Sansar डेली करंट अफेयर्स, 10 January 2022

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Sansar Daily Current Affairs, 10 January 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय.

Topic : Census and NPR

संदर्भ

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ (National Population Register – NPR) को अद्यतन करने हेतु ‘जनगणना’ (Census) के पहले चरण और जनगणना विवरण संग्रह प्रक्रिया को कम से कम सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

जनगणना हेतु अधिदेशी अनिवार्यताएं

प्रशासनिक इकाइयों की अधिकार सीमा पर रोक: जनगणना प्रक्रिया के आरंभ होने से न्यूनतम तीन महीने पहले से, प्रशासनिक इकाइयों (जिलों, उप-जिलों, तहसीलों, तालुका, पुलिस स्टेशनों आदि की सीमाओं) की अधिकार सीमाओं को अनिवार्यतः फ्रीज करना / रोक लगाना आवश्यक होता है.

2021 की जनगणना हेतु प्रशासनिक इकाइयों (Administrative Units) की अधिकार-सीमा पर रोक लगाने हेतु, 1 जनवरी 2010 से, अर्थात वर्ष 2011 की जनगणना हेतु अधिकार-सीमाओं पर रोक लगाए जाने की तारीख से, आगामी जनगणना प्रक्रिया (वर्तमान में 30 जून, 2022 तक) हेतु अधिकार-सीमाओं पर रोक लगाए जाने की तारीख तक, होने वाले सभी परिवर्तनों पर विचार किया जाएगा.

जनगणना

जनगणना (Census), देश में जनसंख्या के आकार, वितरण और सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जनसांख्यिकीय संबंधी जानकारी और अन्य विवरणों के बारे में जानकारी प्रदान करती है.

  • भारत में जनगणना, पहली बार वर्ष 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन शुरू की गई थी. इसने समाज में उत्थान करने हेतु नई नीतियों, सरकारी कार्यक्रमों को तैयार करने में सहायता प्रदान की.
  • भारत में पहली संपूर्ण जनगणना वर्ष 1881 में हुई थी. तब से, प्रति दस वर्ष में एक बार, निर्विघ्न रूप से जनगणना की जाती है.

‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ और ‘जनगणना’ में अंतर

  • राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का उद्देश्य देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना है, और भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’ में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है.
  • यद्यपि, जनगणना (Census) के माध्यम से भी समान विवरण एकत्र किया जाता है, किंतु ‘जनगणना अधिनियम’, 1948 की धारा 15 के अनुसार, जनगणना में एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत स्तर की जानकारी गोपनीय होती है और “एकत्रित डेटा को केवल विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर जारी किया जाता है.”

मुख्य तथ्य

  1. भारत के महापंजीयक (Registrar-General of India – RGI) के द्वारा अधिसूचित एक संशोधित नियम के अनुसार 2021 की जनगणना के आँकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में संगृहीत किया जायेगा.
  2. ऐसा भारतीय जनगणना के इतिहास में पहली बार हो रहा है.
  3. ज्ञातव्य है कि शुरू से लेकर 2011 तक हर 10वें वर्ष होने वाली जनगणना 15 बार हो चुकी है.
  4. यद्यपि जनगणना की शुरुआत भारत में 1872 में ही हो गयी थी पर पहली सम्पूर्ण जनगणना 1881 में संपन्न हुई थी.
  5. 1949 के बाद से जनगणना का काम गृह मंत्रालय के अधीनस्थ भारत महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के द्वारा किया जाता है.
  6. 1951 के बाद से हो रही जनगणना (भारतीय जनगणना अधिनियम 1948 / Census of India Act 1948) के तहत की जाती है.

जनसंख्या घनत्व कैसे मापा जाता है?

जिस क्षेत्र (शहर, राज्य, देश, महादेश) की जनसंख्या का घनत्व जानना हो तो उस क्षेत्र के क्षेत्रफल को उसकी जनसंख्या से भाग दे देने से प्रति किलोमीटर जनसंख्या घनत्व का पता चलता है. उदाहरण के लिए किसी शहर का क्षेत्रफल 100 वर्ग किलोमीटर है और जनसंख्या 10 लाख है तो उस क्षेत्र के जनसंख्या का घनत्व = 1000000/100 अर्थात् होगा 10,000 population density होगा.

Population Density = Number of People / Land Area

2011 के कुछ जरुरी आँकड़े

राज्य

2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनघनत्व वाले पाँच राज्य हैं –

  1. बिहार (1102)
  2. पश्चिम बंगाल (1029)
  3. केरल (859)
  4. उत्तर प्रदेश (828)
  5. हरियाणा (573)

केंद्रशासित राज्य

2011 की जनगणना के अनुसार सर्वाधिक जनघनत्व वाले तीन केन्द्रशासित राज्य हैं –

  1. दिल्ली (11297)
  2. चंडीगढ़ (9252)
  3. पुडुचेरी (2598)

पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु, गोवा व असम भी उच्च घनत्व वाले राज्य हैं जबकि कई राज्यों में जनसंख्या का घनत्व राष्ट्रीय औसत से कम हैं. जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से भारत को तीन भागों में बाँटा जा सकता है –

जनसंख्या घनत्व की दृष्टि से भारत के तीन भाग

  1. उच्च घनत्व के क्षेत्र– इसके अन्दर पूरे देश के लगभग 1/4 जिलें आते हैं. इसका विस्तार पश्चिमी बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में है. यहाँ जनसंख्या का घनत्व (population density) 500 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी से अधिक मिलता है. ये क्षेत्र भारतीय कृषि के प्रमुख क्षेत्र हैं.
  2. मध्यम घनत्व के क्षेत्र– भारत में लगभग 130 जिलों में 300-500 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी घनत्व पाया जाता है. भारत में मध्यम घनत्व के क्षेत्र उत्तरी भारत के उच्च घनत्व के निकटवर्ती क्षेत्र जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र के तटवर्ती भाग, छोटा नागपुर के पठार आदि हैं. इन क्षेत्रों में धरातल की विषमता और जल की कमी पाई जाती है. इसलिए ये क्षेत्र कृषि में महत्त्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाते. इसलिए इन क्षेत्रों में कम जनसंख्या पाई जाती हैं. पर यहाँ खनिजोंका भण्डार है जिससे ये क्षेत्र औद्योगिक और आर्थिक रूप से विकसित हैं. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कृषि तथा लघु उद्योगों के विकास के कारण मध्यम घनत्व के कुछ क्षेत्र विकसित हुए हैं.
  3. निम्न घनत्व के क्षेत्र– भारत के लगभग 150 जिलों में 300 व्यक्ति प्रतिवर्ग किमी से भी कम जनसंख्या का घनत्व मिलता है. उत्तर-पूर्व हिमालयी क्षेत्र में और पश्चिमी भारत में कमी और जनसंख्या का अल्प घनत्व मिलता है. मध्य प्रदेश और उड़ीसा के पठारी और जनजातीय क्षेत्रों, कर्नाटक के पूर्वी भाग और आंध्र प्रदेश के मध्यवर्ती भाग में भौतिक बाधाओं और कृषि के अविकसित होने के चलते कम जनसंख्या पाई जाती है. कच्छ के दलदल वाले क्षेत्र भी निम्न घनत्व वाले क्षेत्र हैं.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

डेटा गुणवत्ता को मज़बूत करना काफी महत्त्वपूर्ण है, जो कि कवरेज त्रुटि और सामग्री त्रुटि को कम करके किया जा सकता है। प्रगणकों (डेटा संग्रहकर्त्ताओं) और आयोजकों को उचित रूप से प्रशिक्षित किया जाना चाहिये. साथ ही प्रगणकों को प्रेरित करने के लिये उन्हें बेहतर भुगतान भी किया जाना चाहिये, क्योंकि वे डेटा संग्रह का केंद्रबिंदु हैं और डेटा सटीकता सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. जीवन में जनगणना के महत्त्व के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिये सार्वजनिक अभियान शुरू किये जाने चाहिये.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप.

Topic : Word Trade Organization/WTO

संदर्भ

हाल ही में भारत ने चीनी निर्यात सब्सिडी पर विश्व व्यापार संगठन (WTO) विवाद समिति के निर्णय के विरुद्ध अपील की है. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और ग्वाटेमाला ने शिकायत की थी कि भारत द्वारा गन्ना उत्पादकों को प्रदान की जाने वाली घरेलू सहायता WTO से अनुमत सीमा से अधिक है. साथ ही, भारत चीनी मिलों को निषिद्ध निर्यात सब्सिडी भी प्रदान करता है. परिणामस्वरूप, समिति ने अपने निष्कर्ष में यह पाया कि भारत कृषि पर समझौते (AoA) के तहत अपने दायित्वों के असंगत रूप से कार्य कर रहा है.

मुख्य बिंदु

  • ब्राजील के बाद भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है.
  • भारत ने विश्व व्यापार संगठन के अपीलीय निकाय के समक्ष इस निर्णय को चुनौती दी है. यह निकाय इस प्रकार के व्यापार विवादों पर अंतिम प्राधिकारी निकाय है.
  • AoA घरेलू समर्थन, निर्यात सब्सिडी और बाजार पहुंच के क्षेत्रों में समर्थन को कम करने के लिए विशिष्ट प्रतिबद्धताएं प्रदान करता है.
  • गन्‍ना उत्पादकों को घरेलू समर्थन उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price: FRP), राज्य-परामर्शी मूल्य (State-Advised Prices: SAPs) इत्यादि जैसे उपायों के माध्यम से प्रदान किया जाता है.
  • AoA के अनुसार घरेलू समर्थन, निर्धारित न्यूनतम स्तर (De minimis) से अधिक नहीं होना चाहिए.
  • यह न्यूनतम स्तर, विकसित देशों के लिए उत्पादन मूल्य का 5% और विकासशील देशों के लिए 10% तक निर्धारित किया गया है.
  • भारत की निर्यात सब्सिडी में उत्पादन सहायता योजना, बफर स्टॉक योजना और विपणन एवं परिवहन योजना इत्यादि शामिल हैं.
  • AoA और सब्सिडी तथा प्रतिकारी (countervailing) उपायों पर समझौते के तहत, WTO के सदस्यों से निर्यात सब्सिडी कई कृषि उत्पादों हेतु प्रतिबंधित है.

विश्व व्यापार संगठन

विश्व व्यापार संगठन का इतिहास 15 अप्रैल, 1994 से प्रारम्भ होता है जब मोरक्को के एक शहर “मराकेश” में चार दिवसीय वार्ता प्रारम्भ हुई थी. इस सम्मेलन की अध्यक्षता “प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता”, जिसे “गैट/GATT” कहते हैं, के प्रथम महानिदेशक पीटर सदरलैंड ने की थी. वस्तुतः इसी सम्मलेन में “गैट” को नया नाम “विश्व व्यापार संगठन/Word Trade Organization/WTO” दिया गया. यह संगठन 1 जनवरी, 1995 से अस्तित्व में आया. इसके प्रथम स्थायी अध्यक्ष इटली के एक प्रमुख व्यवसायी रेनटो रुगियरो (Renato Ruggiero) बनाए गये.

विश्व व्यापार संगठन और GATT

विश्व व्यापार संगठन का मूल “प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौता”/”GATT” (General Agreement on Tariffs and Trade) में निहित है. GATT की स्थापना 1948 में मूलतः 23 संस्थापक देशों द्वारा की गई थी जिनमें भारत भी एक था.

GATT के तत्त्वावधान में हुई आठवें दौर की वार्ता (1986-1994) के फलस्वरूप 1 जनवरी, 1995 को “विश्व व्यापार संगठन” (World Trade Organisation) जा जन्म हुआ, जिसे “उरग्वे दौर” के नाम से जाना जाता है. इसके पहले GATT केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित था. उरुग्वे दौर की वार्ता में कई नए समझौतों पर भी बातचीत हुई, जिनमें सेवा व्यापार का आम समझौता और बौद्धिक सम्पदा अधिकार के व्यापार से जुड़े पहलुओं पर समझौते अब मूल संगठन “विश्व व्यापार संगठन” में समाहित हो गये हैं. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा शहर में है और इसके वर्तमान में भारत समेत 164 सदस्य देश हैं. इससे जुड़ने वाला नवीनतम देश अफगानिस्तान है.

विश्व व्यापार संगठन के कार्य

विश्व व्यापार संगठन के महत्त्वपूर्ण कार्यों का उल्लेख निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है –

  1. विश्व व्यापार समझौता एवं बहुपक्षीय समझौतों के कार्यान्वयन, प्रशासन एवं परिचालन हेतु सुविधाएँ प्रदान करना.
  2. व्यापार एवं प्रशुल्क से सम्बंधित किसी भी भावी मसले पर सदस्यों के बीच विचार-विमर्श हेतु एक मंच के रूप में कार्य करना.
  3. विवादों के निपटारे से सम्बंधित नियमों एवं प्रक्रियाओं को प्रशासित करना.
  4. व्यापार नीति समीक्षा प्रक्रिया से सम्बंधित नियमों एवं प्रावधानों को लागू करना.
  5. वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में अधिक सामंजस्य भाव लाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एवं विश्व बैंक से सहयोग करना, तथा
  6. विश्व संसाधनों का अनुकूलतम प्रयोग करना.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus:  सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : National Air Sports Policy

संदर्भ

हाल ही में, सरकार द्वारा ‘हवाई खेलों के लिए राष्ट्रीय नीति’ (National Air Sports Policy) का प्रारूप निर्गत किया गया है.

नीति के प्रमुख बिंदु

‘द्वि-स्तरीय प्रशासनिक संरचना’ (Two-tier governance structure): ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ के तहत, देश में एयर स्पोर्ट्स के लिए ‘टू-टियर गवर्नेंस स्ट्रक्चर’ अर्थात ‘द्वि-स्तरीय प्रशासनिक संरचना’ का प्रस्ताव किया गया है. इसमें शीर्ष स्तर पर, ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (Air Sports Federation of India – ASFI) शासी निकाय होगा तथा प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स’ के लिए एक ‘एसोसिएशन’ होगी.

ASFI के बारे में: ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (ASFI), ‘नागरिक उड्डयन मंत्रालय’ के अधीन एक स्वायत्त निकाय होगा, और यह ‘फ़ेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (Fédération Aéronaautique Internationale – FAI) तथा हवाई खेलों से संबंधित अन्य वैश्विक प्लेटफार्मों में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. ‘फ़ेडरेशन एरोनॉटिक इंटरनेशनेल’ (FAI) का मुख्यालय स्विट्जरलैण्ड के लॉज़ेन में है.

ASFI के कार्य: ‘एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ द्वारा नियमन, प्रमाणन, प्रतियोगिताएं, पुरस्कार और दंड आदि समेत हवाई खेलों के विभिन्न पहलुओं को प्रशासित किया जाएगा.

प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स एसोसिएशन’ के नियम और कार्य: प्रत्येक ‘एयर स्पोर्ट्स’ के लिए गठित ‘एसोसिएशन’, संबंधित खेलों के लिए उपकरण, बुनियादी ढांचे, कर्मियों और प्रशिक्षण हेतु अपने सुरक्षा मानकों का निर्धारण तथा ‘गैर-अनुपालन’ के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. ‘एसोसिएशन’ के द्वारा अपने इन दायित्वों को पूरा नहीं करने पर ASFI द्वारा दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ का विस्तार: इसमें एरोबेटिक्स, एरोमॉडलिंग, शौकिया तौर पर निर्मित और प्रायोगिक विमान, बैलूनिंग (Ballooning), ड्रोन, ग्लाइडिंग, हैंग ग्लाइडिंग, पैराग्लाइडिंग, माइक्रोलाइटिंग, पैरामोटरिंग (Paramotoring), स्काईडाइविंग और विंटेज एयरक्राफ्ट जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है.

पंजीकरण: ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ (NASP) के तहत, सेवाओं और संबंधित उपकरणों को प्रदान करने वाली संस्थाओं को पंजीकरण करवाना आवश्यक किया गया है, साथ ही इनके लिए दंड संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं.

भारतीय हवाई क्षेत्र का विभाजन: ‘नागरिक उड्डयन महानिदेशालय’ के ‘डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म’ के अनुसार, भारतीय हवाई क्षेत्र को लाल, पीले और हरे क्षेत्रों में विभाजित किया गया है. जिससे हवाई खेलों के प्रति उत्साही लोगों को मार्गदर्शन हेतु एक विश्वसनीय ‘मानचित्र’ आसानी से सुलभ हो सकेगा. ‘रेड जोन’ में ‘हवाई खेलों’ के संचालन हेतु केंद्र सरकार से अनुमति लेना आवश्यक होगा.

नियंत्रण क्षेत्र: अन्य मानव-सहित हवाई-जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु, देश में लोकप्रिय हवाई खेलों के आकर्षण क्षेत्रों, जैसे हिमाचल प्रदेश में बीर बिलिंग, सिक्किम में गंगटोक, महाराष्ट्र में हड़पसर और केरल में वागामोन (Vagamon) को हवाई खेलों के लिए “नियंत्रण क्षेत्र” (Control Zone) घोषित किया जा सकता है.

नीति का महत्त्व

  • हवाई खेलों से संबंधित गतिविधियों से राजस्व अर्जित होने के अलावा, विशेष रूप से देश के पहाड़ी क्षेत्रों में, यात्रा, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और स्थानीय रोजगार में वृद्धि के मामले में काफी अधिक लाभ होगा.
  • देश भर में ‘एयर स्पोर्ट्स हब’ का निर्माण करने से, पूरे विश्व से ‘एयर स्पोर्ट्स पेशेवर’ और पर्यटक भारत आएंगे.

आवश्यकता

एरोस्पोर्ट्स उद्योग द्वारा इस बात पर नाराजगी व्यक्त की जा रही थी, कि देश में विविध प्राकृतिक स्थानों और जबरदस्त क्षमता होने के बाद भी सरकार, द्वारा देश में एयरो स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए जा रहे हैं.

  • एरोस्पोर्ट, पर्यटन के विकास, रोजगार सृजन और विमानन गतिविधियों में रुचि के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा करते हैं.
  • एक विकासोन्मुख ‘राष्ट्रीय हवाई खेल नीति’ (NASP), नवीनतम एरोस्पोर्ट्स प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचे और सर्वोत्तम प्रथाओं में निवेश आकर्षित करने में सहायक हो सकती है.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप.

Topic : ECLGS

संदर्भ

हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा किए गए शोध अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार “आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना” (ECLGS) ने देश-भर में 5 लाख फर्मों को दिवालिया होने से बचाया है, जिसके परिणामस्वरूप 1.5 करोड़ नौकरियां बची हैं. राज्यों में गुजरात इस योजना का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है, इसके बाद महाराष्ट्र, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का स्थान है. ज्ञातव्य है कि केंद्र सरकार द्वारा “आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना” (ECGLS) को मार्च 2022 के अंत तक, या योजना के तहत 4.5 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, तक बढ़ा दिया गया है. इससे MSMEs को कम दरों पर ऋण मिलना सुनिश्चित होगा एवं वे अपने व्यवसाय पुन: प्रारम्भ कर सकेंगे.

विवरण

  • आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) को कोविड-19 और इसके बाद लॉकडाउन के कारण बनी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के एक निर्दिष्ट उपाय के रुप में बनाया गया है. इससे MSME क्षेत्र में विनिर्माण और अन्य गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
  • इस योजना का उद्देश्य आर्थिक परेशानी झेल रही MSME को पूरी गारंटी युक्त आपातकालीन क्रेडिट लाइन के रुप में तीन लाख करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराते हुए उन्हें राहत दिलाना है.
  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य सदस्य ऋणदात्री संस्थाओं यानी बैंकों, वित्तीय संस्थानों (FI), और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFC) को कोविड-19 संकट की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे MSME कर्जदारों को देने के लिए उनके पास अतिरिक्त फंडिंग सुविधा की उपलब्धता बढ़ाना है. उन्हें कर्जदारों द्वारा जीईसीएल फंडिंग का पुनर्भुगतान नहीं किए जाने की वजह से होने वाले किसी नुकसान के लिए 100% गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी.
  • ECLGS 3.0 के तहत 29 फरवरी, 2020 तक सभी ऋण देने वाली संस्थाओं की कुल बकाया ऋण के 40 प्रतिशत तक का विस्तार शामिल किया जाएगा.
  • ECLGS 3.0 के तहत दिए गए ऋणों का कार्यकाल 6 वर्ष का होगा, जिसमें 2 वर्ष की छूट अवधि शामिल होगी.

Prelims Vishesh

Dara Shikoh :-

  • मुगल राजकुमार दारा शिकोह की छवि बनाने के अपने प्रयासों को जारी रखते हुए, केंद्र सरकार उसके जीवन और आध्यात्मिक विरासत पर नाटकों की एक श्रृंखला आयोजित करने की योजना बना रही है.
  • दारा शिकोह (Dara Shikoh), मुग़ल बादशाह शाहजहाँ का सबसे बड़ा पुत्र था.
  • अपने भाई औरंगजेब के खिलाफ उत्तराधिकार की लड़ाई हारने के बाद उसकी हत्या कर दी गयी थी.
  • दारा शिकोह को हिंदू और इस्लामी परंपराओं के बीच समानता खोजने की कोशिश करने वाले एक “उदार मुस्लिम” के रूप में वर्णित किया जाता है.
  • उसने भगवद गीता और 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया.
  • शाहजहाँनामा के अनुसार, दारा शिकोह को पराजित करने के बाद औरंगजेब उसे जंजीरों में जकड़ कर दिल्ली ले आया. और उसका सिर काटकर आगरा के किले में भेज दिया गया, जबकि उसके धड़ को हुमायूँ के मकबरे के परिसर में दफना दिया गया.

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