Sansar डेली करंट अफेयर्स, 05 February 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 05 February 2021


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana  – PMMVY

संदर्भ

केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास तथा वस्‍त्र मंत्री श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी ने हाल ही में राज्यसभा में एक लिखित जवाब में जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अंतर्गत अब तक 1.75 करोड़ पात्र लाभार्थियों को मातृत्व लाभ दिया गया है. इसी के साथ श्रीमती स्‍मृति जुबिन ईरानी ने नई दिल्‍ली में आयोजित समारोह में राज्‍यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों और जिलों को सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) पुरस्‍कार दिए.

PMMVY क्या है?

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक मातृत्व लाभ की योजना है जिसका आरम्भ 2010 में इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना के नाम से (IGMSY) हुआ था. इस योजना के अंतर्गत पहले बच्चे के जन्म के लिए 19 वर्ष अथवा उससे अधिक उम्र की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद राशि दी जाती है. इस राशि से बच्चा होने और उसकी देखभाल करने के कारण दिहाड़ी की क्षति का सामना करने वाली महिला को आंशिक क्षतिपूर्ति दी जाती है और साथ ही इससे सुरक्षित प्रसव और उत्तम पोषण का प्रबंध किया जाता है.

  • अपवाद: जो महिलाएँ केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में काम करती हैं अथवा जिन्हें इसी प्रकार का लाभ पहले से मिल रहा है, उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.
  • वित्त पोषण: यह एक केंद्र संपोषित योजना है जिसमें केंद्र और राज्य की लागत 60:40 होती है. पूर्वोत्तर राज्यों में और तीन हिमालयवर्ती राज्यों में यह अनुपात 90:10 है. जिन केंद्र शाषित क्षेत्रों में विधान सभा नहीं है वहाँ इस योजना के लिए केन्द्रीय योगदान 100% होता है.

समस्या

प्रधानमन्त्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के कार्यान्वयन में कुछ अड़चनें देखी जा रही हैं. ये अड़चनें इस प्रकार हैं –

  1. तीन वर्ष पूरे हो जाने के पश्चात् भी यह योजना वास्तविक रूप से सार्वभौम नहीं बन पाई है.
  2. अनपढ़ लोगों को इससे सम्बंधित लम्बे-लम्बे कागजात पूरे करने में समस्या हो रही है.
  3. आवेदन की प्रक्रिया में स्त्रियों को घूस देना पड़ता है.

प्रधान मंत्री मातृ वंदना योजना का महत्त्व

आज भी महिलाओं में कुपोषण की समस्या है. भारत में हर तीसरी महिला कुपोषित है और हर दूसरी महिला में रक्ताल्पता की शिकायत है. कुपोषित महिला से जन्मे बच्चे का भार भी कम होता है. जब बच्चा पेट में है, उसी समय से पोषाहार मिले तो इसका लाभ बच्चे को जीवन-भर के लिए मिल जाता है. यह योजना इसी समस्या को केंद्र में रखकर पोषाहार पर विशेष बल देती है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : International Criminal Court

संदर्भ

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court – ICC) ने युगांडा के कुख्यात विद्रोही समूह लॉर्ड्स रेजिस्टेंस आर्मी को दर्जनों युद्ध-अपराधों और मानवता के विरुद्ध कई अपराधों, जिनमे हत्याओं से लेकर जबरन विवाह आदि शामिल है, के लिए एक पूर्व कमांडर (डोमिनिक ओंगवेन) को दोषी ठहराया है.

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)

  • यह फौजदारी का अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय है जो हेग में स्थित है.
  • अंतर्राष्ट्रीय फौजदारी न्यायालय को 1998 में घोषित रोम कानून (Rome Statute) के द्वारा स्थापित किया गया था.
  • यह संसार का ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय स्थाई फौजदारी न्यायालय है जो किसी संधि पर आधारित है.
  • इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के विरुद्ध जघन्य और परम चिंतनीय अपराध करने वालों को सजा दिलवाना है.
  • इस न्यायालय का काम है – जनसंहार, युद्ध-अपराध, मानवता के प्रति अपराध तथा आक्रमण के अपराध के आरोपी व्यक्तियों का अपराध तय करना और उनके खिलाफ मुकदमा चलाना.
  • भारत ने अभी तक रोम कानून पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं और इसलिए वह अंतर्राष्ट्रीय फौजदारी न्यायालय सदस्य नहीं है.
  • वैसे तो इस न्यायालय का खर्चा मुख्य रूप से सदस्य देश देते हैं किन्तु इसको अन्य स्रोतों से भी स्वैच्छिक वित्तीय सहायता मिलती है, जैसे – सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, व्यक्ति, निगम और अन्य इकाइयाँ.

न्यायालय का स्वरूप और मतदान की शक्ति

  • न्यायालय का प्रबंधन और पर्यवेक्षण एक विधायी निकाय द्वारा किया जाता है जिसका नाम असेम्बली ऑफ़ स्टेट्स पार्टीज है जिसमें प्रत्येक देश का एक प्रतिनिधि होता है. इस असेंबली में एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष होते हैं जो सदस्यों द्वारा तीन वर्ष के लिए चुने जाते हैं.
  • प्रत्येक देश के पास एक वोट होता है. प्रयास किया जाता है कि जो भी निर्णय हो वह सर्वसहमति से हो. यदि सर्वसहमति नहीं होती है तभी मतदान होता है.

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ)

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) का मुख्यालय हॉलैंड शहर के  हेग में स्थित है. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में वैधानिक विवादों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना की गई है. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय परामर्श माना जाता है एवं इसके द्वारा दिए गये निर्णय को बाध्यकारी रूप से लागू करने की शक्ति सुरक्षा परिषद् के पास है. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के द्वारा देशों के बीच उप्तन्न विवादों को सुलझाया जाता है, जैसे – सीमा विवाद, जल विवाद आदि. इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न एजेंसियाँ अंतर्राष्ट्रीय विवाद के मुद्दों पर इससे परामर्श ले सकती हैं.

न्यायालय की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है. किसी एक राज्य के एक से अधिक नागरिक एक साथ न्यायाधीश नहीं हो सकते. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका कार्यकाल वर्षों का होता है. ये 15 न्यायाधीश निम्नलिखित क्षेत्रों से चुने जाते हैं –

  • अफ्रीका से तीन.
  • लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई देशों से दो.
  • एशिया से तीन.
  • पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों में से पाँच.
  • पूर्वी यूरोप से दो.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes.

Topic : TRANSGENDER RIGHTS BILL

संदर्भ

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री ने संसद में बताया कि भारत सरकार ट्रांसजेंडर लोगों के लिए एक व्यापक योजना पर काम कर रही है. इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, कल्याण, कौशल विकास, आवास की पहुंच और आजीविका के लिए आर्थिक सहायता जैसे मुद्दे शामिल हैं.

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों की सुरक्षा) विधेयक, 2019

प्रभाव

यह विधेयक अनेक ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को लाभान्वित करेगा, उनके ऊपर लगने वाली लांछना को घटाएगा तथा साथ ही भेद-भाव और दुर्व्यवहार में कमी लाएगा. इस प्रकार वे समाज की मुख्य धारा में आ सकेंगे और समाज के फलदायी सदस्य बन सकेंगे. यह विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से सशक्त करेगा.

नई परिभाषा

जो संशोधन स्वीकार किये गये, उनमें से एक संशोधन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पुरानी परिभाषा को लेकर था जिसमें उन्हें न तो पूर्णतः स्त्री और न ही पूर्णतः पुरुष बताया गया था. इस परिभाषा को संवेदनहीन कह कर इसकी आलोचना की गई थी.

नई परिभाषा के अनुसारट्रांसजेंडर व्यक्ति वह व्यक्ति है जिसका वर्तमान लिंग जन्म के समय उसके लिंग से भिन्न है और इसमें ये व्यक्ति आते हैं – ट्रांस पुरुष अथवा ट्रांस स्त्री, अंतर-यौन विविधताओं वाले व्यक्ति, विचित्र लिंग वाले व्यक्ति तथा सामाजिक-सांस्कृतिक पहचानों वाले कुछ व्यक्ति जैसे – किन्नर, हिजड़ा, अरावानी और जोगटा.

विधेयक के मुख्य तथ्य

  • इस विधेयक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर व्यक्ति के विरुद्ध विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे भेदभाव को समाप्त करना है. जिन क्षेत्रों में इनसे भेदभाव होता है, वे हैं – शिक्षा, आजीविका और स्वास्थ्य-देखभाल.
  • विधेयक केंद्र और राज्य सरकारों को इनके लिए कल्याणकारी योजनाएँ चलाने का निर्देश देता है.
  • विधेयक में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को ट्रांसजेंडर में रूप में मान्यता उस पहचान प्रमाण-पत्र के आधार पर दी जाएगी जो जिला छटनी समिति के माध्यम से निर्गत होगा. इस प्रमाण-पत्र को ट्रांसजेंडर की पहचान का साक्ष्य माना जाएगा और विधेयक के अंदर विहित अधिकार उसे दिए जाएँगे.

आलोचना

कई सिविल सोसाइटी समूहों ने मुखर होकर इस विधेयक का विरोध किया है. उनकी आलोचनाएँ नीचे दी गई हैं –

  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति को यह अधिकार होना चाहिए था कि वह अपनी पहचान स्वयं दे सके, न कि किसी जिला छटनी समिति के माध्यम से.
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को आरक्षण देने के मामले में भी विधेयक मौन है.
  • विधेयक में संगठित भीक्षाटन के लिए दंड का प्रावधान किया गया है, परन्तु इसके बदले कोई आर्थिक विकल्प नहीं दिया गया है.
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के बलात्कार अथवा यौनाचार के लिए विधेयक में किसी दंड का प्रावधान नहीं है क्योंकि भारतीय दंड संहिता में बलात्कार की परिभाषा में ट्रांसजेंडर को शामिल नहीं किया गया है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

ट्रांसजेंडरों के कल्याण हेतु भारत सरकार की प्रमुख पहल

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों हेतु राष्ट्रीय पोर्टल

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने नवंबर, 2020 में एक राष्ट्रीय पोर्टल की शुरूआत की थी, जहां ट्रांसजेंडर व्यक्ति संबंधित जिला अधिकारी से पहचान प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकता है. इसके लिए पोर्टल किसी भी तरह की शारीरिक उपस्थिति की जरूरत की मांग नहीं करता. अब तक, पोर्टल पर 259 आवेदन प्राप्त हुए हैं.

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद्

  • भारत सरकार ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है.
  • यह परिषद इस समुदाय के प्रतिनिधियों के लिए उनके दिन-प्रतिदिन के जीवन में सामने आने वाले मुद्दों को सामने लाने का एक मंच है.
  • ट्रांसजेंडर समुदाय की चिंताओं को संबोधित करने के लिए यह परिषद एक शीर्ष निकाय के रूप में काम करेगी. इस परिषद की अध्यक्षता सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री करेंगे. इसके अतिरिक्त, इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, गृह मंत्रालय, आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय और नीति आयोग आदि के अधिकारियों की भी भागीदारी होगी.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security.

Topic : Micro Irrigation Fund – MIF

संदर्भ

हाल ही में सरकार के द्वारा नाबार्ड के तहत गठित सूक्ष्म सिंचाई कोष (Micro Irrigation Fund – MIF) की प्रारंभिक पूंजी 5,000 करोड़ रुपये को दोगुना करने के लिए बजट में घोषणा की गई है. अब सूक्ष्म सिंचाई कोष (MIF) की प्रारंभिक पूंजी 10,000 करोड़ रुपये हो जाएगी. 

सूक्ष्म सिंचाई कोष

  • देश में सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए 2018-19 के दौरान नाबार्ड के साथ 5,000 रुपये की प्रारंभिक पूंजी के साथ एमआईएफ का निर्माण किया गया था. इस कोष का प्रमुख उद्देश्य पीएमकेएसवाई-पीडीएमसी के तहत उपलब्ध प्रावधानों से अलग सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करने को लेकर किसानों को शीर्ष/अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए संसाधनों को जुटाने में राज्यों को सुविधा प्रदान करना है.
  • राज्य विशेष जरूरतों के आधार पर पीपीपी मोड की परियोजनाओं सहित नवाचार एकीकृत परियोजानों (जैसे, जल की अधिक जरूरत वाली फसलें जैसे गन्ना/सोलर लिंक्ड सिस्टम्स/कमांड क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई आदि) के लिए राज्य एमआईएफ का विशेष रूप से उपयोग कर सकते हैं. वहीं एमआईएफ के तहत भारत सरकार राज्य सरकार को दिए गए ऋणों पर 3% ब्याज के रूप में आर्थिक सहायता भी करती है.        
  • वर्तमान में संचालित एमआईएफ कोष को तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, पंजाब और उत्तराखंड में 3970.17 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के लिए ऋण की स्वीकृति दी गई है. इनके माध्यम से 12.83 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया जाएगा. इसके अलावा राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं जम्मू और कश्मीर से प्राप्त प्रस्ताव राज्य स्तरों पर प्रक्रिया में हैं. वहीं सूक्ष्म सिंचाई क्षमता एवं इसके महत्व पर विचार करके अधिक से अधिक राज्य सूक्ष्म सिंचाई कोष से सहायता प्राप्त करने को लेकर रूचि दिखा रहे हैं.
  • खेतों में जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए देश में किसानों द्वारा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को अपनाने और इसके विकास एवं विस्तार के लिए नाबार्ड के तहत गठित एमआईएफ की प्रारंभिक पूंजी 5,000 करोड़ रुपये को दोगुना करने के लिए बजट में घोषणा की गई है. इसके लिए कोष में 5,000 करोड़ रुपये की राशि और डाली जाएगी.
  • एमआईएफ की प्रारंभिक पूंजी में 5,000 करोड़ रुपये की इस वृद्धि से जल के विवेकपूर्ण उपयोग, जल उपयोग दक्षता में वृद्धि के साथ-साथ उत्पादन एवं उत्पादकता में सुधार को बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रयासों को और बढ़ावा मिलेगा, जो अंतत: किसान समुदाय की आय में वृद्धि करेगा.

PMKSY क्या है?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) पहले से चली आ रही कई अलग-अलग योजनाओं को मिलाकर तैयार की गई है. ये योजनाएँ हैं –

  • जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्रालय का त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (Accelerated Irrigation Benefit Programme – AIBP)
  • भूमि संसाधन विभाग का समेकित जलछादन प्रबन्धन कार्यक्रम ( Integrated Watershed Management Programme – IWMP)
  • कृषि एवं सहकारिता विभाग का कृषि क्षेत्रोपरि जल प्रबन्धन परियोजना (On Farm Water Management – OFWM)

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का कार्यान्वयन कृषि, जल संसाधन एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय करेंगे.

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के घटक ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (PMKSY- PDMC) के विषय में जानकारी

  • PMKSY- PDMC का कार्यान्वयनकृषिसहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है.
  • यह सम्पूर्ण भारत में वर्ष 2015-16 से चालू है.
  • इसके अंतर्गतसूक्ष्म सिंचाई प्रौद्योगिकियों यथा ‘ड्रिप और स्प्रिंकलर’ सिंचाई प्रणालियों के जरिये खेत स्तर पर जल उपयोग की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है.
  • ड्रिप सूक्ष्म सिंचाई तकनीक न केवल जल की बचत करती है, यह उर्वरक के उपयोग, श्रम खर्च और अन्य कच्‍चे माल की लागत को कम करने में भी मदद करती है.

वित्तपोषण

इस योजना के लिए, नाबार्ड के साथ मिलकर 5000 करोड़ रुपये का सूक्ष्म सिंचाई कोष (Micro Irrigation fund) बनाया गया है.

सरकार द्वारा सहायता

सरकार, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को लगाने के लिए छोटे और सीमांत कृषकों के लिए कुल लागत के 55% तथा और अन्य किसानों के लिए 45% की वित्तीय मदद प्रदान करती है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Related to Space.

Topic : Researchers found important evidence to understand the end of Giant stars

संदर्भ

विशालकाय तारों के अंत को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत किए. एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि सुपरनोवा से उत्सर्जित तीनों प्रकार के न्यूट्रिनो (neutrinos) महत्वपूर्ण हैं. उल्लेखनीय है कि यह उस धारणा के विपरीत है, जिसमें केवल दो प्रकार के न्यूट्रिनो को ही महत्वपूर्ण माना जाता है.

  1. न्यूट्रिनो को देखना सरलता से सम्भव नहीं होता इसलिए इसे “Ghost Particles” भी कहते हैं.
  2. न्यूट्रिनो (neutrino) प्रकृति में सबसे अधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला कण है.
  3. विदित हो कि कण विज्ञान की दुनिया में न्यूट्रिनो (neutrino) का द्रव्यमान सदैव चर्चा का विषय रहा है.
  4. न्यूट्रिनो (neutrinos) का द्रव्यमान पता लगने से ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में बहुत जानकारी मिल सकती है.
  5. न्यूट्रिनो (neutrinos) एकमात्र ऐसा धातु-तत्त्व है जिसमें विद्युत-आवेश नहीं होता है.
  6. इन कणों से भौतिक शास्त्र को छोटे से छोटे पैमाने (प्राथमिक-कण भौतिकी) से लेकर बड़े से बड़े पैमाने (ब्रह्मांड) तक समझने में सहायता मिलेगी.
  7. न्यूट्रिनो को तीन प्रकारों, यथा- इलेक्ट्रान, म्यूऑन (muon) और टाऊ (tau) में वर्गीकृत किया जा सकता है.
  8. सुपरनोवा के मौजूदा प्रतिमानों के आधार पर अनुमान लगाया गया था कि न्यूट्रिनो के प्रकार “म्यू” और “टाऊ” विशेषताओं में बहुत समान थे और उन्हें एकल इकाई के रूप में संबद्ध माना जाता था.

सुपरनोवा

सुपरनोवा विशाल तारों के अंत के समय हुए बड़े विस्फोटों को संदर्भित करता है. लगभग सभी पदार्थ (न्यूट्रिनो सहित) जो ब्रह्मांड का निर्माण करते हैं, को इन बड़े विस्फोटों का परिणाम माना जाता है. सुपरनोवा मॉडल सुपरनोवा के तंत्र को समझने के लिए न्यूट्रिनो का अध्ययन करते हैं. न्यूट्रिनो, मृतप्राय तारे से दूर हट जाते हैं और मरणशील तारे की 99% ऊर्जा वहन करते हैं. इसलिए, वे एकमात्र साधन हैं, जो तारे के सबसे गहरे भीतरी हिस्सों की जानकारी प्रदान करते हैं. न्यूट्रिनो के बारे में यह नया रहस्योद्घाटन सुपरनोवा विस्फोटों के तंत्र से संबद्ध तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने में सहायता कर सकता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

ANITA क्या है

  • ANITA नासा की ऐसी पहली चलंत वेधशाला है.
  • इसमें एक हीलियम गुब्बारे पर रेडियो एंटेना की एक लम्बी कतार होती है.
  • यह गुब्बारा अंटार्कटिक हिम चादर से 37,000 मीटर ऊपर उड़ता रहता है.’
  • इसका उपयोग अत्यंत उच्च वाले ब्रह्मांडीय किरणों के न्यूट्रिनो का पता लगाना है.
  • इस प्रकार की चलंत वेधशालाएँ प्रक्षेपित होती आई हैं. 
  • 2006 में अंटार्कटिका के McMurdo से ANITA-I छोड़ा गया था.
  • 2008 में वहीं से ANITA-II छोड़ा गया जिसमें 40 एंटेना थे
  • इससे भी अधिक सक्षम ANITA-III दिसम्बर, 2014 में उड़ाया गया.
  • दिसम्बर 2016 में ANITA-IV छोड़ा गया जिसमें ट्यून करने योग्य नौच फ़िल्टर और एक विकसित ट्रिगर प्रणाली थी.

Prelims Vishesh

Mon Shugu :-

  • प्रधानमंत्री द्वारा रेडियो कार्यक्रम मन की बात में विशेष रूप से उल्लेख करने के बाद 1000 वर्ष पुरानी धरोहर मोनपा हस्तनिर्मित कागज (Monpa Handmade Paper) या “मोन शुगु” (Mon Shugu) की बिक्री गति पकड़ रही है.
  • 25 दिसंबर, 2020 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में इस प्राचीन कला को पुनर्जीवित करने वाले खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने मोनपा हस्तनिर्मित कागज (मोन शुगु) को ऑनलाइन बिक्री के लिए ई-पोर्टल www.khadiindia.gov.in पर उपलब्ध करवाया है.
  • मोनपा हस्तनिर्मित कागज अरुणाचल प्रदेश के तवांग में स्थानीय रूप से उगाए जाने वाले पेड़ ‘शुगु शेंग’ की छाल से बनाया जाता है और विशिष्ट पारभासी रेशेदार बनावट से पहचाना जाता है.
  • यह कागज भारहीन होता है लेकिन इसके प्राकृतिक रेशे इसमें लचीली मजबूती लाते हैं जो इसे विभिन्न कलात्मक कार्यों के लिए उपयुक्त कागज बनाता है.
  • मोनपा हस्तनिर्मित कागज का उपयोग बौद्ध धर्मग्रंथों, पांडुलिपियों को लिखने और प्रार्थना ध्वजों को बनाने में किया जाता था. इस पेपर पर लिखावट क्षति रहित मानी जाती है.

World leprosy day :-

  • विश्व कुष्ठ दिवस प्रति वर्ष जनवरी माह में अंतिम रविवार को मनाया जाता है.
  • विश्व में कुष्ठ रोग के सबसे अधिक नए मामले भारत में दर्ज किए गए हैं.
  • कुृष्ठ रोग (जिसे हैन्सन रोग भी कहा जाता है) एक चिरकालिक एवं वृद्धिशील जीवाणु संक्रमण है, जिसके लिए माइकोबैक्टीरियम लेप्राई (Mycobacterium Leprae) नामक जीवाणु उत्तरदायी होता है.
  • प्रसार का स्वरूप: प्रभावित व्यक्तियों की श्वास वायु से संपर्क.
  • सरकार द्वारा उठाए गए कदम: वर्ष 1993 से ‘राष्ट्रीय कुष्ठरोग उन्मूलन कार्यक्रम और स्पर्श कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान- 2017.

Prabuddha Bharata (Awakened India) :-

  • प्रधान मंत्री ने प्रबुद्ध भारत के 125वें वर्षगांठ समारोह को संबोधित किया.
  • यह रामकृष्ण परंपरा की एक मासिक पत्रिका है.
  • इसका प्रारम्भ स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1896 में किया था.
  • यह ऐतिहासिक, मनोवैज्ञानिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विज्ञान से संबद्ध विषयों को सम्मिलित करते हुए सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी पर लेख प्रकाशित करती है.
  • इस पत्रिका को भारत के प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान के संदेश का प्रसार करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण जरिया माना जाता है.
  • बाल गंगाधर तिलक, श्री अरबिंदो, नेताजी सुमाष चंद्र बोस, सिस्टर निवेदिता और सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने पत्रिका में अपने लेखों के जरिये योगदान दिया.

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