Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 04 July 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Strength of M.P. Ministry exceeds Constitutional limit

संदर्भ 

मध्य प्रदेश में हाल ही में हुए शिवराज कैबिनेट के विस्तार में मंत्रियों की संख्या को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि संविधान का उल्लंघन करते हुए नियमों के विरुद्ध अधिक मंत्री बनाए गए हैं जिसके विरुद्ध पार्टी जल्द ही न्यायालय जाएगी.

मामला क्या है?

दरअसल, हाल में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 28 मंत्रियों ने शपथ ली थी जिसके बाद कांग्रेस नेता और राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान ने कानून का उल्लंघन किया है. पहले तो उन्होंने बिना कैबिनेट के सरकार चलाई और जब राष्ट्रपति से शिकायत की तो 5 मंत्री बनाए जो 12 से कम थे. उन्होंने कहा कि विधायकों की प्रभावी संख्या 206 के 15% से ज्यादा मंत्री बनाकर कानून को तोड़ा है और कांग्रेस इस गैरकानूनी मंत्रिमंडल के खिलाफ कोर्ट जाएगी.

विदित हो कि मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन की कुल संख्या 230 है और इसके 15% के हिसाब से मध्य प्रदेश में कैबिनेट सदस्यों की संख्या 34 तक हो सकती है और फिलहाल शिवराज कैबिनेट में मुख्यमंत्री को मिलाकर मंत्रियों की यही संख्या है.

भाजपा का क्या है?

भाजपा ने कांग्रेस के आरोप को खारिज किया है. मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने बताया है कि मंत्रियों की संख्या को लेकर कांग्रेस के आरोप में कोई संवैधानिक दम नहीं है, क्योंकि भारत के संविधान के 91वें संशोधन 2003 के अनुसार सदन की कुल संख्या के 15% मंत्री बनाए जा सकते हैं. सदन की वर्तमान सदस्य संख्या का उससे कोई लेना देना नहीं है.

संवैधानिक प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 164 (1A)  के अनुसार, किसी राज्य में मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित कुल मंत्रियों की संख्या उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं होनी चाहिए. तथा, किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या 12 से कम नहीं होनी चाहिए.

इस प्रावधान को 91वें संविधान (संशोधन) अधिनियम, 2003 के अंतर्गत लागू किया गया था.

अनुच्छेद 163. राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रि-परिषद्

  1. राज्यपाल को, विवेकानुसार किये जाने कृत्यों के अतिरिक्त, अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा.
  2. यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय ऐसा है या नहीं जिसके संबंध में राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने विवेकानुसार कार्य करे तो राज्यपाल का अपने विवेकानुसार किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि उसे अपने विवेकानुसार कार्य करना चाहिए था या नहीं.
  3. इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नहीं की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी है, और यदि दी है तो क्या.

अनुच्छेद 164 (2) के अंर्तगत यह प्रावधान किया गया है, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होगी.

अनुच्छेद 164 (4) प्रावधान करता है कि कोई मंत्री, जो निरंतर छह मास की किसी अवधि तक राज्य के विधान मण्डल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर मंत्री नहीं रहेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : Voting rules changed! People over 65, Covid-19 patients now allowed to vote through postal ballot

संदर्भ 

देश में जारी COVID-19 महामारी को देखते हुए, भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India- ECI) ने 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए डाक-मतपत्र (Postal Ballot) द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग करने की इजाजत दे दी है; क्योंकि इस आयु-वर्ग के लोगों में कोरोनावायरस से संक्रमित होने का ज्यादा खतरा है.

विदित हो कि अभी तक, यह विकल्प केवल विकलांग नागरिकों तथा 80 वर्ष अधिक आयु के लोगों के लिए उपलब्ध था.

अब, एक राय सामने आ रही है कि इसी प्रकार की छूट मताधिकार का प्रयोग करने में भारी कठिनाइयों का सामना करने वाले अन्य समूह; प्रवासी श्रमिकों को भी दी जानी चाहिए.

प्रवासी श्रमिकों के लिए क्यों?

2017 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, देश में आंतरिक प्रवासी श्रमिकों की संख्या लगभग 13.9 करोड़ है, जोकि, भारत की कुल श्रम शक्ति का लगभग एक तिहाई है.

ये प्रवासी श्रमिक बहुधा अपने मताधिकार का प्रयोग करने में असमर्थ होते हैं. इस प्रकार, ये प्रवासी-मजदूर अपने मताधिकार से लगभग वंचित, भूले-बिसरे मतदाता बन कर रह जाते है, क्योंकि ये लोग अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए निर्वाचन वाले दिन अपने घर जाने का जोखिम नहीं उठा सकते.

  1. आंतरिक प्रवासी श्रमिकअपने रोजगार के स्थान पर मतदाता के रूप में नामांकन नहीं कराने में असमर्थ होते हैं क्योंकि इनके लिए आवास का प्रमाण देना कठिन होता है.
  2. इस समूह पर अपर्याप्त ध्यान दिया जाता है, क्योंकि ये किसी वोट-बैंक का निर्माण नहीं करते हैं.
  3. इनमे से अधिकांश मौसमी प्रवासी श्रमिक होते हैं, जो अवसर मिलने पर अपने गांवों में मतदान करना चाहते हैं.

आगे की राह

प्रत्येक योग्य भारतीय मतदाता को अपने मताधिकार का सुनिश्चित प्रयोग करने में सक्षम बनाना’, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के प्रमुख उद्देश्यों में सम्मिलित होना चाहिए.

ECI, देश में कहीं से भी मतदाताओं द्वारा डिजिटल रूप से मतदान करने के लिए सक्षम बनाने हेतु आधार-लिंक्ड वोटर-आईडी आधारित समाधान का परीक्षण कर रहा है.

  1. प्रवासी श्रमिकों को मतदान की सुविधा प्रदान करने के लिए, ECI, पर्याप्त पंहुच के लिए, जिला कलेक्ट्रेट नेटवर्क का उपयोग कर सकता है.
  2. प्रवासियों को अपने वर्तमान मतदाता पहचान पत्र और उनके अस्थायी प्रवास की अवधि के आधार पर अपने शहर में भौतिक रूप से मतदान करने में सक्षम होना चाहिए.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

‘एक राष्ट्र एक राशनकार्ड’ योजना ने प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों हेतु देश में किसी भी उचित मूल्य की दुकान से सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ उठाने के लिए सक्षम बनाने की राह दिखाई है.

ठीक इसी प्रकार, मतदान को केवल नागरिक कर्तव्य के रूप में नहीं बल्कि नागरिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए. हमारे नीति-निर्माताओं को ‘एक राष्ट्र एक मतदाता पहचान पत्र’ लागू करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा, ताकि मतपत्र-परिवर्तनीयता को सुनिश्चित करते हुए ‘भूले-बिसरे’ प्रवासी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने में सक्षम हो सकें.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : India and its Neighbourhood.

Topic : Bhutan demarches China on its claim to Sakteng Sanctuary

संदर्भ 

पूर्वी भूटान में स्थित सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य’ (Sakteng Wildlife sanctuary) पर बीजिंग द्वारा पूर्वी दावा किये जाने के विरोध में भूटान विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास को आपत्तिपत्र निर्गत किया है.

विवाद क्या है?

भूटान के पश्चिमी और मध्य क्षेत्र में स्थित ‘जकरलंग घाटी’ (Jakarlung Valley), पसामलंग घाटी’ (Pasamlung Valley) तथा चुम्बी घाटी (Chumbi Valley) स्थानों को लेकर चीन तथा भूटान के बीच विवाद गहराता जा रहा है.

Sakteng-Wildlife-Sanctuary

हालांकि, भूटान का पूर्वी क्षेत्र, भूटान-चीन सीमा वार्ता का हिस्सा नहीं रहा है और इससे पूर्व चीन ने सकतेंग वन्यजीव अभ्यारण्य पर कभी भी अधिकार का दावा नहीं किया था.

हाल ही में, चीन ने वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility-GEF) की 58वीं बैठक में भूटान के इस क्षेत्र पर अपना दावा जताया. चीन ने भूटान में स्थित सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य हेतु एक परियोजना के लिए ‘वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (GEF) द्वारा वित्त पोषण करने का विरोध किया और कि यह विवादित क्षेत्र है.

विदित हो, कि थिम्पू और बीजिंग के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, पर दोनों पक्षों के मध्य सीमा-विवादों को सुलझाने तथा सीमांकन करने के लिए वार्ता चल रही है.

सकतेंग वन्यजीव अभयारण्य

  • सकतेंग पूर्वी भूटान के तराशिगंग झोंगखाग (Trashigang Dzongkhag) जिले में अवस्थित है, तथा यह भारत के अरुणाचल प्रदेश के साथ सीमा का निर्माण करता है.
  • यह पूर्वी नीले चीड़ (Eastern Blue Pine) तथा काली दुम वाले मैगपाई पक्षी (Black-Rumped Magpie) सहित कई स्थानिक प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास प्रदान करता है.
  • इसकी स्थापना का एक उद्देश्य मिगोई’, एक ‘यति’ जैसी प्रजाति के संरक्षण करना था, यद्यपि, इस जीव की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है, परन्तु स्थानीय लोगों में इसके प्रति दृढ़ विशवास है.

वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (Global Environment Facility – GEF)

  • GEF पर्यावरण सम्बन्धी परियोजनाओं को अनुदान देने की एक प्रणाली है.
  • Global Environment Facility 1992 के Rio Earth Summit के अवसर पर स्थापित हुआ था.
  • इसका उद्देश्य पृथ्वी के सर्वाधिक विकट पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में सहायता पहुँचाना है.
  • यह एक वित्तीय संगठन है जो स्वतंत्र रूप से निधि मुहैया कराता है जो इन परियोजनाओं से सम्बंधित हैं – जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण, ओजोन परत, जैविक प्रदूषण, पारा, सतत वन प्रबन्धन, खाद्य सुरक्षा, आत्मनिर्भर नगर आदि.
  • GEF में 183 देशों की भागीदारी है. साथ ही इसके अन्य भागीदार हैं – अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, सामाजिक संगठन, निजी क्षेत्र.
  • GEF विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय संधियों तथा समझौतों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निधि मुहैया करता है.
  • Global Environment Facility के निधि का प्रबंधन विश्व बैंक करता है.

GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Important International Institutions / Effect of Policies & Politics of Countries on India’s Interests

Topic : Why Turkey wants to convert Hagia Sophia into a mosque?

संदर्भ

हाल ही में तुर्की के शीर्ष न्यायालय ने इस्तांबुल (Istanbul) के प्रतिष्ठित हागिया सोफिया संग्रहालय (Hagia Sophia museum) को मस्जिद में परिवर्तित करने अथवा इसे संग्रहालय ही बने रहने के संबंध में सुनवाई पूरी कर ली है. अनुमानतः आने वाले दो सप्ताहों में न्यायालय अपना निर्णय सुना  देगा.

मुख्य तथ्य

  • लगभग 1500 वर्ष पुराना यह ढाँचा (Structure) यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध है.
  • विदित हो कि इस इमारत का निर्माण सर्वप्रथम एक गिरजाघर (Cathedral) के रूप में किया गया था, हालाँकि कुछ समय पश्चात् इसे मस्जिद के रूप में बदल दिया गया.
  • जब आधुनिक तुर्की का जन्म हुआ तो, वहाँ के धर्मनिरपेक्ष नेताओं ने इस ईमारत को एक संग्रहालय में बदल दिया.
  • ज्ञातव्य है कि तुर्की के इस्लामी और राष्ट्रवादी समूह लंबे समय से हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद के रूप में बदलने की माँग कर रहे थे.
  • गत वर्ष चुनावों से पूर्व तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप एरदोगन कहा था कि हागिया सोफिया को एक संग्रहालय में परिवर्तित करना ‘बहुत बड़ी गलती’ थी और वे इस निर्णय को बदलने पर पुनर्विचार कर रहे हैं.

हागिया सोफिया का ऐतिहासिक दृष्टिकोण

  • इस्तांबुल की इस प्रतिष्ठित संरचना का निर्माण लगभग 532 ई. में बाइज़ेंटाइन साम्राज्य (Byzantine Empire) के शासक जस्टिनियन (Justinian) के शासनकाल के दौरान प्रारम्भ हुआ, उस समय इस शहर को कॉन्सटेनटिनोपोल (Constantinople) या कस्तुनतुनिया (Qustuntunia) के रूप में जाना जाता था. (शायद आपने हमारा एक विडियो देखा होगा इतिहास का जिसमें मैंने कुस्तुनतुनिया और बाइजेंटाइन साम्राज्य के बारे में बताया था, नहीं देखा तो यह देखें > Medieval History Part 1)
  • इस प्रतिष्ठित इमारत को बनाने के लिये काफी उत्तम किस्म की निर्माण सामग्री का प्रयोग किया गया था और इस कार्य में उस समय के सबसे बेहतरीन कारीगरों को लगाया गया था, वर्तमान में यह एक संग्रहालय के रूप में तुर्की के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है.
  • गिरजाघर के रूप में इस ढाँचे का निर्माण लगभग पाँच वर्षों यानी 537 ईस्वी में पूरा हो गया. यह इमारत उस समय ऑर्थोडॉक्स इसाईयत (Orthodox Christianity) के लिये एक महत्त्वपूर्ण केंद्र थी, और कुछ ही समय में यह बाइज़ेंटाइन साम्राज्य की स्थापना का प्रतीक बन गया.
  • यह इमारत लगभग 900 वर्षों तक ऑर्थोडॉक्स इसाईयत के लिये एक महत्त्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित रही, किंतु वर्ष 1453 में जब इस्लाम को मानने वाले ऑटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) के सुल्तान मेहमत द्वितीय (Sultan Mehmet II) ने कस्तुनतुनिया पर कब्ज़ा कर लिया, तब इसका नाम बदलकर इस्तांबुल कर दिया गया.
  • हमलावर ताकतों ने हागिया सोफिया में काफी तोड़फोड़ की और कुछ समय बाद इसे मस्जिद में बदल दिया गया, मस्जिद के रूप में परिवर्तन होने के पश्चात् स्मारक की संरचना में कई आंतरिक और बाह्य परिवर्तन किये गए और वहाँ से सभी रूढ़िवादी प्रतीकों को हटा दिया गया था, साथ ही इस संरचना के बाहरी हिस्सों में मीनारों का निर्माण किया गया. एक लंबे समय तक हागिया सोफिया इस्तांबुल की सबसे महत्त्वपूर्ण मस्जिद रही.
  • 1930 के दशक में आधुनिक तुर्की गणराज्य के संस्थापक मुस्तफा कमाल अतातुर्क (Mustafa Kemal Ataturk) ने तुर्की को अधिक धर्मनिरपेक्ष देश बनाने के प्रयासों के तहत मस्जिद को एक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया. वर्ष 1935 में इसे एक संग्रहालय के रूप में आम जनता हेतु खोल दिया गया.

संबंधित विवाद

  • विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तुर्की के वर्तमान राष्ट्रपति रेसेप एरदोगन ने तुर्की की राजनीति में प्रवेश किया था तो उनके प्रमुख एजेंडे में हागिया सोफिया की तत्कालीन स्थिति सम्मिलित नहीं थी. तुर्की के आधुनिक इतिहासकारों के अनुसार, रेसेप एरदोगन ने अपनी राजनीति के शुरुआत दौर में एक बार हागिया सोफिया को मस्जिद के रूप में बदलने की मांग पर आपत्ति दिखाई थी.
  • हालाँकि राष्ट्रपति रेसेप एरदोगन ने इस्ताम्बुल में नगरपालिका चुनावों में हार के पश्चात् अपना पक्ष पूर्ण रूप से बदल दिया.
  • इसके पश्चात् जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरुशलम को इज़राइल की राजधानी के रूप में मान्यता दे दी गई, तब रेसेप एरदोगन ने भी हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में बदलने के पक्ष में बयान देना शुरू कर दिया.
  • कुछ लोगों का मानना है कि हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद के रूप में बदलने को लेकर रेसेप एरदोगन का पक्ष राजनीतिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा से काफी हद तक जुड़ हुआ है. अपने इस कदम के माध्यम से वह पुनः अपना राजनीतिक समर्थन प्राप्त करना चाहते हैं, जो इस्तांबुल के नगरपालिका चुनावों के बाद लगातार कम हो रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

  • ज्ञातव्य है कि हागिया सोफिया को लेकर यह विवाद ऐसे समय में आया है जब तुर्की और ग्रीस के बीच विभिन्न मुद्दों पर कूटनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है.
  • इसी वर्ष मई माह में ग्रीस ने पूर्व बाइज़ेंटाइन साम्राज्य पर ऑटोमन साम्राज्य के आक्रमण की 567वीं वर्षगांठ पर हागिया सोफिया संग्रहालय के अंदर कुरान के अंशों को पढ़ने पर आपत्ति जताई थी. ग्रीस के विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा था कि तुर्की का यह कदम यूनेस्को के ‘विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण संबंधी कन्वेंशन’ (UNESCO’s Convention Concerning the Protection of the World Cultural and Natural Heritage) का उल्लंघन है.
  • इस विषय पर ग्रीस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि हागिया सोफिया विश्व भर के लाखों ईसाईयों के लिये आस्था का केंद्र और तुर्की में इसका प्रयोग राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिये किया जा रहा है.
  • इससे पहले अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने अपने एक बयान में कहा था कि हागिया सोफिया को तुर्की की परंपराओं और उसके विविध इतिहास के एक उदाहरण के रूप में बनाए रखा जाना चाहिये. उन्होंने चेताया था कि हागिया सोफिया संग्रहालय की स्थिति में कोई भी परिवर्तन करने से भिन्न-भिन्न परंपराओं और संस्कृतियों के मध्य एक ‘सेतु’ के रूप में सेवा करने की उसकी क्षमता को दुर्बल करेगा.

आगे की राह

  • तुर्की के के कानून विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति रेसेप एरदोगन को हागिया सोफिया संग्रहालय को मस्जिद में परिवर्तित के लिये न्यायालय से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है, न्यायालय का यह निर्णय केवल एक प्रतीकात्मक निर्णय होगा.
  • ज्ञातव्य है कि तुर्की के अन्दर राष्ट्रपति रेसेप एरदोगन की इस योजना का बहुत ही कम विरोध हो रहा है.
  • बीते महीने ग्रीस ने यूनेस्को से अपील की थी कि वह इस आधार पर तुर्की के कदमों पर आपत्ति जताए कि यह परिवर्तन अंतर्राष्ट्रीय समझौते का उल्लंघन करता है.
  • ऑर्थोडॉक्स इसाईयत के प्रतिनिधि ने तुर्की के इस निर्णय पर चिंता ज़ाहिर करते हुए दुःख व्यक्त किया है, ऐसे में तुर्की सरकार का यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दो पक्षों में विभाजित करता दिखाई दे रहा है.

GS Paper 3 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Nagarhole National Park

संदर्भ 

वन विभाग ने नागरहोल राष्ट्रीय पार्क से लगी सड़कों में यातायात निगरानी तंत्र लगाने का निर्णय लिया है. इसके अंतर्गत अललुर गेट, बुदिथिट्टु और मज्जिघल्ला हादी जैसे उच्च यातायात घनत्व वाली जगहों से गुजरने वाले वाहनों के लिए एक टाईम-स्टैम्प्ड कार्ड प्रणाली की शुरुआत की जाएगी.

  • इस टाइम-स्टैम्पिंग तंत्र से यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि मोटर चालक बीच रास्ते में रुककर वन्यजीवों को परेशान न करें और पार्क में गंदगी न फैलाएं.
  • यह तंत्र यह सुनिश्चित करेगा कि मोटर चालक अधिक गति से वाहन न चलाए ताकि पार्क के जीवों को सड़क दुर्घटना से बचाया जा सके.

नागरहोल राष्ट्रीय पार्क के विषय में

  • कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित नागरहोल नेशनल पार्क में वनस्पतियों और जीवों की कई विभिन्न प्रजातियाँ मिलती हैं.
  • इस राष्ट्रीय उद्यान को ‘राजीव गांधी राष्ट्रीय उद्यान’ के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 1988 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था.
  • इस राष्ट्रीय उद्यान में एशियाई हाथी पाए जाते हैं, यहाँ हाथियों के बड़े-बड़े झुंड आसानी से दिखाई देते हैं.
  • इस नेशनल पार्क में हाथी, सियार, बाघ, पैंथर, गौर, सांभर, चित्तीदार हिरण, मोंगोज, सिवेट बिल्ली, हायना और स्लॉथ बीयर जैसे कई जीवों के अलावा 250 किस्म के पक्षी पाये जाते हैं.
  • कबिनी नदी नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान को बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान से अलग करती है.
  • नागरहोल के अतिरिक्त कर्नाटक में अन्य प्रमुख राष्ट्रीय पार्क हैं – बांदीपुर राष्ट्रीय पार्क, बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय पार्क, अंशी राष्ट्रीय पार्क.

Prelims Vishesh

Phobos :-

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के मंगलयान मिशन (मार्स ऑर्बिटर मिशन के रूप में जाना जाता है) ने  फोबोस (मंगल ग्रह का सबसे बड़ा चंद्रमा या प्राकृतिक उपग्रह) के चित्र लिए हैं। इसरो द्वारा 3 जुलाई, 2020 को यह चित्र  साझा किया गया.
  • फोबोस की छवि मंगल ग्रह ऑर्बिटर मिशन द्वारा 4200 किलोमीटर की दूरी से ली गयी थी. उस समय, मार्स ऑर्बिटर मिशन मंगल से 7200 किलोमीटर की दूरी पर था.
  • फोबोस और डीमोस, मंगल के दो प्राकृतिक उपग्रह हैं. मंगल के दोनों चंद्रमाओं की खोज आसफ हॉल ने वर्ष 1877 में की थी. फोबोस डेमोस से सात गुना बड़ा है.

President Inaugurates Dhamma Chakra Day 2020 Celebrations :-

  • अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) के साथ साझेदारी में, संस्कृति मंत्रालय 4 जुलाई, 2020 की आषाढ़ पूर्णिमा पर धम्म चक्र दिवस के लिए समारोह का आयोजन किया गया. इस दिवस के लिए राष्ट्रपति भवन में समारोह का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा किया गया.
  • गौतम बुद्ध द्वारा अपने पाँच तपस्वी शिष्यों (पांच भिक्षुओं) को पहला उपदेश देने की स्मृति में यह दिवस मनाया जाता है. गौतम बुद्ध ने आषाढ़ माह में पूर्णिमा के दिन अपना पहला उपदेश दिया था. गौतम बुद्ध द्वारा पहला उपदेश बौद्ध ग्रन्थ- धम्मचक्कप्पवट्टन सुत्त में दर्ज है.
  • विदित हो कि गौतम बुद्ध ने पहला उपदेश उत्तर प्रदेश में वर्तमान सारनाथ में दिया था.


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