Sansar डेली करंट अफेयर्स, 08 January 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 08 January 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Pradhan Mantri Laghu Vyapari Maan-dhan Yojana

संदर्भ

व्यापारियों और अपनी आजीविका चलाने वाले व्यक्तियों के लिए बनी राष्ट्रीय पेंशन योजना – प्रधान मंत्री लघु व्यापारी मान-धन योजना – के लिए सरकार ने मार्च, 2020 के अंत तक 50 लाख पंजीकरण का लक्ष्य रखा था परन्तु अभी तक मात्र 25 हजार व्यक्तियों ने पंजीकरण करवाया है.

कुछ आँकड़े

  • सरकारों आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मात्र 84 व्यापारियों और अपनी आजीविका चलाने वाले व्यक्तियों ने अपना पंजीकरण करवाया है.
  • ऐसे व्यक्तियों की संख्या केरल में 59, हिमाचल प्रदेश में 54, जम्मू-कश्मीर में 29 और गोवा में 2 है.
  • लक्षद्वीप और मिजोरम में अभी तक किसी ने भी पंजीकरण नहीं करवाया है.
  • सबसे अधिक पंजीकरण – 6,765 – उत्तर प्रदेश में हुआ है.

योजना के मुख्य तत्त्व

  • इस योजना के अंतर्गत सभी छोटे दुकानदारों, खुदरा विक्रेताओं और स्व-नियोजित व्यक्तियों को 60 वर्ष होने पर न्यूनतम 3,000 रुपये की मासिक पेंशन दी जायेगी.
  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए वे ही व्यक्ति योग्य माने जाएँगे जिनकी आयु 18 से 40 के बीच है और जिनका GST टर्न ओवर डेढ़ करोड़ रु. से कम है.
  • इस योजना में उन लोगों को सम्मिलित नहीं किया जाएगा जिनको सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जैसे – राष्ट्रीय पेंशन योजना, कर्मचारी राज्य बीमा योजना और कर्मचारी भविष्य निधि. इसके अतिरिक्त जो आयकर के दायरे में आते हैं, उनको इसका लाभ नहीं मिलेगा.
  • इस योजना के लिए लाभार्थी को प्रत्येक महीने एक विशेष राशि जमा करनी होगी और केंद्र सरकार उतनी ही राशि अपनी ओर से जमा करेगी.
  • यह योजना स्वघोषणा पर आधारित योजना है क्योंकि इसमें बैंक खाते और आधार कार्ड के अतिरिक्त कोई भी अभिलेख जमा करने की आवश्यकता नहीं है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : What is Protecting Power?

संदर्भ

अमेरिका द्वारा ईरान के मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या की जाने के पश्चात् ईरान सरकार ने तेहरान में स्थित स्विट्ज़रलैंड के दूतावास में अपना विरोध पंजीकृत कर दिया है.

पंजीकरण के लिए स्विट्ज़रलैंड के दूतावास को ही क्यों चुना गया?

  • अमेरिका और ईरान के बीच कोई कूटनीतिक सम्बन्ध नहीं है अर्थात् न अमेरिका में ईरान का कोई दूतावास है और न अमेरिका का ही कोई दूतावास ईरान में है.
  • अमेरिका में ईरान का जो भी हित है उसकी देखभाल वाशिंगटन में स्थित पाकिस्तानी दूतावास करता है. इसी प्रकार अमेरिका का ईरान में जो हित है उसकी देखभाल स्विट्ज़रलैंड करता है. इस प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था में इसी देश के हितों की देखभाल करने वाला देश रक्षक शक्ति (protecting power) कहलाता है. इसके बारे में आवश्यक विधान 1961 और 1963 की वियेना संधियों में किया गया है.

वियेना संधियाँ क्या कहती हैं?

1961 की वियेना संधि कहती है कि यदि दो देशों के बीच कूटनीतिक सम्बन्ध टूट जाए अथवा किसी मिशन को स्थाई अथवा तात्कालिक रूप से वापस बुला लिया जाए तो वापस बुलाने वाला देश अपने हितों की रक्षा का भार किसी ऐसे तीसरे देश को सौंप सकता है जो इसके लिए तैयार हो.

1963 की वियेना संधि यह प्रावधान करती है कि ऐसी व्यवस्था के अन्दर रक्षक शक्ति (protecting power) प्राप्त करने वाले देश की पूर्वानुमति लेना आवश्यक है.

रक्षक शक्ति (Protecting Power) के रूप में स्विट्ज़रलैंड की भूमिका

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और कौंसुलर स्तर के सम्बन्ध नहीं हैं. इसलिए स्विट्ज़रलैंड की सरकार तेहरान में स्थित अपने दूतावास के माध्यम से 21 मई, 1980 से ईरान में अमेरिका की रक्षक शक्ति के रूप में काम कर रहा है. यह दूतावास ईरान में रहने वाले या ईरान की यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को कौंसुलर सेवाएँ प्रदान करता है.

अमेरिकी सरकार ईरान में स्थित स्विट्ज़रलैंड के दूतावास को “US Virtual Embassy” की संज्ञा देती है जो उसके सरकारी वेब-पेज से प्रकट होता है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Eighth Schedule

संदर्भ

तुलु भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची (eighth schedule) में सम्मिलित करने के लिए माँग बहुधा उठती रहती है.

आठवीं अनुसूची (eighth schedule) क्या है?

संविधान की आठवीं अनुसूची में देश की आधिकारिक भाषाओं की सूची दी गई है. अनुच्छेद 344(1) और 351 के अनुसार इस अनुसूची में 22 भाषाएँ अंकित हैं. ये भाषाएँ हैं – असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संथाली, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू.

दरअसल, इनमें से 14 भाषाओं को संविधान में सम्मिलित किया गया था. परन्तु इस अनुसूची में अन्य भाषाओं के प्रवेश की माँग हमेशा से उठती आई हैं. 1967 ई. में सिन्धी भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ा गया. इसके पश्चात्, कोंकणी भाषा, मणिपुरी भाषा और नेपाली भाषा को 1992 ई. में जोड़ लिया गया. 2003 में बोड़ो भाषा, डोगरी भाषा, मैथिली भाषा और संथाली भाषा आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कर लिए गये.

तुलु भाषा का संक्षिप्त परिचय

  • तुलु एक द्रविड़ भाषा है जिसे बोलने वाले लोग दक्षिण भारत में रहते हैं. पिछली जनगणना से पता चलता है कि भारत में तुलु बोलने वाले लोगों की संख्या 18,47,427 है जबकि आठवीं अनुसूची में सम्मिलित मणिपुरी और संस्कृत भाषा बोलने वाले लोग तुलनात्मक दृष्टि से बहुत कम हैं.
  • रोबर्ट काल्डवेल (1814-1891) ने द्रविड़ भाषाओं का एक तुलनात्मक व्याकरण लिखा था जिसमें बताया गया था कि तुलु द्रविड़ परिवार की सर्वाधिक विकसित भाषाओं में से एक है.
  • जिन क्षेत्रों में तुलु भाषा प्रधानतः बोली जाती है उसे बोलचाल की भाषा में तुलु नाडु कहा जाता है. इसके अन्दर दक्षिण कन्नड़ के जिले, कर्नाटक का उडुपी और पयसवनी नदी अथवा चंद्रगिरी तक फैला हुआ केरल का कसरागोड़ जिला आता है. विदित हो कि कसरागोड़ जिले को सप्तभाषा संगम भूमि भी कहते हैं क्योंकि यहाँ तुलु समेत सात भाषाओं का संगम देखने को मिलता है. वस्तुतः कसरागोड़ के साथ-साथ मंगलुरु और उडुपी नगर तुलु संस्कृति के गढ़ माने जाते हैं.

आठवीं अनुसूची में प्रवेश का नितिहार्थ

  1. आठवीं अनुसूची में प्रवेश होने पर तुलु भाषा को साहित्य अकादमी की मान्यता मिल जायेगी.
  2. तुलु भाषा की पुस्तकों का देश की अन्य मान्यता प्राप्त भाषाओं में अनुवाद होने लगेगा.
  3. संसद तथा राज्य विधान सभाओं में सांसद और विधायक तुलु भाषा में बोल सकेंगे.
  4. लोक सेवा परीक्षाओं में तथा अन्य अखिल भारतीय प्रतिस्पर्धाओं में तुलु भाषी अपनी भाषा में लिख सकेंगे.

भारत की भाषाई विविधता

  • 2001 की जनगणना के अनुसार, भारत में ऐसी 30 भाषाएँ हैं जिनमें प्रत्येक को बोलने वालों की संख्या 10 लाख से ऊपर है.
  • इन 30 भाषाओं के अतिरिक्त 122 भाषाएँ ऐसी हैं जिनमें प्रत्येक को बोलने वालों की संख्या 10,000 तक है.
  • 1,599 भाषाएँ ऐसी हैं जिनको “बोली” कह सकते हैं क्योंकि ये किसी विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित हैं और जिनमें से कुछ विलुप्ति के कगार पर हैं.

संविधान का अनुच्छेद 29

संविधान का अनुच्छेद 29 यह प्रावधान करता है कि विशिष्ट भाषा, विशिष्ट लिपि या विशिष्ट संस्कृति रखने वाले नागरिकों को यह अधिकार है कि वे इन वस्तुओं का संरक्षण करें.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Food processing and related industries in India- scope and significance, location, upstream and downstream requirements, supply chain management.

Topic : Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA)

संदर्भ

APEDA द्वारा निर्मित पोर्टल – फार्मर कनेक्ट पोर्टल – से अब तक 800 कृषि उत्पादक संगठन (FPO) जुड़ चुके हैं. ज्ञातव्य है कि यह पोर्टल APEDA ने अपनी वेबसाइट पर इसलिए दिया है जिससे कि कृषि उत्पादक संगठन और कृषि उत्पादक कम्पनियाँ  निर्यातकों से सम्बन्ध बना सकें.

APEDA क्या है?

  1. APEDA का पूरा नाम है – कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण / Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority.
  2. APEDA वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत एक ऐसा निकाय है जिसका काम निर्यात को बढ़ावा देना है.
  3. इसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा APEDA अधिनियम, 1985 के तहत की गई है.
  4. पहले इस निकाय का नाम प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात प्रोत्साहन परिषद् (Processed Food Export Promotion Council – PFEPC) हुआ करता था.
  5. इस निकाय को यह उत्तरदायित्व सौंपा कि वह इन वस्तुओं के निर्यात पर विशेष ध्यान दें -फल, सब्जियाँ, मांस, मुर्गी, दूध उत्पाद, शहद, गुड़, चीनी, कोको, शराब और गैर-मादक पेय, आंचार, पापड, चटनी, अनाज, मूंगफली, अखरोट, फूल, ग्वार गम, जड़ी-बूटी और औषधीय पौधे.
  6. इसके अतिरिक्त APEDA को चीनी के आयात पर नजर रखने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.
  7. इसे निर्यात उत्पादों के मानकों और विशिष्टताओं को निर्धारित करने और इनको डब्बाबंद करने और बाजार में लाने की भी जिम्मेवारी सौंपी गई है.
  8. नीति आयोग ने APEDA के द्वारा आर्गेनिक उत्पादों के लिए निर्धारित मानकों को लागू करने का निर्देश निर्गत किया है जिससे कि उनका विश्व के बाजार में अधिक से अधिक प्रवेश हो सके.

APEDA की प्रशासनिक बनावट

  1. अध्यक्ष – केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त
  2. निदेशक – APEDA द्वारा नियुक्त
  3. सचिव – केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त
  4. अन्य अधिकारी और कर्मचारी – APEDA द्वारा नियुक्त

कृषि उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organisation – FPO) क्या है?

यह कृषि उत्पादकों का एक समूह है जिसके सदस्य इस संगठन में अंशधारकों (shareholders) के रूप में पंजीकृत होते हैं. यह समूह कृषि उत्पादक से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों को देखता है और सदस्य उत्पादकों के लाभ के लिए काम करता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in Space.

Topic : Indian Data Relay Satellite System

संदर्भ

भारत अन्तरिक्ष में इंडियन डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (Indian Data Relay Satellite System – IDRSS) प्रणाली के अंतर्गत उपग्रहों की एक नई शृंखला अन्तरिक्ष में स्थापित करने जा रहा है और इस प्रकार अन्तरिक्ष में स्थित भारत की संपदाओं के अनुसरण और संचार का एक नया युग आरम्भ होने जा रहा है.

इंडियन डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम (IDRSS) क्या है?

इंडियन डाटा रिले सैटेलाइट सिस्टम एक उपग्रह शृंखला है जो भारत के अन्य उपग्रहों का अनुसरण करेगा अर्थात् उन पर नज़र रखेगा, उनसे सूचना प्राप्त करेगा एवं साथ ही उनको सूचना भेजेगा.

ये उपग्रह दो-दो हजार किलोग्राम के होंगे और इनका प्रक्षेपण GSLV राकेट से किया जाएगा. ये अन्तरिक्ष में भू-स्थिर परिक्रमा पथ पर धरती से 36,000 किलोमीटर दूर अवस्थित रहेंगे जहाँ से वे पृथ्वी के एक-तिहाई भाग पर नज़र रख सकते हैं. ऐसे तीन उपग्रहों से पूरी पृथ्वी का सर्वेक्षण संभव होता है.

महत्ता

भविष्य में IDRSS इसरो (ISRO) के लिए बड़े काम की वस्तु सिद्ध होगी क्योंकि अभी आगे चलकर इसरो ढेर सारे अन्तरिक्षीय काम करने जा रहा है, जैसे – अन्तरिक्ष में डॉकिंग करना और अन्तरिक्ष केंद्र स्थापित करना एवं साथ ही ISRO चाँद, मंगल और शुक्र की ओर भी अन्तरिक्षयान भेजने वाला है.

IDRSS का सबसे पहला लाभ गगनयान 2022 अभियान के अन्तरिक्षयात्रियों को मिलेगा क्योंकि वे इसकी सहायता से अपनी यात्रा के दौरान धरती पर स्थित अभियान नियंत्रण कक्ष से लगातार सम्पर्क में रह सकते हैं.


Prelims Vishesh

Great Indian Bustards (GIB) :-

  • यह चिड़ियाँ IUCN की लाल सूची में विकट रूप से संकटग्रस्त (critically endangered species) प्रजाति बताई गई है.
  • राजस्थान के अलावे यह चिड़ियाँ गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में भी पाई जाती है. परन्तु इसका मुख्य निवास राजस्थान में ही है.

National Assessment and Accreditation Council (NAAC) :-

  • NAAC विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के द्वारा स्थापित एक परिषद् का नाम है जिसका कार्य शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय प्रमाणपत्र मुहैया कराना है.
  • इसकी स्थापना 1992 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 के सुझावों पर हुई थी.
  • यह एक स्वायत्त संगठन है.

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