्वानुमानों तथा समष्टि आर्थिक नीतियों के प्रावधानों के मूल्यांकन आदि, के जरिये सतत सार्वजनिक वित्त विषयक प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ बनाना है.

आज की तिथि में राजकोषीय परिषदें, विश्व में अनेक उभरती हुईं तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं सहित 50 से अधिक देशों में संस्थागत राजकोषीय तंत्र का भाग हो चुकी हैं.

राजकोषीय परिषद का गठन तथा कार्यप्रणाली (14वें वित्त आयोग द्वारा की गयी अनुसंशाएँ)

14वें वित्त आयोग ने ‘राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम’ (Fiscal Responsibility and Budget Management Act- FRBM Act) में संशोधन करके एक स्वतंत्र राजकोषीय परिषद् की स्थापना करने के लिए एक नवीन उपबंध जोड़ने की अनुशंसा की थी.

इस परिषद् की नियुक्ति संसद करेगी और संसद के प्रति वह उत्तरदाई होगी. इस परिषद् का अपना एक बजट होगा.

प्रस्तावानुसार, पारित होने के पश्चात बजट का मूल्यांकन तथा निगरानी का कार्य ‘भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (Comptroller & Auditor General of India-CAG)’ का है.

राजकोषीय परिषद के कार्य निम्नलिखित हैं –

i) बजट प्रस्तावों के राजकोषीय निहितार्थों का मूल्यांकन करना, और यह देखना कि इस विषय में किये गये पूर्वानुमान कितने वास्तविक हैं और वे राजकोषीय नियमों के अनुकूल हैं अथवा नहीं. 

ii) यह परिषद् बजट में दिए गये विभिन्न प्रस्तावों की लागत का भी अनुमान लगा सकेगी.

राजकोषीय परिषद् की आवश्यकता क्यों?

  • समग्र विभाज्य राजस्व में विभिन्न उपकरों और अधिभारों का अनुपात अन्संतुलित हो चला है. ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि धन के विभाजन की प्रक्रिया को चतुर वित्तीय पहलों (clever financial engineering) अथवा परम्पराओं का सहारा लेकर क्षति न पहुँचाई जाए.
  • वित्त आयोग एवं GST परिषद् के बीच भी समन्वय की आवश्यकता है. GST परिषद् को यह पता नहीं रहता कि वित्त आयोग क्या कर रहा है और वित्त आयोग को भी और भी कम जानकारी होती है कि GST परिषद् क्या कर रही है.
  • राज्य सरकार के लिए धारा 293(3) उधारी पर सांविधानिक नियंत्रण का प्रावधान करती है. किन्तु केंद्र के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है.
  • इसलिए आज यह आवश्यकता है कि राजकोषीय परिषद् जैसा एक वैकल्पिक संस्थागत तन्त्र हो जो वित्तीय नियमों को लागू करे और केंद्र के वित्तीय समेकन पर नज़र रखे.

आगे की राह

भारत का शासन तन्त्र जटिल है और इसके सामने विकास की अनेक चुनौतियाँ हैं. अतः देश को उचित वित्तीय प्रथाओं के लिए संस्थागत तंत्र की आवश्यकता है. यदि एक स्वतंत्र राजकोषीय परिषद् का गठन होता है तो पूरे देश में वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व आएगा. और देशों के अनुभव से ज्ञात होता है कि राजकोषीय परिषद् के होने से लोक वित्त पर होने वाले विचार-विमर्श की गुणवत्ता में सुधार होता  है और वित्तीय अनुशासन के अनुकूल जनमत का निर्माण होता है.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Indian National Space Promotional Authorization Center

संदर्भ 

हाल ही में सरकार ने इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एण्ड ऑथराइजेशन सेंटर (आई एन एस पी ए सी ई) के गठन की घोषणा की है. 360 अरब डॉलर के वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत , इस संगठन के जरिये अपने पैर पसार सकेगा. इसकी सहायता से देश, अंतरिक्ष विज्ञान तकनीक में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की ओर तीव्रता से बढ़ सकेगा.

इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एण्ड ऑथराइजेशन सेंटर

अंतरिक्ष तकनीक में ISRO का अपना एक अलग स्थान है. वह एक शीर्ष केन्द्र है. इसी प्रकार द्वितीय शीर्ष पर स्वायत्तशासी संस्थाएँ हैं. तीसरे स्थान पर न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड जैसे सार्वजनिक निकाय हैं. चौथा स्थान इन स्पेस को दिया जा रहा है. यह पूर्ण रूप से स्वायत्त निकाय होगा , जिस पर ईसरो का कोई प्रभाव नहीं होगा. इसके प्रशासनिक अधिकारी भी पृथक् होंगे.

भारत को लाभ

  • इस केन्द्र के गठन से भारत की अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी अर्थव्यवस्था को बहुत लाभ होने की संभावना है. विश्व के 360 अरब डॉलर के बाजार में भारत का योगदान मात्र 3% है. इस घोषणा से अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ कई काम भारत को सौंपे जा सकते हैं.
  • नए केन्द्र का उद्देश्य निजी क्षेत्र की कंपनियों को टेस्टिंग सुविधा या ईसरो के अन्य सिस्टम की सुविधा मुहैया कराना होगा. अभी तक अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में निजी कंपनियों को रॉकेट या उपग्रहों के कई पार्ट्स सप्लाई करने की ही छूट थी. परन्तुं अब वे अपने निजी उपग्रह और रॉकेट के प्रेक्षेपण के लिए ईसरो को शुल्क देकर उसकी सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे. इसके लिए इन-स्पेस ही मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा. इससे उपग्रह और रॉकेट निर्माण की पूरी प्रक्रिया का व्यावसायीकरण होने की संभावना है. अगर यह संभव होता है , तो अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आर्थिक कायापलट हो सकता है. इस नए केन्द्र  के माध्यम से विद्यार्थी भी कम दर पर अपने मिनी-उपग्रह प्रक्षेपित कर सकेंगे.
  • अगर सरकार इस केन्द्र की स्थापना के लक्ष्य को साधने में सफल रहती है, तो यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक मील का पत्थर साबित होगा.

GS Paper 4 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Public or Civil Service Values and Ethics in Public Administration

Topic : State Hate for Profit

संदर्भ 

हाल में ही रंगभेद के विरोध में चल रहे आन्दोलनों के मध्य फेसबुक और इन्स्टाग्राम के बहिष्कार और इसे विज्ञापन न देने की आवाज अमेरिका से उठी है और अब भारत छोड़कर पूरी दुनिया पर इसका प्रभाव देखा जा रहा है. इस अभियान को अमेरिका के अनेक मानवाधिकार संगठनों ने सम्मिलित तौर पर प्रारम्भ किया है और इसे “स्टॉप हेट फॉर प्रॉफिट” का नाम दिया गया है.

इसके अंतर्गत फेसबुक पर अपने विज्ञापन चलाने वाली कंपनियों से आग्रह किया गया है कि इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जुलाई के महीने में विज्ञापन ना दें और इसके बहिष्कार की भी माँग की गई है.

स्टॉप हेट फॉर प्रॉफिट

  • लाभ के लिए घृणा का प्रसार बंद करने का नारा भावनात्मक है , और इसकी शक्ति को नकारा नहीं जा सकता. अत: कोका कोला, होंडा, लेवाइज़, माइक्रोसाफ्ट जैसी नामी कंपनियों ने एक महीने के लिए फेसबुक पर विज्ञापन बंद करने का फैसला किया है.
  • एक तरह से देखें , तो फेसबुक ने पारंपरिक मीडिया की सत्यता और सामाजिक जिम्मेदारी के मानदंडों का पालन नहीं करने की कीमत चुकाई है.
  • इससे पहले म्यांमार में व्हाट्सएप पर फैले संदेशों के कारण रोहिंग्याओं की सामूहिक हत्या की गई थी. परन्तु दूसरों द्वारा प्रेषित सामग्री की जिम्मेदारी लेने से मना करते हुए व्हाट्सएप ने पल्ला झाड़ लिया था. दरअसल , फेसबुक राजनीतिक दांवपेंचों का शिकार है , जो यह चाहता है कि फेसबुक विशेषत: राजनीतिक हाथों की कठपुतली बनकर उन सामग्री को अपने मंच से हटाए, जो उनके प्रतिकूल हैं. इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा या ह्रास से उनका कोई लेना-देना नहीं है. अत: सरकारों से विनियमन की अपेक्षा की जा सकती है. इससे जिम्मेदार प्रकाशन को अलग करने वाली रेखा खींची जा सकेगी.
  • विश्व के कई देशों में चल रहे अभियान में नामी और बड़ी कंपनियों का शामिल होना संस्कृति की लोकप्रियता की शक्ति को दिखाता है. ऐसा माना भी जाता है कि वाणिज्य और विज्ञापन संस्कृति के आकार को गढ़ते हैं. लेकिन जब सार्वजनिक कल्पना को प्रभावित करने वाली शक्तिशाली भावनाएँ विचारधारा के रूप में सामने आती है, तो उसके सामने वाणिज्य कुछ नहीं रह जाता. सार्वजनिक संस्कृति को गढ़ने की अपनी ही शक्ति होती है.

Prelims Vishesh

Vaartavali :-

दूरदर्शन समाचार में संस्कृत समाचार पत्रिका वार्तावली के प्रसारण के पाँच वर्ष 4 जुलाई, 2020 को पूरे हो गये हैं.

Sanskrit Saptahiki :-

आकाशवाणी FM समाचार चैनल ने संस्कृत भाषा में पहली बार एक समाचार कार्यक्रम – संस्कृत साप्ताहिकी – आरम्भ किया है जिसकी अवधि 20 मिनट की होगी.

Haryana Drafts Ordinance To Reserve 75% Private Sector Jobs For Locals :-

  • हरियाणा सरकार ने एक अध्यादेश का प्रारूप तैयार किया है जिसके अनुसार 50,000 रु. प्रतिमाह से कम वेतन वाली नौकरियों का 75% हरियाणा के स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित होगा.
  • इसके लिए अभ्यर्थी को डोमिसाइल प्रमाणपत्र देना होगा. यह अध्यादेश उन सभी कार्यालयों पर लागू होगा जहाँ 10 से अधिक कर्मचारी होंगे.
  • यदि निजी कम्पनियाँ सरकार को बताती हैं कि उन्हें योग्य अभ्यर्थी नहीं मिल रहे हैं तो वे सरकार से अनुमति प्राप्त कर अन्य राज्यों के लोगों को भर्ती कर सकेंगी.

Fourth highest opium seizure in 2018 reported from India: World Drug Report :-

  • संयुक्त राष्ट्र ड्रग एवं अपराध कार्यालय (United Nations Office on Drugs and Crime – UNODC) ने वैश्विक ड्रग प्रतिवेदन प्रकाशित किया है जिसके अनुसार, 2018 में अफीम की जब्ती के मामले में भारत का स्थान ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के पश्चात् चौथा रहा.
  • जहाँ तक हेरोइन की जब्ती का प्रश्न है तो 1.3 टन जब्ती के स्थान भारत का स्थान विश्व में 12वाँ रहा.
  • 2018 में अफीम की खेती में 17% गिरावट आई थी जो 2019 में बढ़कर 30% हो गई.

Zardozi art :-

  • जरदोजी वह कला है जिसमें सोने के कॉयल और मनकों को सुई-धागों की सहायता से कपड़े में टाँका जाता है.
  • 2013 में लखनऊ की ज़रदोज़ी को भौगोलिक संकेत (GI tag) पंजीकरण मिला था.
  • यह कला पुराने भोपाल शहर की तंग गलियों में अभी भी फल-फूल रही है.

 Places in News- Natanz :-

  • पिछले दिनों ईरान के नातांज़ शहर में यूरेनियम समृद्ध करने वाले एक भूमिगत कारखाने में आग लग गई.
  • ज्ञातव्य है कि 2015 के आणविक समझौते के पश्चात् ईरान के जिन प्रतिष्ठानों पर IAEA की निगरानी चल रही है उनमें से नातंग कारखाना भी है.

National Atlas and Thematic Mapping Organisation (NATMO) :-

  • कोलकाता में मुख्यालय वाले राष्ट्रीय एटलस संगठन एवं थीमेटिक मानचित्रण संगठन (NATMO) ने पिछले दिनों COVID-19 डैशबोर्ड का चौथा संस्करण प्रकाशित किया.
  • विदित हो कि इस संगठन की स्थापना 1956 में भारतीय भूगोल के उद्भट विद्वान् प्रो. एस.पी. चटर्जी ने की थी.
  • वर्तमान में यह भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है.
  • इसका मुख्य कार्य देश का एटलस बनाना है.

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