Sansar डेली करंट अफेयर्स, 10 April 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 10 April 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Jyotirao Phule

संदर्भ

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महान समाज सुधारक, चिंतक, दार्शनिक एवं लेखक महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी है.

ज्योतिबा फुले

  • ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को हुआ था और निधन 28 नवंबर, 1890 को हुआ था.
  • उनका पूरा नाम ज्योतिराव गोविंदराव फुले था.
  • महात्मा ज्योतिबा फुले के पिता गोविंद राव एक किसान थे और पुणे में फूल बेचते थे. जब ये छोटे थे इनकी माँ का देहांत हो गया था. ज्योतिबा फुलेसमाजसेवी, लेखक, दार्शनिक और क्रांतिकारी के रुप में जाने जाते हैं.
  • महात्मा ज्योतिबा फुले ने जाति भेद, वर्ण भेद, लिंग भेद, ऊंच नीच के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी. यही नहीं उन्होंनेन्याय व समानता के मूल्यों पर आधारित समाज की परिकल्पना प्रस्तुत की.
  • वे महिला शिक्षा की खूब वकालत करते थे. यही वजह है कि 1840 में जब इनका विवाह सावित्रीबाई फुले से हुआ तो, उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढऩे के लिए प्रेरित किया.
  • 1852 में उन्होंने तीन स्कूलों की स्थापना की, लेकिन 1858 में फंड की कमी के कारण ये बंद कर दिए गए. सावित्रीबाई फुले आगे चलकर देश की पहली प्रशिक्षित महिला अध्यापिका बनीं. उन्होंने लोगों से अपने बच्चों को शिक्षा जरूर दिलाने का आह्वान किया.

उनके प्रेरणादायक विचार

  • स्वार्थ अलग-अलग रूप धारण करता है.कभी जाती का रूप लेता है तो कभी धर्म का.
  • अच्छा काम पूरा करने के लिए बुरे उपाय से काम नहीं लेना चाहिये.
  • आर्थिक असमानता के कारण किसानों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
  • शिक्षा स्त्री और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से आवश्यक है.
  • परमेश्वर एक है और सभी मानव उसकी संतान हैं.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Places of Worship (Special Provisions) Act, 1991

संदर्भ

हाल ही में वाराणसी की एक स्थानीय न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India – ASI) को काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ‘ज्ञानवापी मस्जिद’ का एक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है. इस सर्वेक्षण के जरिये यह पता लगाया जाएगा कि विद्यमान इमारत किसी प्रकार का “आरोपण”, “परिवर्तन या “परिवर्धन” है अथवा किसी भी अन्य धार्मिक इमारत की संरचनात्मक अतिव्याप्ति है. स्थानीय न्यायालय ने उक्त निर्णय एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद की भूमि हिंदुओं को सौंपने की माँग की गई थी.

पृष्ठभूमि

ज्ञातव्य है कि संसद द्वारा पूजा स्थलों के जबरन परिवर्तन पर रोक लगाने,  इनसे जुड़े विवादों पर पूर्ण विराम लगाने एवं देश की धार्मिक एकता को बनाये रखने के उद्देश्य से वर्ष 1991 में उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 पारित किया गया था.

उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 के प्रमुख प्रावधान

  • यह अधिनियम किसी भी उपासना स्थल को उसी स्वरूप में बनाए रखता है, जैसा कि वह 15 अगस्त, 1947 को था.
  • इस अधिनियम की धारा 4(2) में निर्दिष्ट है कि किसी भी धार्मिक स्थल से सम्बंधित यदि कोई भी वाद, अपील या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी न्यायालय, न्यायाधिकरण या प्राधिकरण के समक्ष लंबित है तो इस अधिनियम के पारित होने के साथ ही ऐसे सभी वाद. अपील और अन्य विधिक कार्यवाही को निरस्त मान लिया जाएगा.
  • हालाँकि यदि किसी धार्मिक स्थल का परिवर्तन 15 अगस्त 1947 के बाद किया जाता है तो ऐसे परिवर्तन को न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है और ऐसे स्थलों को पुनः उसी स्वरुप में लाया जाएगा, जैसा स्वरुप उनका 15 अगस्त 1947 को था.
  • अधिनियम की धारा 5 में अयोध्या के विवादित स्थल (राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद) को इस अधिनियम से छूट दी गई, क्योंकि वह मामला पहले से ही न्यायालय में था.
  • यह अधिनियम सरकार के लिये भी एक सकारात्मक दायित्व निर्धारित करता है कि वह हर पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र/प्रकृति को उसी प्रकार बनाए रखे जैसा कि वह स्वतंत्रता के समय था.
  • कानून में धार्मिक स्थलों की प्रकृति में “परिवर्तन” को भी व्यापक अर्थ दिया गया है, जैसे शिया सम्प्रदाय के धार्मिक स्थल को शिया सम्प्रदाय का ही रहने दिया जायेगा. इसी प्रकार आर्य समाज के स्थल को हिन्दू धर्म के अन्य सम्प्रदाय के स्थल के रूप में नहीं बदला जा सकता है.

आगे की राह

वर्ष 2019 में अयोध्या मामले के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने इस कानून का जिक्र करते हुए कहा था कि यह संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को प्रकट करता है और इसकी प्रतिगामिता को कठोरता से प्रतिबंधित करता है. हालाँकि, हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय उपासना स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है. इससे मथुरा और वाराणसी सहित देश भर के विभिन्‍न पूजा स्थलों के संदर्भ में मुकदमे दायर करने के लिये दरवाज़े खुल गए हैं.


GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Carbon Neutrality

संदर्भ

गैर-लाभकारी ऊर्जा और जलवायु खुफिया इकाई (non-profit Energy and Climate Intelligence Unit -ECIU) ने जानकारी दी है कि हाल ही में 32 देशों ने मध्य शताब्दी या उसके आस पास कार्बन तटस्थता (carbon neutral status) प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है .

प्रमुख बिन्दु

  • हाल ही में 32 देशों ने मध्य शताब्दी या उसके आस पास कार्बन तटस्थता (carbon neutral status) प्राप्त करने का लक्ष्य जरूर रखा है, परन्तु विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नेट कार्बन उत्सर्जन शून्य) प्राप्त करने हेतु संकल्पित देशों की सरकारों और व्यवसायों की संख्या में बढ़ोतरी तो हुई है, परन्तु विश्व अब भी उस लक्ष्य की प्राप्ति से दूर है.
  • वैसे संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में प्रयासों की पैरवी के लिये जलवायु कार्रवाई पर बल दिया है.

कार्बन न्यूट्रैलिटी (कार्बन तटस्थता)

  • कार्बन न्यूट्रैलिटी या नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का तात्पर्य है कि जितनी कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित की जाएगी, उतनी ही कार्बन डाईऑक्साइड वातावरण से हटाई जाएगी.
  • इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अर्थव्यवस्था के हर महत्त्वपूर्ण क्षेत्र को इको फ्रेंडली बनाना होता है.
  • विभिन्न देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को प्रदूषण फैलाने वाले कोयले और गैस व तेल से चलने वाले बिजली स्टेशनों की जगह, पवन या सौर ऊर्जा फार्म जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के ज़रिये सशक्त करना होता है.

वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कार्बन तटस्थता की स्थिति

  • विकसित देशों द्वारा कार्बन तटस्थता की घोषणाओं के बाद भी कार्बन के उत्सर्जन में अपेक्षाकृत कमी नहीं ला पा रहे हैं .
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भूमि उपयोग और भूमि उपयोग परिवर्तन एवं वन संबंधित उत्सर्जन (land use and land use change and forest related emissions) पर गंभीरता से विचार विचार नहीं किया है.
  • यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने के लिए एक कानून निर्मित किया गया है. यह सौदा यूरोपीय संघ के सभी सदस्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है. यह जलवायु कानून विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने के लिए यूरोप की योजनाओं के लिए एक आधार तैयार करेगा.
  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन के मामले में चीन सर्वप्रथम स्थान पर है और इसके पश्चात् अमरीका का स्थान आता है तथा तीसरे स्थान पर भारत है.

भारत की प्रतिबद्धता

  • विश्‍व सतत विकास शिखर सम्‍मेलन-2021 का उद्घाटन करने के बाद भारत ने कहा कि साझा प्रयासों से ही सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है और इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भारत अपनी भूमिका के लिए तैयार है.
  • भारत ने अप्रैल 2016 में औपचारिक रूप से पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे. भारत का लक्ष्य 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक उत्सर्जन को 33-35% तक कम करना है.
  • इसके साथ ही भारत का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त वनों के माध्यम से 2.5-3 अरब टन कार्बन डाई ऑक्साइड के बराबर कार्बन में कमी लाना है. भारत अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : What is net-zero and what are India’s objections?

संदर्भ

वैश्विक जलवायु नेतृत्व को पुनः हासिल करने के प्रयास में, अमेरिकी राष्ट्रपति ‘जो बिडेन’ द्वारा आयोजित आगामी ‘वर्चुअल क्लाइमेट लीडर्स समिट’ में अमेरिका द्वारा वर्ष 2050 तक के लिए ‘नेट-जीरो उत्सर्जन’ (net-zero emission) लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होने की व्यापक संभावना है.

नेट-ज़ीरो’  (Net-Zero) लिए प्रतिबद्ध अन्य देश

  1. ब्रिटेन और फ्रांस सहित कई अन्य देशों द्वारा वर्तमान सदी के मध्य तक ‘नेट-जीरो उत्सर्जन’ परिदृश्य हासिल करने का वादा करते हुए पहले से ही कानून बना जा चुके हैं. यहां तक ​​कि, चीन भी वर्ष 2060 तक नेट-ज़ीरो’ हासिल करने का वादा कर चुका है.
  2. यूरोपीय संघ द्वारा, पूरे यूरोप में, इससे संबंधित एक समान कानून तैयार करने पर काम कर रहा है, जबकि कनाडा, दक्षिण कोरिया, जापान और जर्मनी सहित कई अन्य देशों द्वारा नेट-ज़ीरो’ भविष्य के प्रति प्रतिबद्ध होने का संकल्प व्यक्त किया है.

नेट जीरो

  • ‘नेट-जीरो’ का अर्थ ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और पर्यावरण से समान मात्रा में उत्सर्जन हटाने के बीच का संतुलन है.
  • नेट जीरो एमिशन का मतलब एक ऐसी अर्थव्यवस्था तैयार करना है जिसमें जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग ना के बराबर हो, कार्बन उत्सर्जन करने वाली दूसरी चीजों का इस्तेमाल एक दम कम हो, जिन चीजों से कार्बन उत्सर्जन होता है उसे सामान्य करने के लिए कार्बन सोखने के इंतजाम भी साथ में किए जाएँ.
  • नेट जीरो एमिशन का अर्थ एक ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें कार्बन उत्सर्जन का स्तर लगभग शून्य हो. 
  • आने वाले वर्षों में अगर ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ जाएगा. इस बढ़ोत्तरी को दो डिग्री से कम रखने के लिए नेट जीरो एमिशन जैसी व्यवस्था बहुत ही आवश्यक है. 

मेरी राय – मेंस के लिए

 

कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहाँ नेट जीरो एमिशन को प्राप्त करना कठिन है. ऊर्जा के क्षेत्र में नेट जीरो एमिशन प्राप्त करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाना होगा. ऐसे अधिकतर स्रोत मौसम के हिसाब से काम करते हैं. ऐसे में मौसम के हिसाब से ऊर्जा पैदा कर उसे स्टोर करना होगा. इसके लिए इंटेलिजेंट ग्रिडों का निर्माण करना होगा. यह एक खर्चीला और समय लेने वाला काम है. हालाँकि हीटिंग, शिपिंग और कारखानों में कार्बन एमिशन को जीरो करना एक बड़ी चुनौती है. साथ ही बीफ जैसे खाने की बढ़ती मांग भी एक बड़ी चुनौती है जिसमें बड़ी मात्रा में मीथेन गैस निकलती है.

नेट जीरो एमिशन के लिए निगेटिव एमिशन का सहारा भी लेना होगा. निगेटिव एमिशन से अर्थ ऐसी चीजों से है जो कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखने का काम करते हैं. पेड़ ऐसी प्राकृतिक चीज है जो कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखने का काम करते हैं. इसके लिए बड़े स्तर पर पेड़ लगाने होंगे. साथ ही खेतों में मक्के जैसी फसलें लगानी होंगी जो बड़े होने के साथ ज्यादा कार्बन सोखती हैं. बायो एनर्जी का इस्तेमाल भी बढ़ाना होगा जिसमें कार्बन डाई ऑक्साइड का प्रयोग ऊर्जा उत्पादन में हो जाता है. साथ ही उद्योगों पर बंदिशें लगानी होंगी. इन बंदिशों के अनुसार जो उद्योग जितना अधिक उत्सर्जन करेंगे, उन्हें उतनी ही अधिक व्यवस्था इस प्रदूषण को सोखने के लिए करनी होगी. 2050 के लिए अभी से योजना बनाने की वजह यह है कि जीरो नेट एमिशन के लिए किए जाने वाले इंतजाम एक लंबी प्रक्रिया से होकर गुजरेंगे.


Prelims Vishesh

E9 initiative :-

  • हाल ही में, E9 पहल पर 59 देशों के शिक्षा मंत्रियों की एक परामर्श बैठक आयोजित की गई थी.
  • इस बैठक का उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG 4) सभी के लिए शिक्षा, की दिशा में प्रगति में तीव्रता लाने के लिए डिजिटल अधिगम को बढ़ावा देना था.
  • इस पहल का प्रयोजन शिक्षा प्रणाली में तेजी से परिवर्तन के माध्यम से सतत विकास लक्ष्य 4 के एजेंडा को आगे बढ़ाना और सुधार को तीव्र गति प्रदान करना है.
  • वर्ष 1993 में E9 साझेदारी स्थापित की गई थी और इसके सदस्य देशों में शामिल हैं:- बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, नाइजीरिया और पाकिस्तान.

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