Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 July 2020

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 02 July 2020


GS Paper 2 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : West Bank and West Asia Peace Plan

संदर्भ 

इजराइली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस महीने में अपने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों को इज़राइल में विलय की योजना को स्थगित कर दिया है.

वेस्ट बैंक क्या है?

वेस्ट बैंक भूमध्यसागर के तट के निकट एक भूभाग है जो चारों ओर से अन्य देशों से घिरा (landlocked) हुआ है. इसके पूर्व में जॉर्डन तथा दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में इजराइल है.

वेस्ट बैंक के अन्दर मृत सागर (dead sea) के पश्चिमी तट का एक बड़ा भाग भी आता है.

West Bank dispute israel and palestine

वेस्ट बैंक विवाद का इतिहास

  • 1948 के अरब-इजराइली युद्ध में जॉर्डन ने वेस्ट बैंक पर आधिपत्य कर लिया था.
  • 1967 के छह दिवसीय युद्ध के समय इजराइल ने जॉर्डन से यह भूभाग छीन लिया और तब से इस पर इजराइल का ही कब्ज़ा है.
  • इजराइल ने यहाँ 130 औपचारिक बस्तियाँ बनाई हैं. इसके अतिरिक्त इतनी ही बस्तियाँ पिछले 20-25 वर्षों में यहाँ बन चुकी हैं.
  • यहाँ 26 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं. इसके अतिरिक्त यहाँ 4 लाख इजराइली बस गये हैं. यहूदियों का मानना है कि इस भूभाग पर उनको बाइबिल में ही जन्मसिद्ध अधिकार मिला हुआ है.
  • फिलिस्तीनी लोगों का कोई अलग देश नहीं है. उनका लक्ष्य है कि इस भूभाग में फिलिस्तीन देश स्थापित किया जाए जिसकी राजधानी पूर्वी जेरुसलम हो. इस कारण यहूदियों और फिलिस्तीनियों में झगड़ा होता रहता है. फिलिस्तीनियों का मानना है कि 1967 के बाद वेस्ट बैंक ने जो यहूदी बस्तियाँ बसायीं, वे सभी अवैध हैं.
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद् और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय भी यही मानता है कि वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा बस्तियाँ स्थापित करना चौथी जिनेवा संधि (1949) का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि यदि कोई देश किसी भूभाग पर कब्ज़ा करता है तो वहाँ अपने नागरिकों को नहीं बसा सकता है.
  • रोम स्टैच्यूट (Rome Statute)के अंतर्गत 1998 में गठित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) के अनुसार भी इस प्रकार एक देश के लोगों को कब्जे वाली भूमि पर बसाना एक युद्ध अपराध है.

अमेरिका और भारत का दृष्टिकोण

अमेरिका इजराइली बस्तियों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं मानता है, अपितु उन्हें इजराइल की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानता है. भारत पारम्परिक रूप से इस मामले में दो देशों के अस्तित्व के सिद्धांत (2-state solution) पर चलता आया है और इसलिए वह एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के स्थापना का समर्थन करता है. फिर भी इजराइल से भारत के रिश्ते दिन-प्रतिदिन प्रगाढ़ होते रहे हैं.

क्या है पश्चिम एशिया शान्ति योजना?

  • इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच स्थगित वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पश्चिम एशिया के लिए एक शान्ति योजना (West Asia Peace Plan) घोषित की गयी थी.
  • जिसमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के निर्माण और पश्चिम तट की बस्तियों पर इजराइल की सम्प्रभुता स्थापित करने की बात काही गयी थी.
  • इस योजना में यह भी कहा गया था कि यदि फिलिस्तीनी इससे सहमत होता है तो अमेरिका दस वर्षों में इस शांति एवं पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए 50 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा.

GS Paper 2 Source : The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Linkages between development and spread of extremism.

Topic : Unlawful Activities (Prevention) Act

संदर्भ 

हाल ही में गृह मंत्रालय ने नौ वांछित पुरुषों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के अंतर्गत नामित आतंकवादी के रूप में शामिल किया गया है.

पिछले वर्ष सितंबर में, यूएपीए के बदले हुए प्रावधानों के अंतर्गत व्यक्तिगत आतंकवादी घोषित किए जाने वाले पहले चार आतंकवादी थे – मौलाना मसूद अजहर, हाफिज सईद, जकी उर रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम.

इस बार जारी सूची के साथ, व्यक्तिगत रूप से घोषित किए गए आतंकवादियों की संख्या अब 13 हो गई है. विदित हो कि ये नौ लोग कथित रूप से सीमा पार से और विदेशी धरती से भारत में आतंक से सम्बंधित विभिन्न गैर-कानूनी कार्यों में संलिप्त रहे हैं.

पृष्ठभूमि

आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए भारत में समय-समय पर कानून बनते रहे हैं. सबसे पहला कानून TADA (1985 से प्रभावी) था जिसका पूरा नाम Terrorist and Disruptive Activities (Prevention) Act था. यह कानून 1995 में समाप्त होने दे दिया गया. इसके बाद POTA अर्थात् Prevention of Terrorism Act, 1967 में पारित हुआ. यह अधिनियम 2004 में समाप्त कर दिया गया.

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967

  • 1967 में इंदिरा गांधी की सरकार के समय इस कानून को देश की संप्रभुता और एकता की रक्षा करने के लिए बनाया गया था. 1962 में भारत-चीन युद्ध में जब भारत की पराजय हुई और तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने राज्य के भारत से अलग होने के मुद्दे को लेकर चुनाव लड़ा था, तब केंद्र सरकार ने इस कानून का गठन किया, जिसके तहत ऐसे किसी भी संगठन को सरकार गैर-कानूनी करार दे सकती है, जो भारत से अलग होने की बात करता हो.
  • यूएपीए के अनुसार पुलिस किसी संदिग्ध को बिना चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किये 180 तक दिन कैद में रख सकती है. 2012 में हुए संशोधन ने भारत की आर्थिक सुरक्षा को खतरे में डालने को भी इस कानून के दायरे में ला दिया.

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) विधेयक, 2019 के मुख्य तथ्य

  • इस विधेयक के माध्यम से 1967 के गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम को संशोधित किया जा रहा है.
  • आंतकवादी किसे कहेंगे? : मूल अधिनियम के अनुसार केंद्र सरकार किसी संगठन को आतंकवादी करार दे सकती है यदि यह : i) आतंक की कार्रवाई करता है अथवा उसमें शामिल होता है ii) आतंकवाद के लिए तैयारी करता है iii) आतंकवाद को बढ़ावा देता है, अथवा iv) किसी भी रूप में आतंकवाद से जुड़ा हुआ है.
  • पारित संशोधन में यह अतिरिक्त प्रावधान किया गया है कि सरकार चाहे तो इन्हीं आधारों पर किसी व्यक्ति विशेष को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है.
  • सम्पत्ति की जब्ती का अनुमोदन: विवेचना यदि राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (NIA) के अधिकारी ने की है तो सम्पत्ति की जब्ती का अनुमोदन NIA का महानिदेशक करेगा. इसके लिए उस सम्पत्ति का आतंकवाद से जुड़ा होना आवश्यक होगा.
  • NIA द्वारा अन्वेषण: मूल अधिनियम के अनुसार मामलों का अन्वेषण उपाधीक्षक अथवा सहायक पुलिस आयुक्त अथवा उससे ऊपर की श्रेणी का अधिकारी करेगा. नए संशोधन के अनुसारइनके अतिरिक्त NIA के अधिकारी भी अन्वेषण का कार्य कर सकते हैं यदि वे निरीक्षक की श्रेणी अथवा उससे ऊपर की श्रेणी के हों.
  • इसका मुख्य उद्देश्य देश विरोधी गतिविधियों के लिए कानूनी शक्ति का प्रयोग करना है.
  • अधिनियम में संधियों की अनुसूची जोड़ना: मूल अधिनियम में ऐसी संधियों की एक अनुसूची दी गई है जिसके उल्लंघन को भी आतंकी कार्रवाई के रूप में परिभाषित किया गया है. इस अनुसूची में सब मिलाकर 9 संधियाँ हैं जिनमें प्रमुख हैं – आतंकी बम विस्फोट को दबाने की संधि (1997) और बंधक बनाने के विरुद्ध संधि (1979). इस अनुसूची में अब एक नई संधि जुड़ गई है जिसका नाम है – आणविक आतंकवाद की कार्रवाई को दबाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय संधि (2005) / International Convention for Suppression of Acts of Nuclear Terrorism (2005).

गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 का विरोध क्यों?

  • आलोचकों का कहना है कि संशोधित अधिनियम में केन्द्रीय मंत्रालय के अधिकारियों को यह शक्ति दे दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को बिना उचित प्रकिया अपनाए हुए आतंकी घोषित कर सकते हैं. इस घोषणा के पश्चात् उस व्यक्ति का नाम मूल अधिनियम में संशोधित के द्वारा जोड़ी गई “चौथी अनुसूची” में अंकित हो जाएगा. ऐसी स्थिति में उस व्यक्ति के पास एक ही चारा बचेगा कि वह अपने आप को अनधिसूचित करवाने के लिए केंद्र सरकार को आवेदन दे जिसपर सरकार द्वारा ही गठित समीक्षा समिति विचार करेगी.
  • संशोधन यह नहीं बताता है कि यदि कोई व्यक्ति आतंकी घोषित हो गया तो उसका कानूनी परिणाम क्या होगा क्योंकि चौथी अनुसूची में नाम आ जाने मात्र से वह दंड, कारावास, अर्थदंड, निर्योग्यता अथवा किसी भी प्रकार के नागरिक दंड का भागी हो जाएगा. स्पष्ट है कि यह संशोधन मात्र किसी को आतंकी घोषित करने के लिए सरकार को शक्ति देने हेतु किया गया है.
  • किसी को सरकारी रूप से आतंकी घोषित करना उसे “नागरिक मृत्यु” देने के बराबर होगा क्योंकि इसके फलस्वरूप उसका सामाजिक बहिष्कार हो सकता है, उसे नौकरी से निकाला जा सकता है, मीडिया उसके पीछे पड़ सकती है अथवा किसी स्वघोषित सतर्कता समूह के व्यक्ति के द्वारा उस पर आक्रमण भी हो सकता है.

GS Paper 2 Source : PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Government Policies & Interventions, Education.

Topic : Accelerate Vigyan

संदर्भ 

भारत में वैज्ञानिक शोध की गति को तेज करने और विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाले मानव संसाधन को तैयार करने के उद्देश्य से विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सांविधिक निकाय विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) द्वारा ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना का प्रारम्भ किया गया.

‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना क्या है?

  • अनुसंधान की गुणवत्ता उससे जुड़े प्रशिक्षित अनुसंधानकर्ताओं के विकास पर आधारित होती है को स्वीकार करते हुए ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्रों को रिसर्च इंटर्नशिप, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं से संबंधित एक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई है.
  • यह योजना अनुसंधान की संभावनाओं, परामर्श, प्रशिक्षण और व्यावहारिक कार्य प्रशिक्षण की पहचान करने की कार्यविधि को सुदृढ़ करेगी. इस योजना का मूल दृष्टिकोण अनुसंधान के आधार का विस्तार करना है. इसके तीन व्यापक लक्ष्यों में वैज्ञानिक कार्यक्रमों का एकत्रीकरण, संसाधनों/सुविधाओं से दूर अनुसंधान प्रशिक्षुओं के लिए स्तरीय कार्यशालाओं की शुरुआत और अवसरों का सृजन करना शामिल है.

अभ्यास कार्यक्रम

  • ‘अभ्यास’; ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएचडी के छात्रों को उनके संबंधित विषयों में कौशल विकास को प्रोत्साहित करता है, ताकि वे शोध एवं विकास को बढ़ावा देने में सक्षम हो सकें. इस कार्यक्रम के दो घटक ‘कार्यशाला’ और रिसर्च इंटर्नशिप ‘वृत्तिका’ हैं.

योजना से जुड़ें अन्य तथ्य

  • “इस पहल के अंतर्गत आगामी पाँच वर्षों में करीब 25 हजार पोस्ट ग्रेजुएट एवं पीएचडी छात्रों को आगे बढ़ने के अवसर मिलने समेत इन्टर्नशिप के केंद्रीय समन्वयन से प्रतिवर्ष अन्य एक हजार स्नातकोत्तर छात्रों को इन्टर्नशिप करने का अवसर मिल सकेगा. इस योजना के तहत सुरक्षित प्रयोगशाला विधियों पर भी ध्यान दिया जाएगा.”
  • ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना मिशन मोड में कार्य करेगी (विशेषकर देश में सभी प्रमुख वैज्ञानिक समारोहों के एकीकरण में). इस संबंध में, सभी वैज्ञानिक मंत्रालयों/विभागों और कुछ अन्य सदस्यों को मिलाकर एक अंतर मंत्रालयी निरीक्षण समिति (आईएमओसी) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य योजना को कार्यान्वित करने में एसईआरबी की सहायता और समर्थन करना है.
  • देश के वैज्ञानिक समुदाय की सामाजिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करते हुए यह योजना प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने दिशा में क्षमता निर्माण के संबंध में सभी हितधारकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
  • ‘अभ्यास’ के अतिरिक्त इस योजना के अंतर्गत संचालित एक अन्य कार्यक्रम ‘समूहन’ है, जिसके घटकों में ‘संयोजिका’ एवं ‘संगोष्ठी’ सम्मिलित हैं.
  • संयोजिका देश में सभी सरकारी फंडिंग एजेंसियों द्वारा समर्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी में क्षमता निर्माण गतिविधियों को सूचीबद्ध करने के लिए शुरू किया गया कार्यक्रम है. जबकि, ‘संगोष्ठी’ एसईआरबी द्वारा संचालित एक अन्य कार्यक्रम है.

योजना का माहात्म्य

  • योजना के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर केंद्रित उच्च स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे आने वाले पाँच वर्षों में करीब 25 हज़ार स्नातकोत्तर एवं पीएचडी छात्रों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं.
  • योजना देश के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं को एक साथ मिलकर कार्य करने का अवसर देती  है.
  • भारत में शैक्षणिक प्रयोगशालाएँ बहुत खराब स्थिति में है. योजना के अंतर्गत सुरक्षित वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने की की दिशा में शुरू की गई ‘एक्सीलेरेट विज्ञान’ योजना देश में क्षमता निर्माण की दृष्टि से सभी हितधारकों के लिये महत्त्वपूर्ण हो सकती है. यह योजना देश के वैज्ञानिक समुदाय की सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रोत्साहित करने का भी एक प्रयास है.


GS Paper 2 Source : PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Namami Gange Programme 

सन्दर्भ

विश्व बैंक ने भारत सरकार के गंगा पुनरोद्धार कार्यक्रम के लिए अपने सहयोग का विस्तार करते हुए नमामि गंगे कार्यक्रम को समर्थन प्रदान किया है. गंगा नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए विश्वबैंक ने गंगा पुनरोद्धार कार्यक्रम के लिए 40 करोड़ डॉलर या करीब 3,000 करोड़ रुपये की सहायता राशि को मंजूर किया है.

विश्व बैंक की इस सहायता कार्यक्रम द्वारा नदी बेसिन के प्रबंधन को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही दीर्घावधि में इसे नदी के प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलेगी.

नमामि गंगे कार्यक्रम क्या है?

  • नमामि गंगे भारत सरकार का एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य गंगा नदी को कारगर ढंग से स्वच्छ बनाना है. इस लक्ष्य को पाने के लिए इसमें सभी हितधारकों को भी संलग्न किया गया है, विशेषकर गंगा घाटी के उन पाँच राज्यों के हितधारकों को जो राज्य गंगा की घाटी में स्थित हैं, यथा – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल.
  • इस कार्यक्रम में जो कार्य किये जाते हैं, वे हैं – नदी की सतह की सफाई, इसमें गिरने वाले नाली प्रवाह का उपचार, रिवर फ्रंटों का विकास, जैव-विविधता का विकास, वनरोपण एवं जन-जागरूकता के कार्य.

नमामि गंगे कार्यक्रम के मुख्य स्तम्भ

  1. अपशिष्ट जल को साफ़ करने की अवसंरचना
  2. नदी की सतह को साफ़ करना
  3. वनरोपण
  4. औद्योगिक कचरे पर नजर रखना
  5. रिवर फ्रंट का विकास
  6. जैव-विविधता
  7. जन जागरूकता
  8. गंगा ग्राम

कार्यान्वयन

  • इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga – NMCG) और राज्यों में स्थित इसके समकक्ष संगठनों, जैसे – राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूह (State Program Management Groups – SPMGs) द्वारा किया जाता है.
  • योजना के सही कार्यान्वयन के लिए एक त्रि-स्तरीय प्रणाली गठित करने का प्रस्ताव है. इस प्रणाली के तीन स्तर होंगे जो निम्नवत् हैं –
  1. राष्ट्रीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय कार्यदल जिसके अध्यक्ष कैबिनेट सचिव होंगे और जिनकी सहायता NMCG करेगी.
  2. राज्य-स्तर पर एक समितिहोगी जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे और जिनकी सहायता SPMG करेगी.
  3. जिला-स्तर पर एक जिला-स्तरीय समिति होगी जिसकी अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेंगे.

इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रालयों/एजेंसियों के मध्य समन्वय के तन्त्र को सुधारने पर बल दिया गया है.

राष्ट्रीय गंगा परिषद् क्या है?

  • राष्ट्रीय गंगा नदी घाटी प्राधिकरण (National Ganga River Basin Authority) को भंग कर के अक्टूबर, 2016 में गंगा नदी प्राधिकरण आदेश (कायाकल्प, संरक्षण एवं प्रबंधन) [River Ganga (Rejuvenation, Protection and Management) Authorities Order] के द्वारा राष्ट्रीय गंगा परिषद् का गठन हुआ था.
  • इसकी अध्यक्षता प्रधानमन्त्री करते हैं.
  • इस परिषद् में गंगा घाटी में स्थित पाँच राज्यों (उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और प. बंगाल) के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ कई केन्द्रीय मंत्री सदस्य होते हैं.
  • इसकी बैठक प्रत्येक वर्ष किये जाने का प्रावधान है.

GS Paper 3 Source : PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life.

Topic : SATAT initiative

सन्दर्भ

हाल ही में, दिल्ली के ओखला स्थित ऊर्जा संयंत्र के लिए इंडियन ऑयलएनटीपीसी लिमिटेड और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) के बीच अपशिष्ट को लेकर आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है.

  1. यह संयंत्र प्रति वर्ष नगरपालिका अपशिष्टों के दहनशील घटकों से उत्पन्न होने वाले 17,500 टन अपशिष्ट व्युत्पन्न ईंधन (Refuse Derived Fuel– RDF) को संसाधित करेगा, जिसका उपयोग बिजली उत्पन्न करने में किया जाएगा.

यह कंपोजिट बायोगैस उत्पादन संयंत्रों के लिए सतत योजना’ (SATAT scheme) के अंतर्गत, उठाव गारंटी प्रदान करने का एक मौजूदा मॉडल है.

सतत योजना का उद्देश्य

‘सतत’ एक पहल है जिसका उद्देश्‍य विकास से जुड़े एक ठोस प्रयास के रूप में किफायती परिवहन या आवाजाही के लिए टिकाऊ विकल्‍प मुहैया कराना है जिससे वाहनों का इस्‍तेमाल करने वालों के साथ-साथ किसान एवं उद्यमी भी लाभान्वित होंगे.

यह योजना कैसे क्रियान्वित की जा रही है?

इस योजना के जरिए शहरी और ग्रामीण इलाकों में क्षमतावान उद्यमियों को कॉम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित किया जाएगा. इन प्लांट्स में तैयार होने वाली संदमित जैव-गैस (compressed bio-gas – CBG) को सरकार खरीदेगी और उसका इस्तेमाल वाहनों के ईंधन के तौर पर करेगी. इस योजना के माध्यम से सरकार सस्ता वाहन ईंधन तो मुहैया कराएगी ही साथ ही साथ इसके जरिये कृषि अवषेशों का सही इस्तेमाल होगा और पशु मल तथा शहरी कचरे का प्रयोग भी संभव हो सकेगा. इससे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक और स्रोत मिलेगा.

योजना के लाभ

  • आज की तीथी में 5000 कॉम्प्रेस्ड बायोगैस स्टेशनों से वार्षिक रूप से लगभग 5 करोड़ टन गैस मिलेगी जो वर्तमान समय में इस्तेमाल हो रही CNG का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है.
  • देश में मौजूदा समय में सालाना लगभग 4 करोड़ टन CNG का इस्तेमाल वाहन ईंधन के तौर पर होता है. इस योजना में सरकार लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए निवेश करेगी और इससे लगभग 75000 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा.
  • सतत योजना के जरिये फसलों के लिए लगभग 5 करोड़ टन बायो खाद भी मिलेगी.

संदमित जैव-गैस क्या होता है?

  • संदमित जैव-गैस (compressed biogas) एक ऐसा गैस है जिसकी बनावट बाजार में उपलब्ध प्राकृतिक गैस के जैसा है और उसी प्रकार यह भी ईंधन के रूप में प्रयोग में आता है.
  • इसका ऊष्मा मूल्य (calorific value) ~52,000 KJ/kg है.
  • इसके अन्य सभी गुणधर्म CNG के समान होते हैं.
  • कंप्रेस्ड बायो गैस वाहनों में एक वैकल्पिक और अक्षय्य ईंधन के रूप में प्रयुक्त हो सकता है.
  • हमारे देश में जैव पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं इसलिए बहुत संभव है कि आगामी वर्षों में यह परिवहन, उद्योग और वाणिज्य में CNG में ले लेगा.
  • संदामित जैव-गैस जिन जैव पदार्थों से बनाया जा सकता है, वे हैं – खेती का कचरा, शहरों का ठोस कचरा, ईख की शिष्टियाँ, शराब बनाने के समय निकला अपशिष्ट, गोबर, नालों का उपचार करने वाले संयंत्र का मलबा, शीत भंडारों के सड़े हुए आलू, सड़ी हुई तरकारियाँ, दुग्ध संयंत्रों के अपशिष्ट, मुर्गियों की बीट, बचा हुआ भोजन, बागवानी का कचरा, जंगल के अपशिष्ट, कारखानों से निकलने वाले पदार्थों के उपचार से बचा अपशिष्ट आदि.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

भारत में विभिन्न स्रोतों से संपीडित बायो-गैस उत्पादन की क्षमता लगभग 62 मिलियन टन प्रति वर्ष है.

मौजूदा बाजारों में घरेलू और खुदरा उपयोगकर्ताओं को आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए संपीडित बायो-गैस नेटवर्क को शहर में गैस वितरण (city gas distribution- CGD) नेटवर्क के साथ एकीकृत किया जा सकता है. OMC ईंधन स्टेशनों से खुदरा बिक्री के अलावा, संपीड़ित बायो-गैस को CGD पाइपलाइनों में इंजेक्ट किया जा सकता है.

कृषि अवशेष, गोबर और ठोस कचरे को CBG में परिवर्तित करने के लाभ

  • अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी.
  • किसानों के लिये अतिरिक्त राजस्व का स्रोत.
  • उद्यमिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोज़गार को प्रोत्साहन.
  • जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में सहायता.
  • प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के आयात में कमी.
  • कच्चे तेल/गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के विरुद्ध सुरक्षा.

Prelims Vishesh

CogX :-

  • पिछले दिनों CogX पुरस्कार वितरित हुए.
  • इस बार कृत्रिम बुद्धि पर आधारित MyGov Corona Helpdesk को इन दो श्रेणियों में पुरस्कार मिले – COVID-19 – समाज के लिए सर्वोत्तम नवाचार एवं 2. COVID-19 समग्र विजेता के लिए जन-साधारण की पसंद.
  • ज्ञातव्य है कि CogX कृत्रिम बुद्धि से सम्बंधित विश्व का सबसे बड़ा आयोजन है जो प्रतिवर्ष लन्दन में होता है और जिसमें व्यवसाय, सरकार, उद्योग एवं अनुसंधान से जुड़े 15 हजार से अधिक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि आते हैं.

Globba andersonii :-

  • 136 वर्षों के अंतराल के पश्चात् शोधकर्ताओं ने तीस्ता नदी घाटी के निकट सिक्किमी हिमालय में एक विशेष पादप प्रजाति को फिर से ढूँढ़ निकाला है जिसे विलुप्त मान लिया गया था.
  • इस प्रजाति का नाम Globba andersonii है जिसे लोक भाषा में “नाचती हुई स्त्रियाँ” अथवा “हंस के फूल” कहा जाता है.
  • इस पादप में श्वेत रंग के फूल होते हैं.

International Asteroid Day :

  • प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 30 जून को अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस मनाया गया.
  • ज्ञातव्य है कि 1908 में इसी तिथि को साइबरिया में Tunguska नामक एक क्षुद्र गिरा था जो अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह था.
  • क्षुद्रग्रहों के खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है.


Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

June, 2020 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.