Sansar डेली करंट अफेयर्स, 01 July 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 01 July 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : UN Peacekeeping

संदर्भ

अभी तक, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में, 1 जुलाई से प्रारम्भ होने वाले वर्ष के लिए शांति सुरक्षा बजट (Peacekeeping Budget) पर सहमति नहीं हो सकी है. यदि इस मामले में जल्द ही कोई समाधान नहीं खोजा गया तो वर्तमान में जारी ‘सभी संयुक्त राष्ट्र शांति सुरक्षा अभियानों‘ को रोकना पड़ सकता है.

शांति सुरक्षा बजट पर यह अवरोध, चीन और अफ्रीकी देशों द्वारा अंतिम समय में किए जाने वाले कई अनुरोधों की वजह से उत्पन्न हुआ है.

संबंधित प्रकरण

संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक शांति अभियानों का सालाना बजट लगभग 6.5 बिलियन डॉलर के समतुल्य होता है, और इसका वित्तीय वर्ष 1 जुलाई से आरंभ होता है. ज्ञातव्य है कि वर्तमान में, पूरे विश्व में संयुक्त राष्ट्र के लगभग 20 शांति अभियान चालू है, जिनमे करीब 100,000 शांति-सैनिक, जिन्हें ब्लू हेलमेट (Blue Helmets) भी कहा जाता है, तैनात हैं.

इस साल संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश, शांति सुरक्षा बजट पर सहमत होने में विफल रहे हैं.

निहितार्थ

  • जब तक संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा बजट पर निर्णय नहीं लिया जाता है, उस समय तक इन अभियानों को सफलतापूर्वक जारी रखने में कड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और ये मात्र अपने कर्मियों के लिए सुरक्षा उपायों पर व्यय करने के लिए प्रतिबंधित होंगे.
  • कार्यक्रम संचालन में कटौती किए जाने से, अभियानों की अपने अधिदेशों, जैसे कि, कोविड से निपटने में तैनाती वाले देशों की सहायता, नागरिकों की सुरक्षा करना, आदि को कार्यान्वित करने की क्षमता सीमित हो जाएगी.

यू.एन. पीसकीपिंग और इसका महत्त्व

  • संयुक्त राष्ट्र द्वारा यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य 1948 में संयुक्त राष्ट्र युद्ध विराम पर्यवेक्षण संगठन (UN Truce Supervision Organization – UNTSO) की स्थापना के साथ आरम्भ हुआ था.
  • सबसे पहला मिशन 1948 के अरब-इजराइल युद्ध के समय भेजा गया था.
  • संयुक्त राष्ट्र की शान्ति सेना उन देशों में शान्ति की स्थापना में सहायता पहुँचाने के लिए भेजी जाती है जहाँ गृह संघर्ष चल रहा होता है.
  • इतिहास साक्षी है कि संयुक्त राष्ट्र कई अवसरों पर अपनी शान्ति रक्षक सेनाओं को सम्बंधित देश के आग्रह पर भेजकर शान्ति को स्थापित करने में सफल रहा है.
  • शांति सेनाएँ विश्व के कोने-कोने से सैनिकों और पुलिस को इकठ्ठा करके तथा सम्बंधित देश के अपने घरेलू नागरिक के साथ हर प्रकार से समन्वय करते हुए शान्ति स्थापित करने का कार्य करती है.
  • यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य जिन मूलभूत सिद्धांतों का अनुसरण करता है, वे हैं – i) पक्षकारों की सहमति ii) निष्पक्षता iii) बल का प्रयोग उसी समय करना जब आत्म रक्षा एवं रक्षा की स्थिति उत्पन्न हो.

वैश्विक भागीदारी

यू.एन. पीसकीपिंग वास्तव में एक अनूठी वैश्विक भागीदारी होती है. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इसमें न केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा, सुरक्षा परिषद् और संयुक्त राष्ट्र सचिवालय को ही एक स्थान पर लाया जाता है, अपितु इस कार्य में शान्ति सेना के लिए अपने सैनिक भेजने वाले देशों और इस सेना को आमंत्रित करने वाले देशों का भी मिला-जुला प्रयास होता है. शान्ति सेनाओं को संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में ही वैधता दे दी गई है.

सुधार की आवश्यकता क्यों?

  • वर्तमान में यू.एन. पीसकीपिंग का कार्य एक ओर जहाँ विकट परिस्थतियों में शान्ति को स्थापित करना है, वहीं दूसरी ओर उस स्थापित शान्ति को बनाये रखना भी है.
  • शान्ति सेना के लिए सैनिक भेजने वाले देशों, सुरक्षा परिषद् और सचिवालय इन तीनों के बीच सहयोग अपेक्षा के अनुरूप नहीं होता है.

क्या-क्या सुधार हो सकते हैं?

  • महिला शान्ति रक्षक सैनिकों को शान्ति सेनाओं में शामिल होने के लिए उत्प्रेरण दिया जा सकता है. विदित हो कि जुलाई 2019 के आँकड़े के अनुसार, शान्ति सेनाओं में महिलाओं का प्रतिशत मात्र 6 है. संख्या की दृष्टि से कहा जाए तो 86,687 शान्ति रक्षकों में से मात्र 5,243 ही महिला रक्षक हैं.
  • शान्ति स्थापित करने के लिए की गई तैनाती में एक ही देश के सैनिकों को नहीं लगाकर कई देशों की मिली-जुली टुकड़ी भेजी जाएँ जिससे कि भागीदारी की वास्तविक भावना उत्पन्न हो सके.
  • भविष्य के कमांडरों और प्रबंधकों की क्षमता को विकसित करने के लिए तथा शान्ति रक्षक सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र के आचारगत मानकों के प्रति शान्ति रक्षकों को जागरूक बनाने के लिए नवाचारी पहलों की आवश्यकता प्रतीत होती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Gaganyaan

संदर्भ

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा, दिसंबर में पहला ‘मानव रहित मिशन’ अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है. यह मिशन, मानव-सहित अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ का एक भाग होगा.

  • इसरो के अनुसार, कोविड-19 की वजह से लगे लॉकडाउन के कारण ‘गगनयान’ कार्यक्रम गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है. महामारी के चलते देश के विभिन्न हिस्सों में बार-बार लगाए गए लॉकडाउन की वजह से विभिन्न उपकरणों की आपूर्ति बाधित हुई है.
  • ‘गगनयान’ कार्यक्रम के एक भाग के रूप में, मानवयुक्त मिशन भेजने की आद्योपान्त (end-to-end) क्षमता का परीक्षण करने हेतु पहले मानव-रहित दो अंतरिक्ष उड़ानों को भेजने की योजना है.

गगनयान मिशन के बारे में

भारत के 72वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत 2022 में अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री भेजेगा. इस मिशन को गगनयान मिशन का नाम दिया गया है.

गगनयान के आनुषंगिक लाभ

  1. देश में विज्ञान और तकनीक के स्तर में वृद्धि.
  2. अनेक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग को एक राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ने का अवसर.
  3. औद्योगिक वृद्धि में सुधार.
  4. युवजनों को प्रेरणा.
  5. सामाजिक लाभ के लिए तकनीक का विकास.
  6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में बढ़ोतरी.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in the fields of IT, Space, Computers, robotics, Nano-technology, biotechnology and issues relating to intellectual property rights.

Topic : BharatNet project

संदर्भ

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा देश के 16 राज्‍यों में ‘सार्वजनिक-निजी भागीदारी’ (Public-Private Partnership – PPP) के जरिये भारतनेट की संशोधित कार्यान्‍वयन रणनीति को स्वीकृति प्रदान की गई है.

कार्यान्‍वयन रणनीति के प्रमुख बिंदु

  1. सरकार द्वारा परियोजना के लिए ‘व्यवहार्यता अंतर निधि’ (Viability Gap Funding – VGF) के रूप में 19,041 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे.
  2. भारतनेट का अब चयनित 16 राज्यों में ग्राम पंचायतों (Gram Panchayats) से अलग सभी बसे हुए वाले गाँवों तक विस्तार किया जाएगा.
  3. संशोधित रणनीति में रियायत के साथ भारतनेट का निर्माण, उन्नयन, संचालन, रख-रखाव और उपयोग भी शामिल है, जिसका चयन प्रतिस्पर्धी अंतर्राष्ट्रीय बोली प्रक्रिया द्वारा किया जाएगा.

व्यवहार्यता अंतर निधि

यह एक ऐसा अनुदान होता है जो सरकार द्वारा ऐसे आधारभूत ढाँचा परियोजना को प्रदान किया जाता है जो आर्थिक रूप से उचित हो लेकिन उनकी वित्तीय व्यवहार्यता कम हो (Economically Justified but not Financially Viable) ऐसा अनुदान दीर्घकालीन परिपक्वता अवधि वाली परियोजना को प्रदान किया जाता है.

महत्त्व

  1. पीपीपी मॉडल के तहत संचालन, रख-रखाव, उपयोग और राजस्व सृजन के लिए निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ उठाया जाएगा और इसके परिणामस्वरूप भारतनेट की सेवा तेजी से प्राप्त होने की उम्मीद है.
  2. सभी बसे हुए गांवों तक विश्वसनीय, गुणवत्तापूर्ण, उच्च गति वाले ब्रॉडबैंड के साथ भारतनेट की पहुंच का विस्तार, केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों द्वारा प्रदान की जाने वाली ई-सेवाओं की बेहतर पहुंच को सक्षम करेगी.
  3. यह ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, कौशल विकास, ई-कॉमर्स और ब्रॉडबैंड के अन्य अनुप्रयोगों को भी सक्षम करेगी.

भारत नेट परियोजना

यह विश्व का सबसे बड़ा ग्रामीण ब्रॉडबैंड सम्पर्क का कार्यक्रम है. यह शत-प्रतिशत मेक इन इंडिया के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है अर्थात् इसमें कोई विदेशी कंपनी का सहयोग नहीं लिया जा रहा है है. इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को पंचायत स्तर तक पहुँचा देना है. सरकार ने इस नेटवर्क को दूरसंचार सेवा के लिए उपलब्ध कराया है और ग्रामीण क्षेत्रों में आवाज, डेटा और वीडियो के संचरण के लिए एक राजमार्ग के रूप में नेटवर्क की परिकल्पना की है. इस परियोजना का उद्देश्य राज्यों और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी करके ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों और संस्थानों को सस्ती ब्रॉडबैंड सेवाएं प्रदान करना है.

वर्तमान स्थिति

भारत नेट परियोजना, जिसे पहले राष्ट्रीय ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क (NOFN) कहा जाता था, ने 2011 में कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त की थी और 2013 के अंत तक इसे पूरा करने की समय-सीमा निर्धारित की गई थी. इसे बाद में यूपीए सरकार ने सितंबर 2015 तक स्थगित कर दिया था. एनडीए सरकार ने परियोजना की स्थिति की फिर से जांच की और 2016 के आखिर तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा. इसके बाद पुनः भारत नेट परियोजना (BharatNet Project) को पूरा करने के लिए दिसम्बर 2018 तक का deadline दिया गया है. 31 दिसंबर, 2017 तक, देश भर में 2,54,895 km. optical fiber cable (OFC) बिछा लिए गए थे जो 1,09,926 ग्राम पंचायत (GP) को कवर करते हैं.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation and pollution related issues.

Topic : Black Carbon

संदर्भ

हाल ही में, शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा ‘ब्लैक कार्बन’ (Black Carbon) और मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव के बारे में एक अध्ययन किया गया था.

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  1. ब्लैक कार्बन का मानव स्वास्थ्य पर महत्त्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और इसकी वजह से अकाल मृत्यु हो सकती है.
  2. इंडो-गंगा का मैदान, ब्लैक कार्बन (Black Carbon- BC) से गंभीर रूप से प्रभावित है, जिसका क्षेत्रीय जलवायु और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.
  3. वायु प्रदूषकों के स्तर में वृद्धि के साथ मृत्यु दर रैखिक रूप से बढ़ती है और उच्च स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाती है.

इस अध्ययन की प्रासंगिकता और महत्त्व

यह अध्ययन ‘ब्लैक कार्बन’ को एक संभावित स्वास्थ्य खतरे के रूप में सम्मिलित करता है, तथा यह भारत के विभिन्न हिस्सों में वायु प्रदूषकों का स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का साक्ष्य देने और महामारी विज्ञान के अध्ययन हेतु प्रेरित करता है.

  • इस अध्ययन से सरकार और नीति-निर्माताओं को बदलती जलवायु- वायु प्रदूषण-स्वास्थ्य के गठजोड़ से संबंधित आपदाओं को कम करने के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.

ब्लैक कार्बन

  • ब्लैक कार्बन जीवाश्म ईंधन, काष्ठ और अन्य ईंधन के अपूर्ण दहन से निर्मित होने वाले कणिकीय पदार्थ (particulate matter) का एक सक्षम जलवायु-तापन घटक है.
  • यह कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) के बाद ग्रह को गर्म करने में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता है.
  • यह सौर ऊर्जा को अवशोषित करता है और वातावरण को गर्म करता है.
  • यह एक अल्पकालिक प्रदूषक है और अन्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के विपरीत, ब्लैक कार्बन का शीघ्रता से क्षय हो जाता है.
  • उत्सर्जन समाप्त होने की स्थिति में इसे वातावरण से उन्मूलित किया जा सकता है.

ब्लैक कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लिए भारत के वर्तमान नीतिगत उपाय

  • ईंधन दक्षता मानकों को बढ़ावा देने के लिए भारत स्टेज उत्सर्जन मानक अपनाए गए हैं.
  • डीजल वाहनों को चरणबद्ध रूप से खत्म किया जा रहा है तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने के लिए इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड वाहनों का तेजी से अंगीकरण (फेम / FAME इंडिया) योजना आरंभ की गई है.
  • भोजन पकाने के स्वच्छ तरीकों को प्रोत्साहित करने के लिए उज्ज्वला योजना संचालित की जा रही है.

Prelims Vishesh

Indian Certificate of Medical Devices (ICMED) 13485 Plus Scheme :-

  • भारतीय गुणवत्ता परिषद् (QCI) ने ICMED योजना में अतिरिक्त सुविधाओं के साथ ICMED प्लस योजना आरंभ की है.
  • ICMED योजना वर्ष 2016 में चिकित्सा उपकरणों के प्रमाणन के लिए आरंभ की गई थी.
  • ICMED का उद्देश्य रोगी सुरक्षा में वृद्धि करना, उन्‍नत उपभोक्ता सुरक्षा प्रदान करना तथा निर्माताओं को अत्यंत आवश्यक प्रोडक्ट क्रेडेंशियल्स प्रदान करना था, जिससे खरीदारों और उपयोगकर्ताओं के बीच विश्वास उत्पन्न किया जा सके.
  • ICMED 13485 प्लस को निश्चित उत्पाद मानकों एवं विनिर्देशों के संदर्भ में उत्पादों के प्रमाणन परीक्षण के माध्यम से गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली के घटकों और उत्पाद संबंधी गुणवत्ता सत्यापन प्रक्रियाओं को एकीकृत करने के लिए डिजाइन किया गया है.

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