Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 June 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 07 June 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Long term Visas – LTVs

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट करते हुए कहा है, कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के गैर-मुस्लिम छह अल्पसंख्यक समुदायों के प्रवासी, दीर्घकालिक वीजा (long-term visas– LTVs) के लिए आवेदन करते समय, भारत में अपने प्रवास-अवधि के प्रमाण के रूप में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register NPR) नामांकन पर्ची भी प्रस्तुत कर सकते हैं.

पृष्ठभूमि

  • तीन देशों के छह समुदाय – हिंदू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई और बौद्ध- के लिए ‘नागरिकता अधिनियम’, 1955 की धारा 5 और 6 के तहत देशीयकरण (Naturalisation) या पंजीकरण (Registration) के माध्यम से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने हेतु दीर्घकालिक वीजा (long-term visas- LTVs) के लिए आवेदन करना एक पूर्व-शर्त है.
  • भारत में प्रवास-अवधि को साबित करने के लिए 10 से अधिक दस्तावेजों की एक साक्ष्य सूची तैयार की गई है. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) नामांकन पर्ची भी इस साक्ष्य सूची में शामिल है.
  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान के हिंदुओं और सिखों के लिए दीर्घकालिक वीजा (LTV) देने का विशेष प्रावधान पहली बार वर्ष 2011 में किया गया था.

दीर्घकालिक वीजा

  • दीर्घकालिक वीजा के माध्यम से गैर-भारतीय मूल के विदेशियों को लगातार 180 दिनों (छह महीने) से अधिक समय तक भारत में रहने की अनुमति दी जाती है.
  • यह मुख्य रूप से छात्रों या रोजगार, व्यापार के लिए प्रदान किया जाता है.
  • दीर्घकालिक वीजा (180 दिनों से अधिक) के लिए भारत में आने के 14 दिनों के भीतर निवास के क्षेत्र में विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय में पंजीकरण की आवश्यकता होती है.
  • देर से पंजीकरण के लिए यूएस $30 का जुर्माना लगाया जाता है.
  • प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक “पंजीकरण का प्रमाण पत्र” जारी किया जाता है, जिसका उपयोग निवास परमिट प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है. निवास परमिट उन विदेशियों के लिए एक आवश्यकता है जो भारत में काम करना चाहते हैं.

दीर्घकालीन वीजा के लाभ

  1. पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक समुदायों के दीर्घकालीन वीजा (LTV) धारक व्यक्तियों के लिए अपने परिवार के लिए एक छोटा सा घर खरीदने की अनुमति होती है और कि वे कोई एक व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं.
  2. दीर्घकालीन वीजा धारक, आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के पात्र होते हैं. यह वीजा, धारकों के लिए देश में संपत्ति खरीदने की भी अनुमति देता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : BRICS

संदर्भ

ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में, मंत्रियों ने यह स्वीकार किया कि मौजूदा परस्पर संबद्ध अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान पुनर्स्थापित की गई और बेहतर बहुपक्षीय प्रणाली के माध्यम से ही किया जाना चाहिए.

विदेश मंत्रियों ने बहुपक्षीय सुधारों पर छह सिद्धांतों पर सहमति व्यक्त की.

ये सिद्धांत निम्नलिखित का आह्वान करते हैं –

  1. विकासशील और अल्पविकसित देशों की अधिक सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक अभिशासन के साधनों को अधिक समावेशी, प्रतिनिधिक एवं सहभागी बनाना.
  2. संप्रभु स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए सभी के लाभ के लिए समावेशी परामर्श और सहयोग.
  3. बहुपक्षीय संगठनों को अधिक प्रतिक्रियाशील, प्रभावी, पारदर्शी, लोकतांत्रिक, उद्देश्यपूर्ण और विश्वसनीय बनाना.
  4. सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल और तकनीकी उपकरणों सहित नवोन्मेषी व समावेशी समाधानों का उपयोग करना.
  5. नई व उभरती, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक चुनौतियों से उत्तम रीति से निपटने हेतु भिन्‍न-भिन्‍न देशों एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की क्षमताओं को मजबूत करना.
  6. अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा, सामाजिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा देना तथा लोगों के साथ प्रकृति के संतुलल को बनाए रखना.

BRICS क्या है?

  • BRICS विश्व की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं वाले पाँच बड़े देशों – ब्राजील, रूस, भारत, चीन एवं दक्षिण अफ्रीका – का संघ है. इसका नाम इन देशों के पहले अक्षरों को मिला कर बना है.
  • BRICS की पहली बैठक जून 2009 रूस के Yekaterinburg शहर में हुई थी.
  • 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल किए जाने से पहले इसे “BRIC” के नाम से जाना जाता था.
  • यह नाम 2001 में Goldman Sachs संस्था के अर्थशास्त्री Jim O’Neill द्वारा सुझाया गया था.
  • इसकी बैठक हर वर्ष होती है जिसमें राजनीतिक एवं सामाजिक-आर्थिक सहयोग के क्षेत्र के विषय में चर्चा होती है.
  • BRICS की अध्यक्षता एक देश के पास न होकर प्रतिवर्ष बदलती रहती है और बदलने का एक क्रम भी BRICS के नाम के अनुसार ही होता है अर्थात् पहले B=Brazil, R=Russia आदि आदि…
  • BRICS में सम्बंधित देशों के प्रमुखों की बैठक तो होती है, साथ ही कई क्षेत्रीय (sectoral) बैठकें भी होती हैं जिनकी संख्या पिछले दस वर्षों में 100 पहुँच चुकी है.
  • BRICS देशों के बीच में सहयोग का कार्यक्रम तीन स्तरों अथवा ट्रैकों (TRACKS) पर चलता है. ये ट्रैक हैं –
  1. Track I = सम्बंधित देशों के बीच में औपचारिक कूटनीतिक कार्यकलाप,
  2. Track II = सरकार से सम्बद्ध संस्थानों, यथा – सरकारी उपक्रम एवं व्यवसाय परिषदों के माध्यम से किये गये कार्यकलाप,
  3. Track III = सिविल सोसाइटी के साथ और “जन से जन” स्तर पर किये गए कार्यकलाप.

BRICS और भारत

हालांकि, भारत को व्यापक रूप से एक मजबूत, उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में देखा जाता है, लेकिन BRICS के अन्य सदस्यों से तुलना करने के लिए इसकी आर्थिक क्षमता ही एकमात्र मानदंड नहीं होना चाहिए. समग्र GDP, सामाजिक असमानताओं एवं बुनियादी स्वास्थ्य और अन्य कल्याण सेवाओं तक पहुँच के मामले में, भारत अन्य BRICS राष्ट्रों से पीछे है. कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत अपने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितों की वृद्धि हेतु, इस फोरम का उपयोग कर सकता है –

  • भारत द्वारा विदेशी निवेशकों को और अधिक आकर्षित करने के लिए, अपने बुनियादी डांचे में सुधार हेतु अत्यधिक वित्त की आवश्यकता है. विश्व बैंक और IMF के अतिरिक्त, न्यू डेवलपमेंट बैंक भी एक महत्त्वपूर्ण संगठन है, जो भारत को बुनियादी ढांचे हेतु ऋण प्रदान कर सकता हैं.
  • भारत की शक्ति श्रम, सेवा, जेनेरिक दवाइयों और सूचना प्रौद्योगिकी में निहित है. इसके साथ ही अन्य BRICS भागीदारों के साथ अन्य पर्याप्त सहक्रियाएं हैं, जिनका उपयोग कर इन क्षेत्रों में अंतर-BRICS संबंधों को और मजबूत बनाया जा सकता है.
  • BRICS के सभी सदस्यों छ्वारा तीव्र शहरीकरण की चुनौती का सामना किया जा रहा है. इससे निपटने के लिए भारत ने BRICS सहयोग तंत्र में अर्थवनाईज़ैशन फोरम को शामिल किया है, जिसके माध्यम से एक-दूसरे के अनुभव से सबक लेकर BRICS सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है.
  • पूर्व सोवियत संघ के विघटन के पश्चात्, रूस के साथ भारत के महत्त्वपूर्ण संबंधों में कमी आती जा रही थी. BRICS एक महत्त्वपूर्ण मंच है, जिसके द्वारा भारत रूस के साथ अपने सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनी वार्ता को आगे बढ़ा सकता है.
  • BRICS में सदस्य देशों के मध्य अधिक साझेदारी और सहयोग का वादा किया गया है. यह द्विपक्षीय मुद्दों को हुल करने के लिए भी मंच विकसित कर सकता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Syria has likely used chemical weapons 17 times: OPCW

संदर्भ

‘रासायनिक हथियार निषेध संगठन’ (Organisation for the Prohibition of Chemical Weapons- OPCW) के प्रमुख ने ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ को सूचित करते हुए कहा है, कि OPCW के विशेषज्ञों द्वारा  सीरिया के विरुद्ध लगाए गए 77 आरोपों की जाँच की गई है, और इनके निष्कर्षों के अनुसार, 17 मामलों में सीरिया ने रासायनिक हथियारों का संभावित या निश्चित रूप से प्रयोग किया है.

पृष्ठभूमि

पश्चिमी देशों द्वारा, रासायनिक हथियारों के एक घातक हमले के लिए, दमिश्क को दोषी ठहराए जाने के बाद, सितंबर 2013 में सीरिया पर, उसके करीबी सहयोगी रूस द्वारा ‘रासायनिक हथियार अभिसमय’ (Chemical Weapons Convention- CWC) में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया था.

OPCW क्या है?

यह एक स्वतंत्र और स्वायत्त अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वाधान में काम करता है.

  • 1997 में एक रासायनिक हथियार संधि (Chemical Weapons Convention – CWC) हुई थी.
  • रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) उसी संधि के प्रावधानों को क्रियान्वित करने के लिए गठित किया गया है.
  • रासायनिक हथियारों को समाप्त करने की दिशा में इसके द्वारा किए गये व्यापक कार्य के लिए 2013 में इस संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया.

उद्देश्य

रासायनिक हथियार संधि (Chemical Weapons Convention – CWC) में चार प्रमुख प्रावधान किये गये हैं –

  • सभी रासायनिक हथियारों को अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में नष्ट किया जाए.
  • रासायनिक उद्योग पर नजर रखना जिससे कि फिर से रासायनिक हथियार न बनने लगें.
  • रासायनिक हथियार के खतरों से देशों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करना.
  • संधि के प्रावधानों को लागू करने में सभी देशों का सहयोग लेना और रसायनों के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना.

रासायनिक हथियार संधि में किये गये निषेध

  • रासायनिक हथियारों का निर्माण करना, उत्पादन करना, अधिग्रहण करना, भंडारण करना.
  • रासायनिक हथियारों को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष ढंग से स्थानांतरित करना.
  • रासायनिक हथियारों का सैन्य प्रयोग करना.
  • संधि द्वारा निषिद्ध गतिविधियों में अन्य देशों को लिप्त करना अथवा सहायता पहुँचाना अथवा प्रोत्साहित करना.
  • दंगा नियंत्रण में रासायनिक हथियारों का उपयोग करना.

GS Paper 3 Source : The Economic Times

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UPSC Syllabus : Economic growth; Employment

Topic : India attracted highest ever total FDI inflow during 2020-21

संदर्भ

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) अंतर्वाह 81.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो विगत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है.

  • हालाँकि, निवल आधार पर भारत में प्रत्यक्ष निवेश (अर्थात् भारत द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश या भारत से विदेशों में किया गया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का निवल) में विगत वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 में अत्यल्प (0-8%) वृद्धि हुई है.
  • विदित हो कि सिंगापुर शीर्ष निवेशक है और गुजरात शीर्ष FDI गंतव्य है, जिसके उपरांत महाराष्ट्र का स्थान है.

FDI अंतर्वाह में वृद्धि का महत्त्व

  • FDI सामान्यतया विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की तुलना में अल्प अस्थिर होता है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रकृति में अल्पकालिक होता है.
  • प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में योगदान देता है.
  • श्रम और प्रबंधन कौशल में सुधार करता है.
  • निवेश के बेहतर परिवेश का संकेत देता है.

इसी प्रकार की सुर्खियों में, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में केंद्र के अप्रत्यक्ष करों का योगदान 4 वर्षों के उपरांत प्रत्यक्ष करों से अधिक हो गया है. अप्रत्यक्ष करों में बढ़ोत्तरी मुख्य रूप से उत्पाद शुल्क (excise duty) संग्रह में वर्ष-दर-वर्ष 63 प्रतिशत की वृद्धि और सीमा शुल्क (excise duty) में 23 प्रतिशत वर्धन (YoY) के कारण हुई है.

GDP में प्रत्यक्ष कर की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2000-21 में कम होकर 15 वर्ष के निचले स्तर पर आ गई है. हालांकि, 12 वर्षों में पहली बार आयकर संग्रह निगम कर (corporation tax) संग्रह से अधिक था.


Prelims Vishesh

Bnei Menashe :-

  • मेनाशे की संतति बन्नी मेनाशे जिनमें चिन, लुशाई, कुकी और मिजो जनजातियों के सदस्य शामिल हैं; पूर्वोत्तर भारत के एक नृजातीय-भाषाई समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं.
  • वे मणिपुर और मिजोरम में बसे हुए हैं और माना जाता है कि वे मनाशा के वंशज हैं, जो 10 मूल यहूदी जनजातियों में से एक था। इन्हें इजरायल की भूमि से निर्वासित किया गया था.
  • वर्ष 2003 से, उनमें से कई इजरायल प्रवासित हो गए हैं, जिनमें हाल ही में 160 सदस्यों का आप्रवासन भी शामिल है.

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