[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Eco-Bio-Tech GS Paper 3/Part 9

Sansar LochanGS Paper 3, Sansar Manthan8 Comments

सामान्य अध्ययन पेपर – 3

यूरेनियम संदूषण से आप क्या समझते हैं? यह भारत के लिए चिंता का विषय क्यों बना हुआ है, चर्चा करें. (250 words)

  • अपने उत्तर में अंडर-लाइन करना है  = Green
  • आपके उत्तर को दूसरों से अलग और यूनिक बनाएगा = Yellow

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 3 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप में लिया गया है –

संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

सवाल का मूलतत्त्व

यूरेनियम संदूषण की परिभाषा मत लिखिए. इशारों-इशारों में बताने की कला सीखिए. वो ज़माना गया जब हम स्कूल और कॉलेज में …..ऐसा ऐसा ऐसा…..को…..यूरेनियम संदूषण कहते हैं. ये काफी बचकाना लगता है. आप लोगों के Assignment में ये सब दिखने को प्रायः मिलता है जो परीक्षक को बिल्कुल पसंद नहीं आता है.

पहले बताइए कि क्या है यह यूरेनियम संदूषण (uranium contamination)…उसके बाद सिर्फ भारत के संदर्भ में इससे जुड़ी समस्याओं का वर्णन करें. वैश्विक स्तर पर इससे जुड़ी समस्याओं को बताने कि कतई आवश्यकता नहीं है. आप लोग प्रायः जो पूछा गया है वह नहीं लिखते हैं. प्रश्न में साफ़-साफ़ लिखा है “भारत के लिए” ….पर आप लोग इंग्लैंड और कैलिफ़ोर्निया की बात करने लगते हैं.

आप भारत के राज्यों के बारे में लिखे. कहाँ-कहाँ (राज्य) यूरेनियम संदूषण की समस्या देखी गई. इसलिए कहता हूँ कि Sansar DCA मूलतः हमने मेंस परीक्षा के लिए ही बनाया है. इसलिए वहाँ इन सब चीजों का जिक्र अक्सर किया जाता है जो आप अपने उत्तर में डाल सकते हैं. मैंने भी Sansar DCA से ही उत्तर लिखा है > Sansar 10 June, 2018

उत्तर :-

यूरेनियम का प्राथमिक स्रोत भूगर्भिक है अर्थात् यूरेनियम का मुख्य स्रोत ग्रेनाइट है, जो हिमालयी क्षेत्र में सामान्य रूप से उपलब्ध है. संभवतः वर्षों से, यूरेनियम का रिसाव धीरे-धीरे जल में हो गया. इस प्रदूषण का मुख्य कारण प्राकृतिक है परन्तु इसमें मानव का भी योगदान इस प्रकार से है कि उसके द्वारा कृषि सिंचाई के लिए भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण भूगर्भ जल का स्तर नीचे चला गया है और नाइट्रेट के प्रयोग के कारण इसमें नाइट्रेट की मात्रा बढ़ गयी है. जल के यूरेनियम प्रदूषण का प्राकृतिक कारण भूजल के नीचे स्थित चट्टानों में यूरेनियम के कण का होना है जो पानी में घुलते रहते हैं.

WHO के मानदंड के अनुसार पानी में यूरेनियम की मात्रा हद से हद 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए. वर्तमान में भारतीय मानक पेयजल ब्यूरो ने अभी तक यूरेनियम को प्रदूषक की मान्यता नहीं दी है.

भारत के लिए चिंता का विषय

  • हाल ही में शोधकर्ताओं द्वारा किये गये एक नए अध्ययन में भारत के 16 राज्यों में भूमिगत जल के जलभृत (aquifers) में अत्यधिक यूरेनियम संदूषण (uranium contamination) पाया गया है. प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के द्वारा निर्धारित स्तर से ऊपर है.
  • 1990 के दशक के आरम्भ से पंजाब में भूमिगत जल में यूरेनियम संदूषण एक निरंतर समस्या बना हुआ है. पंजाब के मालवा क्षेत्र में तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले के दहन से उत्पन्न फ्लाई ऐश को मृदा और भूमिगत जल प्रदूषण का संभावित कारण माना जाता है, जिसमें यूरेनियम और राख का स्तर उच्च होता है.
  • राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और गुजरात के कुछ भागों में यूरेनियम स्तर उच्च पाया गया.
  • इन परिणामों से यह स्पष्ट है कि राजस्थान और गुजरात में परीक्षण किये गए अधिकांश कुओं में WHO द्वारा अनुशंसित 30 माइक्रोग्राम/लीटर की सीमा से अधिक यूरेनियम विद्यमान था. राजस्थान के कुछ कुओं (लगभग 10) में यूरेनियम का स्तर लगभग 300µg/L पाया गया.
  • उत्तर पश्चिमी भारत के अन्य जिलों एवं दक्षिणी भारत में विशेष रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी संदूषण का स्तर उच्च पाया गया.

भारतीय मानक ब्यूरो के पेयजल विनिर्देशों में यूरेनियम के लिए किसी प्रकार की सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है जो कि भूजल स्तर की गुणवत्ता की निगरानी को असंभव बनाता है. पेयजल में यूरेनियम न केवल रेडियो सक्रियता बल्कि यह मुख्य रूप से रासायनिक विषाक्तता, किडनी की समस्या आदि चिंता का विषय है. भूजल के स्तर को ऊँचा करने और नाइट्रेट के प्रयोग को घटाने से यूरेनियम प्रदूषण में कमी आ सकती है. इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है.

क्रिप्टोकरेंसी के विषय में आप क्या जानते हैं? इसके पक्ष और इसके विरुद्ध तर्क प्रस्तुत करें और यह बताएँ इस मुद्रा को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर देना कहाँ तक उचित है? (250 words)

  • अपने उत्तर में अंडर-लाइन करना है  = Green
  • आपके उत्तर को दूसरों से अलग और यूनिक बनाएगा = Yellow

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 3 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप में लिया गया है –

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – विकास एवं अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव.

सवाल का मूलतत्त्व

प्रश्न जटिल है और लम्बा भी है. मैंने तो उत्तर काफी बड़ा लिख दिया है पर आपको परीक्षा में इतनी जगह नहीं मिलेगी. आप नीचे दिए गए उत्तर से महत्त्वपूर्ण बिंदु को छाँटकर अपना उत्तर तैयार कर लें. क्रिप्टोकरेंसी के विषय में आम लोगों को जानकारी नहीं रहती है. पर याद रहे आप एक आम आदमी नहीं है. आप एक कठिन प्रकृति की परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं इसलिए आपको हर न्यूज़ और हर विषय के बारे में जानकारी रखनी चाहिए.

इस प्रश्न को पक्ष और विपक्ष वाला फंडा और भी अधिक जटिल बना देता है. फिर आपको यह भी बताना है कि इस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा देना कहाँ तक उचित है…इसलिए यह प्रश्न आपको परेशान कर सकता है. चलिए देखते हैं.

उत्तर :-

क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल मुद्रा का एक प्रकार है जो सुरक्षा उपायों और जालसाजी को रोकने के उपायों के लिए क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करती है. यह सामान्यतः किसी भी केन्द्रीय प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं की जाती है, अतः यह सरकारी हस्तक्षेप अथवा परिचालन से मुक्त होती है. प्रत्येक क्रिप्टोकरेंसी पर ब्लॉकचैन नामक डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (distributed ledger technology) के माध्यम से नियंत्रण किया जाता है. बिटकॉइन, इथेरियम, रिप्पल इत्यादि इसके उदाहरण हैं.

विपक्ष में तर्क

वित्तीय स्थिरता : यदि इसका प्रचालन व्यापक स्तर पर होने लगेगा तो वित्तीय स्थिरता के समक्ष खतरा उत्पन्न हो सकता है क्योंकि उपभोक्ता इस करेंसी का उपयोग बोली लगाने या सट्टेबाजी में कर सकते हैं.

निवेशक सुरक्षा : चूँकि क्रिप्टोकरेंसी आभासी मुद्रा हैं और इनकी कोई सेंट्रल रिपॉजिटरी नहीं है, अतः क्रिप्टोकरेंसी के स्वामित्वता का अभाव होने के चलते इसे कहीं भी कभी भी किसी के द्वारा भी कंप्यूटर क्रैश द्वारा नष्ट किया जा सकता है.

कीमतों में अस्थिरता : उदाहरण के लिए, वर्तमान में बिटकॉइन की कीमत $20,000 है जबकि पिछले महीने इसका मूल्य $7,000 था अर्थात् इसके मूल्य में एक महीने के अन्दर लगभग 2/3 की कमी हुई है.

लचर सुरक्षा : हैकिंग, पासवर्ड चोरी होने, मैलवेयर हमलों आदि जैसे सुरक्षा सम्बन्धी जोखिम इससे सदैव जुड़े होते हैं. क्रिप्टोजैकिंग साइबर हमले का एक रूप है जिसमें हैकर अपने स्वामित्व में क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग के लिए एक टारगेट की प्रोसेसिंग पॉवर को हाइजैक करता है. वर्ष 2017 की तुलना में इस वर्ष की पहली छमाही में एक्सचेंजों से क्रिप्टोकरेंसी की चोरी तीन गुणा अधिक हुई है.

अवैध गतिविधियाँ : इनका उपयोग मनी लांड्रिंग, टैक्स अपवंचन इत्यादि के लिए किया जा सकता है. वास्तव में, अज्ञात प्रकृति और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन में केन्द्रीय नियामक के अभाव के कारण विभिन्न गैरकानूनी गतिविधियों जैसे कि पोर्नोग्राफी, ड्रग डीलिंग, गन सप्लाई आदि के लिए फंडिंग को बढ़ावा मिल सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण : चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने भी नियामकीय कड़ी कार्यवाही प्रारम्भ कर दी है.

पक्ष में तर्क

  • भौतिक मुद्रा की तुलना में क्रिप्टो करेंसी की जालसाजी करना कठिन है.
  • लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं : सामान्यतः क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों के लिए लेन-देन शुल्क नहीं होते हैं क्योंकि माइन करने वाले को नेटवर्क के जरिये राशि प्राप्त हो जाती है.
  • ग्राहकों के लिए लाभ : क्रिप्टोकरेंसी का प्रचलन, सामान्य लोगों को बाजार में विद्यमान विभिन्न मुद्राओं के बीच चयन का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है. यह लोगों को किसी उद्देश्य के लिए फण्ड एकत्रित करने में भी सहायता कर सकता है.

2018-19 बजट भाषण में भारत के विक्त मंत्री ने कहा कि क्रिप्टो मुद्राएँ कानूनी निविदा नहीं हैं. कालांतर में यह खबर सामने आने लगी कि भारत सरकार इस मुद्रा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने जा रही है. डिजिटलीकरण के इस युग में, क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करना कठिन है. उदाहरण के लिए, क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों ने मुद्रा-से-मुद्रा व्यापार प्लेटफार्म (currency to currency trading platforms) के माध्यम से प्रतिबंध को अप्रभावित करने का मार्ग तलाश लिया है, जो वास्तव में नियामकों को बाईपास करता है. इसलिए, यह महत्त्वपूर्ण है लगाने के बजाए क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित किया जाना चाहिए.

इसके अतिरिक्त, इस सम्बन्ध में कुछ अन्य कदम उठाये जा सकते हैं –

  • धोखाधड़ी और डाटा लीक के विरुद्ध प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों का उन्नयन
  • असमाजिक तत्त्वों, आतंकवादियों और शत्रु देशों द्वारा इस नई मुद्रा के दुरुपयोग किये जाने के विरुद्ध सुरक्षा के लिए वैश्विक निगरानी व्यवस्था की स्थापना करना.
  • भविष्य में इन मुद्राओं के परिचालन के आरम्भ करने के लिए उपयोगकर्ताओं को शिक्षित करना और कर-अधिकारीयों के साथ इंटरफेस को बढ़ाना.
  • इस क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देना, उदहारण के लिए – IBM, US – आधारित वित्तीय सेवा प्रदाता के साथ साझीदारी में अमेरिकी डॉलर समर्थित एक नई क्रिप्टो करेंसी का समर्थन कर रहा है जो इस क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा प्रदान करता है.

बिटकिन पर हमने पहले भी एक पोस्ट लिखा है > Bitcoin Info in Hindi

Reminder : Last Date of Sansar Assignment SMA Submission is 1/10/2018. You can download last assignment from this link >

“संसार मंथन” कॉलम का ध्येय है आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में सवालों के उत्तर किस प्रकार लिखे जाएँ, उससे अवगत कराना. इस कॉलम के सारे आर्टिकल को इस पेज में संकलित किया जा रहा है >> Sansar Manthan

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8 Comments on “[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Eco-Bio-Tech GS Paper 3/Part 9”

  1. Hlo me new hu aap logo ke beech kya aap log gution likhkar upload karte he mains ager karte he to without answer ke question practice ke liye upload hote he kya is side par

  2. क्रिप्टोकरेंसी पर ये एक बेजोड़ लेख रहा है अभी तक मेरे हिसाब से। रही बात यूरेनियम संदूषण की तो शिव सर मैं आपको सूचित करना चाहूंगा कि आपको 250 शब्दों में ही अपनी बात कहनी है।

  3. यूरेनियम संदूषण वाले प्रशन में पॉइंट ३ ४ ५ को और अच्छे से लिखा जा सकता है | इसमें ऐसा लग रहा है की पॉइंट को ज़बरदस्ती बढाने की कोसिस है… खैर धन्यवाद सर

    1. Shiv bhaiya ji, galatiya nikalna asaan hai. Yadi apne comment me sahi valid points bhi de diya hota to hum logo ko bhi fayda ho jata. anguli uthana asan hai, par hath chalana muskil hai

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