Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 January 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 07 January 2021


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Functions and responsibilities of the Union and the States

Topic : Draft Model Standing Orders

संदर्भ

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने विनिर्माण, खनन एवं सेवा क्षेत्र के लिए प्रारूप आदर्श स्थायी आदेश (Draft Model Standing Orders) निर्गत किए.

स्थायी आदेश औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिकों के लिए आचरण के नियमों का उल्लेख करते हैं. ज्ञातव्य है कि सेवा क्षेत्र के लिए पृथक प्रारूप आदेश पहली बार बार तैयार किये गये हैं.

औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code) 2020, सेवा शर्तों और कर्मचारियों के आचरण के लिए मानक निर्धारित करने हेतु केंद्र सरकार को सशक्त बनाती है.

आदेश का माहात्म्य

ये आदेश ऐसे सभी औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू होंगे, जो :-

  • 300 या अधिक श्रमिकों को रोज़गार प्रदान करते हैं (पहले यह 100 श्रमिकों के लिए था).
  • उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code), 2020 के तहत शामिल हैं.
  • घर से कार्य की अवधारणा को औपचारिक रूप दिया गया है. कोई कर्मचारी नियोक्ता द्वारा निर्धारित समयावधि के लिए घर से कार्य कर सकता है.
  • श्रमिकों को स्थायी (Permanent), अस्थायी (Temporary), प्रशिक्षु (Apprentices), परिवीक्षाधीन (Probationers), बदली (Badlis) और नियत कालिक रोजगार (Fixed Term Employment) के रूप में वर्गीकृत किया गया है. विदित हो कि बदली से यहाँ तात्पर्य किसी स्थायी कामगार अथवा परिवीक्षाधीन के अस्थायी रूप से अनुपस्थित रहने के कारण संबंधित पद पर नियुक्त कामगार से है.
  • कदाचार के तहत कृत्यों की विभिन्‍न श्रेणियों को परिभाषित किया गया है. इसके लिए एक कर्मी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इन कार्यवाहियों में ड्यूटी ले दौरान सो जाना, नियमित रूप से उपस्थिति में विलंब और बिना छुट्टी के आदतन अनुपस्थिति शामिल है.
  • किसी कर्मचारी के बारह माह में तीन या अधिक बार किसी कदाचार का दोषी पाए जाने को अनुशासनहीनता के संबंध में “आदी” (habitual) के रूप में परिभाषित किया गया है.

आगे की राह

नया आदेश बढ़ते कार्यबल को पूरा करने और उनकी बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये अच्छी गुणवत्ता वाले रोज़गार पैदा करने की गति बढ़ाने तथा कृषि से श्रम के प्रवास को दूर करने में मदद करेगा. इस तरह भारत पूरी तरह से अपने निहित श्रम और कौशल लागत को भुनाने में सक्षम हो सकता है और विशेष रूप से COVID-19 के बाद तेज़ी से आर्थिक सुधार कर सकता है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : FSSAI brings down trans fat level in food to 3% from 5%

संदर्भ

हाल ही में, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेधाज्ञा एवं रोक) विनियम (Food Safety and Standards (Prohibition and Restriction on Sales) Regulations) में संशोधन करते हुए तेल और वसा में ट्रांस फैटी एसिड (TFA) की मात्रा वर्ष 2021 के लिए 3% और वर्ष 2022 में 2% तक निर्धारित की  गयी है. वर्तमान में, खाद्य पदार्थो में ट्रांस फैटी एसिड का अनुमेय स्तर 5% है.

प्रभाव

संशोधित विनियमन रिफाइंड खाद्य तेलों, वनस्पति (आंशिक रूप से हाइड्रोजनीकृत तेल), मार्जरीन (कृत्रिम मक्खन), बेकरी से संबंधित वस्तुओं तथा खाना पकाने में प्रयुक्त होने वाले अन्य माध्यमों जैसे कि वनस्पति वसा और मिश्रित वसा पर लागू होंगे.

संशोधित विनियमन की आवश्यकता

ट्रांसफ़ेट्स का संबंध दिल के दौरा पड़ने संबंधी जोखिम में वृद्धि और हृदय रोग से होने वाली मौतों से होता है.

  1. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैटी एसिड के सेवन से वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख मौतें होती हैं.
  2. WHO द्वारा वर्ष 2023 तक ट्रांसफ़ेट्स के वैश्विक उन्मूलन का आह्वान किया गया है.

ट्रांस-फैट क्या है?

  • ट्रांस फाइट या ट्रांस फैटी एसिड (TFAs) सबसे हानिकारक प्रकार के वसा होते हैं जो हमारे शरीर पर किसी भी अन्य आहार से अधिक प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं.
  • यह वसा मानव निर्मित वसा है. इसका कुछ ही भाग प्रकृति में निर्मित होता है.
  • कृत्रिम TFAs तेल में हाइड्रोजन प्रविष्ट कराकर उत्पन्न किया जाता है.
  • इस प्रक्रिया में तेल का स्वरूप शुद्ध घी या मक्खन जैसा हो जाता है.
  • जहाँ तक प्राकृतिक TFAs का प्रश्न है यह माँस और पशु उत्पादों में सूक्ष्म मात्रा में मिलता है.
  • हमारे भोजन में कृत्रिम ट्रांस-फैट के सबसे बड़े स्रोत हाइड्रोजनेटेड वनस्पति तेल/मार्गरीन हैं.

ट्रांस फैट के स्वास्थ्य खतरे

विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, ट्रांस फैट के रूप में ऊर्जा ग्रहण करने में 2% की वृद्धि हृदय रोग की संभावना में 23% की वृद्धि करती है. WHO द्वारा एक अन्य अनुमान के अनुसार:-

  • इसके उपभोग से कम-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन या LDL (जिसे “ख़राब” कोलेस्ट्रोल भी कहा जाता है) के स्तर में वृद्धि होती है. इसके फलस्वरूप हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही यह उच्च-घनत्व वाले लिपोप्रोटीन या HDL (जिसे “अच्छा” कोलेस्ट्रोल भी कहते हैं) के स्तर को कम करता है.
  • इन्हें Type-2 मधुमेह का मुख्य कारण माना जाता है, जो इन्सुलिन प्रतिरोध से जुड़ा हुआ होता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

मई 2018 में WHO ने वर्ष 2023 तक वैश्विक खाद्य आपूर्ति से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिये एक व्यापक योजना REPLACE की शुरुआत की थी.

  • RE- (Review):औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस वसा के आहार स्रोतों और आवश्यक नीति परिवर्तन हेतु परिदृश्य की समीक्षा.
  • P- (Promote):स्वस्थ वसा और तेलों के माध्यम से औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट के प्रतिस्थापन को बढ़ावा देना.
  • L- (Legislate):औद्योगिक तौर पर उत्पादित ट्रांस फैट को खत्म करने के लिये कानून या विनियामक कार्यवाही को लागू करना.
  • A- (Assess):खाद्य आपूर्ति में ट्रांस फैट सामग्री तथा लोगों द्वारा ट्रांस फैट के उपभोग का आकलन और निगरानी करना.
  • C- (Create):नीति निर्माताओं, उत्पादकों, आपूर्तिकर्त्ताओं और जनता के बीच ट्रांस फैट के नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में जागरूकता पैदा करना.
  • E- (Enforce):नीतियों और विनियमों के अनुपालन को लागू करना.

GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Legal Entity Identifier – LEI

संदर्भ

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अप्रैल से आरटीजीएस / एनईएफटी के माध्यम से बड़े मूल्य के लेन-देन के लिए विधिक संस्था पहचानकर्ता (Legal Entity Identifier) को शुरू करने का निर्णय लिया गया है.

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रारंभ की जाने वाली विधिक संस्था पहचानकर्ता (Legal Entity Identifier) अभी 50 करोड़ से अधिक के लेनदेन के मामले में ही अनिवार्य किया गया है.

विधिक संस्था पहचानकर्ता

  • G20 देशों द्वारा परिकल्पित यह 20 अंकों की एक वैश्विक संदर्भ संख्या हैं जो किसी भी अधिकार-क्षेत्र में उन सभी विधिक संस्थाओं या संरचनाओं की विशिष्ट रूप से पहचान करता है जो किसी वित्तीय लेनदेन के पक्षधर होते हैं.
  • प्रत्येक देश द्वारा स्वतंत्र और स्वैच्छिक रूप से स्थापित स्थानीय सञ्चालन इकाइयों (LOU) के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर LEI के कार्यान्वयन और अनुरक्षण का कार्य ग्लोबल लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर फाउंडेशन द्वारा किया जाता है.
  • LEI से सम्बद्ध सूचना सार्वजनिक रूप से निःशुल्क उपलब्ध होती है और इनकी समीक्षा, अद्यतन एवं सत्यापन वार्षिक रूप से LOUs द्वारा किया जाता है.
  • भारत में संस्थाएँ लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर इंडिया लिमिटेड (LEIIL) (भारत की एकमात्र LOU) से LEI प्राप्त कर सकती हैं. यह भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड की एक सहायक संस्था है, जिसे भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मान्यता प्राप्त है.

भारत में LEI की आवश्यकता और लाभ

ऋणों की निगरानी

बैंकों को अब उधारकर्ता (ऋणी) से LEI संख्या प्राप्त करना और इस संख्या को सेन्ट्रल रिपॉजिटरी ऑफ़ इनफार्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स को रिपोर्ट करना अनिवार्य है. LEI तन्त्र के अंतर्गत एक समेकित डाटा के कारण अब कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं के ऋण जोखिमों की जाँच करने में बैंकों को सहायता प्राप्त होगी, एक ही सम्पार्श्विक (collateral) के आधार पर एक से अधिक ऋण लेने पर भी रोक लगेगी, जिससे NPA को कम किया जाना संभव होगा.

धन शोधन

वैश्विक वित्तीय लेन-देनों को ट्रैक करना मुश्किल होता है. हालाँकि, RBI द्वारा नियंत्रित सभी लेन-देनों के लिए LEI प्राप्त करना अनिवार्य है और यह एक विशिष्ट वैश्विक पहचानकर्ता होने के चलते किसी भी लेन-देन में सम्मिलित किसी भी इकाई को सरलता से एवं सटीकता से पहचानने में मदद करता है.

RBI के लिए साधन

कॉर्पोरेट की कार्रवारियों में में (विशेष रूप से M&A गतिविधि में) बेहतर अंतर्दृष्टि प्राप्त करने के लिए सहायता प्रदान करता है.

अन्य लाभ

LEI आन्तरिक डाटा प्रवाह और जोखिम जाँच प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएगा और लागत को कम करते हुए उद्योगों की विनियामक रिपोर्टिंग आवश्यकताओं को पूरा करेगा.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

ग्लोबल लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर फाउंडेशन

  • इसे जून 2014 में वित्तीय स्थिरता बोर्ड बोर्ड द्वारा एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में स्थापित किया गया था.
  • इसका प्रबंध LEI नियामक निरीक्षण समिति द्वारा किया जाता है, जो वैश्विक सार्वजनिक प्राधिकरणों का प्रतिनिधित्व करता है.
  • यह वैश्विक LEI सूचकांक को प्रकाशित करता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Basics of cyber security; money laundering and its prevention.

Topic : Proposal to levy 18% GST alarms crypto exchanges

संदर्भ

केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (Central Economic Intelligence Bureau: CEIB) ने बिटकॉइन ट्रेडिंग पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (GST) आरोपण का प्रस्ताव पेश किया है.

वित्त मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो ने क्रिप्टोकरेंसी पर GST लगाने पर एक गहन अध्ययन किया है. साथ ही, यह सुझाव भी दिया है कि बिटकॉइन को “अमूर्त आस्तियाँ’ (intangible assets) वर्ग के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है और इसके सभी लेनदेन पर वस्तु सेवा कर (GST) आरोपित किया जा सकता है.

मुख्य बिंदु

  • इससे सरकार बिटकॉइन ट्रेडिंग पर वार्षिक 7,200 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर सकती है.
  • अमूर्त संपत्ति वस्तुतः ऐसी परिसंपत्ति होती है, जो ब्रांड की पहचान, पेटेंट, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट आदि के मामले में प्रकृति में भौतिक रूप में नहीं होती है.

क्या है क्रिप्टोकरेंसी ?

  • क्रिप्टोकरेंसी एक ऐसी करेंसी है जिसे आप देख नहीं सकते इसलिए इसे आभासी मुद्रा भी कहते हैं.
  • सरल शब्दों में आप इसे डिजिटल रुपया या डिजिटल करेंसी भी कह सकते हैं.
  • क्रिप्टोकरेंसी को कोई बैंक जारी नहीं करती है.
  • इसको जारी करने वाले ही इसका नियंत्रण और संचालन करते हैं. इसका प्रयोग डिजिटल दुनिया में ही होता है.
  • इस मुद्रा में कोडिंग तकनीक का प्रयोग होता है. इस तकनीक के माध्यम से करेंसी के लेन-देन का सम्पूर्ण लेखा-जोखा होता है.
  • इसको हैक करना बहुत कठिन होता है. यही वजह है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना न के बराबर होती है.
  • इंटरनेट पर इस आभासी मुद्रा का प्रारम्भ जनवरी 2009 में बिटकॉइन के नाम से हुआ था.

विश्व-भर में विभिन्न नाम से क्रिप्टोकरेंसी

वर्तमान समय में पूरे विश्व में कई प्रकार के वर्चुअल करेंसी हैं. विश्व-भर में बिटकॉइन, रिप्लड, एथेरम और कार्डनो जैसे तकरीबन 2,116 क्रिप्टो करेंसियाँ प्रचलित हैं, जिनका बाजार पूंजीकरण 119.46 अरब डॉलर के बराबर है.

  • दुबई (UAE) – Emcash
  • वेनेजुएला – Petro
  • एस्टोनिया – Estcoin
  • रूस – Crypytoruble
  • स्वीडेन – E-Krona
  • जापान – J-Coin

ब्लॉक चैन क्या होता है?

  • ब्लॉक चैन तकनीक एक ऐसी तकनीक है जिसमें क्रेता विक्रेता के मध्य सीधा पैसे का स्थानान्तरण किया जाता है. इस ट्रांजेक्‍शन में किसी भी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं होती है.
  • ब्लॉक चैन वितरित डाटा बेस होती है. इसमें लगातार कई रिकार्ड्स को संधारित किया जाता है जिन्हें ब्लॉक कहते हैं जिसमें प्रत्येक ब्लॉक अपने पूर्व के ब्लॉक से लिंक रहता है.
  • इस तकनीकी में हजारों कंप्यूटर पर इन्क्रिप्टेड अथवा गुप्त रूप से डाटा सुरक्षित रहता है, इसे पब्लिक लेजर भी कहते हैं.
  • वर्तमान में दो लोगों के मध्य पैसों का स्थानान्तरण तीसरे पक्ष के माध्यम से ही होता है, यह तीसरे पक्ष जैसे बैंक, पेपाल, मनी ट्रान्सफर आदि होती हैं और हमें इन लेनदेन के लिए सेवा शुल्क अधिक देना होता है, जबकि ब्लॉकचेन में तीसरे पक्ष की आवश्यकता नहीं होती है.
  • ब्लॉक चैन तकनीक में किये गये ट्रांजेक्‍शन में बहुत कम समय लगता है.
  • यह एक डिजिटल खाता है जिसमें लेनदेन और सूचनाओं का स्थायी रिकॉर्ड होता है, जिनको सत्यापित किया जा सकता है.
  • ब्लॉक चैन मुख्य रूप से बिटक्वाइनऔर इथेरियम जैसी क्रिप्टो करेंसी में इस्तेमाल किया जाता है. इसका प्रयोग दो पक्षों के बीच अन्य समझौतों की गारंटी देने वाले “स्मार्ट कांट्रैक्ट” बनाने में भी हो सकता है.

लोक प्रशासन में ब्लॉक चेन का प्रयोग

  • ब्लॉक चेन से लोक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाने की प्रक्रिया में पर्याप्त सुधार आ सकता है. इस प्रकार यह प्रणाली भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारत की लड़ाई को नई शक्ति प्रदान कर सकती है.
  • इस प्रणाली में सभी कार्यकलाप और फाइलों का समय के हिसाब से रिकॉर्ड रहता है जो बदला नहीं जा सकता. ये इस प्रकार के सभी रिकॉर्ड एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं और इनका डेटाबेस विकेंद्रीकृत होते हुए निम्नतम स्तर तक उपलब्ध रहता है. इस प्रकार ब्लॉक चेन एक कार्यकुशल और लागत की दृष्टि से ऐसा सुचारू डाटाबेस बनाते हैं जिससे छेड़-छाड़ लगभग असंभव होता है. अतः कह सकते हैं कि ब्लॉक चेन अपनाने से हमारी सरकारें अधिक पारदर्शी, उत्तरदाई और कार्यकुशल हो जाएँगी.
  • ब्लॉक चेन अपनाने से उत्तरदाई होने के साथ-साथ सरकारें अधिक ईमानदार भी हो सकती हैं. यदि बिटकॉइन की भाँति एक सार्वजनिक ब्लॉक चेन बनाया जाता है तो सारी सूचनाएँ और कार्यकलाप एक विकेंद्रीकृत डेटाबेस में सदा के लिए सुरक्षित होकर जमा हो जाएँगे. इसका फल यह होगा कि सरकारों को अपने द्वारा दी गई धनराशि से सम्बंधित गतिविधियों का पता लगता रहेगा और वे उन लोगों पर कार्रवाई कर सकेंगी जो धनराशि में हेरा-फेरी के दोषी पाए जाते हैं.
  • ब्लॉक चेन का एक बड़ा गुण यह है कि इसमें बिचौलिये का अस्तित्व नहीं होता है. इस वर्ष के आरम्भ में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में खाद्य पदार्थों एवं नकद लेन-देन को ब्लॉक चेन प्रणाली में डालते हुए एक परीक्षण किया था. इस परीक्षण में यह प्रणाली उपयोगी सिद्ध हुई. जॉर्डन के अज़राक शिविर में रह रहे शरणार्थी आजकल इसी तकनीक का प्रयोग खाद्य पदार्थों के भुगतान के लिए कर रहे हैं.
  • भारत में आधार कार्ड लगभग सभी को मिल चुके हैं. अतः डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते हुए इस देश के लिए अगला कदम ब्लॉक चेन को अपनाना होना चाहिए. इससे प्रत्येक व्यक्ति का स्थायी डाटा जमा करने में सुविधा होगी और सुरक्षित ढंग से लेन-देन किया जा सकेगा.

Prelims Vishesh

Department of Atomic Energy to transfer technologies to industry :-

  • DAE की अनुसंधान और विकास इकाई द्वारा उद्योग जगत को लगभग 25-30 प्रौद्योगिकियाँ हस्तांतरित की जाएंगी.
  • वर्तमान में, व्यावसायिक अनुकूलन के लिए उद्योग जगत में 150 से अधिक प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं.
  • हस्तांतरित विभिन्‍न तकनीकों में शामिल हैं:- निसारगरुना (NISARGRUNA)- यह एक बायोगैस संयंत्र है, जो जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट संसाधन प्रौद्योगिकी पर आधारित है.
  • भाभा कवच तकनीक (Bhabha Kavach Technology)- बुलेट प्रूफ जैकेट.
  • प्राकृतिक आपदाओं के दौरान व्यापक दीर्घकालीन संग्रहणीय आहार (Ambient prolonged storable meal) प्रौद्योगिकी और अन्य लक्षित प्रौद्योगिकियाँ.

Deepor Beel :-

  • हाल ही में, जिला प्रशासन ने संकुचित होती दीपोर बील आर्द्र भूमि के अति दोहन को अवरुद्ध करने के लिए दीपोर बील में सामुदायिक मत्स्यन को प्रतिबंधित कर दिया है.
  • दीपोर बील एक ताजे जल की झील है. इसे असम के निचले भाग की ब्रह्मपुत्र घाटी में बड़ी और महत्त्वपूर्ण नदी आर्द्रभूमियों में से एक माना जाता है.
  • यह रामसर सूची में शामिल असम का एकमात्र स्थल है.
  • इसके अतिरिक्त, बर्ड लाइफ इंटरनेशनल द्वारा इसे महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र स्थलों में से एक के रूप में भी चयनित किया गया है.
  • यहाँ पाए जाने वाले जीव-जंतुओं में सम्मिलित हैं: साइबेरियन क्रेन (CR), लेसर एडजुटेंट स्टॉर्क पक्षी, एशियाई हाथी आदि.

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