वोयाजर मिशन क्या है? – VOYAGER 1 और 2 की उपलब्धियाँ, इंटरस्टेलर स्पेस और हेलियोस्फियर

Richa KishoreScience Tech2 Comments

NASA’s Voyager 2 spacecraft Explained in Hindi

नासा के Voyager 2 खोजी अन्तरिक्षयान में हाल में हुई गड़बड़ी को ठीक कर लिया गया है. विदित हो कि यह अन्तरिक्षयान धरती से लगभग 11 . 5 बिलियन मील पर है.

समस्या क्या थी?

जनवरी 25, 2020 को इस अन्तरिक्षयान से जो काम लेने की योजना थी वह काम यह नहीं कर पा रहा था. अन्तरिक्षयान के त्रुटिसंधान सॉफ्टवेर में भी एक दिक्कत का NASA को पता चला था.

VOYAGER 2 की उपलब्धियाँ

  • Voyager 2 एकमात्र ऐसा टोही अन्तरिक्षयान है जिसने अरुण एवं वरुण उपग्रहों का अध्ययन किया है.
  • यह सौर मंडल से बाहर निकलने वाली दूसरी मानव-निर्मित वस्तु है.
  • अब तक Voyager 2 ने सौर मंडल के सभी चार गैस के बने विशाल उपग्रहोंवृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण – की यात्रा कर ली है.
  • इसने कुल मिलकर 16 चन्द्रमाओं का पता लगाया है.
  • Voyager 2 ने वरुण में पाए जाने वाले विचलनशील रहस्मय वृहद् कृष्ण धब्बे को भी ढूँढ़ निकाला है. इसके अतिरिक्त इसने यूरोपा के हिम-शेल में पड़ी दरार और प्रत्येक ग्रह के रिंगों का भी पता लगाया है.

अंतर-तारकीय अन्तरिक्ष (Interstellar space) क्या है?

अंतर-तारकीय अन्तरिक्ष का वह हिस्सा है जो तारों के बीच स्थित है. अंतर-तारकीय अन्तरिक्ष कहाँ से शुरू होता है इसके लिए वैज्ञानिक हेलिओपॉज का सहारा लेते हैं. परन्तु सौर मंडल की परिभाषा भिन्न-भिन्न होती है अतः यह हेलिपपॉज Oort Cloud तक फैला हुआ माना जा सकता है. ज्ञातव्य है कि Oort Cloud सूर्य से पृथ्वी की कक्षा की तुलना में 1,000 गुना दूरी पर शुरू होता है.

हेलियोस्फियर (Heliosphere) क्या है?

सूरज से बाहर की ओर निकलने वाले सौर पवनों के कारण तथा उसके उलट अन्दर की ओर प्रवाहित होने वाले अंतर तारकीय पवनों के कारण सूर्य के चारों ओर एक बुलबुला बन जाता है जिसे हेलियोस्फियर कहते हैं.

यह वह क्षेत्र है जो सूर्य के गतिशील गुणधर्मों से प्रभावित होता है, जैसे – चुम्बकीय क्षेत्र, ऊर्जा कण और सौर पवन प्लाज्मा. जिस जगह हेलियोस्फियर समाप्त हो जाता है और जहाँ से अंतर तारकीय अन्तरिक्ष शुरू होता है उस जगह को हेलिओपाउज (heliopause) कहते हैं.

वोयाजर मिशन क्या है?

  • वोयाजर मिशन नासा का एक मिशन है जिसका उद्देश्य सौर मंडल से भी आगे जाकर आस-पास के उन बाहई उपग्रहों का पता लगाना है जो हेलियोस्फियर की बाहरी सीमाओं पर या उसके भी आगे स्थित हैं. इस काम के लिए पहले Pioneers 10 और 11 अन्तरिक्षयान छोड़े गये थे.
  • Voyager 1 और Voyager 2 क्रमशः 5 सितम्बर, 1977 और 20 अगस्त, 1977 को प्रक्षेपित किये गये थे. इनमें से Voyager 1 फ़रवरी 17, 1998 को Pioneers 10 से भी आगे निकल गया और इस प्रकार अन्तरिक्ष में मानव द्वारा भेजी गई सबसे दूरस्थ वस्तु बन गया.
  • Voyager 2 अभी तक सौरमंडल के सभी विशाल गैसीय उपग्रहों – वृहस्पति, शनि, अरुण एवं वरुण – तक जा चुका है और अभी तक 16 चन्द्रमाओं का पता लगा चुका है. इसके द्वारा पता किये कुछ अन्य वस्तुएँ इस प्रकार हैं – वरुण पर रहस्यमय रूप से इधर-उधर विचलित होने वाला ग्रेट डार्क स्पॉट, यूरोपा के हिम कवच की दरारें (Europa’s ice shel) तथा प्रत्येक उपग्रह के वलयों की विशेषताएँ.

Tags : Key features, objectives and accomplishments of Voyager 1 and 2 in Hindi. What is Interstellar space? About Voyager mission.

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2 Comments on “वोयाजर मिशन क्या है? – VOYAGER 1 और 2 की उपलब्धियाँ, इंटरस्टेलर स्पेस और हेलियोस्फियर”

  1. Sir voyager1 and voyager2 me sabse phale voyager2 KO prachepit kiya gaya please reply thanks

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