ग्रेस-FO मिशन – GRACE-FO mission in Hindi

Richa KishoreSansar DCA1 Comment

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी NASA और Nebraska-Lincoln विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से पिछले दिनों नए उपग्रह-आधारित साप्ताहिक वैश्विक मानचित्र विकसित किये जिनसे मिट्टी की आर्द्रता तथा भूजल के गीलेपन का पता चलेगा.

यह मानचित्र कैसे बने?

  1. इन वैश्विक मानचित्रों को बनाने के लिए GRACE-FO उपग्रहों से नासा एवं जर्मन भूविज्ञान अनुसंधान केंद्र को उपलब्ध डाटा का प्रयोग किया गया.
  2. उपग्रहों से प्राप्त जल वितरण में होने वाले परिवर्तनों की सूचना को अन्य डाटा के साथ एक कंप्यूटर मॉडल में समेकित किया गया और जल एवं ऊर्जा चक्रों की कृत्रिम व्यवस्था की गई.
  3. तत्पश्चात् अन्य कई प्रतिफलों के साथ-साथ जल के वितरण से सम्बंधित तीन अलग-अलग गहराइयों पर अलग-अलग मानचित्र तैयार किये गये. गहराई के ये तीन स्तर निम्नलिखित थे

ऊपरी सतह की मिट्टी, मूल जोन अर्थात् मिट्टी के सबसे ऊपरी 3 फुट का भाग तथा छिछला भूजल.

  1. इन मानचित्रों का रेजोल्यूशन 8 . 5 मील तक का है और ये पूरे परिदृश्य में व्याप्त आर्द्रता एवं भूजल की दशाओं के विषय में लगातार डाटा उपलब्ध कराते हैं.

ये डाटा क्यों चाहिएँ?

वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में हमें उन आर्द्र एवं शुष्क दशाओं के विषय में पूरी जानकारी नहीं है जिनके कारण सूखा पड़ा करता है. इनका विचार है कि GRACE-FO मिशन से ज्ञान की इस कमी को दूर किया जा सकेगा. प्राप्त जानकारी से हम जनसंख्या वृद्धि, जलवायु परिवर्तन अथवा जल की खपत में वृद्धि जैसी समस्याओं से बेहतर ढंग से निपट सकेंगे. यही नहीं, इन आँकड़ों से हम उपयुक्त कृषि फसलों का चुनाव कर सकेंगे तथा कितना उत्पादन होगा उसका पूर्वानुमान लगा सकेंगे.

GRACE-FO मिशन क्या है?

  1. GRACE-FO का full form है – Gravity Recovery and Climate Experiment Follow-On
  2. GRACE-FO मिशन NASA और German Research Centre for Geosciences (GFZ) की साझेदारी में चलाया जा रहा है.
  3. यह मिशन 17 मार्च, 2002 में प्रक्षेपित हुए GRACE mission का अनुवर्ती मिशन है.
  4. ग्रेस मिशन पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के बदलाव को मापता है और इसके जरिये हर महीने गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र का एक नया नक्शा तैयार किया जाता है.
  5. गुरुत्वाकर्षण को मापने के अतिरिक्त GRACE mission पृथ्वी में जल के प्रवाह में परिवर्तन पर नज़र रखते हुए भूगर्भ जल, बड़ी-बड़ी झीलों-नदियों के जल, हिमखंडों, हिमानियों और अन्य स्रोतों से जल के आगमन के कारण समुद्र के जल-स्तर में होने वाले परिवर्तन का ब्यौरा तैयार करता है.

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