Sansar डेली करंट अफेयर्स, 01-10 March 2022

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 01 March 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: द्विपक्षीय समूह और समझौते, भारत के हितों पर देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव.

Topic : War Crimes

संदर्भ

हाल ही में, ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ के एक अभियोजक द्वारा ‘रूस के आक्रमण के बाद “यूक्रेन की स्थिति” पर एक जांच शुरू की गयी है.

अभियोजक का मानना है, कि इस बात पर विश्वास करने के उचित आधार मौजूद हैं, कि वर्ष 2014 से यूक्रेन में तथाकथित ‘युद्ध अपराध’ (War Crimes) और ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ (Crimes Against Humanity) दोनों ही किए जा रहे हैं.

संबंधित प्रकरण

‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ (ICC) के लिए “आक्रामकता के अपराध के संबंध में” कई प्रश्न प्राप्त हुए है, किंतु यह न्यायालय “इस कथित अपराध पर अपने अधिकार क्षेत्र” का प्रयोग नहीं कर सकती है, क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों ही ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ की संस्थापक ‘रोम संविधि’ (Rome Statute) पर हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं.

लेकिन, अब ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ का मानना ​​​​है, कि इस न्यायालय के पास इस मामले में अपनी शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार क्षेत्र है, क्योंकि इससे पहले यूक्रेन दो बार – एक बार 2014 में रूस के क्रीमिया पर कब्जा करने के बाद तथा दूसरी बार, वर्ष 2015 में यूक्रेन द्वारा न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को “अनिश्चित अवधि” को मान्यता देते समय – न्यायालय के अधिदेश को स्वीकार कर चुका

क्या रूस द्वारा यूक्रेन में युद्ध अपराध किए गए है?

  • 28 फरवरी की सुबह, यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव (Kharkiv) के केंद्र में रूसी ग्रैड मिसाइलों ने कहर बरपाया.
  • यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के अनुसार, मिसाइलों से जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाया गया और यह हमला ‘युद्ध अपराध’ है.

‘युद्ध अपराध’ क्या होते है?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ‘युद्ध अपराध’ (War Crime), अंतर्राष्ट्रीय या घरेलू सशस्त्र संघर्ष के दौरान नागरिकों या ‘शत्रु लड़ाकों’ के खिलाफ किए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन होते है.

  • नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों के विपरीत, ‘युद्ध अपराध’ को सशस्त्र संघर्ष के संदर्भ में किए जाने वाले अपराधों को शामिल किया जाता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: मौलिक अधिकार, भारतीय संविधान

Topic : Accrediatation

संदर्भ

केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन दिशा-निर्देश, 2022 हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन (Accrediatation) दिशा-निर्देश, 2022 जारी किये गए हैं.

पत्रकारों के प्रत्यायन (Accrediatation) से तात्पर्य

कुछ आयोजनों में जहाँ राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति मौज़ूद होते हैं, वहाँ केवल मान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही परिसर से रिपोर्ट करने की अनुमति होती है. इसके अलाबा प्रत्यायन प्राप्त पत्रकारों को केन्द्रीय मंत्रालयों में भी प्रवेश की अनुमति प्राप्त होती है. इसके लिए आवेदनों की जांच प्रधान महानिदेशक (डीजी), पीआईबी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मीडिया प्रत्यायन समिति द्वारा की जाती है. वर्तमान में देश में मान्यता प्राप्त 2,457 पत्रकार हैं. यह कई श्रेणियों में प्रदान किया जाता है.

प्रत्यायन प्राप्त करने की आवश्यक शर्ते निम्न प्रकार हैं –

  • एक पत्रकार को पूर्णकालिक पत्रकार या समाचार संगठन में एक कैमरामैन के रूप में न्यूनतम 5 वर्ष का पेशेवर अनुभव होना चाहिये या पात्र बनने के लिये फ्रीलांसर के रूप में न्यूनतम 15 वर्ष का अनुभव होना चाहिये.
  • एक समाचार पत्र या पत्रिका के लिये न्यूनतम दैनिक संचलन 10,000 होना चाहिये और समाचार एज़ेसियों के पास कम-से-कम 100 ग्राहक होने चाहिये. विदेशी समाचार संगठनों और विदेशी पत्रकारों पर भी इसी तरह के नियम लागू होते हैं.
  • डिजिटल समाचार प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने वाले पत्रकार भी पात्र हैं, बशर्ते वेबसाइट पर प्रतिमाह न्यूनतम 10 लाख विशिष्ट विज़िटर होने चाहिये.

नये दिशा-निर्देशों के अनुसार पत्रकारों का प्रत्यायन रद्द किया जा सकता है यदि –

  • कोई पत्रकार देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था के लिये गलत तरीके से कार्य करता है या उस पर गंभीर संज्ञेय अपराध का आरोप है.
  • यदि उसका कार्य शालीनता या नैतिकता के प्रतिकूल है या न्यायालय की अवमानना, मानहानि या किसी अपराध हेतु उकसाने से संबंधित है.

इन नये दिशा निर्देशों से जुड़ी चिंताएँ

  • प्रत्यायन रद्द करने की शक्ति कुछ अधिकारियों को सौंप दी गई है, निर्णय लेने में उनके विवेक का महत्त्व बढ़ गया है. 
  • सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले पत्रकारों को राजनेताओं, अधिकारियों द्वारा डराया, धमकाया जा सकता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय.

Topic : CPEC

संदर्भ

हाल ही में, चीन-पाकिस्तान ने 60 बिलियन डालर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के दूसरे चरण को शुरू करने के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए.

पिछले वर्ष पाकिस्तान ने CPEC परियोजना को तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तारित करने की बात कही थी. इसके पहले चीन भी कह चुका है कि वह CPEC को अफ़ग़ानिस्तान तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है. चीन ने CPEC परियोजना के सम्बन्ध में सफाई देते हुए यह भी कहा कि यह केवल एक आर्थिक गलियारा है और किसी तीसरे देश को घेरने के लिए नहीं बनाया गया है.

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)

  • CPEC चीन के One Belt One Road (OBOR) कार्यक्रम का एक अंग है.
  • CPEC 51 अरब डॉलर की कई परियोजनाओं का समूह है.
  • प्रस्तावित परियोजना के लिए पाकिस्तान सरकार को जिन संस्थाओं द्वारा धन मुहैया कराया जाएगा, वे हैं – EXIM बैंक ऑफ़ चाइना, चाइना डेवलपमेंट बैंक और इंडस्ट्रियल & कमर्शियल बैंक ऑफ़ चाइना.
  • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का उद्देश्य पाकिस्तान के बुनियादी ढांचों को तेजी से विस्तार करना और उन्नत करना है जिससे चीन और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो जाएँ.
  • CPEC अंततोगत्वा दक्षिणी-पश्चिमी पाकिस्तान के ग्वादर शहर को चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र Xinjiang को राजमार्गों और रेलमार्गों से जोड़ेगा.
  • CPEC की लम्बाई 3,000 km है जिसमें राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन बिछेगी.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय.

Topic : Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act – CAATSA

संदर्भ

वर्तमान में जारी ‘यूक्रेन संकट’ पर और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच, भारत के समक्ष ‘एस-400’ समझौते को लेकर, निकट भविष्य में समय पर रक्षा प्रणाली की डिलीवरी पर अनिश्चितता तथा ‘अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों को प्रतिबंधो के माध्यम से प्रत्युत्तर अधिनियम‘ (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act – CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने के खतरे का भी सामना कर रहा है. विदित हो कि, भारत के मॉस्को और कीव, दोनों के साथ प्रमुख रक्षा सहयोग संबंध हैं.

वर्तमान चिंता का विषय

  1. अतीत में, रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव की वजह से ‘भारतीय वायु सेना’ (IAF) के ‘AN-32 परिवहन बेड़े’ के आधुनिकीकरण में काफी देरी हो चुकी है.
  2. अतः, नवीनतम चिंता यह है, कि इस युद्ध के परिणामस्वरूप, रूस की अपनी घरेलू प्रतिबद्धताओं तथा पश्चिम द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण, रूस से भारत को एस-400 रक्षा प्रणाली की होने वाली डिलीवरी में देरी हो सकती है.

CAATSA क्या है?

  • CAATSA का पूरा रूप है – Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act अर्थात् प्रतिबंधों के माध्यम से अमेरिका के शत्रुओं से निबटने से सम्बंधित अधिनियम.
  • यह अमेरिका का एक संघीय अधिनियम है जिसके द्वारा ईरान उत्तरी कोरिया और रूस पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. इस अधिनियम में यह प्रावधान भी है की रूस के साथ रक्षा और गुप्त सूचना प्रक्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण लेनदेन करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लागू किये जा सकते हैं.
  • परन्तु भारत के साथ अमेरिका की रक्षा भागीदारी को देखते हुए अमेरिका ने भारत के विरुद्ध CAATSA लगाने नहीं जा रहा है, ऐसा रूस के साथ हुए सौदे पर उसकी नरम प्रतिक्रिया से ज्ञात हो रहा है.

S-400 क्या है?

  • यह एक हवाई प्रतिरक्षा प्रणाली है जो आकाश में शत्रु के विमान को धरती पर से ही भेद सकती है.
  • यह रूस की सर्वाधिक उन्नत प्रणाली है जो 380 km. दूर स्थित बमवर्षकों, जेटों, मिसाइलों और ड्रोनों को भी नष्ट कर सकती है.
  • यह प्रणाली रूस में 2007 से काम कर रही है.
  • इस प्रणाली का निर्माण Almaz-Antey ने किया है.

Sansar Daily Current Affairs, 02 March 2022


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: द्विपक्षीय समूह और समझौते, भारत के हितों पर देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव.

Topic : Falkland Islands sovereignty dispute

संदर्भ

चीन द्वारा हाल ही में फ़ॉकलैंड द्वीप समूह को अर्जेंटीना का हिस्सा बताये जाने के बाद से ब्रिटेन एवं अर्जेंटीना के बीच लम्बे समय से चल रहा यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है. ब्रिटेन द्वारा चीन के बयान की निंदा की गई है.

फ़ॉकलैंड द्वीप समूह विवाद की पृष्ठभूमि

अर्जेंटीना और इसके तट से लगभग 300 मील पूर्व में स्थित फ़ॉकलैंड द्वीप समूह लम्बे समय तक स्पेन के अधीन रहे. पहली बार वर्ष 1765 में ब्रिटिश लोगों द्वारा इस द्वीप पर बस्ती बनाई गई लेकिन वर्ष 1770 में उन्हें स्पेन द्वारा खदेड़ दिया गया.

वर्ष 1816 में अर्जेंटीना स्पेन से स्वतंत्र हो गया, उसने वर्ष 1820 में फ़ॉकलैंड पर अपनी संप्रभुता की घोषणा की. वर्ष 1831 में अमेरिकी युद्धपोत ने पूर्वी फ़ॉकलैंड (सोलेदाद द्वीप) पर अर्जेंटीना की बस्ती को नष्ट कर दिया. इसके बाद वर्ष 1833 से यहाँ ब्रिटिश शासन रहा. अर्जेंटीना द्वीप समूह पर ब्रिटेन के कब्ज़े का लगातार विरोध करता रहा.

द्वितीय विश्व युद्ध के उपनिवेशवाद विरोधी बहस के दौरान संयुक्त राष्ट्र में फ़ॉकलैंड द्वीप समूह का मुद्दा भी उठा. वर्ष 1965 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विवाद का शांतिपूर्ण समाधान खोजने हेतु ब्रिटेन और अर्जेंटीना को विचार-विमर्श के लिये आमंत्रित करने वाले एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी. इस दौरान ही वर्ष 1982 में अर्जेंटीना की सैन्य सरकार ने फ़ॉकलैंड पर आक्रमण कर दिया लेकिन उन्हें आत्म समर्पण करना पड़ा. ब्रिटेन ने द्वीप समूह पर कब्ज़ा बरकरार रखा तथा यहाँ सैनिकों को नियुक्त किया.

वर्ष 2009 में एक नया संविधान लागू हुआ, जिसने फ़ॉकलैंड की स्थानीय लोकतांत्रिक सरकार को मज़बूती प्रदान की और इस क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति को निर्धारित करने के लिये वहाँ रहने वाले लोगों के अधिकारों को सुरक्षित किया. वर्ष 2013 में आयोजित एक जनमत संग्रह में फ़ॉकलैंड द्वीप ने ब्रिटिश क्षेत्र बने रहने के लिये लगभग सर्वसम्मति से मतदान किया.

वर्तमान स्थिति

  • फ़ॉकलैंड द्वीप समूह या माल्विनास द्वीप वर्तमान में ब्रिटेन का समुद्रपारीय क्षेत्र है.
  • दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित फ़ॉकलैंड द्वीप समूह, दो मुख्य द्वीप पूर्वी फ़ॉकलैंड एवं पश्चिमी फ़ॉकलैंड तथा लगभग 200 छोटे द्वीपों से मिलकर बना है.
  • पूर्वी फ़ॉकलैंड पर राजधानी और प्रमुख शहर स्टेनली स्थित है, यहाँ कई बिखरी हुई छोटी बस्तियाँ और साथ ही एक रॉयल एयरफोर्स बेस भी है जो माउंट प्लेजेंट में स्थित है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Ban on drone import to boost domestic manufacturing

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने “मेड इन इंडिया” ड्रोन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ड्रोन आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है. हालांकि ड्रोन के पुर्जों के आयात पर कोई रोक नहीं होगी. सुरक्षा, अनुसंधान और रक्षा उद्देश्यों के लिए सरकार की अनुमति के साथ ड्रोन का आयात किया जा सकेगा. ड्रोन नियमों को उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाना एवं ड्रोन रिसर्च एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सितम्बर 2021 में नये ड्रोन नियम लाये गये थे.

प्रमुख बिंदु

  • ड्रोन संचालित करने के लिए भरे जाने वाले प्रपत्रों (फॉर्म्स) की संख्या को 25 प्रपत्रों से घटाकर 6 कर दिया गया है.
  • पंजीकरण या लाइसेंस लेने के पहले सिक्योरिटी क्लीयरेंस की आवश्यकता नहीं होगी.
  • माइक्रो ड्रोन (गैर-व्यापारिक इस्तेमाल के लिये), नैनो ड्रोन और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के लिये पायलट लाइसेंस दरकार नहीं होगा.
  • शुल्क को न्यूनतम स्तर पर किया गया. ड्रोन के आकार से उसका कोई सम्बंध नहीं.
  • डिजीटल स्काई प्लेटफार्म पर हरे, पीले और लाल जोन के तौर पर वायुसीमा मानचित्र प्रदर्शित किया जायेगा.
  • भारत में पंजीकृत विदेशी कंपनियों द्वारा ड्रोन संचालन के लिये कोई बाध्यता नहीं होगी.
  • उड़ान-योग्यता प्रमाणपत्र जारी करने की जिम्मेदारी क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की होगी.
  • घरेलू ड्रोन निर्माताओं को संरक्षण प्रदान करते हुए डीजीएफटी द्वारा ड्रोन और ड्रोन के पुर्जों के आयात को नियमित किया जायेगा.
  • ड्रोन नियम, 2021 के तहत ड्रोन कबरेज को 300 किलोग्राम से बढ़ाकर 500 किलोग्राम किया गया. इसमें ड्रोन टैक्सी को भी शामिल किया गया है.
  • समस्त ड्रोन प्रशिक्षण और परीक्षण अधिकृत ड्रोन स्कूल करेगा.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Semiconductors

संदर्भ

रूस और यूक्रेन, वैश्विक स्तर पर ‘अर्धचालक आपूर्ति श्रृंखला’ (Semiconductor Supply Chain) के महत्त्वपूर्ण केंद्र हैं. ये दोनों देश इस उद्योग के लिए ‘पैलेडियम’ जैसी दुर्लभ धातुएं और ‘नियॉन’ जैसी गैसें  उपलब्ध कराते हैं, जिनका लगभग सभी आधुनिक उपकरणों और उपकरणों में मौजूद सिलिकॉन वेफर्स के उत्पादन में उपयोग किया जाता है.

मौजूदा रूस-यूक्रेन संकट के बीच, तनाव एवं युद्ध की स्थिति ‘सेमीकंडक्टर चिप्स की वैश्विक स्तर पर कमी’ को और खराब कर सकती है.

संबंधित प्रकरण

जिस तरह, वैश्विक अर्धचालक उद्योग  (Semiconductor Industry) के लिए रूस दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति करता है, उसी तरह यूक्रेन, चिप-उत्पादन उद्योग के लिए आवश्यक गैसों की आपूर्ति करता है. इस प्रकार, अर्धचालकों की आपूर्ति श्रृंखला में तनाव बढ़ाने की संभावना है. सेमीकंडक्टर चिप्स, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑटो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण के लिए काफी महत्त्वपूर्ण हैं.

सेमीकंडक्टर चिप्स का महत्त्व

  • ‘सेमीकंडक्टर चिप्स’, सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ‘सूचना और संचार प्रौद्योगिकी’ उपकरणों के ‘दिल और दिमाग’ के रूप में कार्य करने वाले बुनियादी ‘बिल्डिंग ब्लॉक्स’ होते हैं.
  • ये चिप्स अब समकालीन ऑटोमोबाइल, घरेलू गैजेट्स और ईसीजी मशीनों जैसे आवश्यक चिकित्सा उपकरणों का एक अभिन्न अंग बन चुके हैं.

इनकी मांग में हालिया वृद्धि

  • कोविड -19 महामारी की वजह से, दिन-प्रतिदिन की आर्थिक और आवश्यक गतिविधियों के बड़े हिस्से को ऑनलाइन रूप से किए जाने या इन्हें डिजिटल रूप से सक्षम बनाए जाने के दबाव ने, लोगों के जीवन में चिप-संचालित कंप्यूटर और स्मार्टफोन की ‘केंद्रीयता’ को उजागर कर दिया है.
  • दुनिया भर में फ़ैली महामारी और उसके बाद लगाए गए लॉकडाउन की वजह से जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और अमेरिका सहित देशों में ‘महत्त्वपूर्ण चिप बनाने वाली सुविधाओं’ को भी बंद कर दिया गया.
  • ‘सेमीकंडक्टर चिप्स’ की कमी का व्यापक अनुवर्ती असर पड़ता है. पहले ‘चिप्स’ का अधिक मात्रा में भंडारण किए जाने से इसकी मांग में वृद्धि होती है, जो बाद में आपूर्ति में कमी का कारण बन जाती है.

भारत की सेमीकंडक्टर मांग और संबंधित पहलें

  • भारत में, वर्तमान में सभी प्रकार की चिप्स का आयात किया जाता है, और वर्ष 2025 तक इस बाजार के 24 अरब डॉलर से 100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा, हाल ही में, एक ‘अर्धचालक और प्रदर्शन विनिर्माण पारितंत्र’ (Semiconductors and Display Manufacturing Ecosystem) के विकास में सहयोग करने के लिए ₹76,000 करोड़ की राशि आवंटित की गयी है.
  • भारत ने ‘इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स एंड सेमीकंडक्टर्स’ के निर्माण को बढ़ावा देने हेतु योजना (Scheme for Promotion of Manufacturing of Electronic Components and Semiconductors) भी शुरू की है, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों और अर्धचालकों के निर्माण के लिए आठ साल की अवधि में 3,285 करोड़ रुपये का बजट परिव्यय मंजूर किया गया है.

आगे की चुनौतियां:

  1. उच्च निवेश की आवश्यकता
  2. सरकार की ओर से न्यूनतम वित्तीय सहायता
  3. संरचना क्षमताओं (Fab Capacities) की कमी
  4. PLI योजना के तहत अपर्याप्त अनुदान
  5. संसाधन अक्षम क्षेत्र

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : IPCC Report

हाल ही में, ‘अंतर-सरकारी जलवायु परिवर्तन समिति’ (Intergovernmental Panel on Climate Change- IPCC)  की छठी आकलन रिपोर्ट (Sixth Assessment Report) का दूसरा भाग जारी किया गया.

  • रिपोर्ट के इस दूसरे भाग में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, जोखिमों और कमजोरियों और अनुकूलन विकल्पों के बारे में आकलन किया गया है.
  • रिपोर्ट का पहला भाग, पिछले साल अगस्त में जारी किया गया था, जोकि जलवायु परिवर्तन के वैज्ञानिक आधार पर केंद्रित था.

‘छठी आकलन रिपोर्ट’ (AR6) क्या है?

संयुक्त राष्ट्र द्वारा गठित ‘जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल’ (IPCC) की छठी आकलन रिपोर्ट (Sixth Assessment Report – AR6), जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैज्ञानिकतकनीकी और सामाजिक-आर्थिक जानकारी का आकलन करने के उद्देश्य से तैयार की जाने वाली रिपोर्टों की एक श्रृंखला में छठी रिपोर्ट है.

  • यह रिपोर्ट अतीत, वर्तमान और भविष्य की जलवायु का अवलोकन करते हुए जलवायु परिवर्तन की  भौतिकी का आंकलन करती है.
  • इस रिपोर्ट में, मानव-जनित उत्सर्जन की वजह से हमारे ग्रह में होने वाले परिवर्तन और हमारे सामूहिक भविष्य के लिए इसके निहितार्थों के बारे में बताया गया है.

पहली आकलन रिपोर्ट वर्ष 1990 में जारी की गयी थी. इस रिपोर्ट में, पृथ्वी की जलवायु की स्थिति का सबसे व्यापक मूल्यांकन किया जाता है.

अब तक, क्रमशः 1990, 1995, 2001, 2007 और 2015 में पांच आकलन रिपोर्टें जारी की जा चुकी हैं.

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

  • नवीनतम रिपोर्ट में, पहली बार, जलवायु परिवर्तन के क्षेत्रीय और क्षेत्रीय प्रभावों का आकलन किया गया है.
  • इसमें दुनिया भर के मेगा-शहरों के समक्ष खड़े जोखिमों और उनकी कमजोरियों को शामिल किया गया है. उदाहरण के लिए, रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में समुद्र के स्तर में वृद्धि और बाढ़ का उच्च जोखिम मजूद है, जबकि अहमदाबाद में ग्रीष्म लहरों का गंभीर खतरा है.

स्वास्थ्य पर प्रभाव

पहली बार, आईपीसीसी रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के स्वास्थ्य प्रभावों का अवलोकन किया गया है.

  • रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से- विशेष रूप से एशिया के उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में- मलेरिया और डेंगू जैसे वेक्टर जनित और जल जनित रोगों में वृद्धि हो रही है.
  • तापमान में वृद्धि होने की वजह से, संचार, श्वसन, मधुमेह और संक्रामक रोगों से संबंधित मौतों के साथ-साथ, शिशु मृत्यु दर में भी वृद्धि होने की संभावना है.
  • ग्रीष्म लहरों, बाढ़ एवं सूखे जैसी चरम मौसमी घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति, और यहां तक ​​कि वायु प्रदूषण भी कुपोषण, एलर्जी संबंधी बीमारियों के साथ-साथ ‘मानसिक विकारों’ में भी योगदान दे रहे हैं.

भारत विशिष्ट अध्ययन

रिपोर्ट में भारत को एक संवेदनशील हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है, जिसके कई क्षेत्र और महत्त्वपूर्ण शहर बाढ़, समुद्र के स्तर में वृद्धि और ग्रीष्म लहरों जैसी जलवायु आपदाओं के बहुत अधिक जोखिम का सामना कर रहे हैं.

  • मुंबई, समुद्र के स्तर में वृद्धि और बाढ़ के उच्च जोखिम का सामना कर रहा है.
  • अहमदाबाद, ग्रीष्म-लहरों के गंभीर खतरे का सामना कर रहा है.
  • चेन्नई, भुवनेश्वर, पटना और लखनऊ सहित कई शहर, गर्मी और उमस के खतरनाक स्तर के करीब पहुंच रहे हैं.
  • परिवहन, पानी, स्वच्छता और ऊर्जा प्रणालियों सहित बुनियादी ढांचे को, चरम एवं धीमी शुरुआत वाली जलवायु घटनाओं की वजह से नुकसान पंहुच रहा है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक नुकसान, सेवाओं में व्यवधान और लोक-कल्याण पर प्रभाव पड़ता है.
  • 2050 तक 877 मिलियन की अनुमानित आबादी – 2020 की 480 मिलियन आबादी से लगभग दोगुना- के साथ शहरी भारत, देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक जोखिम में है.
  • आईपीसीसी के अनुसार, वर्तमान में, भारत में ‘वेट-बल्ब तापमान’ (Wet-Bulb Temperatures) शायद ही कभी 31 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो पाता है. आमतौर पर, देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम वेट-बल्ब तापमान 25-30 डिग्री सेल्सियस रहता है.

Sansar Daily Current Affairs, 03 March 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय.

Topic : Biju Swasthya Kalyan Yojana

संदर्भ

हाल ही में, ओडिशा सरकार द्वारा अपनी प्रमुख ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ (Biju Swasthya Kalyan Yojana) के तहत लाभार्थियों को ‘स्मार्ट स्वास्थ्य कार्ड’ वितरित किए गए हैं.

‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ के बारे में

इस योजना का आरंभ 15 अगस्त 2018 को किया गया था.

इसका उद्देश्य, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के स्वास्थ्य संरक्षण पर विशेष जोर देना और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है.

इस योजना के दो घटक हैं

  1. पहला, उपकेंद्र स्तर से लेकर जिला मुख्यालय अस्पताल स्तर तक, राज्य सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं में सभी के लिए (आय, स्थिति या निवास की परवाह किए बिना) मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं.
  2. दूसरा, राज्य में 70 लाख से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल स्तर से आगे मुफ्त स्वास्थ्य सेवा की अतिरिक्त सुविधा.

पात्रता

पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर की गयी घोषणा के बाद, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और राज्य खाद्य सुरक्षा अधिनियम (SFSA) के तहत आने वाले सभी परिवार भी ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ (BSKY) के तहत लाभ पाने के पात्र हो गए है.

इस योजना के तहत लाभ

  • बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के तहत नामांकित प्रत्येक परिवार, राज्य सरकार से 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता पाने के लिए पात्र होता है, जबकि महिलाओं को इस योजना के तहत 10 लाख रुपये का सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है.
  • ‘जिला मुख्यालय अस्पताल स्तर तक के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में, सभी व्यक्तियों के लिए मुफ्त दवाएं, मुफ्त निदान, मुफ्त डायलिसिस, मुफ्त कैंसर कीमोथेरेपी, मुफ्त ओटी, मुफ्त आईसीयू, इन-पेशेंट प्रवेश आदि सहित सभी स्वास्थ्य सेवाएं मुफ्त उपलब्ध करायी जाती हैं.

‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ बनाम ‘आयुष्मान भारत’

‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ (BSKY) की शुरुआत के लगभग एक महीने बाद, केंद्र सरकार द्वारा 28 सितंबर, 2018 को अपनी स्वास्थ्य योजना – ‘आयुष्मान भारत’ – लॉन्च की गयी थी.

ओडिशा, केंद्र सरकार की स्वास्थ्य कवरेज योजना को स्वीकार नहीं करने वाले चार राज्यों में से एक है.

मुख्य अंतर

  • पैकेज सीमा (Package Cap): आयुष्मान भारत के तहत सालाना 5 लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है, जबकि ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ के तहत 10 लाख रुपये तक प्रदान किए जाते हैं.
  • कवरेज: ‘बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना’ के तहत 90 लाख से अधिक परिवारों को कवर किया गया है, जबकि ‘आयुष्मान भारत’ के तहत केवल 60 लाख परिवारों को कवर किया जा सकता है.

GS Paper 2 Source : PIB

pib_logo

 

 

UPSC Syllabus: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय.

Topic : Intensified Mission Indradhanush (IMI)

संदर्भ

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाबिया ने गहन मिशन इन्द्रधनुष (IMI) 4.0 लॉन्च किया है. IMI 4.0 का पहला दौर फरवरी 2022 से अप्रैल 2022 के दौरान लागू किया जाएगा. पहले दौर में, 11 राज्य IMI 4.0 का संचालन करेंगे. इन राज्यों में असम, गुजरात, उत्तराखंड, मेघालय, जम्मू और कश्मीर, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा शामिल हैं.

गहन मिशन इंद्रधनुष (IMI) 4.0 के बारे में

  • वर्ष 2017 में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत कवर न हो पाने वाले गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मुफ्त में टीकाकरण प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा गहन मिशन इन्द्रधनुष (IMI) पहल आरंभ की गई थी.
  • यह मिशन तेजी से बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज प्राप्त करने में मदद करेगा.
  • IMI 4.0 के तीन राउंड होंगे और यह 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 416 जिलों में आयोजित किया जाएगा. इसमें आजादी का अमृत महोत्सव के लिए चिन्हित 75 जिले भी शामिल हैं.

मिशन इन्द्रधनुष

  • भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 25 दिसंबर 2014 को “मिशन इन्द्रधनुष” की शुरुआत की थी. मिशन इन्द्रधनुष एक बूस्टर टीकाकरण कार्यक्रम है जो कम टीकाकरण कवरेज वाले 201 ज़िलों में शुरू हुआ था.
  • इस सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम में 7 रोगों के खिलाफ 7 टीकों के लिए टीकाकरण को शामिल किया गया है. ये रोग हैं – तपेदिक, पोलियोमाइलाइटिस, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, पर्ट्सिस, टिटेनस और खसरा.
  • इसके अलावा खसरा रूबेला, रोटावायरस, हिमोफिलस इन्फलूएंजा टाइप-बी और पोलियो के खिलाफ टीकों को शामिल करने के बाद इन टीकों की संख्या 12 हो गई है. अब तक मिशन इंद्रधनुष के 10 चरण पूरे हो चुके हैं. परे भारत में 701 जिलों को कवर किया गया है. अप्रैल 2021 तक 96.8 लाख गर्भवती महिलाओं और 3.86 करोड़ बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Aravali Biodiversity Park

संदर्भ

हरियाणा के गुरुग्राम में अरावली जैव विविधता पार्क को भारत का पहला “अन्य प्रभावी क्षेत्र- आधारित संरक्षण उपाय” (Other Effective Area – based Conservation Measures – OCEM) साइट घोषित किया गया है.

IUCN उन क्षेत्रों को OCEM टैग देता है जो संरक्षित नहीं हैं लेकिन समृद्ध जैव विविधता का समर्थन करते हैं. अरावली जैव विविधता पार्क को OCEM बनाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा किया गया था.

अरावली जैव विविधता पार्क

  • यह पार्क हरियाणा के गुरुग्राम में लगभग 390 एकड़ क्षेत्र में फैला है. इसे दिल्‍ली का हरा फेफड़ा माना जाता है. यह दिल्ली को 7.07% ऑक्सीजन प्रदान करती है.
  • इसमें अर्ध-शुष्क वनस्पति पाई जाती है. इसमें 43,000 से अधिक झाड़ियाँ, 1,01,000 पेड़ और 300 स्थानिक पौधों की प्रजातियाँ हैं.
  • पहले यह पार्क एक खनन स्थल था. स्थानीय आबादी के साथ पर्यावरणविदों, वैज्ञानिकों, पारिस्थितिकीविदों के अपार प्रयासों से इसे शहर के जंगल में बदल दिया गया.
  • दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में से एक ‘अरावली’ को ‘दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र’ का ‘हरा फेफड़ा’ – इस क्षेत्र के लिए एक महत्त्वपूर्ण जल पुनर्भरण क्षेत्र- माना जाता है. यह क्षेत्र, तेंदुए, सांभर, लोमड़ी, और सियार आदि जीवों से समृद्ध है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Artemis Program

संदर्भ

नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम (Artemis Program) की चंद्रमा पर पहली क्रू लैंडिंग, वर्ष 2026 में होने की संभावना है. इस बीच, नासा द्वारा मई 2022 में आर्टेमिस 1 (Artemis 1) को लॉन्च किया जाएगा.

देरी के कारण: NASA के अनुसार, मानव के सतह पर उतरने संबंधी प्रणाली (Human Landing System) और नासा के अगली पीढ़ी के स्पेससूट के विकास और परीक्षण हेतु अभी और अधिक्त समय चाहिए.

आर्टेमिस अभियान क्या है?

  • ARTEMIS का पूरा नाम है – Acceleration, Reconnection, Turbulence and Electrodynamics of the Moon’s Interaction with the Sun.
  • इस अभियान में दो अन्तरिक्षयान छोड़े गये थे – P1 और शुरू-शुरू में ये दोनों अन्तरिक्षयान पृथ्वी के प्रकाशपुंज (aurora) का अध्ययन करने के लिए पृथ्वी की कक्षा में छोड़े गये थे. उस समय इस अभियान का नाम थेमिस था. बाद में इन दोनों अन्तरिक्षयानों को चंद्रमा की ओर मोड़ दिया गया जिससे कि ये अपनी शक्ति खोने से बच सकें.
  • नए अभियान से वैज्ञानिक यह आशा करते हैं कि वे इन विषयों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकेंगे – चंद्रमा और पृथ्वी के लेग्रेंज बिंदु, सौर पवन, चंद्रमा का प्लाज्मा वेक और पृथ्वी के चुम्बकीय पुच्छ तथा चंद्रमा की अपनी दुर्बल चुम्बकीयता पर सौर पवन का प्रभाव.

Sansar Daily Current Affairs, 04 March 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय.

Topic : WHO’s pandemic treaty

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सदस्यों द्वारा 24 फरवरी, 2022 को स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय “महामारी संधि” (Pandemic Treaty) के लिए पहले दौर की वार्ता का आयोजन किया गया.

बैठक का उद्देश्य, भविष्य में फैलने वाली महामारियों को रोकने हेतु, एवं महामारी फैलने की स्थिति से निपटने हेतु तैयारी और प्रतिक्रिया में सुधार करने के लिए “अभिसमय, समझौते या अन्य अंतर्राष्ट्रीय उपायों” पर काम करने के तरीकों और समयसीमा पर सहमत होना था.

‘महामारी संधि’ के बारे में

दिसंबर 2021 में, ‘स्वास्थ्य सभा’ (Health Assembly) द्वारा- अपनी स्थापना के बाद- अपने दूसरे विशेष सत्र में “द वर्ल्ड टुगेदर” शीर्षक से एक निर्णय पारित किया गया था.

  • निर्णय के तहत, स्वास्थ्य संगठन द्वारा WHO संविधान के अनुच्छेद 19 के अनुपालन में, ‘महामारी संधि’ की सामग्री का मसौदा तैयार करने और वार्ता करने हेतु एक अंतर सरकारी वार्ता निकाय (Intergovernmental Negotiating Body – INB) की स्थापना की गयी थी.
  • ‘महामारी संधि’ में उभरते हुए वायरस के डेटा साझाकरण और जीनोम अनुक्रमण और टीकों और दवाओं के समान वितरण और दुनिया भर में संबंधित अनुसंधान जैसे पहलुओं को शामिल करने की उम्मीद है.

आवश्यकता

  • कोविड-19 महामारी के समाधान में अब तक टीकों का असमान वितरण देखा गया है, और गरीब देश निवारक दवा प्राप्त करने के लिए दूसरों की दया पर निर्भर रहे हैं.
  • अधिकांश देशों द्वारा “पहले मैं” (Me-First) का दृष्टिकोण अपनाया गया, जोकि वैश्विक महामारी से निपटने का एक प्रभावी तरीका नहीं है.

यह संधि, वर्तमान या भविष्य की महामारियों से लड़ने के लिए उठाया गया पर्याप्त कदम क्यों नहीं है?

इस संधि में केवल एक विशेष मुद्दे से निपटने के लिए सिफारिशें प्रदान की गयी है, जबकि देशों के लिए, विशेषकर भूमध्यरेखा के दक्षिण में स्थित देशों को सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए संसाधनों और क्षमताओं की आवश्यकता की अनदेखी की गयी है.

  • इन कमियों या क्षमता-असमानताओं को दूर करने पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. अमीर देशों में चार महीनों में कहीं अधिक बूस्टर शॉट्स दिए जा चुके हैं, जबकि गरीब देशों में पूरे साल टीकाकरण जारी रहा है. यह तथ्य वैश्विक उत्तर और दक्षिण में क्षमता-असमानता को दर्शाता है.
  • किसी भी वैश्विक प्रयास के तहत, क्षमताओं के समान वितरण को सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि वैश्विक दक्षिण में स्थित देशों और क्षेत्रों को आवश्यक दवाओं, सामग्रियों, निर्माण और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संप्रभुता प्राप्त हो सके.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : African Union Summit

संदर्भ

हाल ही में अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन (African Union Summit) इथियोपिया के अदीस अबाबा में आयोजित किया गया. सम्मेलन में सदस्य देशों ने कई अफ्रीकी देशों में कोविड टीकों की अनुपलब्धता के बारे में चर्चा की. उल्लेखनीय है कि अभी तक केवल 11% अफ्रीकी जनसंख्या को टीका लगा है. इसके अलावा अफ्रीकी संघ वर्तमान में विद्रोह और तख्तापलट के कारण संस्थागत विफलताओं का भी सामना कर रहा है. पिछले 1 वर्ष में 6 देशों में सैन्य शासन की स्थापना हुई है.

अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन

  • अफ्रीकी संघ एक महाद्वीपीय संघ है जिसके सदस्य अफ्रीका के सभी 55 देश होते हैं. परन्तु इसमें अफ्रीका में स्थित यूरोपीय प्रभुता वाले विभिन्न क्षेत्र सम्मिलित नहीं होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ सबसे पहले इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में 26 मई, 2001 को स्थापित हुआ था और अगले वर्ष 9 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका में इसका अनावरण किया गया था.
  • अफ्रीकी संघ अफ्रीकी एकता संघ (Organisation of African Unity – OAU) को विस्थापित कर बना था. ज्ञातव्य है कि 32 अफ्रीकी सरकारों ने मिलकर 25 मई, 1963 को यह संगठन अदीस अबाबा में शुरू किया था.
  • अफ्रीकी संघ के अधिकांश बड़े निर्णय इसकी महासभा में लिए जाते हैं जो हर छह महीने पर बैठती है. इस महासभा में सभी देशों और सरकारों के प्रमुख सदस्य होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ का सचिवालय अदीस अबाबा में स्थित है.

Current Affairs

अफ्रीकी संघ के मुख्य उद्देश्य

  • अफ्रीकी देशों और अफ्रीकियों के मध्य एकता एवं एकजुटता को बढ़ावा देना.
  • सदस्य देशों की सम्प्रभुता, भौगोलिक एकता और स्वतंत्रता की रक्षा करना.
  • उन उपायों में तेजी लाना जिनसे महाद्वीप की राजनीतिक एवं सामाजिक-आर्थिक एकात्मता संभव हो सके.

ECOWAS

  • पश्चिम अफ्रीका राज्य आर्थिक समुदाय (ECOWAS) मूलत: सोलह पश्चिम अफ्रीकी देशों का एक क्षेत्रीय आर्थिक समूह है.
  • इसका मुख्यालय अबूजा, नाइजीरिया में स्थित है

इकोवास के प्रमुख उद्देश्य हैं 

  • आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में विकास और सहयोग को प्रोत्साहन देना.
  • सभी सदस्य देशों के लोगों की जीवन-दशा में सुधार लाना आर्थिक स्थिरता को बढ़ाना तथा बनाए रखना.
  • सदस्य देशों के मध्य संबंध में सुधार लाना, और अफ्रीका के विकास और प्रगति में योगदान देना.

ECOWAS में दो उप-क्षेत्रीय ब्लॉक शामिल हैं:

  1. पश्चिम अफ्रीकी आर्थिक और मौद्रिक संघ’ (West African Economic and Monetary Union): यह मुख्य रूप से, आठ फ्रेंच भाषी देशों का एक संगठन है.
  2. 2000 में स्थापित ‘पश्चिम अफ्रीकी मौद्रिक क्षेत्र’ (West African Monetary Zone- WAMZ): इसमें मुख्यतः अंग्रेजी बोलने वाले छह देश शामिल हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : International Atomic Energy Agency – IAEA

संदर्भ

हाल ही में, रूस ने ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ (International Atomic Energy Agency – IAEA) को सूचित करते हुए जानकारी दी है, कि उसके सैन्य बलों ने यूक्रेन के ‘ज़ापोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र’ (Zaporizhzhia Nuclear Power Plant) के आसपास के क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है.

IAEA द्वारा यूक्रेन के परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों की सुरक्षा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ देश में जारी गतिविधियों पर बारीकी से निगरानी की जा रही है.

संबंधित चिंताएं

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के दौरान, पहली बार ‘एक बड़े और स्थापित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम केंद्रों’ के बीच कोई सैन्य-संघर्ष जारी है.

IAEA क्या है?

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency – IAEA) आणविक विषयों के लिए विश्व की सबसे प्रधान एजेंसी है.
  • इसकी स्थापना 1957 में संयुक्त राष्ट्र के एक अवयव के रूप में परमाणु के शान्तिपूर्ण प्रयोग पर बल देने के लिए की गई थी.
  • इसका उद्देश्य है परमाणु तकनीकों के सुरक्षित, निरापद (secure) एवं शान्तिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना.
  • यह एजेंसी परमाणु के सैनिक उपयोग पर रोक लगाती है.
  • IAEA संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद् के प्रति उत्तरदायी होती है.
  • इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियेना शहर में है.

निहितार्थ

  • जिन देशों के पास ‘परमाणु अस्त्र’ नहीं है, वे इन हथियारों को हासिल नहीं करेंगे.
  • परमाणु अस्त्र संपन्न देश, निरस्त्रीकरण का अनुसरण करेंगे.
  • सभी देशों को, सुरक्षा उपायों के सहित शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु प्रौद्योगिकी का उपयोग करने का अधिकार है.

 ‘परमाणु अप्रसार संधि’ से संबंधित विवाद

  • निरस्त्रीकरण प्रक्रिया की विफलता: ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) को मोटे तौर पर शीतयुद्ध कालीन उपकरण के रूप में देखा जाता है, जोकि विश्वसनीय निरस्त्रीकरण प्रक्रिया की दिशा में मार्ग बनाने के उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है.
  • परमाणु अस्त्र ‘संपन्न’ तथा ‘गैर- परमाणु अस्त्र धारक’ प्रणाली (System of Nuclear ‘Haves’ and ‘Have-Nots’): ‘गैर-परमाणु अस्त्र संपन्न राष्ट्र’ (NNWS), इस संधि के भेदभावपूर्ण होने की आलोचना करते है क्योंकि, यह संधि परमाणु अस्त्रों के केवल क्षैतिज प्रसार को रोकने पर केंद्रित है जबकि इसमें परमाणु अस्त्रों के ऊर्ध्वाधर प्रसार की कोई सीमा नहीं निर्धारित नहीं ई गयी है.
  • ‘गैर-परमाणु अस्त्र संपन्न राष्ट्रों’ का यह भी मानना है, कि संधि के तहत ‘शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट’ (Peaceful Nuclear Explosion  PNE) तकनीक पर लगाए गए प्रतिबंध एकतरफा हैं.

‘परमाणु अप्रसार संधि’ पर भारत का दृष्टिकोण

  • भारत, ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं करने अथवा हस्ताक्षर करने के बाद संधि से अलग हो जाने वाले पांच देशों – पाकिस्तान, इज़राइल, उत्तर कोरिया और दक्षिण सूडान की सूची में शामिल है.
  • भारत, NPT को भेदभावपूर्ण मानता है और इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है.
  • भारत द्वारा ‘परमाणु अप्रसार’ के उद्देश्य से लागू की जाने वाली अंतर्राष्ट्रीय संधियों का विरोध किया जाता है, क्योंकि इस प्रकार की संधियाँ, चुनिंदा रूप से गैर-परमाणु शक्तियों पर लागू होती हैं, और परमाणु अस्त्र संपन्न पांच ताकतों के एकाधिकार को वैध बनाती हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : ITER

संदर्भ

21 दिसंबर को ऑक्सफ़ोर्ड में संयुक्त यूरोपीय टोरस (जेईटी) में प्रयोग ने 5 सेकंड के लिए एक सुपर- हॉट प्लाज्मा को बनाए रखा, जिससे 59 मेगाजूल गर्मी ऊर्जा का रिकॉर्ड बनाया गया. JET का पिछला रिकॉर्ड एक सेकंड से भी कम समय के लिए 22 मेगाजूल था, जिसे 1997 में सेट किया गया था. यह नाभिकीय संलयन ऊर्जा के उत्पादन में एक नया मील का पत्थर है, इससे यह उम्मीद बनी है कि फ़ांस में निर्मित किया जा रहा इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (ITER) वर्ष 2025 में चालू होने पर नाभिकीय संलयन ऊर्जा उत्पादन के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है.

नाभिकीय संलयन

जब दो हल्के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर एक भारी तत्व के नाभिक की रचना करते हैं तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं. नाभिकीय संलयन के फलस्वरूप जिस नाभिक का निर्माण होता है उसका द्रव्यमान संलयन में भाग लेने वाले दोनों नाभिकों के सम्मिलित द्रव्यमान से कम होता है. द्रव्यमान में यह कमी ऊर्जा में रूपान्तरित हो जाती है. जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन के समीकरण E = mc² से ज्ञात करते हैं.

टोकामेक क्‍या होता है?

टोकामेक, एक उपकरण है, जिसे नाभिकीय संलयन से उत्पन्न ऊर्जा का उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. एक टोकामक के अंदर, परमाणुओं के संलयन के माध्यम से उत्पादित ऊर्जा को उपकरण की दीवारों में ऊष्मा के रूप में संग्रहित किया जाता है. फिर एक पारंपरिक परमाणु बिजली संयंत्र की तरह, एक संलयन ऊर्जा संयंत्र इस ऊष्मा का उपयोग भाप और फिर टरबाइन और जनरेटर के माध्यम से बिजली बनाने के लिए करेगा. विश्व का सबसे पहला टोकामेक 1960 के दशक में सोवियत संघ में बनाया गया था.

टोकामेक को ऊर्जा के बड़े पैमाने पर और कार्बन-मुक्त स्रोत के रूप में नाभिकीय संलयन की व्यवहार्यता साबित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, यह उसी सिद्धांत पर आधारित है जो हमारे सूर्य और तारों को शक्ति प्रदान करता है. इन खगोलीय पिंडों में हाइड्रोजन परमाणुओं के संयोजन द्वारा भारी हिलियम परमाणुओं का निर्माण होता रहता है और इसी प्रक्रिया में निरंतर असीमित ऊर्जा उत्पन्न होती रहती है.

ITER क्या है?

  1. यह एक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु संलयन अनुसंधान और इंजीनियरिंग मेगाप्रोजेक्ट है, तथा यह विश्व का सबसे बड़ा चुंबकीय परिरोध प्लाज्मा भौतिकी प्रयोग’ (Magnetic Confinement Plasma Physics Experiment) होगा.
  1. यह एक प्रयोगात्मक ‘टोकोमकपरमाणु संलयन रिएक्टर’ (Tokamak Nuclear Fusion Reactor) है जिसे दक्षिणी फ्रांस में बनाया जा रहा है.
  2. ITER का उद्देश्य शांतिपूर्ण उपयोग के लिए संलयन ऊर्जा की वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता का प्रदर्शन करना है.

ITER का महत्त्व

  1. ITER शुद्ध ऊर्जा उत्पादन करने वाला पहला संलयन उपकरण होगा.
  2. ITER लंबे समय तक संलयन को स्थिर रखने वाला पहला संलयन उपकरण होगा.
  3. ITER संलयन-आधारित विद्युत् के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए आवश्यक एकीकृत प्रौद्योगिकियों, सामग्रियों और भौतिकी सिद्धांतों का परीक्षण करने वाला पहला संलयन उपकरण होगा.

ITER परियोजना सात सदस्य संस्थाओं द्वारा वित्त पोषित तथा संचालित की जा रही है:

यूरोपीय संघ, चीन, भारत, जापान, रूस, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका.

ITER के कार्य

  1. 500 मेगावाट संलयन ऊर्जा का उत्पादन
  2. संलयन ऊर्जा संयंत्र (fusion power plant) के लिए प्रौद्योगिकियों के एकीकृत परिचालन का प्रदर्शन
  3. ड्यूटेरियम-ट्रिटियम प्लाज्मा को प्राप्त करना, जिसमें आंतरिक ताप के जरिये सतत अभिक्रिया होती है.
  4. ट्रिटियम ब्रीडिंग का परीक्षण
  5. संलयन उपकरण की सुरक्षा विशेषताओं का प्रदर्शन.

Sansar Daily Current Affairs, 05 March 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : Coastal Vulnerability Index (CVI)

संदर्भ

हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS) ने राज्यों के स्तर पर सम्पूर्ण भारतीय तट की सुभेद्यता का आँकलन किया है. इसके माध्यम से तटीय जोखिमों से उत्पन्न खतरों के प्रति अतिसंवेदनशील व्यक्तियों और स्थानों की पहचान की गई है.

प्रमुख विशेषताएँ

  • तटीय सुभेद्यता आँकलन के माध्यम से 156 मानचित्रों वाले एटलस का निर्माण किया जायेगा. 
  • इन मानचित्रों के आधार पर तटीय सुभेद्यता सूचकांक (CVI) तैयार किया जायेगा.
  • CVI में निम्न मापदंडों का उपयोग किया जायेगा- ज्वार की सीमा, लहर की ऊँचाई, तटीय ढलान, तटीय ऊँचाई, भूआकृति विज्ञान आदि.
  • इस प्रकार के आँकलन से भारत की 7,600 किमी लम्बी तटरेखा पर स्थित क्षेत्रों में तटीय आपदा प्रबंधन और तटीय समुदायों को सक्षम बनाने में मदद मिलेगी.

क्या है IOC-UNESCO?

  • यूनेस्को का अंतर-सरकारी समुद्र विज्ञान आयोग (Intergovernmental Oceanographic Commission of UNESCO – IOC-UNESCO), संयुक्त राष्ट्र के अंतर्गत समुद्री विज्ञान के प्रति समर्पित एक प्रमुख संगठन है. 1960 में यूनेस्को-आईओसी की स्थापना, यूनेस्को के कार्यकारी स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी.
  • हिन्द महासागर में 2004 में सुनामी आने के बाद भारतीय समुद्र सुनामी चेतावनी और शमन व्यवस्था (Indian Ocean Tsunami Warning and Mitigation System- IOTWMS) की स्थापना में यूनेस्को-आईओसी ने उल्लेखनीय मदद की थी.
  • यूनेस्को-आईओसी, हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी की पूर्व तैयारी से संबन्धित इंडियन ओसियन वेव एक्सरसाइज़ (Indian Ocean Wave Exercise- IOWave) में भी अग्रणी भूमिका निभाता है.

ITEWC-INCOIS के बारे में

  • भारतीय सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र- भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (ITEWC-INCOIS), भारत को सुनामी की चेतावनी प्रदान करने वाली नोडल एजेंसी है.
  • वर्तमान में आईएनसीओआईएस, आईओसी-यूनेस्को द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी वाले सुनामी सेवा प्रदाताओं के रूप में, हिंद महासागर क्षेत्र (लगभग 25 देशों) को सुनामी सलाह भी प्रदान कर रहा है.
  • सुनामी के बारे में जागरूकता और तैयारियों के लिए, आईएनसीओआईएस नियमित रूप से तटीय राज्यों के राज्य और जिला स्तरीय आपदा प्रबंधन अधिकारियों (DMO) के लिए, सुनामी मानक संचालन प्रक्रिया (Tsunami Standard Operating Procedures – SOP) कार्यशालाओं, प्रशिक्षण सत्रों और सेमिनारों का आयोजन करता है.

आईएनसीओआईएस (INCOIS)

  • भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) की स्थापना वर्ष 1999 में एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी.
  • INCOIS, पृथ्वी प्रणाली विज्ञान संगठन (Earth System Science Organization – ESSO) की एक इकाई भी है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Govt has no right to enact law for 3 capitals: HC

संदर्भ

हाल ही में, आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा राज्य की राजधानी के रूप में ‘अमरावती’ का विकास किए जाने का आदेश दिया गया है और कहा है, कि सरकार को राज्य की तीन राजधानियों के लिए नए कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है.

न्यायालय की टिप्पणी

राज्य विधायिका के लिए, ‘आंध्र प्रदेश कैपिटल सिटी लैंड पूलिंग स्कीम नियम, 2015’ के तहत जमा की गई भूमि, और ‘आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2014 (Andhra Pradesh Capital Region Development Authority Act, 2014 – APCRDA) की धारा 3 के तहत राजधानी को स्थानांतरित करने, विभाजित करने या तीन भागों में विभाजित करने तथा उच्च न्यायालय सहित सरकार के तीन अंगों से संबंधित विभागों के मुख्यालयों को अधिसूचित राजधानी शहर के अलावा किसी भी क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कोई कानून बनाने की शक्ति नहीं है.

  • संविधान के अनुच्छेद 4 में नियोजित भाषा के अनुसार, राज्य में विधायिका, कार्यकारिणी और न्यायिक अंगों की स्थापना संबंधी मामलों में निणर्य लेने की शक्ति केवल संसद के पास है.
  • अनुच्छेद 4 के अनुसार, कि नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना (अनुच्छेद 2 के तहत) और नए राज्यों के गठन और मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों के परिवर्तन (अनुच्छेद 3 के तहत) हेतु बनाए गए कानूनों को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन के रूप में नहीं समझा जाएगा.

संबंधित प्रकरण

नवंबर 2021 में, आंध्रप्रदेश सरकार ने यह कहते हुए तीन राजधानियां बनाए जाने से संबंधित कानून को निरस्त कर दिया कि, सरकार द्वारा इस संदर्भ में कोई कानूनी बाधा नहीं आए यह सुनिश्चित करने के लिए एक नया फुल-प्रूफ कानून लाया जाएगा. लेकिन न्यायालय ने, सरकार के निरसित किए जा चुके क़ानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी.

  • आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम (P. Decentralisation and Inclusive Development of All Regions Act), 2020 (तीन राजधानियों की स्थापना के उद्देश्य से), तथा ‘आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (निरसन) अधिनियम, 2020’ (Capital Region Development Authority (CRDA) Repeal Act of 2020) को निरसित करने के लिए एक विधेयक पारित किया गया था.
  • पहले पारित किए जा चुके इन अधिनियमों को निरसित करने का उद्देश्य, विकेंद्रीकरण की नीति को और अधिक स्पष्टता प्रदान करना और लोगों के सभी वर्गों को एक विस्तृत विवरण प्रदान करना है.

तीन राजधानियों से संबंधित विवाद

31 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम, 2020 तथा आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (निरसन) अधिनियम, 2020 को अधिसूचित किए गए थे.

यह अधिनियम आंध्रप्रदेश राज्य के लिए तीन राजधानियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं.

  1. अमरावती- विधायी राजधानी.
  2. विशाखापत्तनम- कार्यकारी राजधानी.
  3. कुर्नूल – न्यायिक राजधानी.

तीन राजधानियों की आवश्यकता

राज्य सरकार का कहना है कि वह राज्य के अन्य हिस्सों की उपेक्षा करते हुए एक विशाल राजधानी शहर बनाने के विरुद्ध है. प्रदेश की तीन राजधानियाँ होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का समान रूप से विकास सुनिश्चित होगा.

इस विचार को लागू करने में समस्या

  • समन्वय और क्रियान्वयन संबधी आशंका: अलग-अलग शहरों में स्थित विधायिका तथा कार्यपालिका का मध्य समन्वय स्थापित करना, कहने के लिए आसान परन्तु करने के लिए काफी मुश्किल साबित होगा, तथा, इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा इस संदर्भ में किसी योजना का विवरण नहीं दिया गया है, इससे अधिकारी तथा आम नागरिक सभी, इसके कार्यान्वयन को लेकर आशंकित हैं.
  • परिवहन लागत और समय: कार्यकारी राजधानी विशाखापत्तनम, न्यायिक राजधानी कुर्नूल से 700 किमी तथा विधायी राजधानी अमरावती से 400 किमी की दूरी पर स्थित है. अमरावती तथा कुर्नूल के मध्य 370 किमी की दूरी है. तीन राजधानियां होने से यात्रा में लगने वाला समय तथा लागत काफी महंगी साबित होगी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: आपदा और आपदा प्रबंधन.

Topic : Thermobaric Bombs

संदर्भ

रूस द्वारा यूक्रेन में खतरनाक थर्मोबैरिक बमों (Thermobaric Bombs) – या वैक्यूम बमों – का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है.

वर्ष 2008 के ‘क्लस्टर हथियारों पर अभिसमय’ (Convention on Cluster Munitions) के द्वारा ‘क्लस्टर हथियारों’ (Cluster weaponry) पर प्रतिबंध लगा दिया गया था; हालांकि, इस अभिसमय पर यूक्रेन और रूस द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं.

थर्मोबैरिक हथियार

थर्मोबैरिक हथियारों (Thermobaric Weapons) को ‘निर्वात बम’ या ‘वैक्यूम बम’ (Vacuum Bombs) भी कहा जाता है, क्योंकि ये हाई-वोल्टेज विस्फोट उत्पन्न करने के लिए आसपास के क्षेत्रों से ‘ऑक्सीजन’ सोख लेते हैं.

  1. इन बमों के विस्फोट की लहर, पारंपरिक बमों की तुलना में अधिक तीव्रता और अवधि की होती है और यह मनुष्यों को वाष्पीकृत तक कर सकती है.
  2. हालांकि इन बमों का उपयोग टैंकों और ऐसे अन्य सैन्य वाहनों को नष्ट करने में नहीं किया जा सकता है, किंतु ये आवासीय या वाणिज्यिक परिसरों जैसे नागरिक स्थानों को नष्ट करने में सक्षम होते हैं.

क्लस्टर बम (Cluster bombs)

‘क्लस्टर युद्ध सामग्री’ (Cluster munitions), एक बड़े क्षेत्र में अंधाधुंध रूप से मनुष्यों को घायल करने या मारने के लिए तथा हवाई पट्टियों, रेलवे या पावर ट्रांसमिशन लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए गए ‘गैर-सटीक हथियार’ (Non-Precision Weapons) होते हैं.

  1. क्लस्टर बमों को किसी विमान से गिराया जा सकता है तथा किसी प्रक्षेप्यास्त्र से प्रक्षेपित किया जा सकता है, जिसमे यह अपनी उड़ान के दौरान चक्राकार गति करते हुए कई छोटे-छोटे बमों को गिराते हैं.
  2. इनमें से कई छोटे बम तत्काल नहीं फट पाते है, लेकिन जमीन पर पड़े रहते हैं और प्रायः आंशिक रूप से या पूरी तरह से छिपे रहते हैं तथा इनका पता लगाना और नष्ट करना मुश्किल होता है. लड़ाई बंद होने के बाद तक, ये बम लंबे समय तक ‘नागरिक आबादी’ के लिए खतरा बने रहते हैं.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय.

Topic : Monetary Policy Committee (MPC)

संदर्भ

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee –MPC) ने प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा. इस प्रकार इसने केंद्रीय बजट 2022 के बाद अपनी पहली नीति में “समायोजन का रुख” बरकरार रखा. वर्तमान में रेपो दर तथा रिवर्स रेपो दर क्रमश: 4% और 3.35% हैं. इसके अलावा आरबीआई ने वित्तीय वर्ष 2023 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान लगाया है.

मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)

  • मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क समझौते को अंतिम रूप देने के बाद 2016 में वर्तमान मौद्रिक नीति समिति को भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया था. अब भारत में, मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत ब्याज दर का निर्धारण मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा किया जाता है.
  • MPC केंद्र सरकार द्वारा गठित 6 सदस्यीय समिति है (संशोधित RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB)
  • RBI गवर्नर इसके अध्यक्ष होते हैं एवं इसमें RBI के 3 अधिकारी तथा भारत सरकार द्वारा मनोनीत 3 बाहरी सदस्य शामिल होते हैं.
  • एमपीसी को वर्ष में कम से कम चार बार मिलना आवश्यक है. सदस्यों को चार साल की अवधि के लिए नियक्त किया जाता है. सदस्य पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होते हैं.

Sansar Daily Current Affairs, 07 March 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान.

Topic : Geomagnetic storm destroys 40 Starlink satellites

संदर्भ

3 फरवरी को लांच किये गये लगभग “40 स्टारलिंक उपग्रह” ताकतवर सौर पवनों के कारण उत्पन्न हुए भू-चुम्बकीय तूफान की चपेट में आकर नष्ट हो गये. हालाँकि अंतरिक्ष में मलबे के निर्माण से बचने के लिए इन उपग्रहों को पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करते समय जलने के लिए डिज़ाइन किया गया था.

भू-चुम्बकीय तूफानों के बारे में

ये पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में सोलर फ्लेयर्स के साथ क्रियाओं के परिणामस्वरूप उत्पन्न तूफान हैं, जिनमे अत्यधिक ऊर्जा का आदान-प्रदान होता है, इसके परिणामस्वरूप ध्रुवीय ज्योति या ऑरोरा का भी निर्माण होता है. भू-चुम्बकीय तूफान रेडियो, संचार, जीपीएस सेवाओं को हानि पहुँचा सकते हैं. सोलर पलेयर्स, सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र में हुए विस्फोटों को कहा जाता है, ये कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों तक रह सकते हैं. पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र एवं बैन एलन विकिरण बेल्ट इन सोलर फलेयर्स से पृथ्वी की रक्षा करते हैं.

स्टारलिंक प्रोजेक्ट के बारे में

  • स्टारलिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत SpaceX ने अन्तरिक्ष में 12,000 संचार उपग्रह स्थापित करने की योजना बनाई है.
  • इसके द्वारा विश्वभर में हाई-स्पीड इन्टरनेट की सुविधा प्रदान की जायेगी, हालाँकि यह ग्रामीण/दूरदराज के क्षेत्रों को इंटरनेट के दायरे में लाने में अधिक प्रभावी होगा, शहरों में इसकी स्पीड कम रहेगी.
  • SpaceX ने अब तक 1505 स्टारलिंक उपग्रहों को निम्न भू कक्षा (LEO) में लॉन्च किया है.
  • उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भूस्थिर कक्षा (36000 किमी) में स्थापित उपग्रहों की मदद से इंटरनेट उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन 598०6 5 निम्न भू कक्षा (550 किमी) में स्थित उपग्रहों से इंटरनेट सेवा प्रदान करेगी.
  • इससे Latency (डेटा पैकेट के पहुँचने में लगने वाला समय) कम होगा.
  • LEO में स्थित उपग्रह जीवनकाल के अंत होने पर अपने प्रोपल्शन प्रणाली का उपयोग करके स्वतः कक्षा से बाहर चले जायेंगे और 1.5 वर्ष के भीतर नष्ट हो जायेंगे. जबकि उच्च कक्षा में स्थित उपग्रहों को नष्ट होने में सैकड़ों वर्ष लग जाते हैं.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

वैन एलन विकिरण, ऊर्जावान आवेशित कणों का एक क्षेत्र है, जिनमें से अधिकांश कण सौर हवाओं से उत्पन होते हैं, जिन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र द्वारा ग्रह के चारों ओर कैप्चर कर लिया जाता है. इस प्रकार आवेशित कणों से निर्मित इन बेल्ट्स के द्वारा, सौर पवनों को रोककर पृथ्वी की रक्षा की जाती है. इन बेल्ट्स को जेम्स वैन एलन का नाम दिया गया है, जिन्हें इन बेल्ट की खोज का श्रेय दिया जाता है. पृथ्वी के दो मुख्य बेल्ट्स लगभग 640 से 58,000 किमी की ऊँचाई तक पाई जाती हैं.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Defence Acquisition Procedure

संदर्भ

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए नए सिरे से बल देते हुए, सरकार ने कई स्वदेशी रक्षा परियोजनाओं, जिनमें उद्योग द्वारा डिजाइन और विकास भी शामिल होगा- को सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति दे दी है.

  • रक्षा मंत्रालय द्वारा इस प्रकार की नौ परियोजनाओं को स्वीकृति दी गयी है: जिनमे से चार परियोजनाएं, रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 की ‘मेक-I’ श्रेणी और पांच परियोजनाएं ‘मेक -2’ श्रेणियों के तहत स्वीकृत की गयी हैं.
  • स्वीकृत परियोजनाओं, में हल्के टैंक, भारतीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ संचार उपकरण, जमीन-आधारित प्रणाली के साथ एयरबोर्न इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड और एयरबोर्न स्टैंड-ऑफ जैमर का विकास किया जाना शामिल है.

नयी रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया–2020 के प्रमुख बिंदु

  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी)2020 , उस प्रक्रिया का स्थान लेगी जिसे 2016 में जारी किया गया था.
  • 2020 रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)और मेड इन इंडिया जैसे नए विचार शामिल है.
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में पहली बार रक्षा उपकरण लीज पर लेने की बात कही गई है.
  • इसके साथ ही इस रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में विदेशों से आयात किए जाने वाले रक्षा कलपुर्जों के स्वदेश में निर्माण की बात कही गई है
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में खरीद के लिए भारत में निर्मित एक नई श्रेणी को जोड़ा गया है जिसके तहत कोई विदेशी कंपनी भारत में अपनी शाखा खोल कर अपने रक्षा सामान का निर्माण कर सकती है.
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 ,पारदर्शिता, निष्पक्षता और सभी को समान अवसरों के सिद्धांतों पर जोर देता है

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया का उद्देश्य

  • यह रक्षा खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तैयार की गयी है.
  • इसके अलावा, इस प्रक्रिया का लक्ष्य स्वदेशी डिजाइन और रक्षा हथियारों के विनिर्माण को समयबद्ध तरीके से बढ़ावा देना है.

आगे की राह 

एक वर्ष से भी अधिक समय में तैयार की गई DAP-2020 भारत सरकार के आत्म-निर्भर भारत के विज़न और मेक इन इंडिया के अनुकूल प्रक्रिया है. DAP-2020 दस्तावेज़ एक विश्वास पैदा करता है और यह रक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों की आकांक्षाओं को पूरा करेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश.

Topic : Asian Infrastructure Investment Bank

संदर्भ

एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक / एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) द्वारा वर्तमान में, यूक्रेन में जारी युद्ध के मद्देनजर रूस और बेलारूस से संबंधित सभी गतिविधियों को रोक दिया गया है और इन्हें समीक्षा के तहत रख दिया है.

एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक (AIIB) द्वारा इस स्थिति को “यूक्रेन में युद्ध” (war in Ukraine) के रूप में व्यक्त किया गया है, जोकि चीनी सरकार से संबद्ध किसी भी संस्था द्वारा अब तक पूर्वी यूरोपीय देश की स्थिति का वर्णन करने के लिए प्रयुक्त किया गया “आक्रमण” (Invasion) शब्द से सर्वाधिक मिलता-जुलता शब्द है.

इस प्रकार के प्रतिबंधों का प्रभाव

  • बढ़ती हुई एवं वैश्विक रूप से जुड़ी अर्थव्यवस्था में वर्षों तक जीवन गुजरने के बाद, अब रूसी नागरिक खुद को एक ऐसे देश में पाते हैं जो दुनिया से तेजी से अलग-थलग होता जा रहा है.
  • राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण किए जाने के बाद, यूरोपीय संघ और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों की झड़ी और देश से विदेशी कंपनियों एवं निवेशकों के पलायन ने, संयुक्त रूप से, रूस को अलग-थलग और आर्थिक रूप से सीमित कर दिया है.
  • कई दिनों तक, इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग के विफल होने की आशंकाओं के बीच रूस में लोग नकदी – विदेशी मुद्रा और रूबल दोनों- निकालने के लिए दौड़ पड़े है और ‘एटीएम’ के समीप लंबी कतारें लगने लगी हैं.
  • रूबल की कीमत, 1 सेंट (1 cent) से भी कम के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गयी है, और लोग अपनी बचत को नष्ट होते हुए देख रहे हैं.
  • क्रेमलिन (Kremlin) द्वारा सभी रूसियों को अन्य देशों में ‘विदेशी मुद्रा स्थानांतरित’ करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है और निर्यातकों को अपनी ‘विदेशी मुद्रा आय’ का 80% रूबल में बदलने का आदेश दिया है.
  • सोशल मीडिया पर, रूसी खरीदार कुछ उत्पादों, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरणों की कीमतों में वृद्धि देख रहे हैं.
  • विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाले बहुत से रूसी लोग, अपना वेतन प्राप्त करने में सक्षम होने के बारे में चिंतित हैं, क्योंकि प्रमुख रूसी बैंकों के पहले बैच को, तेल और गैस से होने वाले मुनाफे को लक्षित करने के लिए, इंटरबैंक SWIFT सिस्टम से बाहर निकाल दिया गया है.
  • अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा भी रूस पर अपने-अपने प्रतिबंध लगाए गए हैं.
  • तेल की कीमतों पर प्रभाव: रूस, विश्व का (अमेरिका और सऊदी अरब के बाद) तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक और दूसरा (अमेरिका के बाद) सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादक देश है. साथ ही, यह विश्व का तीसरा सबसे बड़ा (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के बाद) कोयला निर्यातक देश भी है. यह विश्व में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश भी है.

एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक क्या है?

  1. AIIB का full-form है –Asian Infrastructure Investment Bank
  2. AIIB बैंक एक अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था है जिसका मुख्यालय बीजिंगचीन में है.
  3. इसकी स्थापना 2014 में हुई थी और इसके कार्यकलाप 2016 में प्रारम्भ हुए थे.
  4. अब इसमें विश्व-भर के 102 देश इसके सदस्य हो गये हैं. (AIIB के ऑफिसियल वेबसाइट में – Click here, विकीपीडिया में गलत इनफार्मेशन है)
  5. इस बैंक को एशियाई क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास के उद्देश्य से बनाया गया है.
  6. यह बैंक चीन की सरकार द्वारा प्रस्तावित किया गया था.
  7. हाल ही में भारत, चीन की अगुवाई वाली एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक का सबसे बड़ा लाभार्थी के रूप में उभरा है.
  8. इस बैंक की पूँजी 100 बिलियन डॉलर है. यह राशि एशियाई विकास बैंक की पूँजी के दो-तिहाई तथा विश्व बैंक की पूँजी के आधे के बराबर है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: शासन के महत्त्वपूर्ण पहलू, पारदर्शिता और जवाबदेही, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और क्षमता; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता और जवाबदेही और संस्थागत और अन्य उपाय।

Topic : Radio Frequency Identification – RFID

संदर्भ

हाल ही में भारतीय सेना ने अपनी गोला-बारूद सूची की ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (Radio Frequency Identification – RFID) टैगिंग का कार्यान्वयन प्रारम्भ किया है.

रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन

  • भारतीय सेना ने अपनी गोला-बारूद सूची की ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (Radio Frequency Identification – RFID) टैगिंग करना शुरू कर दिया है.
  • ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) एक विशिष्ट प्रकार की रेडियो तकनीक है, जो किसी वस्तु से जुड़े टैग की पहचान करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग करती है और वस्तु की पहचान करती है.
  • टैग में एक ‘ट्रांसीवर चिप’ (Transceiver Chip) होता है जो RFID रीडर से विद्युत चुम्बकीय तरंग द्वारा ट्रिगर होता है और एक पहचान संख्या को वापस ‘पढने वाले’ तक पहुंचाता है.
  • इसके बाद पहचान संख्या का उपयोग टैग के साथ वस्तुओं की विस्तृत सूची के लिए किया जाता है.

Sansar Daily Current Affairs, 08 March 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे.

Topic : Eighth schedule to the Constitution

संदर्भ

हाल ही में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है, कि उनकी सरकार ‘भोजपुरी’ को संविधान की आठवीं अनुसूची (Eighth schedule to the Constitution) में शामिल करने संबंधी काफी समय से लंबित अपनी मांग को फिर से तेज करेगी. ‘आठवीं अनुसूची’ ने शामिल होने के बाद भोजपुरी को एक राजभाषा का दर्जा प्राप्त हो सकेगा.

राज्य मंत्रिमंडल द्वारा वर्ष 2017 में, इस संबंध में एक प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था.

संविधान की आठवीं अनुसूची

संविधान की आठवीं अनुसूची में देश की आधिकारिक भाषाओं की सूची दी गई है. अनुच्छेद 344(1) और 351 के अनुसार इस अनुसूची में 22 भाषाएँ अंकित हैं. ये भाषाएँ हैं – असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू.

दरअसल, इनमें से 14 भाषाओं को संविधान में सम्मिलित किया गया था. परन्तु इस अनुसूची में अन्य भाषाओं के प्रवेश की माँग हमेशा से उठती आई हैं. 1967 ई. में सिन्धी भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया. इसके पश्चात्, कोंकणी भाषा, मणिपुरी भाषा और नेपाली भाषा को 1992 ई. में जोड़ लिया गया. 2003 में बोड़ो भाषा, डोगरी भाषा, मैथिली भाषा और संथाली भाषा आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर लिए गये.

भारत की भाषाई विविधता

  • 2001 की जनगणना के अनुसार, भारत में ऐसी 30 भाषाएँ हैं जिनमें प्रत्येक को बोलने वालों की संख्या 10 लाख से ऊपर है.
  • इन 30 भाषाओं के अतिरिक्त 122 भाषाएँ ऐसी हैं जिनमें प्रत्येक को बोलने वालों की संख्या 10,000 तक है.
  • 1,599 भाषाएँ ऐसी हैं जिनको “बोली” कह सकते हैं क्योंकि ये किसी विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित हैं और जिनमें से कुछ विलुप्ति के कगार पर हैं.

संविधान का अनुच्छेद 29

संविधान का अनुच्छेद 29 यह प्रावधान करता है कि विशिष्ट भाषा, विशिष्ट लिपि या विशिष्ट संस्कृति रखने वाले नागरिकों को यह अधिकार है कि वे इन वस्तुओं का संरक्षण करें.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय.

Topic : Ayushman Bharat Digital Mission – ABDM

संदर्भ

हाल ही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) की अपनी प्रमुख योजना के अंतर्गत आरोग्य सेतु एप के साथ एकीकरण की घोषणा की. यह एकीकरण 14-अंकों की यूनीक ABHA (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) संख्या का लाभ आरोग्य सेतु उपयोगकर्ता के जन समूह और उससे आगे तक पहुंचाएगा.

एबीडीएम के अंतर्गत, एक उपयोगकर्ता अपना विशिष्ट ABHA नंबर जनरेट कर सकता है. वे डॉक्टर के नुस्खे, लैब रिपोर्ट, अस्पताल के रिकॉर्ड आदि सहित अपने मौजूदा और नए मेडिकल रिकॉर्ड को जोड़ने के लिए एबीएचए नंबर का उपयोग कर सकते हैं और इन रिकॉर्डों को पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवरों तथा स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ साझा कर सकते हैं और चिकित्सा इतिहास के एक सामान्य पूल को बनाए रखते हुए अन्य डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक भी पहुंच हासिल कर सकते हैं.

आरोग्य सेतु

  • आरोग्य सेतु, एक एंड्राइड (Android) और आईओएस (iOS) प्लेटफ़ॉर्म-आधारित ऐप है, जो कोरोनावायरस वायरस ट्रैकिंग ऐप के रूप में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रदान किए गए डेटा का उपयोग करती है.
  • इस ऐप का मुख्य उद्देश्य कोविड-19 से संक्रमित व्यक्तियों एवं उपायों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना है. किसी व्यक्ति में कोरोनावायरस के जोखिम का अंदाज़ा लगाने के लिये आरोग्य सेतु एप द्वारा ब्लूटूथ तकनीक, एल्गोरिदम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग किया जाता है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : UNEA plastic pollution resolution

संदर्भ

नैरोबी में आयोजित आयोजित पांचवीं ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा’ (United Nations Environment Assembly – UNEA-5.2) के हालिया सत्र के दौरान, एक ‘संकल्प’ में वर्ष 2024 तक ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ को समाप्त करने और एक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता बनाए जाने की मांग की गयी. इस सत्र की मेजबानी ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम’ (UN Environment Programme) द्वारा की गई थी.

यह संकल्प, समुद्री पारिस्थितिक तंत्र से भी संबंधित होगा, और इसमें सदस्य राष्ट्रों के लिए बाध्यकारी और स्वैच्छिक दृष्टिकोण दोनों शामिल किए जाएंगे.

प्लास्टिक प्रदूषण को सीमित करने हेतु ‘बाध्यकारी संकल्प’ की आवश्यकता

पिछले दशकों में प्लास्टिक का उत्पादन तेजी से बढ़ा है और वर्तमान में यह दर लगभग 400 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुँच चुकी है – यह आंकड़ा वर्ष 2040 तक दोगुना हो जाएगा.

  • प्लास्टिक के संपर्क में आने से मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंच सकता है, और संभावित रूप से प्रजनन क्षमता, हार्मोनल, चयापचय और तंत्रिका संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं. इसके अलावा, प्लास्टिक को खुले में जलाने से वायु प्रदूषण में भी वृद्धि होती है.
  • वर्ष 2050 तक प्लास्टिक उत्पादन, उपयोग और निपटान से संबंधित ‘ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन’, ग्लोबल वार्मिंग को 5 डिग्री सेल्सियस (34.7 डिग्री फारेनहाइट) तक सीमित करने के लक्ष्य के तहत अनुमत उत्सर्जन का 15 प्रतिशत होगा.
  • अंतर्ग्रहण (Ingestion), उलझाव और अन्य खतरों के कारण, 800 से अधिक समुद्री और तटीय प्रजातियां प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित हैं.
  • लगभग 11 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा प्रतिवर्ष महासागरों में प्रवाहित होता है. यह मात्रा वर्ष 2040 तक तीन गुना हो सकती है.

एक वृत्ताकार अर्थव्यवस्था में बदलाव किए जाने से महासागरों में प्रविष्ट होने वाले प्लास्टिक की मात्रा 2040 तक 80 प्रतिशत से अधिक कमी; अछूती प्लास्टिक उत्पादन में 55 प्रतिशत की कमी; सरकारों को 2040 तक 70 अरब अमेरिकी डॉलर की बचत; ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 25 प्रतिशत तक की कटौती की जा सकती है और मुख्य रूप से वैश्विक दक्षिण में 700,000 अतिरिक्त रोजगार सृजित किए जा सकते हैं.

प्लास्टिक प्रदूषण का अंत करने के विषय पर इस बैठक के परिणाम

  • विश्व के सभी पर्यावरण मंत्री, प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता तैयार करने हेतु एक ‘अंतर सरकारी वार्ता समिति’ (Intergovernmental Negotiating Committee – INC) का गठन करने के लिए सहमत हुए है.
  • इस ‘अंतर सरकारी वार्ता समिति’ (INC) द्वारा, वर्ष 2024 के अंत तक वैश्विक कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते के मसौदे को पूरा करने के अधिदेश के साथ, वर्ष 2022 में अपना कार्य शुरू किया जायेगा.
  • प्रदूषण के समाधान से संबधित इस क्रमागत उन्नति को 2015 के पेरिस समझौते के बाद से सबसे महत्त्वपूर्ण पर्यावरणीय समझौता माना जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme -UN Environment) एक अग्रणी वैश्विक पर्यावरण प्राधिकरण है जो वैश्विक पर्यावरण कार्य-सूची (Agenda) का निर्धारण करता है, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के तहत सतत् विकास के पर्यावरणीय आयाम के सुसंगत कार्यान्वयन को बढ़ावा देता है और वैश्विक पर्यावरण के लिये एक आधिकारिक सलाहकार के रूप में कार्य करता है.
  • इसकी स्थापना 5 जून, 1972 को की गई थी.
  • इसका मुख्यालय नैरोबी, केन्या (Nairobi, Kenya) में है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Kaziranga National Park is a net carbon emitter

संदर्भ

एक शोध के अनुसार काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान जितनी कार्बन अवशोषित करता है, उससे अधिक उत्सर्जित करता है. इसके पीछे प्रमुख कारण वहाँ के पतझड़ वनों की विशेष मृदा में मिलने वाले बैक्टिरिया की बड़ी आबादी है, जो श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है जबकि दूसरी ओर मानसून के दौरान मेघ आच्छादित आकाश के कारण वृक्ष पर्याप्त रूप से प्रकाश संश्छ्षेषण नही कर पाते, इससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करने की इन वनों की क्षमता कम हो जाती है.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान

  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षकों (guards) को हाल ही में दस सेटेलाइट फोन दिए गये हैं. ऐसा करने वाला यह देश का पहला राष्ट्रीय उद्यान बन गया है. विदित हो कि सेटेलाइट फोन के माध्यम से सीधे सेटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करते हैं और इसलिए किसी भी स्थान से बात-चीत संभव हो पाती है.
  • यह असम में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान (National Park) है.
  • मैरी कर्जन (Mary Curzon) की सिफारिश पर वर्ष 1908 में गठित, यह पार्क पूर्वी हिमालयी जैव विविधता के आकर्षण केंद्र – गोलाघाट और नौगांव जिले में स्थित है.
  • इस पार्क में प्रसिद्ध एक सींग वाले गैंडों की विश्व की दो-तिहाई जनसंख्या पायी जाती है.
  • यहाँ कई महत्त्वपूर्ण पक्षियों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए, बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा एक महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है.
  • यह एक विश्व धरोहर स्थल है.

Sansar Daily Current Affairs, 09 March 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएं, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना.

Topic : Delimitation Process

संदर्भ

जम्मू-कश्मीर में जारी ‘परिसीमन प्रक्रिया’ (Delimitation Process) में भाग लेने वाले राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ स्वतंत्र पर्यवेक्षकों द्वारा केंद्र-शासित प्रदेश में “मतदाता द्वीप” (Voter islands) बनने की आशंका जताई जा रही है.

संबंधित प्रकरण

‘परिसीमन अधिनियम’2002 (The Delimitation Act, 2002) के अनुसार, जनसंख्या के अलावा, सभी निर्वाचन-क्षेत्र यथासाध्य भौगोलिक रूप में संहृत क्षेत्र होंगे और उनका परिसीमन करते समय उनकी प्राकृतिक विशेषताओं, प्रशानिक इकाइयों की विद्यमान सीमाओं, संचार सुविधाओं और सार्वजनिक सुविधा को ध्यान में रखा जाना अनिवार्य होगा.

  • पर्यवेक्षकों का कहना है कि मौजूदा ‘परिसीमन प्रक्रिया’ में इस सिद्धांत का पालन नहीं किया जा रहा है.
  • उदाहरण के लिए, इस ‘परिसीमन प्रक्रिया’ में निर्धारित सीमाओं के अनुसार, किसी एक तहसील का एक गाँव, दूसरी तहसील के अन्य गाँवों से पूरी तरह घिरा होगा. यहां पर भौगोलिक-संबद्धता पर विचार नहीं किया जा रहा है, और इस प्रकार यह प्रक्रिया ‘मतदाता द्वीपों’ को जन्म दे रही है.
  • ऐसा कहा जा रहा है, कि आयोग द्वारा “भौगोलिक द्वीपों को सीमांकित किया गया है और बिना किसी निकटता या संपर्क के अन्य विधानसभा क्षेत्रों के साथ जोड़ दिया गया है”.

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का शाब्दिक अर्थ विधान सभा से युक्त किसी राज्य के अन्दर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निधारण होता है.

परिसीमन का कार्य कौन करता है?

  • परिसीमन का काम एक अति सशक्त आयोग करता है जिसका औपचारिक नाम परिसीमन आयोग है.
  • यह आयोग इतना सशक्त होता है कि इसके आदेशों को कानून माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • आयोग के आदेश राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित तिथि से लागू हो जाते हैं. इन आदेशों की प्रतियाँ लोक सभा में अथवा सम्बंधित विधान सभा में उपस्थापित होती हैं. इनमें किसी संशोधन की अनुमति नहीं होती.

परिसीमन आयोग और उसके कार्य

  • संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है.
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं.
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो.
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है.
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है.
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है.
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भी आदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है. तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है.

परिसीमन आवश्यक क्यों?

जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है.

परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है. इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो.

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था. संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा. इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था.
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है. अतः 1951 की जनगणना के पश्चात् 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ. तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ. उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है. अतः 1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ.
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था. परन्तु फिर से एक संशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी. इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई ख़ास काम नहीं हुआ था. केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना.

Topic : Uniform Civil Code – UCC

संदर्भ

हाल ही में कर्नाटक के विद्यालयों, कॉलेजों में हिजाब विवाद के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. ध्यातव्य है कि कुछ दिन पूर्व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भी समान नागरिक संहिता (UCC) को आवश्यक बताते हुए, केंद्र सरकार से समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में कदम उठाने के लिए कहा था.

समान नागरिक संहिता (UCC) के बारे में

समान नागरिक संहिता (UCC) पर्सनल लॉ के सम्बन्ध में धार्मिक भेद-भावों का अंत करता है तथा सभी नागरिकों के लिए एक कानून की वकालत करता है. संविधान के भाग-4 (नीति निदेशक तत्व) अनुच्छेद 44 में निर्देशित है कि राज्य, भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिये एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा. उल्लेखनीय है कि वर्तमान में सभी धर्मों के लिए अलग-अलग नियम हैं. विवाह, संपत्ति और गोद लेने आदि में विभिन्‍न धर्म के लोग अपने पर्सनल लॉ का पालन करते हैं. मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदाय का अपना-अपना पर्सनल लू है. हिंदू सिविल लॉ के तहत हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं

समान नागरिक संहिता को लागू करने की आवश्यकता क्‍यों?

  • समान नागरिक सहिंता के न लागू होने से समता के मूल अधिकार का उल्लंघन होता है.
  • कानूनों की एकरूपता से देश में राष्ट्रवादी भावना को भी बल मिलेगा.
  • अनुच्छेद 21 के अंतर्गत महिलाओं को प्रदत्त गरिमामय, स्वतंत्र जीवन सुनिश्चित करने के लिए समान नागरिक संहिता आवश्यक है. क्योंकि इसके अभाव में देखा गया है कि तीन तलाक मन्दिर प्रवेश इत्यादि मामलों में महिलाओं के साथ लैंगिक पक्षपात किया जाता रहा है. 
  • समान संहिता विवाह, विरासत और उत्तराधिकार समेत विभिन्न मुद्दों से संबंधित जटिल कानूनों को समाप्त कर स्पष्टता लाएगी.

समान नागरिक संहिता को लागू करने के समक्ष चुनौतियाँ

  • कुछ विशेष वर्ग समान नागरिक संहिता को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता के लिए उचित नहीं मानते.
  • संविधान निर्माताओं ने भारतीय समाज की जटिल परिस्थितियों की वजह से ही समान नागरिक संहिता को राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल किया था, जो कि केवल सलाहकारी प्रवृति के हैं एवं विधि द्वारा प्रवर्तनीय नहीं हैं.
  • विधि आयोग ने वर्ष 2018 की रिपोर्ट में समान नागरिक सहिंता की आवश्यकता को ख़ारिज कर दिया था. इसकी बजाय विधि आयोग ने पर्सनल लॉ को सहिंताबद्ध करने की अनुशंसा की है.

आगे की राह

लैंगिक विभेदन को समाप्त करने के लिए तथा धर्मनिरपेक्षता व लोकतंत्र की पूर्ण प्राप्ति हेतु समान नागरिक सहिंता आवश्यक है, परन्तु सरकार द्वारा इसे थोपा नहीं जाना चाहिए पर्सनल लॉ में सुधार करते करते समान नागरिक सहिंता की तरफ अग्रसर होना आवश्यक है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Solar Conjunction

संदर्भ

हाल ही में, ISRO की विभिन्न इकाइयों के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा ‘सौर कोरोना’ का अध्ययन करने और सूर्य के उस क्षेत्र जहां तापमान अचानक बढ़ जाता है, का पता लगाने के लिए, भारत के मार्स ऑर्बिटर ‘मंगलयान’ से भेजे गए ‘एस-बैंड’ रेडियो संकेतों का इस्तेमाल किया गया है.

इस बारे में अधिक विवरण अभी प्रकाशित किया जाना बाकी है.

अध्ययन का महत्त्व

  • वैज्ञानिकों द्वारा ‘सौर संयोजन’ या ‘सौर युति’ (Solar Conjunction) परिघटना का उपयोग, पृथ्वी और मंगल के सूर्य के विपरीत दिशा में, किंतु एक एक रेखा में होने पर किया गया.
  • मंगल ग्रह के लिए ‘संयोजन’ या ‘युति’ की स्थिति दो साल में एक बार घटित होती है, इस दौरान मंगलयान से भेजे जाने वाले रेडियो सिग्नल, सौर कोरोना – लगभग 10 सौर त्रिज्या (10 solar radii) या सूर्य के केंद्र से लगभग 69,57,000 किमी- से होकर गुजरते हैं .
  • यह स्थिति, वैज्ञानिकों को सौर गतिकी का अध्ययन करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है. प्रत्येक सौर त्रिज्या (Solar Radii) की लंबाई लगभग 6,95,700 किमी होती है.

‘सौर संयोजन’ या ‘सौर युति के बारे में

‘सौर युति’ (Solar Conjunction) वह अवधि होती है, जिसमे पृथ्वी और मंगल, सूर्य के चारों ओर अपने अनन्त परिक्रमण काल के दौरान, सूर्य के अग्निमय बिंब के बीच में आ जाने से एक-दूसरे की दृष्टि से ओझल हो जाते हैं.

  • पृथ्वी और मंगल दोनों ग्रह, नर्तकियों की तरह एक विशाल अलाव के दोनों ओर- एक दूसरे के लिए अस्थायी रूप से अदृश्य हो जाते हैं.
  • ‘सौर संयोजन’ की घटना प्रति दो वर्ष में एक बार घटित होती है.

इस घटना का अंतरिक्ष मिशनों पर प्रभाव

इस घटना के होने पर, नासा की ‘जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी’ में मिशन कंट्रोलर कई तरह से प्रतिक्रिया करते हैं.

  • मिशन टीम द्वारा कोई भी आवश्यक निर्देश, सौर संयोजन की घटना से पहले ही भेज दिया जाता है.
  • मिशन टीम द्वारा कुछ उपकरणों को बंद कर दिया जाता है, और वे दूसरे उपकरणों से डेटा एकत्र करते हैं और उसे स्टोर करते हैं.
  • कुछ मामलों में, मिशन टीम यह जानते हुए कि कुछ डेटा नष्ट हो जाएगा, पृथ्वी पर डेटा भेजना जारी रखती हैं.
  • ‘सौर युति’ के दौरान, किसी के द्वारा मंगल ग्रह पर नए निर्देश भेजने का प्रयास नहीं किए जाते है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: अर्थव्यवस्था.

Topic : Life Insurance Corporation of India (LIC) IPO

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी 5% हिस्सेदारी बेचने हेतु, IPO लाने के लिए SEBI के समक्ष ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) प्रस्तुत कर दिया है. उल्लेखनीय है कि DRHP एक प्रारंभिक कानूनी दस्तावेज होता है. यह आईपीओ-बाध्य कंपनी तथा उसके निवेशकों और हितधारकों के बीच एक महत्त्वपूर्ण संचार लिंक के रूप में कार्य करता है. जब कोई कंपनी अपने शेयरों की पेशकश करके जनता से धन जुटाने का लक्ष्य रखती है, तो उसे बाजार नियामक के समक्ष DRHP दाखिल करने की आवश्यकता होती है.

LIC के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में दी गई जानकारी

न्यू बिजनेस प्रीमियम बाजार में 28.3 करोड़ पॉलिसी के साथ LIC की हिस्सेदारी 66% है तथा इसका मूल्य 5.40 लाख करोड़ रूपये आँका गया है. 31 मार्च तक इसकी आईपीओ की प्रक्रिया का समापन सरकार के इस वर्ष के विनिवेश लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महत्त्वपूर्ण है. IPO में जारी किये जाने वाले 31.6 करोड़ शेयरों में से 10% LIC की पॉलिसी होल्डर्स के लिए तथा 5% इसके कर्मचारियों के लिए आरक्षित किये जा सकते हैं.

इसके अलावा DRHP के अनुसार कोविड 19 महामारी के कारण इसके बिजनेस में जोखिम का सामना करना पड़ा है, क्योंकि डेथ क्लेम 2019-20 में 17,527 करोड़ के थे जबकि 2021-22 के पहले 6 महीनों में ही 21,734 करोड़ के डेथ क्लेम प्रदान करने पड़े थे, जो इसके कुल क्लेम का 14.5% था.

प्रारंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (IPO) क्या है?

इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत कोई कंपनी पूंजी जुटाने के लिये पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपने शेयरों की बिक्री करती है. आमतौर पर अपने व्यवसाय को फ़ैलाने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाने के लिए कम्पनियाँ IPO का सहारा लेती है.

कम्पनी की मार्केट वैल्यू के अनुमान के आधार पर, इन्वेस्टमेंट बैंक शयेरों की कीमत का निर्धारण करते हैं तथा IPO की प्रक्रिया को कंपनी की ओर से संचालित करते हैं.इसके बदलने में उन्हें कमीशन या भागीदारी दी जाती है. कंपनियाँ, IPO के द्वारा सार्वजनिक रूप से नए शेयर जारी करके पूँजी जुटा सकती हैं या फिर मौज़ूदा शेयरधारक अपने शेयर जनता को बेच सकते हैं.


Sansar Daily Current Affairs, 10 March 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ और उनके स्थान.

Topic : Karewa

संदर्भ

जम्मू-कश्मीर में, विकास के नाम पर कश्मीर की अत्यधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी जिसे ‘करेवा’ (Karewas) कहा जाता है, को नष्ट किया जा रहा है.

इसके कृषि और पुरातात्विक महत्त्व के बावजूद, ‘करेवा मिट्टी’ को निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए खोदा जा रहा है.

‘करेवा’ क्या हैं?

कश्मीरी बोली में करेवा (Karewa) शब्द का अर्थ है “ऊपर उठी हुए समतल भूमि”.

  • इस शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग वर्ष 1859 में ‘गॉडविन ऑस्टिन’ द्वारा किया गया था, और बाद में 1878 में इसका प्रयोग ‘लिडेकर’ (Lydekker) द्वारा ‘अर्ध-समेकित रेत-चिकनी मिट्टी संपिंडन’ (Semi-Consolidated Sand Clay Conglomerate) के अनुक्रम के व्यक्त करने हेतु किया गया था.
  • कश्मीरी भाषा में करेवा का स्थानीय बोली में “वुद्र” (Vudr) कहा जाता है.

करेवा हिमाच्छादित मृदा और हिमोढ़ युक्त अन्य पदार्थों के मोटे निक्षेप होते हैं. ये गैर-समेकित सरोवारीय या झीलीय निक्षेप (lacustrine deposits) होते हैं.

कश्मीर घाटी में ‘करेवा मैदानों’ का निर्माण

कश्मीर घाटी, महान हिमालय और कश्मीर हिमालय की पीर पंजाल श्रेणियों के बीच अवस्थित है. पहले के समय में, जब पीर पंजाल पर्वतमाला का उत्थान हुआ, तब इस क्षेत्र में बहने वाली नदियों का प्रवाह अवरुद्ध हो गया.

  • जिसके परिणामस्वरूप, पूरी कश्मीर घाटी एक बड़ी झील में परिवर्तित हो गयी. धीरे-धीरे, इस झील में हिमनदीय निक्षेपों का जमाव हो गया. और, इस प्रकार एक विशाल झीलीय मैदान (lacustrine plain) का निर्माण हो गया.
  • बाद में, इस झीलीय मैदान से पानी निकल गया और मैदान में असंगठित निक्षेप जमाव शेष रह गया. इन गैर-समेकित महीन कंकड़ों और गाद के जमाव को ‘करेवा-निर्माण’ के रूप में जाना जाता है.

करेवा मैदानों का आर्थिक महत्त्व

  • करेवा निक्षेपों में, रेत, मिट्टी, गाद, शेल, मिट्टी, लिग्नाइट और लोएस जैसी भिन्न-भिन्न मृदाएँ और अवसाद पाए जाते हैं. अतः, ये कृषि और बागवानी गतिविधियों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं.
  • करेवा मैदान, जफरान की खेती के लिए काफी उपयोगी होते हैं. ‘ज़फ़रान’ (Zafran) कश्मीर घाटी में उत्पादित होने वाले केसर की एक स्थानीय किस्म है.
  • साथ ही, ये मृदाएँ बादाम, अखरोट, सेब और बागों की खेती के लिए भी महत्त्वपूर्ण होती हैं.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Modernisation of State Police Forces (MPF) Scheme

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए “राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण की योजना” को मंजूरी दी है. यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुलिस बलों के आधुनिकीकरण और सुधार की एक योजना है. इस योजना के लिए कुल 26,275 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय समर्पित किया गया है.

प्रमुख विशेषताएँ

  • संसाधनों के आधुनिकीकरण द्वारा वैज्ञानिक और समय पर जांच में सहायता के लिए उच्च गुणवत्ता वाली, परिचालन रूप से स्वतंत्र फोरेंसिक विज्ञान सुविधाओं का विकास करना. केंद्र ने फोरेंसिक क्षमताओं के आधुनिकीकरण के लिए केंद्रीय योजना के तहत 2,080.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. 
  • उग्रवाद प्रभावित उत्तर-पूर्वी राज्यों, जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेशों और वामपंथी उमग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी खर्च के लिए 18,839 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
  • वामपंथी उम्रवाद से निपटने के लिए “राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना” के कार्यान्वयन के साथ वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में हिंसक घटनाओं में भारी कमी आई है. इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए, 6 वामपंथी उग्रवाद से संबंधित योजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें केंद्रीय परिव्यय 8,689 करोड़ रुपये है.
  • इंडिया रिजर्व बटालियनों के साथ-साथ स्पेशलाइज्ड इंडिया रिजर्व बटालियनों को बढ़ाने के लिए 350 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
  • 50 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ, सरकार ने नशीले पदार्थों के नियंत्रण के लिए इस योजना को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक बढ़ा दिया है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Raising the age of consent in the Philippines

संदर्भ

फिलीपींस में, ‘यौन सहमति’ के लिए निर्धारित आयु को 12 वर्ष से बढ़ाकर 16 वर्ष कर दिया गया है.

  • यह कानून लैंगिक रूप से तटस्थ है, और पुरुष एवं महिला बच्चों तथा अपराधियों दोनों पर लागू होता है.
  • अब तक, फिलीपींस में ‘यौन सहमति’ के लिए निर्धारित आयु विश्व में सबसे कम थी, और देश में लगभग हर पांच में से एक बच्चे को यौन हिंसा का सामना करना पड़ता था.

भारत में ‘सम्मति आयु’ अथवा ऐज ऑफ़ कंसेट संबंधी प्रावधान

भारत में, ‘बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम’2012 अर्थात ‘पॉक्सो अधिनियम’ (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 – POCSO) के अंतर्गत 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को ‘बालक’ (CHILD) के रूप में परिभाषित किया गया है, तथा ‘बालक’ के साथ यौन गतिविधि में शामिल होना ‘यौन हमला’ माना जाता है.

भारत में ‘सम्मति आयु’ की समीक्षा की मांग

तथ्य यह है, कि पुलिस को (पॉक्सो एक्ट और अन्य कानूनों के तहत) रिपोर्ट किए गए, 16-18 साल के बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के आधिकांश मामले, आम तौर पर ‘प्रकृति में सहमति से बनाए गए यौन संबंधों’ के होते हैं. जोकि आमतौर पर किशोरों के आचरण से नाखुश, लड़की के माता-पिता के कहने पर दर्ज किए जाते हैं.

  • इसलिए, सबसे प्रासंगिक सवाल यह है कि क्या इस उम्र की किशोर लड़की या लड़के में “स्वतंत्र सहमति” (Free Consent) देने की क्षमता होती है.
  • रिकॉर्ड बताते हैं, कि इस आयु वर्ग में ज्यादातर मामलों में, लड़कियां प्रतिकूल हो जाती हैं क्योंकि यौन-संबंध उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं बनाए गए होते है, और उन्हें यौन-क्रियाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित अथवा प्रलोभित नहीं किया गया था.
  • यह भी देखा गया है, कि हाल के दशकों में सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण में बदलाव के कारण किशोर अपने आचरण के निहितार्थों को समझने के लिए पर्याप्त समझदार भी हुए हैं.

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