आधार कार्ड कहाँ-कहाँ जरुरी है? आधार पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Sansar LochanPolity NotesLeave a Comment

आधार कार्ड कहाँ-कहाँ जरुरी है – सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितम्बर, 2018 को इस बात पर एक बड़ा फैसला लिया. सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को संवैधानिक माना है. न्यायालय का कहना है कि आधार पूरी तरह सुरक्षित है क्योंकि इसका डुप्लीकेट नहीं बनाया जा सकता. पर फिर भी न्यायालय ने सरकार को सावधानी बरतने को कहा है और निर्देश दिया है कि डाटा सुरक्षा के लिए नया कानून लाये. गैर-कानूनी निवासियों को आधार कार्ड न मिले, सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी सरकार को ध्यान देने के लिए कहा.

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अनिवार्य

  • पैन कार्ड बनवाने में आधार कार्ड अनिवार्य होगा.
  • इनकम टैक्स भरने के लिए इसका जरुरी है.

कहाँ अनिवार्य नहीं है?

  • बैंक से आधार लिंक करना जरुरी नहीं.
  • स्कूल में एडमिशन के समय आधार कार्ड जरुरी नहीं होगा.
  • UGC, NEET और CBSE में आधार देना अनिवार्य नहीं.
  • निजी कंपनी आधार कार्ड नहीं माँग सकती (इस विषय से सम्बंधित आधार एक्ट के अनुच्छेद/अनुभाग 57 को सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है).
  • मोबाइल नंबर/नए मोबाइल सिम लेने में आधार जरुरी नहीं.

क्या है आधार कार्ड?

आधार 12 अंकों का एक अनूठी पहचान की संख्या है जो भारत के निवासियों को उनके बायो-मेट्रिक एवं नाम, पता, जन्मतिथि आदि से सम्बंधित डाटा के आधार पर निर्गत किया जाता है. इस डाटा का संग्रहण एक वैधानिक प्राधिकरण के द्वारा किया जाता है जिसका नाम है “भारतीय अनूठी प्राधिकरण” अर्थात् Unique Identification Authority of India (UIDAI). यह प्राधिकरण भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आता है.

क्या आधार से व्यक्तिगत जानकारियों की सुरक्षा भंग होती है?

आधार मूलतः सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्यक्ष रूप से लाभार्थी को देने के लिए बना था. परन्तु कालांतर में इसका व्यापक प्रयोग होने लगा और इसे कई जगह अनिवार्य कर दिया गया है – टैक्स जमा करना, बैंक खाता खोलना, मध्याह्न भोजन पाना (उत्तर प्रदेश), ऑनलाइन रेल टिकेट लेना, सार्वजनिक WiFi का उपयोग करना आदि-आदि. कुछ लोगों का विचार है कि इतना व्यापक प्रयोग होने के कारण आधार से निजता को खतरा हो सकता है.

आधार से निजता (privacy) को निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं –

  1. इसमें वर्णित वर्णित तीसरे पक्ष को मुहैया हो सकती है. उदाहरण के जब कोई इसके बल पर नया मोबाइल फ़ोन खरीदता है तो उसे आधार का नंबर दिया जाता है. संभव है कि उस नंबर के आधार पर दूसरा पक्ष अथवा सरकार उसपर निगरानी रख सकती है.
  2. ऐसे कुछ मामले सामने आये है कि इस कार्ड का दुरूपयोग हुआ है. उदाहरण के लिए –
  1. 210 सरकारी एजेंसियों ने एक बार कल्याण कार्यक्रमों के लाभार्थियों के नाम, पता और Aadhaar Number प्रकाशित कर दिया था.
  2. Reliance Jio ने 120 million Aadhaar धारकों के बारे में सूचना दे दी थी.
  3. बैंक खातों और Aadhaar के विवरण भी सरकारी पोर्टलों पर एक बार दिखला दिए थे.
  4. सरकार का E-hospital database एक बार hack कर लिया गया था और Aadhaar की गोपनीय सूचनाएँ सार्वजनिक हो गयी थी.

निष्कर्ष

इस प्रकार निजता को लेकर Aadhaar के विषय में चिंतित होना स्वभाविक है, परन्तु यह भी सच है कि Aadhaar में वर्णित निजी सूचनाओं को हासिल करना सरल नहीं है. अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कि Aadhaar एक सुरक्षित अभिलेख है और उसका duplicate तैयार करना संभव नहीं है.

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