15वें वित्त आयोग का राजस्व के वितरण से संबंधित प्रतिवेदन

Sansar LochanFinance1 Comment

Recommendations of the 15th Finance Commission

पिछले दिनों संसद में 15वें वित्त आयोग का प्रतिवेदन और साथ ही की गई कार्रवाई से संबंधित प्रतिवेदन (Action Taken Report) उपस्थापित किया गया. विदित हो कि इस आयोग के अध्यक्ष एन.के. सिंह ने यह प्रतिवेदन दिसम्बर, 2019 में राष्ट्रपति को समर्पित किया था.

राजस्व का वितरण किस प्रकार हुआ है?

  • किस राज्य को करों का कितना अंश दिया जाएगा इसके लिए वित्त आयोग ने 2011 की जनसंख्या के साथ-साथ वन क्षेत्र, कराधान के प्रयास, राज्य के क्षेत्रफल और जनसांख्यिक प्रदर्शन को आधार बनाया है.
  • राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए किये गये प्रयासों का पुरस्कार देने के निमित्त आयोग ने एक मानदंड बनाया है. इस मानदंड में 1971 में राज्य की जनसंख्या तथा 2011 में इसकी प्रजनन दर का अनुपात देखा जाता है और 12.5% की वेटेज दी जाती है.
  • करों को बाँटने के फोर्मुले में राज्य के कुल क्षेत्रफल, वनाच्छादन के क्षेत्रफल और “आय की दूरी” जैसे कारकों का वित्त आयोग द्वारा प्रयोग किया गया है.

वित्त आयोग के मुख्य सुझाव

  • वित्त आयोग ने लम्वत वितरण (vertical devolution) अर्थात् केंद्र और राज्य के बीच कर राजस्व का वितरण 42% से घटाकर 41% कर दिया गया है.
  • आयोग ने कहा है कि वह चाहता है कि एक व्ययगत नहीं होने वाला रक्षा व्यय कोष (non-lapsable fund) बनाने के लिए विशेषज्ञ समूह का गठन हो.

राज्यवार वितरण

  • तमिलनाडु को छोड़कर सभी दक्षिणी राज्यों का अंश घट गया है और इनमें सबसे अधिक हानि कर्नाटक को हुई है.
  • प्रतिस्थापन स्तर (replacement level) के नीचे रह गई प्रजनन दरों वाले कुछ राज्यों के अंश बहुत थोड़ी मात्रा में बढ़े हैं. ये राज्य हैं – महाराष्ट्र, हिमाचल, पंजाब और तमिलनाडु.
  • निम्न प्रजनन दरों वाले कुछ राज्यों के अंश घट गये हैं. ये हैं – आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल.
  • राज्य वित्त विषयक अपने प्रतिवेदन में भारतीय रिज़र्व बैंक ने कहा है कि 2017-18 में सबसे अधिक कर-GSDP अनुपात कर्नाटक में था. परन्तु विडंबना है कि अंश वितरण में इसी राज्य को सबसे अधिक हानि हुई.

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