CSAT Paper 1 को क्या UPSC Prelims से हटाया जा रहा है? कितना सच है?

Sansar LochanCivil Services Exam11 Comments

हमअफवाहों पर ध्यान नहीं देते और न ही उन्हें हवा देते हैं. इसलिए कभी भी हमने ऐसी अफवाहों को अपनी वेबसाइट पर स्थान नहीं दिया चाहे वह अधिकतम आयु घटाने के विषय में अफवाह हो या आरक्षण ख़त्म होने की बात. पर आजकल एक उड़ते-उड़ते समाचार आ रहा है कि UPSC प्रारम्भिक परीक्षा (prelims exam) से CSAT पेपर 1 को हटाने जा रहा है. इस बात में कितना दम है, आइये जानते हैं.

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Truth Behind UPSC CSAT Paper 1 Removal

यह सच है कि UPSC ने कार्मिक विभाग एवं प्रशिक्षण को एक पत्र लिखा है जिसमें प्रारम्भिक परीक्षा के पपेर 1, जिसे प्यार से CSAT पेपर कहते हैं, को हटाने की बात कही गई है.

आपको पता है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग क्या है? आप UPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे हो, आपको यह जानना चाहिए.

कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के तहत ये संगठन आते हैं – UPSC, SSC, लोक उद्यम चयन बोर्ड, लाल बहादुर शास्‍त्री राष्‍ट्रीय प्रशासन अकादमी, सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंध संस्‍थान, केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग (CVC), केन्‍द्रीय अन्‍वेषण ब्‍यूरो (CBI), भारतीय लोक प्रशासन संस्‍थान और  केन्‍द्रीय सूचना आयोग (CIC).

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों एवं अनुदेशों के अनुपालन में UPSC में प्राप्‍त पदोन्‍नति तथा प्रतिनियुक्‍ति द्वारा नियुक्‍ति के प्रस्‍तावों को नियुक्‍ति शाखा में संसाधित किया जाता है. सरल शब्दों में UPSC में कितना पोस्ट निकलेगा, कब निकलेगा, क्या बदलाव लाया जाएगा आदि सब कार्मिक विभाग के विवेक पर निर्भर करता है.

अब जहाँ धुआँ है तो आग भी होगा ही. इसका अर्थ यह हुआ कि UPSC ने जब चिट्ठी लिख डाली है तो अब कार्मिक विभाग की मुहर लगाएगा या नहीं, बस इसका इन्तजार है.

आपको क्या फायदा होगा?

CSAT पेपर को लेकर हमेशा से बवाल होता आया है. कभी आन्दोलन हुए, कभी मुखर्जी नगर में हजारों छात्रों की भीड़ें एकत्रित की गईं , कभी इस पेपर को qualifying पेपर करने की जिद की गई तो कभी इंग्लिश हटाने की माँग की गई.

आपको क्या लगता है? आप एक हिंदी माध्यम के विद्यार्थी हो…यदि CSAT हटा दिया जाता है तो आपको क्या फायदा होगा? कमेंट में अपनी राय प्रस्तुत करें.

मेरा क्या मानना है?

मैं तो UPSC के इस निर्णय के पक्ष में हूँ. भले ही UPSC ने काफी विलम्ब कर दिया यह निर्णय लेने में पर देर आये दुरुस्त आये. कई ग्रामीण छात्रों के जीवन के साथ खेला गया. 2011 से CSAT के विष का प्याला छात्र पीते आ रहे थे जो कांग्रेस सरकार के तत्कालीन शिक्षा मंत्री कपिल सिब्बल के बकवास निर्णय का नतीजा था.

सिविल सर्विसेज परीक्षा को हमेशा से आर्ट्स स्टूडेंट के छात्रों का किला माना गया है. इस परीक्षा का नाम सुनते ही मन में इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र, अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्ध, द हिन्दू अखबार, योजना, कुरुक्षेत्र, राज्य सभा, लोक सभा आदि शब्द कान में गूँजने लगते हैं. कहा जाता था कि इस लड़के ने स्नातक में आर्ट्स विषय लिया है, जरुर यह IAS बनेगा.

पर CSAT के बाद से तो मानो IIT, MBA, MBBS करने वाले छात्रों की भीड़ लगने लगी. वे बहुत आसानी से प्रारम्भिक परीक्षा पास कर लेते थे. उनके लिए यह चुटकियों का खेल था.

आप जो मैथ्स बनाने में 2 मिनट लगाते थे वह सिर्फ प्रश्न देखकर ही उत्तर जान लेते थे. क्योंकि उन्हें ऐसी ट्रेनिंग मिली थी. उनका दिमाग आपसे इन चीजों में ज्यादा शार्प था.

मगर जैसा विज्ञान का भी मानना है कि यदि आपका आर्ट्स अच्छा है तो मैथ्स/साइंस उतना अच्छा नहीं होगा और यदि आपका मैथ्स/साइंस अच्छा है तो आर्ट्स अच्छा नहीं होगा. यह तो ब्रेन का खेल है. इसमें हमारा कोई हाथ नहीं. भगवान् ने मस्तिष्क को दो भागों में बाँटा है. एक टेक्निकल और दूसरा नौन-टेक्निकल.

पर इन साइंस वाले बैकग्राउंड के छात्रों के लिए तो IIT, MBA, MBBS था ही. इनको ऐसा क्या चस्का लगा कि सब अपनी नौकरी छोड़कर IAS बनने आ गये? और तो और कई महान लोग तो ऐसे भी थे जो IAS पद का त्याग कर बहुत ही सफल व्यापारी बन गये और शिक्षा को बेचने का काम करने लगे. भाई, आपने उन गरीबों की सीट क्यूँ खाई यदि IAS बन कर टिकना ही नहीं था.

दरअसल हुआ यह कि ये टेक्निकल मेधावी छात्र प्रारम्भिक परीक्षा आसानी से निकाल लेते थे और मेंस में जाकर बहुत खराब प्रदर्शन करते थे. यदि आँकड़ों की बात की जाए तो 2011 से पहले टॉपर छात्र मेंस में 60-62% तक ले आते थे. पर CSAT के बाद मेंस का ग्राफ गिरता चला गया क्योंकि मेंस में वही छात्र आ जाते थे जिनको सामान्य अध्ययन से कोई लेना-देना नहीं था.

Declining Graph of IAS Mains

आप खुद देख लीजिये. पहले कॉलम में वर्ष दिया हुआ है और दूसरे कॉलम में सबसे कम स्कोर लाने वाले छात्र के मार्क्स का प्रतिशत.

वर्ष

मेंस में Cut off %

2006

48.75

2007

50.25

2008

47.7

2009

44.95

2010

45.2

2011

42.1

2012

35

2013

32.1

2014

38.74

2015

38.62

 

वैसे मेरा यह भी मानना है कि आप जब UPSC परीक्षा देते हो तो यह जरुरी नहीं कि आपको सिर्फ IAS, IPS, IFS आदि पोस्ट मिले. ऐसे कई पोस्ट मिल सकते हैं जिसमें आपको सांख्यिकी, टेक्निकल ज्ञान होना जरुरी है. इसलिए पहले की तरह थोड़े-बहुत एप्टीच्यूड के सवाल मेंस में होने चाहिएँ.

मगर यह IIT, MBA, MBBS वाला खेल अब ख़त्म होना चाहिए. आप इंजिनियर बनो, MBA करो, MBBS करो…देश में सिर्फ IAS लोगों की आवश्यकता नहीं है. देश में अच्छा स्वास्थ्य भी चाहिए, अच्छा प्रबंधन भी चाहिए, अच्छे ब्रिज की भी आवश्कता है और एक अच्छा प्रशासन भी चाहिए.

आप इस पोस्ट को अपने व्हाट्सऐप ग्रुप या फेसबुक में जरुर शेयर करना ताकि अधिक से अधिक हिंदी माध्यम की राय हमें मिले और हम अपनी बात UPSC तक पहुँचा सके ताकि उन्हें हमारी ओर से भी दबाव का अनुभव हो और वे इस चीज को हल्के में न लें.

सम्पादक,

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संसार लोचन

Tags : removal of csat paper 1 from UPSC IAS prelims exam

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11 Comments on “CSAT Paper 1 को क्या UPSC Prelims से हटाया जा रहा है? कितना सच है?”

  1. Main aapke vichar se alag mat rakhta hu. Mera manna hai ki Csat ko continue karna chahiye yeh hamare kabiliyat ko badata hai or sawal raha ki yeh bahut tough hai to meko to aisa bilkool bhi nahi lagta hai agar ham pre ke 4-5 mahine pehle hi rojana sirf 2 ghante isko de to hum iski kafi acchi preparation kr sakte hai.

  2. श्री मान,
    मैं मानता हूँ कि csat हटाने से हिंदी मीडियम वालो को लाभ होगा, लेकिन हम यह क्यो नही सोचते हम जिस स्तर की तैयारी कर रहे है, उसमे सभी विषयों की आवश्यकता होती है। हम IAS बनकर देश -विदेश में हर तरह के लोगो स्व मिलते है। उसके लिए अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, तर्कशक्ति इत्यादि की जरूरत पड़ती है, जो सीसैट के ही द्वारा UPSC को मिलते है।
    मैं हिंदी मीडियम का विरोधी नही हूँ, और मैं खुद हिंदी मीडियम का हूँ, लेकिन मेरा मानना है, की हम जहाँ जा रहे है, वहाँ सभी विषयों का ज्ञान होना अति आवश्यक है।
    आगे जो कार्मिक विभाग फैसला ले उसको तो मानना ही पड़ेगा, हमारे सोचने न सोचने और कहने न कहने से क्या होता है।

    1. aapka manna bilkul sahi h waise bhi csat me 33 percent hi to magte h only qualify hi to karna hota ho jaruri h or usko koi bhi pas kar skta h fir wo kisi midiam se ho mai hindi mediam se hu mujhe koi problem nhi h csat se sabhi log dil se tyari kro hoga kese nhi selection all the best to all of you

    2. IAS ko sbse hard exam is liye kaha jata hai kyuki gs paper 1and 2nd dono ko qualify jarne me halat kharab ho jati h lekin yeh b manna padega ki CSAT basic knowledge, IQ, provblem solving skills decision making, leading, understanding sb me madad karta h jo long term me apn ko kam me ati h varna agar CAST na ho to ank (numbers) ke andhe IAS ko samjh b nahi aayega ki bhrastachar jese kam kaha ho rhe h, me khud B.tech kara hu or IAS Bnkar mere desh ko sambhalna chahta hu lekin gk, economics an in sb me kuch ni aata but still i am learning and i know soon i gonna make it possible to crack IAS, SAME agar kisi ko IAS post chahiye to mehnat karni padegi rhi english ki bat to govt se 12th kari thi so english me b duffer tha but dheere dheere mene try karke english b seekhi h so i think it’s not fair to removing CSAT.

  3. MUJE YE SAMAJ NAI ATA KI JO LOG ENGINEERING KARE HOTE HAI VE ACCHI KHASI JOB KAR SAKTE HAI OR USI KE THROUGH B DESH KI SEVA KAR SAKTE HAI LEKIN VE LOG AJKAL JYADA UPSC KI OR ATTRACT HO RAHE HAI OR SAFAL B HO HI JATE HAI KYUKI UNKA MIND JAHIR SI BAT HAI SHARP HOTA HAI VE ENGINEERING ME B GAREEB BACCHO KE LIYE JAGAH NAI CHHODTE OR CIVIL SEVA ME B ARTS YA GAREEB BACCHO KI SEAT PAR KABJA KAR RAHE HAI …AAKHIR KYU?

  4. सर में आपकी बात से सहमत हूँ लेकिन अगर सी सैट हटा दिया तो level और up हो जायेगा , जिससे हिंदी माध्यम के students को हानि भी हो सकती है इसके बचाव में यही कहूँगा

  5. Sir ye csat ht jata h to mano ki ab upsc ko acche ya yu khe to soch samjhkr parsasan ko chlane wale candidate milenge kyu ki hme nhi lgta ki ye ,इंजिनीयर , dactor wale student bahut shi se chla pate honge .

  6. Yes sir,mujhe lagta h ye bahut jaruri h ki csat ko hatay jaye.nahi to u hi upsc ek engineer or doctoro ka ghar ban jayega

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