Sansar डेली करंट अफेयर्स, 07 December 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 07 December 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Appointment to various Constitutional posts, powers, functions and responsibilities of various Constitutional Bodies. Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : Attorney General of India

हाल ही में, महान्यायवादी (Attorney General) के.के. वेणुगोपाल ने एक विधि के छात्र को कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही प्रारम्भ करने के लिए अनुमति दे दी है. महान्यायवादी ने कार्टून सहित ट्वीट को सर्वोच्च न्यायालय को बदनाम करने और जनता की दृष्टि में न्यायालय के प्राधिकार को कम करने के उद्देश्य से प्रेरित बताया.

किन मामलों में अवमानना कार्यवाही हेतु पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता होती है?

न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act, 1971) के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के लिए आपराधिक अवमानना ​​कार्रवाई शुरू करने हेतु अटॉर्नी जनरल की लिखित में पूर्व सहमति की आवश्यकता होती है.

भारत के महान्यायवादी (AGI) की सहमति, आपराधिक अवमानना ​​के संदर्भ में अत्याधिक विवादित स्वतः संज्ञान’ (suo-motu) लेकर कार्रवाई शुरू करने की शक्ति पर नियंत्रण का एक प्रकार है.

अटॉर्नी जनरल संवैधानिक प्रावधान

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, भारत का अटॉर्नी जनरल (AG) भारत का सबसे बड़ा कानून अधिकारी होता है.
  • भारत सरकार के मुख्य कानून सलाहकार होने के नाते अटॉर्नी जनरल सभी कानूनी मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देने का कार्य करता है.
  • इसके अतिरिक्त भारत का अटॉर्नी जनरल सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्त्व भी करता है.

अटॉर्नी जनरल की नियुक्ति

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, अटॉर्नी जनरल (AG) की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है.
  • अटॉर्नी जनरल के रूप में नियुक्त होने के लिये उन योग्यताओं का होना अनिवार्य है, जो सर्वोच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश की नियुक्ति के लिये आवश्यक है.
  • सरल शब्दों में कहा जाए तो अटॉर्नी जनरल के रूप में नियुक्त होने के लिये आवश्यक है कि वह व्यक्ति भारत का नागरिक हो, उसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने का पाँच वर्षों का अनुभव हो या किसी उच्च न्यायालय में वकालत का 10 वर्षों का अनुभव हो अथवा राष्ट्रपति के मतानुसार वह न्यायिक मामलों का योग्य व्यक्ति हो.
  • विदित हो कि संविधान में अटॉर्नी जनरल के कार्यकाल के संबंध में कोई निश्चित व्याख्या नहीं दी गई है, हालाँकि राष्ट्रपति द्वारा कभी भी उन्हें इस पद से हटाया जा सकता है. इसके अलावा अटॉर्नी जनरल किसी भी समय राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप कर पदमुक्त हो सकता है.
  • संविधान निर्माण की बहस के दौरान एक सदस्य द्वारा इस ओर ध्यान इंगित किया गया था कि प्रधानमंत्री के इस्तीफे के साथ उनके अटॉर्नी जनरल का कार्यकाल भी समाप्त हो जाना चाहिये, क्योंकि उसकी नियुक्ति सरकार की सिफारिशों के आधार पर की जाती है, हालाँकि इस संशोधन प्रस्ताव को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था.
  • संविधान में अटॉर्नी जनरल का पारिश्रमिक निर्धारित नहीं किया गया है, संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, अटॉर्नी जनरल के पारिश्रमिक का निर्धारण राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है.

अटॉर्नी जनरल- कार्य और शक्तियाँ

  • भारत सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह देना, जो राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए हों.
  • विधिक स्वरूप वाले ऐसे अन्य कर्त्तव्यों का पालन करना, जो राष्ट्रपति द्वारा सौंपे गए हों.
  • सर्वोच्च न्यायालय में भारत सरकार से संबंधित मामलों में सरकार का प्रतिनिधित्व करना.
  • भारत सरकार से संबंधित किसी मामले में उच्च न्यायालय में सुनवाई का अधिकार.
  • संविधान अथवा किसी अन्य विधि द्वारा प्रदान किये गए कृत्यों का निर्वहन करना.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : World Heritage Site

संदर्भ

 मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक किला शहर ग्वालियर और ओरछा को यूनेस्को ने अपने ‘अर्बन लैंडस्केप सिटी प्रोग्राम’ के तहत विश्व धरोहर शहरों की सूची में शामिल किया है.

विश्व धरोहर स्थल क्या है?

UNESCO विश्व धरोहर स्थल वह स्थान है जो UNESCO विशेष सांस्कृतिक अथवा भौतिक महात्म्य के आधार पर सूचीबद्ध करता है. यह सूची UNESCO विश्व धरोहर समिति के द्वारा प्रशासित अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम द्वारा संधारित की जाती है. इस समिति में 21 देश सदस्य होते हैं जिनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा करती है.

प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल जिस देश में होता है उसके वैधानिक भूक्षेत्र का एक भाग बना रहता है, परन्तु UNESCO अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में इसके संरक्षण का जिम्मा लेता है.

विश्व धरोहर स्थल के लिए पात्रता

  • विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुने जाने के लिए उस स्थान पर विचार किया जाता है जो पहले से ही श्रेणीबद्ध लैंडमार्क के रूप में मानी है और जो भौगोलिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अनूठा है. इसका विशेष सांस्कृतिक अथवा महत्त्व होना आवश्यक है, जैसे – कोई प्राचीन भग्नावशेष अथवा ऐतिहासिक स्मारक, भवन, नगर, संकुल, मरुभूमि, वन, द्वीप, झील, स्थापत्य, पर्वत अथवा जंगल.
  • विश्व धरोहर स्थल उस स्थल को कहते हैं जो या तो प्राकृतिक है अथवा मनुष्यकृत है. इसके अतिरिक्त कोई भी ऐसा ढाँचा जिसका अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व है अथवा ऐसी जगह जिसके लिए विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है, वह विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) कहलाता है.
  • ऐसे धरोहर स्थलों को संयुक्त राष्ट्र संघ और UNESCO की ओर से औपचारिक मान्यता दी जाती है. UNESCO का विचार है कि विश्व धरोहर स्थल मानवता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं और इनकी सांस्कृतिक एवं भौतिक सार्थकता ही है.

विश्व धरोहर स्थल का वैधानिक दर्जा

जब UNESCO किसी स्थल को विश्व धरोहर स्थल नामित करता है तो प्रथमदृष्टया यह मान लिया जाता है कि सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील यह स्थल वैधानिक रूप से सुरक्षित होगा. सुरक्षा की यह गारंटी जेनेवा और हेग संधियों में वर्णित प्रावधानों से प्राप्त होती है. विदित हो कि ये संधियाँ युद्ध के समय सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय  कानून की परिधि में लाती हैं.

संकटग्रस्त स्थल (ENDANGERED SITES) क्या होते हैं?

  • यदि विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित किसी स्थल पर सशस्त्र संघर्ष और युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, अवैध शिकार अथवा अनियंत्रित नगरीकरण अथवा मानव विकास से खतरा उत्पन्न होता है तो उस स्थल को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची में डाल दिया जाता है.
  • ऐसा करने का उद्देश्य यह होता है कि पूरे विश्व में इन खतरों के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाए और उनके प्रतिकार के लिए उपाय करने को प्रोत्साहन मिले. खतरों को दो भागों में बाँट सकते हैं – पहले भाग में वे खतरे हैं जो सिद्ध हो चुके हैं और दूसरे भाग में वे खतरे हैं जो संभावित हैं.

UNESCO प्रतिवर्ष संकटग्रस्त सूची के स्थलों के संरक्षण के बारे में जानकारी लेता रहता है. समीक्षोपरान्त सम्बंधित समिति अतिरिक्त कदम उठाने का अनुरोध कर सकती है. चाहे तो वह उस स्थल को सूची से इस आधार पर निकाल दे कि खतरे समाप्त हो गये हैं अथवा उसे संकटग्रस्त सूची एवं विश्व धरोहर की सूची दोनों से विलोपित भी कर सकती है.

ओरछा के विषय में

  • मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित ओरछा अपने मंदिरों और महलों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. ओरछा पूर्ववर्ती बुंदेला राजवंश की 16वीं शताब्दी की राजधानी है.
  • ओरछा बेतवा नदी के तक पर स्थित मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिले का एक प्रमुख कस्बा है.
  • इस किले का निर्माण 1501 में राजा रुद्र प्रताप सिंह ने करवाया था. किले के अंदर एक मंदिर भी है. यह दुनिया का इकलौता मंदिर है, जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है. इसके अलावा ओरछा विशेष रूप से राज महल, जहांगीर महल, राय प्रवीन महल, लक्ष्मीनारायण मंदिर सहित कई अन्य प्रसिद्ध मंदिरों और महलों के लिए विख्यात है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

नीचे कुछ इसी तरह की प्रमुख विशिष्ट एजेंसियों के नाम दिए गए हैं और बगल में उनके मुख्यालय का भी उल्लेख है –

  • FAO (Food and Agriculture Organization) – रोम, इटली
  • ILO (International Labour Organization) – जेनवा, स्विट्ज़रलैंड
  • IMF (International Monetary Fund) – वाशिंगटन DC, अमेरिका
  • UNESCO (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) – पेरिस, फ़्रांस
  • WHO (World Health Organization) – जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड
  • WIPO (World Intellectual Property Organization) – जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : IP related issues.

Topic : Geographical Indicator – GI Tag

संदर्भ

हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के पांच उत्पादों (products) के लिए जीआई (भौगोलिक संकेत) प्राप्त करने की कोशिश कर रही है.

ये उत्पाद हैं – करसोग कुल्थ (Karsog Kulth), पांगी के थांगी (Thangi of Pangi), चंबा धातु शिल्प (Chamba Metal Crafts), चंबा चुख (Chamba Chukh) और भरमौर के राजम (Rajmah of Bharmour).

हिमाचल के इन पांच उत्पादों में क्या विशेषता है?

  • करसोग कुल्थ (Karsog Kulth): कुलथी या कुल्थ (घोड़ा चना) हिमाचल प्रदेश में खरीफ की फसल के रूप में उगाया जाने वाली एक फली (legume) है. माना जाता है कि मंडी जिले के करसोग क्षेत्र(Karsog area) में पैदा होने वाले कुल्थ अमीनो एसिड(amino acids) में विशेष रूप से समृद्ध है.
  • पांगी के थांगी (Thangi of Pangi): यह एक प्रकार का हेज़लनट (अखरोट का फल) है जो हिमाचल के उत्तर-पश्चिमी छोर में स्थित पांगी घाटी (Pangi valley) में उगता है. यह अपने अनोखे स्वाद और मिठास के लिए जाना जाता है.
  • चंबा धातु शिल्प (Chamba Metal Crafts): इनमें धातु की मूर्तियाँ और पीतल के बर्तन जैसी वस्तुएँ शामिल हैं.
  • चंबा चुख (Chamba Chukh): यह चंबा में उगाई जाने वाली हरी और लाल मिर्च से बनी चटनी है और पारंपरिक व अनोखे तरीकों से तैयार की जाती है.
  • भरमौरी राजमाह (Bharmouri Rajmah): चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में कुगती दर्रे (Kugti Pass) के आस-पास के क्षेत्र में उगने के बाद से इसे विशेष रूप से कुगतालु राजमाह (Kugtalu Rajmah) कहा जाता है. यह प्रोटीन से भरपूर होता है और इसमें एक विशिष्ट स्वाद होता है.

हिमाचल प्रदेश में पंजीकृत जीआई उत्पाद के बारे में

वर्तमान में हिमाचल में आठ उत्पाद जीआई पंजीकृत हैं . इनमें चार हस्तशिल्प (कुल्लू शाल, चंबा रूमाल, किन्नौरी शाल और कांगड़ा पेंटिंग), तीन कृषि उत्पाद (कांगड़ा चाय, बासमती और हिमाचली काला जीरा) और एक विनिर्मित उत्पाद (हिमाचली चुली तेल) शामिल हैं.

GI TAG किसे दिया जाता है?

जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में पैदा होते हैं. इन उत्पादों की खासियत और प्रतिष्ठा उस क्षेत्र विशेष में पैदा होने की वजह से स्थापित होती है. यह टैग मिलने के बाद संबंधित उत्पाद का नाम लेकर बाजार में किसी और चीज को बेचने पर पाबंदी लग जाती है.

  • GI का full-form है – Geographical Indicator
  • भौगोलिक संकेतक के रूप में GI टैग किसी उत्पाद को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है.
  • नाम से स्पष्ट है कि यह टैग केवल उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी विशेष भगौलिक क्षेत्र में उत्पादित किये गए हों.
  • इस टैग के कारण उत्पादों कोकानूनीसंरक्षण मिल जाता है.
  • यह टैग ग्राहकों को उस उत्पाद की प्रामाणिकता के विषय में आश्वस्त करता है.
  • डब्ल्यूटीओसमझौतेके अनुच्छेद 22 (1) के तहत GI को परिभाषित किया गया है.
  • औद्योगिकसम्पत्तिकी सुरक्षा से सम्बंधित पहली संधि के अनुसार GI tag को बौद्धिक सम्पदा अधिकारों का एक अवयव माना गया है. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर GI WTO के बौद्धिक सम्पदा अधिकारों के व्यापार से सम्बंधित पहलुओं पर हुए समझौते से शाषित होता है. भारत में वह भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षाअधिनयम, 1999 से शाषित होता है.

भौगोलिक संकेतक पंजीयक

  • भौगोलिक वस्तु संकेतक (पंजीकरण एवं सुरक्षा) अधिनयम, 1999 के अनुभाग 3 के उप-अनुभाग (1) के अंतर्गत पेटेंट, रूपांकन एवं व्यापार चिन्ह महानिदेशक की नियुक्ति GI पंजीयक के रूप में की जाती है.
  • पंजीयक को उसके काम में सहयोग करने के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर अधिकारियों को उपयुक्त पदनाम के साथ नियुक्त करती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure- railways.

Topic : Dedicated Freight Corridors : DFCs

संदर्भ

वर्ष 2021 तक समर्पित मालभाड़ा गलियारा (Dedicated Freight Corridors : DFCs) परियोजनाओं के 40 प्रतिशत मार्ग को पूर्ण कर लिया जाएगा.

समर्पित मालभाड़ा गलियारा (Dedicated Freight Corridors : DFCs) परियोजना

  • परियोजना के अंतर्गत संपूर्ण देश में पारगमन करने वाले छह मालभाड़ा गलियारों का निर्माण शामिल है.
  • DFC माल (वस्तु और जिंस) परिवहन के लिए निर्मित किया गया एक रेल मार्ग है.
  • परियोजना का उद्देश्य एक सुरक्षित और कुशल माल परिवहन प्रणाली प्रदान करना है.
  • परियोजना को लागू करने के लिए एक समर्पित निकाय के रूप में केंद्र द्वारा वर्ष 2006 में डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कोर्पोरेशन ऑफ्‌ इंडिया लिमिटेड की स्थापना की गई थी.
  • मालभाड़ा गलियारा परियोजना देश की सबसे बड़ी रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है.
  • यह परियोजना 81,459 करोड़ रुपये की लागत से कार्यान्वित की जा रही है.

DFC के लाभ

  • यह लॉजिस्टिक लागत को कम करेगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी.
  • वर्तमान में लॉजिस्टिक लागत सकल घरेलू उत्पाद की लगभग 14 प्रतिशत है, जो वैश्विक निर्धारित लॉजिस्टिक लागत से 30-40 प्रतिशत तक अधिक है.
  • भारत का लक्ष्य लॉजिस्टिक लागत को GDP के 10 प्रतिशत से नीचे लाना है.
  • औद्योगिक क्षेत्रों को बढ़ावा देना.
  • विगत वर्षों में निजी सड़क परिवहन द्वारा अधिग्रहित बाजार हिस्सेदारी को पुनर्प्राप्त करने में रेलवे की सहायता करना.
  • माल दुलाई को तीव्र गति प्रदान करना, जो मालगाड़ियों को 100 किमी प्रति घंटे (वर्तमान औसत 23.6 किमी प्रति घंटे) की गति पर गमन करने में सक्षम बनाएगा.
  • विभिन्‍न टर्मिनलों और जंक्शनों पर भीड़ को कम करना, जिससे वायु प्रदूषण में कमी होगी.

भारतीय समर्पित माल ढुलाई गलियारा निगम (DFCCIL) क्या है?

  • भारतीय समर्पित माल ढुलाई गलियारा निगम रेलवे मंत्रालय द्वारा संचालित एक निगम है जो समर्पित माल ढुलाई गलियारों के योजनान्यवन, निर्माण, वित्तीय स्रोतों को जुटाने के साथ-साथ इनके संचालन और संधारण का काम करता है.
  • DFCCIL कम्पनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत 30 अक्टूबर, 2006 को कम्पनी के रूप में पंजीकृत हो चुका है.

Prelims Vishesh

Aadi Mahotsav :-

  • हाल ही में, आदि महोत्सव-मध्य प्रदेश (Aadi Mahotsav-Madhya Pradesh) का शुभारंभ किया गया है. (वर्चुअल संस्करण)
  • आदि महोत्सव एक राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव है, यह जनजातीय मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार और जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) की संयुक्त पहल है.
  • यह उत्सव देश की पारंपरिक कला और हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है.

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