लॉर्ड लिटन (1876-80 ई०) की आंतरिक नीतियाँ

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अप्रैल, 1876 ई० में लॉर्ड नॉर्थव्रुक के स्थान पर लॉर्ड लिटन को भारत के गवर्नर-जनरल के पद पर नियुक्त किया गया. उस समय लॉर्ड लिटन के समक्ष दो मुख्य कठिनाइयाँ थीं और उन्हीं के कारण भारत में उसका शासन सफल नहीं हो सका. सर्वप्रथम, गवर्नर-जनरल का पद ग्रहण करने के पहले लिटन को भारत की परिस्थितियों को समझने का अवसर … Read More

गाँधी-इरविन समझौता (5 मार्च, 1931) के बारे में जानें

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लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन  की असफलता और असहयोग आन्दोलन की व्यापकता ने सरकार के सामने यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस और गाँधी के बिना भारत की राजनीतिक समस्या का समाधान आसान नहीं है. इसलिए लॉर्ड इरविन ने मध्यस्थता द्वारा गाँधीजी से समझौते की बातचीत प्रारम्भ कर दी. गाँधीजी 26 जनवरी, 1931 को जेल से रिहा कर दिए … Read More

डॉ. अम्बेडकर की जीवनी, विचार और रचनाएँ

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आज हम डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती, 2021 (birth anniversary of Baba Saheb) के अवसर पर उनकी जीवनी, विचार और रचनाओं के बारे में जानेंगे. चलिए पढ़ते हैं – Ambedkar Biography को हिंदी में. आप चाहें तो इसका PDF भी डाउनलोड कर सकते हैं. Biography of B.R. Ambedkar दलितों के मसीहा, सामाजिक समानता के लिए संघर्षशील, समाज सुधारक एवं भारतीय … Read More

वीर सावरकर से सम्बंधित मुख्य तथ्य

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28 मई, 2019 को स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर की जयंती मनाई गई. वीर सावरकर से सम्बंधित मुख्य तथ्य सावरकर का पूरा नाम गणेश दामोदर सावरकर था. सावरकर ने 1904 में नासिक में ‘मित्रमेला’ नाम से एक संस्था आरंभ की थी जो शीघ्र ही मेजनी के ‘तरुण इटली’ की तर्ज पर एक गुप्त सभा ‘अभिनव भारत’ में परिवर्तित हो गयी. अभिनव … Read More

भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति में सहायक तत्त्व

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भारत की स्वतंत्रता एक महान ऐतिहासिक घटना है. यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में 62 वर्षों के संघर्ष का परिणाम है. अन्य देशों के स्वतंत्रता संग्राम से इसकी प्रकृति भिन्न है. यह मुख्यतः एक अहिसंक लड़ाई थी. इसने न तो प्रधानमन्त्री एटली और मजदूर दल की उदारता का परिणाम और न ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रयत्नों का परिणाम … Read More

कैबिनेट मिशन योजना – 16 May, 1946

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द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया था और इंगलैंड ने पहले आश्वासन दे रखा था कि युद्ध में विजयी होने के बाद वह भारत को स्वशासन का अधिकार दे देगा. इस युद्ध के फलस्वरूप ब्रिटिश सरकार की स्थिति स्वयं दयनीय हो गयी थी और अब भारतीय साम्राज्य पर नियंत्रण रखना सरल नहीं रह गया था. बार-बार पुलिस, सेना, कर्मचारी और श्रमिकों … Read More

भारत छोड़ो आन्दोलन – Quit India Movement in Hindi

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भारत छोड़ो आन्दोलन – भूमिका भारत के इतिहास में 1942 की अगस्त क्रान्ति (August Revolution) एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थान रखती है. इस क्रांति का नारा था “अंग्रेजों भारत छोड़ो (Quit India)“ और सचमुच ही एक क्षण तो ऐसा लगने लगा कि अब अंग्रेजों को भारत से जाना ही पड़ेगा. द्वितीय विश्वयुद्ध (Second Word War) में जगह-जगह मित्रराष्ट्रों की पराजय से … Read More

क्रिप्स योजना – Cripps Mission, 30 March 1942 in Hindi

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द्वितीय विश्वयुद्ध के प्रथम दो वर्ष ब्रिटिश साम्राज्य के लिए बहुत संकटपूर्ण थे. जर्मनी की निरंतर सफलता और इंग्लैंड पर आक्रमण की आशंका से इंग्लैंड अपनी रक्षा के लिए खुद प्रयत्नशील था. जापानी आक्रमण से भारतीय साम्राज्य पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे थे. इस प्रकार युद्ध की दोहरी मार से ब्रिटिश साम्राज्य की शांति और सुरक्षा खतरे में … Read More

[Quiz] अगस्त प्रस्ताव: भारत छोड़ो आन्दोलन Questions Answers

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अगस्त प्रस्ताव इस समय तक युद्ध में जर्मनी की तेजी से विजय हो रही थी. डेनमार्क, नार्वे, हालैंड, फ़्रांस आदि उसके अधिकार में आ गये थे. फ्रांस में अंग्रेजी सेना को मुँह की खानी पड़ी थी और स्वयं ब्रिटेन पर खतरे के बादल मँडरा रहे थे. युद्ध के कारण ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई थी. ऐसी स्थिति … Read More

द्वैध शासन से आप क्या समझते हैं? Diarchy in Hindi

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Subhas_Chandra_Bose

1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम द्वारा प्रांतीय सरकार को मजबूत बनाया गया और द्वैध शासन (diarchy) की स्थापना की गई. 1919 के पहले प्रांतीय सरकारों पर केंद्र सरकार का पूर्ण नियंत्रण रहता था. लेकिन अब इस स्थिति में परिवर्तन लाकर प्रांतीय सरकारों को उत्तरदायी बनाने का प्रयास किया गया. इस द्वैध शासन का एकमात्र उद्देश्य था – भारतीयों को पूर्ण … Read More