विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट – VFA समझौता

Sansar LochanWorldLeave a Comment

मई 27, 1999 से फिलीपींस और अमेरिका के बीच एक समझौता लागू है जिसे विजिटिंग फोर्सेज अग्रीमेंट (Visiting Forces Agreement – VFA) कहते है. इस समझौते का सार तत्त्व यह है कि अमेरिकी सरकार फिलीपींस में तैनात अपने सैन्यकर्मियों के ऊपर न्यायाधिकार रखेगी और कुछ ही मामलों में उन पर स्थानीय न्यायालयों में मुकदमा चल सकता है. साथ ही इस समझौते के अनुसार, अमेरिकी सैन्यकर्मियों पर फिलीपीन्स के वीजा और पासपोर्ट नियम नहीं चलेंगे.

फ़रवरी 11, 2020 को फिलीपींस सरकार ने अमेरिका को सूचित कर दिया था कि वह इस समझौते को वापस ले लेगी. परन्तु दक्षिणी चीन सागर में चीन की विस्तारवादी नीति को देखते हुए फिलीपींस ने समझौते को वापस लेने का काम टाल दिया है.

पृष्ठभूमि

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) को निरस्त करने के विषय में फ़रवरी 11, 2020 को फिलीपींस ने अमेरिका को मनीला स्थित उसके दूतावास के माध्यम से सूचना भी औपचारिक रूप से भेज दी थी. परन्तु अब VFA को रद्द करने की कार्रवाई स्थगित कर दी गई है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि फिलीपींस द्वारा VFA को निरस्त नहीं करने का जो नया निर्णय लिया गया है वह इस बात का द्योतक है कि चीन के अन्य क्षेत्रीय पड़ोसियों, जैसे वियेतनाम और मलेशिया की भाँति फिलीपींस भी इस बात को लेकर चिंतित हो गया है कि चीन भौगोलिक दावों के मामलों में बहुत ही आक्रामक हो गया है. विदित हो कि फिलीपींस के अतिरिक्त चीन को इस क्षेत्र में वियतनाम और मलेशिया से भी जमीन को लेकर विवाद है.  

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) क्या है?

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) एक ऐसा सैनिक समझौता होता है जिसके अनुसार समझौता करने वाले देश एक-दूसरे देश में सैनिक भेज सकते हैं.

अमेरिका के साथ हुए फिलीपींस के VFA समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि अमेरिका की सेना फिलीपींस में आई तो उसका वैधानिक दर्जा क्या होगा और इसके लिए नियम और मार्गनिर्देश कौन-से होंगे.

अमेरिका और फिलीपींस में 1951 में एक पारस्परिक रक्षा संधि तथा 2014 में रक्षा सहयोग समझौता हो चुका है. VFA इन दोनों संधि/समझौते की पुष्टि करता है. 1999 में फिलीपींस सेनेट ने VFA को मान्यता दी दी थी.

विजिटिंग फोर्सेज एग्रीमेंट (VFA) निरस्त होने का अमेरिका पर क्या प्रभाव होगा?

VFA रद्द होने से अमेरिका की सेना का फिलीपींस में कोई कार्रवाई करना अवैधानिक हो जाएगा. अतः अमेरिका की सेना किसी रक्षा समझौते के तहत फिलीपींस में कुछ नहीं कर पाएगी.

फिलीपींस के लिए निहितार्थ

फिलीपींस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिका से उसके गठबंधन और VFA का बड़ा महत्त्व है. एक और फिलीपींस के निवासी अमेरिका पर अत्यधिक विश्वास करते हैं, वहीं दूसरी ओर दक्षिणी चीन सागर में चीन की गतिविधियों से आशंकित रहते हैं. चीन के द्वारा किये विदेशी निवेश को फिलीपींस की जनता पसंद नहीं करती है, इसलिए अमेरिका और फिलीपींस का सैन्य गठजोड़ तथा VFA चीनी खतरों के विरुद्ध एक बीमा के जैसा काम करेगा.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

दक्षिणी-चीन सागर में खनिज तेल का बहुत बड़ा भंडार है ऐसा शोधकर्ताओं का मानना है. वियतनाम इस सागर में खनिज तेल निकालने की गतिविधियाँ चला रहा है जिसमें भारत की तेल कम्पनियाँ भी सहायता कर रही हैं. चीन को यह अखर रहा है और वह चाहता है कि यहाँ के खनिज तेल के भंडार पर उसका आधिपत्य हो जाए. इसके लिए वह इस क्षेत्र पर अपना दावा करता है. चीन की विस्तारवादी नीति से दक्षिणी चीन सागर के निकटस्थ देशों में खलबली मची हुई है. इन देशों में फिलीपींस भी एक देश है. वह अमेरिका के साथ एक सैन्य गठबंधन किये हुए है. इस गठबंधन के तहत अमेरिकी सैनिकों का वहां आना-जाना है. VFA वह प्रलेख है यह निर्धारित करता है कि अमेरिकी सैनिक जब फिलीपींस में तैनात होंगे तो उनपर कहाँ का कानून चलेगा जैसा कि ऊपर बताया गया है.

फिलीपींस पिछले कुछ दिनों से अमेरिका से दूरी बना रहा था और इसलिए उसने VFA को समाप्त का  निर्णय भी लिया था परन्तु चीन के खतरे को देखते हुए उसने अपना विचार बदल दिया है और VFA को निरस्त करने का अपना निर्णय टाल दिया है.

भारत इस क्षेत्र की गतिविधियों से अछूता नहीं रहेगा. एक तो उसकी तेल कम्पनियाँ अनुसंधान का काम कर रही हैं जिस पर चीन रोड़े अटकाता रहा है. दूसरा, यदि उस क्षेत्र में चीन का वर्चस्व हो जाता है तो उसका सीधा प्रभाव भारत पर भी पड़ेगा. सर्वविदित है कि अमेरिका चीन को भारत की सहायता से घेरने की नीति अपनाए हुए है. इस नीति की सफलता बहुत कुछ दक्षिणी चीन सागर पर चीन के क़दमों को रोकने पर निर्भर है.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

मेकांग नदी : यह नदी दक्षिण-पूर्वी एशिया की सबसे बड़ी नदी है. यह कुल छह देशों से होकर गुजरती है. यह तिब्बत के पठार से अवतरित होते हुए चीन, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कम्बोडिया और वियतनाम से होकर बहती हुई दक्षिण चीन सागर में गिरती है. इसी नदी को दक्षिण-पूर्व एशिया की डेन्यूब एवं गंगा कहा जाता है.

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