Sansar डेली करंट अफेयर्स, 01 January 2022

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Sansar Daily Current Affairs, 01 January 2022


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : NMEO-OP

संदर्भ

खाद्य तेलों जरूरतों में आत्मनिर्भर बनने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन (2020-21) केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2020-21 में कुल 133.5 लाख टन खाद्य तेल आयात किया था, इसमें से 56% हिस्सा पाम ऑयल का था.

इस दिशा में केंद्र सरकार ने कहा है कि वह खाद्य तेलों आवश्यकताओं में आत्मनिर्भर बनने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन (NMEO-OP) पर अगले 5 वर्षों में 11,000 करोड़ खर्च करेगी. इस मिशन के तहत वर्ष 2024-25 तक खाद्य तेल आयात पर निर्भरता को वर्तमान 60% से कम करके 45% करने तथा घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को 10 मिलियन टन से बढ़ाकर 18 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा गया है.

मिशन के तहत वर्ष 2025-26 तक पाम ऑयल का रकबा (क्षेत्र) 6.5 लाख हेक्टेयर बढ़ाने तथा अंततः: 10 लाख हेक्टेयर का क्षेत्र करने का प्रस्ताव किया गया है. उल्लेखनीय है कि पाम ऑयल को चावल, केला और गन्ने जैसी फसलों की तुलना में कम जल की आवश्यकता होती है. NMEO-OP मिशन के तहत पाम ऑयल उत्पादकों को उनके पाम के ताजे गुच्छों के लिए मूल्य आश्वासन दिया जायेगा, वर्तमान में इनकी कीमतें अंतर्राष्ट्रीय उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती हैं. पाम ऑयल की कृषि के लिए पूर्वोत्तर राज्यों, अंडमान-निकोबार द्वीप समूहों पर विशेष फोकस किया जायेगा.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

योजना का महत्त्व

किसानों की आय में वृद्धि: इससे आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों को बाज़ार में नकदी संबंधी मदद करने से पाम ऑयल के उत्पादन को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है.

पैदावार में वृद्धि और आयात में कमी

  • भारत विश्व में वनस्पति तेल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. इसमें से पाम ऑयल का आयात उसके कुल वनस्पति तेल आयात का लगभग 55% है.
  • यह इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम ऑयल, ब्राज़ील और अर्जेंटीना से सोया तेल तथा मुख्य रूप से रूस व यूक्रेन से सूरजमुखी तेल का आयात करता है.
  • भारत में 94.1% पाम ऑयल का उपयोग खाद्य उत्पादों में किया जाता है, विशेष रूप से खाना पकाने के लिये. यह पाम ऑयल को भारत की खाद्य तेल अर्थव्यवस्था हेतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Facial recognition technology

संदर्भ

तीन वर्ष की देरी के पश्चात्, मार्च 2022 में, यात्रीगण देश के चार हवाई अड्डों पर अपने बोर्डिंग पास के रूप में ‘फेस स्कैन’ (Face Scan) का उपयोग कर सकेंगे.

  • चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी-आधारित बायोमेट्रिक बोर्डिंग सिस्टम को सबसे पहले पर, वाराणसी, पुणे, कोलकाता और विजयवाड़ा के हवाईअड्डों पर शुरू की जाएगी और यह सेवा मार्च 2022 से लाइव हो जाएगी.
  • इसके बाद, इस प्रौद्योगिकी को देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा.

कार्यान्वयन

‘भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण’ द्वारा ‘डिजीयात्रा नीति’ (DigiYatra Policy) के हिस्से के रूप में इस प्रौद्योगिकी को लागू करने का दायित्व ‘NEC कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के लिए सौंपा गया है. इसका उद्देश्य कागज रहित हवाई यात्रा और हवाई अड्डे में प्रवेश करने से लेकर विमान में चढ़ने तक एक सहज यात्रा की सुविधा प्रदान करना चाहता है.

इस नीति को अक्टूबर 2018 में अनावरण किया गया था, और मूल योजना के अनुसार, चेहरे की पहचान तकनीक का रोल-आउट अप्रैल 2019 के लिए निर्धारित किया गया था.

‘मुखाकृति पहचान’ (Facial recognition) क्या है?

फेशियल रिकॉग्निशन एक बायोमेट्रिक तकनीक है, जिसमे किसी व्यक्ति की पहचान करने और उसे भीड़ में चिह्नित करने के लिए चेहरे की विशिष्टताओं का उपयोग किया जाता है.

  1. स्वचालित ‘मुखाकृति पहचान’ प्रणाली (Automated Facial Recognition System- AFRS), व्यक्तियों के चेहरों की छवियों और वीडियो के व्यापक डेटाबेस के आधार पर कार्य करती है. किसी अज्ञात व्यक्ति की एक नई छवि – जिसे सामन्यतः किसी सीसीटीवी फुटेज से प्राप्त किया जाता है – की तुलना मौजूदा डेटाबेस में उपलब्ध छवियों से करके उस व्यक्ति की पहचान की जाती है.
  2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक द्वारा आकृति-खोज और मिलान के लिए उपयोग की जाने वाली को ‘तंत्रिकीय नेटवर्क” (Neural Networks) कहा जाता है.

फेशियल रिकॉग्निशन के लाभ

  1. अपराधियों की पहचान और सत्यापन परिणामों में सुधार.
  2. भीड़ के बीच किसी व्यक्ति को चिह्नित करने में आसानी.
  3. पुलिस विभाग की अपराध जांच क्षमताओं में वृद्धि.
  4. जरूरत पड़ने पर नागरिकों के सत्यापन में सहायक है.

संबंधित चिंताएँ

  • विशिष्ट कानूनों या दिशानिर्देशों की अनुपस्थिति, निजता तथा वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकारों के लिए एक बड़ा खतरा है. यह उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ’ मामले में दिए गए निजता संबंधी ऐतिहासिक फैसले में निर्धारित मानदंडो पर खरा नहीं उतरता है.
  • कई संस्थानों द्वारा चेहरे की पहचान प्रणाली / फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) की शुरू करने पहले ‘निजता प्रभाव मूल्यांकन’ (Privacy Impact Assessment) नहीं किया गया है.
  • कार्यात्मक विसर्पण (Function creep): जब किसी व्यक्ति द्वारा मूल निर्दिष्ट उद्देश्य के अतिरिक्त जानकारी का उपयोग किया जाता है, तो इसे कार्यात्मक विसर्पण (Function creep) कहा जाता है. जैसे कि, पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय से लापता बच्चों को ट्रैक करने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग करने की अनुमति ली थी, किंतु पुलिस इसका उपयोग सुरक्षा और निगरानी और जांच करने के लिए कर रही है .
  • इससे एक अत्यधिक-पुलिसिंग जैसी समस्या भी उत्पन्न हो सकती है, जैसे कि कुछ अल्पसंख्यक समुदायों की बिना किसी कानूनी प्रावधान के अथवा बिना किसी ज़िम्मेदारी के निगरानी की जाती है. इसके अलावा, ‘सामूहिक निगरानी’ के रूप में एक और समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसमें विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा FRT प्रणाली का उपयोग किया जाता है.
  • सामूहिक निगरानी (Mass surveillance): यदि कोई व्यक्ति सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने जाता है, और पुलिस उस व्यक्ति की पहचान करने में सक्षम होती है और व्यक्ति को इसके दुष्परिणाम भुगतने पद सकते हैं.
  • फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) को वर्ष 2009 में केंद्रीय मंत्रिमडल द्वारा जारी एक नोट के आधार पर लागू किया जाता है. लेकिन कैबिनेट नोट का कोई वैधानिक महत्व नहीं होता है, यह मात्र एक प्रक्रियात्मक नोट होता है.

समय की माँग

पुट्टस्वामी फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है, कि सार्वजनिक स्थानों पर भी निजता एक मौलिक अधिकार है. और अगर इन अधिकारों का उल्लंघन करने की आवश्यकता होती है, तो सरकार को इस तरह की कार्रवाई के पीछे उचित एवं विधिसम्मत कारणों को स्पष्ट करना होगा.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

वर्तमान डिजिटल युग में डेटा एक मूल्यवान संसाधन है जिसे अनियंत्रित या स्वतंत्र नहीं छोड़ा जा सकता। इस संदर्भ में भारत को एक मजबूत डेटा संरक्षण व्यवस्था स्थापित करनी चाहिये। अब समय आ गया है कि व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 में आवश्यक परिवर्तन जाएँ। इन परिवर्तनों को सुनिश्चित करने हेतु इसमें आवश्यक सुधारों की आवश्यकता है। यह उपयोगकर्त्ता के अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ उपयोगकर्त्ता की गोपनीयता पर भी ज़ोर देता है। इन अधिकारों को लागू करने हेतु एक गोपनीयता आयोग की स्थापना की जानी चाहिये। सरकार को सूचना के अधिकार को मज़बूत बनाने के साथ ही नागरिकों की निजता का भी सम्मान करना होगा। इसके अतिरिक्त पिछले दो से तीन वर्षों में हुए तकनीकी विकास को देखते हुए यह संबोधित करने की भी आवश्यकता है ये कानून तकनीकी विकास की सीमा को भी निर्धारित करते हैं.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Parker Solar Probe

संदर्भ

नासा (NASA) द्वारा प्रक्षेपित, ‘पार्कर सोलर प्रोब’ (Parker Solar Probe) सूर्य के बाहरी वातावरण- ‘कोरोना’ (CORONA) से होकर उड़ान भरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बन गया है.

हाल ही में, अंतरिक्ष यान ने कोरोना से होकर उड़ान भरी और उसके चुंबकीय क्षेत्र और कणों के नमूने एकत्र किए.

महत्व:

यह उपलब्धि वैज्ञानिकों को सूर्य और हमारे सौर मंडल पर इसके प्रभाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने में मदद करेगी.

पार्कर सोलर प्रोब मिशन क्या है?

2018 में प्रक्षेपित किया गया, ‘पार्कर सोलर प्रोब’ सूर्य के वायुमंडल से होकर यात्रा करेगा. इससे पहले कोई अन्य अंतरिक्ष यान, अत्याधिक उष्मा और विकिरण स्थितियों का सामना करते हुए सूर्य की सतह के इतने नजदीक से नहीं गुजरा है. इस प्रकार, अंततः ‘पार्कर सोलर प्रोब’ मानव समुदाय के लिए किसी तारे का सबसे नज़दीकी विवरण प्रदान करेगा.

पार्कर सोलर प्रोब की यात्रा

  • सूर्य के वातावरण के रहस्यों को उजागर करने के क्रम में, पार्कर सोलर प्रोब लगभग सात वर्षों में सात परिभ्रमणों के दौरान शुक्र के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करेगा तथा धीरे-धीरे अपनी कक्षा को सूर्य के नजदीक स्थापित करेगा.
  • पार्कर सोलर प्रोब अंतरिक्ष यान, सूर्य की सतह से 9 मिलियन मील की दूरी पर और बुध ग्रह की कक्षा के भीतर से से होकर सूर्य के वायुमंडल से गुजरेगा.

मिशन का लक्ष्य

पार्कर सोलर प्रोब के तीन विस्तृत वैज्ञानिक उद्देश्य हैं:

  1. सौर कोरोना और सौर हवा को गर्म करने और गति प्रदान करने वाली ऊर्जा के प्रवाह का पता लगाना.
  2. सौर हवा के स्रोतों पर प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र की संरचना और गतिशीलता का निर्धारण करना.
  3. ऊर्जा कणों को गति प्रदान करने और इनका परिवहन करने वाली प्रणाली का अन्वेषण करना.

कोरोना’ के अध्ययन का कारण:

कोरोना का तापमान, सूर्य की सतह से बहुत अधिक है. कोरोना, सौर प्रणाली में आवेशित कणों के निरंतर प्रवाह अर्थात सौर हवाओं को जन्म देता है. ये अप्रत्याशित सौर हवाएं हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र में गड़बड़ी का कारण बनती हैं और पृथ्वी पर संचार तकनीक को नष्ट करने में सक्षम होती हैं. नासा को आशा है कि इन निष्कर्षों से वैज्ञानिकों के लिए पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण में होने वाले बदलाव का पूर्वानुमान लगाने में मदद मिलेगी.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Opposition to the proposal to take ‘climate change’ to the ‘United Nations Security Council’

संदर्भ

हाल ही में, भारत और रूस द्वारा एक प्रस्ताव को अवरुद्ध कर दिया गया, जिसमे ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (United Nations Security Council – UNSC) को जलवायु संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अधिकार दिए जाने का प्रावधान किया गया था.

संबंधित प्रकरण:

  • आयरलैंड और नाइजर द्वारा प्रस्तुत मसौदा प्रस्ताव में ‘जलवायु परिवर्तन’ और ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभावों’ पर चर्चा के लिए ‘सुरक्षा परिषद’ में एक औपचारिक जगह बनाने की मांग की गई थी.
  • प्रस्ताव में, संयुक्त राष्ट्र महासचिव से, संघर्षों को रोकने के लिए जलवायु परिवर्तन से होने वाले जोखिमों के समाधान हेतु समय-समय पर रिपोर्ट दिए जाने को भी कहा गया था.

भारत ने क्या कहा?

जब जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय की बात आती है तो भारत किसी से पीछे नहीं रहता है. लेकिन ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ (UNSC) किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने की जगह नहीं है. वास्तव में, इस तरह का प्रयास, उपयुक्त मंच पर जिम्मेदारी से बचने, तथा जिन विषयों पर ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ की ओर जिम्मेदारी होती है, उन पर कोई फैसला लेने की अनिच्छा से दुनिया का ध्यान हटाने की इच्छा से प्रेरित प्रतीत होता है.

प्रस्ताव से संबंधित चिंताएं

  • जलवायु परिवर्तन को अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में पेश करना, सुरक्षा परिषद का ध्यान परिषद के एजेंडे पर देशों में जारी संघर्ष के वास्तविक, गंभीर कारणों से हटा देता है.
  • जलवायु परिवर्तन को सुरक्षित करना, उन देशों के लिए काफी हद तक सुविधाजनक होगा जो सक्रिय रूप से संघर्षों को पैदा करने में मदद कर रहे है, अथवा सुरक्षा परिषद को इसके कार्यों में विचलन लाने के लिए सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे है या विकासशील देशों को आवश्यक सहायता प्रदान नहीं करना चाहते हैं.
  • प्रस्ताव के हिस्से के रूप में की जाने वाली कार्रवाई के तहत, संभावित रूप से जीवाश्म समृद्ध देशों पर प्रतिबंध लगाने से लेकर, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले घरेलू संघर्षों में संयुक्त राष्ट्र के सैन्य हस्तक्षेप तक किया जा सकते हैं.

आगे क्या?

जलवायु परिवर्तन से संबंधित सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के पास पहले से ही एक विशेष एजेंसी, ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन’ (United Nations Framework Convention on Climate Change- UNFCCC) है.

  • UNFCCC में 190 से अधिक देश शामिल है, और ये प्रतिवर्ष कई बार बैठक करते हैं. इसके तहत, हाल ही में, साल की अंतिम बैठक का ग्लासगो में आयोजन किया गया था. दो सप्ताह तक काहली इस बैठक में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक दृष्टिकोण पर विमर्श किया गया.
  • इसी प्रक्रिया के अंतर्गत, ‘पेरिस समझौते’ और इसके पूर्ववर्ती ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ का जन्म हुआ था. ये समझौते जलवायु परिवर्तन संकट का जवाब देने के लिए डिज़ाइन किए गए अंतरराष्ट्रीय उपकरण है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

“जलवायु न्याय” एक शब्द से अधिक एक आंदोलन है जो यह स्वीकार करता है कि वंचित वर्ग पर जलवायु परिवर्तन का सामाजिक, आर्थिक, सार्वजनिक स्वास्थ्य और अन्य प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। भारत के अनुसार, ‘जलवायु न्याय’ ट्रस्टीशिप के दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिसके तहत विकास से साथ-साथ वंचित वर्ग के प्रति सहानुभूति का उत्तरदायित्त्व भी बढ़ जाता है।

भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने लक्ष्यों के लिये की गई प्रतिबद्धताओं को दोहराया है, जिसके तहत भारत के सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता को वर्ष 2005 के स्तर से 33-35 प्रतिशत तक कम करने की बात कही गई है. इस दौरान भूमि क्षरण तटस्थता के लिये भारत की प्रतिबद्धता और वर्ष 2030 तक 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लिये भारत की निरंतर प्रगति पर भी प्रकाश डाला गया.


Prelims Vishesh

P.N. Panicker :-

  • भारत के राष्ट्रपति ने हाल ही में, तिरुवनंतपुरम के पूजापुरा में श्री ‘पी एन पणिकर’ (P.N. Panicker) की प्रतिमा का अनावरण किया.
  • ‘पुथुवायिल नारायण पणिक्कर’ को केरल के पुस्तकालय आंदोलन के जनक के रूप में जाना जाता है.
  • वर्ष 1996 से उनकी पुण्यतिथि – 19 जून को केरल में ‘वायनादिनम’ (Vayanadinam) अर्थात् ‘पठन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.
  •  

Abhyas :-

  •  हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (High-Speed Expendable Aerial Target – HEAT) ‘अभ्यास’ (Abhyas) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है.
  • ‘अभ्यास’ एक स्वदेशी मानवरहित हवाई लक्ष्य प्रणाली है.
  • वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE), बेंगलुरु स्थित DRDO प्रयोगशाला ने अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के साथ भारतीय सशस्त्र बलों के एरियल टारगेट्स की आवश्यकता को पूरा करने के लिए इस स्वदेशी मानव रहित हवाई टारगेट प्रणाली को विकसित किया है.

Olive Ridley :-

  •  
  • जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के शोधकर्ताओं द्वारा ‘ओलिव रिडले’ (Olive Ridley) कछुओं की तीन सामूहिक प्रजनन स्थलों – गहिरमाथा, देवी नदी के मुहाने और रुशिकुल्या पर टैगिंग (Tagging) की जा रही है.
  • इस टैगिंग से प्रजनन स्थलों पर इकठ्ठे होने और प्रजनन करने के बाद, ‘ओलिव रिडले कछुओं’ के प्रवसन मार्ग तथा इनके गन्तव्य स्थानों के बारे में जानकारी मिलेगी.
  • ओलिव रिडले कछुए (Olive ridley turtles) विश्व में पाए जाने वाले सभी समुद्री कछुओं में सबसे छोटे और सर्वाधिक संख्या में हैं.
  • ये प्रशांत, अटलांटिक और भारतीय महासागरों के उष्ण जल में निवास करते हैं.
  • ओलिव रिडले कछुए, तथा इसी प्रजाति के केमप्स रिडले कछुए (Kemps ridley turtle), अपने विशिष्ट सामूहिक घोसलों के लिए जाने जाते हैं इन घोसलों को अरिबाड़ा (Arribada) कहा जाता है.
  • समुद्र तट पर इन घोसलों में मादा ओलिव रिडले कछुए हजारों की संख्या में एक साथ अंडे देने के लिए हर साला आती हैं.
  • ओडिशा के गंजम जिले में रुशिकुल्या नदी तटगहिरमाथा तट और देबी नदी का मुहाना, ओडिशा में ओलिव रिडले कछुओं द्वारा अंडे देने के प्रमुख स्थल हैं.

संरक्षण स्थिति:

    • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची- 1
    • IUCN रेड लिस्ट: संवेदनशील (Vulnerable)
    • CITES: परिशिष्ट- I
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