ऋण वसूली न्यायाधिकरण – DRT क्या है? – Debts Recovery Tribunals Explained in Hindi

Sansar LochanFinance8 Comments

Debts Recovery Tribunals Explained in Hindi

सरकार ने निर्णय किया है कि विवाद से विश्वास विधेयक, 2020 (The Direct Tax Vivaad se Vishwas Bill, 2020) में उन मुकदमों को भी सम्मिलित किया जाएगा ऋण वसूली न्यायाधिकरणों (debt recovery tribunals – DRTs)  में चल रहे हैं.

ऋण वसूली न्यायाधिकरण – DRT क्या है?

  • ऋण वसूली न्यायाधिकरणों की स्थापना बैंकों और अन्य वित्त संस्थानों के ग्राहकों से ऋण की वसूली करने के लिए की गई थी. इन न्यायाधिकरणों की स्थापना बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं को देय ऋण वसूली अधिनियम, 1993 (Recovery of Debts due to Banks and Financial Institutions Act – RDBBFI,1993) के अंतर्गत हुई थी.
  • DRT के द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (Debts Recovery Appellate Tribunal – DRATके पास की जा सकती है.
  • DRT का अध्यक्ष केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक ऐसा अधिकारी होता है जो जिला जज बनने की योग्यता रखता हो.
  • इसका कार्यकाल 5 वर्ष अथवा 62 वर्ष की उम्र तक होता है.
  • उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के अतिरिक्त देश का कोई भी न्यायालय इस न्यायाधिकरण द्वारा विचारित मामले पर क्षेत्राधिकार नहीं रखता है.

ऋण वसूली न्यायाधिकरण (Debts Recovery Tribunal) की शक्तियां एवं कार्य

  • DRT का काम 1993 के RDDBFI, 1993 अधनियम (Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions) तथा साथ ही SARFAESI अधिनियम, 2002 (Securitization and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interests) के प्रावधानों को लागू करना है.
  • DRT को व्यापक आदेश पारित करने की पूरी शक्ति मिली हुई है और यह पूर्ण न्याय के लिए व्यवहार प्रक्रिया संहिता से भी आगे जा सकता है. यह क्रॉस सूट एवं विरोधी दावों की भी सुनवाई कर सकता है और सेट ऑफ़ की अनुमति भी दे सकता है.
  • परन्तु DRT (Debts Recovery Tribunal) ऋण दाताओं की ओर से दिए गये क्षति के दावों पर विचार नहीं कर सकता है. साथ ही यह ऋणदाताओं के द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवाओं की कमियों अथवा संविदा उल्लंघन अथवा आपराधिक उपेक्षा से सम्बंधित मामलों को हाथ में नहीं ले सकता है. इसके अतिरिक्त ऋण वसूली न्यायाधिकरण न तो लंबित सूची के आगे जा सकता है और न ही अपने क्षेत्राधिकार के बाहर जाकर कोई मन्तव्य व्यक्त कर सकता है.
  • Debts Recovery Tribunal (DRT) अपने कार्यों के निष्पादन के लिए रिसीवर और आयुक्त नियुक्त कर सकता है तथा एकपक्षीय एवं अंतरिम आदेश पारित कर सकता है. साथ ही उसे अपने निर्णयों की समीक्षा करने का तथा ट्रिब्यूनल के रिकवरी अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपील सुनने का भी अधिकार है.

डीआरटी में कैसे मामले विचारित होते हैं?

DRT  में ऋण वसूली के लिए बैंकों आदि के द्वारा आवेदन दिया जाता है. 2018 में केंद्र सरकार द्वारा ऋण वसूली न्यायाधिकरणों (Debts Recovery Tribunals – DRT) के पास ऋण वसूली के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थाओं द्वारा जमा किये गये आवेदन हेतु वित्त की सीमा दस लाख रु. से बढ़ाकर बीस लाख रु. कर दी गई.

दरअसल, देश भर के 39 ऋण वसूली न्यायाधिकरणों के पास लंबित मामलों की संख्या घटाने के लिए यह कदम उठाया गया था. यदि अब बाकी रह गये कर्ज की राशि 20 लाख रु. से कम है तो कोई बैंक अथवा वित्तीय संस्था DRT में मामला दर्ज नहीं कर पायेगा.

Tags : What are DRTs? Powers and functions, debt recovery tribunals in Hindi. डीआरटी के बारे में जानें.

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8 Comments on “ऋण वसूली न्यायाधिकरण – DRT क्या है? – Debts Recovery Tribunals Explained in Hindi”

  1. मेरे एक केस में DRT NE रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर दिया है OR JIS ME प्रॉपर्टी uska kuch bhi nahi kiya था लेकिन mere vakil ki absent ke Karan mere case kharaij kar diya क्योंकि मेरा वकील उपस्थित नहीं हुआ इस केस में में क्या वापस kuch करो कुछ अपील कर सकता हूं

  2. सर मैंने अपनी एक प्रॉपर्टी बेची थी जिसमें चेक नंबर खुले हुए हैं जिसमें एक चेक पास हो गया है बैंक की कमी से अब बैंक मुझ पर पैसे जमा करने के लिए दबाव बना रही है पर मेरे पास पैसा है नहीं मुझे कैसे राहत दी जाए और बाकी चेकों पर मेरा 138 का केस चल रहा है

  3. मैंने अपने एक मिलने वाले को उसके पहले से चल रहे ऑडी लोन जिस पर भी किसी तीसरे की प्रॉपर्टी बैंक में जमा थी को मैंने अपनी प्रॉपर्टी रखकर बैंक को गारंटी दे दी बैंक ने पुरानी प्रॉपर्टी को रिलीज कर दिया। कोरोना में मिलने वाले की मृत्यु हो गई, बैंक ने मुझे 13(2) का नोटिस दिया उसके बाद प्रॉपर्टी पर नोटिस चस्पा कर दिया और अखबार में भी दे दिया, प्रॉपर्टी अभी मेरे कब्जे में है, स्टे के लिए डी आर टी ऑफिस में फाइल सबमिट की है।
    जिसकी मृत्यु हुई है उसकी कोई प्रॉपर्टी बैंक में नहीं लगी है, अब पता चला कि उसी बैंक में उस लोन धारी के कयी अकाउंट नंबर थे सभी में डिफाल्टर है लोन देते समय उसके अकाउंट में मात्र 100 थे फिर भी बैंक ने अकाउंट होल्डर की कोई प्रोपर्टी ना होते हुए भी बैंक ने केवल गारंटर के ऊपर ही उसको एक करोड़ से अधिक का लोन कर दिया। और सेम डे उस सभी अमाउंट को बैंक ने अपने डायरेक्टर के अकाउंट में ट्रांसफर कर लिया,
    अकाउंट होल्डर ने 1.20 करोड़ के लोन में से बैंक को करीब 46 लाख रुपए जमा कराए हैं, बैंक ने अकाउंट होल्डर के मरने के बाद भी उसके अकाउंट में कुछ लाख रुपए जमा कराए हैं ऐसा क्यों,
    इसमें क्या हो सकता है, कृपया सलाह दें

  4. मेरे द्वारा एक फ्लैट खरीदा गया और उस पर मैंने बैंक से ऋण लिया लेकिन 6 साल बाद पता चला कि बिल्डर ने उक्त फ्लैट जिस जमीन पर बना है उसको अन्य बैंक को गिरवी रखा है और ऋण राशि भी नही चुकाई ।
    हम क्या कर सकते है?

  5. मुझे डी.आर.टी.की परीक्षा पास होनी है इसलिये मुझे क्या करना होगा,। मै सहकार क्षेत्रमें १९९७ से काम कर रहा हूं, मुझे वसुली का अनुभव है, ।

    1. ऋण वसूली अधिनियम की पूर्ण जानकारी देने के लिए संसार लोचन टीम को धन्यवाद।

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