WHO के द्वारा रोगों के नामकरण से सम्बंधित दिशानिर्देश

Sansar LochanThe HinduLeave a Comment

How WHO names a new disease? Explained in Hindi

फरवरी 11, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नए कोरोना वायरस से उत्पन्न होने वाले रोग का नाम आधिकारिक रूप से COVID-19 रख दिया है.

स्मरण रहे कि 40 दिन पहले चीन ने WHO को बताया था कि उसके हुबेई प्रांत के वुहान नगर में निमोनिया जैसा एक रोग फैला हुआ है.

COVID-19 नाम का विश्लेषण

COVID में “CO” का तात्पर्य कोरोना से है जबकि “VI” का अर्थ है वायरस और “D” का आशय disease अथवा रोग से है. इस नाम में 19 इसलिए जोड़ा गया है क्योंकि 2019 में ही इसका पता चला.

WHO के द्वारा रोगों के नामकरण से सम्बंधित दिशानिर्देश

  • 2015 के मई महीने में WHO ने किसी नए रोग के नामकरण के लिए दिशानिर्देश प्रकाशित किये थे.
  • WHO ने विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (World Organisation for Animal Health – OIE) तथा संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (Food and Agriculture Organization of the United Nations – FAO) के परामर्श एवं सहयोग से नामकरण की एक पद्धति निकाली है.
  • इस पद्धति का उद्देश्य ऐसे नाम निश्चित करना है जिनका कोई अनावश्यक नकारात्मक प्रभाव व्यापार, पर्यटन, यात्रा अथवा पशु कल्याण पर नहीं पड़े और साथ ही किसी सांस्कृतिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, प्रादेशिक, व्यावसायिक अथवा जाति समूह को आघात नहीं पहुँचे. दिए गये दिशा निर्देश के अनुसार, किसी नए रोग के नाम में एक से अधिक शब्दों का मिश्रण होना चाहिए.
  • इन शब्दों से यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि नए रोग के लक्षण क्या हैं और वो शरीर के किस अंग से सम्बंधित हैं. उदाहरण के लिए कोई रोग स्वास रोग से सम्बंधित हो सकता है, उसमें अतिसार का लक्षण हो सकता है अथवा वह हृदय आदि अंगों से सम्बंधित हो सकता है. नए नाम में इन सब का संकेत होना चाहिए.
  • नए रोग के नाम में ऐसे वर्णनात्मक शब्द होने चाहिएँ जिनसे पता चले कि यह रोग किसे और किस ऋतु तथा कितनी भीषणता से होता है. उदहारणार्थ यह रोग बच्चों को होता है या किशोरों को अथवा माँ को होता है; गर्मी में होता है या जाड़े में होता है तथा यह हल्के ढंग से होता है या इसका प्रकोप भीषण होता है.
  • नए नाम में कुछ अन्य तत्त्व भी हो सकते हैं, जैसे – पर्यावरण (समुद्र, नदी), रोगजनक वायरस (कोरना वायरस) तथा वह वर्ष जिसमें नए रोग की पहचान पहली बार हुई हो. महीने का भी उल्लेख हो सकता है पर यह आवश्यक नहीं है.
  • नए नाम में वर्ष इसलिए डाला जाता है कि अलग-अलग वर्षों में हुए समान प्रकोप की पहचान सरलता से हो सके.
  • अपने दिशानिर्देश में WHO ने कुछ ऐसे शब्द भी बताये हैं जिनका प्रयोग नए नाम में करने से बचना चाहिए. ये शब्द जिन विषयों से सम्बंधित हैं, वे हैं – भौगोलिक स्थिति, लोगों के नाम, पशु अथवा भोजन की प्रजाति, संस्कृति, जनसंख्या, उद्योग अथवा व्यवसाय तथा ऐसे शब्द जिनसे अकारण भय उत्पन्न हो.

दिशानिर्देश के पहले रखे हुए कुछ आपवादिक नाम

  • कुछ रोगों के नाम भौगोलिक स्थिति अर्थात् नगरों, देशों और प्रदेशों पर रखे जा चुके हैं, जैसे – जिका (युगांडा का एक जंगल).
  • कुछ रोगों के नाम में उस व्यक्ति का नाम जोड़ा हुआ है जिसने उस रोग का सबसे पहले पता लगाया. उदाहरण के लिए “चागस” रोग का नाम उसे 1909 में पता लगाने वाले ब्राजीली चिकित्सक कार्लोस चागस के नाम पर पड़ा है.
  • कुछ रोगों के नाम पशुओं भी पड़ चुके हैं, उदाहरण के लिए – बर्ड फ्लू (H5N1) और स्वाइन फ्लू (H1N1).
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