Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 September 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 07 September 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : BIMSTEC

संदर्भ

बिम्सटेक चार्टर को उसके सृजन के 23 वर्ष पश्चात्‌ अंतिम रूप प्रदान किया गया. बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (BIMSTEC) चार्टर को BIMSTEC सचिवालय द्वारा तैयार किया गया है. एक समर्पित चार्टर के अभाव में, BIMSTEC का संचालन वर्ष 1997 के बैंकॉक घोषणा-पत्र के आधार पर किया जा रहा है.

चार्टर से अपेक्षित है कि यह सहयोग संबंधी दीर्घकालिक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करेगा तथा संस्थागत संरचना एवं निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल विभिन्‍न हितधारकों की भूमिकाओं व उत्तरदायित्वों को स्पष्ट रूप से निरूपित करेगा. 

भारत के लिए महत्त्व

  • यह एक्ट ईस्ट पॉलिसी (Act East Policy) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत के प्रयासों को गति प्रदान करेगा.
  • BIMSTEC राष्ट्रों के साथ आर्थिक संलग्नता को सुदृढ़ करके इन देशों में चीनी प्रभाव को सीमित करने में सहायता करेगा.
  • यह देश के सुदूर पूर्वोत्तर क्षेत्र को विकास के एक केंद्र के रूप में परिवर्तित करने के भारत के लक्ष्य को साकार करने में सहायता प्रदान करेगा.

BIMSTEC की स्थापना एवं स्वरूप

  • BIMSTEC का full form है – Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation.
  • यह एक क्षेत्रीय संगठन है जिसकी स्थापना Bangkok Declaration के अंतर्गत जून 6, 1997 में  हुई थी.
  • इसका मुख्यालय बांग्लादेश की राजधानी ढाकामें है.
  • वर्तमान में इसमें देश हैं (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका)  जिनमें 5 दक्षिणी-एशियाई देश हैं और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश (म्यांमार और थाईलैंड) हैं.
  • इस प्रकार के BIMSTEC के अन्दर दक्षिण ऐसा के सभी देश आ जाते हैं, सिवाय मालदीव, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के.

BIMSTEC के उद्देश्य

  • BIMSTEC का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-एशियाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों (बंगाल की खाड़ी से संलग्न) के बीच तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है.
  • आज यह संगठन 15 प्रक्षेत्रों में सहयोग का काम कर रहा है, ये प्रक्षेत्र हैंव्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, मत्स्य पालन, कृषि, सार्वजनिक स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, आतंकवाद निरोध, पर्यावरण, संस्कृति, लोगों का लोगों से सम्पर्क, जलवायु परिवर्तन.

BIMSTEC क्षेत्र का महत्त्व

  • बंगाल की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है. इसके आस-पास स्थित 7 देशों में विश्व की 22% आबादी निवास करती है और इनका संयुक्त GDP 2. 7 ट्रिलियन डॉलर के बराबर है.
  • यद्यपि इन देशों के समक्ष आर्थिक चुनौतियाँ रही हैं तथापि 2012-16 के बीच ये देश अपनी-अपनी आर्थिक वृद्धि की वार्षिक दर को 4% और 7.5% के बीच बनाए रखा है.
  • खाड़ी में विशाल संसाधन भी विद्यमान हैं जिनका अभी तक दोहन नहीं हुआ है.
  • विश्व व्यापार का एक चौथाई सामान प्रत्येक वर्ष खाड़ी से होकर गुजरता है.
  • बिम्‍सटेक एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र और आसपास के सात देश शामिल हैं, जो एक क्षेत्रीय एकता का प्रतिनिधित्‍व करते हैं. बिम्सटेक का उद्देश्य क्षेत्रीय संसाधनों और भौगोलिक लाभ का उपयोग करके आम हित के विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग के साथ व्यापार में तेजी लाना और विकास को गति देना है.

भारतीय हित

  • इस क्षेत्र में भारत की अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी है, अतः इससे भारत के हित भी जुड़े हुए हैं. BIMSTEC न केवल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है, अपितु इसके अन्दर हिमालय और बंगाल की खाड़ी जैसी पर्यावरण व्यवस्था विद्यमान है.
  • पड़ोस पहले” औरएक्ट ईस्ट” जैसी नीतिगत पहलुओं को लागू करने में BIMSTEC एक सर्वथा उपयुक्त मंच है.
  • भारत के लगभग 300 मिलियन लोग अर्थात् यहाँ की आबादी का एक चौथाई भाग देश के उन चार तटीय राज्यों में रहते हैं जो बंगाल की खाड़ी के समीपस्थ हैं. ये राज्य हैं – आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल. इसके अतिरिक्त 45 मिलियन की आबादी वाले पूर्वोत्तर राज्य चारों ओर भूभागों से घिरे हुए हैं और इनकी समुद्र तक पहुँच नहीं है. BIMSTEC के माध्यम से इन राज्यों को बांग्लादेश, म्यांमार और थाईलैंड जैसे देशों से सम्पर्क करना सरल हो जाएगा और विकास की अनेक संभावनाएँ फलीभूत होंगी.
  • बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्त्व भी है. इससे होकर मनक्का जलडमरूमध्य पहुंचना आसान होगा. उधर देखने में आता है कि चीन हिन्द महासागर में पहुँचने के लिए बहुत जोर लगा रहा है. इस क्षेत्र में उसकी पनडुब्बियाँ और जहाज बार-बार आते हैं, जो भारत के हित में नहीं हैं. चीन की आक्रमकता को रोकने में BIMSTEC देशों की सक्रियता काम आएगी.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

आसियान : म्यांमार एकमात्र एक ऐसा आसियान देश है जो भारत के साथ स्थल सीमा साझा करता है.

बिम्सटेक : म्यांमार दिसंबर 1997 में विम्सटेक का सदस्य बना तथा यह बिम्सटेक फ्री ट्रेड अग्रीमेंट का हस्ताक्षरकर्ता है.

मेकांग गंगा सहयोग : म्यांमार नवम्बर 2000 में इसकी स्थापना से ही मेकांग गंगा सहयोग (एमजीसी) का सदस्य है.

सार्क : म्यांमार को अगस्त 2008 में सार्क पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : G-20 Principles on Coordinated Cross-Border Movement of People

संदर्भ

भारत द्वारा स्वैच्छिक रूप से “लोगों की समन्वित सीमा पार आवाजाही” पर G-20 सिद्धांत प्रस्तावित किए गए (G-20 Principles on Coordinated Cross-Border Movement of People).

इन्हें G-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान कोविड-19 महामारी के परिप्रेक्ष्य में सीमा-पार आवाजाही पर ध्यान देने हेतु प्रस्तावित किया गया है. 

इन सिद्धांतों के घटक निम्नलिखित 3 के मानकीकरण को शामिल करते हैं, जैसे –

  1. परीक्षण प्रक्रियाएं तथा परीक्षण के परिणामों की सार्वभौमिक स्वीकार्यता.
  2. क्वारंटाइन प्रक्रिया.
  3. आवाजाही और पारगमन प्रोटोकॉल.

इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री ने विश्व भर की सरकारों से आह्वान किया कि उनके द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विदेशी छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी और फंसे हुए नाविकों (seafarers) को उनके देश तक पहुँचाने की सुविधा प्रदान की जाएगी.

वर्ष 2019 में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की संख्या 175 लाख थी. यह आँकड़ा भारत को अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों के एक अग्रणी देश के रूप में प्रस्तुत करता है.

इस दिशा में मारत द्वारा उठाए गए कदम

  • वंदे भारत मिशन (Vande Bharat Mission): यह भारत का सर्वव्यापक प्रत्यावर्तन अभियान (repatriation operation) रहा है, जिसके तहत कोविड-19 लॉकडाउन के कारण विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों को स्वदेश वापस लाया गया था.
  • भारत और विदेशों में फंसे नागरिकों के कल्याण एवं सुरक्षा के लिए ट्रेवल कॉरिडोर (travel bubbles) निर्मित किए गए थे.
  • G-20, 19 देशों की सरकारों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों तथा यूरोपीय संघ का एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है.
  • सामूहिक रूप से, 920 सदस्य आर्थिक उत्पादन के लगभग 80 प्रतिशत, वैश्विक जनसंख्या के दो-तिहाई और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के तीन-चौथाई का प्रतिनिधित्व करते हैं.

G20 क्या है?

  • G 20 1999 में स्थापित एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है जिसमें 20 बड़ी अर्थव्यस्थाओं की सरकारें और केन्द्रीय बैंक गवर्नर प्रतिभागिता करते हैं.
  • G 20 की अर्थव्यस्थाएँ सकल विश्व उत्पादन (Gross World Product – GWP) में 85% तथा वैश्विक व्यापार में 80% योगदान करती है.
  • G20 शिखर बैठक का औपचारिक नाम है – वित्तीय बाजारों एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था विषयक शिकार सम्मलेन.
  • G 20 सम्मेलन में विश्व के द्वारा सामना की जा रही समस्याओं पर विचार किया जाता है जिसमें इन सरकारों के प्रमुख शामिल होते हैं. साथ ही उन देशों के वित्त और विदेश मंत्री भी अलग से बैठक करते हैं.
  • G 20 के पास  अपना कोई स्थायी कर्मचारी-वृन्द (permanent staff) नहीं होता और इसकी अध्यक्षता प्रतिवर्ष विभिन्न देशों के प्रमुख बदल-बदल कर करते हैं.
  • जिस देश को अध्यक्षता मिलती है वह देश अगले शिखर बैठक के साथ-साथ अन्य छोटी-छोटी बैठकों को आयोजित करने का उत्तरदाई होता है.
  • वे चाहें तो उन देशों को भी उन देशों को भी बैठक में अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सकते हैं, जो G20 के सदस्य नहीं हैं.
  • पहला G 20 सम्मेलन बर्लिन में दिसम्बर 1999 को हुआ था जिसके आतिथेय जर्मनी और कनाडा के वित्त मंत्री थे.
  • G-20 के अन्दर ये देश आते हैं –अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका.
  • इसमें यूरोपीय संघ की ओर से यूरोपीय आयोग तथा यूरोपीय केन्द्रीय बैंक प्रतिनिधित्व करते हैं.

G-20 व्युत्पत्ति

1999 में सात देशों के समूह G-7 के वित्त मंत्रियों तथा केन्द्रीय बैंक गवर्नरों की एक बैठक हुई थी. उस बैठक में अनुभव किया गया था कि विश्व की वित्तीय चुनौतियों का सामना करने के लिए एक बड़ा मंच होना चाहिए जिसमें विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देशों के मंत्रियों का प्रतिनिधित्व हो. इस प्रकार G-20 का निर्माण हुआ.

इसकी प्रासंगिकता क्या है?

बढ़ते हुए वैश्वीकरण और कई अन्य विषयों के उभरने के साथ-साथ हाल में हुई G20 बैठकों में अब न केवल मैक्रो इकॉनमी और व्यापार पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है, अपितु ऐसे कई वैश्विक विषयों पर भी विचार होता है जिनका विश्व की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जैसे – विकास, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आतंकवाद की रोकथाम, प्रव्रजन एवं शरणार्थी समस्या.

G-20 के कार्यों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  • वित्तीय भाग (Finance Track)– वित्तीय भाग के अन्दर G 20 देश समूहों के वित्तीय मंत्री, केंद्रीय बैंक गवर्नर तथा उनके प्रतिनिधि शामिल होते हैं. यह बैठकें वर्ष भर में कई बार होती हैं.
  • शेरपा भाग (Sherpa Track)– शेरपा भाग में G-20 के सम्बंधित मंत्रियों के अतिरिक्त एक शेरपा अथवा दूत भी सम्मिलित होता है. शेरपा का काम है G20 की प्रगति के अनुसार अपने मंत्री और देश प्रमुख अथवा सरकार को कार्योन्मुख करना.

G-20 का विश्व पर प्रभाव

  • G-20 में शामिल देश विश्व के उन सभी महादेशों से आते हैं जहाँ मनुष्य रहते हैं.
  • विश्व के आर्थिक उत्पादन का 85% इन्हीं देशों में होता है.
  • इन देशों में विश्व की जनसंख्या का 2/3 भाग रहता है.
  • यूरोपीय संघ तथा 19 अन्य देशों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में 75% हिस्सा है.
  • G 20 कि बैठक में नीति निर्माण के लिए मुख्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को भी बुलाया जाता है. साथ ही अध्यक्ष के विवेकानुसार कुछ G-20 के बाहर के देश भी आमंत्रित किये जाते हैं.
  • इसके अतिरिक्त सिविल सोसाइटी के अलग-अलग क्षेत्रों के समूहों को नीति-निर्धारण की प्रक्रिया में सम्मिलित किया जाता है.

निष्कर्ष

G-20 एक महत्त्वपूर्ण मंच है जिसमें ज्वलंत विषयों पर चर्चा की जा सकती है. मात्र एक अथवा दो सदस्यों पर अधिक ध्यान देकर इसके मूल उद्देश्य को खंडित करना उचित नहीं होगा. विदित हो कि इस बैठक का उद्देश्य सतत विकास वित्तीय स्थायित्व को बढ़ावा देना है.  आज विश्व में कई ऐसी चुनौतियाँ उभर रही हैं जिनपर अधिक से अधिक ध्यान देना होगा और सरकारों को इनके विषय में अपना पक्ष रखना होगा. ये चुनौतियाँ हैं – जलवायु परिवर्तन और इसका दुष्प्रभाव, 5-G नेटवर्क के आ जाने से गति और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन निर्माण और तकनीक से संचालित आतंकवाद.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government Policies & Interventions.

Topic : Kiran

संदर्भ

हाल ही में भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने घोषणा की है कि 24×7 निशुल्क मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेल्पलाइन नंबर (1800-500-0019) “किरण” का 07 सितंबर, 2020 को वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया जाएगा.

किरण के बारे में

  • ‘किरण’ नामक इस हेल्पलाइन को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने मानसिक रोगों से पीड़ित लोगों को राहत और सहायता प्रदान करने के लिए विकसित किया है.
  • यह हेल्पलाइन नंबर प्रारंभिक स्क्रीनिंग, प्राथमिक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक सहायता, संकट प्रबंधन, मानसिक कल्याण और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने आदि के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास सेवाओं की पेशकश करता है.
  • यह प्राथमिक चरण में सलाह प्रदान करने,परामर्श, व्यक्तियों, परिवारों, गैर सरकारी संगठनों, अभिभावक संघों, व्यावसायिक संघों, पुनर्वास संस्थानों, अस्पतालों या किसी को भी देश भर में सहायता की आवश्यकता के संदर्भ में एक जीवन रेखा के रूप में कार्य करेगा.
  • ‘किरण’ हेल्पलाइन 13 भाषाओं में किसी भी एक व्यक्ति, परिवार, एनजीओ, डीपीओ, अभिभावक संघ, प्रोफेशनल एसोसिएशन, पुनर्वास केंद्र, अस्पतालों के साथ ही साथ लद्दाख, जम्मू व कश्मीर, आठ उत्तर-पूर्वी राज्य, अंडमान और निकोबार द्वीपपुंज और लक्ष्यदीप सहित पूरे देश में जरूरत में पड़े किसी के लिए भी उपलब्ध होगा.
  • प्रति घंटे 300 लोगों को संभालने की क्षमता के साथ 660 वॉलेंटियर नैदानिक और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक, 668 वॉलेंटियर मनोचिकित्सकों के साथ-साथ 75 विशेषज्ञ हेल्पलाइन के 25 केंद्रों में शामिल किए जाएंगे.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Black Hole

संदर्भ

अरबों वर्ष पूर्व घटित ब्लैक होल घटना से संबंधित तथ्य

वर्ष 2019 में, लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) द्वारा गुरुत्वाकर्षण तरंगों से प्राप्त संकेतों का पता लगाया गया था, जिन्हें GW190521 नाम दिया गया है. ये तरंगे अरबों वर्ष पूर्व दो कृष्ण विवर (black hole) के मध्य हुए टकराव से उत्पन्न हुई थीं.

इसकी सहायता से दोनों ब्लैक होल का भार (weight) ज्ञात किया गया है, जिसके अनुसार इन दोनों ब्लैक होल का द्रव्यमान क्रमशः 85 सौर द्रव्यमान (solar masses) और 66 सौर द्रव्यमान था.  ज्ञातव्य है कि एक सौर द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के बराबर होता है.

गुरुत्वाकर्षण तरंगें अदृश्य तरंगें होती हैं, जो निम्नलिखित परिस्थितियों में उत्पन्न होती हैं:-

  • जब किसी तारे का सुपरनोवा में विस्फोट होता है;
  • जब दो बड़े तारे एक दूसरे की परिक्रमा करते हैं;
  • जब दो ब्लैक होल का विलय होता है तथा जब खगोलीय पिंड अत्यधिक तीव्र गति से गतिमान होते हैं.
  • एक ब्लैक होल का द्रव्यमान, इनके विकास से संबंधित पारंपरिक ज्ञान को निरर्थक सिद्ध करता है. पारंपरिक ज्ञान के अनुसार 65 से 120 सौर द्रव्यमान वाले तारे ब्लैक होल का सृजन नहीं कर सकते.

क्या हैं ब्लैक होल?

कृष्ण विवर अत्यधिक घनत्व तथा द्रव्यमान वाले ऐसें पिंड होते हैं, जो  आकार में बहुत छोटे होते हैं. इसके प्रबल गुरुत्वाकर्षण के चंगुल से  प्रकाश की किरणों का भी निकलना असम्भव होता है. चूँकि इससे प्रकाश की किरणें भी बाहर नहीं निकल पाती हैं, अत: यह हमारे लिए अदृश्य बना रहता है.

कैसे बनते हैं ब्लैक होल?

कृष्ण विवरों का निर्माण किस प्रकार से होता है, यह जानने से पहले, तारों के  विकासक्रम को समझना आवश्यक होगा. एक तारे का विकासक्रम आकाशगंगा (Galaxy) में उपस्थित धूल एवं गैसों के एक अत्यंत विशाल मेघ (Dust & Gas Cloud)  से आरंभ होता हैं. इसे ‘नीहारिका’ (Nebula) कहते हैं. नीहारिकाओं के अंदर हाइड्रोजन की मात्रा सर्वाधिक होती है और 23 से 28 प्रतिशत हीलियम तथा अल्प मात्रा में कुछ भारी तत्व होते हैं.

जब गैस और धूलों से भरे हुए मेघ के घनत्व में वृद्धि होती है. उस समय मेघ अपने ही गुरुत्व के कारण संकुचित होने लगता है. मेघ में संकुचन के साथ-साथ उसके केन्द्रभाग के ताप एवं  दाब में भी वृद्धि हो जाती है. अंततः ताप और दाब इतना अधिक हो जाता है कि हाइड्रोजन के नाभिक आपस में टकराने लगते हैं और हीलियम के नाभिक का निर्माण करनें लगतें हैं . तब तापनाभिकीय संलयन (Thermo-Nuclear Fusion) शुरू हो जाता है. तारों के अंदर यह अभिक्रिया एक नियंत्रित हाइड्रोजन बम विस्फोट जैसी होती है. इस प्रक्रम में प्रकाश तथा ऊष्मा  के रूप में ऊर्जा उत्पन्न होती है. इस प्रकार वह मेघ ऊष्मा व प्रकाश से चमकता हुआ तारा बन जाता है. 

आकाशगंगा में ऐसे बहुत से तारे होते हैं जिनका द्रव्यमान सौर द्रव्यमान से तीन-चार गुना से भी अधिक होता है. ऐसे तारों पर गुरुत्वीय खिचांव अत्यधिक होने के कारण तारा संकुचित होने लगता है, और दिक्-काल (Space-Time) विकृत होने लगती है, परिणामत: जब तारा किसी निश्चित क्रांतिक सीमा (Critical limit) तक संकुचित हो जाता है, और अपनी ओर के दिक्-काल को इतना अधिक झुका लेता है कि अदृश्य हो जाता है. यही वे अदृश्य पिंड होते हैं जिसे अब हम ‘कृष्ण विवर’ या ‘ब्लैक होल’ कहतें है. अमेरिकी भौतिकविद् जॉन व्हीलर (John Wheeler) ने वर्ष 1967 में पहली बार इन पिंडो के लिए ‘ब्लैक होल’ (Black Hole) शब्द का उपयोग किया.

 LIGO – भारत परियोजना

LIGO एक बृहद वेधशाला (observatory) है जो ब्रह्मांडीय गुरुत्व तरंगों का पता लगाएगी और उनपर प्रयोग करेगी. इससे अन्तरिक्षीय अध्ययनों में सहायता मिलेगी. इस परियोजना के अंतर्गत तीन गुरुत्वाकर्षण-तरंग डिटेक्टर स्थापित किये जायेंगे. ऐसे दो डिटेक्टर अमेरिका के वाशिंगटन राज्य के हेनफर्ड में और लुजियाना राज्य के लिविंगस्टन में हैं.

LIGO – भारत परियोजना आणविक ऊर्जा विभाग एवं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की परियोजना है. इस परियोजना से जुड़े हुए तीन अनुसंधान संस्थान हैं –

  • पुणे का अन्तरिक्ष विज्ञान खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी विश्वविद्यालय केंद्र (IUCAA)
  • गांधीनगर का प्लाज्मा अनुसंधान विभाग (IPR)
  • इंदौर का राजा रमन्ना उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्र (RRCAT)

भारत को होने वाले लाभ

  • LIGO परियोजना से भारतीय वैज्ञानिकों और इंजिनियरों को गुरुत्वीय तरंगों के बारे में गहन अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा.
  • भारतीय उद्योग इसके लिए 8 km. लम्बी बीम ट्यूब (beam tube) का निर्माण करेंगे जो समतल भूमि पर अति-उच्च निर्वात में स्थित होगा. इससे भारतीय उद्योग को भी नवीनतम तकनीक जानने और उसका प्रयोग करने का अवसर मिलेगा.
  • LIGO परियोजना की स्थापना से भारत गुरुत्वाकर्षण तरंगों के detectors के वैश्विक नेटवर्क का एक हिस्सा बन जायेगा.
  • भारत में वेधशाला बनने पर गुरुत्वकर्षण तरंगों का सटीक रूप से पता लगाया जा सकेगा क्योंकि दो वेधशालाओं के बीच जितनी दूरी होती है, उतनी ही इस काम में सटीकता आती है.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

What are Primordial Black Holes (PBH)? :-

  • वैज्ञानिकों का कहना है कि हॉट बिग बैंग के समय कई प्रीमोर्डियल ब्लैक होल (PBH) बने थे.
  • ये ब्लैक होल ध्वस्त होते हुए विकिरणों के परिणाम थे.
  • ये ब्लैक होल 3,000 किलोमीटर के आकर के भी हो सकते हैं और एक अणु के नाभिक जितने छोटे भी हो सकते हैं.

Prelims Vishesh

AIMA Chanakya National Management Games :-

  • राष्ट्रीय प्रबंधन खेल (National Management Games – NMG) निगम प्रबंधकों के लिए बनाया गया एक ऐसा वार्षिक खेल है जिसमें विभिन्न उद्योगों के कार्यकारी अधिकारी किसी संगठन को चलाने में आने वाली जटिलताओं से अवगत होने के साथ-साथ विशेषज्ञता एवं कौशल्य अर्जित करते हैं.
  • व्यवसाय प्रबंधन अनुकरण पर आधारित ये प्रतिष्ठित खेल अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (AIMA) द्वारा आयोजित होता है.
  • इस वर्ष इस खेल में NTPC को विजेता घोषित किया गया है.

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