Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 February 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 15 February 2019


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : World Sustainable Development Summit

संदर्भ

नई दिल्ली स्थित ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (The Energy and Resources Institute – TERI) द्वारा विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन, 2019 का आयोजन हो रहा है.

विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन क्या है?

  • यह TERI का एक मूर्धन्य वार्षिक आयोजन है.
  • यह सम्मेलन 2001 में सम्पन्न दिल्ली सतत विकास शिखर सम्मेलन (DSDS) के उद्देश्यों के अनुरूप सतत विकास को वैश्विक लक्ष्य निर्धारित करने की दिशा में कार्यरत है.
  • यह विकासशील जगत में उभरने वाले वैश्विक मामलों से सम्बंधित संसार का एकमात्र शिखर सम्मेलन है.
  • इस सम्मेलन में संसार-भर के नेता और पेशेवर जमा होकर सार्वभौम महत्त्व की जलवायविक समस्याओं पर विचार-विमर्श करते हैं.
  • यह सम्मेलन विश्व के बड़े-बड़े नेताओं और विचारकों का ऐसा मंच है जहाँ विश्व समुदाय के लाभ के लिए दीर्घकालीन समाधानों तक पहुँचने की चेष्टा की जाती है.

TERI क्या है?

ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (TERI) एक अग्रणी विचारक समूह है जो भारत एवं वैश्विक दक्षिण (Global South) में सतत विकास के लिए अनुसंधान हेतु समर्पित है. इसकी स्थापना 1974 में ऊर्जा से सम्बंधित विषयों के एक सूचनाकेंद्र के रूप में हुई थी. परन्तु कालांतर में यह एक अनुसंधान केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित हो गया जिसके द्वारा प्रस्तुत नीतियों एवं तकनीकी समाधानों के फलस्वरूप जन-जीवन और पर्यावरण में बदलाव आया.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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Topic : Citizenship, Triple Talaq Bills Lapse in Rajya Sabha as House Adjourns Sine Die

संदर्भ

वर्तमान 16वीं लोकसभा का अंतिम सत्र (बजट सत्र) सम्पन्न हो चुका है. इस लोकसभा का कार्यकाल जून 3, 2019 तक चलेगा. इस लोकसभा में दो महत्त्वपूर्ण विधेयकों पर पूरा काम नहीं हो सका. ये हैं – नागरिकता संशोधन विधेयक और तिहरी तलाक प्रतिबंध विधेयक. ये दोनों विधेयक लोकसभा से तो पारित हो गये पर राज्यसभा में लटक गये. इसलिए नियमानुसार ये दोनों विधेयक निष्प्रभावी (lapse) हो गये. अब अगली लोकसभा चाहेगी कि तो इनके लिए नए विधेयक नए सिरे से लाने होंगे और तब जाकर उनपर यथोचित कार्रवाई होगी.

कोई विधेयक निष्प्रभावी कब होता है?

संविधान की धारा 107 और 108 में इस विषय में प्रावधान किये गये हैं. इनके अनुसार जब लोकसभा भंग हो जाती है तो उसके अथवा उसकी समितियों के समक्ष लंबित सभी कारोबार यथा विधेयक, प्रस्ताव, संकल्प, सूचनाएँ, आवेदन इत्यादि निष्प्रभावी हो जाते हैं. यदि इन विषयों में आगे की कार्रवाई करनी है तो नई लोकसभा में इन्हें फिर से उपस्थापित करना होगा.

कौन-सा विधेयक निष्प्रभावी होता है?

  1. ऐसा विधेयक जो लोकसभा में प्रस्तुत किया गया, पर लोकसभा में ही लंबित रह गया.
  2. ऐसा विधेयक जो राज्यसभा में शुरू हुआ और पारित भी हो गया, परन्तु लोकसभा में लंबित रह गया.
  3. ऐसा विधेयक जो लोकसभा में शुरू हुआ और पारित भी हो गया, परन्तु राज्यसभा में लंबित रह गया.
  4. ऐसा विधेयक जो राज्यसभा में शुरू हुआ, पर राज्यसभा ने कुछ संशोधनों के साथ उसे लोकसभा में लौटा दिया और जो लोकसभा के भंग होने की तिथि तक राज्यसभा में लंबित है.

कौन-सा विधेयक निष्प्रभावी नहीं होता है?

  1. ऐसा विधेयक जो राज्यसभा में तो लंबित है किन्तु लोकसभा ने उसे पारित नहीं किया है.
  2. ऐसा विधेयक जिसपर निर्णय के लिए राष्ट्रपति ने लोकसभा के भंग होने के पहले संयुक्त बैठक बुलाई है.
  3. ऐसा विधेयक जो दोनों सदनों से पारित हो गया हो पर अभी उस पर राष्ट्रपति का अनुमोदन नहीं मिला हो.
  4. ऐसा विधेयक जो दोनों सदनों से पारित हो चुका हो, परन्तु उसे राष्ट्रपति ने राज्यसभा को फिर से विचार करने के लिए लौटा दिया हो.
  5. सरकारी आश्वासन समिति जिन विधेयकों और आश्वासनों का परीक्षण कर रही होती है, वे विधेयक और आश्वासन लोकसभा के भंग होने पर निष्प्रभावी नहीं होते हैं.

GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Actions undertaken to tackle climate change

संदर्भ

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भारत में जलवायु क्रियाओं पर “इंडिया – स्पियरहाइडिंग क्लाइमेट सॉल्यूशंस” शीर्षक से एक प्रकाशन जारी किया है.

प्रकाशन में जलवायु परिवर्तन से निपटने और अनुकूलन के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भारत द्वारा की गई प्रमुख पहलों का उल्लेख है.

जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में सरकार की प्रमुख पहल:

जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC): कार्ययोजना में सौर, संवर्धित ऊर्जा दक्षता, सतत आवास, जल, हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने, हरित भारत, सतत कृषि और जलवायु परिवर्तन पर रणनीतिक ज्ञान पर आठ प्रमुख मिशन शामिल हैं. जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत नेशनल मिशन फॉर सस्टेनिंग द हिमालयन इको-सिस्टम (NMHSE) का आरम्भ किया गया है. इसका उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का निरंतर आकलन करना और नीति निर्माण निकायों को इस हेतु नीति-निर्माण कार्यों में सक्षम बनाना है.

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): ISA (International Solar Alliance) की स्थापना CoP21 पेरिस घोषणा के अनुसार हुई है. इस समूह का उद्देश्य सौर ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना है जिससे पेट्रोल, डीजल पर निर्भरता कम की जा सके. यह एक अंतर्राष्ट्रीय, अंतर-सरकारी गठबंधन है जो आपसी समझौते पर आधारित है. अब तक 19 देशों ने इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है और 48 देशों ने इसके फ्रेमवर्क समझौते को हस्ताक्षरित कर दिए हैं. यह 121 ऐसे देशों का गठबंधन है जो सौर ऊर्जा की दृष्टि से समृद्ध हैं. ये देश पूर्ण या आंशिक रूप से कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित हैं.

जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना (State Action Plan on Climate Change – SAPCC): जलवायु परिवर्तन पर राज्य कार्य योजना (SAPCC) को औपचारिक रूप से 30 जून 2008 को लागू किया गया. यह उन साधनों की पहचान करता है जो विकास के लक्ष्य को प्रोत्साहित करते हैं, साथ ही, जलवायु परिवर्तन पर विमर्श के लाभों को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत करता है. राष्ट्रीय कार्य योजना के कोर के रूप में आठ राष्ट्रीय मिशन हैं. वे जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन तथा न्यूनीकरण, ऊर्जा दक्षता एवं प्रकृतिक संसाधन संरक्षण की समझ को बढावा देने पर केंद्रित हैं. राज्य कार्य योजना में यह देखा जाता है कि ये सभी राष्ट्रीय मिशन राज्य के स्तर पर अर्थात् स्थानीय स्तर पर किस तरह लागू हो सकते हैं और स्थानीय प्राथमिकताओं को देखते हुए इनका कार्यान्वयन किस प्रकार हो सकता है.

ई-गतिशीलता के लिए FAME योजना: FAME योजना 1 अप्रैल, 2015 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य था बिजली और संकर ऊर्जा से चलने वाले वाहनों के निर्माण के तकनीक को बढ़ावा देना और उसकी सतत वृद्धि को सुनिश्चित करना. इस योजना के अंदर सार्वजनिक परिवहन में बिजली की गाड़ियों (EVs) के प्रयोग को बढ़ावा देना है और इसके लिए बाजार और माँग का सृजन करना है. इसके तहत वाहन परिक्षेत्र में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति दी जायेगी.

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लक्ष्य गरीब परिवारों तक एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) कनेक्शन पहुँचाना है. इस योजना के अंतर्गत सामाजिक-आर्थिक-जाति-जनगणना (SECC) के माध्यम से पहचान किये गए गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवारों की वयस्क महिला सदस्य को केंद्र सरकार द्वारा प्रति कनेक्शन 1600 रुपये की वित्तीय सहायता के साथ जमा-मुक्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाता है.

UJALA योजना: भारत सरकार के राष्‍ट्रीय कार्यक्रम— Unnat Jyoti by Affordable LEDs for All (उजाला) — के तहत  कम मूल्य पर एल.ई.डी. बल्ब दिये जाते हैं ताकि बिजली की बचत की जा सके.

स्वच्छ भारत मिशन: सर्वव्यापी स्वच्छता के कवरेज के प्रयासों में तेजी लाने के लिए और स्वच्छता पर बल देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने दिनांक 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत की थी. दो उप मिशन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और स्वच्छ‍ भारत मिशन (शहरी) के लिए मिशन समन्वयकर्त्ता पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय (एमडीडब्ल्यूएस) के सचिव हैं. मिशन का उद्देश्य महात्मा गांधी की 150वीं वर्षगाँठ को सही रूप में श्रद्धांजलि देते हुए वर्ष 2019 तक स्वच्छ भारत की प्राप्ति करना है.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Personal Laws (Amendment) Bill 2018

संदर्भ

हाल ही में राज्यसभा में पर्सनल लॉ (संशोधन) बिल 2018 पारित हुआ जिसके अनुसार अब कुष्ठ रोग के आधार पर तलाक नहीं लिया जा सकेगा. आखिरी दिन राज्यसभा में इस विधेयक पर सहमति बनने के बाद इसे बगैर चर्चा के पारित कर दिया गया.

यह विधेयक क्यों लाया गया?

वर्तमान में कुष्ठ रोग पूर्णत: निदान योग्य है लेकिन कुष्ठ रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के प्रति विभेद करने वाले पुराने विधायी उपबंध विभिन्न विधियों में आज भी विद्यमान है. ऐसे में इन विभेदकारी उपबंधों को समाप्त करने के लिये विधेयक लाया गया है.

पृष्ठभूमि

पर्सनल लॉ (संशोधन) विधेयक 2018 में 5 पर्सनल कानूनों में तलाक के लिए दिए गए आधार से कुष्ठ रोग को हटाने का प्रावधान है. इन पांच पर्सनल कानूनों में हिंदू विवाह अधिनियम 1955, विवाह विच्छेद अधिनियम 1869, मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939, विशेष विवाह अधिनियम 1954 और हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम 1956 शामिल हैं. विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उन कानूनों और प्रावधानों को खारिज करने की सिफारिश की थी जो कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के प्रति भेदभावपूर्ण हैं.

  • इसके अलावा भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर किए हैं जिसमें कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने का आह्वान किया गया है.
  • वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र और राज्य सरकारों से कुष्ठ रोग प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कदम उठाने को कहा था.

ऐसा क्यों किया गया?

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि कुष्ठ रोग से ग्रस्त रोगियों को समाज से अलग किया गया था क्योंकि कुष्ठ रोग निदान योग्य नहीं था और समाज उनके प्रतिकूल था. तथापि इस बीमारी का निदान करने के लिये गहन स्वास्थ्य देखभाल और आधुनिक चिकित्सा की उपलब्धता के परिणामस्वरूप उनके प्रति समाज के दृष्टिकोण में परिवर्तन होना आरंभ हुआ है.

भारत में कुष्ठ रोग

भारत में यह बीमारी दिनों दिन घटती जा रही है. साल 2005 में इस बीमारी के उन्मूलन की घोषणा तो हो गई थी लेकिन अब भी इसके नए मामले सामने आते रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में अब भी भारत में ही सबसे ज्यादा कुष्ठ रोग के मरीज पाए जाते हैं.

कुष्ठ रोग कैसे होता है?

यह माइकोबैक्टीरियम लैप्री नामक बैक्टीरिया से फैलता है. इसका प्रभाव चर्म, नसों, आंखों और सांस तंत्र पर देखा जाता है. इसे हैंसेन डिजीज भी कहते हैं. इस बीमारी का बैक्टीरिया काफी सुस्ती से फैलता है, इसलिए इसे विट्रो कल्चर टेस्ट में पकड़ना आसान नहीं है.

कुष्ठ रोग की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि रोगी समय रहते बीमारी का पता नहीं लगा पाते. इसके बाद इलाज के अभाव में अपंग हो जाते हैं. जानकारों की मानें तो अगर कुष्ठ रोगियों के आसपास रहने वाले लोगों को इसका टीका दिया जाए, तो 3 साल के अंदर ही 60% इस बीमारी में कमी लाई जा सकती है. अगर कुष्ठ के कारण किसी का चर्म जख्मी हो गया है, तो इस टीका के लगने के साथ ही ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है.

उपचार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कुष्ठ रोग के इलाज के लिए मल्टीड्रग थेरपी प्रारम्भ किया है जिसमें रिफैंपसिन, डैप्सोन और क्लोफाजिमाइन दवाएँ सम्मिलित हैं. इलाज के लिए नई दवाएँ भी आई हैं जिनमें फ्लाक्सासिन और ओफ्लोक्सासिन के नाम हैं. निप्पॉन फाउंडेशन की ओर से फ्री एमटीडी अभियान भी चलाया जा चुका है.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : National Minimum Wage

संदर्भ

विशेषज्ञ समिति ने अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक और श्रम बाजार स्थितियों के साथ पाँच भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की सिफारिश की है.

प्रस्तावित राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी क्या है?

  • समिति का विचार है कि भारत के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन का एकल मूल्य प्रतिदिन 375 रुपये या 9,750 रुपये प्रति माह निर्धारित किया जाना चाहिए.
  • रिपोर्ट में अतिरिक्त मकान किराया भत्ता की सिफारिश की है, जो औसतन प्रतिदिन 55 रुपये है, यानी शहरी श्रमिकों के लिए प्रति माह 1,430 रुपये राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी के ऊपर घर का किराया. किराया भत्ता शहर और शहर के प्रकार के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

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क्षेत्रीय विविधताएँ

विविध सामाजिक-आर्थिक और श्रम बाजार स्थितियों के साथ पांच अलग-अलग क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन निर्धारित करने की अनुशंसा की है –

  • क्षेत्र I के लिए 342 रुपये (8,892 रुपये प्रति माह), क्षेत्र II के लिए 380 रुपये (9,880 रुपये प्रति माह), क्षेत्र III के लिए 414 रुपये (प्रति माह 10,764 रुपये), क्षेत्र IV के लिए 447 रुपये (11,622 रुपये प्रति माह) और क्षेत्र V के लिए 386 रुपये (प्रति माह 10,036 रुपये) निर्धारित किया जाना चाहिए.
  • क्षेत्र एक में असम, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं. क्षेत्र 2 में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड शामिल हैं. क्षेत्र 3 में गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु शामिल हैं. क्षेत्र 4 में दिल्ली, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब और क्षेत्र 5 में अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, मिजोरम और त्रिपुरा शामिल हैं.

वर्तमान स्थिति

राज्यों के बीच मासिक न्यूनतम मजदूरी में अंतर का न्यूनतम और अधिकतम अंतर का स्तर 12,194 रुपये है. अगर समिति का प्रस्ताव लागू होता है यो अंतर 2,739 रुपये होगा. भारत में कुछ अनुसूचित रोजगारों में न्यूनतम वेतन कम हुआ है, जैसै ईंट भट्ठों और तेल मिलों में. यहां तक कि केरल, जो अधिक न्यूनतम वेतन के लिए जाना जाता है वहां भी कृषि और निर्माण क्षेत्रों में 2018-13 के दौरान महाराष्ट्र से नीचे आ गया, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठनों के वेज रिपोर्ट 2018 से पता चलता है.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Pradhan Mantri Awas Yojana – Urban

संदर्भ

सरकार ने प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत लाभार्थियों को पूर्ण आवासों की तस्वीरें खींचने और अपलोड करने की सुविधा देने के लिए एक मोबाइल ऐप का अनावरण किया है.

PMAY-Urban क्या है?

प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा किया गया है. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) अभियान की शुरूआत 25 जून, 2015 को की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी पात्र शहरी परिवारों को 2022 तक आवास प्रदान करना है. योजना ने अभूतपूर्व प्रगति की है और शहरी क्षेत्रों में लगभग एक करोड़ मकानों की मांग के अनुरूप 73 लाख से अधिक मकानों की मंजूरी दी है. लगभग 40 लाख मकान निर्माण के विभिन्न स्तरों पर हैं और 15 लाख से अधिक मकान बनाए जा चुके हैं. इसके अलावा लगभग 12 लाख मकान नई और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल से निर्मित किये जा रहे हैं.

  • सरकार का यह मिशन है कि 2022, जब भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे, तक सभी शहरों में सभी के लिए आवास हो जाए.
  • इस योजना के लाभार्थी वे गरीब लोग, EWS (Economically Weak Sections) के नीचे के लोग और LIG (Low Income Group) के लोग होंगे.
  • यह योजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी.
  • पहले चरण में अप्रैल 2015 से मार्च 2017 में 100 शहरों में ऐसे आवास बनाए जायेंगे.
  • दूसरे चरण में अप्रैल 2017 से मार्च 2019 में 200 और शहरों को लिया जायेगा.
  • तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से मार्च 2022 में बाकी शहर इस योजना में शामिल किये जायेंगे.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है.
  • यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है.
  • इस ऋण पर 15 साल तक के लिए 5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

योजना का माहात्म्य

  • इस योजना से कई क्षेत्रों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा.
  • एक करोड़ घर बनने का अर्थ है कि इसके लिए दो लाख करोड़ रु. के गृह ऋण का वितरण अवश्य होगा. साथ ही इस कार्य को पूरा करने में 80 से 100 मिलियन टन सीमेंट और 10 से 15 मिलियन टन इस्पात की आवश्कता होगी जिससे अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा.
  • एक करोड़ घर बनाने में लगभग 4 बिलियन वर्ग फीट जमीन जमीन लगेगी.
  • उपर्युक्त कारणों से संभावना है कि जब तक यह योजना चलेगी तब तक 9 से 10 करोड़ रोजगार के मौके मिलेंगे.

चुनौतियाँ

यह योजना अत्यंत विशाल योजना है परन्तु इसमें कई बाधाएँ भी हैं. कई बार अच्छी जगह जमीन नहीं मिलती है तो कहीं अपने ब्रांड की साख में क्षति अनुभव करते हुए निजी भवन निर्माता उत्साह से भाग नहीं लेते हैं. बोली लगाने कि प्रणाली, लागत एवं काम पूरा करने की समय-सीमा की कठोरता आदि ऐसे कई कारण हैं जिनसे भवन-निर्माण का कार्य उतनी तेजी से हो रहा है और इसके परिणामस्वरूप निर्माण की सामग्री थोक-भाव में उपलब्ध नहीं होने के कारण लागत भी बढ़ती जा रही है. इसके अतिरिक्त नई तकनीक के अभाव में उत्पादकता, लागत क्षमता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.


GS Paper 2 Source: PIB

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Topic : Pradhan Mantri Shram Yogi Maan-Dhan Yojana

संदर्भ

श्रम और रोजगार मंत्रालय ने हाल ही में प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PM-SYM) योजना का अनावरण किया. अंतरिम बजट, 2019 में इस योजना की घोषणा की गई थी.

श्रम योगी मान-धन योजना के लिए पात्रता

  • इस योजना के पात्र 18-40 वर्ष की आयु समूह के घर से काम करने वाले श्रमिक होंगे.
  • इनकी मासिक आय 15,000 रुपये प्रति महीने या उससे कम होनी चाहिए.
  • पात्र व्यक्ति नई पेंशन योजना (एनपीएस), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) योजना या कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के लाभ के अंतर्गत कवर नहीं किए नहीं जाने चाहिए और उसे आयकर दाता नहीं होना चाहिए.

श्रम योगी मान-धन योजना के लाभ

  • न्यूनतम निश्चित पेंशनः PM-SYM के अंतर्गत प्रत्येक अभिदाता को 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद प्रति महीने 3,000 रुपये न्यूनतम निश्चित पेंशन मिलेगा.
  • परिवार पेंशनः यदि पेंशन प्राप्ति के दौरान अभिदाता की मृत्यु होती है तो परिवार पेंशन के रूप में लाभार्थी को मिलने वाले पेंशन का 50 प्रतिशत लाभार्थी के जीवनसाथी को मिलेगा. परिवार पेंशन केवल जीवनसाथी के मामले में लागू होता है.
  • यदि लाभार्थी ने नियमित अंशदान दिया है और किसी कारणवश उसकी मृत्यु (60 वर्ष की आयु से पहले) हो जाती है तो लाभार्थी का जीवनसाथी योजना में शामिल होकर नियमित अंशदान करके योजना को जारी रख सकता है या योजना से बाहर निकलने और वापसी के प्रावधानों के अनुसार योजना से बाहर निकल सकता है.

योजना में योगदान

  • PM-SYM योजना में शामिल होने की आयु से 60 वर्ष की आयु तक अभिदाता को निर्धारित अंशदान राशि देनी होगी.
  • अभिदाता का अंशदान उसके बचत बैंक खाता/जनधन खाता से “ऑटो डेबिट” सुविधा के माध्यम से किया जाएगा.
  • पीएम-एसवाईएम 50:50 के अनुपात आधार पर एक स्वैच्छिक तथा अंशदायी पेंशन योजना है, जिसमें निर्धारित आयु विशेष अंशदान लाभार्थी द्वारा किया जाएगा और तालिका के अनुसार बराबर का अंशदान केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा.

GS Paper 2 Source: Down to Earth

Topic : Oxytocin ban

संदर्भ

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा है कि कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल) के पास न तो ऑक्सीटोसिन उत्पादन को संभालने का अनुभव है और न ही क्षमता है.

मामला क्या है?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 27, 2018 को एक अधिसूचना निकालकर ऑक्सीटोसिन को प्रतिबंधित कर किया था और उत्पादन के लिए मात्र एक सरकारी कम्पनी कर्नाटक एंटीबायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को अनुमति दी थी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाद में केंद्र सरकार के उस निर्णय को निरस्त कर दिया जिसके द्वारा निजी प्रतिष्ठानों द्वारा ऑक्सीटोसिन बनाने और बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. विदित हो कि इस दवा का प्रयोग प्रसव पीड़ा लाने और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. न्यायालय का कहना है कि सरकार का निर्णय निरंकुश एवं अतार्किक है क्योंकि इसका प्रयोग मात्र पशुओं का दूध बढ़ाने के लिए ही नहीं होता है, इसके अन्य उपयोग भी हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय के इस निर्णय के विरुद्ध केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर रखी है.

ऑक्सीटोसिन के निर्माण को केएपीएल तक सीमित रखना अनुचित क्यों?

स्वयं केएपीएल ने कहा है कि वह ऑक्सीटोसिन का उतनी मात्रा उत्पादन नहीं कर सकता है जितना कि इसकी आवश्यकता है. उसका कहना है कि पर्याप्त मात्रा में इस औषधि के उत्पादन में उसे तीन-चार वर्ष लग जाएँगे. इसलिए यदि इसके उत्पादन का भार केवल उसी पर दे दिया जाएगा तो अनेक गर्भवती महिलाओं के जीवन पर खतरा आ जाएगा.

ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) क्या है?

  • ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) एक हार्मोन (hormone) है जिसका मनुष्य तथा पशु के व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है. इस हार्मोन की प्रेम में भी भूमिका होती है. साथ ही स्त्रियों के प्रजनन से सम्बंधित जैविक कार्यों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है. इसलिए इस हार्मोन को आलिंगन हार्मोन (hug hormone), आलिंगन रसायन (cuddle chemical), नैतिक अणु (moral molecule), आनंद हार्मोन (bliss hormone) भी कहा जाता है.
  • ऑक्सीटोसिन मस्तिष्क की हाइपोथेलेमस में बनने वाला एक हार्मोन होता है. यह हार्मोन मस्तिष्क के नीचले हिस्से में स्थित पीयूष ग्रन्थि (pituitary gland) में पहुँचकर फिर वहाँ से निस्सृत होता है.
  • ऑक्सीटोसिन हार्मोन के साथ-साथ एक मस्तिष्क स्नायु-सम्प्रेषक (neurotransmitter) के रूप में भी काम करता है.
  • पीयूष ग्रन्थि से निस्सृत ऑक्सीटोसिन स्त्री प्रजनन से जुड़े दो कार्यों को नियंत्रित करता है – प्रसूति, स्तनपान.

ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) का प्रयोग

ऑक्सीटोसिन औषधि मानवीय हार्मोन का एक कृत्रिम रूप है जो महिलाओं के लिए जीवन-रक्षक होता है. चिकित्सक इसका प्रयोग गर्भवती महिलाओं में प्रसूति को सरल बनाने के लिए तथा बाद में होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए करते हैं. मातृ-स्वास्थ्य में इस औषधि की भूमिका इतनी महत्त्वपूर्ण है लो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्रसवोपरान्त रक्त स्राव के उपचार के लिए इसकी अनुशंसा करता है.

प्रतिबंध (Ban) क्यों?

  • गो पालन में इस औषधि का बहुत दुरूपयोग होता आया है. गोपालक इसे बिना सोचे-समझे दूध बढ़ाने के लिए इस औषधि का प्रयोग करते हैं.
  • दुधारू पशुओं में इस हार्मोन के प्रयोग के चलते बाँझपन आ जाता है.
  • ऑक्सीटोसिन से थनैला (mastitis) नामक रोग हो जाता है जिसमें पशु के थन में पीड़ादायक जलन हो जाती है.

क्या किया जाना चाहिए?

यह सत्य है कि ऑक्सीटोसिन के बहुत सारे दुष्प्रभाव हैं. परन्तु भारतीय महिलाओं के लिए यह बड़े काम की चीज है क्योंकि प्रत्येक वर्ष 45,000 स्त्रियाँ प्रसव से जुड़े कारणों से मृत्यु को प्राप्त हो जाती हैं. अतः सरकार द्वारा लागू होने वाले प्रतिबंध को हटाने अथवा सीमित करने के लिए कई स्रोतों से आवाज उठ रही है.

ऑक्सीटोसिन का विकल्प

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विवादित ऑक्सीटोसिन दवा का एक सुरक्षित एवं कारगर विकल्प प्रस्तुत किया है. इस दवा का नाम कार्बेटोसिन (Carbetocin) है. इसकी विशेषता है कि इसे रेफ्रीजरेटर में रखने की आवश्कयता नहीं है जबकि ऑक्सीटोसिन को 2–8 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखना पड़ता है, अन्यथा इसकी शक्ति कम हो जाती है. दूसरी ओर, कार्बेटोसिन यदि 30 डिग्री सेल्सियस पर तथा 75% सापेक्षिक आर्द्रता के अंदर रखा जाए तब भी यह तीन वर्षों तक कारगर रह जाता है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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Topic : Wasted effort: half of India’s waste-to-energy plants defunct

संदर्भ

विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र ने एक अध्ययन के द्वारा प्रतिवेदित किया है कि भारत में कचरे-से-ऊर्जा (Waste-to-Energy) बनाने के लिए स्थापित आधे से अधिक वेस्ट टू एनर्जी संयंत्र बेकार पड़े हैं. यही नहीं कचरे को छांटने में असमर्थता के कारण अभी जो संयंत्र चल रहे हैं उनका भी प्रदर्शन भी क्षमता से कम है.

प्रतिवेदन के मुख्य निष्कर्ष

  • 1987 से अब तक 15 कचरा-से-ऊर्जा बनाने के 15 संयंत्र देश में स्थापित हुए हैं, परन्तु इनमें से सात बंद हो चुके हैं. जहाँ ये संयंत्र बंद हो चुके हैं, उन शहरों के नाम हैं – दिल्ली, कानपुर, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ, विजयवाड़ा और करीमनगर.
  • इन संयंत्रों के बंद हो जाने के मुख्य कारण मिश्रित ठोस कचरे को संभालने में उनकी अयोग्यता और उनसे बिजली उत्पन्न करने में आने वाली ऊँची लागत है. इन कारणों से बिजली कंपनियाँ आगे आने से कतरा रही हैं.
  • इस दशा को देखते हुए भी सरकार कचरे से ऊर्जा पर बल देती जाती रही है क्योंकि यह स्वच्छ भारत मिशन का एक अंग है. नीति आयोग चाहता है कि 2018-19 में ऐसे संयंत्रों से 800MW बिजली पैदा हो. परन्तु यह लक्ष्य वर्तमान के सभी कचरे-से-ऊर्जा संयंत्रों की कुल क्षमता से दस गुना बड़ा है.
  • नीति आयोग का यह भी प्रस्ताव है कि एक भारतीय कचरे से ऊर्जा निगम की स्थापना हो जो PPP मॉडल पर संयत्रों का निर्माण करवाए.
  • वर्तमान में 40 ऐसे कचरे-से-ऊर्जा संयंत्र हैं जो निर्माणाधीन हैं.

संयंत्रों की क्षमता में कमी के कारण

  • वर्तमान कचरे-से-ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता में कमी का मूल कारण कचरे की गुणवत्ता और बनावट है. कहा जाता है कि भारत के कचरे में कैलोरी कम होती है और इसमें नमी की मात्रा बहुत अधिक होती है. ऐसे कचरे संयंत्रों में जलाने के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं. इनको जलाने में अधिक ईंधन की आवश्कयता होती है और इस कारण खर्च बढ़ जाता है.
  • कचरे-से-ऊर्जा की अवधारणा देश के लिए नई है.
  • शहरी कचरे से सम्बंधित तकनीक देश में उपलब्ध नहीं हैं जिस कारण विदेश से इनका आयात करना आवश्यक हो जाता है.
  • इन सयंत्रों, विशेषकर बायो-मिथेनेशन तकनीक पर आधारित संयंत्रों का निर्माण महँगा होता है क्योंकि इनके लिए आवश्यक मशीन विदेश से आते हैं.
  • शहरी ठोस कचरा नियम 2000 में दिए गये निर्देश के अनुसार नगर निगम आदि निकाय ठोस कचरे की छंटनी नहीं करते हैं.
  • नगर निगमों एवं शहरी स्थानीय निकायों के पास वित्तीय संसाधन कम होना भी एक कारण है.
  • राज्य सरकारों की ओर से एक कमी यह देखने में आती है कि उनके द्वारा जमीन के आवंटन, कचरे की आपूर्ति, बिजली की खरीद आदि के विषय में अनुकूल नीतियाँ अब तक नहीं बनाई जा सकी हैं.

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Selenium :-

  • वैज्ञानिकों को पता चला है कि सूक्ष्म पोषण देने वाले सेलेनियम के अतिसूक्ष्म कण बैक्टीरिया निरोधी तत्त्व के रूप में व्यवहार में लाये जा सकते हैं.
  • विदित हो कि सेलेनियम प्रकृति में गेहूँ, अंडों, पनीर, मेवों और समुद्री भोजन में पाया जाता है.
  • यह एंटीओक्सिडेंट होता है और प्रतिरोधकता को बढ़ाता है.

WHO issues new international standard for music devices :-

विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ ने संगीत उपकरणों के निर्माण और प्रयोग के विषय में नए अंतर्राष्ट्रीय मानक जारी किये हैं जिनका उद्देश्य युवा जनों को बहरे होने से बचाना है.


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2 Comments on “Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 February 2019”

  1. please sir aisa kyo kar rhe h aaj ka article sub phle ka h or aap ka article aaj kul ak din piche or puri trh complete nhi rh rha h phle jaisa ,please sir phle ki trh provide kraeye dail ka or compherncive tarike se

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