[Economy Part 1] SGQ Series | UPSC PRE 2021 | Govt. Schemes

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Sansar Guess Series – SGQ PART 1 | योजना और सरकारी पहल

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💰Economics Revision Series – Sansar Guess Series Part 1

📸फेसलेस टैक्स स्कीम

फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के तहत करदाता या कर निर्धारिती को आयकर विभाग के कार्यालय में जाने या आयकर से संबंधित मामलों के लिये विभाग के अधिकारी से मिलने की आवश्यकता नहीं है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम को वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य एक कुशल तथा प्रभावी कर प्रशासन को बढ़ावा देना, भौतिक इंटरफेस को कम करना, जवाबदेही बढ़ाना और टीम आधारित आकलन की शुरुआत करना है। फेसलेस मूल्यांकन, कर विभाग के भीतर अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से प्रशासित किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक की प्रक्रिया में एक विशिष्ट और महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, जैसे मूल्यांकन इकाइयाँ, सत्यापन इकाइयाँ, तकनीकी इकाइयाँ और समीक्षा इकाइयाँ। ये सभी इकाइयाँ राष्ट्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र (NeAC) व क्षेत्रीय ई-मूल्यांकन केंद्र (ReAC) के साथ मिलकर काम करती हैं। यह योजना करदाताओं और कर अधिकारियों के समक्ष प्रतिनिधित्व करने वाले पेशेवरों को अधिक लचीलापन प्रदान करती है। इसके परिणामस्वरूप कर कार्यालय में उपस्थित होने और प्रतीक्षा में लगने वाले समय आदि में कमी के कारण पर्याप्त समय की बचत होती है।

🎇 जम्मू-कश्मीर के लिए नई औद्योगिक विकास योजना

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 6 जनवरी, 2021 को जम्मू और कश्मीर के औद्योगिक विकास के लिए एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में ‘जम्मू-कश्मीर के लिए नई औद्योगिक विकास योजना’ [New Industrial Development Scheme for Jammu & Kashmir (J&K IDS, 2021)] को मंजूरी प्रदान की।

मुख्य उद्देश्य: रोजगार सृजन करना, जिससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके।

महत्त्वपूर्ण तथ्य: योजना 28,400 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ वर्ष 2037 तक स्वीकृत की गई है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं: योजना छोटी और बड़ी दोनों तरह की इकाइयों के लिए आकर्षक बनायी गई है। संयंत्र और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये तक निवेश करने वाली छोटी इकाइयों को 7.5 करोड़ रुपये तक पूंजी प्रोत्साहन मिलेगा और अधिकतम 7 वर्षों के लिए पूंजी ब्याज सहायता 6% की दर से मिलेगी।

  • इस योजना का उद्देश्य औद्योगिक विकास को जम्मू-कश्मीर में ब्लॉक स्तर पर ले जाना है, जो भारत सरकार की किसी भी औद्योगिक प्रोत्साहन योजना में पहली बार है।

योजना के अंतर्गत प्रोत्साहनसंयंत्र और मशीनरी (मैन्युफैक्चरिंग) में निवेश या भवन निर्माण तथा अन्य स्थायी भौतिक परिसंपत्तियों (सेवा क्षेत्र) में निवेश पर जोन-ए में 30% तथा जोन-बी में 50% की दर पर पूंजी निवेश प्रोत्साहन उपलब्ध है।

  • संयंत्र और मशीनरी (मैन्युफैक्चरिंग) में या भवन निर्माण तथा अन्य सभी स्थायी भौतिक परिसंपत्तियों (सेवा क्षेत्र) में निवेश के लिए 500 करोड़ रूपये तक की ऋण राशि पर अधिकतम 7 वर्षों के लिए 6% वार्षिक दर से पूंजी ब्याज सहायता।
  • सभी वर्तमान इकाइयों को अधिकतम 5 वर्षों के लिए 5% वार्षिक दर से प्रोत्साहन की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी ब्याज सहायता।

🧥प्री-पैक इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस

इनसॉल्वेंसी लॉ कमेटी (ILC) की एक उपसमिति द्वारा ‘दिवाला एवं शोधन अक्षमता कोड’ (Insolvency and Bankruptcy Code- IBC), 2016 के मूल ढाँचे के भीतर प्री-पैक ढाँचे (Pre-Pack Framework) की सिफारिश की गई है।

  • जून, 2020 में प्री-पैक इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस की सिफारिश करने हेतु सरकार द्वारा भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI)  के अध्यक्ष एम.एस. साहू की अध्यक्षता में इन्सॉल्वेंसी लॉ कमेटी (Insolvency Law Committee- ILC) की एक उपसमिति का गठन किया गया था। 

प्री-पैक का आशय एक सार्वजनिक बोली प्रक्रिया के बजाय सुरक्षित लेनदारों और निवेशकों के बीच एक समझौते के माध्यम से तनावग्रस्त कंपनी के ऋण के समाधान से है। पिछले एक दशक में  ब्रिटेन और यूरोप में इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन (Insolvency Resolution) हेतु यह व्यवस्था काफी लोकप्रिय हुई है। भारत के मामले में ऐसी प्रणाली के तहत वित्तीय लेनदारों को संभावित निवेशकों से सहमत होना अनिवार्य होगा और समाधान योजना हेतु नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मंज़ूरी लेनी भी आवश्यक होगी।

🤖आत्मनिर्भर भारत 3.0 

  • यह योजना नई नौकरियों के सृजन के लिये प्रोत्साहित करेगी। EPFO-पंजीकृत संगठनों द्वारा नियुक्त नए कर्मचारियों को COVID​​-19 महामारी के दौरान लाभ मिलेगा।  ‘आत्मनिर्भर भारत रोज़गार योजना’ 1 अक्तूबर, 2020 से लागू होगी।  EPFO-​​पंजीकृत संगठन, यदि नए कर्मचारियों की भर्ती करते हैं या जो पहले नौकरी खो चुके हैं वे कर्मचारी कुछ लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं।  यदि 1 अक्तूबर, 2020 से 30 जून, 2021 तक नए कर्मचारियों की भर्ती की जाती है, तो अगले दो वर्षों के लिये प्रतिष्ठानों को कवर किया जाएगा।
  • ‘आत्मनिर्भर भारत 0’ में भारत सरकार द्वारा किया जाने वाला कुल खर्च 2.65 लाख करोड़ रुपए है। इसके साथ ही भारत सरकार द्वारा COVID-19 महामारी के लिये प्रोत्साहन उपायों पर किया जाने वाला कुल खर्च लगभग 17.16 लाख करोड़ रुपए है, जबकि भारत सरकार एवं RBI द्वारा कुल प्रोत्साहन राशि 29.87 लाख करोड़ रुपए है, जो कि भारत की जीडीपी का 15% है।
  • गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा ये घोषणाएँ कैबिनेट द्वारा एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं प्रौद्योगिकी उत्पादों, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो घटकों के विनिर्माण सहित 10 क्षेत्रों के लियेउत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन [Production-Linked Incentive (PLI)] योजना को मंज़ूरी देने के एक दिन बाद की गई हैं। इन 10 क्षेत्रों हेतु PLI योजना पाँच वर्षों के लिये क्रियान्वित होगी, जिसका कुल अनुमानित परिव्यय 46 लाख करोड़ रुपए होगा। 

🎭 मज़दूरी संहिता (केंद्रीय) नियम –2020

‘केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय’ (Ministry of Labor and Employment) द्वारा आधिकारिक गजट के माध्यम से ‘मज़दूरी संहिता अधिनियम, 2019’ के कार्यान्वयन के लिये तैयार नियमों का मसौदा प्रस्तुत किया गया है। गजट में इसका नाम ‘मजदूरी संहिता (केंद्रीय) नियम -2020’ [Draft Code on Wages(central) Rules, 2020] रखा गया है। इस मसौदे में मुख्य तौर पर चार श्रम कानून जिसमें न्यूनतम मज़दूरी कानून, मज़दूरी भुगतान कानून, बोनस भुगतान कानून और समान पारितोषिक कानून को समाहित किया गया है।

केंद्र सरकार देश में सक्रिय 44 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार संहिताओं के द्वारा प्रतिस्थापित करने की दिशा में कई बड़े सुधार प्रस्तावित किए हैं। ये चार संहिताएँ निम्नलिखित हैं- मज़दूरी संहिता सामाजिक सुरक्षा संहिता औद्योगिक संबंध संहिता व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code ) गौरतलब है कि संसद द्वारा ‘मज़दूरी संहिता विधेयक’ (Code on Wages Act 2019) को अगस्त 2019 में पारित कर दिया गया था वर्तमान में देश में लागू न्यूनतम वेतन कानून और वेतन भुगतान कानून उन श्रमिकों पर लागू होते हैं जो मज़दूरी सीमा के नीचे आते हैं। अर्थात अब तक कानून के तहत 24 हजार रुपये पाने वाले कर्मचारियों की ही ज़रूरी कटौती और वेतन देने की समय सीमा तय थी, नए कानून के तहत सभी कर्मचारियों को ये सुविधा मिलेगी इस मसौदे में प्रस्तावित बदलावों के माध्यम से देश के लगभग 50 करोड़ कामगारों को लाभ प्राप्त होगा।

🦚मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट क्या है?

भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने एवं देश की इकनॉमी के संवर्धन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितम्बर 2014 को मेक इन इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य यह था कि भारत को महत्त्वपूर्ण निवेश एवं निर्माण, संरचना तथा अभिनव प्रयोगों के वैश्विक केंद्र के रुप में बदला जा सके. मेक इन इंडिया योजना में घरेलू और विदेशी, दोनों निवेशकों को एक अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने का वादा किया गया है. पीएम मोदी की सोच यह थी कि भारत की 125 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत को एक मजबूत निर्माण केंद्र के रूप में परिवर्तित करके रोजगार के अवसर पैदा किये जा सकेंगे.

मेक इन इंडिया के चार स्तंभ क्या हैं?

  1. नई प्रक्रिया
  2. नई अवसंरचना
  3. नए क्षेत्र
  4. नई सोच

मेक इन इंडिया के उद्देश्य क्या हैं?

  1. मध्‍यावधि की तुलना में निर्माण क्षेत्र में 12-14 फीसदी सालाना वृद्धि हासिल करना.
  2. देश के सकल घरेलू उत्‍पाद में निर्माण क्षेत्र की हिस्‍सेदारी साल 2022 तक बढ़ाकर 25 फीसदी करना.
  3. निर्माण क्षेत्र में साल 2022 तक 10 करोड़ अतिरिक्‍त रोजगार का सृजन
  4. ग्रामीण प्रवासियों और शहरी गरीब लोगों में समग्र विकास के लिए समुचित कौशल का निर्माण करना.
  5. घरेलू मूल्‍य संवर्द्धन और निर्माण से संबंधित तकनीकी ज्ञान में वृद्धि
  6. भारत के निर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्‍पर्धा में वृद्धि
  7. भारत में पर्यावरण संरक्षण के हिसाब से स्थिर विकास सुनिश्चित करना

सरकार की मेक इन इंडिया पहल में विदेशी कंपनियों का बढ़ता भरोसा आंकड़ों से भी स्पष्ट हो रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष (2019-20) में 13 फीसद की वृद्धि के साथ देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) 49.97 अरब डॉलर (करीब 3.75 लाख करोड़ रुपये) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2018-19 में 44.36 अरब डॉलर का एफडीआइ आया था। री-इन्वेस्टेड अर्निंग और अन्य कैपिटल समेत 2019-20 में कुल एफडीआइ साल भर पहले के 62 अरब डॉलर से बढ़कर 73.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी 18 फीसद की रही है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2015-16 के बाद से एफडीआइ में यह सर्वाधिक तेजी से हुई बढ़ोतरी है। 2015-16 में एफडीआइ में 35 फीसद का उछाल आया था। 2000-01 में जब इस संबंध में पहली बार डाटा जारी किया गया था, तब से यह देश में आया सबसे ज्यादा विदेशी निवेश है। आंकड़े जारी होने के बाद वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया, ‘मेक इन इंडिया में भरोसे का एक और प्रमाण देते हुए 2019-20 में देश में एफडीआइ 18 फीसद बढ़कर 73 अरब डॉलर पर पहुंच गया। 2013-14 की तुलना में कुल एफडीआइ दोगुना हो गया है। उस समय यह मात्र 36 अरब डॉलर था। इस निवेश से रोजगार सृजन होगा।’

😀DakPay

डाक विभाग (post office) और भारतीय डाक भुगतान बैंक (IPBB) के उपभोक्ता अब DakPay के जरिये बैंकिंग सेवाओं का परिचालन कर सकते हैं. डाकपे देशभर में भारतीय डाक और आईपीपीबी द्वारा डाक नेटवर्क के जरिये प्रदान की जाने वाली डिजिटल वित्त और बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराएगा. डाकपे कई तरह की सेवाओं यानी पैसा भेजने, क्यूआर कोड को स्कैन करने सेवाओं के लिए तथा दुकानों पर डिजिटल तरीके से भुगतान करने में मदद करेगा. इसके अलावा यह ग्राहकों को देश में किसी भी बैंक के साथ इंटरऑपरेबल बैंकिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा.

🧞‍♂️आईटी हार्डवेयर के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम (पीएलआई)

  • केंद्र सरकार ने 10 अन्य क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण निवेश प्रोत्साहित करने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का अनावरण किया है। 10 क्षेत्रों में शामिल हैं: खाद्य प्रसंस्करण, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, विशेष इस्पात, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक, सौर फोटो-वोल्टाइक मॉड्यूल और सफेद सामान, जैसे एयर कंडीशनर और एलईडी।
  • यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पात्र कंपनियों को भारत में निर्मित लक्षित खंड के तहत वस्तुओं की शुद्ध वृद्धिशील बिक्री (वित्त वर्ष 2019-20 के आधार वर्ष से अधिक) पर 4% से 2% / 1% का प्रोत्साहन प्रदान करती है.
  • लक्षित खंडों में लैपटॉप, टैबलेट, ऑल-इन-वन पर्सनल कंप्यूटर (PCs) और सर्वर शामिल हैं.
  • इससे कुल 61 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का उत्पादन हो सकता है.

🤯अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना

‘कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम’ (Employees’ State Insurance Corporation- ESIC) की 182वीं बैठक के दौरान ‘अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना’ (Atal Bimit Vyakti Kalyan Yojana- ABVKY) के पात्रता मानदंडों में महत्त्वपूर्ण बदलाव किये गए हैं।

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना का प्रारंभ 1 जुलाई, 2018 को किया गया था। योजना के तहत बीमित व्यक्तियों को बेरोज़गारी की दशा में नकद मुआवजा प्रदान किया जाता है। योजना का कार्यान्वयन ‘कर्मचारी राज्‍य बीमा निगम’ द्वारा किया जा रहा है। योजना को प्रारंभ में दो वर्ष के लिये पायलट आधार पर शुरू किया गया था।

अधिकतम 90 दिनों की बेरोज़गारी के लिये, योजना के तहत भुगतान राशि को औसत मज़दूरी के 25% से बढ़ाकर 50% तक बढ़ा दिया गया है। पहले बेरोज़गारी के 90 दिनों के बाद राहत भुगतान किये जाने के बजाय अब 30 दिनों के बाद भुगतान किया जाएगा। बीमित व्यक्ति अंतिम नियोक्ता द्वारा अग्रेषित किये जा रहे दावे के बजाय सीधे ESIC शाखा कार्यालय में दावा प्रस्तुत कर सकता है और भुगतान सीधे बीमित व्यक्ति के बैंक खाते में किया जाएगा। बीमित व्यक्ति को उसकी बेरोज़गारी से पूर्व कम-से-कम दो वर्ष की अवधि के लिये बीमा योग्य रोज़गार में होना चाहिये तथा उसका बेरोज़गारी से ठीक पहले की योगदान अवधि में 78 दिनों से कम का योगदान नहीं होना चाहिये। बेरोज़गारी से 2 वर्ष पहले की शेष तीन योगदान अवधियों में से एक में न्यूनतम 78 दिनों का योगदान होना चाहिये।

🌾कृषि अवसंरचना निधि (AIF)

  • 8 जुलाई, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ स्वीकृति दी. इस नई योजना को ‘एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ (कृषि अवसंरचना निधि) नाम दिया गया है.
  • एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड योजना की घोषणा केंद्रीय वित्त मंत्री ने 20 लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के हिस्से के रूप में की थी. इस योजना के अंतर्गत, देश में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के जरिये कृषि क्षेत्र जैसे किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्टार्टअपों, प्राथमिक कृषि साख समितियों, कृषि-उद्यमियों को ऋण के रूप में 1 लाख करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी.
  • योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2029-30 तक 10 वर्षों के लिए है.
  • एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के प्रबंधन और निगरानी के लिए प्रबंधन सूचना प्रणाली (MIS) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा.
  • इस योजना के अंतर्गत 1 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत और आवंटित किए जाएंगे, जिनमें से चालू 2020-21 वित्तीय वर्ष में 10,000 करोड़ रुपये और अगले तीन आगामी वित्तीय वर्ष में 30,000 करोड़ रुपये स्वीकृत और वितरित किए जाएंगे.
  • योजना के अंतर्गत निर्गत किए गए ऋणों पर सब्सिडाइज्ड ब्याज दर होगी. ब्याज की दर 3 प्रतिशत प्रति वर्ष होगी. 3 प्रतिशत की ब्याज दर 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए लागू होगी.
  • ऋण की अदायगी के लिए अधिस्थगन न्यूनतम 6 महीने से लेकर अधिकतम 2 वर्ष तक होगा.
  • माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिएक्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट(CGTMSE) पात्र उधारकर्ताओं को क्रेडिट गारंटी कवरेज प्रदान करेगा. क्रेडिट गारंटी कवरेज 2 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए प्रदान की जायेगी.

नवीनतम संशोधन

  1. योजना के तहत, पात्रता को विस्तारित करते हुए इसमें, राज्य एजेंसियों / APMCs, राष्ट्रीय और राज्य सहकारी समितियों के परिसंघों, किसान उत्पादक संगठनों के परिसंघों (FPOs) तथा स्वयं सहायता समूहों के परिसंघों (SHGs) को भी शामिल किया गया है.
  2. कृषि उपज बाजार समितियों (Agricultural Produce Market Committee – APMC) के लिए एक ही बाजार आहाता (premises) के अंदर विभिन्न अवसंरचनाओं जैसे कोल्ड स्टोरेज, सार्टिंग,ग्रेडिंग और परख इकाइयों, कोठों (साइलो) आदि की प्रत्येक परियोजना के लिए 2 करोड़ रुपये तक के ऋण पर ब्याज सहायता दी जाएगी.
  3. कृषि और किसान कल्याण मंत्री के लिए, योजना में किसी लाभार्थी को शामिल करने या हटाने के संबंध में आवश्यक बदलाव करने की शक्ति प्रदान दी गई है.
  4. वित्तीय सुविधा की अवधि 4 साल से बढ़ाकर 6 साल अर्थात् 2025-26 तक कर दी गई है और इस योजना की कुल अवधि 10 से बढ़ाकर 13 अर्थात् 2032-33 तक कर दी गई है.

🏛राष्ट्रीय लघु बचत कोष (National Small Savings Fund) 

भारत में राष्ट्रीय लघु बचत कोष (NSSF) की स्थापना 1999 में की गई थी। राष्ट्रीय लघु बचत कोष (निगरानी और निवेश) नियम, 2001 के तहत वित्त मंत्रालय (आर्थिक मामलों का विभाग) इस कोष को प्रशासित करता है। राष्ट्रीय लघु बचत कोष का उद्देश्य भारत के संचित निधि से छोटी बचत लेन-देन को हटाना और पारदर्शी तथा आत्मनिर्भर तरीके से उनका संचालन सुनिश्चित करना है। राष्ट्रीय लघु बचत कोष सार्वजनिक खाते के रूप में संचालित होता है, इसलिये इसका लेन-देन सीधे केंद्र के वित्तीय घाटे को प्रभावित नहीं करता है। लघु बचत को तीन प्रमुख भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है- ♦ डाकघर जमा ♦ बचत पत्र ♦ सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ।

🛹GeM ने विक्रेताओं के लिए “मूल देश के बारे में जानकारी” देना किया अनिवार्य

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत एक स्पेशल पर्पस व्हीकल, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) द्वारा विक्रेताओं के लिए “उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी” देना अनिवार्य कर दिया गया है। विक्रेताओं को सलाह दी गई है कि वे GeM पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करते समय “उत्पत्ति के देश के बारे में जानकारी” का उल्लेख अवश्य करें। हालंकि उन विक्रेताओं, जिन्होंने GeM पर इस नए फीचर के लॉन्च से पहले ही अपने उत्पादों को पंजीकृत किया है, उन्हें कंट्री ऑफ़ ओरिजिन के बारे में जानकारी अपडेट करने के लिए नियमित रूप से याद दिलाया जाएगा। साथ ही उन्हें ये चेतावनी भी जाएगी कि यदि वे इसे अपडेट करने में विफल रहे तो उनके उत्पादों को GeM से हटा दिया जाएगा।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) ने यह कदम ‘मेक इंन इंडिया’ तथा ‘आत्म निर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के प्रमुख उद्देश्य के लिए उठाया है। इसके अलावा, GeM द्वारा पोर्टल को मेक इन इंडिया फिल्टर के सक्षम बना दिया गया है। 

🎨आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक,2020

लोकसभा ने अनाज, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाने के लिये आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया। लोकसभा द्वारा पारित यह विधेयक 5 जून 2020 को जारी किये गए अध्यादेशों का स्थान लेगा और लोकसभा द्वारा इसे 15 सितंबर,  2020 को पारित किया गया था। आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 का उद्देश्य निजी निवेशकों के व्यावसायिक कार्यों में अत्यधिक विनियामक हस्तक्षेप की आशंकाओं को समाप्त करना है। यद्यपि भारत में अधिकतर कृषि वस्तुओं के उत्पादन व्यापक पैमाने पर इस प्रकार की बर्बादी को रोका जा सकता है। इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने विनियामक वातावरण को उदार बनाने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की जाए। संशोधन विधेयक में यह व्यवस्था की गई है कि युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि और प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियों में इन कृषि‍ उपजों की कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है।

🎁व्यापारिक वस्तु निर्यात योजना (MIES)

  • MEIS को विदेशी व्यापार नीति: 2015-20 के अंतर्गत 1 अप्रैल, 2015 को प्रारम्भ किया गया था.
  • इसका उद्देश्य MSME क्षेत्र द्वारा उत्पादित/निर्मित उत्पादों सहित भारत में उत्पादित/निर्मित वस्तुओं/उत्पादों के निर्यात में शामिल अवसंरचनात्मक अक्षमताओं एवं संबंधित लागतों की भरपाई करना है.
  • MEIS के अंतर्गत, भारत सरकार उत्पाद एवं देश के आधार पर शुल्क लाभ प्रदान करती है.
  • इस योजना के तहत पुरस्कार वास्तविक रूप से मुक्त बोर्ड मूल्य (2%, 3% एवं 5%) के प्रतिशत मूल्य के रूप में देय हैं और मूल सीमा शुल्क सहित कई शुल्कों के भुगतान के लिये ‘MEIS ड्यूटी क्रेडिट पत्रक’ (MEIS Duty Credit Scrip) को स्थानांतरित या उपयोग किया जा सकता है.
  • MEIS ने विदेश व्यापार नीति 2009-14 में विद्यमान अन्य पाँच समान प्रोत्साहन योजनाओं को प्रतिस्थापित किया है:-
    1. फोकस प्रोडक्ट स्कीम (FPS)
    2. फोकस मार्केट स्कीम (FMS)
    3. मार्केट लिंक्ड फोकस मार्केट स्कीम (MLFMS)
    4. अवसंरचना प्रोत्साहन योजना
    5. विशेष कृषि ग्रामीण योजना (VKGUY)

🔊आयात निर्यात कोड (IMPORT EXPORT CODE- IEC)

  • यह कोड केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Union Ministry of Commerce and Industry) के विदेश व्यापार महानिदेशक (Director General of Foreign Trade) द्वारा निर्गत किया जाता है.
  • IEC एक 10-अंकीय कोड है जिसकी वैधता जीवन भर की है. 
  • मुख्य रूप से आयातक, आयात निर्यात कोड के बिना माल आयात नहीं कर सकते हैं और इसी तरह, निर्यातक व्यापारी IEC के बिना निर्यात योजना आदि के लिये DGFT से लाभ नहीं प्राप्त कर सकते हैं.

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