Sansar डेली करंट अफेयर्स, 22 June 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 22 June 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : African Union (AU)

संदर्भ

अफ्रीका का देश नाइजर पहली बार अफ्रीकी संघ (Africa Union – AU) के शिखर सम्मलेन के लिए आतिथेय बनने जा रहा है. इस आयोजन के लिए भारत सरकार ने नाइजर को आर्थिक सहायता के रूप में 15 मिलियन डॉलर देने का निर्णय किया है.

अफ्रीकी संघ क्या है?

  • अफ्रीकी संघ एक महाद्वीपीय संघ है जिसके सदस्य अफ्रीका के सभी 55 देश होते हैं. परन्तु इसमें अफ्रीका में स्थित यूरोपीय प्रभुता वाले विभिन्न क्षेत्र सम्मिलित नहीं होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ सबसे पहले इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में 26 मई, 2001 को स्थापित हुआ था और अगले वर्ष 9 जुलाई को दक्षिण अफ्रीका में इसका अनावरण किया गया था.
  • अफ्रीकी संघ अफ्रीकी एकता संघ (Organisation of African Unity – OAU) को विस्थापित कर बना था. ज्ञातव्य है कि 32 अफ्रीकी सरकारों ने मिलकर 25 मई, 1963 को यह संगठन अदीस अबाबा में शुरू किया था.
  • अफ्रीकी संघ के अधिकांश बड़े निर्णय इसकी महासभा में लिए जाते हैं जो हर छह महीने पर बैठती है. इस महासभा में सभी देशों और सरकारों के प्रमुख सदस्य होते हैं.
  • अफ्रीकी संघ का सचिवालय अदीस अबाबा में स्थित है.

अफ्रीकी संघ के मुख्य उद्देश्य

  • अफ्रीकी देशों और अफ्रीकियों के मध्य एकता एवं एकजुटता को बढ़ावा देना.
  • सदस्य देशों की सम्प्रभुता, भौगोलिक एकता और स्वतंत्रता की रक्षा करना.
  • उन उपायों में तेजी लाना जिनसे महाद्वीप की राजनीतिक एवं सामाजिक-आर्थिक एकात्मता संभव हो सके.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Internet Corporation for Assigned Names and Numbers (ICANN)

संदर्भ

इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) उपरणों एवं इन्टरनेट का प्रयोग करने वाली अवसंरचना के प्रबंधन लिए वैश्विक परामर्श हेतु मानकों एवं आइडेंटिफायर तकनीक को विकसित करने में सहयोग करने के लिए ICANN और NASSCOM ने घोषणा की है.

ICANN क्या है?

  • ICANN का पूरा नाम है – Internet Corporation for Assigned Names and Numbers.
  • ICANN एक अलाभकारी संगठन है जिसे 1998 में डोमेन नामों (domain names) के प्रशासन को देखने के लिए स्थापित किया गया था.
  • ICANN cyberetic ढाँचे के सुचारू एवं सुरक्षित कामकाज को सुनश्चित करता है.

ICANN का कार्य

आज domain names, host names, IP address एवं websites की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ICANN इस नेटवर्क पर नजर रखता है और यह सुनश्चित करता है कि सभी कंप्यूटर परिभाषित अनूठे pathways एवं identifier के जरिये एक-दूसरे तक पहुँच सकें. इसके लिए ICANN निम्नलिखित चार काम करता है –

  • डोमेन नामों (domain names) के लिए एक रजिस्टरार के रूप में अनुमोदन करना.
  • रूट सिस्टम में Top Level Domains (TLDs) को जोड़ने के विषय में निर्णय लेना.
  • सार्वभौम सम्पर्क को बनाए रखने के लिए तकनीकी मानदंडों का समन्वय करना.
  • प्रतिस्पर्धी डोमेन नामों के लिए Uniform Domain Name Dispute Resolution Policy (UDRP) का सृजन करना.

NASSCOM क्या है?

  • NASSCOM एक लाभ-रहित उद्योग संघ है जो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एवं व्यापार प्रक्रिया की आउटसोर्सिंग (BPO) उद्योग से सम्बंधित सर्वोच्च निकाय है.
  • इसकी सदस्यता भारत में पंजीकृत कंपनियों के लिए खुली हुई है.
  • इसका मुख्य कार्य IT-BPM उत्पादों और सेवाओं को उपलब्ध कराना है.
  • NASSCOM का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवा की गुणवत्ता एवं बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्यक ढंग से भारतीय सॉफ्टवेर और BPM उद्योग में कार्यान्वयन हो रहा है या नहीं.
  • इसकी स्थापना 1988 में हुई थी.
  • यह एक लाभ-रहित संगठन है.

GS Paper  2 Source: Down to Earth

down to earth

Topic : Climate change can trip small island states enroute SDGs: UN

संदर्भ

सतत विकास लक्ष्यों को 2030 तक प्राप्त करने में कदाचित कई छोटे विकासशील द्वीपीय देश (Small Island Developing States – SIDS) विफल हो सकते हैं क्योंकि वहाँ जनसंख्या के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के जोखिम बढ़ते ही जा रहे हैं. ऐसा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिवेदन – विश्व जनसंख्या पूर्वानुमान 2019 – में कहा गया है.

मुख्य निष्कर्ष

  • छोटे विकासशील द्वीपीय देश कोमोरोस (Comoros), गिनी-बिसाऊ (Guinea-Bissau), साओ-टॉम – प्रिंसिपे (Sao Tome – Principe), सोलमन आइलैंड तथा वनुआतु (Vanuatu) समेत कई छोटे द्वीपीय देशों में जनसंख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि वे उसे संभाल नहीं पा रहे हैं.
  • इन छोटे देशों में जो बड़े देश हैं उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन, जलवायु के उत्तर-चढ़ाव और समुद्र तल में वृद्धि की भी है.
  • इन अपेक्षाकृत बड़े द्वीपीय देशों में वर्तमान में जनसंख्या वृद्धि की जो दर है वह वैश्विक औसत से अधिक है.
  • इन सभी देशों की सम्पूर्ण जनसंख्या मात्र 71 मिलियन है, किन्तु इनकी वृद्धि दर को देखते हुए अनुमान है कि यह संख्या 2030 में 78 मिलियन और 2050 में 87 मिलियन हो जायेगी.

SIDS क्या है?

SIDS उन छोटे-छोटे विशेष द्वीपीय देशों को कहते हैं जो वर्तमान में सतत विकास की चुनौतियों से समान रूप से जूझ रहे हैं. यह चुनौतियाँ हैं – छोटी किन्तु वर्धनशील जनसंख्या, सीमित संसाधन, सुदूरता, प्राकृतिक आपदाओं की संभावना, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर अत्यधिक निर्भरता एवं अविश्वसनीय पर्यावरण.

जलवायु परिवर्तन से यहाँ होने वाले संभावित दुष्प्रभाव

  • वैसे तो जलवायु परिवर्तन किसी भी देश के विकास को प्रभावित कर सकता है, चाहे वह कहीं भी स्थित हो अथवा उसकी अर्थव्यवस्था का आकार कुछ भी हो. परन्तु फिर भी कोई भी ऐसा देश समूह नहीं है जहाँ SIDS की भाँति इसके भयानक दुष्प्रभाव हो सकते हैं, ऐसा संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) का विचार है.
  • इन देशों की एक-तिहाई जनसंख्या ऐसे भूभाग में रहती हैं जो समुद्र तल से पाँच मीटर नीचे स्थित हैं. अतः, यदि कभी समुद्र का स्तर उठा अथवा आंधी आई तो इन देशों के तटीय क्षेत्रों में भारी विनाश हो सकता है.
  • वैश्विक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में इन देशों का योगदान मात्र 1% है, परन्तु जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक दुष्प्रभाव सबसे पहले इन पर ही पड़ता है.
  • यहाँ जलवायु परिवर्तन आजीविका और आर्थिक वृद्धि के लिए खतरा है. फलतः यहाँ कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और सम्बंधित क्षेत्रों में गिरावट देखने में आ रही है. इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाला विकट मौसम यहाँ की भूमि, भू-सम्पदा एवं अवसंरचना को बर्बाद कर रहा है और इससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
  • इन देशों की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर टिकी हुई है. यहाँ की विकट जलवायु के कारण पर्यटकगण यहाँ आने से बचने लगे हैं क्योंकि उनमें यह डर बना रहता है कि न जाने कब यहाँ जानलेवा भीषण आंधियाँ आ जाएँ.

GS Paper  2 Source: PIB

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Topic : National Accreditation Board for Certification Bodies (NABCB)

संदर्भ

भारत के राष्ट्रीय अभिप्रमाणन निकाय NABCB के अभिप्रमाणन कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मान लिया गया है.

पृष्ठभूमि

NABCB ने अपने अभिप्रमाणन कार्यक्रम के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक ISO/IEC 17024 के आधार पर एशिया प्रशांत अभिप्रमाणन सहयोग (Asia Pacific Accreditation Cooperation – APAC) की पारस्परिक मान्यता व्यवस्था पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

NABCB क्या है?

  • यह भारतीय गुणवत्ता परिषद् (Quality Council of India) का एक अंगीभूत बोर्ड है जो अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर सत्यापन/निरीक्षण से सम्बंधित निकायों के अभिप्रमाणन के लिए उत्तरदायी होता है.
  • इसके द्वारा निर्यात की जा रही सामग्री को सत्यापित करने के कारण वह सामग्री वैश्विक बाजार में स्वीकार्य हो जाती है क्योंकि इस सत्यापन से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि वह सामग्री अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करती है. इससे भारतीय वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिलता है.
  • एशियाई प्रशांत क्षेत्र में NABCB के सदृश अन्य दो ही प्रमाणन निकाय हैं. ये दो निकाय हांगकांग और मेक्सिको में है.
  • NABCB जिन अंतर्राष्ट्रीय मानकों के पालन की जाँच करता है, वे हैं – ISO/IEC 17021-1 और ISO 45001.

APAC क्या है?

  • इस निकाय की स्थापना 1 जनवरी, 2019 को पहले से चल रहे दो क्षेत्रीय अभिप्रमाणन सहयोगों का विलय करके हुई थी. ये निकाय थे – Asia Pacific Laboratory Accreditation Cooperation (APLAC) और the Pacific Accreditation Cooperation (PAC).
  • APAC का मुख्य काम है एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अभिप्रमाणन निकायों के बीच पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (Mutual Recognition Arrangement – MRA) का प्रबंधन एवं विस्तार करना.
  • MRA समरूपता मूल्यांकन परिणामों, जैसे – जाँच प्रतिवेदन, जाँच प्रमाणपत्र, निरीक्षण प्रतिवेदन और अभिप्रमाणन की स्वीकृति सुनिश्चित करता है.
  • APAC के सदस्य वे अभिप्रमाणन निकाय, अभिप्रमाणन केन्द्रीय बिंदु और अन्य संगठन होते हैं जिनको अभिप्रमाणित समरूपता मूल्यांकन परिणामों में रूचि होती है.

Prelims Vishesh

Hidden hunger :-

  • पूरे विश्व में ऐसे कई देश हैं जहाँ एक ओर कुपोषण है तो दूसरी ओर मोटापा.
  • ऐसी स्थिति को “छुपी हुई भूख (hidden hunger)” कहा जाता है.
  • इस भूख का कारण दरिद्रता, विषमता, शहरीकरण और खाद्य प्रणाली का औद्योगीकरण होता है.

What is reciprocal trade agreements?

  • विदेशी बाजारों में पहुँच बढ़ाने और व्यापार को विस्तार देने के लिए कई देश द्विपक्षीय/क्षेत्रीय व्यापार समझौते करते हैं. ये समझौते आपसी व्यापार समझौते (RTA) कहलाते हैं.
  • ऐसे समझौते में समझौता करने वाले देश एक-दूसरे को विशेष लाभ प्रदान करते हैं.
  • RTA के कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे – व्यापार में प्राथमिकता देने वाले, मुक्त व्यापार का प्रावधान करने वाले आदि. इसके अंतर्गत सदस्य देश एक-दूसरे के लिए व्यापार बाधा को कम करते हुए अपने-अपने बाजार खोलने पर सहमत हो जाते हैं.  


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