Sansar डेली करंट अफेयर्स, 08 August 2019

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 08 August 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures.

Topic : Fit-and-proper criteria

संदर्भ

भारतीय रिज़र्व बैंक ने सरकारी बैंकों के बोर्ड निदेशकों के लिए फिट एंड प्रोपर मानदंड (Fit-and-proper criteria) को और कड़ा कर दिया है.

मुख्य प्रस्तावित परिवर्तन

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड के लिए निर्वाचित निदेशकों हेतु फिट एंड प्रॉपर मानदंड) निदेशावाली, 2019 के अनुसार भारतीय स्टेट बैंक और सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों को एक नामांकन एवं मुआवजा समिति (Nomination and Remuneration Committee – NRC) का गठन करना होता है. इस समिति में केंद्र द्वारा नामित निदेशक शामिल नहीं होते.
  • NRC से सम्बंधित शर्तें और निदेशकों की नियुक्ति की पद्धति निजी बैंकों में चल रही पद्धति के अनुसार तथा बैंक बोर्ड ब्यूरो की अनुशंसाओं एवं कम्पनी अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप होगी.
  • NRC में कम से कम तीन गैर-कार्यकारी निदेशक होंगे जो निदेशक बोर्ड से ही आएँगे. इनमें से न्यूनतम आधे निदेशक स्वतंत्र निदेशक होंगे. इस समिति में कम से कम एक सदस्य बोर्ड की जोखिम प्रबंधन समिति का सदस्य होगा.
  • निदेशक के रूप में निर्वाचित होने वाले व्यक्ति को कम से कम स्नातक होना चाहिए और उसकी उम्र 35 से 67 के बीच होना चाहिए. प्रत्याशी के पास बैंकों के लिए उपयोगी क्षेत्रों का विशेष ज्ञान अथवा व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए.
  • निर्वाचित निदेशक का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा और वह दुबारा भी चुना जा सकता है बशर्ते कि उसका पूरा कार्यकाल छह वर्षों से अधिक नहीं हो.
  • यह भी देखना होगा कि प्रत्याशी किन इकाइयों में रूचि रखता है. इसके लिए उन इकाइयों की इस दृष्टि से पड़ताल की जायेगी कि उनमें से कोई इकाई पिछले एक दशक में डिफ़ॉल्ट में तो नहीं था.

निदेशक पद के लिए निर्योग्यताएँ

  • प्रत्याशी को इन संस्थाओं का सदस्य नहीं होना चाहिए – किसी व्यावसायिक बैंक का बोर्ड, भारतीय रिज़र्व बैंक, वित्तीय संस्था, बीमा कम्पनी, गैर-ऑपरेटिव वित्तीय होल्डिंग कंपनी (NOFHC).
  • उसने ये गतिविधियाँ न की हों – हायर-पर्चेज, पैसा लगाना, ऋण देना, निवेश, लीज देना और अन्य परा-बैंकिंग गतिविधियाँ.
  • यदि कोई व्यक्ति किसी बैंक, RBI अथवा बीमा कम्पनी में किसी भी श्रेणी में छह वर्ष तक निदेशक रहा हो तो उसका चयन नहीं होगा.
  • प्रत्याशी ने शेयर दलाली का काम कभी नहीं किया हो तभी उसकी उम्मेदवारी सही मानी जायेगी.
  • प्रत्याशी को इन संस्थाओं का सदस्य नहीं होना चाहिए – संसद, राज्य विधानमंडल, नगर निगम, नगरपालिका, या अन्य स्थानीय निकाय, अधिसूचित क्षेत्र परिषद्, नगर परिषद्, पंचायत, ग्राम सभा अथवा जिला परिषद्.
  • प्रत्याशी को किसी ऐसे चार्टर अकाउंटेंट फर्म का भागीदार नहीं होना चाहिए जो किसी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा भारतीय स्टेट बैंक में अंकेक्षण का काम कर रहा हो.

GS Paper  2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : National Population Register (NPR)

संदर्भ

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (National Population Register – NPR) के अंतर्गत भारतीय नागरिकों के बायोमेट्रिक और वंशवृक्ष से सम्बंधित विवरणों का अभिलेख तैयार करने के लिए दूसरा चरण सितम्बर 2020 में आरम्भ किया जाएगा.

National Population Register (NPR)

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी क्या है?

  • यह एक पंजी है जिसमें देश के निवासियों से सम्बंधित विवरण होगा.
  • इस पंजी को नागरिकता अधिनियम 1955 तथा नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण एवं राष्ट्रीय पहचान कार्य का निर्गमन) नियमावली, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य, जिला, अनुमंडल और स्थानीय (गाँव/कस्बा) के स्तर पर तैयार किया जा रहा है.
  • भारत के प्रत्येक “सामान्य निवासी” को इस पंजी में दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है.
  • यहाँ “सामान्य निवासी” से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो किसी स्थान विशेष में पिछले छह महीने या उससे अधिक से रहा हो अथवा वह व्यक्ति जो उस क्षेत्र में आगामी छह महीने अथवा अधिक रहना चाहता है.
  • राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी में जो डेटाबेस होगा उसके अन्दर जनसांख्यिक विवरणों के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी होंगे.
  • अंत में 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को एक निवासी पहचान का रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड (RIC) दिया जाएगा. यह एक स्मार्ट कार्ड होगा जिसमें लगे चिप में प्रत्येक व्यक्ति के जनसांख्यिक और बायोमेट्रिक विवरण अंकित होंगे. इस कार्ड पर UID नंबर भी छपा होगा.

GS Paper  3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life.

Topic : Hyperloop

संदर्भ

रिचर्ड ब्रैन्सन की कम्पनी वर्जिन हाइपरलूप वन ने महाराष्ट्र सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अनुसार वह मुंबई और पुणे के बीच एक हाइपरलूप का निर्माण करेगी.

बताया जाता है कि इससे मुंबई और पुणे की यात्रा तीन घंटे (सड़क) से घटकर मात्र 25 मिनट की हो जायेगी.

hyperloop-machanism

हाइपरलूप परिवहन प्रणाली क्या है?

  • हाइपरलूप परिवहन की वह प्रणाली है जिसमें एक निर्वात ट्यूब के माध्यम से एक वाहन को वेगपूर्वक ढकेला जाता है. ऐसा करने से उस वाहन की गति हवाई जहाज की गति जैसी हो जाती है.
  • हाइपरलूप की अवधारणा टेसला कम्पनी के संस्थापक एलन मस्क की देन है.
  • अमेरिका की हाइपरलूप ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी का दावा है कि इस प्रणाली से प्रत्येक किलोमीटर पर 40 मिलियन डॉलर का खर्च आता है और यदि हाइपरलूप की जगह कोई तीव्र गति वाली रेलगाड़ी का प्रबंध किया जाए तो इससे लगभग दुगुना खर्च आएगा.

यह कैसे काम करता है?

  • हाइपरलूप में एक कैप्सूल होता है जो एक स्टील ट्यूब के अन्दर आना-जाना करता है. यह ट्यूब निर्वात होता है. यह ट्यूब एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक लगातार बना होता है.
  • जिस कैप्सूल में यात्री बैठेंगे या माल रखा जाएगा वह इस ट्यूब के एक छोर से दूसरे छोर तक तेजी से यात्रा करेगा.
  • इसमें आगे एक एयर कंप्रेसर और पीछे एक बैटरी कम्पार्टमेंट होता है.
  • कैप्सूल के अन्दर हवा की एक पतली परत होती है जो कैप्सूल के गतिरोध को दूर करती है.
  • ये कैप्सूल बिना ड्राईवर के चलते हैं और उनकी गति एक हजार किलोमीटर प्रति घंटे होती है.
  • ट्यूब के किनारे-किनारे इंडक्शन मोटर लगे होते हैं जो कैप्सूल की गति को नियंत्रित करते हैं.
  • कैप्सूल की गति को बढ़ाने और रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हुए हैं.

हाइपरलूप की समस्याएँ

  • हाइपरलूप चलाने के लिए एक नगर से दूसरे नगर तक सैंकड़ों किलोमीटर एक ट्यूब बनाना होता है. यह अपने-आप में एक दुष्कर कार्य है.
  • इतने लम्बे निर्वात ट्यूब को इतना सशक्त होना होगा कि वह सैंकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाले और हजारों किलोग्राम के भार वाले गतिशील कैप्सूल को सम्भाल सके. यह भी एक अत्यंत कठिन कार्य है.
  • हाइपरलूप से सम्बंधित प्रयोग छोटे पैमाने पर हो चुके हैं. विचारने की बात यह है कि क्या बड़े स्तर पर इसका प्रयोग सफल होगा? क्योंकि तब उसे हजारों किलोग्राम का वायुदाब झेलना होगा जिससे कोई भी निर्वात चैंबर ध्वस्त हो सकता है.
  • हाइपरलूप को चलाने में ताप उत्पन्न हो सकता है. अतः इसमें ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि यह समयानुसार ताप की वृद्धि को सम्भाल सके.
  • हाइपरलूप पर बहुत अधिक खर्च आएगा.
  • हाइपरलूप से न केवल मालों वरन् मनुष्यों का भी आना-जाना होगा. अतः इसका संचालन ऐसा होना चाहिए कि जान-माल की क्षति शून्य हो.

GS Paper 3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Syllabus : Issues related to biotechnology.

Topic : Genome India Initiative

संदर्भ

जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने आगामी पाँच वर्षों में दो चरणों के अंतर्गत लगभग 20 हजार भारतीय जीनोमों को स्कैन करने की योजना बनाई है जिससे कि कैंसर की जाँच के लिए परीक्षण हो सके.

जीनोम इंडिया पहल से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • इसके पहले चरण में देश के हर कोने में रहने वाले दस हजार भारतीयों के जीनोमों को पूर्णतः क्रमबद्ध किया जाएगा और भारत की जैव-विविधता का पता लगाया जाएगा.
  • दूसरे चरण में ऐसे 10,000 लोगों के जीनोम क्रमबद्ध होंगे जो रोगग्रस्त हैं.
  • इस योजना से प्राप्त होने वाले विशाल डाटा भंडार को मशीनी ज्ञान तकनीकों का उपयोग करते हुए मिलान किया जाएगा और उन जीनों का पता लगाया जाएगा जो कैंसर अथवा अन्य रोगों का पूर्वानुमान दे सकते हैं.

महत्त्व

  • जीनोम इंडिया कार्यक्रम से प्राप्त डाटा किसी भी शोधकर्ता के लिए विश्लेषण हेतु उपलब्ध रहेगा क्योंकि यह डाटा एक प्रस्तावित राष्ट्रीय जैव वैज्ञानिक डाटा केंद्र में संचित किया जाएगा.
  • जीनोम इंडिया पहल के माध्यम से सामन्य रोगों के लिए जीनों और आनुवंशिक विविधताओं को पहचाने में सहायता मिलेगी. साथ ही इससे मेंडेलियन विकारों (Mendelian disorders) का उपचार करने में भी सहयोग मिलेगा. इसके अतिरिक्त भारत में प्रीसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) के माध्यम से उपचार का मार्ग भी प्रशस्त होगा और फलतः देश के जनसामान्य के स्वास्थ्य की देखभाल में सुधार आएगा.

जीनोमिक्स क्या है?

  • किसी प्राणी के जीन सहित उसके पूरे DNA के क्रम को जीनोम कहते हैं.
  • जीनोमिक्स (Genomics) विज्ञान का वह बहु-शाखीय अध्ययन क्षेत्र है जिसमें जीनोमों की बनावट, कार्य, क्रमिक विकास, मानचित्रण और सम्पादन का अध्ययन होता है.
  • जीनोमिक्स में जीनोमों को क्रमबद्ध कर के उनका विश्लेषण किया जाता है.
  • जीनोमिक्स में हुई प्रगति के कारण मनुष्य को जटिल जैव-वैज्ञानिक प्रणालियों, यहाँ तक की मस्तिष्क को समझने में सहयता मिली है.

जीनोम को क्रमबद्ध करना आवश्यक क्यों?

मानव जीनोम को सबसे पहले 2003 में क्रमबद्ध किया गया था. तब से वैज्ञानिकों को यह पता है कि हर व्यक्ति की आनुवांशिक बनावट अनूठी होती है और उसका रोग से सम्बन्ध होता है. सिस्टिक फाब्रोसिस और थेलसिमिया जैसे लगभग 10,000 रोग इसलिए होते हैं कि कोई एक अकेला जीव ठीक से काम नहीं कर रहा होता है. जीनोम को क्रमबद्ध करने से यह सिद्ध हुआ है कि कैंसर भी कुछ अंगों का रोग न होकर आनुवांशिक भी हो सकता है.

विश्व-भर में चल रही जीनोम परियोजनाएँ

Genome Sequencing To Map Population Diversity

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (CSIR) पूरे भारत वर्ष से लगभग 1,000 ग्रामीण युवाओं के जीनोमों को क्रमबद्ध करेगा जिससे कि देश की जनसंख्या का एक आनुवांशिक मानचित्र तैयार हो सके. इस परियोजना का उद्देश्य छात्रों को जीनोमिक्स की उपादेयता के विषय में जागरूक करना है. भारत सरकार पहले से एक वृहद् कार्यक्रम चला रही है जिसमें कम से कम दस हजार भारतीय जीनोमों को क्रमबद्ध किया जाना है. वर्तमान परियोजना उसी वृहद् परियोजना का एक अंश है. इस परियोजना के लिए जिन व्यक्तियों से जीनोमों के नमूने जमा किये जा रहे हैं वे देश की जनसांख्यिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं. अधिकांश जीनोम महाविद्यालय के उन छात्र-छात्राओं से लिए जा रहे हैं जो जीव विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं. परियोजना का लक्ष्य है अधिक से अधिक महाविद्यालय के छात्रों तक पहुंचना और उन्हें जीनोमिक्स के सम्बन्ध में शिक्षित करना. इस परियोजना के फलस्वरूप वे अपनी जीनोम से प्रकट हुई सूचना के बारे में जान सकेंगे.

Earth Biogenome Project

अंतर्राष्ट्रीय जीव वैज्ञानिकों ने अर्थ बायो-जीनोम प्रोजेक्ट (BioGenome Project – EBP) नामक परियोजना आरम्भ की है. यह एक बड़े सोच वाली परियोजना है जिसमें अगले 10 वर्षों तक विश्व के एक-एक ज्ञात पशु, पौधे और फंफूद प्रजाति (fungal species) के DNA का अध्ययन किया जाएगा. इसके लिए 1.5 मिलियन अलग-अलग जिनेमों को क्रमबद्ध किया जाएगा जिसपर अनुमानतः 4.7 बिलियन डॉलर का व्यय आएगा.

EBP परियोजना में काम करने के लिए विश्व के 19 शोध संस्थानों ने अब तक अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं और कुछ अन्य इसमें सम्मिलित होने की सोच रहे हैं. जिन प्राणियों की DNA शृंखला का अध्ययन होने वाला है, उनमें बैक्टीरिया और archaea जैसे अ-जटिल सूक्ष्म जीवाणुओं को छोड़कर अन्य सभी प्रकार के प्राणी होंगे, जैसे – पशु, पौधे, फंफूद, प्रोटोजोआ आदि. इस परियोजना के लिए धनराशि सरकारों, फाउंडेशनों, धार्मादा प्रतिष्ठानों (charities) से प्राप्त की जायेगी. इस परियोजना के पहले चरण में 9,000 यूकेरियोटिक (eukaryotic) प्राणिवर्गों, अर्थात् उन प्राणियों जिनके कोषों में झिल्ली से घिरा एक नाभिक होता है, का रेफरेन्स जीनोम तैयार किया जाएगा. इसमें 600 मिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी और अभी तक 200 मिलियन डॉलर का प्रबंध हो भी चुका है. इस परियोजना में सम्मिलित ब्रिटेन के प्रतिभागी Wellcome Sanger Institute के नेतृत्व में देश में रहने वाले सभी 66,000 ज्ञात प्रजातियों के जेनेटिक कोड को क्रमबद्ध करेंगे. 100 मिलियन पौंड (£100m) वाले इस राष्ट्र-स्तरीय कार्यक्रम को Darwin Tree of Life का नाम दिया गया है.

100K Genome Asia Project

सिंगापुर-स्थित नान्यांग प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (Nanyang Technological University – NTU) के नेतृत्व में एक परियोजना चल रही है जिसमें 50 हजार भारतीयों सहित एक लाख एशियाई लोगों के सम्पूर्ण जीनोम को क्रमबद्ध किया जाएगा. इस योजना का नाम 100k जीनोम एशिया प्रोजेक्ट है. इसमें भारत के वैज्ञानिक और कंपनियाँ भी काम कर रही हैं. यह एक लाभ रहित परियोजना है जिसमें एशिया के एक लाख लोगों के जीनोम को इस उद्देश्य से क्रमबद्ध किया जा रहा है कि इससे एशिया महादेश के लोगों को सही-सही औषधि देना संभव हो जाएगा. इस परियोजना में डाटा विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence – AI) के क्षेत्र में हुई प्रगतियों तथा डाटा विश्लेषण का भी सहारा लिया जाएगा. इसके लिए दक्षिण एशिया के 12 देशों तथा उत्तरी एवं पूर्वी एशिया के कम-से-कम 7 देशों के लोग चुने जाएँगे. प्रथम चरण में परियोजना में एशिया की सभी प्रमुख प्रजातियों के लिए चरणबद्ध reference genomes बनाने पर बल होगा. इससे एशिया की विभिन्न आबादियों के इतिहास और उसकी भीतरी बनावट को समझने में बहुत बड़ी सहायता मिलेगी. एक लाख व्यक्तिगत जीनोम को क्रमबद्ध करने के समय उससे माइक्रो-बायोम, चिकित्सकीय और फेनोटाइप सूचनाएँ भी जोड़कर रखी जायेंगी. इससे लाभ यह होगा कि स्थानीय समुदायों के मरे हुए और स्वस्थ जीवित व्यक्तियों के विषय में गहनतर विश्लेषण संभव हो सकेगा.


GS Paper  3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

Syllabus : Awareness in space.

Topic : Space Situational Awareness Control Centre

संदर्भ

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पिछले दिनों बेंगलुरु में स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस कण्ट्रोल सेण्टर का शिलान्यास किया है.

पृष्ठभूमि

  • ISRO ने एक निदेशालय स्थापित किया है जो अन्तरिक्ष में स्थित हमारे देश के उपग्रहों आदि को अन्तरिक्षीय मलबे से सुरक्षित करने का काम देखेगा. इस निदेशालय का नाम है – Directorate of Space Situational Awareness and Management.
  • बेंगलुरु में बनाया जाने वाला नियंत्रण केंद्र इसी परिप्रेक्ष्य में शुरू किया जा रहा है.

मुख्य कार्य

  • यह नियंत्रण केंद्र वे सारे कार्य करेगा जिनसे अन्तरिक्ष में स्थित देश की सम्पत्तियाँ इन वस्तुओं से सुरक्षित रहें – निष्क्रिय उपग्रह, चक्कर लगाते हुए पिंड, क्षुद्रग्रह आदि.
  • यह केंद्र स्वदेशी वेधशालाओं की सहायता से निष्क्रिय उपग्रहों पर नजर रखेगा और उपयोगी सूचनाएँ इकठ्ठा करेगा.

महत्त्व

जैसा कि सर्वविदित है कि कई देश अन्तरिक्ष में उपग्रह आदि स्थापित कर रहे हैं, इस कारण वहाँ मलबे के विशाल भण्डार उत्पन्न हो गये हैं. यह खतरा बना रहता है कि इनसे टकराकर कोई सक्रिय अन्तरिक्षयान अथवा उपग्रह नष्ट हो जाए. इस कारण अन्तरिक्ष में क्या स्थिति चल रही है उसके प्रति जागरूकता और फिर उसका प्रबंधन पूरे विश्व-भर के लिए एक आवश्यकता बन गया है.


Prelims Vishesh

World Breastfeeding Week 1st – 7th August :-

  • पहली अगस्त से लेकर सातवीं अगस्त, 2019 के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह (World Breastfeeding Week – WBW) मनाया जा रहा है.
  • इस बार के समारोह में स्तनपान की सुरक्षा, प्रोत्साहन और समर्थन पर बल दिया जा रहा है.

Mt. Elbrus :

  • एक भारतीय पर्वतारोही अभियान दल माउंट एलब्रुस पर चढ़ने की योजना बना रहा है.
  • यह चोटी यूरोपीय महाद्वीपीय क्षेत्र की सबसे ऊँची चोटी है जो वस्तुतः एक सुषुप्त ज्वालामुखी है.
  • यह जॉर्जिया देश की सीमा के निकट दक्षिणी रूस के कोकेशस पर्वतमाला में अवस्थित है.

About the National Handloom Day :

  • पूरे देश में अगस्त 7 को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया.
  • यह दिवस अगस्त 7 को इसलिए मनाया जाता है कि इसी दिन 1905 में स्वदेशी आन्दोलन का सूत्रपात हुआ था.

8 July, 2019 में त्रुटि रह गई थी - टॉपिक Section 124
कई जगह 124 के बदले 123 या 124 A के बदले 123 A लिखा गया है. जो गलत है. हर जगह 124 या 124A कर दीजिये.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

July, 2019 Sansar DCA is available Now, Click to Download new_gif_blinking

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.